नंदी ! ऐसा लगता है कि पत्थर में तब्दील होने से पहले यह एक प्राणी की तरह जीवित थे ।
केवल एक पत्थर को काटकर बने नंदी की प्रतिमा को देखिए, इसकी लंबाई 8.23 मीटर और ऊंचाई 4.5 मीटर है । यह दुनियाँ के सबसे बड़े नंदी प्रतिमाओं में से एक है ।
(लेपाक्षी मंदिर, आंध्रप्रदेश)
केवल एक पत्थर को काटकर बने नंदी की प्रतिमा को देखिए, इसकी लंबाई 8.23 मीटर और ऊंचाई 4.5 मीटर है । यह दुनियाँ के सबसे बड़े नंदी प्रतिमाओं में से एक है ।
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*🛕 राजगोपालास्वामी मंदिर, मन्नारगुडी,(तमिलनाडु)*
*🔶 राजगोपाला स्वामी मंदिर, मन्नारगुडी तमिलनाडु में स्थित है। मंदिर में भगवान कृष्ण की राजगोपालास्वामी के रूप में पूजा की जाती है। मंदिर को गुरुवायूर के साथ "दक्षिणी द्वारका" भी कहा जाता है।*
*🔶मंदिर को कुलुथुंगा चोल के द्वारा बनवाया गया था और बाद में चोल वंश के अन्य राजाओं के द्वारा इसे और सजाया गया। नायक वंश के द्वारा इस मंदिर का विस्तार सबसे ज्यादा किया गया है।*
*🔶 मंदिर परिसर 23 एकड़ के क्षेत्रफल में फैला हुआ है। इस मंदिर परिसर में 24 श्राइन, 16 टॉवर द्वार, 7 आंगन, 7 हॉल और 9 टैंक स्थित है।*
*🔶 मंदिर की टंकी को हरिद्रा नाधी कहा जाता है, 1,158 फीट (353 मीटर) लंबी और 837 फीट (255 मीटर) चौड़ी (23 एकड़ (9.3 हेक्टेयर)), जो इसे भारत के सबसे बड़े टैंकों में से एक बनाती है।*
*🔶 राजगोपाला स्वामी मंदिर, मन्नारगुडी तमिलनाडु में स्थित है। मंदिर में भगवान कृष्ण की राजगोपालास्वामी के रूप में पूजा की जाती है। मंदिर को गुरुवायूर के साथ "दक्षिणी द्वारका" भी कहा जाता है।*
*🔶मंदिर को कुलुथुंगा चोल के द्वारा बनवाया गया था और बाद में चोल वंश के अन्य राजाओं के द्वारा इसे और सजाया गया। नायक वंश के द्वारा इस मंदिर का विस्तार सबसे ज्यादा किया गया है।*
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🙏🏻🌹 *जय जय श्री राधे गोविंद*🙏🏻🌹
🙏🏻🌹 *जय जय श्री राधे* 🙏🏻🌹
*वीडियो👆🏻👆🏻👇🏻👇🏻*
🕰➡️2.22
*🙏🏻💐इटावा शहर से लगभग 8 किलोमीटर दूर यमुना के किनारे बीहड़ में है ये हनुमान मंदिर ... पिलुआ वाले महावीर ...यहाँ हनुमान जी लड्डू खाते हैं। मेरे पूँछने पर पुजारी जी हँसते हुए कहते हैं " बाबा जो सुबह से खाना शुरू हुए तो रात ही बंद होते " उनकी इस बात पर आसपास खड़े सब हँसते हैं , पर ताज्जुब आपको तब होगा जब आपको पता चले कि उन्हें लड्डू खाते हुए 500 से ज्यादा साल हो गए हैं ... वीडियो में जो उनके मुखमंडल पर उफान है , ये दरअसल निरंतर चलता रहता है , हाँ लड्डू खिलाते ही ये तेज हो जाता है।
, हालांकि ऐसा कहा जाता है कि इस मंदिर प्रांगण में कई शोधकर्ता आये ,मीडिया वालों ने घंटों कैमरे टिकाकर जानने का प्रयास किया कि आखिर ये लड्डू जाते कहाँ हैं ! पर ये सवाल अभी तक सवाल ही है... और ऐसे अनसुलझे सवाल ही कभी - कभी उन शक्तियों की ओर इशारा करते हैं , जिन्हें विज्ञान भी नहीं समझ पाया ।💐🙏🏻*
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*🙏🏻🌹 हरे कृष्ण 🙏🏻🌹*
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*तुलसी की सुगंध वाला गंधेश्वर शिवलिंग .................
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खुदाई में मिला 2000 साल पुराना शिवलिंग – आती है तुलसी की सुगंध
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छत्तीसगढ़ के सिरपुर में खुदाई के दौरान द्वादश ज्योतिर्लिंगों वाले पौरुष पत्थर से बना शिवलिंग मिला है। पुरातात्विक विशेषज्ञों के अनुसार यह शिवलिंग दो हजार साल पुराना है और राज्य में मिला सबसे प्राचीन व विशाल शिवलिंग है। इस शिवलिंग को ‘गंधेश्वर शिवलिंग’ नाम दिया गया है क्योंकि इस शिवलिंग में से तुलसी के पौधे जैसी गंध आती है। यह शिवलिंग वाराणसी के काशी विश्वनाथ और उज्जैन के महाकालेश्वर शिवलिंग जैसा चिकना है। इस शिवलिंग में विष्णु सूत्र (जनेऊ) और असंख्य शिव धारियां हैं। साथ ही यहाँ पर पहली शताब्दी में सरभपुरिया राजाओं के द्वारा बनाए गए मंदिर के प्रमाण भी मिले है।
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साइट नंबर 15 में मिला था ...........................
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साइट नंबर 15 की खुदाई के दौरान मिले मंदिर के अवशेषों के बीच 4 फीट लंबा 2.5 फीट की गोलाई वाला यह शिवलिंग निकला है। बारहवीं शताब्दी में आए भूकंप और बाद में चित्रोत्पला महानदी की बाढ़ में पूरा मंदिर परिसर ढह गया था। भूकंप और बाढ़ से गंधेश्वर मंदिर भी पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया था। पर यहां मौजूद सफेद पत्थर से बना शिवलिंग सुरक्षित बच गया। कई सालो से चल रही खुदाई के दौरान यहाँ पर अब तक अनेक छोटे शिवलिंग निकल चुके है लेकिन पहली बार इतना विशाल शिवलिंग निकला है।
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सबसे प्राचीन मिलना शेष है ................
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पुरातत्व सलाहकार अरुण कुमार शर्मा ने बताया कि ब्रिटिश पुरातत्ववेत्ता बैडलर ने 1862 में लिखे संस्मरण में एक विशाल शिवमंदिर का उल्लेख किया है। लक्ष्मण मंदिर परिसर के दक्षिण में स्थित एक टीले के नीचे राज्य के संभवत: सबसे बड़े और प्राचीन शिव मंदिर की खुदाई होना बाकी है।
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ऐसे हुई समय की गणना ......................
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पुरातत्व के जानकारों के अनुसार भूकंप और बाढ़ ने सिरपुर शहर को 12वीं सदी में बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचाया था। कालांतर में नदी की रेत और मिट्टी की परतें शहर को दबाती चलीं गईं। टीलों को कई मीटर खोदकर शहर की संरचना को निकाला गया। खुदाई में मिले सिक्कों, प्रतिमाओं, ताम्रपत्र, बर्तन, शिलालेखों के आधार पर उस काल की गणना होती गई। साइट पर खुदाई की गहराई जैसे-जैसे बढ़ती है, प्राचीन काल के और सबूत मिलते जाते हैं। जमीन में जिस गहराई पर शिवलिंग मिला, उसके आधार पर इसे दो हजार साल पुराना माना गया है।
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भारत में स्थित चार सबसे ऊंचे शिवलिंग...................
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108 फीट कर्नाटक का कोटिलिंगेश्वर
108 फीट सिकंदराबाद का महाशिवलिंग
65 फीट झारखंड का हरिहर धाम मंदिर
22 फीट मध्यप्रदेश के भोजपुर में*
https://www.mymandir.com/p/feJJDb
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खुदाई में मिला 2000 साल पुराना शिवलिंग – आती है तुलसी की सुगंध
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छत्तीसगढ़ के सिरपुर में खुदाई के दौरान द्वादश ज्योतिर्लिंगों वाले पौरुष पत्थर से बना शिवलिंग मिला है। पुरातात्विक विशेषज्ञों के अनुसार यह शिवलिंग दो हजार साल पुराना है और राज्य में मिला सबसे प्राचीन व विशाल शिवलिंग है। इस शिवलिंग को ‘गंधेश्वर शिवलिंग’ नाम दिया गया है क्योंकि इस शिवलिंग में से तुलसी के पौधे जैसी गंध आती है। यह शिवलिंग वाराणसी के काशी विश्वनाथ और उज्जैन के महाकालेश्वर शिवलिंग जैसा चिकना है। इस शिवलिंग में विष्णु सूत्र (जनेऊ) और असंख्य शिव धारियां हैं। साथ ही यहाँ पर पहली शताब्दी में सरभपुरिया राजाओं के द्वारा बनाए गए मंदिर के प्रमाण भी मिले है।
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साइट नंबर 15 में मिला था ...........................
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साइट नंबर 15 की खुदाई के दौरान मिले मंदिर के अवशेषों के बीच 4 फीट लंबा 2.5 फीट की गोलाई वाला यह शिवलिंग निकला है। बारहवीं शताब्दी में आए भूकंप और बाद में चित्रोत्पला महानदी की बाढ़ में पूरा मंदिर परिसर ढह गया था। भूकंप और बाढ़ से गंधेश्वर मंदिर भी पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया था। पर यहां मौजूद सफेद पत्थर से बना शिवलिंग सुरक्षित बच गया। कई सालो से चल रही खुदाई के दौरान यहाँ पर अब तक अनेक छोटे शिवलिंग निकल चुके है लेकिन पहली बार इतना विशाल शिवलिंग निकला है।
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ऐसे हुई समय की गणना ......................
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पुरातत्व के जानकारों के अनुसार भूकंप और बाढ़ ने सिरपुर शहर को 12वीं सदी में बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचाया था। कालांतर में नदी की रेत और मिट्टी की परतें शहर को दबाती चलीं गईं। टीलों को कई मीटर खोदकर शहर की संरचना को निकाला गया। खुदाई में मिले सिक्कों, प्रतिमाओं, ताम्रपत्र, बर्तन, शिलालेखों के आधार पर उस काल की गणना होती गई। साइट पर खुदाई की गहराई जैसे-जैसे बढ़ती है, प्राचीन काल के और सबूत मिलते जाते हैं। जमीन में जिस गहराई पर शिवलिंग मिला, उसके आधार पर इसे दो हजार साल पुराना माना गया है।
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भारत में स्थित चार सबसे ऊंचे शिवलिंग...................
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108 फीट कर्नाटक का कोटिलिंगेश्वर
108 फीट सिकंदराबाद का महाशिवलिंग
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🌺बाबा केदारनाथ और भीमशिला आज दोनो एक दूसरे के तारणहार हो चुके हैं। भीमशिला ने जहां 2013 के त्रासदी में बाबा केदारनाथ धाम ज्योतिर्लिंग मन्दिर की महाप्रलय से रक्षा की, तो वहीं इस सेवाभाव के बदले बाबा ने भीमशिला को पूजनीय बनाकर अमर कर दिया।
आज भारतीय पुरातत्व विभाग आश्चर्यचकित है कि बाबा केदारनाथ मंदिर के चौड़ाई के ही बराबर का ये भीमशिला आखिर प्रकट कहाँ से हुआ????
आज पूरी दुनिया का हिन्दू समाज व अन्य धर्मों के लोग भी इस चमत्कार को नमस्कार कर रहे हैं।।।।
तो आइये आप सब भी र्दशन कीजिये मन्दिर के पीछे स्थित भीमशिला का जो 2013 में आई आपदा के समय हिंदुओं के महादेव का रखवाला बन केदारनाथ मंदिर के पीछे अपना गदा गाड़कर पूरे प्रलय का अभिमान चकनाचूर कर मन्दिर को लेशमात्र भी क्षति नही होने दिया।
बाद में पूरी बाढ़ के पानी तथा उसके साथ आने वाले बड़े-बड़े पत्थरों को इसी शिला ने रोक कर केदारनाथ मंदिर की रक्षा की थी। भीमशिला की चौड़ाई मन्दिर की चौड़ाई के बिलकुल बराबर है।
भोले बाबा की महिमा वही जानें।
हम बाबा केदारनाथ की जय जयकार कर उनका गुणगान करें।
जंय केदारनाथ🙏
आज भारतीय पुरातत्व विभाग आश्चर्यचकित है कि बाबा केदारनाथ मंदिर के चौड़ाई के ही बराबर का ये भीमशिला आखिर प्रकट कहाँ से हुआ????
आज पूरी दुनिया का हिन्दू समाज व अन्य धर्मों के लोग भी इस चमत्कार को नमस्कार कर रहे हैं।।।।
तो आइये आप सब भी र्दशन कीजिये मन्दिर के पीछे स्थित भीमशिला का जो 2013 में आई आपदा के समय हिंदुओं के महादेव का रखवाला बन केदारनाथ मंदिर के पीछे अपना गदा गाड़कर पूरे प्रलय का अभिमान चकनाचूर कर मन्दिर को लेशमात्र भी क्षति नही होने दिया।
बाद में पूरी बाढ़ के पानी तथा उसके साथ आने वाले बड़े-बड़े पत्थरों को इसी शिला ने रोक कर केदारनाथ मंदिर की रक्षा की थी। भीमशिला की चौड़ाई मन्दिर की चौड़ाई के बिलकुल बराबर है।
भोले बाबा की महिमा वही जानें।
हम बाबा केदारनाथ की जय जयकार कर उनका गुणगान करें।
जंय केदारनाथ🙏
श्री सोमनाथ का पुराना चंदन दरवाजा गांधी जिद से कभी सोमनाथ नही पहुच पाया
बाद मे गांधी वध हो गया और पटेल भी स्वर्ग बासी हो गए
1000 साल पुरानी विरासत आगरा लालकिले मे दर्शनार्थियों के लिए पुरातत्व ने खोल दिया है
जाईए दर्शन कीजिए
जाट बटालियन कौ नमन🚩🙏🙏
बाद मे गांधी वध हो गया और पटेल भी स्वर्ग बासी हो गए
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Forwarded from सनातन संस्कृत के वीडियो
🙏🏻🌹 *जय जय श्री राधे गोविंद*🙏🏻🌹
🙏🏻🌹 *जय जय श्री राधे* 🙏🏻🌹
*वीडियो👆🏻👆🏻👇🏻👇🏻*
🕰➡️3.33
*🙏🏻💐तीर्थ कितने है और क्यू है💐🙏🏻*
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Media is too big
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प्राचीन भारत में रॉकेट युद्ध की गवाही देती हालेबिदू मंदिर में निर्मित एक नक्काशी..
मिसाइल और ज्वलनशील तीरों को धारण करने वाली लॉन्चिंग पैड को ध्यान से देखिये यह प्राचीन भारतीयों के विकसित तकनीकों का सबसे बड़ा सबूत है ।
और फिर भी कुछ लोग कहते हैं..भारत में गोला-बारूद और तोप मुगल लेकर आये थे....
(हालेबिदू मंदिर, कर्नाटक,12वीं शताब्दी)
मिसाइल और ज्वलनशील तीरों को धारण करने वाली लॉन्चिंग पैड को ध्यान से देखिये यह प्राचीन भारतीयों के विकसित तकनीकों का सबसे बड़ा सबूत है ।
और फिर भी कुछ लोग कहते हैं..भारत में गोला-बारूद और तोप मुगल लेकर आये थे....
(हालेबिदू मंदिर, कर्नाटक,12वीं शताब्दी)