Forwarded from 🔱 पाखंड खंडन 🔱
क्या श्रीकृष्ण कामी थे ?
जो लोग श्रीकृष्ण की १६,१०८ पत्नियां मानते है वह शास्त्रविरुद्ध मान्यता जो श्रीकृष्ण के चरित्र को दूषित करती है उसके पोषक है, कैसे
जानने के लिए पोस्ट अंत तक पढ़े और जो लोग श्रीकृष्ण की एक ही पत्नी (माता रुक्मिणी) मानते है वह धार्मिक कट्टरवाद से परे सच्चे कृष्ण भक्त कहलाने योग्य है
श्रीकृष्ण का सत्य इतिहास महाभारत है, उसमें जो उनका वेदानुकूल, धर्मानुकूल आचरण और उपदेश होंगे वही मान्य है, क्योंकि श्रीकृष्ण कोई सामान्य मनुष्य नहीं अपितु एक ऐसे महापुरुष थे, जो बार बार धरती पर जन्म नहीं लेते, जिनका आत्मा, मन तथा शरीर सदा धर्म में ही वर्तमान रहता था वह थे महाभारत के कृष्ण ।
योगिराज श्रीकृष्ण चंद्र महाराज की जय 🙏
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@Pakhand_khandan
जो लोग श्रीकृष्ण की १६,१०८ पत्नियां मानते है वह शास्त्रविरुद्ध मान्यता जो श्रीकृष्ण के चरित्र को दूषित करती है उसके पोषक है, कैसे
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श्रीकृष्ण का सत्य इतिहास महाभारत है, उसमें जो उनका वेदानुकूल, धर्मानुकूल आचरण और उपदेश होंगे वही मान्य है, क्योंकि श्रीकृष्ण कोई सामान्य मनुष्य नहीं अपितु एक ऐसे महापुरुष थे, जो बार बार धरती पर जन्म नहीं लेते, जिनका आत्मा, मन तथा शरीर सदा धर्म में ही वर्तमान रहता था वह थे महाभारत के कृष्ण ।
योगिराज श्रीकृष्ण चंद्र महाराज की जय 🙏
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❤5🙏2
एक गधा फिर से वही रोना धोना ला रहा कि इसके Chinese बापों ने यह सूत्त अपने आगम अनुवाद में नहीं लिखा 😢
पर उसी ४थी - ५ वी शताब्दी के समकालीन श्री लंका के प्रसिद्ध बौद्धाचार्य बुद्धघोष के अंगुत्तर निकाय के भाष्य में भी हमें उस सूत्त का नाम और उसपर संक्षिप्त टिका मिल जाता है।
यह सिद्ध करता है कि जो इसके चाइनीज बापो से छूट गया उसी समय काल में वह श्री लंका में संकलित हो चुका था 😂
भागने से क्या होगा जब हमारे पास भी तेरे चीनी बाप का भी समकालीन बाप का प्रमाण है।
पर उसी ४थी - ५ वी शताब्दी के समकालीन श्री लंका के प्रसिद्ध बौद्धाचार्य बुद्धघोष के अंगुत्तर निकाय के भाष्य में भी हमें उस सूत्त का नाम और उसपर संक्षिप्त टिका मिल जाता है।
यह सिद्ध करता है कि जो इसके चाइनीज बापो से छूट गया उसी समय काल में वह श्री लंका में संकलित हो चुका था 😂
भागने से क्या होगा जब हमारे पास भी तेरे चीनी बाप का भी समकालीन बाप का प्रमाण है।
❤6
बौद्ध धम्म में चन्द्र ग्रहण का विज्ञान 💀
आज चन्द्र ग्रहण होने वाला है
लेकिन क्या आप को पता है कि बुद्ध के अनुसार -
और मैं बता दूं यह बुद्ध वचन प्रिंस के चीनी बाप लोग भी अपने आगम में अनुवाद किया है 😂
तो तेरे चीनी बाप वाला रं*नदी रोना यहां तो नहीं चलेगा और लाता भी है तो बुद्धघोष है हमारे पास
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𝗝𝗢𝗜𝗡👉 @PuranPravachan
आज चन्द्र ग्रहण होने वाला है
लेकिन क्या आप को पता है कि बुद्ध के अनुसार -
चन्द्र ग्रहण में राहु नाम का असुर चांद को अपने मुंह में निगल लेता है। तब चांद बुद्ध को बोलता है कि बुद्ध बचा ले और तब बुद्ध राहु असुर को बोलते है कि राहु बेटा छोड़ दे चांद को वरना तेरे सर का ७ टुकड़े कर दूंगा। और राहु डर के मारे चांद को आजाद कर देता है और अपने असुर राजा के पास चला जाता है।
और मैं बता दूं यह बुद्ध वचन प्रिंस के चीनी बाप लोग भी अपने आगम में अनुवाद किया है 😂
तो तेरे चीनी बाप वाला रं*नदी रोना यहां तो नहीं चलेगा और लाता भी है तो बुद्धघोष है हमारे पास
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😁9
क्या चीनी आगम के अनुवाद में घपला हुआ है?
संयुत्तनिकाय (2/9) जिसमें "चंदीम सुत्त" आता है उसका तो चीनी आगम के अनुवाद है पर उसके बाद के संयुत्तनिकाय (2/10) में "सुरिय सुत्त" पर चीनी आगम में अनुवाद नहीं मिलता है।
जब की यह दोनों सूत्त साथ साथ ही आगे पीछे आते हैं पाली त्रिपिटक में तथा चीनी आगम अनुवाद के समकालीन बुद्धघोष जी के टिका में भी "चंदीम सुत्त" के बाद "सुरिय सुत्त" दोनों ही आया है।
चीनी आगम में केवल "चंदीम सुत्त" का अनुवाद मिलना और उसके बाद के प्रकरण "सुरिय सुत्त" के अनुवाद न मिलना यह स्पष्ट दर्शाता है कि इनके चीनी बापो ने ऐसे बहुत से सूत्त प्रकरण को झग मार के अनुवाद नहीं किया होगा
क्यों कि "सुरिय सुत्त" भी "चंदीम सुत्त" के तरह ही साथ में आता है जिसमें बुद्ध चांद के तरह सूर्य को राहु राक्षस से बचाते हैं।
अगर चंदीम सुत्त का प्राचीनता सिद्ध है और सुरिय सुत्त भी स्वतः प्राचीन सिद्ध हो जाता है क्यों कि दोनों के प्रकरण एक सामान है।
संयुत्तनिकाय (2/9) जिसमें "चंदीम सुत्त" आता है उसका तो चीनी आगम के अनुवाद है पर उसके बाद के संयुत्तनिकाय (2/10) में "सुरिय सुत्त" पर चीनी आगम में अनुवाद नहीं मिलता है।
जब की यह दोनों सूत्त साथ साथ ही आगे पीछे आते हैं पाली त्रिपिटक में तथा चीनी आगम अनुवाद के समकालीन बुद्धघोष जी के टिका में भी "चंदीम सुत्त" के बाद "सुरिय सुत्त" दोनों ही आया है।
चीनी आगम में केवल "चंदीम सुत्त" का अनुवाद मिलना और उसके बाद के प्रकरण "सुरिय सुत्त" के अनुवाद न मिलना यह स्पष्ट दर्शाता है कि इनके चीनी बापो ने ऐसे बहुत से सूत्त प्रकरण को झग मार के अनुवाद नहीं किया होगा
क्यों कि "सुरिय सुत्त" भी "चंदीम सुत्त" के तरह ही साथ में आता है जिसमें बुद्ध चांद के तरह सूर्य को राहु राक्षस से बचाते हैं।
अगर चंदीम सुत्त का प्राचीनता सिद्ध है और सुरिय सुत्त भी स्वतः प्राचीन सिद्ध हो जाता है क्यों कि दोनों के प्रकरण एक सामान है।
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चांद को राहु असुर खा के चला गया बुद्ध बचा लो अपने बौद्ध चन्द्र देव को 🥹🥹
😁8
सूर्य सिद्धांत में सूर्य ग्रहण तथा चन्द्र ग्रहण का विज्ञान:
सूर्य सिद्धांत(४/९) में लिखा है की-
इसीलिए शतपथ ब्राह्मण (१/६/४/१८) में चन्द्रमा को वृत्र असुर का विशेषण मिला है क्यों कि निरुक्त (२/१७) के अनुसार "वृत्रो वृणोतेर्वा" अर्थात वृत्र उसे कहते है जो आच्छादित ( ढक ) लेता है। सूर्य रूपी इन्द्र को चंद्रमा रूपी वृत्र असुर ढक लेता है।
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𝗝𝗢𝗜𝗡👉 @PuranPravachan
सूर्य सिद्धांत(४/९) में लिखा है की-
जैसे चन्द्र मेघ के तरह सूर्य को आच्छादित कर देता है वैसे ही भू छाया (पृथ्वी की छाया) भी चन्द्र का आच्छादक होने से चन्द्र ग्रहण होता है।
इसीलिए शतपथ ब्राह्मण (१/६/४/१८) में चन्द्रमा को वृत्र असुर का विशेषण मिला है क्यों कि निरुक्त (२/१७) के अनुसार "वृत्रो वृणोतेर्वा" अर्थात वृत्र उसे कहते है जो आच्छादित ( ढक ) लेता है। सूर्य रूपी इन्द्र को चंद्रमा रूपी वृत्र असुर ढक लेता है।
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वाल्मीकि रामायण के कुछ २१०० से २००० वर्ष प्राचीन प्रमाण
यह चीन से प्राप्त Spitzar Manuscripts में मिलते हैं जिसमें राम जी का नाम स्पष्ट रूप से आया है तथा रावण के नाम भी आया है।
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𝗝𝗢𝗜𝗡👉 @PuranPravachan
यह चीन से प्राप्त Spitzar Manuscripts में मिलते हैं जिसमें राम जी का नाम स्पष्ट रूप से आया है तथा रावण के नाम भी आया है।
यह Spitzar Manuscripts लगभग 100 BCE -100 AD प्राचीन है।
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