पुराण प्रवचन
5.3K subscribers
8.21K photos
700 videos
64 files
434 links
हमारे पुराण ही हमारे धर्म के धरोहर है इसके ज्ञान को हमारे साथ पढ़ें और फैलाएं 🙏❤️
Download Telegram
ले और प्रमाण चाहिए अभिमन्यु के युवा होने का ?? 😂😂

ले देख और रंगी रोना कर

यहां भी अभिमन्यु जी को मूल श्लोक में ही युवा और तरुण कहा गया है।😁😁

●▬▬▬▬🌼🌸🌼▬▬▬▬●
    𝗝𝗢𝗜𝗡👉 @PuranPravachan
❤6😁3
अबे चोटिये तुझे पढ़ना नहीं आता क्या बे

वहां लिखा है १६ से ७० वर्ष के अवस्था पर्यन्त मध्य अवस्था होता है।

और मध्य अवस्था के भी चार भेद है-
वृद्धि, यौवन, संपूर्णता और हानि।

१६-२० वर्ष को वृद्धि अवस्था कहते हैं ।

२०- ३० वर्ष तक यौवन अवस्था है।

३० -४० वर्ष तक संपूर्णता अवस्था है

४० - ७० वर्ष तक हानि की अवस्था है।

यहां १६ से २० तक प्रयाप्त यौवन कहा जा सकता है तथा २० - ३० वर्ष तक मध्य यौवनावस्था भी कहा जा सकता है।

वन गमन काल में जब सीता जी को श्यामा बोला गया तब भी वो १८ साल के थे उन्हें भी टीकाकारों ने मध्य यौवनावस्था ही माना है।
🔥6
पुराण प्रवचन
Voice message
ऋषि दयानंद ने यौवनत्व की सबसे निकृष्ट (कम) आयु यहीं मानी है क्योंकि यह बिल्कुल प्रारंभिक समय होता है । पर बौद्ध की छोटी बुद्धि में नहीं घुसेगा

पर इसका मतलब ये नहीं कि इस आयु का व्यक्ति युवा ही नहीं होगा😂
💯6
यह मूर्ख गधा बोल रहा था कि मध्य अवस्था का मतलब ही बाल अवस्था होता है।

अबे चोटिये सुश्रुत ने ७० वर्ष और चरक ने ६० वर्ष के आयु को मध्य अवस्था में ही माना है 😂😂

तो क्या तू तेरे ७० या ६० साल के बाप को भी बालक बोलेगा बे चोटिए??

७० और ६० वर्ष का बुड्ढा भी क्या बाल अवस्था होता है क्या बे ?? 🤣🤣
😁5
सोलह वर्ष से नीचे बाल अवस्था होता है 😭

- सुश्रुत संहिता


आजा बेटा तेरा भी मौज करवाता हूं

और रंगी रोना जारी रखना 😂
😂😁
💯9
✨क्या सम्राट चन्द्रगुप्त 2 (विक्रमादित्य) का आचरण अनैतिक था? ऐतिहासिक उत्तर✨

शकों पर विजय प्राप्त करना व अपनी भाभी की मर्यादा की रक्षा करना चन्द्रगुप्त 2 (विक्रमादित्य) की प्रसिद्ध उपलब्धियों में गिना जाता है। किंतु इसके बाद उन्होंने अपने ज्येष्ठ भ्राता रामगुप्त की हत्या कर उसकी पत्नी ध्रुवादेवी से विवाह किया—इस घटना को लेकर अनेक विद्वान चन्द्रगुप्त के आचरण पर प्रश्नचिह्न लगाते हैं।

मुजमल-उत-तवारीख़ के अनुसार, ध्रुवस्वामिनी ने स्वयंवर में चन्द्रगुप्त को चुना था, किंतु उसके ज्येष्ठ भाई रामगुप्त ने उसे उससे छीन लिया और उससे विवाह कर लिया।
चन्द्रगुप्त पहले से ही जनता में प्रिय था, जब उसने शक-आचार्य या शकराज का वध कर ध्रुवा को अपमान से बचाया, तो उसकी प्रतिष्ठा और बढ़ गई। इससे बड़ा भाई उससे ईर्ष्या करने लगा और उसके प्राणों के विरुद्ध षड्यंत्र रचने लगा।
अतः लेखक का निष्कर्ष है कि चन्द्रगुप्त द्वारा भाई का वध कर ध्रुवा से विवाह करना केवल अनैतिक कृत्य नहीं माना जा सकता, क्योंकि ध्रुवा ने मूल रूप से चन्द्रगुप्त को ही चुना था, पर उसे विवश होकर उसके भाई से विवाह करना पड़ा था।
@history_of_aryavart join for more
❤6
This media is not supported in your browser
VIEW IN TELEGRAM
Prince गधा- १६ और १७ साल में मध्य अवस्था ही बाल अवस्था हैं।

ले ऋषि सुश्रुत - अरे गर्धव के पुत्र!! १६ साल से नीचेवालों को बाल अवस्था बोला है ठीक से पढ़।


●▬▬▬▬🌼🌸🌼▬▬▬▬●
    𝗝𝗢𝗜𝗡👉 @PuranPravachan
😁10
क्या वैदिक काल में बाल विवाह था?(भाग-2)

महाभारत के वनपर्व में एक महान वैदिक राजा अश्वपति और उनके पुत्री का वर्णन आता है। महाराज अश्वपति का वर्णन सामवेद के छांदोग्य उपनिषद में भी एक ब्रह्मज्ञान उपदेशक के रूप में मिलता है जो उनके वैदिक धर्म में विद्वता को दर्शाता है।

महाभारत में आए वर्णन के अनुसार जब राजा अश्वपति के पुत्री सावित्री युवावस्था को प्राप्त हुई तब उनके पिता ने उनके विवाह योग्य होने पर उनके विवाह के विषय में चिन्तन किया तथा उनको अपने मन अनुकूल पति चुन लेने को कहा।

अर्थात् खुद वैदिक धर्म के ज्ञाता तथा ब्रह्मज्ञानि राजर्षी अश्वपति भी अपने पुत्री को यौवन काल में ही विवाह योग्य मानते थे न कि नग्निका होने पर विवाह कर दिए।🤣🤣

तथा सुश्रुत संहिता (सूत्रस्थान ३५/५०) में यौवन अवस्था का काल १६ वर्ष से ३० वर्ष तक बताया गया है। अर्थात् वैदिक काल में स्त्रियों का विवाह उसी वर्ष के मध्य में होता था।
●▬▬▬▬🌼🌸🌼▬▬▬▬●
    𝗝𝗢𝗜𝗡👉 @PuranPravachan
🔥7
स्त्रियों के शिक्षा पूर्ण होने पर "समावर्तन संस्कार" का वर्णन।

समावर्तन संस्कार वो वैदिक संस्कार है जिसमें विद्यार्थी जब गुरुकुल से शिक्षा प्राप्त कर वापस लौटने पर यह संस्कार होता था।

और आश्वलायन गृहसूत्र (३/८/१-११) के
समावर्तन संस्कार प्रकरण में ब्राह्मण, क्षेत्रीय, वैश्य के साथ स्त्रियों का भी समावर्तन संस्कार होने का विधान दिया गया है।

इससे यह पता चलता है कि उस समय स्त्रियों के भी उपनयन एवं समावर्तन आदि संस्कार किये जाते थे तथा उनको भी हर क्षेत्र में अधिकार प्राप्त था।

क्योंकि बिना उपनयन के शिक्षा प्राप्त नहीं हो सकता और बिना शिक्षा पूर्ण किए समावर्तन संस्कार नहीं हो सकता।

अगर स्त्रियों के समावर्तन संस्कार का वर्णन है तो उनका उपनयन भी अवश्य सिद्ध है।
●▬▬▬▬🌼🌸🌼▬▬▬▬●
    𝗝𝗢𝗜𝗡👉 @PuranPravachan
❤8
This media is not supported in your browser
VIEW IN TELEGRAM
शंकराचार्य हुए तो क्या हुआ, कानून का पालन करना ही पडेगा

- योगी आदित्यनाथ जी

●▬▬▬▬🌼🌸🌼▬▬▬▬●
    𝗝𝗢𝗜𝗡👉 @PuranPravachan
🔥8❤3