पीली साड़ी गले में कृष्ण भगवान की कंठमाला.. आज के युग की यशोदा मां 🙏
शायद आप लोग इन्हें नहीं जानते लेकिन बहुत शीघ्र ही पूरा भारतवर्ष इन्हे जान जाएगा... धर्म के प्रति इनकी भक्ति वह त्याग के आगे हमारी सभी पूजा अर्चना छोटी रह जाती हैं...
मथुरा में श्री बांके बिहारी मंदिर के बाहर पिछले 30 वर्षों से मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के जूते चप्पलों की रखवाली करने वाली इन माता का नाम यशोदा है.. मात्र 20 वर्ष की आयु में इनके पति की मृत्यु हो गई थी, आज माताजी 50 साल की हो चुकी हैं इस दौरान माताजी ने श्रद्धालुओं के जूते चप्पलों की रखवाली करके 51 लाख 10 हजार 25 रुपए 50 पैसे इकट्ठा करके 40 लाख रुपए की रकम से एक गौशाला मंदिर धर्मशाला का निर्माण कर डाला...
धर्म क्या है यह इन यशोदा मां से जानिए.. आप लोगों ने पैसों के पीछे भागने वाली फिल्मी सितारों नेताओं खेल सेलिब्रिटी को शेयर करके बहुत फेमस किया आइए सब मिलकर यशोदा मां को भी प्रसिद्ध करते हैं और इन्हें इनका सम्मान दिलाते हैं
🙏🙏 जय श्री राधे 🙏🙏
शायद आप लोग इन्हें नहीं जानते लेकिन बहुत शीघ्र ही पूरा भारतवर्ष इन्हे जान जाएगा... धर्म के प्रति इनकी भक्ति वह त्याग के आगे हमारी सभी पूजा अर्चना छोटी रह जाती हैं...
मथुरा में श्री बांके बिहारी मंदिर के बाहर पिछले 30 वर्षों से मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के जूते चप्पलों की रखवाली करने वाली इन माता का नाम यशोदा है.. मात्र 20 वर्ष की आयु में इनके पति की मृत्यु हो गई थी, आज माताजी 50 साल की हो चुकी हैं इस दौरान माताजी ने श्रद्धालुओं के जूते चप्पलों की रखवाली करके 51 लाख 10 हजार 25 रुपए 50 पैसे इकट्ठा करके 40 लाख रुपए की रकम से एक गौशाला मंदिर धर्मशाला का निर्माण कर डाला...
धर्म क्या है यह इन यशोदा मां से जानिए.. आप लोगों ने पैसों के पीछे भागने वाली फिल्मी सितारों नेताओं खेल सेलिब्रिटी को शेयर करके बहुत फेमस किया आइए सब मिलकर यशोदा मां को भी प्रसिद्ध करते हैं और इन्हें इनका सम्मान दिलाते हैं
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Forwarded from The Narrative
लुम्बिनी (महात्मा बुद्ध की जन्म स्थली)
बौद्ध मत के प्रवर्तक महात्मा गौतम बुद्ध का जन्म 'सिद्धार्थ' के रूप में आज से ढाई हजार वर्ष पूर्व सन 623 ईसापूर्व में हुआ था. उनकी जन्मस्थली थी लुम्बिनी, जो वर्तमान में नेपाल के कपिलवस्तु में स्थित है.
इस स्थान पर सम्राट अशोक द्वारा स्थापित अशोक स्तम्भ में ब्राह्मी लिपिकृत प्राकृत भाषा में भगवान बुद्ध का जन्म स्थान होने का वर्णन किया हुआ शिलापत्र अवस्थित है.
युनेस्को ने बुद्ध के जन्मस्थान को ऐतिहासिक महत्व की वैश्विक धरोहर घोषित कर रखा है.
मेरी संस्कृति ..मेरा देश ..मेरा अभिमान 🚩
बौद्ध मत के प्रवर्तक महात्मा गौतम बुद्ध का जन्म 'सिद्धार्थ' के रूप में आज से ढाई हजार वर्ष पूर्व सन 623 ईसापूर्व में हुआ था. उनकी जन्मस्थली थी लुम्बिनी, जो वर्तमान में नेपाल के कपिलवस्तु में स्थित है.
इस स्थान पर सम्राट अशोक द्वारा स्थापित अशोक स्तम्भ में ब्राह्मी लिपिकृत प्राकृत भाषा में भगवान बुद्ध का जन्म स्थान होने का वर्णन किया हुआ शिलापत्र अवस्थित है.
युनेस्को ने बुद्ध के जन्मस्थान को ऐतिहासिक महत्व की वैश्विक धरोहर घोषित कर रखा है.
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आदि रत्नेश्वर मंदिर, तिरुवदनई
तमिलनाडु का तिरुवदनई क्षेत्र सनातन मंदिरों की नगरी के नाम से प्रसिद्ध है. यहाँ महादेव को समर्पित आदि रत्नेश्वर मंदिर अवस्थित है जो अपनी अद्भुत एवं अद्वितीय वास्तुकला के लिए विश्वविख्यात है.
द्रविड शैली में निर्मित इस मंदिर में पांडवों में एक अर्जुन ने दर्शन कर सोमास्कन्द स्थापित किया था.
मुनि अगस्त्य, महर्षि मार्कण्डेय एवं दिव्य कामधेनु ने यहाँ महादेव की उपासना की थी.
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तमिलनाडु का तिरुवदनई क्षेत्र सनातन मंदिरों की नगरी के नाम से प्रसिद्ध है. यहाँ महादेव को समर्पित आदि रत्नेश्वर मंदिर अवस्थित है जो अपनी अद्भुत एवं अद्वितीय वास्तुकला के लिए विश्वविख्यात है.
द्रविड शैली में निर्मित इस मंदिर में पांडवों में एक अर्जुन ने दर्शन कर सोमास्कन्द स्थापित किया था.
मुनि अगस्त्य, महर्षि मार्कण्डेय एवं दिव्य कामधेनु ने यहाँ महादेव की उपासना की थी.
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श्री रंगनाथ मंदिर , स्वर्ण विमान , न्यूयॉर्क
एक अनोखा मंदिर 🌸
श्रीमान नारायण के लिए अमेरिका में पूजा का एक विशिष्ट स्थान होने का विचार आने पर आचार्य पूरनश्रम डॉ वेंकट कानुमल्ला को श्री रंगनायकी और भगवान श्री रंगनाथ के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका में एक विशेष मंदिर बनाने की आज्ञा दी ।
श्री रंगनाथ सेवा समिति 8 अक्टूबर, 1987 को न्यूयॉर्क राज्य में पंजीकृत की गई थी ।
मंदिर के निर्माण के लिए न्यूयॉर्क के पोमोना में 5 एकड़ भूमि ली गई।
1997 में निर्माण का पहला चरण शुरू किया गया था। भारत से 10 कुशल शिल्पियों ने सुंदर प्राणवाकारा विमानम सहित सभी पारंपरिक मंदिर कला कार्यों को जनवरी 2001 तक पूर्ण किया ।
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एक अनोखा मंदिर 🌸
श्रीमान नारायण के लिए अमेरिका में पूजा का एक विशिष्ट स्थान होने का विचार आने पर आचार्य पूरनश्रम डॉ वेंकट कानुमल्ला को श्री रंगनायकी और भगवान श्री रंगनाथ के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका में एक विशेष मंदिर बनाने की आज्ञा दी ।
श्री रंगनाथ सेवा समिति 8 अक्टूबर, 1987 को न्यूयॉर्क राज्य में पंजीकृत की गई थी ।
मंदिर के निर्माण के लिए न्यूयॉर्क के पोमोना में 5 एकड़ भूमि ली गई।
1997 में निर्माण का पहला चरण शुरू किया गया था। भारत से 10 कुशल शिल्पियों ने सुंदर प्राणवाकारा विमानम सहित सभी पारंपरिक मंदिर कला कार्यों को जनवरी 2001 तक पूर्ण किया ।
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रणकपुर जैन मंदिर , राजस्थान
राजस्थान में स्थित रणकपुर जैन धर्म के पांच प्रमुख तीर्थस्थलों में से एक है। यह स्थान खूबसूरती से तराशे गए प्राचीन जैन मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है।
इन मंदिरों का निर्माण 15 वीं शताब्दी में राणा कुंभा के शासनकाल में हुआ था। इन्हीं के नाम पर इस जगह का नाम रणकपुर पड़ा।
यहां के जैन मंदिर भारतीय स्थापत्य कला का अद्भुत उदाहरण है। केवल रणकपुर में ही नहीं बल्कि उसके आस पास की जगहों में भी अनेक प्राचीन मंदिर हैं। यह परिसर लगभग 40000 वर्ग फीट में फैला है।
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राजस्थान में स्थित रणकपुर जैन धर्म के पांच प्रमुख तीर्थस्थलों में से एक है। यह स्थान खूबसूरती से तराशे गए प्राचीन जैन मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है।
इन मंदिरों का निर्माण 15 वीं शताब्दी में राणा कुंभा के शासनकाल में हुआ था। इन्हीं के नाम पर इस जगह का नाम रणकपुर पड़ा।
यहां के जैन मंदिर भारतीय स्थापत्य कला का अद्भुत उदाहरण है। केवल रणकपुर में ही नहीं बल्कि उसके आस पास की जगहों में भी अनेक प्राचीन मंदिर हैं। यह परिसर लगभग 40000 वर्ग फीट में फैला है।
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बेलूर मठ, पश्चिम बंगाल
हावड़ा क्षेत्र में गंगा की धारा हुगली नदी के तट पर आधुनिक भारत में हिन्दू जनजागरण के पुरोधा स्वामी विवेकानंद ने वर्ष 1897 में बेलूर मठ की स्थापना की थी.
यह मठ रामकृष्ण मिशन का मुख्यालय है.
इसी मठ में स्वामी विवेकानंद ने वर्ष 1902 में समाधी ली.
मठ के मुख्य प्रांगण में स्वामी रामकृष्ण परमहंस, शारदा देवी और स्वामी ब्रह्मानन्द की देहाग्निस्थल पर उनकी समाधियाँ व मन्दिर अवस्थित है.
इसके आलावा मठ के अन्दर स्वामी विवेकानंद जी के साथ उनके 16 शिष्यों के अवशेष मौजूद हैं.
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हावड़ा क्षेत्र में गंगा की धारा हुगली नदी के तट पर आधुनिक भारत में हिन्दू जनजागरण के पुरोधा स्वामी विवेकानंद ने वर्ष 1897 में बेलूर मठ की स्थापना की थी.
यह मठ रामकृष्ण मिशन का मुख्यालय है.
इसी मठ में स्वामी विवेकानंद ने वर्ष 1902 में समाधी ली.
मठ के मुख्य प्रांगण में स्वामी रामकृष्ण परमहंस, शारदा देवी और स्वामी ब्रह्मानन्द की देहाग्निस्थल पर उनकी समाधियाँ व मन्दिर अवस्थित है.
इसके आलावा मठ के अन्दर स्वामी विवेकानंद जी के साथ उनके 16 शिष्यों के अवशेष मौजूद हैं.
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Forwarded from सनातन संस्कृत के वीडियो
आन्ध्रप्रदेश के PRAKASAM जिले मे नदी के किनारे शिवजी के छोटे मंदिर मे जब दूघ से अभिषेक करते है तब मूर्ति आँखें बंद कर लेती है एवं बाकी समय आँखें खुली रहती है। भारत मे बहुत चमत्कार है।
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दंतेश्वरी मंदिर, दंतेवाड़ा
छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में डंकिनी और शंखिनी नदी के संगम में माँ आदिशक्ति के दंतेश्वरी स्वरूप की उपासना की जाती है. यह स्थल देवी के शक्तिपीठों में से एक है, यहाँ माँ सती के दाँत गिरे थे.
यहाँ दंतेश्वरी माई पूरे बस्तर के जनजातीय समाज की कुल देवी मानी जाती है.
मंदिर का निर्मांण राजा अन्न्मदेव ने करीब 850 साल पहले कराया था. इस मंदिर का जीर्णोद्धार वारंगल से आए पांडव अर्जुन कुल के राजाओं ने और फिर बस्तर महारानी प्रफुल्ल कुमारी देवी ने कराया था.
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छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में डंकिनी और शंखिनी नदी के संगम में माँ आदिशक्ति के दंतेश्वरी स्वरूप की उपासना की जाती है. यह स्थल देवी के शक्तिपीठों में से एक है, यहाँ माँ सती के दाँत गिरे थे.
यहाँ दंतेश्वरी माई पूरे बस्तर के जनजातीय समाज की कुल देवी मानी जाती है.
मंदिर का निर्मांण राजा अन्न्मदेव ने करीब 850 साल पहले कराया था. इस मंदिर का जीर्णोद्धार वारंगल से आए पांडव अर्जुन कुल के राजाओं ने और फिर बस्तर महारानी प्रफुल्ल कुमारी देवी ने कराया था.
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महादेशवारा मंदिर, कर्नाटक
दक्षिणी कर्नाटक क्षेत्र में पवित्र महादेशवारा तीर्थ स्थल अवस्थित है जो सिद्ध संत महादेशवारा को समर्पित है. संत महादेशवारा को भगवान शिव का अंश माना जाता है.
मंदिर के गर्भगृह में स्वयम्भू शिवलिंग की उपासना की जाती है.
संत महादेशवारा के द्वारा किए गए चमत्कारिक कार्यों को लोकगीतों के माध्यम से क्षेत्र में गया जाता है.
यह मंदिर सुदूर वन क्षेत्र में होने के बाद भी श्राद्धालुओं को आकर्षित करता है.
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दक्षिणी कर्नाटक क्षेत्र में पवित्र महादेशवारा तीर्थ स्थल अवस्थित है जो सिद्ध संत महादेशवारा को समर्पित है. संत महादेशवारा को भगवान शिव का अंश माना जाता है.
मंदिर के गर्भगृह में स्वयम्भू शिवलिंग की उपासना की जाती है.
संत महादेशवारा के द्वारा किए गए चमत्कारिक कार्यों को लोकगीतों के माध्यम से क्षेत्र में गया जाता है.
यह मंदिर सुदूर वन क्षेत्र में होने के बाद भी श्राद्धालुओं को आकर्षित करता है.
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वादाक्कुन्नाथान मंदिर, केरल
केरल के थ्रिसुर में भगवान शिव को समर्पित वादाक्कुन्नाथान मंदिर अवस्थित है जिसे युनेस्को ने विश्व धरोहर की सूची में शामिल किया है.
यह भगवान शिव का पहला मंदिर है जिसे खुद भगवान परशुराम ने बनवाया था.
मंदिर प्रांगण में वादाक्कुन्नाथान मंदिर (भगवान शिव), भगवान शंकराचार्य मंदिर और भगवान राम मंदिर और देवी पार्वती का मंदिर भी अवस्थित है.
इस मंदिर के चारो दिशा में प्रवेश द्वार बनवाये गए है जिन्हें स्थानीय भाषा में गोपुरम कहा जाता है.
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केरल के थ्रिसुर में भगवान शिव को समर्पित वादाक्कुन्नाथान मंदिर अवस्थित है जिसे युनेस्को ने विश्व धरोहर की सूची में शामिल किया है.
यह भगवान शिव का पहला मंदिर है जिसे खुद भगवान परशुराम ने बनवाया था.
मंदिर प्रांगण में वादाक्कुन्नाथान मंदिर (भगवान शिव), भगवान शंकराचार्य मंदिर और भगवान राम मंदिर और देवी पार्वती का मंदिर भी अवस्थित है.
इस मंदिर के चारो दिशा में प्रवेश द्वार बनवाये गए है जिन्हें स्थानीय भाषा में गोपुरम कहा जाता है.
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