Forwarded from Rochak fact india 🇮🇳
कालिका माता मंदिर राजस्थान
में 14 वीं शताब्दी का है। इसमें कहा गया है कि जिस दंपति को पद्मिनी पैलेस में रखा गया है, वह मूल रूप से भगवान का था जो यहां 8 वीं शताब्दी के दौरान बनाया गया था। यह अब नष्ट हो गया है, यह वास्तु रत्न है जो पृथ्वी काल से संबंधित है।
Join @rochakbate
में 14 वीं शताब्दी का है। इसमें कहा गया है कि जिस दंपति को पद्मिनी पैलेस में रखा गया है, वह मूल रूप से भगवान का था जो यहां 8 वीं शताब्दी के दौरान बनाया गया था। यह अब नष्ट हो गया है, यह वास्तु रत्न है जो पृथ्वी काल से संबंधित है।
Join @rochakbate
चित्र में आप #अरबीय मक्का के #इस्लाम से पूर्व के पूज्य देवीदेवताओं की मूर्तियाँ देख रहे हैं, आपको क्या आभास होता है?
अरब में इस्लाम से पूर्व के कुछ ऐसे साक्ष्य प्राप्य हैं जिससे पूर्णतया प्रमाण दिया जा सकता है कि इस्लाम से पूर्व वह राष्ट्र सनातन धार्मिक था। ऐसा ही एक प्रमाण है वहाँ का हूबल नामक देवता जिसके माथे पर चंद्रमा, हाथ पर त्रिशूल और सिर से एक जलधारा निकलती अनेक भित्तिचित्रों में प्राप्य है। ६२३ ईसवीं के युद्ध के बाद सब अस्तव्यस्त हो गए और ६३० ईसवीं में मुहम्मद के मक्का आने के बाद उसे परमात्मा को निराकार सिद्ध करना था, अतः उसने इस मत को समाप्त कर दिया। इसी प्रकार अल-लात, अल-उज़ा और मनात, ये तीन देवियाँ है जिसकी मूर्तियाँ ६३० ईसवीं के बाद कुछ ध्वस्तप्राय हो गईं हैं। इन देवियों की मूर्तियों में मध्यस्थ अल-लात सिंहासीना हैं। जैसे माता पार्वती हों। बगल की देवियों के चित्र में उनके पोशाकवर्ण से वे सरस्वती, लक्ष्मी सी प्रतीत होतीं हैं। वरदहस्त भी है। आपको ज्ञात ही होगा कि अब्राहम जैसे शब्द ब्रह्म से ही उत्पन्न हैं। ये सब वहाँ पूर्व के सनातनावर्त का प्रत्यक्ष प्रमाण है। ऐसे अनेक प्रमाण सुमेरिया, माया, मिश्र आदि में प्राप्य हैं जो पूर्व के सनातन धर्म की विश्वव्यापकता को सिद्ध करते हैं।
यदि 786 में ज़रा भी शर्म होगी
तो यह पोस्ट पढ़ने के बाद सनातन धर्म अपना लोगे
क्योंकि मूर्ति पूजा वेदों में है
और क़ुरान की तरह वेद man made नहीं बल्कि ईश्वर से प्रकट हुए है।
जय श्री राम
अरब में इस्लाम से पूर्व के कुछ ऐसे साक्ष्य प्राप्य हैं जिससे पूर्णतया प्रमाण दिया जा सकता है कि इस्लाम से पूर्व वह राष्ट्र सनातन धार्मिक था। ऐसा ही एक प्रमाण है वहाँ का हूबल नामक देवता जिसके माथे पर चंद्रमा, हाथ पर त्रिशूल और सिर से एक जलधारा निकलती अनेक भित्तिचित्रों में प्राप्य है। ६२३ ईसवीं के युद्ध के बाद सब अस्तव्यस्त हो गए और ६३० ईसवीं में मुहम्मद के मक्का आने के बाद उसे परमात्मा को निराकार सिद्ध करना था, अतः उसने इस मत को समाप्त कर दिया। इसी प्रकार अल-लात, अल-उज़ा और मनात, ये तीन देवियाँ है जिसकी मूर्तियाँ ६३० ईसवीं के बाद कुछ ध्वस्तप्राय हो गईं हैं। इन देवियों की मूर्तियों में मध्यस्थ अल-लात सिंहासीना हैं। जैसे माता पार्वती हों। बगल की देवियों के चित्र में उनके पोशाकवर्ण से वे सरस्वती, लक्ष्मी सी प्रतीत होतीं हैं। वरदहस्त भी है। आपको ज्ञात ही होगा कि अब्राहम जैसे शब्द ब्रह्म से ही उत्पन्न हैं। ये सब वहाँ पूर्व के सनातनावर्त का प्रत्यक्ष प्रमाण है। ऐसे अनेक प्रमाण सुमेरिया, माया, मिश्र आदि में प्राप्य हैं जो पूर्व के सनातन धर्म की विश्वव्यापकता को सिद्ध करते हैं।
यदि 786 में ज़रा भी शर्म होगी
तो यह पोस्ट पढ़ने के बाद सनातन धर्म अपना लोगे
क्योंकि मूर्ति पूजा वेदों में है
और क़ुरान की तरह वेद man made नहीं बल्कि ईश्वर से प्रकट हुए है।
जय श्री राम
*गरुड़ विष्णु केचना, बाली (इंडोनेशिया)*
*🔶भगवान विष्णु की सबसे ऊंची मूर्ति भारत में नहीं बल्कि इंडोनेशिया में उपस्थित है। हिंदू धर्म में भगवान विष्णु को धरती का पालनहार माना जाता है। भारत में विभिन्न हिस्सों में भगवान विष्णु को अलग-अलग नामों से जाना जाता है और उनकी पूजा होती है। देश भर के मंदिरों में भगवान विष्णु की मूर्तियां भी उपस्थित हैं।*
*🔶 अब बात भगवान विष्णु की सबसे ऊंची प्रतिमा की, तो यह मूर्ति इंडोनेशिया के सबसे फेमस टूरिस्ट डेस्टिनेशन्स में से एक बाली द्वीप पर उपस्थित है। बाली द्वीप के गरुड़ विष्णु केचना कल्चरल पार्क में मौजूद यह मूर्ति लगभग 400 फुट ऊंची और 217 फुट चौड़ी है। तांबे और पीतल से निर्मित इस मूर्ति को बनाने में लगभग 28 साल का समय लगा है और साल 2018 में बनकर तैयार हुई है। इंडोनेशिया के फेमस मूर्तिकार न्यूमन नुआर्ता ने इस मूर्ति को बनाया है।*
*🔶 90 फीसदी मुस्लिम आबादी वाले इंडोनेशिया पर रामायण की गहरी छाप है। इंडोनेशिया में लोग बेहतर इंसान बनने के लिए रामायण पढ़ते हैं। साथ ही रामायण यहां की स्कूली शिक्षा का अभिन्न हिस्सा है।*
*🔶भगवान विष्णु की सबसे ऊंची मूर्ति भारत में नहीं बल्कि इंडोनेशिया में उपस्थित है। हिंदू धर्म में भगवान विष्णु को धरती का पालनहार माना जाता है। भारत में विभिन्न हिस्सों में भगवान विष्णु को अलग-अलग नामों से जाना जाता है और उनकी पूजा होती है। देश भर के मंदिरों में भगवान विष्णु की मूर्तियां भी उपस्थित हैं।*
*🔶 अब बात भगवान विष्णु की सबसे ऊंची प्रतिमा की, तो यह मूर्ति इंडोनेशिया के सबसे फेमस टूरिस्ट डेस्टिनेशन्स में से एक बाली द्वीप पर उपस्थित है। बाली द्वीप के गरुड़ विष्णु केचना कल्चरल पार्क में मौजूद यह मूर्ति लगभग 400 फुट ऊंची और 217 फुट चौड़ी है। तांबे और पीतल से निर्मित इस मूर्ति को बनाने में लगभग 28 साल का समय लगा है और साल 2018 में बनकर तैयार हुई है। इंडोनेशिया के फेमस मूर्तिकार न्यूमन नुआर्ता ने इस मूर्ति को बनाया है।*
*🔶 90 फीसदी मुस्लिम आबादी वाले इंडोनेशिया पर रामायण की गहरी छाप है। इंडोनेशिया में लोग बेहतर इंसान बनने के लिए रामायण पढ़ते हैं। साथ ही रामायण यहां की स्कूली शिक्षा का अभिन्न हिस्सा है।*
1500 साल पुराना 'एकमुखी शिवलिंग' और "शिवालय भूमरामहादेव" मध्यप्रदेश से सतना शहर से लगभग 30-35 किलोमीटर दूर परस्मानिया की पहाड़ी में है। इसे देखकर 1500 वर्ष पुराने भारत की अद्वितीय कलात्मक, संस्कृतिक का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। आइयें जानें इसके बारें में:-
1) इसके प्रवेश द्वार पर गंगा-यमुना की आकृतियाँ बनी हुई हैं।
2) इसके द्वार की चौखट भी अलंगरणों से सजायी गयी हैं।
3) मंदिर की छत चपटी है।
4) गर्भगृह के भीतर एकमुखी शिव-लिंग स्थापित किया गया है।
5) एकमुखी शिव लिंग के ठीक सामने स्तंभयुक्त मंडप तथा चारों ओर प्रदक्षिणा-पथ मिलता है।
गर्व है मुझें अपनी भारतीय वास्तुकला पर।
1) इसके प्रवेश द्वार पर गंगा-यमुना की आकृतियाँ बनी हुई हैं।
2) इसके द्वार की चौखट भी अलंगरणों से सजायी गयी हैं।
3) मंदिर की छत चपटी है।
4) गर्भगृह के भीतर एकमुखी शिव-लिंग स्थापित किया गया है।
5) एकमुखी शिव लिंग के ठीक सामने स्तंभयुक्त मंडप तथा चारों ओर प्रदक्षिणा-पथ मिलता है।
गर्व है मुझें अपनी भारतीय वास्तुकला पर।
अगर आपको लगता है कि यह भारत में है तो आपको प्राचीन सनातन के प्रसार की जानकारी नहीं है ।
काबल स्पैन नदी में लगभग 1000 शिवलिंग और हिन्दू देवताओं की मूर्तियाँ भिखरी पड़ी है, हर साल जब नदी में पानी का स्तर कम होता है तब यह मूर्तियां दिखाई पड़ती हैं, वर्ष 1969 में एक फ्रांसीसी शोधकर्ता ने इन मूर्तियों को खोजा था । इनके निर्माण काल का सही आकलन अभी तक नहीं हो सका है ।
(काबल स्पैन, कंबोडिया)
काबल स्पैन नदी में लगभग 1000 शिवलिंग और हिन्दू देवताओं की मूर्तियाँ भिखरी पड़ी है, हर साल जब नदी में पानी का स्तर कम होता है तब यह मूर्तियां दिखाई पड़ती हैं, वर्ष 1969 में एक फ्रांसीसी शोधकर्ता ने इन मूर्तियों को खोजा था । इनके निर्माण काल का सही आकलन अभी तक नहीं हो सका है ।
(काबल स्पैन, कंबोडिया)
Forwarded from सनातन संस्कृत के वीडियो
🙏🏻🌹 *जय जय श्री राधे गोविंद*🙏🏻🌹
🙏🏻🌹 *जय जय श्री राधे* 🙏🏻🌹
*वीडियो👆🏻👆🏻👇🏻👇🏻*
🕰➡️2.24
*🙏🏻💐चमत्कारी पत्थर💐🙏🏻*
🚩 *सनातन धर्म को पहचानो* 🚩
*👇🏻टेलीग्राम चैनल से जुड़े👇🏻*
https://t.me/joinchat/AAAAAFKtXqZ-TRwRqPB-Uw
*🙏🏻🌹 हरे कृष्ण 🙏🏻🌹*
🙏🏻🌹 *जय जय श्री राधे* 🙏🏻🌹
*वीडियो👆🏻👆🏻👇🏻👇🏻*
🕰➡️2.24
*🙏🏻💐चमत्कारी पत्थर💐🙏🏻*
🚩 *सनातन धर्म को पहचानो* 🚩
*👇🏻टेलीग्राम चैनल से जुड़े👇🏻*
https://t.me/joinchat/AAAAAFKtXqZ-TRwRqPB-Uw
*🙏🏻🌹 हरे कृष्ण 🙏🏻🌹*
Forwarded from सनातन संस्कृत के वीडियो
This media is not supported in your browser
VIEW IN TELEGRAM
*महर्षि सुश्रुत* हां मालूम है पहली बार नाम सुन रहे हो आप.. क्या आपको पता है ? जब संसार भोजन के लिए संघर्ष कर रहा था पढ़ाई लिखाई तो बहुत दूर की बात है, उस समय आपके भारत वर्ष में *सर्जरी* होती थी और *महर्षि सुश्रुत* द्वारा अनेकों सर्जरी के प्रकार और उससे संबंधित सैकड़ों उपकरण खोजें थें.. आज भी *अमेरिका में मेलबोर्न के बड़े मेडिकल कॉलेज में "सर्जरी के जनक" के तौर पर "महर्षि सुश्रुत" जी की प्रतिमा रखी गई है* किंतु आश्चर्य की बात यह है कि देश के किसी भी नागरिक को नहीं पता! पता छोड़िए आपको बताया ही नहीं गया है सिर्फ इस लिए यह बातें आपसे छुपाई गईं क्योंकि यह सनातन धर्म और संस्कृति से जुड़ा हुआ है।
जी हां इसे ही *secularism* कहते हैं। तथा कथित बुद्धिजीवी और सेकुलर कीड़ों नें हर वह बात आपसे छुपायी जो *हिन्दुत्व* से जुड़ा था, *सनातन संस्कृति* से जुड़ा था।
वरना आज आप जानते कि हमारे भारत में ही ऐसे ऐसे *मंदिर* हैं जिनकी सुंदरता,खूबसूरती और रहस्य के सामने *ताजमहल* भी शर्मिंदा हो जाता है, अब आप इसपर भी अचंभित हो गए होंगे! इसलिए ये *सेकूलरिस्म* का भूत अपने सिर से उतारिए, जातिवाद छोड़कर खुल कर *देशहित* और *धर्महित* में सोचिए!!
जी हां इसे ही *secularism* कहते हैं। तथा कथित बुद्धिजीवी और सेकुलर कीड़ों नें हर वह बात आपसे छुपायी जो *हिन्दुत्व* से जुड़ा था, *सनातन संस्कृति* से जुड़ा था।
वरना आज आप जानते कि हमारे भारत में ही ऐसे ऐसे *मंदिर* हैं जिनकी सुंदरता,खूबसूरती और रहस्य के सामने *ताजमहल* भी शर्मिंदा हो जाता है, अब आप इसपर भी अचंभित हो गए होंगे! इसलिए ये *सेकूलरिस्म* का भूत अपने सिर से उतारिए, जातिवाद छोड़कर खुल कर *देशहित* और *धर्महित* में सोचिए!!
श्री जगन्नाथ पुरी मंदिर, चेन्नई, तमिलनाडु, भारत 🇮🇳
यह एक हिंदू मंदिर है जो भारत के चेन्नई में दिव्य त्रिमूर्ति जगन्नाथ, बलदेव और सुभद्रा को समर्पित है। समुद्र के किनारे ईस्ट कोस्ट रोड से कन्नथुर में स्थित मंदिर जगन्नाथ मंदिर, पुरी की याद दिलाते हुए कलिंग वास्तुकला में बनाया गया है। मंदिर में शिव, गणेश, बिमला को समर्पित मंदिर हैं।
यह एक हिंदू मंदिर है जो भारत के चेन्नई में दिव्य त्रिमूर्ति जगन्नाथ, बलदेव और सुभद्रा को समर्पित है। समुद्र के किनारे ईस्ट कोस्ट रोड से कन्नथुर में स्थित मंदिर जगन्नाथ मंदिर, पुरी की याद दिलाते हुए कलिंग वास्तुकला में बनाया गया है। मंदिर में शिव, गणेश, बिमला को समर्पित मंदिर हैं।
मैं यह नहीं मानता कि इसके निर्माण के लिए केवल छेनी और हथौड़ी का इस्तेमाल किया गया होगा ।
हमारे पूर्वजों के पास निश्चित रूप से कुछ अन्य उन्नत तकनीकें थी जिसका प्रयोग किया गया होगा
रनकपुर मंदिर में बनी इस नक्काशी को देखने वाले हमारी प्राचीन शिल्पकला से मंत्रमुग्ध होने के लिए बाध्य हो जाते हैं ।
हमारे पूर्वजों के पास निश्चित रूप से कुछ अन्य उन्नत तकनीकें थी जिसका प्रयोग किया गया होगा
रनकपुर मंदिर में बनी इस नक्काशी को देखने वाले हमारी प्राचीन शिल्पकला से मंत्रमुग्ध होने के लिए बाध्य हो जाते हैं ।
अद्भुत कारीगरी
यह प्रतिमा प्राचीन मंदिर के एक स्तम्भ पर निर्मित है । 0.5 मिमी व्यास से कम पतली छड़ी को इस प्रतिमा के एक कान में प्रवेश कराने पर छड़ी का दूसरा सिरा दूसरे कान से होकर बाहर निकल जाता है,
क्या आप बता सकते हैं धोती कुर्ता पहनने वाले प्राचीन इंजीनियरों ने यहाँ किस तरह की टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया होगा ?
अपने पुरखो पर गर्व करो सनातनियो उन्होंने ही नंगी भूखी दुनिया को खाना पहनना सिखाया है ।
पर वामपंथी कोंग्रेसी गिद्दों ने इतिहास छापने में भी षड्यंत्र किया और हममें आत्म गोरव की जगह आत्मग्लानि पढ़ाया।
यह प्रतिमा प्राचीन मंदिर के एक स्तम्भ पर निर्मित है । 0.5 मिमी व्यास से कम पतली छड़ी को इस प्रतिमा के एक कान में प्रवेश कराने पर छड़ी का दूसरा सिरा दूसरे कान से होकर बाहर निकल जाता है,
क्या आप बता सकते हैं धोती कुर्ता पहनने वाले प्राचीन इंजीनियरों ने यहाँ किस तरह की टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया होगा ?
अपने पुरखो पर गर्व करो सनातनियो उन्होंने ही नंगी भूखी दुनिया को खाना पहनना सिखाया है ।
पर वामपंथी कोंग्रेसी गिद्दों ने इतिहास छापने में भी षड्यंत्र किया और हममें आत्म गोरव की जगह आत्मग्लानि पढ़ाया।