ओजस्वी भारत
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राष्ट्र एवं भारतीय संस्कृति पर हो रहे आघातों पर भारतीयों की आवाज बुलंद करने का अचूक माध्यम !!
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प्राण दे दिए धर्म के लिए पर धर्म परिवर्तन नही किया, आइए जानते हैं बलिदान कि इस महान गाथा को....

18 मई 2022
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🚩मुगल काल में बलिदान के कई ऐसे किस्से हैं जिन्हें उंगलियों पर गिनाया जा सकता है औरंगजेब के समय में हिंदुओं पर ऐसा कहर ढाया गया कि धरती कांप उठी और आसमान थराने लगा था जिहाद के नाम पर हिंदुओं को बड़े पैमाने पर धर्म परिवर्तन करने के लिए मजबूर किया जा रहा था औरंगजेब कि सेना को सरे राह जो भी हिंदु या सिक्ख मिलता उसे हिंदुत्व छोडऩे के लिए बाध्य किया जाता, इनकार करने पर उसे यातनाएं दी जाती और फिर उसका सिर कलम कर दिया जाता धर्म परिवर्तन के लिए हिंदुओं को बकरों की तरह काटा जाता था।

🚩औरंगजेब ने इस उद्देश्य के लिए कश्मीर को चुना क्योंकि उन दिनों कश्मीर हिन्दू सभ्यता एवं संस्कृति का गढ़ था वहाँ के पण्डित हिन्दू धर्म के विद्धानों के रूप में विख्यात थे औरंगजेब ने सोचा कि यदि वे लोग इस्लाम में आ जाएंगे तो बाकी अनपढ़ व मूढ़, सीधे सरल जनता को इस्लाम में लाना सहज हो जायेगा और ऐसे विद्वान समय आने पर इस्लाम के प्रचार में सहायक बनेंगे और जनसाधारण को दीन के दायरे में लाने का प्रयत्न करेंगे अतः उसने इफ़तखार ख़ान को शेर अफगान का खिताब देकर कश्मीर भेज दिया और उसके स्थान पर लाहौर का राज्यपाल, गवर्नर फिदायर खान को नियुक्त किया। लेकिन गुरु तेगबहादुर के पास जब कश्मीर से हिन्दू औरंगजेब के अत्याचारों से मुक्ति दिलाने कि प्रार्थना करने आये तो वे उससे मिलने दिल्ली चल दिये।

🚩दिल्ली जाते समय मार्ग में आगरा में ही उनके साथ भाई मतिदास, भाई सतिदास तथा भाई दयाला को बन्दी बना लिया गया। इनमें से पहले दो सगे भाई थे। हिन्दू का स्वाभिमान नष्ट होता जा रहा था। उनकी अन्याय एवं अत्याचार के विरुद्ध प्रतिकार करने कि शक्ति लुप्त होती जा रही थी आगरे से हिन्दुओं पर अत्याचार कि खबर फैलते फैलते लाहौर तक पहुंच गयी हिन्दू स्वाभिमान के प्रतीक भाई मतिराम कि आत्मा यह अत्याचार सुन कर तड़प उठी उन्हें विश्वास था कि उनके प्रतिकार करने से उनके बलिदान देने से निर्बल और असंगठित हिन्दू जाति में नवचेतना का संचार होगा।

🚩भाई मतिराम तत्काल लाहौर से दिल्ली के लिए निकले लेकिन आगरे में इस्लामी मतांध तलवार के सामने सर झुकाए हुए मृत्यु के भय से अपने पूर्वजों के धर्म को छोडऩे को तैयार हिंदुओं को देखा और उन्होंने कायर हिन्दुओ को ललकार कर कहा- कायर कहीं के मौत के डर से अपने प्यारे धर्म को छोडऩे में क्या तुमको लज्जा नहीं आती ! भाई मतिराम कि बात सुनकर मतांध मुसलमान हंस पड़े और उससे कहाँ कि कौन है तू, जो मौत से नहीं डरता? भाई मतिराम ने कहाँ कि अगर तुझमें वाकई दम है तो मुझे मुसलमान बना कर दिखाओ।

🚩भाई मतिराम जी को बंदी बना लिया गया उन्हें अभियोग के लिए आगरे से दिल्ली भेज दिया गया।

🚩तब हाकिम ने बोला तो तुम्हे अपनी जान से हाथ धोना पड़ेगा तब मतिराम ने कहा कि मुझे धर्म छोडऩे कि अपेक्षा अपना शरीर छोडऩा स्वीकार है। हाकिम ने फिर कहा कि मतिराम फिर से सोच लो। मतिराम ने फिर कहा कि मेरे पास सोचने का वक्त नहीं हैं हाकिम, तुम केवल और केवल मेरे शरीर को मार सकते हो मेरी आत्मा को नहीं क्योंकि आत्मा अजर, अमर है। न उसे कोई जला सकता हैं न कोई मार सकता है मतिराम को इस्लाम कि अवमानना के आरोप में आरे से चीर कर मार डालने का हाकिम ने दंड दे दिया। चांदनी चौक के समीप खुले मैदान में लोहे के सीखचों के घेरे में मतिराम को लाया गया।

🚩भाई मतिराम को दो जल्लाद उनके दोनों हाथों में रस्से बांधकर उन्हें दोनों ओर से खींचकर खड़े हो गए, दोनों ने उनकी ठोड़ी और पीठ थामी और उनके सर पर आरा रखा। लकड़ी के दो बड़े तख्तों में जकड़कर उनके सिर पर आरा चलाया जाने लगा। जब आरा दो तीन इंच तक सिर में धंस गया तो काजी ने उनसे कहा – मतिदास, अब भी इस्लाम स्वीकार कर ले। शाही जर्राह तेरे घाव ठीक कर देगा। तुझे दरबार में ऊँचा पद दिया जाएगा और तेरी पाँच शादियाँ कर दी जायेंगी।

🚩भाई मतिदास ने व्यंग्यपूर्वक पूछा – काजी, यदि मैं इस्लाम मान लूँ तो क्या मेरी कभी मृत्यु नहीं होगी ? काजी ने कहा कि यह कैसे सम्भव है। जो धरती पर आया है उसे मरना तो है ही। भाई जी ने हँसकर कहा – यदि तुम्हारा इस्लाम मजहब मुझे मौत से नहीं बचा सकता तो फिर मैं अपने पवित्र हिन्दू धर्म में रहकर ही मृत्यु का वरण क्यों न करूँ ?
उन्होंने जल्लाद से कहा कि अपना आरा तेज चलाओ जिससे मैं शीघ्र अपने प्रभु के धाम पहुँच सकूँ। यह कहकर वे ठहाका मार कर हँसने लगे।

🚩काजी ने कहा कि वह मृत्यु के भय से पागल हो गया है। भाई जी ने कहा – मैं डरा नहीं हूँ। मुझे प्रसन्नता है कि मैं धर्म पर स्थिर हूँ। जो धर्म पर अडिग रहता है उसके मुख पर लाली रहती है; पर जो धर्म से विमुख हो जाता है, उसका मुँह काला हो जाता है। कुछ ही देर में उनके शरीर के दो टुकड़े हो गये। भाई मतिदास गुरू हर गोबिंद सिंह के
शिष्य थे उनका जन्म पंजाब के जिला झेलम में ब्राह्मण परिवार में हुआ था अन्याय के खिलाफ उन्होंने गुरू हरगोविंद के साथ मिलकर कई लड़ाइयां लड़ी थीं उन्होंने निर्भीक होकर अपने प्राण दे दिए थे लेकिन इस्लाम को कबूल नहीं किया था।

🚩औरंगजेब चाहता था कि गुरुजी भी मुसलमान बन जायें। उन्हें डराने के लिए इन तीनों को तड़पा-तड़पा कर मारा गया पर गुरुजी विचलित नहीं हुए।

🚩औरंगजेब ने सबसे पहले 9 नवम्बर, 1675 को भाई मतिदास को आरे से दो भागों में चीरने को कहा।

🚩अगले दिन 10 नवम्बर को उनके छोटे भाई सतिदास को रुई में लपेटकर जला दिया गया। भाई दयाला को पानी में उबालकर मारा गया। 11 नवम्बर को चाँदनी चौक में गुरु तेगबहादुर का भी शीश काट दिया गया।

🚩ग्राम करयाला, जिला झेलम (वर्तमान पाकिस्तान) निवासी भाई मतिदास एवं सतिदास के पूर्वजों का सिख इतिहास में विशेष स्थान है। उनके परदादा भाई परागा जी छठे गुरु हरगोविन्द के सेनापति थे। उन्होंने मुगलों के विरुद्ध युद्ध में ही अपने प्राण त्यागे थे। उनके समर्पण को देखकर गुरुओं ने उनके परिवार को ‘भाई’ की उपाधि दी थी। भाई मतिदास के एकमात्र पुत्र मुकुन्द राय का भी चमकौर के युद्ध में बलिदान हुआ था।

🚩भाई मतिदास के भतीजे साहबचन्द और धर्मचन्द गुरु गोविन्दसिंह के दीवान थे। साहबचन्द ने व्यास नदी पर हुए युद्ध में तथा उनके पुत्र गुरुबख्श सिंह ने अहमदशाह अब्दाली के अमृतसर में हरिमन्दिर पर हुए हमले के समय उसकी रक्षार्थ प्राण दिये थे। इसी वंश के क्रान्तिकारी भाई बालमुकुन्द ने 8 मई, 1915 को केवल 26 वर्ष की आयु में फाँसी पायी थी। उनकी साध्वी पत्नी रामरखी ने पति की फाँसी के समय घर पर ही देह त्याग दी।

🚩लाहौर में भगतसिंह आदि सैकड़ों क्रान्तिकारियों को प्रेरणा देने वाले भाई परमानन्द भी इसी वंश के तेजस्वी नक्षत्र थे।

🚩हिन्दू धर्म छोडऩे के लिए जब बकरों कि तरह काट दिए जाते थे इन्सान।
आखिर वामपंथी इतिहासकारो कि क्या मज़बूरी थी कि उन्होंने इन बातो का जिक्र इतिहास कि किताबो में नही किया ?
और ऐसे नीच मुगलों को महान बताया।

🚩किसी ने ठीक ही कहा है –
सूरा सो पहचानिये, जो लड़े दीन के हेत
पुरजा-पुरजा कट मरे, तऊँ न छाड़त खेत ।।
कहते हैं की प्रतिदिन सवा मन हिंदुओं के जनेऊ कि होली फूंक कर ही औरंगजेब भोजन करता था….!!

🚩आज हिंदुस्तान में मुगल काल के गुणगान हो रहे हैं इनके नाम कि सङके व इमारते हैं धिक्कार है उनको जो ऐसे क्रुर, हत्यारे मुगलों का गुणगान करते है।

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लव जिहादियों से सावधान!

19 मई 2022
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🚩 जो हिन्दू लड़की अपने जीवन को नरक जीवन बनाने से बचाना चाहती है,वो मुसलमानों, जिहादियों से बचकर रहें।

🚩आये दिन भारत में कई हिन्दू लड़कियों को लवजिहाद का शिकार होना पड़ रहा है,लवजिहाद पर पाबंदी लगना चाहिए, जो मुसलमान हिन्दू लड़कियों को फंसाकर, उनको मुस्लिम बना रहें हैं, ऐसे मुसलमानों को फाँसी की सजा होनी ही चाहिए।

🚩फर्जी पहचान से हिन्दू लड़की को फसाया,जबरन निकाह के बाद बोला , मेरे भाइयो के साथ हलाला करो।

🚩उत्तर प्रदेश के अंबेडकरनगर जिले से लव जिहाद का एक सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। यहाँ शाबाम नाम के युवक ने श्यामू बनकर पहले हिंदू युवती को अपने प्रेम जाल में फँसाया और फिर मंदिर में उसके साथ शादी कर ली।

🚩शादी के एक सप्ताह बाद ही उसने युवती पर निकाह कर मुस्लिम बनने और नमाज पढ़ने का दबाव डाला। युवती के ऐसा न करने पर युवक ने उसे तीन तलाक दे दिया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अब शाबाम अपनी बीवी को भाइयों के साथ हलाला करने के लिए मजबूर कर रहा है।

🚩वहीं, पीड़िता का परिवार इंसाफ पाने के लिए दर-दर भटक रहा है। पीड़िता ने आरोप लगाते हुए कहा है कि पुलिस से शिकायत करने के बाद भी अब तक शाबाम पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। पुलिस अधीक्षक को भी इसके बारे में बताया गया, लेकिन उनकी ओर से भी कोई मदद नहीं मिली।

🚩 बताया जा रहा है कि मालीपुर थाने के सैरपुर उमरन गाँव की युवती की सम्मनपुर के हरदिलपुर में रिश्तेदारी है। आजमगढ़ के पवई थाने के मिल्कीपुर का रहने वाले शाबाम ने श्यामू बनकर युवती के ममेरे भाई सुनील के साथ उसके घर पर आने-जाने लगा। धीरे-धीरे उसने युवती को अपने प्रेम जाल में फँसा लिया और उसके पूरे परिवार को शादी के लिए मना लिया।

🚩पीड़िता के अनुसार, लॉकडाउन के कारण उनकी शादी टल गई थी, ऐसे में उन्हें 10 जुलाई, 2020 को जलालपुर कस्बे के मठिया मंदिर में जाकर विवाह करना पड़ा।

🚩शादी के एक सप्ताह बाद ही शाबाम युवती पर निकाह करने, धर्मांतरण और नमाज पढ़ने का दबाव बनाने लगा। परिजनों के साथ आसपास की मुस्लिम महिलाएँ भी उसे नमाज और कलमा पढ़ने के लिए दबाव डालने लगीं।

🚩विरोध करने पर उसके साथ मारपीट भी की गई। इन सबसे बाद भी जब युवती नहीं मानी, तो शाबाम ने उसे तीन तलाक दे दिया, मगर घर से बाहर नहीं जाने दिया। उसने युवती का मोबाइल भी छीन लिया गया। इस बीच शाबाम ने दोबारा निकाह करने की बात कहकर उसे अपने भाई मेंहदी हसन और शरीफ के साथ हलाला करने पर विवश किया।

🚩किसी प्रकार युवती उस शख्स के घर से भागने में सफल रही और अपने पिता के पास पहुँची। उसने उन्हें अपनी आप बीती सुनाई।

🚩 इसके बाद पीड़ित परिवार मालीपुर थाने में शाबाम के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई, मगर उनका आरोप है कि पुलिस ने कार्रवाई करने के बजाय उन्हें ही डांटकर भगा दिया।

🚩वहीं, विश्व हिंदू परिषद (VHP) को जब इस मामले का पता चला तो, उन्होंने पूरे प्रकरण को सीएम योगी तक पहुँचाने की चेतावनी दी। जिसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की है।

🚩इन मुसलमानों को हिन्दू लड़की से शादी करने और फिर उस हिन्दू लड़की को मुस्लिम बनाने के लिए पैसे मिलते है।

🚩हिन्दू लड़किया जिहादियों से बचकर रहें, अन्यथा ये मुसलमान हिन्दू लड़कियो को नरक जीवन देते है।

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ज्ञानवापी में मिला 12 फिट 8 इंच का विशाल शिवलिंग

20 मई 2022
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🚩विश्वेश्वर शिवलिंग वजूखाने से मिला है। वजूखाना वो होता है जहां नमाजी हाथ-पैर धोते हैं, कुल्ला करते हैं। यह अपमान ऐसा है जिसे हिंदू समाज सृष्टि के अंत तक नहीं भूल पाएगा।

🚩सर्वे के दौरान ज्ञानवापी में मिला बहुत विशाल शिवलिंग और स्वास्तिक, त्रिशूल,डमरू,कमल जैसे चिन्ह मिले तो हर हर महादेव के नारे से गूंज उठी ज्ञानवापी।

🚩 सर्वे में खंडित हिन्दू देवी-देवताओं के चिन्ह और शेषनाग की आकृति मिली और भी हिन्दू धर्म के चिन्ह मिले, और हिन्दू पक्ष ने ज्ञानवापी केस की 70 पेज की सर्वे रिपोर्ट पेश की।

🚩जब सर्वे में सब क्लियर हो गया है कि ज्ञानवापी में शिवलिंग के साथ हिन्दू देवी देवताओं के चिन्ह भी मिले है तो ज्ञानवापी में मिले शिवलिंग की पूजा करने के लिए हिन्दुओ को शिघ्र ही ज्ञानवापी सोपा जाय।

🚩हिन्दू पक्ष की ओर से याचिका दायर की गई है कि उन्हें शिवलिंग की पूजा की अनुमति मिले और नमाज का स्थान बदला जाय । जहाँ वजू की जाती है,वह स्थान हिन्दुओ को दिया जाय और नंदी के सामने की दीवार हटाई जाय।

🚩यानी वो महान शिवलिंग जिसके बारे में 350 साल से तमाम तरह के प्रयास और दावे किए जाते रहे हैं वो आखिरकार ज्ञानवापी के अंदर ही मिला है।

🚩हिंदू पक्षकार शिवम जैन ने बताया है कि मस्जिद के वजूखाने में शिवलिंग नजर आया है । इस शिवलिंग की प्रोटक्शन लेने के लिए शिवम जैन और विष्णु जैन फौरन सिविल जज कोर्ट रवाना हो गए ।

🚩 जो शिवलिंग मिला है उसका व्यास ही 12 फिट 8 इंच का है.. जो अत्यंत विशाल शिवलिंग होने के दावे की पुष्टि करता है । हिंदू पक्ष के वकील विष्णु जैन ने भी दावा किया कि बहुत विशाल शिवलिंग नंदी के ठीक सीध में मिला है।

🚩हिंदू पक्षकार सोहन लाल आर्य ने कहा कि जब शिवलिंग नजर आया तो हिंदू पक्ष के लोग हर हर महादेव के नारे लगाते हुए झूमकर नाचने लगे ।

🚩डॉ मोतीचंद्र ने अपनी किताब काशी का इतिहास में इस बात पर कई ऐतिहासिक थ्योरी लिखी थी । जिनमें तीन बातें कही गई थीं... पहली... शिवलिंग औरंगजेब की क्रूर सेना द्वारा तोड़ने की कोशिश की गई.. दूसरी शिवलिंग को बचाकर कहीं छुपा दिया गया और तीसरी शिवलिंग को कुएं में डाल दिया गया ।

🚩आज 350 साल बाद ये बात सही साबित हुई है कि हिंदुओं ने औरंगजेब की क्रूर सेना से बचाने के लिए शिवलिंग को कुएं में डाल दिया था । लेकिन ये शिवलिंग वजूखाने में कैसे पहुंचा ? ये शोध का विषय में पता चला कि शिवलिंग को अपमानित करने के लिए मुसलमानों ने ऐसा किया ।

🚩ज्ञानवापी का सर्वे चीख चीख कर हमारे ऊपर थोपे गए सेक्युलर नाम के षड्यंत्र की बखिया उधेड़ रहा है। जो सर्वे में पाया गया है वह दशकों पहले से ही वहां आने जाने वाले हर व्यक्ति को पता है परंतु देश के कानूनी व संवैधानिक नियम ही एक विशेष विचारधारा के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए फ्रेम किए गए हैं।

🚩यह देश पर थोपे गए सेकुलरिज्म नाम की नपुंसकता का ही परिणाम है कि एक तालाब के अंदर 12 फिट 8 इंच का पुरातन शिवलिंग विद्यमान है परंतु उस जगह को हाथ पैर धोने कुल्ला करने और थूकने के लिए जिहादी लगातार इस्तेमाल करते आ रहे हैं, आप उन्हें मंदिरों में इफ्तार पार्टी दे रहे हैं भाईचारा निभाने के लिए सब कुछ कर रहे हैं परंतु वह जानबूझकर इतने बड़े शिवलिंग वाले तालाब में थूक रहे हैं....

🚩12 फीट 8 इंच के व्यास वाले शिवलिंग के फैलाव का अंदाजा आप लगा सकते हो । एक सामान्य कमरे की लंबाई भी 10 फ़ीट होती है मतलब यह शिवलिंग कितना मोटा होगा और कितनी जगह में फैला हुआ होगा परंतु जानबूझकर मुस्लिमों के द्वारा उसी तालाब को वजू के लिए इस्तेमाल किया गया। कितने शर्म की बात है कि हमारी महान समृद्ध सनातन संस्कृति को जिहादी इस प्रकार तार-तार कर रहे हैं और हम लोग चुपचाप अपने घरों में बैठे हैं।

🚩यह बात भी ध्यान रखे कि सनातन विरोधियों ने बड़ी चालाकी से शिवलिंग के अर्थ को भी गलत रूप में प्रचारित किया है.. शिवलिंग का वास्तविक अर्थ है एक प्राकृतिक शक्ति से सम्पन्न शक्तिपुंज जो हमारे प्रबुद्ध ऋषिमुनि आम जनता की चेतना के विकास के लिए मंदिरों में स्थापित किया करते थे।

🚩जिस प्रकार मुस्लिम कभी भी नेताओ, कानून, संविधान और पुलिस के भरोसे न रहकर खुद की संगठन शक्ति के बल पर अपनी हर प्रकार की मांगे मनवा लेते हैं अब हिंदुओं को भी अपनी हिन्दू संस्कृति सभ्यता और भारत देश बचाने के लिए यह सब करना होगा।

🚩यानी नंदी की अंतहीन प्रतीक्षा पूरी हुई और हम हिंदुओं की भी सैकड़ों सालों की प्रतीक्षा पूरी हुई । हम भारत सरकार से अपील करते हैं कि तुरंत इस महान शिवलिंग को अपनी कस्टडी में लिया जाए ताकी इसे अब कोई नुकसान ना पहुंचा सके ।

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ज्ञानवापी मंदिर की तरह ही भारत के और भी कई हिन्दू मंदिरों पर खड़ी है मस्जिदें

21 मई 2022
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🚩भारत के 1800 से भी अधिक हिन्दू मंदिरों को तोड़कर बनाई गई हैं मस्जिदें-मजारे

🚩हम लेकर आए हैं देशभर की सूची.....जहाँ मन्दिरों को तोड़कर मस्जिदों को बनाया गया।

🚩आज के इस मैसेज को सभी भाई-बहन अधिक से अधिक शेयर करें।

🚩5 फरवरी, 1989 को अरुण शौरी (Arun Shourie) का एक लेख प्रकाशित हुआ था। उसमें उन्होंने एक प्रसिद्ध और प्रभावशाली व्यक्ति मौलाना हकीम सैयद अब्दुल हाई (Maulana Hakim Sayid Abdul Hai) का जिक्र किया था।

🚩 शौरी ने बताया था कि उन्होंने कई किताबें लिखी हैं, जिनमें से एक किताब ‘हिंदुस्तान की मस्जिदें’ है, जिसमें 17 पन्नों का अध्याय था।

🚩उस अध्याय के बारे में बात करते हुए शौरी ने कहा था, उसमें मस्जिदों का संक्षिप्त विवरण लिखा गया था, जिसमें हकीम सैयद अब्दुल हाई ने बताया था कि कैसे मस्जिदों के निर्माण के लिए हिंदू मंदिरों को नष्ट कर दिया गया था।

🚩हर विवादित मस्जिद के नीचे मंदिर… वो 1800 से अधिक मस्जिदें है , जहाँ हिन्दू मंदिरों को तोड़कर कर बनाई गई है:मस्जिदें-मजार।

🚩हम लेकर आए हैं भारत के हर राज्य की सूची।

🚩हिंदुस्तान की मस्जिदें किताब में मध्य प्रदेश के 151 मंदिरों का उल्लेख किया गया है,जिसे तोड़कर मस्जिदें बनाई गयी , तमिलनाडु के 175 मंदिरों का उल्लेख है जिसे तोड़कर मस्जिदें बनाई गई, महाराष्ट्र के 143 मंदिरों का उल्लेख है,जिसे तोड़कर मस्जिदें बनाई गई और कर्नाटक के 192 मंदिरों को तोड़कर मस्जिदें बनाई गई ।

🚩आंध्र प्रदेश को लेकर सीता राम गोयल और अन्य लेखकों ने इस हिंदुस्तान की मस्जिदें किताब में उल्लेख किया है कि मंदिरों को तोड़ने के बाद वहां मस्जिदों, दरगाहों और मजारों को बनाया गया।

🚩आंध्र प्रदेश में 142 मंदिरों को तोड़कर मस्जिदें बनाई गयी ।

🚩जिनमें कदिरी में जामी मस्जिद, पेनुकोंडा में अनंतपुर शेर खान मस्जिद, बाबया दरगाह पेनुकोंडा, जो इवारा मंदिर को तोड़कर बनाया गया था। तदपत्री में ईदगाह, गुंडलाकुंटा में दतगिरी दरगाह, दतगिरी दरगाह को जनलापल्ले में जंगम मंदिर के ऊपर बनाया गया है।

🚩वहीं, हैदराबाद के अलियाबाद में मुमिन चुप की दरगाह है, जिसे 1322 में एक मंदिर को तोड़कर बनाया गया था।

🚩 इसी तरह, राजामुंदरी में जामी मस्जिद का निर्माण 1324 में वेणुगोपालस्वामी मंदिर को नष्ट करके किया गया था। आंध्र प्रदेश में मंदिरों का विनाश सदियों से जारी है। 1729 में बनाई गई गचिनाला मस्जिद (Gachinala Masjid,) को राज्य की सबसे नई मस्जिद के रूप में जाना जाता था जो कि एक हिन्दू मंदिर को तोड़कर बनाई गई है।

🚩हिंदुस्तान की मस्जिदें किताब में असम के दो मंदिरों का उल्लेख भी किया गया है, जिन्हें तोड़कर मस्जिद और मजार में परिवर्तित कर दिया गया था। इनके नाम हैं, पोआ मस्जिद (Poa Mosque) और सुल्तान गयासुद्दीन बलबन (Ghiyasuddin Balban) की मजार, ये दोनों कामरूप जिले के हाजो के मंदिरों को तोड़कर बनाये गए हैं।

🚩पश्चिम बंगाल में 102 जगहों पर मस्जिदें, किले और दरगाह हैं, जिन्हें मुस्लिम शासकों ने मंदिर को नष्ट करके बनाया था। उन्होंने मंदिरों को नष्ट करने के बाद इकट्ठा हुए मलबे का इस्तेमाल करके इसे बनाया था। इन संरचनाओं में लोकपुरा की गाजी इस्माइल मजार भी शामिल है, जो वेणुगोपाल मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी।

🚩 बीरभूम सियान (1221) Birbhum Siyan (1221) में मखदूम शाह दरगाह को बनाने के लिए भी हिन्दू मंदिर को तोड़कर किया गया था। सुता में सैय्यद शाह शाहिद महमूद बहमनी दरगाह को भी बौद्ध मंदिर को तोड़कर बनाया गया था। बनिया पुकुर में 1342 में बनाई गई अलाउद-दीन अलौल हक़ मस्जिद (Alaud-Din Alaul Haqq Masjid) को भी मंदिर को तोड़कर बनाया गया था ।

🚩बारहवीं शताब्दी ईस्वी के अंत में मुस्लिमों ने एक हिंदू राजधानी लक्ष्मण नवती को नष्ट करके गौर में एक मुस्लिम शहर बनाया था। छोटी सोना मस्जिद, तांतीपारा मस्जिद, लटन मस्जिद, मखदुम अखी सिराज चिश्ती दरगाह, चमकट्टी मस्जिद, चाँदीपुर दरवाजा और अन्य संरचनाओं सहित कई मुस्लिम संरचनाएँ शहर में हिन्दू मंदिर को तोड़कर बनाई गई थीं।

🚩बिहार में कुल 77 मंदिरों को तोड़कर मस्जिदें बनाई गयी। भागलपुर में, हजरत शाहबाज की दरगाह 1502 में एक मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी। इसी तरह चंपानगर में जैन मंदिरों को नष्ट कर कई मजारों का निर्माण कराया गया था। मुंगेर जिले के अमोलझोरी में मुस्लिम कब्रिस्तान एक विष्णु मंदिर को तोड़कर बनाया गया था। गया के नादरगंज में शाही मस्जिद को 1617 में एक हिन्दू मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी।
🚩बिहार के नालंदा जिले में भी मंदिरों को नष्ट किया गया था। 1380 में मखदुमुल मुल्क शरीफुद्दीन की दरगाह, बड़ा दरगाह, छोटा दरगाह और अन्य शामिल हैं। पटना में शाह जुम्मन मदारिया की दरगाह एक हिन्दू मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी। शाह मुर मंसूर की दरगाह, शाह अरज़ानी की दरगाह, पीर दमरिया की दरगाह भी बौद्ध स्थलों को तोड़कर गई था।

🚩 हिंदुस्तान की मस्जिदें किताब में दिल्ली का उल्लेख करते हुए बताया गया है कि यहाँ कुल 72 जगहों की पहचान की गई है, जहाँ पर मुस्लिम आक्रमणकारियों ने सात शहरों का निर्माण करने के लिए इंद्रप्रस्थ और ढिलिका को नष्ट कर दिया था। कई हिन्दू मंदिरो को तोड़कर मस्जिदों, मजारों ,स्मारकों को बनाया गया था, जिनमें कुतुब मीनार, कुव्वतुल इस्लाम मस्जिद (1198), शम्सूद-दीन इल्तुतमिश का मकबरा, जहाज़ महल, अलल दरवाजा, अलल मीनार, मदरसा और अलाउद-दीन खिलजी का मकबरा और माधी मस्जिद शामिल हैं।

🚩हिंदुस्तान की मस्जिदें किताब में गुजरात की 170 ऐसी जगहों के बारे में बताया गया है, जहाँ मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनाई गई हैं। असवल, पाटन और चंद्रावती के मंदिरों को तोड़कर अहमद शाह की जामी मस्जिद, हैबिट खान की मस्जिद बनाई गई।

🚩ढोलका जिले में बहलोल खान की मस्जिद और बरकत शहीद की मजार भी हिन्दू मंदिरों को तोड़कर बनाई गई थी।

🚩 इसी तरह, सरखेज में, Shaikh Ahmad Khattu Ganj Baksh की दरगाह को 1445 में मंदिरो को तोड़कर बनाया गया था । 1321 में, भरूच में हिंदू और जैन मंदिरों को तोड़ने के बाद जामी मस्जिद का निर्माण किया गया था।

🚩भावनगर में बोटाद में पीर हमीर खान की मजार को भी एक हिन्दू मंदिर को तोड़कर बनाया गया था । 1473 में द्वारका में एक मंदिर के स्थल पर मस्जिद का निर्माण किया गया था। भुज में, जामी मस्जिद और बाबा गुरु के गुंबद मंदिर के स्थान पर बनाए गए थे। जैन समुदाय के लोगों को रांदेर से निकाल दिया गया और मंदिरों को तोड़कर मस्जिद बना दी गई थीं। जैसे जामी मस्जिद, नित नौरी मस्जिद, मियां की मस्जिद, खारवा मस्जिद को भी मंदिर को तोड़कर बनाया गया था। इसके अलावा सोमनाथ पाटन में बाजार मस्जिद, चाँदनी मस्जिद और काजी की मस्जिद भी मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी।

🚩दीव में जो जामी मस्जिद है, उसका निर्माण 1404 में किया गया था। पुस्तक में इसका भी उल्लेख किया गया है। इसे भी एक हिन्दू मंदिर को तोड़कर बनाया गया था।

🚩इतिहासकारों द्वारा हरियाणा में कुल 77 मंदिरों को तोड़कर मस्जिदें बनाई गई है। पिंजौर, अंबाला में मंदिर की सामग्री का उपयोग फिदई खान के बगीचे के निर्माण में किया गया था। फ़िदाई खान गार्डन, जिसे बाद में एक सिख सम्राट ने बदलकर यादवेंद्र गार्डन कर दिया था। इसे पिंजौर गार्डन के नाम से भी जाना जाता है,ये भी मंदिर को तोड़कर करके बनाया गया था। फरीदाबाद में, जामी मस्जिद 1605 में एक मंदिर के स्थान पर बनाई गई है। नूंह में भी मंदिर को तोड़कर करके 1392 में एक मस्जिद का निर्माण किया गया था।

🚩बावल की मस्जिदें और गुरुग्राम जिले के फर्रुखनगर में जामी मस्जिद भी मंदिर को तोड़कर बनाई गई हैं। कैथल में बल्ख के शेख सलाह-दीन अबुल मुहम्मद (Salahud-Din Abul Muhammad) की दरगाह 1246 में मंदिर को तोड़कर करके बनाई गई थी। कुरुक्षेत्र में टीले पर मदरसा और झज्जर में काली मस्जिद भी मंदिरो को तोड़कर बनाई गई थी।

🚩 हिसार की मस्जिदों को फिरोज शाह तुगलक ने मंदिरो को तोड़कर बनाई, अग्रोहा में मंदिरो को तोड़कर मस्जिद बनाई गई।

🚩 अग्रोहा शहर का निर्माण भगवान राम के पुत्र कुश के वंशज महाराजा अग्रसेन ने करवाया था। महाराजा अग्रसेन का जन्म भगवान राम के बाद 35वीं पीढ़ी में हुआ था। 1192 में मुहम्मद गौरी ने इस शहर के मंदिरों को तोड़कर मस्जिद बनाई थी।

🚩हिंदुस्तान की मस्जिदें किताब में हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में एक जगह के बारे में बताया गया है, यहाँ मंदिर को तोड़कर जहाँगीरी गेट बनाया गया था।

🚩कर्नाटक में कुल 192 हिन्दू मंदिरों को तोड़कर मस्जिदें बनाई गई हैं। बेंगलुरु के डोड्डा बल्लापुर में अजोधन की मुहिउद-दीन चिश्ती की दरगाह को मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी। कुदाची में मखदूम शाह की दरगाह और शेख मुहम्मद सिराजुद-दीन पिरदादी की मजार भी हिन्दू मंदिर तोड़कर बनाई गई थी।

🚩हम्पी के विजयनगर में मस्जिद और ईदगाह भी हिन्दू मंदिर को तोड़कर बनाए गए थे। काफी पुराने हिंदू शहर बीदर में भी मंदिरों को तोड़कर मस्जिदें बनाई गई ।

🚩 बीदर में सोला खंबा मस्जिद, जामी मस्जिद, मुख्तार खान की मस्जिद भी मंदिर को तोड़कर बनाई गई थीं ।

🚩भारत मे कई शहरो के कई मंदिरों को तोड़कर मस्जिदें बनाई गई है ।
🚩 जामी मस्जिद, महला शाहपुर में मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनाई गई हैं। बीजापुर एक प्राचीन हिंदू शहर हुआ करता था, लेकिन इसे भी मुसलमानों ने हिन्दुओ को मारकर कई मस्जिदें बनाई, जामी मस्जिद, करीमुद-दीन की मस्जिद, छोटा मस्जिद, आदि मंदिर को तोड़कर मस्जिदें बनाई थी। मैसूर में सैय्यद सालार मसूद की मजार भी मंदिर को तोड़कर बनाई है।

🚩केरल की दो जगहों का उल्लेख किया गया है। पहला कोल्लम में जामी मस्जिद और दूसरा पालघाट में टीपू सुल्तान द्वारा बनाए गए किले को जिसे हिन्दू मंदिरों को तोड़कर बनाया गया था।

🚩लक्षद्वीप में दो जगहों के बारे में बताया गया है। कल्पेनी में मुहिउद-दीन-पल्ली मस्जिद (Muhiud-Din-Palli Masjid) और कवरती में प्रोट-पल्ली मस्जिद भी मंदिर को तोड़कर बनाई गई है। यह सर्वविदित है कि लक्षद्वीप में अब 90% के आसपास मुस्लिम हैं।

🚩हिंदुस्तान की मस्जिदें किताब में मध्य प्रदेश के 151 मंदिरों का उल्लेख है,जहाँ मंदिरों को तोड़कर मस्जिदें बनाई गई । भोपाल में कुदसिया बेगम (Qudsia Begum) द्वारा जामी मस्जिद का निर्माण किया गया था,जो हिन्दू मंदिर को तोड़कर बनाया था। दमोह में गाजी मियां की दरगाह को भी मंदिर को तोड़कर बनाया गया था।

🚩 धार राजा भोज परमार की राजधानी हुआ करती थी। यहाँ भी मुस्लिम लोगों ने कई मंदिरों को तोड़कर मस्जिदें बनाई थी। कमल मौला मस्जिद, लाट की मस्जिद, अदबुल्लाह शाह चंगल की मजार आदि का निर्माण मंदिर को तोड़कर किया गया।

🚩मांडू एक प्राचीन हिंदू शहर था,यहाँ भी जामी मस्जिद, दिलावर खान की मस्जिद, छोटी जामी मस्जिद आदि का निर्माण मंदिर को तोड़कर किया गया है। चंदेरी को भी मंदिर को तोड़कर बनाया गया था।

🚩मोती मस्जिद, जामी मस्जिद और अन्य संरचनाओं में भी मंदिर की सामग्री का इस्तेमाल किया गया था। ग्वालियर में, मुहम्मद गौस की दरगाह, जामी मस्जिद और गणेश द्वार के पास वाली मस्जिद को मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी।

🚩किताब में उल्लेख है कि महाराष्ट्र के 143 मंदिरों को तोड़कर मस्जिदों को बनाया गया था। अहमदनगर में अम्बा जोगी किले में मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनाई गयी थी। गॉग (Gogh) में ईदगाह, जिसे 1395 में बनाया गया था, यह भी एक मंदिर को तोड़कर बनाया गया है। अकोट (Akot) की जामी मस्जिद 1667 में एक मंदिर के स्थल पर बनाई गई थी। करंज में अस्तान मस्जिद 1659 में एक हिन्दू मंदिर को तोड़कर बनाई थी। रीतपुर में औरंगजेब की जामी मस्जिद भी मंदिर को तोड़कर बनाई थी। हजरत बुरहानुद्दीन-दीन गरीब चिश्ती की दरगाह खुल्दाबाद को भी एक मंदिर को तोड़कर 1339 में बनाई गई थी।

🚩मैना हज्जम की मजार मुंबई में महालक्ष्मी मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी। मुंबई में जामी मस्जिद भी एक मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी। परंदा में तलाब के पास नमाजगाह का निर्माण मनकेवरा मंदिर को ध्वस्त करके किया गया था।

🚩 लातूर में, मीनापुरी माता मंदिर को तोड़कर मबसू साहिब की दरगाह बना दी गई। सोमवारा मंदिर को तोड़कर सैय्यद कादिरी की दरगाह बनाई गई। वहीं, रामचंद्र मंदिर को तोड़कर पौनार की कादिमी मस्जिद (Qadimi Masjid) बना दी गई।

🚩ओडिशा में 12 ऐसी जगह हैं, जहाँ मंदिरों को तोड़कर उसके स्थान पर मस्जिद, दरगाह और मजार बनाई गई है।

🚩बालेश्वर में महल्ला सुन्नत में जामी मस्जिद श्री चंडी मंदिर को तोड़कर बनाया गया। शाही मस्जिद और कटक में उड़िया बाजार की मस्जिदों के साथ-साथ केंद्रपाड़ा में एक मस्जिद को मंदिर को तोड़कर बनाया गया था।

🚩किताब में उल्लेख है कि पंजाब के 14 मंदिरों को तोड़कर मस्जिदों को बनाया गया। इसमें बाबा हाजी रतन की मजार बठिंडा में एक मंदिर को तोड़कर बनाई गई है। जालंधर के सुल्तानपुर की बादशाही सराय बौद्ध विहार को तोड़कर बनाया।

🚩लुधियाना में अली सरमस्त की मस्जिद भी एक मंदिर को तोड़कर बनाई गई। बहादुरगढ़ में किले अंदर एक मस्जिद बनाई गई है। उसका निर्माण भी मंदिर को तोड़कर किया गया है।


🚩हिंदुस्तान की मस्जिदें पुस्तक में लिखा कि राजस्थान के 170 मंदिरों को तोड़कर मस्जिदों को बनाया गया।

🚩 अजमेर में कई हिंदू मंदिरों को तोड़कर मस्जिदें बनाई गई। अढ़ाई-दिन-का-झोंपरा 1199 में बनाया गया था, मुइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह 1236 में बनाई गई थी, और अन्य मस्जिदों का निर्माण भी हिन्दू मंदिरों को तोड़कर किया गया। तिजारा में भरतारी मजार (Bhartari mazar) एक मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी। बयाना में नोहारा मस्जिद का निर्माण उषा मंदिर को तोड़कर किया गया था।

🚩 भितरी-बहारी (Bhitari-Bahari Mahalla) की मस्जिद को भी विष्णु भगवान के मंदिर को तोड़कर किया गया था।

🚩काम्यकेश्वर मंदिर को कामां में चौरासी खंबा को तोड़कर मस्जिद बना दी गई थी। पार्वंथा मंदिर (Parvantha) को तोड़कर जालोर में तोपखाना मस्जिद बनाई गई,जिसे 1323 में बनाया गया था। शेर शाह सूरी के किले शेरगढ़ को हिंदू, बौद्ध और जैन मंदिरों को तोड़कर किया गया था।
🚩 लोहारपुरा में पीर जहीरुद्दीन की दरगाह मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी। 1625 में, सलावतन में मस्जिद भी एक मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी। पीर जहीरुद्दीन की मजार और नागौर में बाबा बद्र की दरगाह को भी हिन्दू मंदिर को तोड़कर बनाया गया था।

🚩किताब में तमिलनाडु के 175 मंदिरों को तोड़कर मस्जिदों को बनाया गया ऐसा उल्लेख आया। Chingleput के आचरवा में शाह अहमद की मजार भी एक मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी। कोवलम में मलिक बिन दिनार की दरगाह भी एक मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी।

🚩पंचा पद्यमलाई की पहाड़ी का नाम बदलकर मौला पहाड़ कर दिया गया था। एक प्राचीन गुफा, मंदिर के सेट्रल हॉल को तोड़कर मस्जिद बना दिया गया था।

🚩 कोयंबटूर में, टीपू सुल्तान ने अन्नामलाई किले को हिन्दू मंदिरों तोड़कर बनाया था।

🚩 टीपू सुल्तान की मस्जिद भी एक हिन्दू मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी।

🚩तिरुचिरापल्ली (Tiruchirapalli) में नाथर शाह वाली की दरगाह एक शिव मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी। मंदिर के लिंगम का उपयोग लैंप के रूप में किया गया था।

🚩किताब में उल्लेख आया कि उत्तर प्रदेश के 299 मंदिरों को तोड़कर मस्जिदों को बनाया गया था। जो मंदिर सामग्री और मंदिर के स्थानों पर बनाए गए थे।

🚩 आगरा की कलां मस्जिद का निर्माण हिन्दू मंदिर को तोड़कर किया गया था। अकबर के किले में नदी के किनारे का हिस्सा जैन मंदिर को तोड़कर बनाया गया था।

🚩अकबर का मकबरा भी एक हिन्दू मंदिर को तोड़कर बनाया गया। प्रयागराज (इलाहाबाद) में अकबर का किला भी एक हिन्दू मंदिर को तोड़कर बनाया गया था।

🚩मियां मकबुल और हुसैन खान शाहिद की मजार भी मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी। पत्थर महल में मस्जिद का निर्माण लक्ष्मी नारायण मंदिर को तोड़कर करके किया गया था।

🚩अयोध्या में राम जन्मभूमि के स्थल पर भी बाबरी मस्जिद का निर्माण किया गया था। हालाँकि उस विवादित ढाँचे को ध्वस्त कर दिया गया है और उस स्थान अब भव्य राम मंदिर का निर्माण किया जा रहा है।

🚩 इसके अलावा स्वर्गद्वार मंदिर और त्रेता का ठाकुर मंदिर को तोड़ दिया गया था और उन जगहों पर औरंगजेब द्वारा मस्जिदों का निर्माण किया गया था।

🚩शाह जुरान गौरी (Shah Juran Ghuri) की मजार भी एक मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी।

🚩सर पैगंबर और अयूब पैगंबर की मजार एक बौद्ध मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी, जहाँ बुद्ध के पदचिन्ह थे।

🚩 गोरखपुर में इमामबाड़ा एक मंदिर को तोड़कर बनाया गया था। इसी तरह, पावा में कर्बला को एक बौद्ध स्तूप को तोड़कर बनाया गया था।

🚩टिलेवाली मस्जिद को लखनऊ के एक हिन्दू मंदिर को तोड़कर बनाया गया है। मेरठ में जामा मस्जिद एक बौद्ध विहार को तोड़कर बनाई गई।

🚩 मेरठ की एक दरगाह को नौचंड़ी देवी के मंदिर को तोड़कर बनाई गई है।

🚩काशी( वाराणसी ) में औरंगजेब ने ज्ञानवापी विवादित ढाँचे को विश्वेश्वर मंदिर को तोड़कर बनाया था ।

🚩 हाल ही में अदालत ने विवादित ढाँचे के सर्वेक्षण का आदेश दिया था। सर्वेक्षण करने वाली टीम को वहां एक विशाल शिवलिंग भी मिला है। इसके बाद अदालत ने उस जगह को सील कर दिया है।
यह केवल एक संक्षिप्त सारांश है’

🚩गोयल ने अपनी किताब में लिखा है कि उनके द्वारा बताई गई सूची अभी अधूरी है, यह सिर्फ एक संक्षिप्त विवरण था। अभी सूची में और कई मस्जिदें व दरगाह हैं,जिनको हिन्दू मंदिरों को तोड़कर बनाया गया हैं।

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नवजात शिशु का ऐसे करें स्वागत

22 मई 2022
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🚩भारत के आयुर्वेद शास्त्रों में बताई गई शिशु प्रसव की सम्पूर्ण विधि जिसे लोग लगभग भूल चुके थे और सिजेरियन की और भाग रहे थे उसी विधि कि जानकारी पिछले 57 वर्षों से संत आशारामजी बापू अपने सत्संग प्रवचनों के माध्यम से लोगों को बताते आये है।

🚩संत श्री आशारामजी बापू की प्रेरणा से महिला उत्थान मंडल द्वारा देश भर दिव्य शिशु संस्कार अभियान चलाए जाते है।

🚩आज फ्रांस के वैज्ञानिक ने उसी विधि से प्रसव कराया और स्वाभाविक जन्म देने की इस प्रक्रिया से बच्चे की जिंदगी दिव्य प्रभावशाली हुई।

🚩फ्रांस के मनोवैज्ञानिक द्वारा बच्चे के जन्म के लिए स्वभाविक प्रक्रिया

🚩फ्रांस का एक मनोवैज्ञानिक मां के पेट से जब बच्चा पैदा होता है तो उसको कुनकुने गरम पानी के टब में रखता है--आपको यह जान कर आश्चर्य होगा कि बच्चा इतना प्रफुल्लित होता है कि जिसका कोई हिसाब नहीं।

🚩उसने ऐसे बच्चे का जन्म करवाया हैं, कि जो पैदा होने पर रोता नहीं हंसता हैं। हजारों बच्चे पैदा करवाए हैं उसने। वह दाई का काम करता है। उसने भारतीयों की पद्धति को अपनाया ।

🚩पहला काम कि बच्चे को पैदा होते से ही वह यह करता है कि उसे मां के पेट पर लिटा देता है, उसकी नाल नहीं काटता। साधारणतः पहला काम हम करते हैं कि बच्चे की नाल काटते हैं। वह पहले नाल नहीं काटता, वह पहने बच्चे को मां के पेट पर सुला देता है। क्योंकि वह पेट से ही अभी आया है, इतने जल्दी अभी मत तोड़ो। बाहर से भी मां के पेट पर लिटा देता है और बच्चा रोता नहीं। मां के पेट से उसका ऐसा अंतरंग संबंध है; अभी भीतर से था, अब बाहर से हुआ, मगर अभी मां से जुड़ा है। और नाल एकदम से नहीं काटता। जब तक बच्चा सांस लेना शुरू नहीं कर देता, तब तक वह नाल नहीं काटता।

🚩हमारी अब तक की आदत और व्यवस्था यह रही है कि तत्क्षण नाल काटो, फिर बच्चे को सांस लेनी पड़ती है। सांस उसे इतनी घबराहट में लेनी पड़ती है, क्योंकि नाल से जब तक जुड़ा है, तब तक मां की सांस से जुड़ा है, उसे अलग से सांस लेने की जरूरत भी नहीं है और उसके पूरे नासापुट और नासापुट से फेफड़ों तक जुड़ी हुई नालियां सब कफ से भरी होती हैं, क्योंकि उसने सांस तो ली नहीं कभी! तो एकदम से उसकी नाल काट देना, उसे डरा देना है। कुछ क्षण के लिए उसको इतनी बेचैनी में छोड़ देना है। उस बेचैनी में बच्चे रोते हैं, चिल्लाते हैं, चीखते हैं और हम सोचते हैं वे इसलिए चीख रहे हैं, चिल्ला रहे हैं कि यह सांस लेने की प्रक्रिया है, नहीं तो वे सांस कैसे लेंगे? और अगर नहीं चिल्लाता बच्चा, तो डाक्टर उसको उलटा लटकाता है कि किसी तरह चिल्ला दे। फिर भी नहीं चिल्लाता, तो उसे धौल जमाता है कि चिल्ला दे! चिल्लाना चाहिए ही बच्चे को। चिल्लाए-रोए, तो उसका कफ बह जाए, उसके नासापुट साफ हो जाएं, सांस आ जाए।

🚩मगर यह जबर्दस्ती सांस लिवाना है। यह झूठ शुरू हो गया, शुरू से ही शुरू हो गया! यह प्रारंभ से ही गलती शुरू हो गई। पाखंड शुरू हुआ। सांस तक भी तुमने स्वाभाविक रूप से न लेने दी! सांस तक तुमने कृत्रिम करवा दी, जबर्दस्ती करवा दी। घबड़ा दिया बच्चे को।

🚩यह खूब स्वागत किया! यह खूब सौगात दी! यह खूब सम्मान किया। उलटा लटकाया, धौल जमाई, रोना सिखाया; अब जिंदगी भर धौलें पड़ेंगी, उलटा लटकेगा, शीर्षासन करेगा। यह उलट-खोपड़ी हो ही गया! और जिंदगी भर रोएगा--कभी इस बहाने, कभी उस बहाने। इसकी जिंदगी में मुस्कुराहट मुश्किल हो जाएगी। झूठी होगी, थोपेगा। मगर भीतर आंसू भरे होंगे।

🚩इस मनोवैज्ञानिक ने भारतीय संस्कृति की प्रक्रिया खोजी। वह मां के पेट पर बच्चे को लिटा देता है। बच्चा धीरे-धीरे सांस लेना शुरू करता है। जब बच्चा धीरे-धीरे सांस लेने लगता है और मां के पेट की गर्मी उसे अहसास होती रहती है और मां को भी अच्छा लगता है, क्योंकि पेट एकदम खाली हो गया, बच्चा ऊपर लेट जाता है तो पेट फिर भरा मालूम होता है। वह एकदम रिक्त नहीं हो जाती।

🚩फिर सब चीजें आहिस्ता। क्या जल्दी पड़ी है? नहीं तो जिंदगी भर फिर जल्दबाजी रहेगी, भाग-दौड़ रहेगी। जब बच्चा सांस लेने लगता है, तब वह नाल काटता है। फिर बच्चे को टब में लिटा देता है ताकि उसे अभी भी गर्भ का जो रस था वह भूल न जाए; गर्भ की जो भाषा थी वह भूल न जाए। टब में वह ठीक उतने ही रासायनिक द्रव्य मिलाता है, जितने मां के पेट में होते हैं। वे ठीक उतने ही होते हैं, जितने सागर में होते हैं। सागर का पानी और मां के पेट का पानी बिलकुल एक जैसा होता है।

🚩तो उसे लिटा देता है मनोवैज्ञानिक अभी टब में और चकित हुआ यह जान कर कि अभी-अभी पैदा हुआ बच्चा टब में लेट कर बड़ा प्रफुल्लित होता है, मुस्कुराता है। एकदम से रोशनी नहीं करता कमरे में। यह सारी प्रक्रिया जन्म की बड़ी धीमी रोशनी में होती है, मोमबत्ती की रोशनी में--कि बच्चे की आंखों को चोट न पहुंचे।
🚩हमारे अस्पतालों में बड़े तेज बल्ब लगे होते हैं, टयूब लाईट लगे होते हैं। जरा सोचो तो, नौ महीने जो मां के पेट में अंधकार में रहा है, उसे एकदम टयूब लाइट...! चश्मे लगवा दोगे। आधी दुनिया चश्मे लगाई हुई है। छोटे-छोटे बच्चों को चश्मे लगाने पड़ रहे हैं। यह डाक्टरों की कृपा है! अंधे करवा दोगे न मालूम कितनों को! आंखों के तंतु अभी बच्चे के बहुत कोमल हैं। पहली बार आंख खोली है। जरा आहिस्ता से पहचान होने दो। क्रमशः पाठ सिखाओ।

🚩मोमबत्ती का दूर धीमा-सा प्रकाश। फिर आहिस्ता-आहिस्ता प्रकाश को बढ़ाता है। धीरे-धीरे, ताकि बच्चे की आंखें राजी होती जाए।

🚩यह बच्चे को स्वाभाविक जन्म देने की प्रक्रिया है। इस बच्चे की जिंदगी कई अर्थों में और ढंग की होगी। यह कई बीमारियों से बच जाएगा। इसकी आंखें शायद सदा स्वस्थ रहेंगी और इसके जीवन में एक मुस्कुराहट होगी, जो स्वाभाविक होगी...

🚩 महिला उत्थान मंडल द्वारा देशभर दिव्य शिशु संस्कार अभियान चलाए जा रहे है,उचित जानकारी के लिए संत श्री आशारामजी महिला उत्थान आश्रम में संपर्क कर सकते है।

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विधर्मियों के टुकड़ों पर पलने वाले प्रकाश झा और बॉबी देओल जैसे देशद्रोहियों से सावधान ।

17 June 2022
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🚩प्रकाश झा की वेबसीरीज आश्रम मूवी का कई हिन्दू संगठनो ने विरोध प्रदर्शन किया है। हिन्दू संगठनों ने प्रकाश झा पर कड़ी कारवाही की मांग की है ।

🚩 हिन्दू संगठनों का कहना है कि आश्रम जैसी बेबी सीरीज मूवी के जरिये सुनियोजित तरीके से हिन्दू धर्म को बदनाम किया जा रहा है।

🚩पिछले कुछ समय से चारों तरफ से हिन्दू धर्म और भारतीय संस्कृति को नष्ट करने के लिए साजिशें चली आ रही हैं। विधर्मियों का उद्देश्य है कि येन केन प्रकारेण, कैसे भी करके सनातन हिंदू धर्म को खत्म कर दिया जाए,उसके लिए अनेक प्रकार के षड़यंत्र रचे जा रहे हैं।

🚩 हिंदू धर्म का अपमान, हिन्दू साधु संतों एवं हिंदू धर्म के प्रति नफरत फैलाने तथा हिंदू धर्म को नीचा दिखानें में अगर सबसे बड़ा रोल है तो वो बॉलीवुड का रहा है। ये लोग ऐसी फिल्में बनाते हैं जिससे हिन्दू देवी देवताओं, साधु-संतों, ब्राह्मणों, पर्व-त्योहारों और मंदिरों, साधु, सन्तों के मठों,आश्रमों आदि पर झूठ परसोकर फिल्में बनाकर उनको नकारात्मक रूप में पेशकर जनता को गुमराह करते हैं। और कुछ इस प्रकार की काल्पनिक कहानी बनाते हैं कि सारी बुराइयां सनातन हिंदू धर्म में ही हैं, जबकि इसके विपरीत चर्चों में पादरी क्या करते हैं, मस्जिदों में मौलाना क्या करते हैं इस पर न चर्चा करते हैं ना हीं दिखाते हैं ,क्योंकि इनको पता है कि ऐसा करने पर कमलेश तिवारी की तरह हत्या हो जायेगी और हिंदू समाज सहिष्णु है तो सोशल मीडिया पर थोड़ा हल्ला करके चुप हो जायेंगे।

🚩अभी कुछ हिंदुओं में जागरूकता आई है,लेकिन सभी को जागना होगा और बॉलीवुड के इस हिंदू विरोधी रवैये को उखाड़कर फेंकना होगा नहीं तो ये लोग दीमक की तरह भारतीय संस्कृति को खोखला कर देंगे।

🚩आपको बता दें कि एम एक्स प्लेयर पर निर्माता और निर्देशक प्रकाश झा द्वारा MX Original सीरीज "आश्रम" मूवी बनाई, इस वेब सीरीज में बॉबी देओल लीड रोल में है। इसमें ये बताने का प्रयास किया है कि हिंदू साधु-संत भक्तों की आस्थाओं का दुरुपयोग करके कैसे राजनीति में दखल करते हैं और अय्याशी करते हैं,जो कि सरासर झूठ है।

🚩वास्तविकता सत्य तो यह है कि कितने साधु-संतों ने घोर तपस्या की है फिर वे समाज में आकर उनको सही मार्ग दिखाते हैं, समाज को व्यसनमुक्त बनाने का प्रयास करते हैं, संयमी और सदाचारी समाज बनाते हैं, गरीबों-आदिवासियों और जरूरतमंदों की सहायता करते हैं।

🚩गौशालाओं द्वारा गौ माता की रक्षा करते हैं। बच्चों, युवाओं व महिलाओं के उत्थान के लिए केंद्र खोलते हैं। धर्मान्तरण पर रोक लगाते हैं। चिंता, तनाव, अवसाद Depression/ Tension में रह रहे लोगों को शांति देते हैं, स्वदेशी का प्रचार करते हैं, सभी को स्वस्थ, सुखी और सम्मानित जीवन जीने की कला सिखाते हैं। राष्ट्र व धर्म की रक्षा के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर देते हैं।

🚩बॉलीवुड वाले इस वास्तविक सत्य पर फ़िल्म कभी भी नहीं बनायेंगे, पर ये हिन्दू धर्म के विरोधी प्रकाश झा जैसे लोग हिंदू धर्म को बदनाम करने के लिए झूठी कहानियां बनाकर जनता में परोसेंगे, जिससे सोचने समझने की शक्ति नहीं रखने वाले इन झूठी कहानियों पर विश्वास कर लेते हैं और अपने ही धर्म व धर्मगुरुओं पर शंका करने लगते हैं।

🚩आश्रम सनातन हिन्दू धर्म का शिक्षा स्थल है, जहां से राष्ट्र, व्यक्ति और समाज का निर्माण होता है, पर प्रकाश झा की आश्रम वेबसीरीज में अश्लीलता परोसने के साथ आश्रम व संत के बारे में गलत बताया है आपराधिक कामों में लिप्त बताया है। आखिर केवल हिन्दू धर्म के साथ षड्यंत्र कर वेबसीरीज बनाई क्यों बनाई जाती है,क्योंकि उसके लिए विधर्मियों द्वारा बिकाऊ लोगों को भारी फंडिंग मिलती है।

🚩वैसे तो ये कोई नई बात नहीं है कि बॉलीवुड द्वारा हिंदू विरोधी पहली फ़िल्म बनाई गयी है। यह सिलसिला पिछले कई सालों से चल रहा है , हिन्दू समाज को सबसे ज्यादा अगर गुमराह किया तो वह बॉलीवुड ने किया है।

🚩 बॉलीवुड ने समाज को क्या दिया है ? शादी करती हुई लड़की को मंडप से उठा लेना, बलात्कार, चोरी, डकैती,अश्लीलता वाले कपड़े पहनना, मां-बाप को वृद्धाश्रम छोड़ देना, लव जिहाद को बढ़ावा देना, भारतीय संस्कृति को हीन बताना, हिन्दू साधु-संतों, देवी देवताओं, मदिरों और पंडितों का मजाक उड़ाना तथा पाश्चात्य संस्कृति को महान बताना- यही तो ये प्रकाश झा और बॉबी देओल जैसे लोग करते आये हैं।

🚩आश्रम वेब सीरीज फ़िल्म निर्माता प्रकाश झा ने बनाई है , लेकिन उसके पीछे बहुत बड़ा षड्यंत्र है। प्रकाश झा की इतनी हैसियत नहीं है कि वह करोड़ों रूपये की फ़िल्म बना ले, फिर करोड़ों रूपये खर्च करके उसका प्रोमोशन करें,क्योंकि विज्ञापन से कुछ लाख रुपये ही आयेंगे लेकिन उसको जिस तरह प्रमोट किया जा रहा है, उससे लग रहा है कि उसमें कई करोड़ रुपये
खर्च किये हैं।

🚩आश्रम बेब सीरीज मूवी बनाने के पीछे कहीं न कहीं हिन्दू राष्ट्र व भारतीय संस्कृति को तोड़ने वाली ताकतें लगी हुई हैं, क्योंकि “आश्रम” नाम पवित्र शब्द है, उसपर करोड़ों लोग श्रद्धा करते हैं, वहाँ पर जाकर शांति पाते हैं। इसके कारण धर्मांतरण कराने वाली मिशनरी और विदेशी प्रोडक्ट बेचने वाली कंपनियों को भारी नुकसान हो रहा है क्योंकि साधु-संतों के प्रति श्रद्धा रखने वाले आश्रम में जाते हैं और वहाँ उनको भारतीय संस्कृति के अनुसार जीने का सही तरीका मिलता है, फिर वे हिन्दू धर्म के प्रति आस्थावान हो जाते हैं, जिसके कारण वे ईसाई मिशनरियों के चंगुल में नहीं आते हैं औऱ वे विदेशी प्रोडक्ट भी नहीं खरीदते।

🚩 इस कारण ईसाई मिशनरियों का जो लक्ष्य है- भारत में धर्मांतरण करके अपना वोटबैंक बढ़ाकर सत्ता हासिल करना, उसमें बाधा उत्पन्न होती है और विदेशी कंपनियों के सामान नहीं बिकने पर उनको अरबों-खरबों रूपये का घाटा होता है। इसके कारण ये लोग अनेक प्रकार के षड्यंत्र रचकर हिंदुओं की आश्रम व साधु-संतों के प्रति आस्था को नष्ट करने के लिए साज़िशें रच रहे हैं और प्रकाश झा जैसे जयचंद गद्दारी करके अपने ही धर्म के खिलाफ फिल्में बनाते हैं।

🚩सर्वे किया जाय तो चर्चों में बलात्कार के हजारों किस्से आ चुके हैं, मदरसों में भी यौन शोषण के हजारों किस्से आ चुके हैं पर अभी तक उस पर फ़िल्म कोई न बनाता है और न ही कोई हिम्मत करता है , क्योंकि उसके लिए फंडिंग तो मिलेगी नहीं और ऊपर से कमलेश तिवारी की तरह हत्या हो जाएगी, इसलिए वास्तव में जहाँ पर गड़बड़ी हो रही है उस पर वे ध्यान नहीं देते हैं।

🚩हिन्दू सहिष्णु हैं और उनके खिलाफ षड्यंत्र रचने के लिए भारी फंडिंग मिलती है, इस कारण विधर्मियों के टुकड़ों पर पलने वाले प्रकाश झा जैसे जयचंद हिन्दू विरोधी फिल्में बनाते हैं।

🚩सभी सनातनी हिन्दू ऐसी फिल्मों का बहिष्कार करें और कानूनी कार्यवाही करें।

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