पुराण प्रवचन
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हमारे पुराण ही हमारे धर्म के धरोहर है इसके ज्ञान को हमारे साथ पढ़ें और फैलाएं 🙏❤️
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Forwarded from NEWSORA
🚨 IMRAN KHAN ASKED TO LEAVE INDIA

Mumbai Police have issued a Leave India Notice to actor Imran Khan, Aamir Khan’s nephew, directing him to leave India by October 28.

The action follows his detention during an anti-CEC protest at August Kranti Maidan. Khan is a US citizen and holds an OCI card.


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उर्वशी को देख के मित्र और वरुण के वीर्य स्खलन का वास्तविक व्याख्या।

ऋग्वेद (७/३३) में जो उर्वशी अप्सरा को देख के मित्र वरुण का वीर्य स्खलित होने का वर्णन है उसपर अनेकों भ्रांतियां है कि यह एक अनित्य इतिहास है। जब की इसका नित्य आख्यायिक पक्ष निम्नलिखित है 👇🏻

निरुक्त (५/१४) में स्कन्द स्वामी इसका व्याख्या करते हुए लिखते हैं -
"नित्यपक्ष के व्याख्यानुसार इस मंत्र में उर्वशी विद्युत् है और वसिष्ठ जल-समूह (उदक-संघात) से जुड़े आच्छादक हैं। मित्र और वरुण वायु और आदित्य है जिनके संकल्प से ही वसिष्ठ (जल समूह) की उत्पत्ति होती है, जिसे द्युलोक स्थित आदित्य और किरणें (विश्वे देवाः) धारण करती हैं।"

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ऋग्वेद (७/३३/१०) के मूल मंत्र में ही आया है कि -
वशिष्ठ का जन्म विद्युत् ज्योति से होता है और मित्र वरुण इसका साक्षी होते हैं।


तो स्कन्द स्वामी ने जो नित्यपक्ष दिया वह मूल मंत्र से सटीक बैठता है।

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बहुत सही मजहब है ये मुस्लिम औरतों के लिए हलाला में तो गैंग मिलते ही थे अब जन्नत में भी 72 मर्दों के गैंग मिलेंगे 💀

जो हमारे मुस्लिम दर्शक ये देख रहे हैं वह जरा सोचें उनके अम्मियों का भी 72 मर्दों से ठुकाई देखने को मिलेगा उनको जन्नत में तो कैसा लगेगा आप को मुस्लिम भाइयों ?😂
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क्या मनु का विधान आधुनिक विधान से श्रेष्ठ है अथवा नहीं ? सत्य जानने के लिए पूरा वीडियो अवश्य देखें।
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https://youtu.be/iQjnlHRQ3iQ?si=PX5q8cZQIcri__DD

_🌺Vedic Yug official_ 🌺
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आर्यों गरबा जैसे नाच-गाने वाले समारोहों से बचें।

@Kapil_Saankhya_Anusandhan_kendra
आजकल गरबा के नाम पर अंग प्रदर्शन हो रहा है एक साथ लड़के लड़कियां जहां नाच करेंगे वहां व्यभिचार तो होगा ही । गरबा आदि वैदिक परंपरा नहीं है । इसके स्थान पर वैदिक उपदेश प्रवचन भजन कराने से कल्याण होगा ।

पाखंड से बचें सत्य को धारण करें सत्यार्थ प्रकाश पढ़ें।


✍✍VEDIC Yug official
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क्या देवता शरीरधारी होते हैं?

पूर्व मीमांसा दर्शन(९/१/४) पर भाष्य करते हुए भट्टदीपिकाकार लिखते हैं -
अतः कथमपि न विग्रहादिस्वीकारः। किन्तु शब्दमात्रं देवता। अर्थस्तु प्रातिपदिकानुरोधात् चेतनोऽचेतनो वा कश्चित्स्वीक्रियते। न तु विग्रहादिमान्। उपासनादौ परं भ्यानमात्रमाहार्य तस्येति जैमिनिमतनिष्कर्ष। ममत्वेवंवदतोऽपि वाणी दुष्यतीति हरिस्मरणमेव शरणम्।

अर्थ - अतः किसी भी प्रकार से देवताओं के शरीर या विग्रह आदि को स्वीकार नहीं किया गया है। अपितु देवता केवल शब्द-मात्र हैं। जहाँ तक देवता के स्वरूप की बात है, तो वह प्रातिपदिक के अनुसार चेतन या अचेतन, जैसा भी हो, वैसा ही स्वीकार कर लिया जाता है; किंतु वह शरीर आदि से युक्त नहीं होता। जैमिनि के मत का निष्कर्ष यह है कि उपासना आदि के समय केवल आहार्य ध्यान (अर्थात् मन से कल्पित किया हुआ स्वरूप) ही किया जाता है। किंतु मेरा मानना है कि यदि ऐसा देवताओं को केवल शब्द कहते हुए भी मेरे वाणी दूषित होती है, अतः अब हरि का स्मरण ही एकमात्र शरण है।

तो जैमिनी मत के निष्कर्ष ही हैं कि देव शरीरधारी नहीं होते हैं।
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पुराण प्रवचन
क्या देवता शरीरधारी होते हैं? पूर्व मीमांसा दर्शन(९/१/४) पर भाष्य करते हुए भट्टदीपिकाकार लिखते हैं - अतः कथमपि न विग्रहादिस्वीकारः। किन्तु शब्दमात्रं देवता। अर्थस्तु प्रातिपदिकानुरोधात् चेतनोऽचेतनो वा कश्चित्स्वीक्रियते। न तु विग्रहादिमान्। उपासनादौ परं …
जब देवता शरीरधारी होते ही नहीं तो उनपर व्यभिचार आदि का दोष जो प्रतीकात्मक आख्यानों से उठा के लगाया जाता है वह भी निरर्थक हुआ।

जैसे इन्द्र अहल्या और प्रजापति उषा आदि की कथा है। इन्हें भी शरीर संबंधित नहीं माना जा सकता।
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वाल्मीकि रामायण के कुछ २१०० से २००० वर्ष प्राचीन प्रमाण

यह चीन से प्राप्त Spitzar Manuscripts में मिलते हैं जिसमें राम जी का नाम स्पष्ट रूप से आया है तथा रावण के नाम भी आया है।

यह Spitzar Manuscripts लगभग 100 BCE -100 AD प्राचीन है।

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रामलीला देखना हज़ारों हत्याओं के पाप के समान है — महर्षि दयानंद सरस्वती
परमात्मा को "वासुदेव" क्यों कहा जाता है?

आमतौर पर "वासुदेव" नाम लोक में राजा वसुदेव के पुत्र होने से श्री कृष्ण को वासुदेव नाम से जाना जाता है।

पर कृष्ण यजुर्वेद के भाष्य में आचार्य भट्ट भास्कर ने परमात्मा के "वासुदेव" नाम का यौगिक अर्थ का प्रतिपादन ही करते हैं-
वासुदेवः जगतां वासहेतवो वागिन्द्रियाणि तैर्ये व्यवहरन्ति ते वासुदेवाः । तेषां समष्टिः वासुदेवः विष्णुः व्यापनशीलः विक्रमादिकर्ता।
अर्थात् - यह सारा जगत जिसमें बसा हुआ है या निवास करता है तथा प्राणियों के वाक् आदि इंद्रियों का व्यवहार जिसमें हो रहा है उस से परमात्मा का नाम "वासुदेव" है। यह सब कुछ व्यापनशील वासुदेव विष्णु में ही स्थित है जो इन जगत आदि सृष्टि के पराक्रमों का कर्ता रूप है।
कुछ इस प्रकार यह परमात्मा के नाम वासुदेव का यौगिक अर्थ सिद्ध होता है।
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वेद में उर्वशी-पुरुरवा संवाद अनित्य इतिहास या नित्य आख्यान ?

अक्सर ऋग्वेद (१०/९५) में उर्वशी अप्सरा और पुरुरवा के संवाद सूक्त से कुछ मूर्ख वेद में इतिहास सिद्ध करने का प्रयत्न करते हैं।

जबकी निरुक्त समुच्चय में ऋग्वेद (१०/९५/१४) के भाष्य में ऋषि कात्यायन वररुचि लिखते हैं -
"निरुक्त के मत में, पुरूरवा मध्यमस्थानी, अन्तरिक्ष का देवता है। जो वायु आदि में से एक है। जो बहुत शब्द करता है वह 'पुरूरवा' है। उर्वशी विद्युत् है क्योंकि वह उरु अर्थात् विस्तृत अन्तरिक्ष में फैलकर चमकती है। वर्षाकाल में जब विद्युत् नष्ट हो जाती है, उस से वियुक्त होकर गर्जना रूप शब्द करता है। मानो वह विलाप करता है।

इस प्रकार मन्त्रों में आख्यान या कथा कहने का मत गौण है उसे प्रधान मानें तो वेदों के नित्य ज्ञान होने के सिद्धान्त का विरोध होता है। वस्तुतः तो नित्य पक्ष ही सिद्धान्त है।"

इसी प्रकार ऋषि शौनक के बृहद्देवता (२/५९) में भी पुरुरवा को मेघ के रूप में उर्वशी द्वारा स्तुति किया जाने को स्वीकार किया गया है।

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पाखंड vs सत्य

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गरबे के नाम पर अश्लीलता और रातभर के नृत्य-उत्सव के बजाय, हमें ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन करना चाहिए जो हमारी संस्कृति, मर्यादा और वैदिक परंपराओं को सशक्त करें।

आइए, केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि वैदिक संस्कार, नारी शक्ति और राष्ट्रभावना को बढ़ावा देने वाले वैदिक वीरांगना जैसे कार्यक्रम आयोजित करें।

✍✍ VEDIC YUG OFFICIAL
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