भारत रत्न डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम — जिन्हें मिसाइल मैन और जनता के राष्ट्रपति के रूप में जाना जाता है — भारतीय गणराज्य के ग्यारहवें राष्ट्रपति थे।
वे न केवल एक महान वैज्ञानिक और अभियंता थे, बल्कि ऐसे प्रेरणास्रोत नेता भी, जिन्होंने करोड़ों युवाओं को बड़ा सपना देखने की हिम्मत दी।
डॉ. कलाम का जीवन संदेश देता है कि परिस्थितियाँ कैसी भी हों, यदि आप अपने सपनों को पूरा करने का दृढ़ निश्चय कर लें, तो उन्हें साकार कर के ही रहते हैं।
उनकी सादगी, देशभक्ति और वैज्ञानिक दृष्टिकोण आज भी हर भारतीय के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।
उन्होंने कहा था — “सपना वो नहीं जो आप नींद में देखते हैं, सपना वो है जो आपको सोने नहीं देता।”
युवा पीढ़ी के दिलों में आज भी उनका नाम उम्मीद, मेहनत और समर्पण का प्रतीक बना हुआ है।
वे न केवल एक महान वैज्ञानिक और अभियंता थे, बल्कि ऐसे प्रेरणास्रोत नेता भी, जिन्होंने करोड़ों युवाओं को बड़ा सपना देखने की हिम्मत दी।
डॉ. कलाम का जीवन संदेश देता है कि परिस्थितियाँ कैसी भी हों, यदि आप अपने सपनों को पूरा करने का दृढ़ निश्चय कर लें, तो उन्हें साकार कर के ही रहते हैं।
उनकी सादगी, देशभक्ति और वैज्ञानिक दृष्टिकोण आज भी हर भारतीय के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।
उन्होंने कहा था — “सपना वो नहीं जो आप नींद में देखते हैं, सपना वो है जो आपको सोने नहीं देता।”
युवा पीढ़ी के दिलों में आज भी उनका नाम उम्मीद, मेहनत और समर्पण का प्रतीक बना हुआ है।
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भारत को खेलों में डोपिंग के विरुद्ध अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के लिए पार्टियों के सम्मेलन (COP10) ब्यूरो का पुनः उपाध्यक्ष चुना गया है।
यह निर्णय पेरिस में आयोजित #COP10 के 10वें सत्र के दौरान लिया गया।
यह निर्णय पेरिस में आयोजित #COP10 के 10वें सत्र के दौरान लिया गया।
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विधवा पुनर्विवाह कानून कब बना ?
विधवा पुनर्विवाह कानून 1856 में बना था। यह कानून, जिसे हिंदू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम, 1856 के नाम से जाना जाता है, 26 जुलाई 1856 को पारित किया गया था, जिसने विधवाओं के पुनर्विवाह को कानूनी मान्यता दी।
समाज सुधारक ईश्वर चंद्र विद्यासागर ने इसके पारित होने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
कानून का नाम: हिंदू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम, 1856 (अधिनियम XV, 1856)
पारित होने की तिथि: 26 जुलाई 1856।
मुख्य समर्थक: ईश्वर चंद्र विद्यासागर।
उद्देश्य: हिंदू विधवाओं के पुनर्विवाह को कानूनी मान्यता देना।
विधवा पुनर्विवाह कानून 1856 में बना था। यह कानून, जिसे हिंदू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम, 1856 के नाम से जाना जाता है, 26 जुलाई 1856 को पारित किया गया था, जिसने विधवाओं के पुनर्विवाह को कानूनी मान्यता दी।
समाज सुधारक ईश्वर चंद्र विद्यासागर ने इसके पारित होने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
कानून का नाम: हिंदू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम, 1856 (अधिनियम XV, 1856)
पारित होने की तिथि: 26 जुलाई 1856।
मुख्य समर्थक: ईश्वर चंद्र विद्यासागर।
उद्देश्य: हिंदू विधवाओं के पुनर्विवाह को कानूनी मान्यता देना।
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Indian Railways ने एसी कोचों में अब सफेद ब्लैंकेट्स की बजाए राजस्थान की पारंपरिक “सांगनेरी” प्रिंट के कवर लगाना शुरू किया है — जिससे न सिर्फ हाइजीन बेहतर होगी बल्कि भारतीय हस्त-शिल्प को भी एक प्लेटफॉर्म मिला है।
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तिमोर-लेस्ते दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्र संघ -आसियान का 11वां सदस्य बना
मलेशिया के कुआलालंपुर में आज 47वें आसियान शिखर सम्मेलन के दौरान तिमोर-लेस्ते दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्र संघ -आसियान का 11वां सदस्य बन गया।
तिमोर-लेस्ते की प्रधानमंत्री ज़ानाना गुस्माओ ने आसियान नेताओं के साथ इस समूह में देश के शामिल होने की पुष्टि करने वाले दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर किये। इसके बाद नेताओं ने एक सामूहिक तस्वीर खिंचवाई। 1999 के बाद से यह समूह का पहला विस्तार है।
आसियान की स्थापना 1967 में थाईलैंड के बैंकॉक में हुई थी, जब आसियान के संस्थापक सदस्यों-इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर और थाईलैंड ने आसियान घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए थे। ब्रुनेई दारुस्सलाम 1984 में आसियान में शामिल हुआ, उसके बाद 1995 में वियतनाम, 1997 में लाओस और म्यांमार, तथा 1999 में कंबोडिया इसमें शामिल हुए।
मलेशिया, आसियान के अध्यक्ष के रूप में, 26-28 अक्टूबर तक कुआलालंपुर में “समावेशीपन और स्थिरता” विषय पर 47वें आसियान शिखर सम्मेलन और संबंधित सम्मेलनों की मेजबानी कर रहा है।
मलेशिया के कुआलालंपुर में आज 47वें आसियान शिखर सम्मेलन के दौरान तिमोर-लेस्ते दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्र संघ -आसियान का 11वां सदस्य बन गया।
तिमोर-लेस्ते की प्रधानमंत्री ज़ानाना गुस्माओ ने आसियान नेताओं के साथ इस समूह में देश के शामिल होने की पुष्टि करने वाले दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर किये। इसके बाद नेताओं ने एक सामूहिक तस्वीर खिंचवाई। 1999 के बाद से यह समूह का पहला विस्तार है।
आसियान की स्थापना 1967 में थाईलैंड के बैंकॉक में हुई थी, जब आसियान के संस्थापक सदस्यों-इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर और थाईलैंड ने आसियान घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए थे। ब्रुनेई दारुस्सलाम 1984 में आसियान में शामिल हुआ, उसके बाद 1995 में वियतनाम, 1997 में लाओस और म्यांमार, तथा 1999 में कंबोडिया इसमें शामिल हुए।
मलेशिया, आसियान के अध्यक्ष के रूप में, 26-28 अक्टूबर तक कुआलालंपुर में “समावेशीपन और स्थिरता” विषय पर 47वें आसियान शिखर सम्मेलन और संबंधित सम्मेलनों की मेजबानी कर रहा है।
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