👆वह पवित्र स्थान जहाँ प्रभु राम पहली बार हनुमान जी से मिले थे ..😊
(ऋष्यमुख पर्वत, किष्किंधा)
(ऋष्यमुख पर्वत, किष्किंधा)
भगवान राम की चार भुजाओं वाली शायद एकमात्र प्रतिमा जो रानी की वाव,पाटन, गुजरात मे दशावतार दीर्घा में लगी है।सैकड़ों वर्षों तक दबी रहने के बाद वर्ष 1982 से 1986 के मध्य उत्खनन में यथास्थिति में लगी मिली।
अजमेर,राजस्थान..
वर्ष 1895 मे 1000 kg से अधिक सोने का उपयोग कर "स्वर्णनगरी अयोध्या" का नक्काशी चित्रण पूर्व स्थित सिद्धकूट चैत्यालय(लाल मंदिर) मे किया गया..
"अयोध्या" प्रभु श्री राम के पूर्वजों, जैनो के प्रथम तीर्थंकर ऋषभनाथ सहित पाँच तीर्थंकरो की जन्मभूमि है..
वर्ष 1960 तक अजमेर शहर को सिर्फ इस स्वर्ण मंदिर की वज़ह से दुनिया भर मे जाना जाता था परन्तु नेहरू की पुस्तक "भारत एक खोज" मे इतिहास के साथ जिस तरह से छेड-छाड हुई उसके बाद से कई आलीशान मंदिरो की तरह इस मंदिर कि लोकप्रियता भी कम हो गई आज अब लोग अजमेर को सिर्फ एक दरगाह के लिए ही जानते है..😥😥
वर्ष 1895 मे 1000 kg से अधिक सोने का उपयोग कर "स्वर्णनगरी अयोध्या" का नक्काशी चित्रण पूर्व स्थित सिद्धकूट चैत्यालय(लाल मंदिर) मे किया गया..
"अयोध्या" प्रभु श्री राम के पूर्वजों, जैनो के प्रथम तीर्थंकर ऋषभनाथ सहित पाँच तीर्थंकरो की जन्मभूमि है..
वर्ष 1960 तक अजमेर शहर को सिर्फ इस स्वर्ण मंदिर की वज़ह से दुनिया भर मे जाना जाता था परन्तु नेहरू की पुस्तक "भारत एक खोज" मे इतिहास के साथ जिस तरह से छेड-छाड हुई उसके बाद से कई आलीशान मंदिरो की तरह इस मंदिर कि लोकप्रियता भी कम हो गई आज अब लोग अजमेर को सिर्फ एक दरगाह के लिए ही जानते है..😥😥