28450 वर्ष पुरानी भगवान विष्णु के कल्पविग्रह मूर्ति के पीछे का रहस्य.......
यह बात सन 1959 की है जब चीन ने तिब्बत पर आक्रमण कर दिया था। उस समय वहां कई बौद्ध भिक्षुओं को पकड़कर जेल में डाल दिया गया था।
परंतु वहां के एक बौद्ध हाम्पा साधु ने, जो कि हम्पा रक्षक साधु होते हैं, उन्होंने कुछ गुप्त चारों के सहयोग से एक छोटी सी भगवान विष्णु जी की मूर्ति को अमेरिका के एक गुप्तचर संस्था में भिजवा दिया था।
मूर्ति के बारे में बात करें तो इसकी लंबाई 5.3 सेंटीमीटर और चौड़ाई 4.7 सेंटीमीटर है।
इस मूर्ति का नाम कल्प विग्रह है या फिर यह कहे कि इसका नामकरण कल्प विग्रह नाम से किया गया है।
सीआईए ने जब इस मूर्ति को कार्बन डेटिंग हेतु कैलिफोर्निया विकिरण प्रयोगशाला में भेजा, तब वहां पर इन्हें जो बात पता चली उससे सभी अवाक रह गए।
इस मूर्ति की आयु 28450 वर्ष पुरानी है। ऐसा माना जाता है कि कितने वर्ष पहले न तो कोई भाषा थी, ना तो कोई तकनीक थी, ना ही किसी को धातु का विशेष ज्ञान था, तो यह कैसे संभव है कि किसी ने कांसे की श्री मूर्ति बनाई होगी?
इस मूर्ति के भीतर कुछ धातुओं को ऐसे सटीक मात्रा में मिलाया गया है, जिसके कारण यदि आप ताम्र जल पात्र में कुछ देर तक इसे रख दें तो जल भी अवशोषित हो जाता है और आपको आयुष देता है।
यह बात सन 1959 की है जब चीन ने तिब्बत पर आक्रमण कर दिया था। उस समय वहां कई बौद्ध भिक्षुओं को पकड़कर जेल में डाल दिया गया था।
परंतु वहां के एक बौद्ध हाम्पा साधु ने, जो कि हम्पा रक्षक साधु होते हैं, उन्होंने कुछ गुप्त चारों के सहयोग से एक छोटी सी भगवान विष्णु जी की मूर्ति को अमेरिका के एक गुप्तचर संस्था में भिजवा दिया था।
मूर्ति के बारे में बात करें तो इसकी लंबाई 5.3 सेंटीमीटर और चौड़ाई 4.7 सेंटीमीटर है।
इस मूर्ति का नाम कल्प विग्रह है या फिर यह कहे कि इसका नामकरण कल्प विग्रह नाम से किया गया है।
सीआईए ने जब इस मूर्ति को कार्बन डेटिंग हेतु कैलिफोर्निया विकिरण प्रयोगशाला में भेजा, तब वहां पर इन्हें जो बात पता चली उससे सभी अवाक रह गए।
इस मूर्ति की आयु 28450 वर्ष पुरानी है। ऐसा माना जाता है कि कितने वर्ष पहले न तो कोई भाषा थी, ना तो कोई तकनीक थी, ना ही किसी को धातु का विशेष ज्ञान था, तो यह कैसे संभव है कि किसी ने कांसे की श्री मूर्ति बनाई होगी?
इस मूर्ति के भीतर कुछ धातुओं को ऐसे सटीक मात्रा में मिलाया गया है, जिसके कारण यदि आप ताम्र जल पात्र में कुछ देर तक इसे रख दें तो जल भी अवशोषित हो जाता है और आपको आयुष देता है।
🚩
*पूरे विश्व की सबसे उत्तम काल गणना हमारे महापुरुषों ऋषीयों के पास थी इससे उत्तम समय की गणना कोई नही कर सकता ओर science ने भी स्वीकार किया है पृथ्वी की आयु 4 अरब वर्ष है ओर 2 अरब वर्ष बीत गए मतलब हमारे आर्य पूर्वज बहुत ही पढे लिखे थे । सच में हम विश्व गुरु थे स्वयं को पहचानो भारतीय संस्कृति पर गर्व करो।*
*🚩जयरामजी की🚩*
*पूरे विश्व की सबसे उत्तम काल गणना हमारे महापुरुषों ऋषीयों के पास थी इससे उत्तम समय की गणना कोई नही कर सकता ओर science ने भी स्वीकार किया है पृथ्वी की आयु 4 अरब वर्ष है ओर 2 अरब वर्ष बीत गए मतलब हमारे आर्य पूर्वज बहुत ही पढे लिखे थे । सच में हम विश्व गुरु थे स्वयं को पहचानो भारतीय संस्कृति पर गर्व करो।*
*🚩जयरामजी की🚩*
जब दुनियाँ पत्थरों को घिसकर आग जलाना सीख रही थी तब हमारे पूर्वज पहाड़ो को तोड़कर महादेव को अपनी अदम्य भक्ति का सबूत दे रहे थे ।
(शिव मंदिर, थिरुमायम फोर्ट, तमिलनाडु)
(शिव मंदिर, थिरुमायम फोर्ट, तमिलनाडु)