ऐतिहासिक मंदिर और उनकी कथा
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हमारी संस्कृति हमारा अभिमान

*इस चैनल मे हमारे मंदिरों की कथा के आडियो विडियो और हमारी सभ्यता से जुड़ी जगह का प्रसारण किया जाता है*

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#काशी_करवट_मंदिर

💎खराब इंजीनियरिंग के कारण पीसा का मीनार एक तरफ झुक गया इसके बाद भी इसे वर्ल्ड हेरिटेज साइट घोषित कर दिया गया। जबकि कई बार इस मीनार को बंद भी किया जा चुका है। इसका कारण साफ था कि यह कभी भी गिर सकता है।

💎इसके विपरीत मणिकर्णिका घाट काशी का यह मंदिर जिसे #काशी_करवट_मंदिर के नाम से जानते हैं, यह भी हजारों वर्ष पुराना है, और यह भी झुका हुआ है। परंतु इस पर न तो किसी का ध्यान जाता है और ना ही यहां कुछ खास भीड़ लगती है।

💎क्योंकि हमें अपने धरोहरों की जानकारी ही नहीं है, और जब तक हमें अपने धरोहरों की जानकारी नहीं होगी तब तक हम अपने संस्कृति को ऐसे ही खोते रहेंगे, और दूसरों की संस्कृति को अपनी संस्कृति से ऊंचा मानते रहेंगे।

#जय_सनातन🚩🚩🚩
अमेरिका के पर्वतीय क्षेत्र ऑरेगन की एक झील में एक रहस्य सदियों से पड़ा सो रहा था।
झील में बहता पानी उस रहस्य को दुनिया की आँखों से बचाए रखता था।
एक दिन झील सूख गई और रहस्य अपने विशालकाय रूप के साथ प्रकट हुआ।
बात उस श्रीयंत्र की हो रही है, जिसने प्रकट होकर दुनिया को दाँतों तले उंगली दबाने पर विवश कर दिया था।

1990 तक ओरेगॉन के मिकी बेसिन में स्थित ये झील पूरी तरह सूख चुकी थी।
लगभग एक किमी के क्षेत्र में फैला इसका कठोर तल साफ़-साफ़ दिखाई देने लगा था।
इस ‘लेक बेड’ के ऊपर से रोज कई विमान गुजरते थे।
एक दिन दोपहर के समय नियमित एयर नेशनल गॉर्ड पायलट बिल मिलर सूखी झील के ऊपर से उड़ान भरते हैं।
वे ये देखकर हैरान रह जाते हैं कि झील के कठोर तल पर एक ज्यामितीय आकृति उभर आई है।
ये आकृति लगभग एक किमी के क्षेत्र में फैली हुई थी।
बिल बिलर की आँखों के सामने पहली बार एक प्राचीन सत्य उद्घाटित होता है।
सम्पूर्ण ज्यामितीय ज्ञान से बनाया गया बहुत सुंदर श्रीयंत्र उनकी आँखों के सामने था।

आधा किलोमीटर के ठोस बेडरॉक में बनी हुई ज्यामितीय आकृति उन्हें हैरत में डाल देती है।
खबर आग की तरह फैलती है। खोजी पहुँचने लगते हैं। जानकारियाँ बाहर आने लगती हैं।
राष्ट्रपति जॉर्ज बुश की सरकार तुरंत हरकत में आती है।
श्रीयंत्र लेक बेड में ‘चार इंच’ खुदाई करके बनाया गया था। नदी विज्ञान को समझने वाले जानते हैं कि बेडरॉक को नाप तौल के साथ इतनी बारीकी से खोदने वाली मशीन तो आज तक नहीं बन सकी है।
हमारी वर्तमान ड्रिल मशीने कोशिश करके भी इतनी सफाई से ऐसा काम नहीं कर सकती।

आधा किमी के पथरीले बेडरॉक को नष्ट करना कोई आसान काम नहीं होता।
इसे नष्ट करने के बजाय दूसरा तरीका अपनाया गया।
इस क्षेत्र पर मिट्टी और मलबा डाला गया।
ये काम सन 2000 आते-आते कर लिया गया था।
यहाँ तक कि इसे फेक साबित करने के पुरे प्रयास किये गए। हालाँकि एक वीडियो ऐसा रहा, जिस पर अमेरिका की निगाह नहीं पड़ी।
आज वह वीडियो इस बात का पुख्ता प्रमाण बन गया है कि अमेरिका के पर्वतीय क्षेत्रों में कभी आर्यों की ऐश्वर्यशाली उपस्थिति हुआ करती थी।

ये वीडियो एनबीसी चैनल ने 1990 में बनाया था।
ऑरेगन में प्राप्त हुए अद्भुत श्रीयंत्र का एकमात्र वीडियो अब भी अस्तित्व में है।
वीडियो में एक विमान को श्रीयंत्र के ऊपर से उड़ान भरते देखा जा सकता है।
कुछ शॉट्स में खोजी श्रीयंत्र के भीतर चलते दिखाई दे रहे हैं। सबसे पहले इस जगह पहुँचे रिसर्चर डॉन न्यूमैन और एलेन डेकर वीडियो में श्रीयंत्र की अलौकिकता पर हैरान होते देखे जा सकते हैं।

अमेरिका की छाती पर बना ये विशालकाय श्रीयंत्र कई अमेरिकी वैज्ञानिकों और ‘नॉन बिलिवर्स’ को चुभ गया।
इसे फेक बताया गया।
कुछ ने इसे ‘क्रॉप सर्कल’ बनाने वालों की कारस्तानी बताया लेकिन वे ये भूल गए कि ऐसी अचूक दोषरहित ज्यामितीय रचना बेडरॉक के कठोर तल पर बनाना असम्भव है।
यदि कोई ऐसी मशीन बना ले तब भी सारे कोण परफेक्शन के साथ नहीं बनाए जा सकेंगे।

वीडियो में दोनों खोजी लेक बेड में घूमकर मुआयना करके बता रहे हैं कि श्रीयंत्र की सिमेट्री(समरूपता) बिलकुल दोषरहित है।
इसमें बनी समानांतर रेखाएं और त्रिभुज गणितीय रूप से अचूक हैं।
एक्यूरेसी इतनी है कि हर पॉइंट से दूसरे पॉइंट के बीच साढ़े ग्यारह डिग्री का अंतर है।
वे बता रहे हैं कि ऐसे काम को आज करने के लिए लाखों डॉलर फंड की आवश्यकता होगी। अति आधुनिक उपकरणों की आवश्यकता होगी लेकिन इसके बावजूद ये काम आज के आधुनिक उपकरण नहीं कर पाएंगे।

श्रीयंत्र के इस एकमात्र वीडियो को 2015 में अपलोड किया गया था।
चूँकि ये एक ब्लॉग में ‘एम्बॉइड’ किया गया था इसलिए ‘न्यूज़ फीड’ में आने से बच गया।
ये इतना गुमनाम वीडियो है कि अब तक कुल 19 हज़ार लोग ही देख सके हैं।
यही कारण है कि अब भी ये वीडियो यूट्यूब पर सुरक्षित है। भविष्य का कोई भरोसा नहीं है कि ये वीडियो फिर हमे देखने को नहीं मिले।

जब आप एक हज़ार फ़ीट की ऊँचाई से इस मनोरम आर्यन सत्य को निहारेंगे तो मन ही मन पुलकित हो उठेंगे।
आपकी आँखें जो देखेंगी, मन उस पर भरोसा नहीं करेगा। ब्रम्हाण्ड का लघु रूप एक झील के कठोर सीने पर उकेर दिया गया और वह भी ज्यामितीय दक्षता के साथ।

विडियो साभार: Oregon Sri Yantra – NBC News Story – 1990

इसे कब बनाया गया ये जानना आज असम्भव है।
झील के तल की आयु ज्ञात हो सकती है लेकिन श्रीयंत्र की नहीं।
ये काम इतनी सफाई से किया गया कि चार इंच गहराई में किसी और तत्व या सामान का बारीक सा अंश भी प्राप्त नहीं हुआ। सिर्फ होशपूर्वक खुदाई की गई और कुछ नहीं।
इस काम की तुलना पेरू में नाज़्का की रहस्य्मयी रेखाओं से की जाएगी जो विमान से उड़ान भरने पर ही दिखाई देती हैं लेकिन उन रेखाओं को टिकाए रखने के लिए किसी रसायन का इस्तेमाल किया गया था।
श्रीयंत्र में ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिलता।

आज से दो साल पहले जब मैंने इस स
्थल के सेटेलाइट चित्र प्रकाशित किये थे तो ‘नॉन बिलिवर्स’ ने मजाक बनाया था। वे मजाक बना सकते थे क्योंकि सेटेलाइट इमेजनरी में यंत्र पूरी तरह स्पष्ट न होकर टुकड़ों में दिखाई दे रहा था।
आज अविश्वासी लोग ये वीडियो देखें और आश्चर्य से भर जाए। उसके बाद इक्वेशन बैठाने में जीवन निकल जाएगा कि प्राचीन काल में कौन जीनियस बिना मशीनों के ये असंभव कार्य कर गया था।
वीडियो का लिंक कमेंट बॉक्स में है।

#Mysterious_appearance_of_Hindu_symbol_Sriyantra_in_Oregon_USA

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ओरेगन श्रीयंत्र, श्रीयंत्र, यूएस, हिंदू, हिंदू प्रतीक,

नीचे दी गई यूट्यूब लिंकवाले दो वीडियो भी आप देख शकतें हो।

https://youtu.be/dFek9TAxYFI

https://youtu.be/6hFniHGO-I0

विपुल विजय रेगे जी द्वारा
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कितनी उन्नति तकनीक रही होगी सनातनियों की ❗ हजारों साल पहले पत्थरों पर इतनी जटिल नक्काशी कैसे संभव हुई होगी पूरे विश्व मे कही इतनी उन्नति नक्काशी का प्रमाण नहीं है ❗ लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि हमारे शासकों की सनातन के प्रति उदासीनता के कारण इन महान अद्वितीय कलाकृतियों को विश्व धरोहर का स्थान नहीं दिया गया ❗ चेन्नास्वामी मंदिर, होयसला, कर्नाटक ❗
*🛕पंच रथ मंदिर, महाबलीपुरम(तमिलनाडु)*

*🔶तमिलनाडु में कई प्राचीन शहर है जिसमें से एक है महाबलीपुरम जो समुद्र तट पर स्थित है। इस शहर का इतिहास बहुत ही प्राचीन और भव्य है।*

*🔶 7वीं और 10वीं सदी के पल्लव राजाओं द्वारा बनाए गए कई मंदिर और स्थान यहां की शोभा बढ़ा रहे हैं। कांचीपुरम पर राज करने वाले पल्लवों की यह दूसरी राजधानी थी।*

*🔶 महाबलीपुरम के समुद्री तट पर पंच रथ या पंच पांडवों का रथ नामक मंदिर है। यह एक सुन्दर स्मारक परिसर है जिसका निर्माण 7वीं सदी में महेंद्र वर्मन प्रथम और बेटे नरसिंह वर्मन प्रथम ने करवाया था।*

*🔶 पंच रथ के पांच स्मारकों को पूरी तरीके से रथ के समान बनाया गया है जो सभी ग्रेनाइट पत्थर को खोद-खोद कर बनाए गए हैं। इसमें महाभारत की कहानी को दर्शाते हुए कलाकृतियां देखने को मिलती हैं। यह सभी रथ बड़े से छोटे आकार में इस प्रकार से हैं- धर्मराज रथ, भीम रथ, अर्जुन रथ, नकुल एवं सहदेव रथ और द्रौपदी रथ।*
लिंगराज के समीप राजा राजा मंदिर
भुवनेश्वर,ओड़ीसा
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क्या ये नक्काशियाँ रॉक मेल्टिंग टेक्नोलॉजी की तरफ इशारा नहीं करती ?

सोचिये ऐसे स्तंभों को निर्मित करने के लिए आज के शिल्पकारों को किन-किन मॉडर्न टूल्स की जरूरत पड़ेगी? यह मंदिर 1200 साल पुराना है यह पाँच ओर से पहाड़ियों से घिरा है, मंदिर की नक्काशियाँ को देखकर तो यहीं लगता है कि हमारी प्राचीन सभ्यता की टेक्नोलॉजी को समझने के लिए आज के तथाकथित मॉडर्न लोगों को अभी भी बहुत कुछ सीखने की जरूरत है।

(भोग नंदीश्वरा मंदिर, कर्नाटक)
भारतीयों ने सुई भी नहीं बनाई – परन्तु चक्कों पर चलने वाले मंदिर, इमारतें बना दी।

और भारतीयों ने यह सब तब किया, जब पूरा विश्व सुई बनाने में व्यस्त था।

वल्लुवर कोट्टम, चेन्नई