*6 हज़ार साल तक गुफा में बंद रहा ये शिवलिंग, फिर भी नहीं हुआ कुछ*..??👍🙏🎉🤔👇👇
हिंदू धर्म के प्रमुख देव भगवान शंकर के दुनियाभर में कई मंदिर आदि स्थापित है। ज्यादातर भोलेनाथ शिवलिंग के रूप में ही विराजमान हैं। कहा जाता है कि ये एक मात्र ऐसे देव माने जाते हैं जिनका जन्म कैसे हुआ इसके बारे में किसी को नहीं पता। इन्हें ही संसार के रचयिता कहा गया है और यही हैं जो संसार का विनाश करने की ताकत रखते हैं। केवल भारत देश में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया इन्हें पूजती है। हम जानते हैं आप में से ऐसे बहुत से लोग होंगे जिन्हें इस बात पर विश्वास नहीं होगा। इसलिए आज हम आपको कुछ ऐसा बताने जा रहे हैं, जिससे आपको इस बात पर यकीनन विश्वास हो जाएगा। भारत में तो ऐसी कई जगहें हैं जहां शिव शंकर बसे हुए हैं, लेकिन क्या आपको पता है भोलेनाथ के भक्तों ने अफ्रीका में भी उन्हें विराजित कर रखा है। इससे संबंधित प्राप्त हुई जानकारी के अनुसार लगभग 6 हज़ार साल पुराना शिवलिंग अफ्रीका में स्थापित हैं।
बता दें कि अफ्रीका या कालद्वीप, एशिया के बाद विश्व का सबसे बड़ा महाद्वीप माना जाता है। वैसे तो शिव जी के मंदिर विश्वभर में हैं, चाहे अमेरिका हो, ऑस्ट्रेलिया हो या फिर अफ्रीका। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अफ्रीका में 6 हज़ार वर्ष पहल से ही हिंदू धर्म प्रचलित था। लोगों का कहना है कि दक्षिण अफ्रीका में भी शिव की मूर्ति का पाया जाना इस बात का सबूत है कि शिव की महिमा और प्रताप पूरे विश्व भर में है।
साउथ अफ्रीका के सुद्वारा नाम की एक गुफा में पुरातत्वविदों को महादेव का करीबन 6 हज़ार साल पुराना शिवलिंग मिला, जो कठोर ग्रेनाइट पत्थर से बना हुआ है। इस शिवलिंग को खोजने वाले पुरातत्ववेत्ता का कहना है कि वे हैरान हैं कि ये शिवलिंग इतने वर्षों से यहां आज तक सुरक्षित कैसे रह पाया। अब इस सवाल का जवाब कोई कैसे दे सकता है, क्योंकि भगवान शंकर के रूप शिवलिंग को कोई किसी भी तरह की हानि कैसे पहुंचा सकता है। इस शिवलिंग के सही सलामत होने का केवल एक ही मतलब हो सकता है कि जिस में खुद भगवान शंकर हो वहां किसी भी प्रकार की कोई घटना होने की कोई संभावना नहीं होती।
MB✍️👆👇👌👍💪😎🙏💐
हिंदू धर्म के प्रमुख देव भगवान शंकर के दुनियाभर में कई मंदिर आदि स्थापित है। ज्यादातर भोलेनाथ शिवलिंग के रूप में ही विराजमान हैं। कहा जाता है कि ये एक मात्र ऐसे देव माने जाते हैं जिनका जन्म कैसे हुआ इसके बारे में किसी को नहीं पता। इन्हें ही संसार के रचयिता कहा गया है और यही हैं जो संसार का विनाश करने की ताकत रखते हैं। केवल भारत देश में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया इन्हें पूजती है। हम जानते हैं आप में से ऐसे बहुत से लोग होंगे जिन्हें इस बात पर विश्वास नहीं होगा। इसलिए आज हम आपको कुछ ऐसा बताने जा रहे हैं, जिससे आपको इस बात पर यकीनन विश्वास हो जाएगा। भारत में तो ऐसी कई जगहें हैं जहां शिव शंकर बसे हुए हैं, लेकिन क्या आपको पता है भोलेनाथ के भक्तों ने अफ्रीका में भी उन्हें विराजित कर रखा है। इससे संबंधित प्राप्त हुई जानकारी के अनुसार लगभग 6 हज़ार साल पुराना शिवलिंग अफ्रीका में स्थापित हैं।
बता दें कि अफ्रीका या कालद्वीप, एशिया के बाद विश्व का सबसे बड़ा महाद्वीप माना जाता है। वैसे तो शिव जी के मंदिर विश्वभर में हैं, चाहे अमेरिका हो, ऑस्ट्रेलिया हो या फिर अफ्रीका। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अफ्रीका में 6 हज़ार वर्ष पहल से ही हिंदू धर्म प्रचलित था। लोगों का कहना है कि दक्षिण अफ्रीका में भी शिव की मूर्ति का पाया जाना इस बात का सबूत है कि शिव की महिमा और प्रताप पूरे विश्व भर में है।
साउथ अफ्रीका के सुद्वारा नाम की एक गुफा में पुरातत्वविदों को महादेव का करीबन 6 हज़ार साल पुराना शिवलिंग मिला, जो कठोर ग्रेनाइट पत्थर से बना हुआ है। इस शिवलिंग को खोजने वाले पुरातत्ववेत्ता का कहना है कि वे हैरान हैं कि ये शिवलिंग इतने वर्षों से यहां आज तक सुरक्षित कैसे रह पाया। अब इस सवाल का जवाब कोई कैसे दे सकता है, क्योंकि भगवान शंकर के रूप शिवलिंग को कोई किसी भी तरह की हानि कैसे पहुंचा सकता है। इस शिवलिंग के सही सलामत होने का केवल एक ही मतलब हो सकता है कि जिस में खुद भगवान शंकर हो वहां किसी भी प्रकार की कोई घटना होने की कोई संभावना नहीं होती।
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गुजरात के सूरत से आई यह तस्वीरे देखकर हृदय को बड़ा सन्तुष्टि मिला।
आजकल के सभी युवा भटके हुये नहीं है, सही नौजवान टूकड़े-टूकड़े गैंग के समर्थक नहीं है।
Small acts of kindness can make a big difference. #MondayMotivation
सूरत के कुछ छात्र हर कुछ दिनों में मकई खरीदने के लिए अपनी पॉकेट मनी खर्च करते हैं और फिर इसे अपने क्षेत्र के पेड़ों पर रख देते हैं ताकि पक्षी और गिलहरी भूखे न रहें। हमें इन बच्चों पर बहुत गर्व है। वे हमें भविष्य की आशा देते हैं.....
#wecandobetter #WeDontDeserveThisPlanet
साभार- मेरे प्रिय मित्र @Amitabh Nishad Amh जी के wall से
आजकल के सभी युवा भटके हुये नहीं है, सही नौजवान टूकड़े-टूकड़े गैंग के समर्थक नहीं है।
Small acts of kindness can make a big difference. #MondayMotivation
सूरत के कुछ छात्र हर कुछ दिनों में मकई खरीदने के लिए अपनी पॉकेट मनी खर्च करते हैं और फिर इसे अपने क्षेत्र के पेड़ों पर रख देते हैं ताकि पक्षी और गिलहरी भूखे न रहें। हमें इन बच्चों पर बहुत गर्व है। वे हमें भविष्य की आशा देते हैं.....
#wecandobetter #WeDontDeserveThisPlanet
साभार- मेरे प्रिय मित्र @Amitabh Nishad Amh जी के wall से
*अद्भुत भारत*
दोनों हाथ की उंगलियाँ एक दूसरे को पीछे से छूती हैं! यह वास्तव में हार्ड रॉक पर की गई नक्काशी है और इसे 12 वीं शताब्दी में हमारे पूर्वजों ने बनाया है ।
यहाँ किस प्रकार की तकनीक का उपयोग किया गया है?
क्या किसी बुद्धिजीवी के पास कोई जवाब है ?
*(चेन्नकेशवा मंदिर, कर्नाटक)*
दोनों हाथ की उंगलियाँ एक दूसरे को पीछे से छूती हैं! यह वास्तव में हार्ड रॉक पर की गई नक्काशी है और इसे 12 वीं शताब्दी में हमारे पूर्वजों ने बनाया है ।
यहाँ किस प्रकार की तकनीक का उपयोग किया गया है?
क्या किसी बुद्धिजीवी के पास कोई जवाब है ?
*(चेन्नकेशवा मंदिर, कर्नाटक)*
*मौलिन्नोंग (एशिया का सबसे स्वच्छ गांव)*
मेघालय के खासी पहाड़ियों के बीच मौलिन्नोंग गांव एशिया के सबसे स्वच्छ गांव के रूप में विश्वप्रसिद्ध है.
इस गांव में प्रवेश करने के लिए ₹50 की प्रवेश शुल्क देना होगा.
यहाँ के मनमोहक दृश्य और अद्भुत सुंदरता प्राकृतिक खूबसूरती और शांति का अनुभव कराने के लिए पर्याप्त है.
इस गांव के हरे-भरे बागानों में एक अलग ही शांति और ठहराव है.
यहाँ स्थित बैलेंसिंग रॉक गांव के बाहरी क्षेत्र में एक छोटे पत्थर पर टिकी हुई है जो तेज़ बारिश और मौसम की मार के बावजूद यूं ही अडिग है. इसे स्थानीय लोगों में ‘मॉ रिंगकू शरतिया’ कहते हैं.
*मेरी संस्कृति ..मेरा देश ..मेरा अभिमान 🇮🇳*
वीडियो➡️🕰️.30.sec
मेघालय के खासी पहाड़ियों के बीच मौलिन्नोंग गांव एशिया के सबसे स्वच्छ गांव के रूप में विश्वप्रसिद्ध है.
इस गांव में प्रवेश करने के लिए ₹50 की प्रवेश शुल्क देना होगा.
यहाँ के मनमोहक दृश्य और अद्भुत सुंदरता प्राकृतिक खूबसूरती और शांति का अनुभव कराने के लिए पर्याप्त है.
इस गांव के हरे-भरे बागानों में एक अलग ही शांति और ठहराव है.
यहाँ स्थित बैलेंसिंग रॉक गांव के बाहरी क्षेत्र में एक छोटे पत्थर पर टिकी हुई है जो तेज़ बारिश और मौसम की मार के बावजूद यूं ही अडिग है. इसे स्थानीय लोगों में ‘मॉ रिंगकू शरतिया’ कहते हैं.
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*कुंभलगढ़ किला , राजस्थान*
राजस्थान के राजसमन्द जिले में स्थित इस दुर्ग का निर्माण महाराणा कुम्भा ने सन 1459 कराया था। इस किले को 'अजयगढ़' कहा जाता था क्योंकि इस किले पर विजय प्राप्त करना दुष्कर कार्य था।
कुम्भलगढ़ किले को मेवाड की आँख कहते है यह दुर्ग कई घाटियों व पहाड़ियों को मिला कर बनाया गया है जिससे यह प्राकृतिक सुरक्षात्मक आधार पाकर अजय रहा।
इस दुर्ग में ऊँचे स्थानों पर महल, मंदिर व आवासीय इमारते बनाने, समतल भूमि का उपयोग कृषि कार्य के लिए एवं ढलान वाले भागो का उपयोग जलाशयों के लिए कर इस दुर्ग को यथासंभव स्वाबलंबी बनाया गया।
महाराणा प्रताप की जन्म स्थली कुम्भलगढ़ एक तरह से मेवाड़ की संकटकालीन राजधानी रहा है।
महाराणा कुम्भा से लेकर महाराणा राज सिंह के समय तक मेवाड़ पर हुए आक्रमणों के समय राजपरिवार इसी दुर्ग में रहा।
माड गायक इस दुर्ग की प्रशंसा में अक्सर गीत गाते हैं :
कुम्भलगढ़ कटारगढ़ पाजिज अवलन फेर।
संवली मत दे साजना, बसुंज, कुम्भल्मेर॥
*मेरी संस्कृति ..मेरा देश ..मेरा अभिमान 🚩*
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राजस्थान के राजसमन्द जिले में स्थित इस दुर्ग का निर्माण महाराणा कुम्भा ने सन 1459 कराया था। इस किले को 'अजयगढ़' कहा जाता था क्योंकि इस किले पर विजय प्राप्त करना दुष्कर कार्य था।
कुम्भलगढ़ किले को मेवाड की आँख कहते है यह दुर्ग कई घाटियों व पहाड़ियों को मिला कर बनाया गया है जिससे यह प्राकृतिक सुरक्षात्मक आधार पाकर अजय रहा।
इस दुर्ग में ऊँचे स्थानों पर महल, मंदिर व आवासीय इमारते बनाने, समतल भूमि का उपयोग कृषि कार्य के लिए एवं ढलान वाले भागो का उपयोग जलाशयों के लिए कर इस दुर्ग को यथासंभव स्वाबलंबी बनाया गया।
महाराणा प्रताप की जन्म स्थली कुम्भलगढ़ एक तरह से मेवाड़ की संकटकालीन राजधानी रहा है।
महाराणा कुम्भा से लेकर महाराणा राज सिंह के समय तक मेवाड़ पर हुए आक्रमणों के समय राजपरिवार इसी दुर्ग में रहा।
माड गायक इस दुर्ग की प्रशंसा में अक्सर गीत गाते हैं :
कुम्भलगढ़ कटारगढ़ पाजिज अवलन फेर।
संवली मत दे साजना, बसुंज, कुम्भल्मेर॥
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*माँ हरसिद्धि मंदिर , उज्जैन मध्य प्रदेश* 🌸
माता के 51 शक्तिपीठों में से एक चमत्कारी शक्तिपीठ है । इस मंदिर में दीप स्तंभों की स्थापना राजा विक्रमादित्य ने करवाई थी। यदि अनुमान लगया जाए तो दीप स्तंभ 2 हजार साल से अधिक पुराने हैं। इस स्थान पर देवी सती की कोहनी गिरी थी, जिसके बाद यहां शक्तिपीठ स्थापित हो गया।
मंदिर में लोगों की आकर्षण का केंद्र यहां प्रांगण में मौजूद 2 दीप स्तंभ हैं। यह स्तंभ लगभग 51 फीट ऊंचे हैं, दोनों दीप स्तंभों में मिलाकर लगभग 1 हजार 11 दीपक हैं। कहा जाता है की इस स्तंभों पर दीप जलाना बहुत ही कठीन है।
*मेरी संस्कृति ..मेरा देश ..मेरा अभिमान 🚩*
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माता के 51 शक्तिपीठों में से एक चमत्कारी शक्तिपीठ है । इस मंदिर में दीप स्तंभों की स्थापना राजा विक्रमादित्य ने करवाई थी। यदि अनुमान लगया जाए तो दीप स्तंभ 2 हजार साल से अधिक पुराने हैं। इस स्थान पर देवी सती की कोहनी गिरी थी, जिसके बाद यहां शक्तिपीठ स्थापित हो गया।
मंदिर में लोगों की आकर्षण का केंद्र यहां प्रांगण में मौजूद 2 दीप स्तंभ हैं। यह स्तंभ लगभग 51 फीट ऊंचे हैं, दोनों दीप स्तंभों में मिलाकर लगभग 1 हजार 11 दीपक हैं। कहा जाता है की इस स्तंभों पर दीप जलाना बहुत ही कठीन है।
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🙏🏻🌹 *जय जय श्री राधे गोविंद*🙏🏻🌹
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*🙏🏻🌹 हरे कृष्ण 🙏🏻🌹*
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*हम्पी , कर्नाटक*
हम्पी मध्यकालीन हिंदू राज्य विजयनगर साम्राज्य की राजधानी थी। तुंगभद्रा नदी के तट पर स्थित यह नगर अब हम्पी (पम्पा से निकला हुआ) नाम से जाना जाता है और अब केवल खंडहरों के रूप में ही अवशेष है। इन्हें देखने से प्रतीत होता है कि किसी समय में यहाँ एक समृद्धशाली सभ्यता निवास करती होगी। भारत के कर्नाटक राज्य में स्थित यह नगर यूनेस्को के विश्व के विरासत स्थलों में शामिल किया गया है।
हर साल यहाँ हज़ारों की संख्या में पर्यटक और तीर्थयात्री आते हैं। हम्पी का विशाल फैलाव गोल चट्टानों के टीलों में विस्तृत है। घाटियों और टीलों के बीच पाँच सौ से भी अधिक स्मारक चिह्न हैं। इनमें मंदिर, महल, तहख़ाने, जल-खंडहर, पुराने बाज़ार, शाही मंडप, गढ़, चबूतरे, राजकोष आदि असंख्य इमारतें हैं।
*मेरी संस्कृति ..मेरा देश ..मेरा अभिमान 🚩*
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हम्पी मध्यकालीन हिंदू राज्य विजयनगर साम्राज्य की राजधानी थी। तुंगभद्रा नदी के तट पर स्थित यह नगर अब हम्पी (पम्पा से निकला हुआ) नाम से जाना जाता है और अब केवल खंडहरों के रूप में ही अवशेष है। इन्हें देखने से प्रतीत होता है कि किसी समय में यहाँ एक समृद्धशाली सभ्यता निवास करती होगी। भारत के कर्नाटक राज्य में स्थित यह नगर यूनेस्को के विश्व के विरासत स्थलों में शामिल किया गया है।
हर साल यहाँ हज़ारों की संख्या में पर्यटक और तीर्थयात्री आते हैं। हम्पी का विशाल फैलाव गोल चट्टानों के टीलों में विस्तृत है। घाटियों और टीलों के बीच पाँच सौ से भी अधिक स्मारक चिह्न हैं। इनमें मंदिर, महल, तहख़ाने, जल-खंडहर, पुराने बाज़ार, शाही मंडप, गढ़, चबूतरे, राजकोष आदि असंख्य इमारतें हैं।
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यह साधु कभी विश्व का सबसे धनवान व्यक्ति था ............
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चित्र में जिन्हें आप देख रहे है, यह व्यक्ति कोई साधारण व्यक्ति नही, बल्कि अपने समय मे सबसे अधिक रियासतों के स्वामी आमेर के महाराजा रामसिंहदित्य है। कांग्रेस काल में जब आमेर किले से खजाना निकाला गया था, तब उस समय जयपुर से लेकर दिल्ली तक के मार्ग में सिर्फ सोना ही सोना था ।
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ऐसा धनवान व्यक्ति, अतुल सम्पति का स्वामी, साधु था। शायद साधु होना इसे ही कहते है।
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आमेर का इतिहास बिगड़ने का सबसे बड़ा कारण यही रहा। कर्नल टॉड अंग्रेज काल में जहां जागरूक लोग कागजों में अपना इतिहास मजबूत कर रहे थे, वही सबसे अच्छा इतिहास होने के बाद भी, जयपुर राजवंश इतिहास लेखन को लेकर जागरूक नही रहें।
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जयपुर के राजा तो इतिहास-वर्तमान-भविष्य सबकी चिंता छोड़ धूणी लगाकर बैठते थे।
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महाराज बड़ी कम आयु में ही स्वर्ग को भी प्रस्थान कर गए । कहते है जब आपका देहान्त हुआ, पूरे आमेरवासियों ने अपने सिर का मुंडन करवाया था । यह राजा और प्रजा के बीच का सम्बन्ध था।
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चित्र में जिन्हें आप देख रहे है, यह व्यक्ति कोई साधारण व्यक्ति नही, बल्कि अपने समय मे सबसे अधिक रियासतों के स्वामी आमेर के महाराजा रामसिंहदित्य है। कांग्रेस काल में जब आमेर किले से खजाना निकाला गया था, तब उस समय जयपुर से लेकर दिल्ली तक के मार्ग में सिर्फ सोना ही सोना था ।
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ऐसा धनवान व्यक्ति, अतुल सम्पति का स्वामी, साधु था। शायद साधु होना इसे ही कहते है।
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आमेर का इतिहास बिगड़ने का सबसे बड़ा कारण यही रहा। कर्नल टॉड अंग्रेज काल में जहां जागरूक लोग कागजों में अपना इतिहास मजबूत कर रहे थे, वही सबसे अच्छा इतिहास होने के बाद भी, जयपुर राजवंश इतिहास लेखन को लेकर जागरूक नही रहें।
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जयपुर के राजा तो इतिहास-वर्तमान-भविष्य सबकी चिंता छोड़ धूणी लगाकर बैठते थे।
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महाराज बड़ी कम आयु में ही स्वर्ग को भी प्रस्थान कर गए । कहते है जब आपका देहान्त हुआ, पूरे आमेरवासियों ने अपने सिर का मुंडन करवाया था । यह राजा और प्रजा के बीच का सम्बन्ध था।
*चम्फाई नगर , मिजोरम*
चम्फाई भारतीय राज्य मिज़ोरम का एक सीमावर्ती कस्बा है। यह राज्य के आठ ज़िलों में से एक चम्फाई ज़िले का मुख्यालय भी है। भारत-म्यांमार सीमा पर स्थित होने के कारण इस कस्बे का सामरिक महत्व भी है। इस कारण से यह भारत म्यांमार के मध्य प्रमुख व्यापार गलियारा भी है।
चम्फाई की जलवायु न ज्यादा गर्म न ही ज्यादा सर्द है। ग्रीष्मकाल में तापमान १०°C से २०°C के मध्य तथा शीतकाल में १५°C से ३०°C के मध्य रहता है।
*मेरी संस्कृति ..मेरा देश ..मेरा अभिमान 🇮🇳*
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चम्फाई भारतीय राज्य मिज़ोरम का एक सीमावर्ती कस्बा है। यह राज्य के आठ ज़िलों में से एक चम्फाई ज़िले का मुख्यालय भी है। भारत-म्यांमार सीमा पर स्थित होने के कारण इस कस्बे का सामरिक महत्व भी है। इस कारण से यह भारत म्यांमार के मध्य प्रमुख व्यापार गलियारा भी है।
चम्फाई की जलवायु न ज्यादा गर्म न ही ज्यादा सर्द है। ग्रीष्मकाल में तापमान १०°C से २०°C के मध्य तथा शीतकाल में १५°C से ३०°C के मध्य रहता है।
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