ऐतिहासिक मंदिर और उनकी कथा
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हमारी संस्कृति हमारा अभिमान

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चौंक गए ना ?
भारतीय #वास्तुकला का अद्भुत नमूना.....

मात्र एक ,, एक भी गलती से #नक्काशी टूट सकती थी
हाँ,, उस समय मशीन भी नहीं थी ।
क्या सचमुच मशीन नहीं थी या #वामपंथी इतिहासकारों ने झूठ बोला ?
क्या उन्होंने इसलिए झूठ बोला कि हम भारतीय अपनी प्राचीन संस्कृति पर गर्व ना कर सकें ?

भारत का आधुनिक इतिहास ज्यादातर वामी दुष्टों ने ही लिखा हो, जो आज की हमारी वर्तमान पीढ़ी पढ़ रही है, लेकिन सोशल मीडिया हमारे हाथों में है ..अपने इतिहास के अनछुए पहलू हम जन जन तक पहुचाएंगे,,

(होयसलेश्वर मंदिर,12वीं शताब्दी,कर्नाटक)
पहियों पर मंदिर (बाणशंकरी, बादामी - कर्नाटक)
भारत की महान स्थापत्य कला का अद्भुत दृश्य
*🛕इतगी महादेव मंदिर,कोप्पल (कर्नाटक)*

*♦️इतगी महादेव मंदिर कर्नाटक के कोप्पल के उत्तर-पश्चिम में 26 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है*

*♦️महादेव को समर्पित यह मंदिर 1112 ईस्वी में कल्याणी चालुक्य राजा विक्रमादित्य VI के शासनकाल में बनाया गया था। 900+ वर्ष पहले!*

*♦️मंदिर के आविश्वस्नीय नक्काशी के स्तर और मूर्तिकला के कारण यह मंदिर 'देवालय चक्रवर्ती ' के नाम से भी जाना जाता है।*

*♦️मंदिर मुख्यता 13 छोटे मंदिरों से घिरा है, प्रत्येक के अंदर एक शिवलिंग है। सुशोभित शिखर, स्तंभ, मूर्तियां और उत्तम नक्काशी मानव सम्भावनाओ के उत्तम स्तर को प्रदर्शित करतीं है!*
#पुरी_पीठाधीश्वर_पूज्य_शंकराचार्य_जी के बारे में थोड़ा सा जान लीजिए उसी से उनकी विद्वत्ता का आंकलन कर सकते हैं। जितना बड़ा ज्ञान उतनी ही सरलता।

#ISRO ने अनेकों बार मदद ली है।
#NASA ने भी परामर्श लिया है।
#World_bank ने भी #अर्थव्यवस्था की उलझी हुई समस्या को सुलझाने के लिए सहायता मांगी जिसको #वैदिक_गणित की सहायता से कुछ मिनटों में ही हल कर दिया।
#ऑक्सफोर्ड के #गणितज्ञ भी सलाह लेते हैं।
#कैम्ब्रिज के भी #विद्वान मार्गदर्शन लेते हैं।
#IIM #IIT #IISc भी गणितीय परामर्श के लिए सहायता लेते हैं।
#200 ग्रन्थों की रचना जिनमे वैदिक गणित, विज्ञान, धर्म, संस्कृति आदि सहित अनेकों विषय शामिल हैं।

यह सिर्फ एक छोटा सा परिचय है इसके अलावा न जाने कितने महान कार्य हैं।

देश की सबसे बड़ी धर्मपीठ के पीठाधीश्वर एयर मूर्धन्य विद्वान की जब कदर नहीं होती, उनको हाशिये पर दिखाया जाता या रखा जाता है तो मन दुःखित होता है। आप पूज्यश्री की विद्वत्ता से सोचिए कि हमारे ऋषि महर्षि कितने विद्वान व वैज्ञानिक रहें होंगे।

हमें गर्व होना चाहिए अपनी सनातन ज्ञान व सन्त परम्परा पर।

🙏🌹पूज्य श्री को शत शत नमन।🌹🙏
[
*🛕तिलई नटराज मंदिर,चिदंबरम🛕*

*♦️चिदंबरम स्थित तिलई नटराज मंदिर का निर्माण आकाश तत्व के लिए किया गया था। यह मंदिर महान नर्तक नटराज के रूप में महादेव को समर्पित है। भारतीय शास्त्रीय नृत्य में नृत्य की 108 मुद्राओं का सबसे प्राचीन चित्रण चिदंबरम में ही पाया जाता है। इस मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा आधुनिक योग विज्ञान के जनक पतंजलि जी ने की थी।*

*🔶चिदंबरम मंदिर परिसर 35 एकड़ में बना है। यह शानदार मंदिर पत्थरों से बनाया गया है। इस स्थान की यात्रा करना बड़ा महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसकी प्राण प्रतिष्ठा स्वयं पतंजलि जी ने की थी।*
त्रिजुगीनारायण मंदिर:-----

यहां हुआ था भगवान शिव और देवी पार्वती का विवाह, आज भी मौजूद हैं निशानियां!!!!!!!

उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में ‘त्रियुगी नारायण’ एक पवित्र जगह है। माना जाता है कि यहां भगवान शिव अौर देवी पार्वती का विवाह हुआ था। यहीं भगवान विष्णु अौर देवी लक्ष्मी का एक मंदिर है, जिसे शिव पार्वती के विवाह स्थल के रुप में जाना जाता है। मंदिर परिसर में ऐसी कई चीजें हैं, जिनका संबंध शिव-पार्वती के विवाह से माना जाता है।

मंदिर परिसर में अखंड धुनी है, भगवान शिव अौर माता पार्वती ने इसी कुंड के फेरे लिए थे। इस हवन कुंड में आज भी अग्नि प्रज्वलित रहती है। मंदिर में प्रसादस्वरूप लकड़ियां चढ़ाई जाती है। भक्त इस पवित्र हवन कुंड की राख अपने घर लेकर जाते हैं।

यह वह स्थान है जहां भगवान शिव अौर माता पार्वती विवाह के समय बैठे थे। इसी स्थान पर बैठकर भगवान ब्रह्मा ने भोलेनाथ अौर देवी पार्वती का विवाह करवाया था।

भगवान शिव अौर देवी पार्वती का विवाह ब्रह्मा जी ने करवाया था। ब्रह्मा जी ने विवाह में शामिल हेने से पहले जिस कुंड में स्नान किया था, उसे ब्रह्मकुंड के नाम से जाना जाता है। यहां आने वाले भक्त इस कुंड में स्नान करके ब्रह्मा जी का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

जब भोलेनाथ का विवाह हुआ तो उन्हें एक गाय दान स्वरूप मिली थी। माना जाता है कि यहीं वह स्तंभ है, जहां गाय को बांधा गया था।

भोलेनाथ अौर देवी पार्वती के विवाह में भगवान विष्णु ने माता पार्वती के भाई की भूमिका निभाई थी। जिस कुंड में स्नान करके भगवान विष्णु विवाह संस्कार में शामिल हुए थे, उसे विष्णु कुंड कहा जाता है।

भोलेनाथ के विवाह में भाग लेने आए सभी देवी-देवताअों ने जिस कुंड में स्नान किया उसे रुद्र कुंड कहा जाता है। इन सभी कुंडों में जल का स्त्रोत सरस्वती कुंड को माना जाता है।

रामचरितमानस में गोस्वामी तुलसीदास जी ने शिव विवाह के बारे में लिखा है,,,,,,,

*जसि बिबाह कै बिधि श्रुति गाई। महामुनिन्ह सो सब करवाई॥
गहि गिरीस कुस कन्या पानी। भवहि समरपीं जानि भवानी॥

भावार्थ:-वेदों में विवाह की जैसी रीति कही गई है, महामुनियों ने वह सभी रीति करवाई। पर्वतराज हिमाचल ने हाथ में कुश लेकर तथा कन्या का हाथ पकड़कर उन्हें भवानी (शिवपत्नी) जानकर शिवजी को समर्पण किया॥
चोल शासकों द्वारा वास्तुकला के क्षेत्र में प्राप्त महान ऊंचाइयों के चित्रण का सही उदाहरण। यह भगवान #शिव को श्रद्धांजलि है!

बृहदेश्वर मंदिर देश के सबसे सुंदर वास्तुशिल्प वैभव में से एक है। यह सोलहवीं शताब्दी में बनाई गई महान दीवारों के बीच में बनाया गया है। मंदिर के अंदर, एक मंदिर टॉवर है जो भक्तों और पर्यटकों के बीच विमना के रूप में प्रसिद्ध है।

इस मंदिर के टॉवर की ऊंचाई 66 मीटर है।
विमना पृथ्वी पर सबसे ऊंचे मंदिरों में से एक है। बृहदेश्वर मंदिर में एक गोल शीर्ष संरचना है, जो केवल एक पत्थर पर नक्काशी से निर्मित माना जाता है।

इस #बृहदेश्वर मंदिर के प्रवेश पर एक संरक्षित बैल या नंदी की एक मूर्ति भी स्थित है, जिसकी ऊंचाई लगभग तेरह फीट और लंबाई में सोलह फीट है। उल्लेखनीय रूप से, इस मूर्ति को एकल रॉक नक्काशी द्वारा बनाया गया है।

बृहदेश्वर मंदिर को ग्रेनाइट का उपयोग करके संपादित किया जाता है, जिसे #तिरुचिरापल्ली के पास ग्रेनाइट स्रोतों से लाया जा सकता है, जो पश्चिमी तंजावुर से लगभग 60 किलोमीटर दूर स्थित है।

बृहदेश्वर मंदिर को 'बिग टेम्पल' के नाम से भी जाना जाता है।