भारतीय संविधान की छठी अनुसूची असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिज़ोरम के जनजातीय क्षेत्रों को विशेष स्वायत्तता देती है। इसके तहत स्वायत्त जिला व क्षेत्रीय परिषदें बनाई गई हैं जिन्हें भूमि, वन, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि व स्थानीय न्याय पर नियम बनाने का अधिकार है।
इसका उद्देश्य आदिवासी समुदाय की संस्कृति, परंपरा व पहचान की रक्षा करना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।
👉 छठी अनुसूची = स्थानीय स्वशासन + सांस्कृतिक संरक्षण + विकास
इसका उद्देश्य आदिवासी समुदाय की संस्कृति, परंपरा व पहचान की रक्षा करना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।
👉 छठी अनुसूची = स्थानीय स्वशासन + सांस्कृतिक संरक्षण + विकास
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📕स्कूल व्याख्याता प्रथम पेपर के लिए भारतीय राजव्यवस्था एवं राजस्थान के भूगोल की पुस्तके 📚बाजार में विद्यार्थी हित मे उपलब्ध | RPSC द्वारा जारी नवीनतम सिलेबस के अनुसार एवं विगत पेपरो मे पूछे गए प्रश्नों के स्तर अनुरूप लेखन कार्य किया गया है ।एक बार अवलोकन अवश्य करे धन्यवाद 🙏🏻
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चिकित्सा के लिए #NobelPrize की घोषणा.
फिजियोलॉजी या मेडिसिन के लिए 2025 का नोबेल पुरस्कार मैरी ब्रंको, फ्रेड रैम्सडेल और शिमोन सकागुची को "इम्यून टॉलरेंस" से संबंधित खोजों के लिए प्रदान किया
फिजियोलॉजी या मेडिसिन के लिए 2025 का नोबेल पुरस्कार मैरी ब्रंको, फ्रेड रैम्सडेल और शिमोन सकागुची को "इम्यून टॉलरेंस" से संबंधित खोजों के लिए प्रदान किया
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2025 का भौतिकी का नोबेल पुरस्कार-
जॉन क्लार्क, मिशेल डेवोरेट और जॉन मार्टिनिस को मिला है भौतिकी का #NobelPrize
उन्हें यह पुरस्कार "इलेक्ट्रिक सर्किट में मैक्रोस्कोपिक क्वांटम मेकैनिकल टनलिंग और ऊर्जा क्वांटीकरण की खोज" के लिए दिया गया है.
क्वांटम टनलिंग एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें कण बाधाओं को पार कर सकते हैं, भले ही उनके पास पर्याप्त ऊर्जा न हो.
जॉन क्लार्क, मिशेल डेवोरेट और जॉन मार्टिनिस को मिला है भौतिकी का #NobelPrize
उन्हें यह पुरस्कार "इलेक्ट्रिक सर्किट में मैक्रोस्कोपिक क्वांटम मेकैनिकल टनलिंग और ऊर्जा क्वांटीकरण की खोज" के लिए दिया गया है.
क्वांटम टनलिंग एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें कण बाधाओं को पार कर सकते हैं, भले ही उनके पास पर्याप्त ऊर्जा न हो.
🎓💫 #NobelPrize का इतिहास
स्वीडिश वैज्ञानिक अल्फ्रेड नोबेल ने 1895 में अपनी वसीयत के ज़रिए इन पुरस्कारों की स्थापना की, ताकि मानवता के लिए असाधारण योगदान देने वालों को सम्मानित किया जा सके।
पहला नोबेल पुरस्कार 1901 में दिया गया।
🏅श्रेणियाँ —
भौतिकी | रसायन | शरीर विज्ञान या चिकित्सा | साहित्य | शांति | अर्थशास्त्र (1968 से)
📍 नोबेल पुरस्कारों का चयन स्वीडन और नॉर्वे की संस्थाओं द्वारा किया जाता है।
हर साल 10 दिसंबर (अल्फ्रेड नोबेल की पुण्यतिथि) को पुरस्कार प्रदान किए जाते हैं।
✨ अब तक Marie Curie, Linus Pauling, और Malala Yousafzai जैसे नाम इनकी शान बढ़ा चुके हैं।
स्वीडिश वैज्ञानिक अल्फ्रेड नोबेल ने 1895 में अपनी वसीयत के ज़रिए इन पुरस्कारों की स्थापना की, ताकि मानवता के लिए असाधारण योगदान देने वालों को सम्मानित किया जा सके।
पहला नोबेल पुरस्कार 1901 में दिया गया।
🏅श्रेणियाँ —
भौतिकी | रसायन | शरीर विज्ञान या चिकित्सा | साहित्य | शांति | अर्थशास्त्र (1968 से)
📍 नोबेल पुरस्कारों का चयन स्वीडन और नॉर्वे की संस्थाओं द्वारा किया जाता है।
हर साल 10 दिसंबर (अल्फ्रेड नोबेल की पुण्यतिथि) को पुरस्कार प्रदान किए जाते हैं।
✨ अब तक Marie Curie, Linus Pauling, और Malala Yousafzai जैसे नाम इनकी शान बढ़ा चुके हैं।
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2025 का #नोबेल शांति पुरस्कार मारिया कोरीना माचाडो को दिया गया।
उनका योगदान वेनेजुएला में लोकतांत्रिक अधिकारों और तानाशाही से लोकतंत्र की शांतिपूर्ण वापसी के लिए रहा।
उनका योगदान वेनेजुएला में लोकतांत्रिक अधिकारों और तानाशाही से लोकतंत्र की शांतिपूर्ण वापसी के लिए रहा।
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2025 का अर्थशास्त्र का #NobelPrize
जोएल मोक्यर, फिलिप एजिओन और पीटर हॉविट को मिला है।
👉 मोक्यर को तकनीकी प्रगति से आर्थिक विकास समझाने के लिए,
👉 जबकि एजिओन और हॉविट को “रचनात्मक विनाश (Creative Destruction)” के सिद्धांत के लिए सम्मानित किया गया है। 🏅
जोएल मोक्यर, फिलिप एजिओन और पीटर हॉविट को मिला है।
👉 मोक्यर को तकनीकी प्रगति से आर्थिक विकास समझाने के लिए,
👉 जबकि एजिओन और हॉविट को “रचनात्मक विनाश (Creative Destruction)” के सिद्धांत के लिए सम्मानित किया गया है। 🏅
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राजस्थान राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ. अरुण चतुर्वेदी को दुबई में आयोजित, भव्य समारोह में ‘राजस्थान रत्न अवार्ड-2025’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें समाजसेवा, लोककल्याण तथा राजस्थान के समग्र विकास के प्रति उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किया गया। राजस्थान बिजनेस एंड प्रोफेशनल ग्रुप (आरबीपीजी) दुबई एवं राजस्थान फाउंडेशन दुबई चैप्टर द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित, दिवाली उत्सव 2025 कार्यक्रम के दौरान डॉ. चतुर्वेदी को यह सम्मान प्रदान किया गया।
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