*माँ हरसिद्धि मंदिर , उज्जैन मध्य प्रदेश* 🌸
माता के 51 शक्तिपीठों में से एक चमत्कारी शक्तिपीठ है । इस मंदिर में दीप स्तंभों की स्थापना राजा विक्रमादित्य ने करवाई थी। यदि अनुमान लगया जाए तो दीप स्तंभ 2 हजार साल से अधिक पुराने हैं। इस स्थान पर देवी सती की कोहनी गिरी थी, जिसके बाद यहां शक्तिपीठ स्थापित हो गया।
मंदिर में लोगों की आकर्षण का केंद्र यहां प्रांगण में मौजूद 2 दीप स्तंभ हैं। यह स्तंभ लगभग 51 फीट ऊंचे हैं, दोनों दीप स्तंभों में मिलाकर लगभग 1 हजार 11 दीपक हैं। कहा जाता है की इस स्तंभों पर दीप जलाना बहुत ही कठीन है।
*मेरी संस्कृति ..मेरा देश ..मेरा अभिमान 🚩*
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माता के 51 शक्तिपीठों में से एक चमत्कारी शक्तिपीठ है । इस मंदिर में दीप स्तंभों की स्थापना राजा विक्रमादित्य ने करवाई थी। यदि अनुमान लगया जाए तो दीप स्तंभ 2 हजार साल से अधिक पुराने हैं। इस स्थान पर देवी सती की कोहनी गिरी थी, जिसके बाद यहां शक्तिपीठ स्थापित हो गया।
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Video from 🌹 *श्री हरि कृपा* 🌹🙏🏻🙏🏻
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🙏🏻🌹 *जय जय श्री राधे गोविंद*🙏🏻🌹
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*हम्पी , कर्नाटक*
हम्पी मध्यकालीन हिंदू राज्य विजयनगर साम्राज्य की राजधानी थी। तुंगभद्रा नदी के तट पर स्थित यह नगर अब हम्पी (पम्पा से निकला हुआ) नाम से जाना जाता है और अब केवल खंडहरों के रूप में ही अवशेष है। इन्हें देखने से प्रतीत होता है कि किसी समय में यहाँ एक समृद्धशाली सभ्यता निवास करती होगी। भारत के कर्नाटक राज्य में स्थित यह नगर यूनेस्को के विश्व के विरासत स्थलों में शामिल किया गया है।
हर साल यहाँ हज़ारों की संख्या में पर्यटक और तीर्थयात्री आते हैं। हम्पी का विशाल फैलाव गोल चट्टानों के टीलों में विस्तृत है। घाटियों और टीलों के बीच पाँच सौ से भी अधिक स्मारक चिह्न हैं। इनमें मंदिर, महल, तहख़ाने, जल-खंडहर, पुराने बाज़ार, शाही मंडप, गढ़, चबूतरे, राजकोष आदि असंख्य इमारतें हैं।
*मेरी संस्कृति ..मेरा देश ..मेरा अभिमान 🚩*
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हम्पी मध्यकालीन हिंदू राज्य विजयनगर साम्राज्य की राजधानी थी। तुंगभद्रा नदी के तट पर स्थित यह नगर अब हम्पी (पम्पा से निकला हुआ) नाम से जाना जाता है और अब केवल खंडहरों के रूप में ही अवशेष है। इन्हें देखने से प्रतीत होता है कि किसी समय में यहाँ एक समृद्धशाली सभ्यता निवास करती होगी। भारत के कर्नाटक राज्य में स्थित यह नगर यूनेस्को के विश्व के विरासत स्थलों में शामिल किया गया है।
हर साल यहाँ हज़ारों की संख्या में पर्यटक और तीर्थयात्री आते हैं। हम्पी का विशाल फैलाव गोल चट्टानों के टीलों में विस्तृत है। घाटियों और टीलों के बीच पाँच सौ से भी अधिक स्मारक चिह्न हैं। इनमें मंदिर, महल, तहख़ाने, जल-खंडहर, पुराने बाज़ार, शाही मंडप, गढ़, चबूतरे, राजकोष आदि असंख्य इमारतें हैं।
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यह साधु कभी विश्व का सबसे धनवान व्यक्ति था ............
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चित्र में जिन्हें आप देख रहे है, यह व्यक्ति कोई साधारण व्यक्ति नही, बल्कि अपने समय मे सबसे अधिक रियासतों के स्वामी आमेर के महाराजा रामसिंहदित्य है। कांग्रेस काल में जब आमेर किले से खजाना निकाला गया था, तब उस समय जयपुर से लेकर दिल्ली तक के मार्ग में सिर्फ सोना ही सोना था ।
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ऐसा धनवान व्यक्ति, अतुल सम्पति का स्वामी, साधु था। शायद साधु होना इसे ही कहते है।
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आमेर का इतिहास बिगड़ने का सबसे बड़ा कारण यही रहा। कर्नल टॉड अंग्रेज काल में जहां जागरूक लोग कागजों में अपना इतिहास मजबूत कर रहे थे, वही सबसे अच्छा इतिहास होने के बाद भी, जयपुर राजवंश इतिहास लेखन को लेकर जागरूक नही रहें।
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जयपुर के राजा तो इतिहास-वर्तमान-भविष्य सबकी चिंता छोड़ धूणी लगाकर बैठते थे।
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महाराज बड़ी कम आयु में ही स्वर्ग को भी प्रस्थान कर गए । कहते है जब आपका देहान्त हुआ, पूरे आमेरवासियों ने अपने सिर का मुंडन करवाया था । यह राजा और प्रजा के बीच का सम्बन्ध था।
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चित्र में जिन्हें आप देख रहे है, यह व्यक्ति कोई साधारण व्यक्ति नही, बल्कि अपने समय मे सबसे अधिक रियासतों के स्वामी आमेर के महाराजा रामसिंहदित्य है। कांग्रेस काल में जब आमेर किले से खजाना निकाला गया था, तब उस समय जयपुर से लेकर दिल्ली तक के मार्ग में सिर्फ सोना ही सोना था ।
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ऐसा धनवान व्यक्ति, अतुल सम्पति का स्वामी, साधु था। शायद साधु होना इसे ही कहते है।
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आमेर का इतिहास बिगड़ने का सबसे बड़ा कारण यही रहा। कर्नल टॉड अंग्रेज काल में जहां जागरूक लोग कागजों में अपना इतिहास मजबूत कर रहे थे, वही सबसे अच्छा इतिहास होने के बाद भी, जयपुर राजवंश इतिहास लेखन को लेकर जागरूक नही रहें।
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जयपुर के राजा तो इतिहास-वर्तमान-भविष्य सबकी चिंता छोड़ धूणी लगाकर बैठते थे।
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महाराज बड़ी कम आयु में ही स्वर्ग को भी प्रस्थान कर गए । कहते है जब आपका देहान्त हुआ, पूरे आमेरवासियों ने अपने सिर का मुंडन करवाया था । यह राजा और प्रजा के बीच का सम्बन्ध था।
*चम्फाई नगर , मिजोरम*
चम्फाई भारतीय राज्य मिज़ोरम का एक सीमावर्ती कस्बा है। यह राज्य के आठ ज़िलों में से एक चम्फाई ज़िले का मुख्यालय भी है। भारत-म्यांमार सीमा पर स्थित होने के कारण इस कस्बे का सामरिक महत्व भी है। इस कारण से यह भारत म्यांमार के मध्य प्रमुख व्यापार गलियारा भी है।
चम्फाई की जलवायु न ज्यादा गर्म न ही ज्यादा सर्द है। ग्रीष्मकाल में तापमान १०°C से २०°C के मध्य तथा शीतकाल में १५°C से ३०°C के मध्य रहता है।
*मेरी संस्कृति ..मेरा देश ..मेरा अभिमान 🇮🇳*
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चम्फाई भारतीय राज्य मिज़ोरम का एक सीमावर्ती कस्बा है। यह राज्य के आठ ज़िलों में से एक चम्फाई ज़िले का मुख्यालय भी है। भारत-म्यांमार सीमा पर स्थित होने के कारण इस कस्बे का सामरिक महत्व भी है। इस कारण से यह भारत म्यांमार के मध्य प्रमुख व्यापार गलियारा भी है।
चम्फाई की जलवायु न ज्यादा गर्म न ही ज्यादा सर्द है। ग्रीष्मकाल में तापमान १०°C से २०°C के मध्य तथा शीतकाल में १५°C से ३०°C के मध्य रहता है।
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*जटोली शिव मंदिर, हिमाचल प्रदेश*
देवभूमि हिमाचल में आदिदेव महादेव को समर्पित एशिया का सबसे ऊँचा शिव मंदिर अवस्थित है. प्रांत के सोलन क्षेत्र में स्थित यह मंदिर जटोली शिव मंदिर के नाम से जाना जाता है.
आश्चर्य की बात यह है कि भारत के उत्तरी क्षेत्र में स्थित इस मंदिर को द्रविड़ शैली में निर्मित किया गया है.
मान्यता है कि भगवान शिव ने इस स्थान पर एक दिन विश्राम किया था और उनके बाद एक परम सिद्ध योगी स्वामी कृष्णानंद परमहंस ने यहाँ आकर तपस्या की.
स्वामी जी के मार्गदर्शन और दिशानिर्देश के बाद इस मंदिर का निर्माण किया गया.
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देवभूमि हिमाचल में आदिदेव महादेव को समर्पित एशिया का सबसे ऊँचा शिव मंदिर अवस्थित है. प्रांत के सोलन क्षेत्र में स्थित यह मंदिर जटोली शिव मंदिर के नाम से जाना जाता है.
आश्चर्य की बात यह है कि भारत के उत्तरी क्षेत्र में स्थित इस मंदिर को द्रविड़ शैली में निर्मित किया गया है.
मान्यता है कि भगवान शिव ने इस स्थान पर एक दिन विश्राम किया था और उनके बाद एक परम सिद्ध योगी स्वामी कृष्णानंद परमहंस ने यहाँ आकर तपस्या की.
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*ट्यूलिप उद्यान, श्रीनगर*
60 से अधिक प्रजातियों के 15 लाख से अधिक पौधों के साथ एशिया का सबसे बड़ा ट्यूलिप उद्यान श्रीनगर में स्थित है जो अपने मनोरम सुंदरता और अद्भुत विशालता से सभी का ध्यान आकर्षित करता है.
प्रसिद्ध डल झील के आमने स्थित यह ट्यूलिप उद्यान लगभग 12 हेक्टेयर क्षेत्र में जहाँ विश्वभर के पौधों की दुर्लभ प्रजातियां उपस्थित हैं.
कश्मीर का वसंत ही उसे स्वर्ग की अनुभूति कराता है और इस उद्यान उगने वाले फूल वसंत के आगमन का संकेत देते हैं. यह उद्यान वर्ष में केवल एक माह के लिए पर्यटकों के लिए खोला जाता है.
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60 से अधिक प्रजातियों के 15 लाख से अधिक पौधों के साथ एशिया का सबसे बड़ा ट्यूलिप उद्यान श्रीनगर में स्थित है जो अपने मनोरम सुंदरता और अद्भुत विशालता से सभी का ध्यान आकर्षित करता है.
प्रसिद्ध डल झील के आमने स्थित यह ट्यूलिप उद्यान लगभग 12 हेक्टेयर क्षेत्र में जहाँ विश्वभर के पौधों की दुर्लभ प्रजातियां उपस्थित हैं.
कश्मीर का वसंत ही उसे स्वर्ग की अनुभूति कराता है और इस उद्यान उगने वाले फूल वसंत के आगमन का संकेत देते हैं. यह उद्यान वर्ष में केवल एक माह के लिए पर्यटकों के लिए खोला जाता है.
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