समरंगना सूत्रधारा का एक अंश:
काष्ठं कृष्णश्च लोहं च जलजे पार्थिवं भवेत् |
अन्यदुब्लास्तदन्यास्तु तिर्यग् ऊर्ध्वमदस्तदा || ३३ ||
वीजं स्वकीं भवति यंत्रेषु जलजन्मसु |
तपद्यं पूर्वक दुखं वनिजं जलजे भवेत् || ३४ ||
शेल्फश्च दत्तश्च पूरिताः प्रतिदानोदितः |
मरुद् वजत्वमायाति यंत्रेषु जल जन्मसु || ३५५ ||
अर्थ: इमारती लकड़ी और लोहा पृथ्वी के तत्व को दर्शाता है; अन्य तत्वों का गठन होता है, पानी जो ऊपर और नीचे की ओर गति करता है, वह पानी का तत्व बनता है; उपर्युक्त संदर्भ में गर्मी आग का तत्व है; एयरकंडिशनिंग, असेंबलिंग, ट्रांसमिशन, डिस्चार्जिंग और प्रॉपेलिंग वायु के तत्व का निर्माण करते हैं।
पनडुब्बी, उभयचर वाहन आदि जैसे यात्रा और युद्ध के लिए उपयोग किए जाने वाले उन्नत वाहन गतिशीलता के 230 श्लोक विस्तार सिद्धांतों का एक पूरा अध्याय, यह दृश्यमान या अदृश्य वस्तुओं को लक्षित करने की क्षमता, ऑपरेटरों पर लॉन्च करने का विकल्प बताता है। उल्लेखनीय विशेषताओं में निर्बाध कार्यक्षमता, तन्य शक्ति और स्थायित्व, सभी 3 - हवा, पानी और पृथ्वी में काम करने की क्षमता शामिल है। इन मशीनों को दिए गए आंदोलन हैं: आरोही; मंडरा; उतरते।
यन्त्र सर्वस्व - विमना प्रवचन में बताया गया है कि सूर्य-मंडल में एक अंतरिक्ष यान कैसे जा सकता है और इतनी तेजी से आगे बढ़ सकता है कि शोर कर सकता है जिसे जमीन से बेहोश होकर सुना जा सकता है। कई लोगों ने संदेह व्यक्त किया है कि क्या ऐसी मशीनें वास्तव में बनाई जा सकती हैं। लेकिन पक्ष में सबूत वास्तव में भारी हैं।
हमारा इतिहास नकली था लेकिन तथ्य मौजूद नहीं हो सकते क्योंकि उन्हें अनदेखा किया जाता है। नासा संस्कृत ग्रंथों को डिकोड करके प्राचीन भारतीय तकनीक की खोज कर रहा है। हम क्यों नहीं?
काष्ठं कृष्णश्च लोहं च जलजे पार्थिवं भवेत् |
अन्यदुब्लास्तदन्यास्तु तिर्यग् ऊर्ध्वमदस्तदा || ३३ ||
वीजं स्वकीं भवति यंत्रेषु जलजन्मसु |
तपद्यं पूर्वक दुखं वनिजं जलजे भवेत् || ३४ ||
शेल्फश्च दत्तश्च पूरिताः प्रतिदानोदितः |
मरुद् वजत्वमायाति यंत्रेषु जल जन्मसु || ३५५ ||
अर्थ: इमारती लकड़ी और लोहा पृथ्वी के तत्व को दर्शाता है; अन्य तत्वों का गठन होता है, पानी जो ऊपर और नीचे की ओर गति करता है, वह पानी का तत्व बनता है; उपर्युक्त संदर्भ में गर्मी आग का तत्व है; एयरकंडिशनिंग, असेंबलिंग, ट्रांसमिशन, डिस्चार्जिंग और प्रॉपेलिंग वायु के तत्व का निर्माण करते हैं।
पनडुब्बी, उभयचर वाहन आदि जैसे यात्रा और युद्ध के लिए उपयोग किए जाने वाले उन्नत वाहन गतिशीलता के 230 श्लोक विस्तार सिद्धांतों का एक पूरा अध्याय, यह दृश्यमान या अदृश्य वस्तुओं को लक्षित करने की क्षमता, ऑपरेटरों पर लॉन्च करने का विकल्प बताता है। उल्लेखनीय विशेषताओं में निर्बाध कार्यक्षमता, तन्य शक्ति और स्थायित्व, सभी 3 - हवा, पानी और पृथ्वी में काम करने की क्षमता शामिल है। इन मशीनों को दिए गए आंदोलन हैं: आरोही; मंडरा; उतरते।
यन्त्र सर्वस्व - विमना प्रवचन में बताया गया है कि सूर्य-मंडल में एक अंतरिक्ष यान कैसे जा सकता है और इतनी तेजी से आगे बढ़ सकता है कि शोर कर सकता है जिसे जमीन से बेहोश होकर सुना जा सकता है। कई लोगों ने संदेह व्यक्त किया है कि क्या ऐसी मशीनें वास्तव में बनाई जा सकती हैं। लेकिन पक्ष में सबूत वास्तव में भारी हैं।
हमारा इतिहास नकली था लेकिन तथ्य मौजूद नहीं हो सकते क्योंकि उन्हें अनदेखा किया जाता है। नासा संस्कृत ग्रंथों को डिकोड करके प्राचीन भारतीय तकनीक की खोज कर रहा है। हम क्यों नहीं?
यज्ञ अग्नि प्रागट्य के लिए अरणि मंथन की वेद कालीन पद्धत्ति 👆
कैसे मान लें कि #सात_अजूबे ही बेमिसाल हैं
हमारे यहाँ तो #महा_अजूबे होते हैं और वो भी दो चार या सात नहीं हजारों
क्या कोई भी #शिल्पकार इस सदी में इस तरह का निर्माण कर सकता है जो कि सबसे कठोर पत्थरों में से एक ग्रेनाइट पर किया गया है ।
ये 1800 साल से अधिक पुराना जम्बुकेश्वर मंदिर है जो भगवान शिव को समर्पित है।
(जम्बुकेश्वर मंदिर, तमिलनाडु)
हमारे यहाँ तो #महा_अजूबे होते हैं और वो भी दो चार या सात नहीं हजारों
क्या कोई भी #शिल्पकार इस सदी में इस तरह का निर्माण कर सकता है जो कि सबसे कठोर पत्थरों में से एक ग्रेनाइट पर किया गया है ।
ये 1800 साल से अधिक पुराना जम्बुकेश्वर मंदिर है जो भगवान शिव को समर्पित है।
(जम्बुकेश्वर मंदिर, तमिलनाडु)
"केरल निवासी एक देशभक्त कारीगर ने एक ही पेड़ की लकड़ी के एक ही टुकड़े से भारतमाता की अद्भुत प्रतिमा बनाई है.!"
*प्राचीन चंपा नगरी।( कांग प्रांत वियतनाम में स्थित)*
*भद्रेश्वर स्वामी( महादेव) भगवान को समर्पित ये मंदिर धर्मा महाराज ने ४ और ५ शताब्दी में बनाया था।*
*धर्मा महाराज श्री भद्रवर्मन्न*
*Image👇🏻👆🏻*
*भद्रेश्वर स्वामी( महादेव) भगवान को समर्पित ये मंदिर धर्मा महाराज ने ४ और ५ शताब्दी में बनाया था।*
*धर्मा महाराज श्री भद्रवर्मन्न*
*Image👇🏻👆🏻*
कोई भी आधुनिक इंजीनियरिंग हमारे प्राचीन वास्तुकला का मुकाबला नहीं कर सकती ।
इस प्रतिमा के जांघ को देखिए । आप मांसपेशियों को छेदने और बाहर आने वाले खंजर को स्पष्ट देख सकते हैं! पूर्णतः प्राकृतिक दृश्य की तरह दिखने वाली ऐसी नक्काशियाँ केवल भारत में ही पायी जाती हैं ।
(श्रीरंगम मंदिर, तमिलनाडु)
इस प्रतिमा के जांघ को देखिए । आप मांसपेशियों को छेदने और बाहर आने वाले खंजर को स्पष्ट देख सकते हैं! पूर्णतः प्राकृतिक दृश्य की तरह दिखने वाली ऐसी नक्काशियाँ केवल भारत में ही पायी जाती हैं ।
(श्रीरंगम मंदिर, तमिलनाडु)
*🕉️🐚🔱⛳जब दुनियाँ पत्थरों को घिसकर आग जलाना सीख रही थी तब हमारे पूर्वज पहाड़ो को तोड़कर महादेव को अपनी अदम्य भक्ति का सबूत दे रहे थे ।*
*(शिव मंदिर, थिरुमायम फोर्ट, तमिलनाडु)*⬇️
*(शिव मंदिर, थिरुमायम फोर्ट, तमिलनाडु)*⬇️
#नागकुआँ_मन्दिर_बनारस
वाराणसी के इस पोखरे (तालाब) के अन्दर एक कुआँ है और उस कुएँ के अन्दर है बहुत ही प्राचीन शिवलिंग ।
साल में बस नागपंचमी के दिन ही यहा पर शिवलिंग के दर्शन मिलते हैं।
शिव की इस नगरी से जाता है नाग लोक का रास्ता, तस्वीर देखकर रह जायेंगे दंग...
वाराणसी शिव की इस नगरी से ही नागलोक जाने का रास्ता है। नागकुंड में एक कुआं छिपा हुआ है जहां से ही नागलोक जाने का रास्ता है। नागपंचमी पर यहां दर्शन करने से कालसर्प योग से मुक्ति मिलती है। अपने तरह के अनोखे इस मंदिर में बुधवार को सुबह से ही दर्शन करने वालों की लाइन लगी है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिव की नगरी काशी से ही नागलोक जाने का रास्ता है। बनारस के जैतपुरा स्थित नागकुंड की प्राचीनता किसी से छिपी नहीं है। नागकुंड के अंदर ही एक कुआं है जहां से नागलोक जाने का रास्ता है। कुआं के अंदर प्राचीन शिवलिंग भी स्थापित है जो साल भर पानी में डूबा रहता है और नागपंचमी के पहले कुंड का पानी निकाल कर शिवलिंग का श्रृंगार किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं की माने तो यहां पर आज भी नाग निवास करते हैं। नागकुंड स्थित कुएं का वर्णन धर्म शास्त्र में भी किया गया है।
कालसर्प योग से मुक्ति के लिए बेहद खास है नागकुंड, महर्षि पतंजलि के तप से हुआ था निर्माण
देश में तीन ही ऐसे कुंड हैं जहां पर दर्शन करने से कालसर्प योग से मुक्ति मिलती है। जैतपुरा का कुंड ही मुख्य नागकुंड है। बताया जाता है कि महर्षि पतंजलि ने अपने तप से इस कुंड का निर्माण कराया था। महर्षि पतंजलि द्वारा स्थापित एक शिवलिंग भी है। नागपंचमी के पहले कुंड का जल निकाल कर सफाई की जाती है फिर शिवलिंग की पूजा की जाती है इसके बाद नागकुंड फिर से पानी से भर जाता है। इसी नागकुंड से होकर नागलोक जाने का रस्ता भी है।
सुबह से ही दर्शन करने वालों की लगी है कतार
नागकुंड में दर्शन करने वालों की सुबह से ही कतार लगी हुई है। यहां पर दूर-दराज से लोग दर्शन करने आते हैं। नागकुंड का दर्शन करने से ही कालसर्प योग से मुक्ति मिलती है इसके अतिरिक्त जीवन में आने वाली सारी बाधाएं खत्म हो जाती है। बनारस में नागकुंड का विशेष स्थान है जिस नगरी में स्वयं महादेव विराजमन रहते हैं वहां का नागकुंड अनोखा फल देने वाला होता है।
वाराणसी के इस पोखरे (तालाब) के अन्दर एक कुआँ है और उस कुएँ के अन्दर है बहुत ही प्राचीन शिवलिंग ।
साल में बस नागपंचमी के दिन ही यहा पर शिवलिंग के दर्शन मिलते हैं।
शिव की इस नगरी से जाता है नाग लोक का रास्ता, तस्वीर देखकर रह जायेंगे दंग...
वाराणसी शिव की इस नगरी से ही नागलोक जाने का रास्ता है। नागकुंड में एक कुआं छिपा हुआ है जहां से ही नागलोक जाने का रास्ता है। नागपंचमी पर यहां दर्शन करने से कालसर्प योग से मुक्ति मिलती है। अपने तरह के अनोखे इस मंदिर में बुधवार को सुबह से ही दर्शन करने वालों की लाइन लगी है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिव की नगरी काशी से ही नागलोक जाने का रास्ता है। बनारस के जैतपुरा स्थित नागकुंड की प्राचीनता किसी से छिपी नहीं है। नागकुंड के अंदर ही एक कुआं है जहां से नागलोक जाने का रास्ता है। कुआं के अंदर प्राचीन शिवलिंग भी स्थापित है जो साल भर पानी में डूबा रहता है और नागपंचमी के पहले कुंड का पानी निकाल कर शिवलिंग का श्रृंगार किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं की माने तो यहां पर आज भी नाग निवास करते हैं। नागकुंड स्थित कुएं का वर्णन धर्म शास्त्र में भी किया गया है।
कालसर्प योग से मुक्ति के लिए बेहद खास है नागकुंड, महर्षि पतंजलि के तप से हुआ था निर्माण
देश में तीन ही ऐसे कुंड हैं जहां पर दर्शन करने से कालसर्प योग से मुक्ति मिलती है। जैतपुरा का कुंड ही मुख्य नागकुंड है। बताया जाता है कि महर्षि पतंजलि ने अपने तप से इस कुंड का निर्माण कराया था। महर्षि पतंजलि द्वारा स्थापित एक शिवलिंग भी है। नागपंचमी के पहले कुंड का जल निकाल कर सफाई की जाती है फिर शिवलिंग की पूजा की जाती है इसके बाद नागकुंड फिर से पानी से भर जाता है। इसी नागकुंड से होकर नागलोक जाने का रस्ता भी है।
सुबह से ही दर्शन करने वालों की लगी है कतार
नागकुंड में दर्शन करने वालों की सुबह से ही कतार लगी हुई है। यहां पर दूर-दराज से लोग दर्शन करने आते हैं। नागकुंड का दर्शन करने से ही कालसर्प योग से मुक्ति मिलती है इसके अतिरिक्त जीवन में आने वाली सारी बाधाएं खत्म हो जाती है। बनारस में नागकुंड का विशेष स्थान है जिस नगरी में स्वयं महादेव विराजमन रहते हैं वहां का नागकुंड अनोखा फल देने वाला होता है।