Forwarded from सनातन संस्कृत के वीडियो
🙏🏻🌹 *जय जय श्री राधे गोविंद*🙏🏻🌹
🙏🏻🌹 *जय जय श्री राधे* 🙏🏻🌹
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*🙏🏻💐विश्व मे भारतीय संस्कृति💐🙏🏻*
🚩 *सनातन धर्म को पहचानो* 🚩
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*🙏🏻🌹 हरे कृष्ण 🙏🏻🌹*
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कौन थे राजा वीर विक्रमादित्य..... ????
बड़े ही शर्म की बात है कि महाराज विक्रमादित्य के बारे में देश को लगभग शून्य बराबर ज्ञान है, जिन्होंने भारत को सोने की चिड़िया बनाया था, और स्वर्णिम काल लाया था
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उज्जैन के राजा थे गन्धर्वसैन , जिनके तीन संताने थी , सबसे बड़ी लड़की थी मैनावती , उससे छोटा लड़का भृतहरि और सबसे छोटा वीर विक्रमादित्य...
बहन मैनावती की शादी धारानगरी के राजा पदमसैन के साथ कर दी , जिनके एक लड़का हुआ गोपीचन्द , आगे चलकर गोपीचन्द ने श्री ज्वालेन्दर नाथ जी से योग दीक्षा ले ली और तपस्या करने जंगलों में चले गए , फिर मैनावती ने भी श्री गुरू गोरक्ष नाथ जी से योग दीक्षा ले ली ,
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आज ये देश और यहाँ की संस्कृति केवल विक्रमदित्य के कारण अस्तित्व में है
अशोक मौर्य ने बोद्ध धर्म अपना लिया था और बोद्ध बनकर 25 साल राज किया था
भारत में तब सनातन धर्म लगभग समाप्ति पर आ गया था, देश में बौद्ध और जैन हो गए थे
----------
रामायण, और महाभारत जैसे ग्रन्थ खो गए थे, महाराज विक्रम ने ही पुनः उनकी खोज करवा कर स्थापित किया
विष्णु और शिव जी के मंदिर बनवाये और सनातन धर्म को बचाया
विक्रमदित्य के 9 रत्नों में से एक कालिदास ने अभिज्ञान शाकुन्तलम् लिखा, जिसमे भारत का इतिहास है
अन्यथा भारत का इतिहास क्या मित्रो हम भगवान् कृष्ण और राम को ही खो चुके थे
हमारे ग्रन्थ ही भारत में खोने के कगार पर आ गए थे,
उस समय उज्जैन के राजा भृतहरि ने राज छोड़कर श्री गुरू गोरक्ष नाथ जी से योग की दीक्षा ले ली और तपस्या करने जंगलों में चले गए , राज अपने छोटे भाई विक्रमदित्य को दे दिया , वीर विक्रमादित्य भी श्री गुरू गोरक्ष नाथ जी से गुरू दीक्षा लेकर राजपाट सम्भालने लगे और आज उन्ही के कारण सनातन धर्म बचा हुआ है, हमारी संस्कृति बची हुई है
--------------
महाराज विक्रमदित्य ने केवल धर्म ही नही बचाया
उन्होंने देश को आर्थिक तौर पर सोने की चिड़िया बनाई, उनके राज को ही भारत का स्वर्णिम राज कहा जाता है
विक्रमदित्य के काल में भारत का कपडा, विदेशी व्यपारी सोने के वजन से खरीदते थे
भारत में इतना सोना आ गया था की, विक्रमदित्य काल में सोने की सिक्के चलते थे , आप गूगल इमेज कर विक्रमदित्य के सोने के सिक्के देख सकते हैं।
----------------
हिन्दू कैलंडर भी विक्रमदित्य का स्थापित किया हुआ है
आज जो भी ज्योतिष गणना है जैसे , हिन्दी सम्वंत , वार , तिथीयाँ , राशि , नक्षत्र , गोचर आदि उन्ही की रचना है , वे बहुत ही पराक्रमी , बलशाली और बुद्धिमान राजा थे ।
कई बार तो देवता भी उनसे न्याय करवाने आते थे ,
विक्रमदित्य के काल में हर नियम धर्मशास्त्र के हिसाब से बने होते थे, न्याय , राज सब धर्मशास्त्र के नियमो पर चलता था
विक्रमदित्य का काल राम राज के बाद सर्वश्रेष्ठ माना गया है, जहाँ प्रजा धनि और धर्म पर चलने वाली थी
------------
पर बड़े दुःख की बात है की भारत के सबसे महानतम राजा के बारे में कांग्रेसी और वामपंथीयों का इतिहास भारत की जनता को शून्य ज्ञान देता है, कृपया आप शेयर तो करें ताकि देश जान सके कि सोने की चिड़िया वाला देश का राजा कौन था ।
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बड़े ही शर्म की बात है कि महाराज विक्रमादित्य के बारे में देश को लगभग शून्य बराबर ज्ञान है, जिन्होंने भारत को सोने की चिड़िया बनाया था, और स्वर्णिम काल लाया था
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उज्जैन के राजा थे गन्धर्वसैन , जिनके तीन संताने थी , सबसे बड़ी लड़की थी मैनावती , उससे छोटा लड़का भृतहरि और सबसे छोटा वीर विक्रमादित्य...
बहन मैनावती की शादी धारानगरी के राजा पदमसैन के साथ कर दी , जिनके एक लड़का हुआ गोपीचन्द , आगे चलकर गोपीचन्द ने श्री ज्वालेन्दर नाथ जी से योग दीक्षा ले ली और तपस्या करने जंगलों में चले गए , फिर मैनावती ने भी श्री गुरू गोरक्ष नाथ जी से योग दीक्षा ले ली ,
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आज ये देश और यहाँ की संस्कृति केवल विक्रमदित्य के कारण अस्तित्व में है
अशोक मौर्य ने बोद्ध धर्म अपना लिया था और बोद्ध बनकर 25 साल राज किया था
भारत में तब सनातन धर्म लगभग समाप्ति पर आ गया था, देश में बौद्ध और जैन हो गए थे
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रामायण, और महाभारत जैसे ग्रन्थ खो गए थे, महाराज विक्रम ने ही पुनः उनकी खोज करवा कर स्थापित किया
विष्णु और शिव जी के मंदिर बनवाये और सनातन धर्म को बचाया
विक्रमदित्य के 9 रत्नों में से एक कालिदास ने अभिज्ञान शाकुन्तलम् लिखा, जिसमे भारत का इतिहास है
अन्यथा भारत का इतिहास क्या मित्रो हम भगवान् कृष्ण और राम को ही खो चुके थे
हमारे ग्रन्थ ही भारत में खोने के कगार पर आ गए थे,
उस समय उज्जैन के राजा भृतहरि ने राज छोड़कर श्री गुरू गोरक्ष नाथ जी से योग की दीक्षा ले ली और तपस्या करने जंगलों में चले गए , राज अपने छोटे भाई विक्रमदित्य को दे दिया , वीर विक्रमादित्य भी श्री गुरू गोरक्ष नाथ जी से गुरू दीक्षा लेकर राजपाट सम्भालने लगे और आज उन्ही के कारण सनातन धर्म बचा हुआ है, हमारी संस्कृति बची हुई है
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महाराज विक्रमदित्य ने केवल धर्म ही नही बचाया
उन्होंने देश को आर्थिक तौर पर सोने की चिड़िया बनाई, उनके राज को ही भारत का स्वर्णिम राज कहा जाता है
विक्रमदित्य के काल में भारत का कपडा, विदेशी व्यपारी सोने के वजन से खरीदते थे
भारत में इतना सोना आ गया था की, विक्रमदित्य काल में सोने की सिक्के चलते थे , आप गूगल इमेज कर विक्रमदित्य के सोने के सिक्के देख सकते हैं।
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हिन्दू कैलंडर भी विक्रमदित्य का स्थापित किया हुआ है
आज जो भी ज्योतिष गणना है जैसे , हिन्दी सम्वंत , वार , तिथीयाँ , राशि , नक्षत्र , गोचर आदि उन्ही की रचना है , वे बहुत ही पराक्रमी , बलशाली और बुद्धिमान राजा थे ।
कई बार तो देवता भी उनसे न्याय करवाने आते थे ,
विक्रमदित्य के काल में हर नियम धर्मशास्त्र के हिसाब से बने होते थे, न्याय , राज सब धर्मशास्त्र के नियमो पर चलता था
विक्रमदित्य का काल राम राज के बाद सर्वश्रेष्ठ माना गया है, जहाँ प्रजा धनि और धर्म पर चलने वाली थी
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पर बड़े दुःख की बात है की भारत के सबसे महानतम राजा के बारे में कांग्रेसी और वामपंथीयों का इतिहास भारत की जनता को शून्य ज्ञान देता है, कृपया आप शेयर तो करें ताकि देश जान सके कि सोने की चिड़िया वाला देश का राजा कौन था ।
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दुनियाँ के #सात_आश्चर्यों की सामूहिक चमक इस मंदिर की #चौखट पर आकर #दम तोड़ देती है
#मीनाक्षी_अम्मान_मंदिर, तमिलनाडु ! यह मंदिर उन #30_विरासतों की सूची में #शामिल था जिनमें से
#7_आश्चर्यों को चुना जाने वाला था लेकिन #वामपंथ के #अंतर्राष्ट्रीयकरण से उपजी वेद #विरोधी सोच ने इस #मंदिर से इसके #हक को छीन लिया ।
इस स्थान पर मूल मंदिर #3000_साल से अधिक #पुराना है, #मंदिर के प्रत्येक कोने को #जटिल_नक्काशियाँ से डिजाइन किया गया है। मंदिर के ऊपरी आधे भाग को #खूबसूरत_रंगों से भरा गया है । मंदिर के अंदर, लगभग #एक_हजार_स्तम्भ हैं जिनमें कुछ #संगीतमय_स्तंभ हैं, बीच में एक पानी का तालाब है जिसमें सुंदर 'कमल के फूल' खिलते हैं। मंदिर के #चारों ओर #नटराज, #नंदी बैल और #देवताओं की हजारों #प्रतिमाएं हैं।
जहाँ आधुनिक युग में करोड़ों खर्च करने के बाद बनी जल संग्रहण प्रणाली कुछ वर्षों बाद काम करना बंद कर देती है वहीं इस मंदिर में हजारों साल पहले बनी जल संग्रहण प्रणाली आज भी सुचारू रूप से कार्य कर रही है । इस मंदिर में चतुराई से स्तंभ की डिजाइन में निर्मित पाइप की संरचनाएँ आज भी मंदिर की छतों से बारिश की पानी को भूमिगत चैनलों तक ले जाते हैं ।
प्राचीनता और वैभव के आधार पर जिस मंदिर को आश्चर्यों की लिस्ट में पहले स्थान पर होना चाहिए था उसे हम भारत के लोग ही नहीं जानते ।
#मीनाक्षी_अम्मान_मंदिर, तमिलनाडु ! यह मंदिर उन #30_विरासतों की सूची में #शामिल था जिनमें से
#7_आश्चर्यों को चुना जाने वाला था लेकिन #वामपंथ के #अंतर्राष्ट्रीयकरण से उपजी वेद #विरोधी सोच ने इस #मंदिर से इसके #हक को छीन लिया ।
इस स्थान पर मूल मंदिर #3000_साल से अधिक #पुराना है, #मंदिर के प्रत्येक कोने को #जटिल_नक्काशियाँ से डिजाइन किया गया है। मंदिर के ऊपरी आधे भाग को #खूबसूरत_रंगों से भरा गया है । मंदिर के अंदर, लगभग #एक_हजार_स्तम्भ हैं जिनमें कुछ #संगीतमय_स्तंभ हैं, बीच में एक पानी का तालाब है जिसमें सुंदर 'कमल के फूल' खिलते हैं। मंदिर के #चारों ओर #नटराज, #नंदी बैल और #देवताओं की हजारों #प्रतिमाएं हैं।
जहाँ आधुनिक युग में करोड़ों खर्च करने के बाद बनी जल संग्रहण प्रणाली कुछ वर्षों बाद काम करना बंद कर देती है वहीं इस मंदिर में हजारों साल पहले बनी जल संग्रहण प्रणाली आज भी सुचारू रूप से कार्य कर रही है । इस मंदिर में चतुराई से स्तंभ की डिजाइन में निर्मित पाइप की संरचनाएँ आज भी मंदिर की छतों से बारिश की पानी को भूमिगत चैनलों तक ले जाते हैं ।
प्राचीनता और वैभव के आधार पर जिस मंदिर को आश्चर्यों की लिस्ट में पहले स्थान पर होना चाहिए था उसे हम भारत के लोग ही नहीं जानते ।
*"कोदण्ड राम मंदिर पूर्व गोदावरी आंध्र प्रदेश" चित्र जूम कीजिये , कागज़ पर भी इतना सुंदर चित्रांकन मुश्किल हैं ! और हमने सपनो में नही हकीकत में बनाया है गर्व करो सनातन संस्कृति धरोहर पे!🚩*
Forwarded from सनातन संस्कृत के वीडियो
🙏🏻🌹 *जय जय श्री राधे गोविंद*🙏🏻🌹
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🕰➡️6.28
*🙏🏻💐*वृन्दावन का अर्थ क्या है _ __ पूज्य देवकीनन्दन ठाकुर जी*💐🙏🏻*
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#एक_तरफ_12000_अफगान_दूसरी_तरफ_21_सिख
ये लड़ाई यूरोप के सभी स्कूलो मेँ पढाई जाती है पर हमारे देश में इसे कोई जानता तक नहीं...
एक तरफ 12 हजार #अफगान_लुटेरे...तो दूसरी तरफ #21_सिख...
अगर आप को इसके बारे नहीं पता तो आप अपने इतिहास से बेखबर है...
आपने "#ग्रीक_सपार्टा" और "#परसियन" की लड़ाई के बारे मेँ सुना होगा...इनके ऊपर "300" जैसी फिल्म भी बनी है...पर अगर आप "#सारागढ़ी" के बारे मेँ पढोगे तो पता चलेगा इससे महान लड़ाई #सिखलैड मेँ हुई थी...
बात 1897 की है...
नॉर्थ वेस्ट फ्रंटियर स्टेट मेँ 12 हजार अफगानो ने हमला कर दिया...वे #गुलिस्तान और #लोखार्ट के किलो पर कब्जा करना चाहते थे...इन किलोँ को महाराजा रणजीत सिघ ने बनवाया था... इन किलो के पास सारागढी मे एक सुरक्षा चौकी थी...जहाँ पर 36 वीँ सिख रेजिमेट के 21 जवान तैनात थे...ये सभी जवान माझा क्षेत्र के थे और सभी सिख थे...36 वी सिख रेजिमेट मे केवल साबत सूरत (जो केशधारी हों) सिख भर्ती किये जाते थे.... ईशर सिह के नेतृत्व मेँ तैनात इन 20 जवानो को पहले ही पता चल गया कि 12 हजार अफगानो से जिँदा बचना नामुंकिन है...फिर भी इन जवानो ने लड़ने का फैसला लिया और 12 सितम्बर 1897 को सिखलैड की धरती पर एक ऐसी लड़ाई हुयी जो दुनिया की पांच महानतम लड़ाइयो मे शामिल हो गयी...एक तरफ 12 हजार अफगान थे...तो दूसरी तरफ 21 सिख...यंहा बड़ी भीषण लड़ाई हुयी और अफगानो की भारी तबाही हुयी...सिख जवान आखिरी सांस तक लड़े और इन किलो को बचा लिया...अफगानो की हार हुयी...जब ये खबर यूरोप पंहुची तो पूरी दुनिया स्तब्ध रह गयी...ब्रिटेन की संसद मेँ सभी ने खड़ा होकर इन 21 वीरो की बहादुरी को #नमन🙏 किया...इन सभी को मरणोपरांत इंडियन ऑर्डर ऑफ मेरिट दिया गया... जो आज के परमवीर चक्र के बराबर था...भारत के सैन्य इतिहास का ये युद्ध के दौरान सैनिकोँ द्वारा लिया गया सबसे विचित्र अंतिम फैसला था...UNESCO ने इस लड़ाई को अपनी 8 महानतम लड़ाइयोँ मेँ शामिल किया...इस लड़ाई के आगे स्पार्टन्स की बहादुरी फीकी पड़ गयी...पर मुझे दुख होता है कि जो बात हर भारतीय को पता होनी चाहिए...उसके बारे मेँ कम लोग ही जानते है...ये लड़ाई यूरोप के स्कूलो मे पढाई जाती है पर हमारे यहा नहीं क्यो...?
ऐसे वीरो का इतिहास एक षडयंत्र के तहत छिपा लिया जाता है।🏹🏹🏹🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩
ये लड़ाई यूरोप के सभी स्कूलो मेँ पढाई जाती है पर हमारे देश में इसे कोई जानता तक नहीं...
एक तरफ 12 हजार #अफगान_लुटेरे...तो दूसरी तरफ #21_सिख...
अगर आप को इसके बारे नहीं पता तो आप अपने इतिहास से बेखबर है...
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बात 1897 की है...
नॉर्थ वेस्ट फ्रंटियर स्टेट मेँ 12 हजार अफगानो ने हमला कर दिया...वे #गुलिस्तान और #लोखार्ट के किलो पर कब्जा करना चाहते थे...इन किलोँ को महाराजा रणजीत सिघ ने बनवाया था... इन किलो के पास सारागढी मे एक सुरक्षा चौकी थी...जहाँ पर 36 वीँ सिख रेजिमेट के 21 जवान तैनात थे...ये सभी जवान माझा क्षेत्र के थे और सभी सिख थे...36 वी सिख रेजिमेट मे केवल साबत सूरत (जो केशधारी हों) सिख भर्ती किये जाते थे.... ईशर सिह के नेतृत्व मेँ तैनात इन 20 जवानो को पहले ही पता चल गया कि 12 हजार अफगानो से जिँदा बचना नामुंकिन है...फिर भी इन जवानो ने लड़ने का फैसला लिया और 12 सितम्बर 1897 को सिखलैड की धरती पर एक ऐसी लड़ाई हुयी जो दुनिया की पांच महानतम लड़ाइयो मे शामिल हो गयी...एक तरफ 12 हजार अफगान थे...तो दूसरी तरफ 21 सिख...यंहा बड़ी भीषण लड़ाई हुयी और अफगानो की भारी तबाही हुयी...सिख जवान आखिरी सांस तक लड़े और इन किलो को बचा लिया...अफगानो की हार हुयी...जब ये खबर यूरोप पंहुची तो पूरी दुनिया स्तब्ध रह गयी...ब्रिटेन की संसद मेँ सभी ने खड़ा होकर इन 21 वीरो की बहादुरी को #नमन🙏 किया...इन सभी को मरणोपरांत इंडियन ऑर्डर ऑफ मेरिट दिया गया... जो आज के परमवीर चक्र के बराबर था...भारत के सैन्य इतिहास का ये युद्ध के दौरान सैनिकोँ द्वारा लिया गया सबसे विचित्र अंतिम फैसला था...UNESCO ने इस लड़ाई को अपनी 8 महानतम लड़ाइयोँ मेँ शामिल किया...इस लड़ाई के आगे स्पार्टन्स की बहादुरी फीकी पड़ गयी...पर मुझे दुख होता है कि जो बात हर भारतीय को पता होनी चाहिए...उसके बारे मेँ कम लोग ही जानते है...ये लड़ाई यूरोप के स्कूलो मे पढाई जाती है पर हमारे यहा नहीं क्यो...?
ऐसे वीरो का इतिहास एक षडयंत्र के तहत छिपा लिया जाता है।🏹🏹🏹🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩
Forwarded from सनातन संस्कृत के वीडियो
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┋ *✎व्रजदर्शन*
╚═════▣▣▣
*आज से व्रजदर्शन के विडियो क्लिप Unique Samay you tube channel के माध्यम से कुल १२८ पार्ट मे से क्रमशः पार्ट १ से अन्त तक के विडियो आज से पोस्ट किये जारहै है।भाविक जन इस डोक्युमेन्ट्री विडियो का लाभ लेवे।*
*आज का दर्शन:-राधाजी का जन्मस्थान*
*भाषा - हिन्दी*
*आज के विडियो के दो पार्ट*
*पार्ट:-1(1)*
*⏱️0:10:31*
*पार्ट:-1(2)*
*⏱️0:09:07*
*🎙️मयंक भैया*
*🙏हिन्दी अध्यात्मिक ग्रुप के जय श्रीकृष्ण🙏*
https://www.youtube.com/watch?v=hhqh94MYMeQ&feature=share
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Old Barsana - Radha Rani का जन्म स्थान | यहाँ Shri Krishna और अपनी सखियों के साथ खेलती थी राधा रानी
राधे राधे दोस्तों
आप हमारे साथ हमारे WhatsApp No. 8439773390 पर जुड़ सकते है। आपको बस हमारे इस Number पर "राधे राधे" लिखकर मैसेज करे और अपने Contact में Save कर ले जिससे की हम आपको ब्रज की सभी कथा और श्री कृष्ण की सभी लीलाओं के दर्शन करा सके ।
साथ ही आप…
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Forwarded from सनातन संस्कृत के वीडियो
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स्वास्तिक और मूर्ति होने के बाद भी लोग इसे मस्जिद कहते है ।
अढ़ाई दिन का झोपड़ा - कुतुबुद्दीन ऐबक ने इसे मात्र ढाई दिन में बनाया था, ऐसा हमने राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध करवाई गई पुस्तक में पढ़ा । उसमे अब सुधार करने की जरूरत है । कांग्रेस ने हमे गलत पढ़ाया ...
क्यो की वर्तमान समय 2020 मे हम जान चुके है की इस्लाम धर्म के प्रतीक चिन्ह क्या है ? और वे मूर्ति से कितनी घृणा करते है ... इस अढ़ाई दिन के झोंपड़े पर आप खुद देख सकते है, खिड़की पर स्वस्त्विक का निशान भी है, और आगे फिर मूर्तिया भी ।
और एक साधरण सी बात है, इस मंदिर की विशालता एवं बारीक कारीगरी देखकर कहीं से भी लगता है कि ऐसा निर्माण आधुनिक मशीनों के साथ भी ढाई दिन में हो सकता है ?
दरअसल कुतुबुद्दीन ऐबक ने इसे ढाई दिन में बनाया नही था, बल्कि तौड़ा था । इस मंदिर में पुराना शिलालेख और श्लोक आदि आज भी है, जिससे इस मंदिर के विग्रहराज चौहान द्वारा बनाये जाने के पुख्ता प्रमाण है, वह शिलालेख आज भी इस मंदिर में है, लेकिन हिन्दू पता नही, कौनसा नशा करके सोए है ...
#❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️
अढ़ाई दिन का झोपड़ा - कुतुबुद्दीन ऐबक ने इसे मात्र ढाई दिन में बनाया था, ऐसा हमने राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध करवाई गई पुस्तक में पढ़ा । उसमे अब सुधार करने की जरूरत है । कांग्रेस ने हमे गलत पढ़ाया ...
क्यो की वर्तमान समय 2020 मे हम जान चुके है की इस्लाम धर्म के प्रतीक चिन्ह क्या है ? और वे मूर्ति से कितनी घृणा करते है ... इस अढ़ाई दिन के झोंपड़े पर आप खुद देख सकते है, खिड़की पर स्वस्त्विक का निशान भी है, और आगे फिर मूर्तिया भी ।
और एक साधरण सी बात है, इस मंदिर की विशालता एवं बारीक कारीगरी देखकर कहीं से भी लगता है कि ऐसा निर्माण आधुनिक मशीनों के साथ भी ढाई दिन में हो सकता है ?
दरअसल कुतुबुद्दीन ऐबक ने इसे ढाई दिन में बनाया नही था, बल्कि तौड़ा था । इस मंदिर में पुराना शिलालेख और श्लोक आदि आज भी है, जिससे इस मंदिर के विग्रहराज चौहान द्वारा बनाये जाने के पुख्ता प्रमाण है, वह शिलालेख आज भी इस मंदिर में है, लेकिन हिन्दू पता नही, कौनसा नशा करके सोए है ...
#❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️
दक्षिण भारत सैकड़ो शानदार प्राचीन मंदिरों से भरा है, लेकिन उत्तर भारत में ऐसे मंदिर गायब हैं। क्या आप जानते हैं ऐसा क्यों है ? जवाब जानने के लिए उत्तर भारत के किसी भी प्राचीन इस्लामिक स्ट्रक्चर के अंदर बारीकी से देखें और आपको जवाब मिल जाएगा।
कुतुब मीनार प्राचीन दिल्ली (ढिल्लिका) के एक हिन्दू किला जिसका नाम लालकोट था, के अवशेष पर बना हैं । ढिल्लिका हिंदू राजाओं तोमर और चौहान की राजधानी थी। कुतुबमीनार का वास्तविक नाम विष्णु स्तंभ है जिसे कुतुबदीन ने नहीं बल्कि सम्राट चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य के नवरत्नों में से एक और खगोलशास्त्री वराहमिहिर ने बनवाया था। कुतुब मीनार के पास जो बस्ती है उसे महरौली कहा जाता है यह एक संस्कृत शब्द है, इस कस्बे के बारे में कहा जा सकता है कि यहाँ पर विख्यात खगोलज्ञ मिहिर (जो कि विक्रमादित्य के दरबार में थे) रहा करते थे। उनके साथ उनके सहायक, गणितज्ञ और तकनीकविद भी रहते थे। वे लोग इस कथित कुतुब मीनार का खगोलीय गणना, अध्ययन के लिए प्रयोग करते थे।
इस टॉवर के चारों ओर हिंदू राशि चक्र को समर्पित 27 नक्षत्रों या तारामंडलों के लिए मंडप या गुंबजदार इमारतें थीं। कुछ इतिहास की किताबों में यह जिक्र है कि कुतुबुद्दीन ने इन सभी मंडपों या गुंबजदार इमारतों को नष्ट कर दिया था, लेकिन उसमें यह नहीं लिखा कि उसने कोई मीनार बनवाई। मुस्लिम हमलावर हिंदू इमारतों की स्टोन-ड्रेसिंग या पत्थरों के ऊपरी आवरण को निकाल लेते थे और अरबी में लिखे दूसरे पत्थरों को इसपर चिपका देते थे ।
कुतुबमीनार परिसर में स्तंभों और दीवारों पर उकेरे गए मंदिर की घंटियों और मूर्तियों की नक्काशी को अभी भी देखा जा सकता है, कुतुबमीनार परिसर में हिन्दू वास्तुकला से निर्मित मंदिर के सैकड़ो स्तम्भ आज भी देखे जा सकते है इन स्तंभों से मूर्तियों को हटाने के प्रयास में छतिग्रस्त हिस्से भी साफ देखे जा सकते है, परिसर में उकेरे गए गणेश प्रतिमा को सरकार ने लोहे की जाल से कवर कर रखा है ताकि यहाँ दुबारा पूजा की परंपरा शुरू ना की जा सके । इस मीनार का प्रवेश द्वार उत्तर दिशा में है, पश्चिम में नहीं, जबकि इस्लामी धर्मशास्त्र और परंपरा में पश्चिम का महत्व है। पास में ही जंग न लगने वाले लोहे के खंभे पर ब्राह्मी लिपि में संस्कृत में लिखा है कि विष्णु का यह स्तंभ विष्णुपाद गिरि नामक पहाड़ी पर बना था। इस विवरण से साफ होता है कि मीनार के मध्य स्थित मंदिर में लेटे हुए विष्णु की मूर्ति को मोहम्मद गोरी और उसके गुलाम कुतुबुद्दीन ने नष्ट कर दिया था।
कुतुबमिनार के पास लगे जानकारी पट्ट पर आप स्पष्ट रूप से पढ़ सकते हैं जिसमें यहाँ 27 हिन्दू-जैन मंदिरों के विध्वंस का जिक्र है । ब्रिटिश म्युजियम में संरक्षित जानकारियों के अनुसार सन 1900 तक इसे "राजा पृथ्वीराज मंदिर" नाम से जाना जाता था लेकिन सेक्युलरिज्म ने महज 100 साल के अंदर हमारी विरासतों के मूल पहचान को छीन लिया ।
भले ही इतिहास लिखना आक्रमणकारियों के प्रशंसा में मतान्ध वामपंथी इतिहासकारों के हाथ में था लेकिन इतिहास का प्रचार करना हमारे हाथों में है ।
आओ हम सब इसका प्रचार करें.. 💖💖💖💖💖💖💖
कुतुब मीनार प्राचीन दिल्ली (ढिल्लिका) के एक हिन्दू किला जिसका नाम लालकोट था, के अवशेष पर बना हैं । ढिल्लिका हिंदू राजाओं तोमर और चौहान की राजधानी थी। कुतुबमीनार का वास्तविक नाम विष्णु स्तंभ है जिसे कुतुबदीन ने नहीं बल्कि सम्राट चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य के नवरत्नों में से एक और खगोलशास्त्री वराहमिहिर ने बनवाया था। कुतुब मीनार के पास जो बस्ती है उसे महरौली कहा जाता है यह एक संस्कृत शब्द है, इस कस्बे के बारे में कहा जा सकता है कि यहाँ पर विख्यात खगोलज्ञ मिहिर (जो कि विक्रमादित्य के दरबार में थे) रहा करते थे। उनके साथ उनके सहायक, गणितज्ञ और तकनीकविद भी रहते थे। वे लोग इस कथित कुतुब मीनार का खगोलीय गणना, अध्ययन के लिए प्रयोग करते थे।
इस टॉवर के चारों ओर हिंदू राशि चक्र को समर्पित 27 नक्षत्रों या तारामंडलों के लिए मंडप या गुंबजदार इमारतें थीं। कुछ इतिहास की किताबों में यह जिक्र है कि कुतुबुद्दीन ने इन सभी मंडपों या गुंबजदार इमारतों को नष्ट कर दिया था, लेकिन उसमें यह नहीं लिखा कि उसने कोई मीनार बनवाई। मुस्लिम हमलावर हिंदू इमारतों की स्टोन-ड्रेसिंग या पत्थरों के ऊपरी आवरण को निकाल लेते थे और अरबी में लिखे दूसरे पत्थरों को इसपर चिपका देते थे ।
कुतुबमीनार परिसर में स्तंभों और दीवारों पर उकेरे गए मंदिर की घंटियों और मूर्तियों की नक्काशी को अभी भी देखा जा सकता है, कुतुबमीनार परिसर में हिन्दू वास्तुकला से निर्मित मंदिर के सैकड़ो स्तम्भ आज भी देखे जा सकते है इन स्तंभों से मूर्तियों को हटाने के प्रयास में छतिग्रस्त हिस्से भी साफ देखे जा सकते है, परिसर में उकेरे गए गणेश प्रतिमा को सरकार ने लोहे की जाल से कवर कर रखा है ताकि यहाँ दुबारा पूजा की परंपरा शुरू ना की जा सके । इस मीनार का प्रवेश द्वार उत्तर दिशा में है, पश्चिम में नहीं, जबकि इस्लामी धर्मशास्त्र और परंपरा में पश्चिम का महत्व है। पास में ही जंग न लगने वाले लोहे के खंभे पर ब्राह्मी लिपि में संस्कृत में लिखा है कि विष्णु का यह स्तंभ विष्णुपाद गिरि नामक पहाड़ी पर बना था। इस विवरण से साफ होता है कि मीनार के मध्य स्थित मंदिर में लेटे हुए विष्णु की मूर्ति को मोहम्मद गोरी और उसके गुलाम कुतुबुद्दीन ने नष्ट कर दिया था।
कुतुबमिनार के पास लगे जानकारी पट्ट पर आप स्पष्ट रूप से पढ़ सकते हैं जिसमें यहाँ 27 हिन्दू-जैन मंदिरों के विध्वंस का जिक्र है । ब्रिटिश म्युजियम में संरक्षित जानकारियों के अनुसार सन 1900 तक इसे "राजा पृथ्वीराज मंदिर" नाम से जाना जाता था लेकिन सेक्युलरिज्म ने महज 100 साल के अंदर हमारी विरासतों के मूल पहचान को छीन लिया ।
भले ही इतिहास लिखना आक्रमणकारियों के प्रशंसा में मतान्ध वामपंथी इतिहासकारों के हाथ में था लेकिन इतिहास का प्रचार करना हमारे हाथों में है ।
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