यूक्रेन और रूस युद्ध विशेष
पोलेंड और भारत का इतिहास जानना सबको जरूरी है।
5 मार्च 2022
http://azaadbharat.org
🚩क्या आप जानते हो आज युक्रेन से आ रहे भारत के लोगों को पोलेंड बिना वीज़ा के क्यों आने दे रहा अपने देश में??
🚩 दूसरे विश्व युद्ध के समय, पोलेंड पुरी तरह तबाह हो गया था,सिर्फ औरतें और बच्चे बचे थे, बाकी सब वहां के पुरुष युद्ध में मारे गए थे।
🚩 पोलेंड की स्त्रियों ने पोलेंड छोड़ दिया क्योंकि वहां उनकी इज्जत को वहां खतरा था,तो बचे हुए लोग और बाकी सब महिलाएं एवं बच्चे से भरा जहाज लेकर पोलेंड से निकल गए, लेकिन किसी भी देश ने उनको शरण नहीं दी।
🚩फिर यह जहाज भारत की तरफ आया, वहां गुजरात के जामनगर के तट पर जहाज़ रुका,तब वहां के राजा जाम दिग्विजय सिंह जाडेजा जी ने उनकी दिन हीन हालत देखकर उन्हें आश्रय दिया,न केवल आश्रय दिया, अपितु उनके बच्चों को _आर्मी_ की _ट्रेनिंग_ दी, उनको पढ़ाया, लिखाया, बाद मे उन्हें हथियार देकर पोलेंड भेजा जहां उन्होंने जामनगर से मिली _आर्मी_ की _ट्रेनिंग_ से देश को पुनः स्थापित किया।
🚩आज भी पोलेंड राजा जाम साहब दिग्विजय सिंह जाडेजा के उस एहसान को नहीं भूला है,इसलिए आज भारत के लोगों को बिना वीज़ा के आने दे रहा है और उनकी सभी प्रकार से मदद भी कर रहा है।
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पोलेंड और भारत का इतिहास जानना सबको जरूरी है।
5 मार्च 2022
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🚩क्या आप जानते हो आज युक्रेन से आ रहे भारत के लोगों को पोलेंड बिना वीज़ा के क्यों आने दे रहा अपने देश में??
🚩 दूसरे विश्व युद्ध के समय, पोलेंड पुरी तरह तबाह हो गया था,सिर्फ औरतें और बच्चे बचे थे, बाकी सब वहां के पुरुष युद्ध में मारे गए थे।
🚩 पोलेंड की स्त्रियों ने पोलेंड छोड़ दिया क्योंकि वहां उनकी इज्जत को वहां खतरा था,तो बचे हुए लोग और बाकी सब महिलाएं एवं बच्चे से भरा जहाज लेकर पोलेंड से निकल गए, लेकिन किसी भी देश ने उनको शरण नहीं दी।
🚩फिर यह जहाज भारत की तरफ आया, वहां गुजरात के जामनगर के तट पर जहाज़ रुका,तब वहां के राजा जाम दिग्विजय सिंह जाडेजा जी ने उनकी दिन हीन हालत देखकर उन्हें आश्रय दिया,न केवल आश्रय दिया, अपितु उनके बच्चों को _आर्मी_ की _ट्रेनिंग_ दी, उनको पढ़ाया, लिखाया, बाद मे उन्हें हथियार देकर पोलेंड भेजा जहां उन्होंने जामनगर से मिली _आर्मी_ की _ट्रेनिंग_ से देश को पुनः स्थापित किया।
🚩आज भी पोलेंड राजा जाम साहब दिग्विजय सिंह जाडेजा के उस एहसान को नहीं भूला है,इसलिए आज भारत के लोगों को बिना वीज़ा के आने दे रहा है और उनकी सभी प्रकार से मदद भी कर रहा है।
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8 मार्च अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस विशेष लेख
6 मार्च 2022 http://azaadbharat.org
🚩विश्व महिला दिवस सबसे पहले यूनाइटेड नेशन्स ने 8 मार्च 1975 को मनाया गया।
🚩संत श्रीआशारामजी बापू से प्रेरित महिला उत्थान मंडल संस्था का कहना है कि पहले नारी को पूज्यनीय मानते थे, लेकिन बॉलीवुड फिल्मों और पाश्यात्य कल्चर के कारण नारी को भोग्या समझने लगे है।
🚩संत श्रीआशारामजी बापूजी ने पाश्यात्य कल्चर , बॉलीवुड फिल्मों, ईसाई मिशनरियों के खिलाप कई बार बोला तो उनको एक फर्जी केस में जेल करा दी गई।
🚩8 मार्च अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में देश भर में कई दिनों से देश की करोड़ो महिलाओं ने संत श्रीआशारामजी बापूजी की रिहाई के निमित्त जगह-जगह रैलिया निकाली है,कलेक्टर को ज्ञापन दिए है,राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री को पत्र लिखे है, फिर भी एक निर्दोष संत श्रीआशारामजी बापूजी को पिछले 9 सालों में न्याय तो दूर उनको 1 दिन की भी बेल न मिलना, ये न्यायालय पर प्रश्नचिन्ह है??
🚩देश की करोड़ो महिलाओं ने कहा कि निर्दोष Sant Shri Asharamji Bapu को झूठे केस में फंसाया गया है, उन्हें न्याय देना आवश्यक है, वे सनातन संस्कृति के रक्षक हैं उन्हें जेल में रखना सरासर गलत है!!
🚩पिछले 9 वर्षों में देश की करोड़ो महिलाओं का कहना है कि Sant Shri Asharamji Bapu ने स्वयं की परवाह किये बिना हिन्दू धर्म का प्रचार प्रसार कर समाज को उन्नत किया है।
🚩आज भी देश की असंख्य महिलाएँ Sant Shri Asharamji Bapu के समर्थन में खड़ी हैं और रिहाई की माँग कर रही हैं। सरकार और न्यायालय को ज्ञापन दे रही है,पत्र लिख रही है , बापूजी की रिहाई के लिए रैलिया निकाल रही है।
🚩Sant Shri Asharamji Bapu जैसे संत ही हमारी सनातन संस्कृति के वास्तविक मार्गदर्शक हैं।
🚩जिनके मार्गदर्शन ने करोड़ों लोगों को उन्नति व बेहतर जीवन पथ दिया, ऐसे संत को फर्जी आरोप मात्र पर बिना सबूत जेल दी गई।
🚩Sant Shri Asharamji Bapu निर्दोष हैं ,उन्हें कानून का दुरुपयोग करके झूठे केस में फंसाया गया है उन्हे जल्द से जल्द रिहा किया जाए!
🚩Sant Shri Asharamji Bapu ने लाखों नारियों में यह विश्वास जगाया कि,उनको यह जीवन मात्र किसी की भोग्या बन या परिवार और समाज की अनावश्यक इच्छाओं की पूर्ति करने में तबाह करने को न दिया परमात्मा ने,बल्कि वे स्वयं के साथ अपने परिवार राष्ट्र व समूची मानवता का कल्याण करने में सक्षम हैं।
ऐसे संत पर अनर्गल आरोप व अत्याचार क्यों?
Why Justice Still Awaited?
🚩Sant Shri Asharamji Bapu ने लाखों नारियों में यह विश्वास जगाया कि वो परिस्थितियों में पिस मरने को नहीं जन्मी...
वरन् नारी स्वयं परिस्थितियों की निर्माता,नियंत्रणकर्ता और स्वामी हैं,साक्षात नारायणी हैं।
🚩आज #Bapuji पर हो रहे अत्याचार से दुनियाभर में महिलाओं की मांग एक जनांदोलन का रूप लेती नज़र आ रही है।
🚩आध्यात्मिक ज्ञान का सुवास पूरे विश्व में फैलाने वाले Sant Shri Asharamji Bapu को निराधार केस में नौ वर्षों से न्याय नहीं मिला है।
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6 मार्च 2022 http://azaadbharat.org
🚩विश्व महिला दिवस सबसे पहले यूनाइटेड नेशन्स ने 8 मार्च 1975 को मनाया गया।
🚩संत श्रीआशारामजी बापू से प्रेरित महिला उत्थान मंडल संस्था का कहना है कि पहले नारी को पूज्यनीय मानते थे, लेकिन बॉलीवुड फिल्मों और पाश्यात्य कल्चर के कारण नारी को भोग्या समझने लगे है।
🚩संत श्रीआशारामजी बापूजी ने पाश्यात्य कल्चर , बॉलीवुड फिल्मों, ईसाई मिशनरियों के खिलाप कई बार बोला तो उनको एक फर्जी केस में जेल करा दी गई।
🚩8 मार्च अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में देश भर में कई दिनों से देश की करोड़ो महिलाओं ने संत श्रीआशारामजी बापूजी की रिहाई के निमित्त जगह-जगह रैलिया निकाली है,कलेक्टर को ज्ञापन दिए है,राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री को पत्र लिखे है, फिर भी एक निर्दोष संत श्रीआशारामजी बापूजी को पिछले 9 सालों में न्याय तो दूर उनको 1 दिन की भी बेल न मिलना, ये न्यायालय पर प्रश्नचिन्ह है??
🚩देश की करोड़ो महिलाओं ने कहा कि निर्दोष Sant Shri Asharamji Bapu को झूठे केस में फंसाया गया है, उन्हें न्याय देना आवश्यक है, वे सनातन संस्कृति के रक्षक हैं उन्हें जेल में रखना सरासर गलत है!!
🚩पिछले 9 वर्षों में देश की करोड़ो महिलाओं का कहना है कि Sant Shri Asharamji Bapu ने स्वयं की परवाह किये बिना हिन्दू धर्म का प्रचार प्रसार कर समाज को उन्नत किया है।
🚩आज भी देश की असंख्य महिलाएँ Sant Shri Asharamji Bapu के समर्थन में खड़ी हैं और रिहाई की माँग कर रही हैं। सरकार और न्यायालय को ज्ञापन दे रही है,पत्र लिख रही है , बापूजी की रिहाई के लिए रैलिया निकाल रही है।
🚩Sant Shri Asharamji Bapu जैसे संत ही हमारी सनातन संस्कृति के वास्तविक मार्गदर्शक हैं।
🚩जिनके मार्गदर्शन ने करोड़ों लोगों को उन्नति व बेहतर जीवन पथ दिया, ऐसे संत को फर्जी आरोप मात्र पर बिना सबूत जेल दी गई।
🚩Sant Shri Asharamji Bapu निर्दोष हैं ,उन्हें कानून का दुरुपयोग करके झूठे केस में फंसाया गया है उन्हे जल्द से जल्द रिहा किया जाए!
🚩Sant Shri Asharamji Bapu ने लाखों नारियों में यह विश्वास जगाया कि,उनको यह जीवन मात्र किसी की भोग्या बन या परिवार और समाज की अनावश्यक इच्छाओं की पूर्ति करने में तबाह करने को न दिया परमात्मा ने,बल्कि वे स्वयं के साथ अपने परिवार राष्ट्र व समूची मानवता का कल्याण करने में सक्षम हैं।
ऐसे संत पर अनर्गल आरोप व अत्याचार क्यों?
Why Justice Still Awaited?
🚩Sant Shri Asharamji Bapu ने लाखों नारियों में यह विश्वास जगाया कि वो परिस्थितियों में पिस मरने को नहीं जन्मी...
वरन् नारी स्वयं परिस्थितियों की निर्माता,नियंत्रणकर्ता और स्वामी हैं,साक्षात नारायणी हैं।
🚩आज #Bapuji पर हो रहे अत्याचार से दुनियाभर में महिलाओं की मांग एक जनांदोलन का रूप लेती नज़र आ रही है।
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8 मार्च अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस विशेष लेख
7 मार्च 2022
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🚩विश्व महिला दिवस सबसे पहले यूनाइटेड नेशन्स ने 8 मार्च 1975 को मनाया गया।
🚩संत श्रीआशारामजी बापू से प्रेरित महिला उत्थान मंडल संस्था का कहना है कि पहले नारी को पूज्यनीय मानते थे, लेकिन बॉलीवुड फिल्मों और पाश्यात्य कल्चर के कारण नारी को भोग्या समझने लगे है।
🚩संत श्रीआशारामजी बापूजी ने पाश्यात्य कल्चर , बॉलीवुड फिल्मों, ईसाई मिशनरियों के खिलाप कई बार बोला तो उनको एक फर्जी केस में जेल करा दी गई।
🚩8 मार्च अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में देश भर में कई दिनों से देश की करोड़ो महिलाओं ने संत श्रीआशारामजी बापूजी की रिहाई के निमित्त जगह-जगह रैलिया निकाली है,कलेक्टर को ज्ञापन दिए है,राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री को पत्र लिखे है, फिर भी एक निर्दोष संत श्रीआशारामजी बापूजी को पिछले 9 सालों में न्याय तो दूर उनको 1 दिन की भी बेल न मिलना, ये न्यायालय पर प्रश्नचिन्ह है??
🚩देश की करोड़ो महिलाओं ने कहा कि निर्दोष Sant Shri Asharamji Bapu को झूठे केस में फंसाया गया है, उन्हें न्याय देना आवश्यक है, वे सनातन संस्कृति के रक्षक हैं उन्हें जेल में रखना सरासर गलत है!!
🚩पिछले 9 वर्षों में देश की करोड़ो महिलाओं का कहना है कि Sant Shri Asharamji Bapu ने स्वयं की परवाह किये बिना हिन्दू धर्म का प्रचार प्रसार कर समाज को उन्नत किया है।
🚩आज भी देश की असंख्य महिलाएँ Sant Shri Asharamji Bapu के समर्थन में खड़ी हैं और रिहाई की माँग कर रही हैं। सरकार और न्यायालय को ज्ञापन दे रही है,पत्र लिख रही है , बापूजी की रिहाई के लिए रैलिया निकाल रही है।
🚩Sant Shri Asharamji Bapu जैसे संत ही हमारी सनातन संस्कृति के वास्तविक मार्गदर्शक हैं।
🚩जिनके मार्गदर्शन ने करोड़ों लोगों को उन्नति व बेहतर जीवन पथ दिया, ऐसे संत को फर्जी आरोप मात्र पर बिना सबूत जेल दी गई।
🚩Sant Shri Asharamji Bapu निर्दोष हैं ,उन्हें कानून का दुरुपयोग करके झूठे केस में फंसाया गया है उन्हे जल्द से जल्द रिहा किया जाए!
🚩Sant Shri Asharamji Bapu ने लाखों नारियों में यह विश्वास जगाया कि,उनको यह जीवन मात्र किसी की भोग्या बन या परिवार और समाज की अनावश्यक इच्छाओं की पूर्ति करने में तबाह करने को न दिया परमात्मा ने,बल्कि वे स्वयं के साथ अपने परिवार राष्ट्र व समूची मानवता का कल्याण करने में सक्षम हैं।
ऐसे संत पर अनर्गल आरोप व अत्याचार क्यों?
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वरन् नारी स्वयं परिस्थितियों की निर्माता,नियंत्रणकर्ता और स्वामी हैं,साक्षात नारायणी हैं।
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7 मार्च 2022
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🚩संत श्रीआशारामजी बापू से प्रेरित महिला उत्थान मंडल संस्था का कहना है कि पहले नारी को पूज्यनीय मानते थे, लेकिन बॉलीवुड फिल्मों और पाश्यात्य कल्चर के कारण नारी को भोग्या समझने लगे है।
🚩संत श्रीआशारामजी बापूजी ने पाश्यात्य कल्चर , बॉलीवुड फिल्मों, ईसाई मिशनरियों के खिलाप कई बार बोला तो उनको एक फर्जी केस में जेल करा दी गई।
🚩8 मार्च अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में देश भर में कई दिनों से देश की करोड़ो महिलाओं ने संत श्रीआशारामजी बापूजी की रिहाई के निमित्त जगह-जगह रैलिया निकाली है,कलेक्टर को ज्ञापन दिए है,राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री को पत्र लिखे है, फिर भी एक निर्दोष संत श्रीआशारामजी बापूजी को पिछले 9 सालों में न्याय तो दूर उनको 1 दिन की भी बेल न मिलना, ये न्यायालय पर प्रश्नचिन्ह है??
🚩देश की करोड़ो महिलाओं ने कहा कि निर्दोष Sant Shri Asharamji Bapu को झूठे केस में फंसाया गया है, उन्हें न्याय देना आवश्यक है, वे सनातन संस्कृति के रक्षक हैं उन्हें जेल में रखना सरासर गलत है!!
🚩पिछले 9 वर्षों में देश की करोड़ो महिलाओं का कहना है कि Sant Shri Asharamji Bapu ने स्वयं की परवाह किये बिना हिन्दू धर्म का प्रचार प्रसार कर समाज को उन्नत किया है।
🚩आज भी देश की असंख्य महिलाएँ Sant Shri Asharamji Bapu के समर्थन में खड़ी हैं और रिहाई की माँग कर रही हैं। सरकार और न्यायालय को ज्ञापन दे रही है,पत्र लिख रही है , बापूजी की रिहाई के लिए रैलिया निकाल रही है।
🚩Sant Shri Asharamji Bapu जैसे संत ही हमारी सनातन संस्कृति के वास्तविक मार्गदर्शक हैं।
🚩जिनके मार्गदर्शन ने करोड़ों लोगों को उन्नति व बेहतर जीवन पथ दिया, ऐसे संत को फर्जी आरोप मात्र पर बिना सबूत जेल दी गई।
🚩Sant Shri Asharamji Bapu निर्दोष हैं ,उन्हें कानून का दुरुपयोग करके झूठे केस में फंसाया गया है उन्हे जल्द से जल्द रिहा किया जाए!
🚩Sant Shri Asharamji Bapu ने लाखों नारियों में यह विश्वास जगाया कि,उनको यह जीवन मात्र किसी की भोग्या बन या परिवार और समाज की अनावश्यक इच्छाओं की पूर्ति करने में तबाह करने को न दिया परमात्मा ने,बल्कि वे स्वयं के साथ अपने परिवार राष्ट्र व समूची मानवता का कल्याण करने में सक्षम हैं।
ऐसे संत पर अनर्गल आरोप व अत्याचार क्यों?
Why Justice Still Awaited?
🚩Sant Shri Asharamji Bapu ने लाखों नारियों में यह विश्वास जगाया कि वो परिस्थितियों में पिस मरने को नहीं जन्मी...
वरन् नारी स्वयं परिस्थितियों की निर्माता,नियंत्रणकर्ता और स्वामी हैं,साक्षात नारायणी हैं।
🚩आज #Bapuji पर हो रहे अत्याचार से दुनियाभर में महिलाओं की मांग एक जनांदोलन का रूप लेती नज़र आ रही है।
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🚩 अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में देश भर में करोड़ो महिलाओं ने संत श्रीआशारामजी बापूजी की रिहाई के निमित्त जगह-जगह रैलिया निकाली है,कलेक्टर , मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति को ज्ञापन दिए और पत्र भी लिखकर पहुचाये, फिर भी एक निर्दोष संत श्रीआशारामजी बापूजी को पिछले 9 सालों में न्याय तो दूर उनको 1 दिन की भी बेल न मिलना, ये न्यायालय पर प्रश्नचिन्ह है???
मार्च 2022
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🚩देश की लाखों महिलाओं का कहना है कि हिन्दू संत श्रीआशारामजी बापू ने महिला उत्थान,संस्कृति रक्षा की एवं गरीबों के लिए अनेकों सेवाकार्य किये, मीडिया को कभी घुस नही दी और ईसाई मिशनरियों को धर्मान्तरण करने से रोका इसलिए बापूजी को एक षड्यंत्र के तहत पॉक्सो लगवाकर झूठे केस में जेल करवा दी गई।
🚩Sant Shri Asharamji Bapu की बेगुनाही और उन पर लगे झूठे केस की सच्चाई बताने के लिए देश की लाखों महिलाएं जगह जगह रैली निकाल रही हैं।
🚩सबका है बस एक ही सवाल
आखिर कब देश की लाखों महिलाओं की आवाज़ सुनकर बापूजी को बोगस केस से रिहा किया जाएगा?
आज देश भर की महिलाओं ने सवाल किये 👇
🚩क्या इस #WomensDay पर इन रैली निकालने वाली महिलाओं की आवाज़ सुनी जाएगी❓
🚩आखिर कब तक निर्दोष Sant Shri Asharamji Bapu को फर्जी केस में सताया जाएगा❓
🚩Sant Shri Asharamji Bapu कें साथ हो रहे अन्याय के विरुद्ध, देश की लाखों महिलायें आज उनकी रिहाई के लिये आवाज उठा रही है।
🚩बापूजी के निर्दोषता के अनगिनत प्रमाण होते हुए भी बापूजी को रिहा नही किया जा रहा है,क्या ये अन्याय की हद नहीं है?
🚩आज देश के कोने कोने से लाखों महिलाओं ने Sant Shri Asharamji Bapu के खिलाफ़ हो रहे अन्याय के खिलाफ़ आवाज़ उठाई है और कहा कि बापूजी पर एक भी आरोप सिद्ध नहीं हुआ हैं तो फिर क्यों उन्हें जेल में रखा गया हैं?? उन्हें जल्द से जल्द रिहा करना चाहिए।
🚩Sant Shri Asharamji Bapu की निर्दोषता के सारे प्रमाण होने के बावज़ूद उन्हें 9 सालो से कारावास में रखकर प्रताडित किया जा रहा है।
🚩इस घोर अत्याचार के खिलाफ लाखो महिलाए एकजुट होकर बापूजी की ससम्मान रिहाई की मांग कर रहीं हैं।
पूज्य Sant Shri Asharamji Bapu द्वारा प्रेरित महिला उत्थान मंडल की बहनों द्वारा जगहों जगहों पर विशाल संस्कृति रक्षा यात्रा निकाली जा रही है l नारी शक्ति ने की मांग निर्दोष पूज्य बापू जी को रिहा करो
🚩हिन्दू धर्म और भारतीय संस्कृति के आधार स्तंभ पूज्य Sant Shri Asharamji Bapu के शीघ्र रिहाई की मांग करते हुए महिला उत्थान मंडल की बहनों द्वारा बहुत सारे स्थानों पर कलेक्टरों को ज्ञापन सौपें गए।
🚩पूज्य Sant Shri Asharamji Bapu के साथ हो रहे अन्याय के विरुद्ध लाखों महिलाएं आवाज़ उठाकर बोल रहे हैं , निर्दोष बापूजी को शीघ्र रिहा करो।
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🚩देश की लाखों महिलाओं का कहना है कि हिन्दू संत श्रीआशारामजी बापू ने महिला उत्थान,संस्कृति रक्षा की एवं गरीबों के लिए अनेकों सेवाकार्य किये, मीडिया को कभी घुस नही दी और ईसाई मिशनरियों को धर्मान्तरण करने से रोका इसलिए बापूजी को एक षड्यंत्र के तहत पॉक्सो लगवाकर झूठे केस में जेल करवा दी गई।
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आखिर कब देश की लाखों महिलाओं की आवाज़ सुनकर बापूजी को बोगस केस से रिहा किया जाएगा?
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🚩आखिर कब तक निर्दोष Sant Shri Asharamji Bapu को फर्जी केस में सताया जाएगा❓
🚩Sant Shri Asharamji Bapu कें साथ हो रहे अन्याय के विरुद्ध, देश की लाखों महिलायें आज उनकी रिहाई के लिये आवाज उठा रही है।
🚩बापूजी के निर्दोषता के अनगिनत प्रमाण होते हुए भी बापूजी को रिहा नही किया जा रहा है,क्या ये अन्याय की हद नहीं है?
🚩आज देश के कोने कोने से लाखों महिलाओं ने Sant Shri Asharamji Bapu के खिलाफ़ हो रहे अन्याय के खिलाफ़ आवाज़ उठाई है और कहा कि बापूजी पर एक भी आरोप सिद्ध नहीं हुआ हैं तो फिर क्यों उन्हें जेल में रखा गया हैं?? उन्हें जल्द से जल्द रिहा करना चाहिए।
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पूज्य Sant Shri Asharamji Bapu द्वारा प्रेरित महिला उत्थान मंडल की बहनों द्वारा जगहों जगहों पर विशाल संस्कृति रक्षा यात्रा निकाली जा रही है l नारी शक्ति ने की मांग निर्दोष पूज्य बापू जी को रिहा करो
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साकार होता एक सपना जो आज से 50 साल पहले अमेरिका ने देखा था।
और एक सपना जो आज चीन देख रहा है....भारत को टुकड़े टुकड़े करने का !
9 मार्च 2022
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पढ़िए पूरा लेख👇🏻
🚩द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद से 45 वर्षों तक शायद ही कोई अवसर आया हो जब रूस और अमेरिका की किसी वैश्विक मुद्दे पर आम सहमति बनी हो। दोनो महाशक्ति हर मौके पर अपनी ताल ठोकते रहे...चाहे चांद पर कदम हो या भारत चीन पाकिस्तान के रिश्ते तय करने हो, वियतनाम हो या फिर अफगानिस्तान.... दोनो महाशक्ति 36 के आंकड़े के साथ दुनिया के सामने खड़े रहे और यूँ 1945 से चले शीत युद्ध के साए में 46 सालों तक तीसरी दुनिया के देश अपने अस्तित्व को बचाए रखने के लिए किसी एक का दामन पकड़ पीछे पीछे चलते रहे...जब तक कि दिसम्बर 1991 में रूस टुकड़े टुकड़े ना हो गया।
🚩अकेले महाशक्ति बनकर पूरी दुनिया को हांकने के लिए यह जरूरी था कि अमेरिका रूस को छिन्न भिन्न कर दे।
🚩1917 में साम्यवाद के सिद्धांत पर बने रूस को टुकड़े टुकड़े करना अमेरिका के लिए कोई मुश्किल राह न थी। पर समस्या थी रूस का बड़ा आकार।
🚩आधे यूरोप और एशिया को घेरे विशाल रूस को तोड़ना आसान ना था।
🚩ऐसे में 1985 में रूस के राष्ट्रपति बने मिखाइल गोर्बाचेव।
🚩गोर्बाचेव ने रूस में आर्थिक क्रांति लाने का प्रयास किया।
🚩अफगानिस्तान की लड़ाई में जर जर हो चुकी रूस की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए गोर्बाचेव ने साम्यवाद के छत्ते में हाथ डालने की गलती कर दी।
🚩भारत की तरह सैद्धांतिक और मूल विचारों से रूस भी कभी भी एक विचारधारा को मानने वाला नहीं था। जैसे भारत में बंगाली, उड़िया, केरलिस्ट, तमिल, कश्मीरी, बिहारी, मराठी पहले हैं और भारतीय बाद में
🚩ऐसे ही रूस में कम से कम 100 अलग-अलग विचारधारा के लोग शामिल थे। सोवियत संघ में कुल 15 राज्य शामिल थे, सबकी अलग अलग विचारधारा थी।
🚩इनमें मध्य एशिया के मुस्लिम राज्य भी थे, जैसे उज़्बेकिस्तान, कज़ाकिस्तान, तजाकिस्तान और किर्गिज़स्तान।
🚩इसके अलावा पूर्वी यूरोप के भी कुछ राज्य थे....जहां की 90 प्रतिशत आबादी ईसाई धर्म के लोगों की थी। ये देश थे लताविया, एस्टोनिया, यूक्रेन, बेलारूस और जॉर्जिया।
🚩रूस क्षेत्रफल के मामले में सबसे बड़ा, सबसे अमीर और सबसे ताक़तवर राज्य था।
🚩इन्हीं सब विविधताओं का अमेरिका और यूरोप ने फायदा उठाया।
🚩 लोगो और राज्यों को स्वतंत्र होने के लिए उकसाया जाने लगा।
🚩घी का काम किया गोर्बाचेव की आर्थिक नीतियों ने, और अन्ततः रूस के टुकड़े टुकड़े कर दिए गए। अब अमेरिका अकेला था। अकेला सुपर पावर। एकमात्र महाशक्ति। ये तो चीन का उदय हो गया नहीं तो अभी तक तीसरी दुनिया के अधिकतर देश अमेरिका के उपनिवेश बन चुके होते।
🚩अब आज के भारत और भारत में रहने वाले आज के लोगो की बात करते हैं....
🚩पिछले बजट सत्र में राहुल गांधी ने संसद में एक चौंकाने वाला बयान दिया....
"भारत कोई राष्ट्र नहीं बल्कि अलग अलग राज्यों का समूह है!"
🚩 हम राहुल गांधी की इस सोच की प्रामाणिकता या संवैधानिकता पर प्रश्न नहीं उठाते । किंतु ये सोच उसी थ्योरी का बेस है जिस पर खड़े होकर रूस के टुकड़े टुकड़े किये गए थे।
🚩भारत में भी तत्कालीन रूस की तरह सैकडों विचारधाराओं के अलग अलग लोग रहते हैं। अलग अलग राज्य हैं। अलग अलग समूह हैं।अलग अलग रीति रिवाज मानने वाले लोग हैं। अलग अलग धर्म, मजहब वाले लोग हैं। अलग अलग भाषाएं और जाति में बंटे लोग हैं।
🚩ये सब तो है, ठीक है। ये तत्कालीन रूस और भारत में समानता है। किंतु पिछले सात आठ वर्षों में एक और समानता ने जन्म लिया है.... बल्कि कहे तो फली फूली है। और वो है भारत का आर्थिक महाशक्ति बनने की ओर बढ़ते कदम।
🚩आज जब हम रूस और अमेरिका के शीत युद्ध के हालातों को याद देखते हैं तो लगभग वही परिदृश्य आज हम भारत और चीन के मध्य देख रहे है
🚩अपने शानदार एवरेज प्राकृतिक मौसम और वर्तमान सरकार की बेहतर आर्थिक नीतियों के चलते पिछले 8 वर्षों में भारत चीन को हर मोर्चे पर टक्कर दे रहा है। और यदि ऐसा ही चलता रहा तो आने वाले 25 वर्षों में चीन को पछाड़ भारत को दुनिया की नम्बर एक आर्थिक महाशक्ति बनने से कोई रोक नहीं सकेगा।
🚩भला यह चीन कैसे बर्दाश्त कर सकता है ?
🚩इसलिए चीन ने अपनी समस्त नीतियाँ और एफर्ट्स भारत को रोकने में लगा दिए हैं। बेहतर होगा कहा जाए कि भारत को रोकने में नहीं तोड़ने में लगा दिए हैं और इसके लिए केरल से लेकर पंजाब तक, असम से लेकर बंगाल तक भारत की विभिन्न विचारधाराओं के लोगो को केंद्र के विरुद्ध भड़काया जा रहा है। कभी सिखों को सामने करके, कभी शाहीन बाग बना कर, कभी टिकैत को सड़कों पर बिठाकर तो कभी ममता बनर्जी से संविधान के तार तार करवाकर।
और एक सपना जो आज चीन देख रहा है....भारत को टुकड़े टुकड़े करने का !
9 मार्च 2022
http://azaadbharat.org
पढ़िए पूरा लेख👇🏻
🚩द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद से 45 वर्षों तक शायद ही कोई अवसर आया हो जब रूस और अमेरिका की किसी वैश्विक मुद्दे पर आम सहमति बनी हो। दोनो महाशक्ति हर मौके पर अपनी ताल ठोकते रहे...चाहे चांद पर कदम हो या भारत चीन पाकिस्तान के रिश्ते तय करने हो, वियतनाम हो या फिर अफगानिस्तान.... दोनो महाशक्ति 36 के आंकड़े के साथ दुनिया के सामने खड़े रहे और यूँ 1945 से चले शीत युद्ध के साए में 46 सालों तक तीसरी दुनिया के देश अपने अस्तित्व को बचाए रखने के लिए किसी एक का दामन पकड़ पीछे पीछे चलते रहे...जब तक कि दिसम्बर 1991 में रूस टुकड़े टुकड़े ना हो गया।
🚩अकेले महाशक्ति बनकर पूरी दुनिया को हांकने के लिए यह जरूरी था कि अमेरिका रूस को छिन्न भिन्न कर दे।
🚩1917 में साम्यवाद के सिद्धांत पर बने रूस को टुकड़े टुकड़े करना अमेरिका के लिए कोई मुश्किल राह न थी। पर समस्या थी रूस का बड़ा आकार।
🚩आधे यूरोप और एशिया को घेरे विशाल रूस को तोड़ना आसान ना था।
🚩ऐसे में 1985 में रूस के राष्ट्रपति बने मिखाइल गोर्बाचेव।
🚩गोर्बाचेव ने रूस में आर्थिक क्रांति लाने का प्रयास किया।
🚩अफगानिस्तान की लड़ाई में जर जर हो चुकी रूस की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए गोर्बाचेव ने साम्यवाद के छत्ते में हाथ डालने की गलती कर दी।
🚩भारत की तरह सैद्धांतिक और मूल विचारों से रूस भी कभी भी एक विचारधारा को मानने वाला नहीं था। जैसे भारत में बंगाली, उड़िया, केरलिस्ट, तमिल, कश्मीरी, बिहारी, मराठी पहले हैं और भारतीय बाद में
🚩ऐसे ही रूस में कम से कम 100 अलग-अलग विचारधारा के लोग शामिल थे। सोवियत संघ में कुल 15 राज्य शामिल थे, सबकी अलग अलग विचारधारा थी।
🚩इनमें मध्य एशिया के मुस्लिम राज्य भी थे, जैसे उज़्बेकिस्तान, कज़ाकिस्तान, तजाकिस्तान और किर्गिज़स्तान।
🚩इसके अलावा पूर्वी यूरोप के भी कुछ राज्य थे....जहां की 90 प्रतिशत आबादी ईसाई धर्म के लोगों की थी। ये देश थे लताविया, एस्टोनिया, यूक्रेन, बेलारूस और जॉर्जिया।
🚩रूस क्षेत्रफल के मामले में सबसे बड़ा, सबसे अमीर और सबसे ताक़तवर राज्य था।
🚩इन्हीं सब विविधताओं का अमेरिका और यूरोप ने फायदा उठाया।
🚩 लोगो और राज्यों को स्वतंत्र होने के लिए उकसाया जाने लगा।
🚩घी का काम किया गोर्बाचेव की आर्थिक नीतियों ने, और अन्ततः रूस के टुकड़े टुकड़े कर दिए गए। अब अमेरिका अकेला था। अकेला सुपर पावर। एकमात्र महाशक्ति। ये तो चीन का उदय हो गया नहीं तो अभी तक तीसरी दुनिया के अधिकतर देश अमेरिका के उपनिवेश बन चुके होते।
🚩अब आज के भारत और भारत में रहने वाले आज के लोगो की बात करते हैं....
🚩पिछले बजट सत्र में राहुल गांधी ने संसद में एक चौंकाने वाला बयान दिया....
"भारत कोई राष्ट्र नहीं बल्कि अलग अलग राज्यों का समूह है!"
🚩 हम राहुल गांधी की इस सोच की प्रामाणिकता या संवैधानिकता पर प्रश्न नहीं उठाते । किंतु ये सोच उसी थ्योरी का बेस है जिस पर खड़े होकर रूस के टुकड़े टुकड़े किये गए थे।
🚩भारत में भी तत्कालीन रूस की तरह सैकडों विचारधाराओं के अलग अलग लोग रहते हैं। अलग अलग राज्य हैं। अलग अलग समूह हैं।अलग अलग रीति रिवाज मानने वाले लोग हैं। अलग अलग धर्म, मजहब वाले लोग हैं। अलग अलग भाषाएं और जाति में बंटे लोग हैं।
🚩ये सब तो है, ठीक है। ये तत्कालीन रूस और भारत में समानता है। किंतु पिछले सात आठ वर्षों में एक और समानता ने जन्म लिया है.... बल्कि कहे तो फली फूली है। और वो है भारत का आर्थिक महाशक्ति बनने की ओर बढ़ते कदम।
🚩आज जब हम रूस और अमेरिका के शीत युद्ध के हालातों को याद देखते हैं तो लगभग वही परिदृश्य आज हम भारत और चीन के मध्य देख रहे है
🚩अपने शानदार एवरेज प्राकृतिक मौसम और वर्तमान सरकार की बेहतर आर्थिक नीतियों के चलते पिछले 8 वर्षों में भारत चीन को हर मोर्चे पर टक्कर दे रहा है। और यदि ऐसा ही चलता रहा तो आने वाले 25 वर्षों में चीन को पछाड़ भारत को दुनिया की नम्बर एक आर्थिक महाशक्ति बनने से कोई रोक नहीं सकेगा।
🚩भला यह चीन कैसे बर्दाश्त कर सकता है ?
🚩इसलिए चीन ने अपनी समस्त नीतियाँ और एफर्ट्स भारत को रोकने में लगा दिए हैं। बेहतर होगा कहा जाए कि भारत को रोकने में नहीं तोड़ने में लगा दिए हैं और इसके लिए केरल से लेकर पंजाब तक, असम से लेकर बंगाल तक भारत की विभिन्न विचारधाराओं के लोगो को केंद्र के विरुद्ध भड़काया जा रहा है। कभी सिखों को सामने करके, कभी शाहीन बाग बना कर, कभी टिकैत को सड़कों पर बिठाकर तो कभी ममता बनर्जी से संविधान के तार तार करवाकर।
🚩विदेशों से भारत को तोड़ने के अभियान चलाए जाते हैं। कभी अमेरिका की रिहाना को, तो कभी ग्रेटा थनबर्ग को भारत की लोकप्रिय सरकार की आलोचना करने के लिए मीडिया के थ्रू भारत में लांच किया जाता है।
"भारत तेरे टुकड़े होंगे....इंशाअल्लाह इंशाअल्लाह"....
चिल्लाने वालो को विदेशों से फंडिंग की जाती है।
🚩 राज्यों के अधिकारों के नाम पर अलग अलग राज्यो की जनता को भड़काया जाता है।
🚩कुल मिलाकर बस एक चिंगारी की देर है। और चीन का सपना साकार होने में देर नहीं लगेगी कि भारत भी रूस की तरह टुकड़े टुकड़े बंट जाए।
और तब दिल्ली की सर्जिकल स्ट्राइक इस्लामाबाद पर नहीं.....
हैदराबाद की जयपुर पर होगी,
बंगलुरू की भोपाल पर होगी
बंगाल की बिहार पर होगी।
मराठे मारवाड़ को भेदेगें और कश्मीरियत पंजाबियत का इम्तिहान लेगी।
🚩रूस यूक्रेन युद्ध भारत के लिए वो आईना है जिसमें भविष्य में होने वाली घटनाओं को साफ साफ देखा जा सकता है। बस आवश्यकता है ऐसी घटनाओं को न घटित होने देने के संकल्प की।
🚩दुनिया को लग रहा होगा कि रूस एक दूसरे देश यूक्रेन को मटियामेट कर रहा है। पर ध्यान से सोचो रूस कभी रूस रहे अपनी भूमि यूक्रेन को ही जला रहा है और अमेरिका अपने 50 साल पुराने सपने को साकार होते देख खुशी में नाच रहा है।
🚩क्या बात है जमीं भी रूस की, माचिस भी रूस की, सड़कों पर बहता खून भी रूस का, चीखें भी रूस की, कत्ल भी रूस का और कातिल भी रूस का....पर सपना अमेरिका का।
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"भारत तेरे टुकड़े होंगे....इंशाअल्लाह इंशाअल्लाह"....
चिल्लाने वालो को विदेशों से फंडिंग की जाती है।
🚩 राज्यों के अधिकारों के नाम पर अलग अलग राज्यो की जनता को भड़काया जाता है।
🚩कुल मिलाकर बस एक चिंगारी की देर है। और चीन का सपना साकार होने में देर नहीं लगेगी कि भारत भी रूस की तरह टुकड़े टुकड़े बंट जाए।
और तब दिल्ली की सर्जिकल स्ट्राइक इस्लामाबाद पर नहीं.....
हैदराबाद की जयपुर पर होगी,
बंगलुरू की भोपाल पर होगी
बंगाल की बिहार पर होगी।
मराठे मारवाड़ को भेदेगें और कश्मीरियत पंजाबियत का इम्तिहान लेगी।
🚩रूस यूक्रेन युद्ध भारत के लिए वो आईना है जिसमें भविष्य में होने वाली घटनाओं को साफ साफ देखा जा सकता है। बस आवश्यकता है ऐसी घटनाओं को न घटित होने देने के संकल्प की।
🚩दुनिया को लग रहा होगा कि रूस एक दूसरे देश यूक्रेन को मटियामेट कर रहा है। पर ध्यान से सोचो रूस कभी रूस रहे अपनी भूमि यूक्रेन को ही जला रहा है और अमेरिका अपने 50 साल पुराने सपने को साकार होते देख खुशी में नाच रहा है।
🚩क्या बात है जमीं भी रूस की, माचिस भी रूस की, सड़कों पर बहता खून भी रूस का, चीखें भी रूस की, कत्ल भी रूस का और कातिल भी रूस का....पर सपना अमेरिका का।
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17 मार्च होली पर्व पर पलाश एवं प्राकृतिक रंगों से होली खेले एवं होली को गाय के कंडे से जलाकर वातावरण शुद्ध बनाये।
10 मार्च 2022
http://azaadbharat.org
🚩हिरण्यकश्यप की बहन होलिका को अग्नि से ना जलने का वरदान प्राप्त था,इसलिए उन्होंने प्रह्लाद को आग में जलाकर मारने के उद्देश्य से आग में जा बैठी। लेकिन भगवान की कृपा से प्रह्लाद बच गया और होलिका जलकर भष्म हो गई,तभी से ये होली का त्योहार मनाने जाने लगा।
🚩होली की बौछार लाये जीवन में बहार, वैदिक, प्राचीन एवं विश्वप्रिय होली उत्सव
🚩यह होलिकोत्सव प्राकृतिक, प्राचीन व वैदिक उत्सव है । साथ ही यह आरोग्य, आनंद और आह्लाद प्रदायक उत्सव भी है, जो प्राणिमात्र के राग-द्वेष मिटाकर, दूरी मिटाकर हमें संदेश देता है कि हो... ली... अर्थात् जो हो गया सो हो गया।
🚩यह वैदिक उत्सव है। लाखों वर्ष पहले भगवान रामजी हो गये। उनसे पहले उनके पिता, पितामह, पितामह के पितामह दिलीप राजा और उनके बाद रघु राजा... रघु राजा के राज्य में भी यह महोत्सव मनाया जाता था। बापू भी होली खेलते हैं लाखों-लाखों प्यारे भक्तों के साथ !
🚩पलाश का रंग, केसर, चंदन और गुलाब के फूल रगड़कर अकबर भी अपने महल में होली खेलता था लेकिन रानियों के साथ, जहाँगीर भी खेलता था और कई मुसलमान राजा भी होली का उपयोग लेते थे।
🚩अभी अमेरिका में और अलग-अलग देशों में अलग-अलग नामों से इस उत्सव का लाभ लोग उठाते हैं । स्पेन में लोग टमाटरों से होली खेलते हैं । लाखों टन टमाटर इकट्ठे होते हैं और ‘दे धमाधम... दे धमाधम...’ बकरियों और गायों के लिए तो भंडारा होता होगा लेकिन टमाटर की सब्जी महँगी हो जाती होगी ! लेकिन मैंने न टमाटर से और न ही रासायनिक रंगों से होली खेलना चालू किया बल्कि पलाश के फूलों से चालू किया।
🚩स्वास्थ्यप्रदायक होली
🚩रासायनिक रंगों का तन-मन पर बड़ा दुष्प्रभाव होता है। काले रंग में लेड ऑक्साइड पड़ता है, वह किडनी को खराब करता है। लाल रंग में कॉपर सल्फेट पड़ता है, वह कैंसर की बीमारी देता है। बैंगनी रंग से दमा और एलर्जी की बीमारी होती है। सभी रासायनिक रंगों में कोई-न-कोई खतरनाक बीमारी को जन्म देने का दुष्प्रभाव है।
🚩लेकिन पलाश की अपनी एक सात्त्विकता है। पलाश के फूलों का रंग रोगप्रतिकारक शक्ति बढ़ाता है। गर्मी को पचाने की, सप्तरंगों व सप्तधातुओं को संतुलित करने की क्षमता पलाश में है। पलाश के फूलों से जो होली खेली जाती है, उसमें पानी की बचत भी होती है। रासायनिक रंगों को मिटाने के लिए कई बाल्टियाँ पानी लगता है। सूखा रंग, काला रंग या सिल्वर रंग लगायें तो उसको हटाने के लिए साबुन और पानी बहुत लगता है लेकिन पलाश के फूलों के रंग के लिए न कई बाल्टियाँ पानी लगता है न कई गिलास पानी लगता है। और पलाश वृक्ष की गुणवत्ता सर्वोपरि है । पित्त और वायु मिलकर हृदयाघात (हार्ट-अटैक) का कारण बनता है लेकिन जिस पर पलाश के फूलों का रंग छिड़क देते हैं उसका पित्त शांत हो जाता है तो हार्ट-अटैक कहाँ से आयेगा ?
🚩वायुसंबंधी 80 प्रकार की बीमारियों को भगाने की शक्ति इस पलाश के रंग में है।
🚩इस मौसम में सुबह-सुबह 20 से 25 नीम के कोमल पत्ते और एक काली मिर्च चबा के खानेवाला व्यक्ति वर्षभर निरोग रहने का प्रमाणपत्र ले लेता है, बाहर नहीं भीतर ही । होली के बाद 20-25 दिन तक बिना नमक अथवा कम नमकवाला भोजन करना स्वास्थ्य के लिए अच्छा है । इन दिनों में सर्दियोंवाला (पचने में भारी) भोजन करना वर्जित है।
🚩होली के दिन चैतन्य महाप्रभु का प्राकट्य हुआ था । इन दिनों में हरिनाम कीर्तन करना-कराना चाहिए। लट्ठी-खेंच कार्यक्रम करना चाहिए, यह बलवर्धक है। नाचना, कूदना-फाँदना चाहिए जिससे जमे हुए कफ की छोटी-मोटी गाँठें भी पिघल जायें और वे ट्यूमर कैंसर का रूप न ले लें और कोई दिमाग या कमर का ट्यूमर भी न हो। तुम्हारे शरीर में जो कुछ अस्त-व्यस्तता है, वह गर्मी से तथा नाचने, कूदने-फाँदने से ठीक हो जाती है और फिर होली जले तो गर्मी का भी थोड़ा फायदा लेना, लावा का फायदा लेना और पलाश के फूलों का रंग एक-दूसरे पर छिड़क के अपने चित्त को आनंदित व उल्लसित करना।
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10 मार्च 2022
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🚩हिरण्यकश्यप की बहन होलिका को अग्नि से ना जलने का वरदान प्राप्त था,इसलिए उन्होंने प्रह्लाद को आग में जलाकर मारने के उद्देश्य से आग में जा बैठी। लेकिन भगवान की कृपा से प्रह्लाद बच गया और होलिका जलकर भष्म हो गई,तभी से ये होली का त्योहार मनाने जाने लगा।
🚩होली की बौछार लाये जीवन में बहार, वैदिक, प्राचीन एवं विश्वप्रिय होली उत्सव
🚩यह होलिकोत्सव प्राकृतिक, प्राचीन व वैदिक उत्सव है । साथ ही यह आरोग्य, आनंद और आह्लाद प्रदायक उत्सव भी है, जो प्राणिमात्र के राग-द्वेष मिटाकर, दूरी मिटाकर हमें संदेश देता है कि हो... ली... अर्थात् जो हो गया सो हो गया।
🚩यह वैदिक उत्सव है। लाखों वर्ष पहले भगवान रामजी हो गये। उनसे पहले उनके पिता, पितामह, पितामह के पितामह दिलीप राजा और उनके बाद रघु राजा... रघु राजा के राज्य में भी यह महोत्सव मनाया जाता था। बापू भी होली खेलते हैं लाखों-लाखों प्यारे भक्तों के साथ !
🚩पलाश का रंग, केसर, चंदन और गुलाब के फूल रगड़कर अकबर भी अपने महल में होली खेलता था लेकिन रानियों के साथ, जहाँगीर भी खेलता था और कई मुसलमान राजा भी होली का उपयोग लेते थे।
🚩अभी अमेरिका में और अलग-अलग देशों में अलग-अलग नामों से इस उत्सव का लाभ लोग उठाते हैं । स्पेन में लोग टमाटरों से होली खेलते हैं । लाखों टन टमाटर इकट्ठे होते हैं और ‘दे धमाधम... दे धमाधम...’ बकरियों और गायों के लिए तो भंडारा होता होगा लेकिन टमाटर की सब्जी महँगी हो जाती होगी ! लेकिन मैंने न टमाटर से और न ही रासायनिक रंगों से होली खेलना चालू किया बल्कि पलाश के फूलों से चालू किया।
🚩स्वास्थ्यप्रदायक होली
🚩रासायनिक रंगों का तन-मन पर बड़ा दुष्प्रभाव होता है। काले रंग में लेड ऑक्साइड पड़ता है, वह किडनी को खराब करता है। लाल रंग में कॉपर सल्फेट पड़ता है, वह कैंसर की बीमारी देता है। बैंगनी रंग से दमा और एलर्जी की बीमारी होती है। सभी रासायनिक रंगों में कोई-न-कोई खतरनाक बीमारी को जन्म देने का दुष्प्रभाव है।
🚩लेकिन पलाश की अपनी एक सात्त्विकता है। पलाश के फूलों का रंग रोगप्रतिकारक शक्ति बढ़ाता है। गर्मी को पचाने की, सप्तरंगों व सप्तधातुओं को संतुलित करने की क्षमता पलाश में है। पलाश के फूलों से जो होली खेली जाती है, उसमें पानी की बचत भी होती है। रासायनिक रंगों को मिटाने के लिए कई बाल्टियाँ पानी लगता है। सूखा रंग, काला रंग या सिल्वर रंग लगायें तो उसको हटाने के लिए साबुन और पानी बहुत लगता है लेकिन पलाश के फूलों के रंग के लिए न कई बाल्टियाँ पानी लगता है न कई गिलास पानी लगता है। और पलाश वृक्ष की गुणवत्ता सर्वोपरि है । पित्त और वायु मिलकर हृदयाघात (हार्ट-अटैक) का कारण बनता है लेकिन जिस पर पलाश के फूलों का रंग छिड़क देते हैं उसका पित्त शांत हो जाता है तो हार्ट-अटैक कहाँ से आयेगा ?
🚩वायुसंबंधी 80 प्रकार की बीमारियों को भगाने की शक्ति इस पलाश के रंग में है।
🚩इस मौसम में सुबह-सुबह 20 से 25 नीम के कोमल पत्ते और एक काली मिर्च चबा के खानेवाला व्यक्ति वर्षभर निरोग रहने का प्रमाणपत्र ले लेता है, बाहर नहीं भीतर ही । होली के बाद 20-25 दिन तक बिना नमक अथवा कम नमकवाला भोजन करना स्वास्थ्य के लिए अच्छा है । इन दिनों में सर्दियोंवाला (पचने में भारी) भोजन करना वर्जित है।
🚩होली के दिन चैतन्य महाप्रभु का प्राकट्य हुआ था । इन दिनों में हरिनाम कीर्तन करना-कराना चाहिए। लट्ठी-खेंच कार्यक्रम करना चाहिए, यह बलवर्धक है। नाचना, कूदना-फाँदना चाहिए जिससे जमे हुए कफ की छोटी-मोटी गाँठें भी पिघल जायें और वे ट्यूमर कैंसर का रूप न ले लें और कोई दिमाग या कमर का ट्यूमर भी न हो। तुम्हारे शरीर में जो कुछ अस्त-व्यस्तता है, वह गर्मी से तथा नाचने, कूदने-फाँदने से ठीक हो जाती है और फिर होली जले तो गर्मी का भी थोड़ा फायदा लेना, लावा का फायदा लेना और पलाश के फूलों का रंग एक-दूसरे पर छिड़क के अपने चित्त को आनंदित व उल्लसित करना।
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🚩आदित्यनाथ योगी पिछले 20 सालों से संत श्रीआशारामजी बापू का मार्गदर्शन प्राप्त करते रहे है,अभी हाल में ही कुछ समय पहले बापूजी ने मीडिया द्वारा पूछे जाने पर कहा था कि आदित्यनाथ योगी बहादुर है फिर से आयेगे और उत्तरप्रदेश को चमकायेंगे।
11 मार्च 2022
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🚩उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री हिन्दू धर्म और भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिए अनेक प्रयास कर रहे हैं।
🚩 अभी हाल में 14 फरवरी को मातृ पितृ पूजन दिवस मनाने की शुभकामनाएं भी दी थी।
🚩श्री योगी आदित्यनाथ पत्र द्वारा बताया कि मुझे यह जानकर खुशी है कि संत श्रीआशारामजी बापू की प्रेरणा से देशभर में 14 फरवरी ‘मातृ-पितृ की पूजन दिवस’ के रूप में मना रहे हैं।
🚩आदित्यनाथ योगी जी कहते है कि पिछले कुछ दशक से समाज एवं समाज की सामाजिक संरचना काफी हद तक बदल गयी है।
🚩 इसलिए युवा पीढ़ी में भारतीय संस्कृति के मूल्यों और आदर्शों को विकसित करना आवश्यक है।
🚩प्रशंसनीय है कि संत श्रीआशारामजी आश्रम द्वारा संचालित श्री योग वेदांत सेवा समिति छात्रों में चरित्र निर्माण गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल है।
🚩श्री आदित्यनाथ योगी जी ने यह भी कहा कि मुझे उम्मीद है कि संत श्रीआशारामजी बापू द्वारा प्रेरित मातृ-पितृ पूजन दिवस कार्यक्रम अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने में सफल रहेगा।
🚩मेरी शुभकामनाएं इस कार्य के लिए-आदित्यनाथ योगी (मुख्यमंत्री उत्तरप्रदेश)
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11 मार्च 2022
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🚩उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री हिन्दू धर्म और भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिए अनेक प्रयास कर रहे हैं।
🚩 अभी हाल में 14 फरवरी को मातृ पितृ पूजन दिवस मनाने की शुभकामनाएं भी दी थी।
🚩श्री योगी आदित्यनाथ पत्र द्वारा बताया कि मुझे यह जानकर खुशी है कि संत श्रीआशारामजी बापू की प्रेरणा से देशभर में 14 फरवरी ‘मातृ-पितृ की पूजन दिवस’ के रूप में मना रहे हैं।
🚩आदित्यनाथ योगी जी कहते है कि पिछले कुछ दशक से समाज एवं समाज की सामाजिक संरचना काफी हद तक बदल गयी है।
🚩 इसलिए युवा पीढ़ी में भारतीय संस्कृति के मूल्यों और आदर्शों को विकसित करना आवश्यक है।
🚩प्रशंसनीय है कि संत श्रीआशारामजी आश्रम द्वारा संचालित श्री योग वेदांत सेवा समिति छात्रों में चरित्र निर्माण गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल है।
🚩श्री आदित्यनाथ योगी जी ने यह भी कहा कि मुझे उम्मीद है कि संत श्रीआशारामजी बापू द्वारा प्रेरित मातृ-पितृ पूजन दिवस कार्यक्रम अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने में सफल रहेगा।
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केमिकलों के रंगों से होली से घातक परिणाम और प्राकृतिक रंगों से होली से स्वास्थ्य लाभ, इसलिए प्राकृतिक रंगों से ही होली खेले
12 मार्च 2022
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🚩प्राकृतिक रंगों से होली खेले बिना जो लोग ग्रीष्म ऋतु बिताते हैं,उन्हें चिड़चिड़ापन, खिन्नता,डिप्रेशन,तनाव,अनिद्रा इत्यादि रोग आ घेरते हैं।
🚩सूखे केमिकलों के रंगों से होली खेलने से स्किन एलर्जी,चमड़ी के रोग,आँखों में जलन, कैंसर, गुर्दे की बीमारी,दमा आदि रोग होते है।
🚩प्राकृतिक रंग-पलाश के फूलों का रंग बनाकर होली खेलने से ऐसी भयंकर बीमारियों से रक्षा तो होती ही साथ ही स्वास्थ्य में भी व्रद्धि होती है।
🚩इसलिए सभी भाई-बहनों को स्वस्थ रहने के और रोगों से बचने के लिये प्राकृतिक रंगों से पलाश के फूलों के बने रंग से होली खेलना चाहिए।
🚩आइए हम सभी स्वास्थ्य वर्धक प्राकृतिक रंग बनाने की सरल विधियाँ जाने👇🏻
🚩केसरिया रंगः पलाश के फूलों से यह रंग सरलता से तैयार किया जा सकता है। पलाश के फूलों को रात को पानी में भिगो दें। सुबह इस केसरिया रंग को ऐसे ही प्रयोग में लायें या उबालकर होली का आनंद उठायें। यह रंग होली खेलने के लिए सबसे बढ़िया है। शास्त्रों में भी पलाश के फूलों से होली खेलने का वर्णन आता है। इसमें औषधिय गुण होते हैं। आयुर्वेद के अनुसार यह कफ, पित्त, कुष्ठ, दाह, मूत्रकृच्छ, वायु तथा रक्तदोष का नाश करता है। रक्तसंचार को नियमित व मांसपेशियों को स्वस्थ रखने के साथ ही यह मानसिक शक्ति तथा इच्छाशक्ति में भी वृद्धि करता है।
🚩सूखा हरा रंगः मेंहदी या हिना का पाउडर तथा गेहूँ या अन्य अनाज के आटे को समान मात्रा में मिलाकर सूखा हरा रंग बनायें। आँवला चूर्ण व मेंहदी को मिलाने से भूरा रंग बनता है, जो त्वचा व बालों के लिए लाभदायी है।
🚩सूखा पीला रंगः हल्दी व बेसन मिला के अथवा अमलतास व गेंदे के फूलों को छाया में सुखाकर पीस के पीला रंग प्राप्त कर सकते हैं।
🚩गीला पीला रंगः एक चम्मच हल्दी दो लीटर पानी में उबालें या मिठाइयों में पड़ने वाले रंग जो खाने के काम आते हैं, उनका भी उपयोग कर सकते हैं। अमलतास या गेंदे के फूलों को रात को पानी भिगोकर रखें, सुबह उबालें।
🚩लाल रंगः लाल चंदन (रक्त चंदन) पाउडर को सूखे लाल रंग के रूप में प्रयोग कर सकते हैं। यह त्वचा के लिए लाभदायक व सौंदर्यवर्धक है। दो चम्मच लाल चंदन एक लीटर पानी में डालकर उबालने से लाल रंग प्राप्त होता है, जिसमें आवश्यकतानुसार पानी मिलायें।
🚩पीला गुलाल : (१) ४ चम्मच बेसन में २ चम्मच हल्दी चूर्ण मिलायें। (२) अमलतास या गेंदा के फूलों के चूर्ण के साथ कोई भी आटा या मुलतानी मिट्टी मिला लें।
🚩पीला रंग : (१) २ चम्मच हल्दी चूर्ण २ लीटर पानी में उबालें (२) अमलतास, गेंदा के फूलों को रातभर भिगोकर उबाल लें।
🚩जामुनी रंग : चुकंदर उबालकर पीस के पानी में मिला लें।
🚩काला रंग : आँवला चूर्ण लोहे के बर्तन में रातभर भिगोयें।
🚩लाल रंग : (१) आधे कप पानी में दो चम्मच हल्दी चूर्ण व चुटकीभर चुना मिलाकर १० लीटर पानी में डाल दे | (२) २ चम्मच लाल चंदन चूर्ण १ लीटर पानी में उबाले।
🚩लाल गुलाल : सूखे लाल गुडहल के फूलों का चूर्ण उपयोग करें।
🚩हरा रंग : (१) पालक, धनिया या पुदीने की पत्तियों के पेस्ट को पानी भिगोकर उपयोग करें।
🚩हरा गुलाल : गुलमोहर अथवा रातरानी की पत्तियों को सुखाकर पीस लें।
🚩भूरा हरा गुलाल : मेहँदी चूर्ण के साथ आँवला चूर्ण मिला लें।
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12 मार्च 2022
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🚩प्राकृतिक रंगों से होली खेले बिना जो लोग ग्रीष्म ऋतु बिताते हैं,उन्हें चिड़चिड़ापन, खिन्नता,डिप्रेशन,तनाव,अनिद्रा इत्यादि रोग आ घेरते हैं।
🚩सूखे केमिकलों के रंगों से होली खेलने से स्किन एलर्जी,चमड़ी के रोग,आँखों में जलन, कैंसर, गुर्दे की बीमारी,दमा आदि रोग होते है।
🚩प्राकृतिक रंग-पलाश के फूलों का रंग बनाकर होली खेलने से ऐसी भयंकर बीमारियों से रक्षा तो होती ही साथ ही स्वास्थ्य में भी व्रद्धि होती है।
🚩इसलिए सभी भाई-बहनों को स्वस्थ रहने के और रोगों से बचने के लिये प्राकृतिक रंगों से पलाश के फूलों के बने रंग से होली खेलना चाहिए।
🚩आइए हम सभी स्वास्थ्य वर्धक प्राकृतिक रंग बनाने की सरल विधियाँ जाने👇🏻
🚩केसरिया रंगः पलाश के फूलों से यह रंग सरलता से तैयार किया जा सकता है। पलाश के फूलों को रात को पानी में भिगो दें। सुबह इस केसरिया रंग को ऐसे ही प्रयोग में लायें या उबालकर होली का आनंद उठायें। यह रंग होली खेलने के लिए सबसे बढ़िया है। शास्त्रों में भी पलाश के फूलों से होली खेलने का वर्णन आता है। इसमें औषधिय गुण होते हैं। आयुर्वेद के अनुसार यह कफ, पित्त, कुष्ठ, दाह, मूत्रकृच्छ, वायु तथा रक्तदोष का नाश करता है। रक्तसंचार को नियमित व मांसपेशियों को स्वस्थ रखने के साथ ही यह मानसिक शक्ति तथा इच्छाशक्ति में भी वृद्धि करता है।
🚩सूखा हरा रंगः मेंहदी या हिना का पाउडर तथा गेहूँ या अन्य अनाज के आटे को समान मात्रा में मिलाकर सूखा हरा रंग बनायें। आँवला चूर्ण व मेंहदी को मिलाने से भूरा रंग बनता है, जो त्वचा व बालों के लिए लाभदायी है।
🚩सूखा पीला रंगः हल्दी व बेसन मिला के अथवा अमलतास व गेंदे के फूलों को छाया में सुखाकर पीस के पीला रंग प्राप्त कर सकते हैं।
🚩गीला पीला रंगः एक चम्मच हल्दी दो लीटर पानी में उबालें या मिठाइयों में पड़ने वाले रंग जो खाने के काम आते हैं, उनका भी उपयोग कर सकते हैं। अमलतास या गेंदे के फूलों को रात को पानी भिगोकर रखें, सुबह उबालें।
🚩लाल रंगः लाल चंदन (रक्त चंदन) पाउडर को सूखे लाल रंग के रूप में प्रयोग कर सकते हैं। यह त्वचा के लिए लाभदायक व सौंदर्यवर्धक है। दो चम्मच लाल चंदन एक लीटर पानी में डालकर उबालने से लाल रंग प्राप्त होता है, जिसमें आवश्यकतानुसार पानी मिलायें।
🚩पीला गुलाल : (१) ४ चम्मच बेसन में २ चम्मच हल्दी चूर्ण मिलायें। (२) अमलतास या गेंदा के फूलों के चूर्ण के साथ कोई भी आटा या मुलतानी मिट्टी मिला लें।
🚩पीला रंग : (१) २ चम्मच हल्दी चूर्ण २ लीटर पानी में उबालें (२) अमलतास, गेंदा के फूलों को रातभर भिगोकर उबाल लें।
🚩जामुनी रंग : चुकंदर उबालकर पीस के पानी में मिला लें।
🚩काला रंग : आँवला चूर्ण लोहे के बर्तन में रातभर भिगोयें।
🚩लाल रंग : (१) आधे कप पानी में दो चम्मच हल्दी चूर्ण व चुटकीभर चुना मिलाकर १० लीटर पानी में डाल दे | (२) २ चम्मच लाल चंदन चूर्ण १ लीटर पानी में उबाले।
🚩लाल गुलाल : सूखे लाल गुडहल के फूलों का चूर्ण उपयोग करें।
🚩हरा रंग : (१) पालक, धनिया या पुदीने की पत्तियों के पेस्ट को पानी भिगोकर उपयोग करें।
🚩हरा गुलाल : गुलमोहर अथवा रातरानी की पत्तियों को सुखाकर पीस लें।
🚩भूरा हरा गुलाल : मेहँदी चूर्ण के साथ आँवला चूर्ण मिला लें।
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🚩आज का विज्ञान चाहे कितनी भी उन्नति कर ले पर ईश्वर के विधान के सामने फेल है....।
13 मार्च 2022
azaadbharat.org
🚩आज कोई माने या न माने पर ईश्वर द्वारा प्रकृति की संरचना ही सर्वश्रेष्ठ संरचना है। हमें ईश्वर ने जो जिस रूप में दिया वही हमारे लिए सर्वोत्तम है। हम भोग-विलास, दिखावे और लालसा में भले ही प्राकृतिक चीजों से दूर चले गए पर आज मानव निर्मित चीजों के दुष्प्रभावों, दुष्परिणामों के कारण मनुष्य को वापिस प्राकृतिक चीजों की तरफ लौटना पड़ रहा है क्योंकि वे ही सर्वश्रेष्ठ हैं।
🚩जानिए इस विषय में कुछ उदाहरण:
1.) पहले मनुष्य मिट्टी के बर्तन प्रयोग करता था। फिर वहां से भिन्न भिन्न धातुओं और स्टील तथा प्लास्टिक के बर्तनों तक पहुँच गया है। पर इनके प्रयोग से कैंसर होने का खतरा हो गया है इसलिए मनुष्य दोबारा मिट्टी के बर्तनों तक आ रहा है।
🚩2.) पहले इंसान अंगूठाछाप था क्योंकि उसे पढ़ना लिखना नहीं आता था। बाद में जब पढ़ना लिखना आया तो हस्ताक्षर (Signature) करने का प्रचलन चला। आज विज्ञान जहां चरमसीमा पर पहुँच चुका है तो इंसान फिर से Thumb Scanning की तकनीक के कारण अंगूठाछाप बन गया है।
🚩3.) पहले मनुष्य फटे होने पर भी सादे कपड़े पहनता था। फिर साफ सुथरे और प्रेस किए कपड़े पहनने लगा। फिर फैशन के नाम पर अपनी पैंटें फाड़ने लगा। सूती वस्त्रों से टैरीलीन, टैरीकॉट पर पहुँचा इंसान फिर से वापस सूती वस्त्रों पर आ रहा है।
🚩4.) मनुष्य पहले पढ़ता ही नहीं था। जब ज्ञान हुआ तो गुरुकुलों में नैतिक और आध्यात्मिक ज्ञान ही लिया। अब विज्ञान चरमसीमा पर है। लोग MBBS, Engineering, MBA की पढ़ाई कर रहे हैं पर नैतिक और आध्यात्मिक ज्ञान और शांति नहीं है। आत्महत्या जैसा घोर पाप बढ़ कर रहे हैं, अपराध बढ़ गया है। समय वो आ गया है कि नैतिक और आध्यात्मिक ज्ञान, भौतिक ज्ञान से जरूरी हो गया है।
🚩5.) खेती में पहले मनुष्य प्राकृतिक खाद प्रयोग करता था। बाद में यूरिया, कीटनाशक दवाओं का प्रयोग करने लगा। इनके दुष्प्रभावों के कारण मनुष्य अब वापिस आर्गेनिक खेती की तरफ बढ़ रहा है।
🚩6.) पहले मनुष्य कुदरती फल, खाद्य पदार्थ ही खाता था। उस क़ुदरती भोजन से मनुष्य प्रोसेस्ड फ़ूड (Canned Food & packed juices) की तरफ बढ़ा। इससे तरह तरह की बीमारियां होने लगीं। अब इन बीमारियों से बचने के लिए मनुष्य दोबारा क़ुदरती भोजन की तरफ आ रहा है।
🚩7.) पहले मनुष्य सादी वस्तुएं प्रयोग करता था। फिर पुरानी और सादा चीज़ें इस्तेमाल ना करके ब्रांडेड (Branded) चीजें प्रयोग करने लगा। नई चीजों से जी भर गया तो पुरानी चीजें ही Antique Piece कहकर रखने लगा।
🚩8.) पहले मनुष्य आयुर्वेदिक पद्धति से ईलाज करता था। फिर एलोपैथी का प्रचलन हुआ, एंटीबायोटिक का जमाना आया। एलोपैथी और एंटीबायोटिक के दुष्प्रभावों के कारण मनुष्य वापिस आयुर्वेद की तरफ बढ़ रहा है।
🚩9.) पहले बच्चे मिट्टी खाते थे। जैसे जैसे सभ्यता का विकास हुआ, मनुष्य बच्चों को इंफेक्शन के डर से मिट्टी में खेलने से रोकने लगा। बच्चों को घर में बंद करके फिसड्डी बना दिया। उसी मनुष्य ने अब Immunity बढ़ाने के नाम पर बच्चों को फिर से मिट्टी में खेलाना शुरू कर दिया है।
🚩10.) पहले मनुष्य जंगल में रहा, गाँवों में रहा। फिर विकास की दौड़ में शहर की तरफ भागा। वहां पर्यावरण को प्रदूषित किया और अब वापिस साफ हवा और स्वास्थ्य लाभ के लिए जंगल, गांव और हिल-स्टेशनों की तरफ जा रहा है।
🚩11.) जंगल, गांव और गौशालाओं में रहने वाला मनुष्य चकाचौंध से प्रभावित होकर शहर भागा, डिस्को पब भागा। अब मनुष्य दोबारा मन की शांति के लिए शहर से जंगल, गाँव व गौशालाओं की ओर आ रहा है।
🚩12) भारतीय (हिंदू) संस्कृति महान थी; उसके अनुसार जीवन जीने से व्यक्ति स्वस्थ, सुखी एवं सम्मानित जीवन जीता था लेकिन टीवी, फिल्मों और मीडिया के दुष्प्रभाव के कारण पाश्चात्य संस्कृति में चला गया लेकिन वहाँ दुःख, चिंता, बीमारियां बढ़ने लगीं तो भारतीय संस्कृति की तरफ लौटना शुरू कर दिया।
🚩इससे ये निष्कर्ष निकलता है कि तकनीक ने हमें जो दिया, उससे बेहतर तो भगवान ने हमें पहले ही दे रखा था। वास्तव में विज्ञान की बजाय ईश्वर की संरचना ही हमारे लिए सर्वश्रेष्ठ है। इससे सिद्ध होता है कि हमारे लिए ईश्वर से बड़ा कोई हितैषी नहीं है।
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13 मार्च 2022
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🚩आज कोई माने या न माने पर ईश्वर द्वारा प्रकृति की संरचना ही सर्वश्रेष्ठ संरचना है। हमें ईश्वर ने जो जिस रूप में दिया वही हमारे लिए सर्वोत्तम है। हम भोग-विलास, दिखावे और लालसा में भले ही प्राकृतिक चीजों से दूर चले गए पर आज मानव निर्मित चीजों के दुष्प्रभावों, दुष्परिणामों के कारण मनुष्य को वापिस प्राकृतिक चीजों की तरफ लौटना पड़ रहा है क्योंकि वे ही सर्वश्रेष्ठ हैं।
🚩जानिए इस विषय में कुछ उदाहरण:
1.) पहले मनुष्य मिट्टी के बर्तन प्रयोग करता था। फिर वहां से भिन्न भिन्न धातुओं और स्टील तथा प्लास्टिक के बर्तनों तक पहुँच गया है। पर इनके प्रयोग से कैंसर होने का खतरा हो गया है इसलिए मनुष्य दोबारा मिट्टी के बर्तनों तक आ रहा है।
🚩2.) पहले इंसान अंगूठाछाप था क्योंकि उसे पढ़ना लिखना नहीं आता था। बाद में जब पढ़ना लिखना आया तो हस्ताक्षर (Signature) करने का प्रचलन चला। आज विज्ञान जहां चरमसीमा पर पहुँच चुका है तो इंसान फिर से Thumb Scanning की तकनीक के कारण अंगूठाछाप बन गया है।
🚩3.) पहले मनुष्य फटे होने पर भी सादे कपड़े पहनता था। फिर साफ सुथरे और प्रेस किए कपड़े पहनने लगा। फिर फैशन के नाम पर अपनी पैंटें फाड़ने लगा। सूती वस्त्रों से टैरीलीन, टैरीकॉट पर पहुँचा इंसान फिर से वापस सूती वस्त्रों पर आ रहा है।
🚩4.) मनुष्य पहले पढ़ता ही नहीं था। जब ज्ञान हुआ तो गुरुकुलों में नैतिक और आध्यात्मिक ज्ञान ही लिया। अब विज्ञान चरमसीमा पर है। लोग MBBS, Engineering, MBA की पढ़ाई कर रहे हैं पर नैतिक और आध्यात्मिक ज्ञान और शांति नहीं है। आत्महत्या जैसा घोर पाप बढ़ कर रहे हैं, अपराध बढ़ गया है। समय वो आ गया है कि नैतिक और आध्यात्मिक ज्ञान, भौतिक ज्ञान से जरूरी हो गया है।
🚩5.) खेती में पहले मनुष्य प्राकृतिक खाद प्रयोग करता था। बाद में यूरिया, कीटनाशक दवाओं का प्रयोग करने लगा। इनके दुष्प्रभावों के कारण मनुष्य अब वापिस आर्गेनिक खेती की तरफ बढ़ रहा है।
🚩6.) पहले मनुष्य कुदरती फल, खाद्य पदार्थ ही खाता था। उस क़ुदरती भोजन से मनुष्य प्रोसेस्ड फ़ूड (Canned Food & packed juices) की तरफ बढ़ा। इससे तरह तरह की बीमारियां होने लगीं। अब इन बीमारियों से बचने के लिए मनुष्य दोबारा क़ुदरती भोजन की तरफ आ रहा है।
🚩7.) पहले मनुष्य सादी वस्तुएं प्रयोग करता था। फिर पुरानी और सादा चीज़ें इस्तेमाल ना करके ब्रांडेड (Branded) चीजें प्रयोग करने लगा। नई चीजों से जी भर गया तो पुरानी चीजें ही Antique Piece कहकर रखने लगा।
🚩8.) पहले मनुष्य आयुर्वेदिक पद्धति से ईलाज करता था। फिर एलोपैथी का प्रचलन हुआ, एंटीबायोटिक का जमाना आया। एलोपैथी और एंटीबायोटिक के दुष्प्रभावों के कारण मनुष्य वापिस आयुर्वेद की तरफ बढ़ रहा है।
🚩9.) पहले बच्चे मिट्टी खाते थे। जैसे जैसे सभ्यता का विकास हुआ, मनुष्य बच्चों को इंफेक्शन के डर से मिट्टी में खेलने से रोकने लगा। बच्चों को घर में बंद करके फिसड्डी बना दिया। उसी मनुष्य ने अब Immunity बढ़ाने के नाम पर बच्चों को फिर से मिट्टी में खेलाना शुरू कर दिया है।
🚩10.) पहले मनुष्य जंगल में रहा, गाँवों में रहा। फिर विकास की दौड़ में शहर की तरफ भागा। वहां पर्यावरण को प्रदूषित किया और अब वापिस साफ हवा और स्वास्थ्य लाभ के लिए जंगल, गांव और हिल-स्टेशनों की तरफ जा रहा है।
🚩11.) जंगल, गांव और गौशालाओं में रहने वाला मनुष्य चकाचौंध से प्रभावित होकर शहर भागा, डिस्को पब भागा। अब मनुष्य दोबारा मन की शांति के लिए शहर से जंगल, गाँव व गौशालाओं की ओर आ रहा है।
🚩12) भारतीय (हिंदू) संस्कृति महान थी; उसके अनुसार जीवन जीने से व्यक्ति स्वस्थ, सुखी एवं सम्मानित जीवन जीता था लेकिन टीवी, फिल्मों और मीडिया के दुष्प्रभाव के कारण पाश्चात्य संस्कृति में चला गया लेकिन वहाँ दुःख, चिंता, बीमारियां बढ़ने लगीं तो भारतीय संस्कृति की तरफ लौटना शुरू कर दिया।
🚩इससे ये निष्कर्ष निकलता है कि तकनीक ने हमें जो दिया, उससे बेहतर तो भगवान ने हमें पहले ही दे रखा था। वास्तव में विज्ञान की बजाय ईश्वर की संरचना ही हमारे लिए सर्वश्रेष्ठ है। इससे सिद्ध होता है कि हमारे लिए ईश्वर से बड़ा कोई हितैषी नहीं है।
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हिन्दू युवा तेजी से नास्तिक व धर्मविमुख क्यों हो रहे हैं?
14 मार्च 2022
azaadbharat.org
🚩हमारे देश के हिन्दू युवा बड़ी तेजी से नास्तिक क्यों बनते जा रहे हैं ? इसका मुख्य कारण क्या है ? उनकी हिन्दू धर्म की प्रगति में क्यों कोई विशेष रूचि नहीं दिखती ?
🚩यह बहुत महत्वपूर्ण प्रश्न है । भारत के महानगरों से लेकर छोटे गांवों तक यह समस्या दिख रही है। इस प्रश्न के उत्तर में हिन्दू समाज का हित छिपा है। अगर इसका समाधान किया जाये तो भारत भूमि को संसार का आध्यात्मिक गुरु बनने से दोबारा कोई नहीं रोक सकता।
🚩वैसे तो हिन्दू युवाओं के नास्तिक बनने व धर्मविमुख बनने के अनेक कारण है पर मुख्य पांच कारण है जो आपको बता रहे हैं-
🚩1. हिन्दू धर्म गुरुओं के प्रति आस्था का अभाव और उनकी उपेक्षा
हिन्दू समाज के युवा पाश्चात्य संस्कृति के आकर्षण के कारण अपने ही हिन्दू धर्म गुरुओं के प्रति आस्था नहीं रख पाते हैं और उनकी उपेक्षा कर देते हैं इसके कारण युवाओं में ईसाई धर्मान्तरण, लव जिहाद, नशा, भोगवाद, चरित्रहीनता, नास्तिकता, अपने धर्मग्रंथों के प्रति अरुचि आदि समस्याएं दिख रही हैं। इन समस्याओं के निवारण पर कई हिंदू धर्मगुरु ध्यान भी देते हैं। पर युवा उनकी तरफ ध्यान नही देते हैं । कुछ धर्मगुरुओं की तो हिंदू धर्म के बचाव के लिए कोई योजना बनी हुई नहीं होती जो दिशा निर्देश कर सके लेकिन कोई धर्मगुरु दिशा निर्देश करते है तो उनको षड़यंत्र तहत जेल भेजा जाता है जैसे कि शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती, हिंदू संत आसाराम बापू, स्वामी असीमानंद आदि…।
🚩2. दूसरा कारण मीडिया में हिन्दू धर्मगुरुओं को नकारात्मक रूप से प्रदर्शित करना है-
मीडिया की भूमिका भी इस समस्या को बढ़ाने में बहुत हद तक जिम्मेदार है। संत आशाराम बापू, शंकराचार्यजी को जेल भेजना, नित्यानंदजी की अश्लील सीडी, निर्मल बाबा और राधे माँ जैसे धर्मगुरुओं को मीडिया प्राइम टाइम, ब्रेकिंग न्यूज़, पैनल डिबेट आदि में घंटों, बार-बार, अनेक दिनों तक दिखाता है। जबकि मुस्लिम मौलवियों और ईसाई पादरियों के मदरसे में यौन शोषण, बलात्कार, मुस्लिम कब्रों पर अन्धविश्वास, चर्च में समलैंगिकता एवं ननों का शोषण, प्रार्थना से चंगाई आदि अन्धविश्वास आदि पर कभी कोई चर्चा नहीं दिखाता। इसके ठीक विपरीत मीडिया वाले ईसाई पादरियों को शांत, समझदार, शिक्षित, बुद्धिजीवी के रूप में प्रदर्शित करते हैं। मुस्लिम मौलवियों को शांति का दूत और मानवता का पैगाम देने वाले के रूप में मीडिया में दिखाया जाता है। मीडिया के इस दोहरे मापदंड के कारण हिन्दू युवाओं में हिन्दू धर्म और धर्मगुरुओं के प्रति एक अरुचि की भावना बढ़ने लगती हैं।
🚩ईसाई और मुस्लिम धर्म के प्रति उनके मन में श्रद्धाभाव पनपने लगता हैं। इसका दूरगामी परिणाम अत्यंत चिंताजनक है। हिन्दू युवा आज गौरक्षा, संस्कृत, वेद, धर्मान्तरण जैसे विषयों पर सकल हिन्दू समाज के साथ खड़े नहीं दीखते। क्योंकि उनकी सोच विकृत हो चुकी है। वे केवल नाममात्र के हिन्दू बचे हैं। हिन्दू समाज जब भी विधर्मियों के विरोध में कोई कदम उठाता है तो हिन्दू परिवारों के युवा हिंदुओं का साथ देने के स्थान पर विधर्मियों के साथ अधिक खड़े दिखाई देते हैं। हम उन्हें साम्यवादी, नास्तिक, भोगवादी, cool dude कहकर अपना पिंड छुड़ा लेते है। मगर यह बहुत विकराल समस्या है जो तेजी से बढ़ रही है। इस समस्या को खाद देने का कार्य निश्चित रूप से मीडिया ने किया है।
🚩3. हिन्दू विरोधी ताकतों द्वारा प्रचंड प्रचार है-
भारत विश्व का एकमात्र ऐसा देश होगा जहाँ पर इस देश के बहुसंख्यक हिंदुओं से अधिक अधिकार अल्पसंख्यक के नाम पर मुसलमानों और ईसाईयों को मिले हुए हैं। इसका मुख्य कारण जातिवाद, प्रांतवाद, भाषावाद आदि के नाम पर आपस में लड़ना है। इस आपसी मतभेद का फायदा अन्य लोग उठाते है। एक मुश्त वोट डाल कर पहले सत्ता को अपना पक्षधर बनाया गया। फिर अपने हित में सरकारी नियम बनाये गए। इस सुनियोजित सोच का परिणाम यह निकला कि सरकारी तंत्र से लेकर अन्य क्षेत्रों में विधर्मियों को मनाने , उनकी उचित-अनुचित मांगों को मानने की एक प्रकार से होड़ ही लग गई। परिणाम की हिंदुओं के देश में हिंदुओंके अराध्य, परंपरा, मान्यताओं पर तो कोई भी टिका-टिप्पणी आसानी से कर सकता है। जबकि अन्य विधर्मियों पर कोई टिप्पणी कर दे तो उसे सजा देने के लिए सभी संगठित हो जाते है। इस संगठित शक्ति, विदेशी पैसे के बल पर हिंदुओं के प्रति नकारात्मक माहौल देश में बनाया जा रहा है। ईसाई धर्मान्तरण सही और शुद्धि/घर वापसी को गलत बताया जा रहा है। मांसाहार को सही और गौरक्षा को गलत बताया जा रहा है। बाइबिल/क़ुरान को सही और वेद-गीता को पुरानी सोच बताया जा रहा है। विदेशी आक्रांता गौरी-गजनी को महान और आर्यों को विदेशी बताया जा रहा है। इस षड़यंत्र का मुख्य उद्देश्य हिन्दू युवाओं को भ्रमित करना और नास्तिक बनाना है। इससे हिन्दू युवाओं अपने
14 मार्च 2022
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🚩हमारे देश के हिन्दू युवा बड़ी तेजी से नास्तिक क्यों बनते जा रहे हैं ? इसका मुख्य कारण क्या है ? उनकी हिन्दू धर्म की प्रगति में क्यों कोई विशेष रूचि नहीं दिखती ?
🚩यह बहुत महत्वपूर्ण प्रश्न है । भारत के महानगरों से लेकर छोटे गांवों तक यह समस्या दिख रही है। इस प्रश्न के उत्तर में हिन्दू समाज का हित छिपा है। अगर इसका समाधान किया जाये तो भारत भूमि को संसार का आध्यात्मिक गुरु बनने से दोबारा कोई नहीं रोक सकता।
🚩वैसे तो हिन्दू युवाओं के नास्तिक बनने व धर्मविमुख बनने के अनेक कारण है पर मुख्य पांच कारण है जो आपको बता रहे हैं-
🚩1. हिन्दू धर्म गुरुओं के प्रति आस्था का अभाव और उनकी उपेक्षा
हिन्दू समाज के युवा पाश्चात्य संस्कृति के आकर्षण के कारण अपने ही हिन्दू धर्म गुरुओं के प्रति आस्था नहीं रख पाते हैं और उनकी उपेक्षा कर देते हैं इसके कारण युवाओं में ईसाई धर्मान्तरण, लव जिहाद, नशा, भोगवाद, चरित्रहीनता, नास्तिकता, अपने धर्मग्रंथों के प्रति अरुचि आदि समस्याएं दिख रही हैं। इन समस्याओं के निवारण पर कई हिंदू धर्मगुरु ध्यान भी देते हैं। पर युवा उनकी तरफ ध्यान नही देते हैं । कुछ धर्मगुरुओं की तो हिंदू धर्म के बचाव के लिए कोई योजना बनी हुई नहीं होती जो दिशा निर्देश कर सके लेकिन कोई धर्मगुरु दिशा निर्देश करते है तो उनको षड़यंत्र तहत जेल भेजा जाता है जैसे कि शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती, हिंदू संत आसाराम बापू, स्वामी असीमानंद आदि…।
🚩2. दूसरा कारण मीडिया में हिन्दू धर्मगुरुओं को नकारात्मक रूप से प्रदर्शित करना है-
मीडिया की भूमिका भी इस समस्या को बढ़ाने में बहुत हद तक जिम्मेदार है। संत आशाराम बापू, शंकराचार्यजी को जेल भेजना, नित्यानंदजी की अश्लील सीडी, निर्मल बाबा और राधे माँ जैसे धर्मगुरुओं को मीडिया प्राइम टाइम, ब्रेकिंग न्यूज़, पैनल डिबेट आदि में घंटों, बार-बार, अनेक दिनों तक दिखाता है। जबकि मुस्लिम मौलवियों और ईसाई पादरियों के मदरसे में यौन शोषण, बलात्कार, मुस्लिम कब्रों पर अन्धविश्वास, चर्च में समलैंगिकता एवं ननों का शोषण, प्रार्थना से चंगाई आदि अन्धविश्वास आदि पर कभी कोई चर्चा नहीं दिखाता। इसके ठीक विपरीत मीडिया वाले ईसाई पादरियों को शांत, समझदार, शिक्षित, बुद्धिजीवी के रूप में प्रदर्शित करते हैं। मुस्लिम मौलवियों को शांति का दूत और मानवता का पैगाम देने वाले के रूप में मीडिया में दिखाया जाता है। मीडिया के इस दोहरे मापदंड के कारण हिन्दू युवाओं में हिन्दू धर्म और धर्मगुरुओं के प्रति एक अरुचि की भावना बढ़ने लगती हैं।
🚩ईसाई और मुस्लिम धर्म के प्रति उनके मन में श्रद्धाभाव पनपने लगता हैं। इसका दूरगामी परिणाम अत्यंत चिंताजनक है। हिन्दू युवा आज गौरक्षा, संस्कृत, वेद, धर्मान्तरण जैसे विषयों पर सकल हिन्दू समाज के साथ खड़े नहीं दीखते। क्योंकि उनकी सोच विकृत हो चुकी है। वे केवल नाममात्र के हिन्दू बचे हैं। हिन्दू समाज जब भी विधर्मियों के विरोध में कोई कदम उठाता है तो हिन्दू परिवारों के युवा हिंदुओं का साथ देने के स्थान पर विधर्मियों के साथ अधिक खड़े दिखाई देते हैं। हम उन्हें साम्यवादी, नास्तिक, भोगवादी, cool dude कहकर अपना पिंड छुड़ा लेते है। मगर यह बहुत विकराल समस्या है जो तेजी से बढ़ रही है। इस समस्या को खाद देने का कार्य निश्चित रूप से मीडिया ने किया है।
🚩3. हिन्दू विरोधी ताकतों द्वारा प्रचंड प्रचार है-
भारत विश्व का एकमात्र ऐसा देश होगा जहाँ पर इस देश के बहुसंख्यक हिंदुओं से अधिक अधिकार अल्पसंख्यक के नाम पर मुसलमानों और ईसाईयों को मिले हुए हैं। इसका मुख्य कारण जातिवाद, प्रांतवाद, भाषावाद आदि के नाम पर आपस में लड़ना है। इस आपसी मतभेद का फायदा अन्य लोग उठाते है। एक मुश्त वोट डाल कर पहले सत्ता को अपना पक्षधर बनाया गया। फिर अपने हित में सरकारी नियम बनाये गए। इस सुनियोजित सोच का परिणाम यह निकला कि सरकारी तंत्र से लेकर अन्य क्षेत्रों में विधर्मियों को मनाने , उनकी उचित-अनुचित मांगों को मानने की एक प्रकार से होड़ ही लग गई। परिणाम की हिंदुओं के देश में हिंदुओंके अराध्य, परंपरा, मान्यताओं पर तो कोई भी टिका-टिप्पणी आसानी से कर सकता है। जबकि अन्य विधर्मियों पर कोई टिप्पणी कर दे तो उसे सजा देने के लिए सभी संगठित हो जाते है। इस संगठित शक्ति, विदेशी पैसे के बल पर हिंदुओं के प्रति नकारात्मक माहौल देश में बनाया जा रहा है। ईसाई धर्मान्तरण सही और शुद्धि/घर वापसी को गलत बताया जा रहा है। मांसाहार को सही और गौरक्षा को गलत बताया जा रहा है। बाइबिल/क़ुरान को सही और वेद-गीता को पुरानी सोच बताया जा रहा है। विदेशी आक्रांता गौरी-गजनी को महान और आर्यों को विदेशी बताया जा रहा है। इस षड़यंत्र का मुख्य उद्देश्य हिन्दू युवाओं को भ्रमित करना और नास्तिक बनाना है। इससे हिन्दू युवाओं अपने