Forwarded from The Narrative
बेलूर मठ, पश्चिम बंगाल
हावड़ा क्षेत्र में गंगा की धारा हुगली नदी के तट पर आधुनिक भारत में हिन्दू जनजागरण के पुरोधा स्वामी विवेकानंद ने वर्ष 1897 में बेलूर मठ की स्थापना की थी.
यह मठ रामकृष्ण मिशन का मुख्यालय है.
इसी मठ में स्वामी विवेकानंद ने वर्ष 1902 में समाधी ली.
मठ के मुख्य प्रांगण में स्वामी रामकृष्ण परमहंस, शारदा देवी और स्वामी ब्रह्मानन्द की देहाग्निस्थल पर उनकी समाधियाँ व मन्दिर अवस्थित है.
इसके आलावा मठ के अन्दर स्वामी विवेकानंद जी के साथ उनके 16 शिष्यों के अवशेष मौजूद हैं.
मेरी संस्कृति ..मेरा देश ..मेरा अभिमान 🚩
हावड़ा क्षेत्र में गंगा की धारा हुगली नदी के तट पर आधुनिक भारत में हिन्दू जनजागरण के पुरोधा स्वामी विवेकानंद ने वर्ष 1897 में बेलूर मठ की स्थापना की थी.
यह मठ रामकृष्ण मिशन का मुख्यालय है.
इसी मठ में स्वामी विवेकानंद ने वर्ष 1902 में समाधी ली.
मठ के मुख्य प्रांगण में स्वामी रामकृष्ण परमहंस, शारदा देवी और स्वामी ब्रह्मानन्द की देहाग्निस्थल पर उनकी समाधियाँ व मन्दिर अवस्थित है.
इसके आलावा मठ के अन्दर स्वामी विवेकानंद जी के साथ उनके 16 शिष्यों के अवशेष मौजूद हैं.
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Forwarded from सनातन संस्कृत के वीडियो
आन्ध्रप्रदेश के PRAKASAM जिले मे नदी के किनारे शिवजी के छोटे मंदिर मे जब दूघ से अभिषेक करते है तब मूर्ति आँखें बंद कर लेती है एवं बाकी समय आँखें खुली रहती है। भारत मे बहुत चमत्कार है।
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दंतेश्वरी मंदिर, दंतेवाड़ा
छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में डंकिनी और शंखिनी नदी के संगम में माँ आदिशक्ति के दंतेश्वरी स्वरूप की उपासना की जाती है. यह स्थल देवी के शक्तिपीठों में से एक है, यहाँ माँ सती के दाँत गिरे थे.
यहाँ दंतेश्वरी माई पूरे बस्तर के जनजातीय समाज की कुल देवी मानी जाती है.
मंदिर का निर्मांण राजा अन्न्मदेव ने करीब 850 साल पहले कराया था. इस मंदिर का जीर्णोद्धार वारंगल से आए पांडव अर्जुन कुल के राजाओं ने और फिर बस्तर महारानी प्रफुल्ल कुमारी देवी ने कराया था.
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छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में डंकिनी और शंखिनी नदी के संगम में माँ आदिशक्ति के दंतेश्वरी स्वरूप की उपासना की जाती है. यह स्थल देवी के शक्तिपीठों में से एक है, यहाँ माँ सती के दाँत गिरे थे.
यहाँ दंतेश्वरी माई पूरे बस्तर के जनजातीय समाज की कुल देवी मानी जाती है.
मंदिर का निर्मांण राजा अन्न्मदेव ने करीब 850 साल पहले कराया था. इस मंदिर का जीर्णोद्धार वारंगल से आए पांडव अर्जुन कुल के राजाओं ने और फिर बस्तर महारानी प्रफुल्ल कुमारी देवी ने कराया था.
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महादेशवारा मंदिर, कर्नाटक
दक्षिणी कर्नाटक क्षेत्र में पवित्र महादेशवारा तीर्थ स्थल अवस्थित है जो सिद्ध संत महादेशवारा को समर्पित है. संत महादेशवारा को भगवान शिव का अंश माना जाता है.
मंदिर के गर्भगृह में स्वयम्भू शिवलिंग की उपासना की जाती है.
संत महादेशवारा के द्वारा किए गए चमत्कारिक कार्यों को लोकगीतों के माध्यम से क्षेत्र में गया जाता है.
यह मंदिर सुदूर वन क्षेत्र में होने के बाद भी श्राद्धालुओं को आकर्षित करता है.
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दक्षिणी कर्नाटक क्षेत्र में पवित्र महादेशवारा तीर्थ स्थल अवस्थित है जो सिद्ध संत महादेशवारा को समर्पित है. संत महादेशवारा को भगवान शिव का अंश माना जाता है.
मंदिर के गर्भगृह में स्वयम्भू शिवलिंग की उपासना की जाती है.
संत महादेशवारा के द्वारा किए गए चमत्कारिक कार्यों को लोकगीतों के माध्यम से क्षेत्र में गया जाता है.
यह मंदिर सुदूर वन क्षेत्र में होने के बाद भी श्राद्धालुओं को आकर्षित करता है.
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वादाक्कुन्नाथान मंदिर, केरल
केरल के थ्रिसुर में भगवान शिव को समर्पित वादाक्कुन्नाथान मंदिर अवस्थित है जिसे युनेस्को ने विश्व धरोहर की सूची में शामिल किया है.
यह भगवान शिव का पहला मंदिर है जिसे खुद भगवान परशुराम ने बनवाया था.
मंदिर प्रांगण में वादाक्कुन्नाथान मंदिर (भगवान शिव), भगवान शंकराचार्य मंदिर और भगवान राम मंदिर और देवी पार्वती का मंदिर भी अवस्थित है.
इस मंदिर के चारो दिशा में प्रवेश द्वार बनवाये गए है जिन्हें स्थानीय भाषा में गोपुरम कहा जाता है.
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केरल के थ्रिसुर में भगवान शिव को समर्पित वादाक्कुन्नाथान मंदिर अवस्थित है जिसे युनेस्को ने विश्व धरोहर की सूची में शामिल किया है.
यह भगवान शिव का पहला मंदिर है जिसे खुद भगवान परशुराम ने बनवाया था.
मंदिर प्रांगण में वादाक्कुन्नाथान मंदिर (भगवान शिव), भगवान शंकराचार्य मंदिर और भगवान राम मंदिर और देवी पार्वती का मंदिर भी अवस्थित है.
इस मंदिर के चारो दिशा में प्रवेश द्वार बनवाये गए है जिन्हें स्थानीय भाषा में गोपुरम कहा जाता है.
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108 शिव मंदिर, वर्धमान 🌸
भगवान शिव को समर्पित '108 शिव मंदिर' कोलकाता से 108 किमी दूर वर्धमान ने अवस्थित है. यहाँ एक ही स्थान पर निर्मित 108 शिव मंदिरों का निर्माण रानी विष्णु कुमारी ने वर्ष 1788 में करवाया था.
मंदिर के बाहरी वृत भाग में 74 मंदिर और अंदरूनी भाग में 34 मंदिर है. सभी एक जैसे ही आकृति के है. ये मंदिर के चारो दिशाओ में बने हुए है.
बाकि 107 में तो भगवान शिव लिंग के दर्शन होते है, सिर्फ एक में शिव लिंग के साथ पार्वती माता के भी दर्शन साथ -साथ होते है.
जहा 54 मंदिर पूरे होते है, वहा जोड़े से श्याम और श्वेत वर्ण के नंदी जी के दर्शन होते है.
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भगवान शिव को समर्पित '108 शिव मंदिर' कोलकाता से 108 किमी दूर वर्धमान ने अवस्थित है. यहाँ एक ही स्थान पर निर्मित 108 शिव मंदिरों का निर्माण रानी विष्णु कुमारी ने वर्ष 1788 में करवाया था.
मंदिर के बाहरी वृत भाग में 74 मंदिर और अंदरूनी भाग में 34 मंदिर है. सभी एक जैसे ही आकृति के है. ये मंदिर के चारो दिशाओ में बने हुए है.
बाकि 107 में तो भगवान शिव लिंग के दर्शन होते है, सिर्फ एक में शिव लिंग के साथ पार्वती माता के भी दर्शन साथ -साथ होते है.
जहा 54 मंदिर पूरे होते है, वहा जोड़े से श्याम और श्वेत वर्ण के नंदी जी के दर्शन होते है.
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नागशिला , नाग देवता मंदिर , कर्नाटक 🐍
बैंगलोर के पास विदुरश्वथ गाँव स्थित है एक रहस्मय मंदिर. यह मंदिर नाग देवता को समर्पित है.
महाभारत काल मे एक अश्वत्थ (जिसे अंजीर भी कहा जाता है) वृक्ष महात्मा विदुर द्वारा लगाया गया था, इसलिए यह स्थान का नाम विदुरश्वथ पड़ा.
विदुरश्वथ को "दक्षिण भारत का जलियांवाला बाग" के रूप में भी जाना जाता है क्योंकि यहां छोटे पैमाने पर इसी तरह की घटना हुई थी.
25 अप्रैल, 1938 को भारत के स्वतंत्रता संग्राम के एक हिस्से के रूप में, ग्रामीणों का एक समूह सत्याग्रह का आयोजन करने के लिए यहां एकत्र हुआ था.
जलियांवाला बाग में जो कुछ हुआ, उसके समान, पुलिस ने इस समूह पर अंधाधुंध गोलीबारी की, जिसके परिणामस्वरूप कई लोग मारे गए.
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बैंगलोर के पास विदुरश्वथ गाँव स्थित है एक रहस्मय मंदिर. यह मंदिर नाग देवता को समर्पित है.
महाभारत काल मे एक अश्वत्थ (जिसे अंजीर भी कहा जाता है) वृक्ष महात्मा विदुर द्वारा लगाया गया था, इसलिए यह स्थान का नाम विदुरश्वथ पड़ा.
विदुरश्वथ को "दक्षिण भारत का जलियांवाला बाग" के रूप में भी जाना जाता है क्योंकि यहां छोटे पैमाने पर इसी तरह की घटना हुई थी.
25 अप्रैल, 1938 को भारत के स्वतंत्रता संग्राम के एक हिस्से के रूप में, ग्रामीणों का एक समूह सत्याग्रह का आयोजन करने के लिए यहां एकत्र हुआ था.
जलियांवाला बाग में जो कुछ हुआ, उसके समान, पुलिस ने इस समूह पर अंधाधुंध गोलीबारी की, जिसके परिणामस्वरूप कई लोग मारे गए.
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हनुमान मंदिर, जाखू 🙏🏻
हिमाचल प्रदेश के जाखू पर्वत में विश्वप्रसिद्ध मंदिर अवस्थित है जहाँ स्वयंभू हनुमान जी विराजे हैं.
हनुमान जी जब संजीवनी बूटी के लिए जा रहे थे तो उन्हें इसी पर्वत में यक्ष ऋषि मिले थे जिनसे उन्होंने बूटी का परिचय प्राप्त किया था.
यहाँ हनुमान जी की 108 फ़ीट ऊंची प्रतिमा भी स्थापित है। इसके अलावा यहाँ हनुमान जी के पदचिन्ह भी जीवंत स्थिति में है।
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हिमाचल प्रदेश के जाखू पर्वत में विश्वप्रसिद्ध मंदिर अवस्थित है जहाँ स्वयंभू हनुमान जी विराजे हैं.
हनुमान जी जब संजीवनी बूटी के लिए जा रहे थे तो उन्हें इसी पर्वत में यक्ष ऋषि मिले थे जिनसे उन्होंने बूटी का परिचय प्राप्त किया था.
यहाँ हनुमान जी की 108 फ़ीट ऊंची प्रतिमा भी स्थापित है। इसके अलावा यहाँ हनुमान जी के पदचिन्ह भी जीवंत स्थिति में है।
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सूर्य मंदिर, कोणार्क ☀️
ओडिशा के कोर्णाक में स्थित है विश्वविख्यात सूर्य मंदिर जिसे देखने देश-विदेश से पर्यटक आते हैं.
13वीं शताब्दी में राजा नरसिंह देव ने इस मंदिर का निर्माण करवाया था.
इस मंदिर को रथ के आकार में बनाया गया है जिसमें सूर्य देवता के रथ की तरह बारह जोड़ी पहिए और 7 घोड़े हैं.
मंदिर की वास्तुकला एवं स्थापत्यकला पूरे विश्व में सबसे अनोखी है.
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ओडिशा के कोर्णाक में स्थित है विश्वविख्यात सूर्य मंदिर जिसे देखने देश-विदेश से पर्यटक आते हैं.
13वीं शताब्दी में राजा नरसिंह देव ने इस मंदिर का निर्माण करवाया था.
इस मंदिर को रथ के आकार में बनाया गया है जिसमें सूर्य देवता के रथ की तरह बारह जोड़ी पहिए और 7 घोड़े हैं.
मंदिर की वास्तुकला एवं स्थापत्यकला पूरे विश्व में सबसे अनोखी है.
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