जब हमने कल सनातन धर्मालोक जैसे पंडो के ग्रंथ से ही दिखाया था जिसे ये नास्तिक लोग अपने बाप जैसा मानते हैं कि आतिथ्य में गौ दान होता है।
तब यह कुतर्क भी आया कि सनातन धर्मालोक में वो बात पूर्व पक्ष ने बोला है।
जब की मैने पूरा वो प्रसंग पढ़ लिया पूर्व पक्ष से लेकर निष्कर्ष तक यहां उन्होंने कहीं भी उत्तर पक्ष में गौ हिंसा का समर्थन में तर्क नहीं दिया।
उल्टा उन्होंने याज्ञवल्क्य स्मृति (१/१०९) में मीताक्षर भाष्य का ही समर्थन किया की
आगे उन्होंने इस निष्कर्ष को समाप्त करते हुए यह भी बोलते हैं कि -
अब पूर्वपक्षी अगर ये बोल रहा होता तो लेखक के पूर्व निबन्ध की बात ही नहीं होता।
इस से सिद्ध होता है ये लेखक के अपना उत्तर पक्ष है और उसने अपने पूर्व निबन्ध का संदर्भ भी निष्कर्ष में उद्धृत किया है।
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𝗝𝗢𝗜𝗡👉 @PuranPravachan
तब यह कुतर्क भी आया कि सनातन धर्मालोक में वो बात पूर्व पक्ष ने बोला है।
जब की मैने पूरा वो प्रसंग पढ़ लिया पूर्व पक्ष से लेकर निष्कर्ष तक यहां उन्होंने कहीं भी उत्तर पक्ष में गौ हिंसा का समर्थन में तर्क नहीं दिया।
उल्टा उन्होंने याज्ञवल्क्य स्मृति (१/१०९) में मीताक्षर भाष्य का ही समर्थन किया की
"आतिथ्य में गौ का प्रदर्शन मात्र विहित है हिंसा नहीं और यही शतपथ में भी सिद्ध होता है।"
आगे उन्होंने इस निष्कर्ष को समाप्त करते हुए यह भी बोलते हैं कि -
उन्होंने अपने पूर्व निबन्ध में यह सब बता चुके हैं।
अब पूर्वपक्षी अगर ये बोल रहा होता तो लेखक के पूर्व निबन्ध की बात ही नहीं होता।
इस से सिद्ध होता है ये लेखक के अपना उत्तर पक्ष है और उसने अपने पूर्व निबन्ध का संदर्भ भी निष्कर्ष में उद्धृत किया है।
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इसी तरह आप सनातन धर्मालोक पुस्तक के "अतिथिकी 'गोघ्न' संज्ञापर विचार" देख सकते हो।
यहां पूर्व पक्ष उनके शतपथ पे आतिथ्य का जो व्याख्या था उसको ठीक न मान के वहां
और आगे उत्तरपक्ष शुरू होते हैं पृष्ठ 344 से "इसपर हम कहते हैं कि" ऐसे वाक्यों से लेखक का उत्तरपक्ष बोध होता है।
इस से स्पष्ट है कि
जब की लेखक का
और चोचन पृष्ठ 344 से 357 तेरे बाप का उत्तरपक्ष पूरा पढ़ लेना याज्ञवल्क्य स्मृति (१/१०९) पर मीताक्षर भाष्य को ही सही माना है।
यहां पूर्व पक्ष उनके शतपथ पे आतिथ्य का जो व्याख्या था उसको ठीक न मान के वहां
अतिथि के लिए बैल मारना ही इष्ट है इस प्रकार का तर्क पूर्व पक्षी का है।
और आगे उत्तरपक्ष शुरू होते हैं पृष्ठ 344 से "इसपर हम कहते हैं कि" ऐसे वाक्यों से लेखक का उत्तरपक्ष बोध होता है।
इस से स्पष्ट है कि
पूर्वपक्ष यहां आतिथ्य में गौ हिंसा का समर्थन कर रहा है।
जब की लेखक का
उत्तरपक्ष आतिथ्य में गौ हिंसा का खंडन कर रहा।
और चोचन पृष्ठ 344 से 357 तेरे बाप का उत्तरपक्ष पूरा पढ़ लेना याज्ञवल्क्य स्मृति (१/१०९) पर मीताक्षर भाष्य को ही सही माना है।
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पुराण प्रवचन
इसी तरह आप सनातन धर्मालोक पुस्तक के "अतिथिकी 'गोघ्न' संज्ञापर विचार" देख सकते हो। यहां पूर्व पक्ष उनके शतपथ पे आतिथ्य का जो व्याख्या था उसको ठीक न मान के वहां अतिथि के लिए बैल मारना ही इष्ट है इस प्रकार का तर्क पूर्व पक्षी का है। और आगे उत्तरपक्ष शुरू होते…
चर्म का बच्चा फिर पेला गया 😂
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मधुपर्क में गौ उत्सर्ग विधान
आश्वलायन गृह्यसूत्र पर भट्ट कुमारिल कृत कारिका में भी मधुपर्क में गौ को छोड़ देना ही विधान है। जैसा कि कारिका में आया है -
अर्थात - वर माता रुद्राणां दुहिता यह ऋचा का जप करके ओम उत्सृजत कहके गौ को छोड़ देता हैं और यहां मधुपर्क विधि समाप्त हो जाती हैं।
जिस मंत्र का गौ उत्सर्ग क्रिया में पाठ किया जाता हैं वो ऋग्वैदिक मंत्र हैं। ऋग्वेद ८.१०१.१५ -
अतः यहां मूल मंत्र में ही गां मा वधिष्ट पद गौ के वध का निषेध करती है तो यदि मधुपर्क में गाय को छोड़ा ही जाता हैं तथा गौ वध के योग्य ही नहीं है तो पुनः अगले सूत्र में आए मांस शब्द से अदिति गौ के मांस लेना ही असंगत है।
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आश्वलायन गृह्यसूत्र पर भट्ट कुमारिल कृत कारिका में भी मधुपर्क में गौ को छोड़ देना ही विधान है। जैसा कि कारिका में आया है -
ततो वरो जपेन्मातारुद्राणां दुहितेत्यूचम् । अथोमुत्सृजतेत्याह प्रेषं गामुत्सृजन्ति च ।
अर्थात - वर माता रुद्राणां दुहिता यह ऋचा का जप करके ओम उत्सृजत कहके गौ को छोड़ देता हैं और यहां मधुपर्क विधि समाप्त हो जाती हैं।
जिस मंत्र का गौ उत्सर्ग क्रिया में पाठ किया जाता हैं वो ऋग्वैदिक मंत्र हैं। ऋग्वेद ८.१०१.१५ -
मा॒ता रु॒द्राणां॑ दुहि॒ता वसू॑नां॒ स्वसा॑दि॒त्याना॑म॒मृत॑स्य॒ नाभि॑: । प्र नु वो॑चं चिकि॒तुषे॒ जना॑य॒ मा गामना॑गा॒मदि॑तिं वधिष्ट ॥
अतः यहां मूल मंत्र में ही गां मा वधिष्ट पद गौ के वध का निषेध करती है तो यदि मधुपर्क में गाय को छोड़ा ही जाता हैं तथा गौ वध के योग्य ही नहीं है तो पुनः अगले सूत्र में आए मांस शब्द से अदिति गौ के मांस लेना ही असंगत है।
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भगवान बुद्ध का अद्भुत चमत्कार!🤣 अपनी अलौकिक शक्ति से मांस उत्पन्न करके भिक्षुओं को खाने की आज्ञा देते थे!😭
महायान के ग्रंथ में लिखा है 5 प्रकार के शुद्ध मांस खाने की आज्ञा दी है भगवान बुद्ध ने अपने चमत्कार की शक्ति से मांस प्रकट करते थे..
मतलब अद्भुत विज्ञान था मतलब इतना झूठ है महायान सम्प्रदाय में इतना झूठ ये लोग बुद्ध की छवि सुधारने के लिए मांस को बुद्ध की शक्ति से प्रकट वाला बता कर बात काट दी जाती है कि वो शुद्ध मांस है एकदम..
बकवास वाली बात है लेकिन अगर थेरवाद या अन्य बौद्ध सम्प्रदाय के लोग दावा कर दे तो रोने लगते हैं बुरी तरह और बुद्ध के आखिरी खान-पान को लेकर भी अपनी पोस्ट में सिद्ध किया है कि बुद्ध ने सूअर का दूषित मांस खाया था और इस बात को लेकर झूठे मक्कार महायान बुद्धिस्ट उनकी लूटी इज्जत छुपाते हैं.. पाली ट्रांसलेशन में जो टूल है 3-5 जगह बिल्कुल सिद्ध है..
लेकिन ये लोग मक्कार झूठे थे🤣 मतलब मांस खा सकते है लेकिन बुद्ध अपनी शक्ति से बिना हिंसा के मांस खाने को आज्ञा करते थे बुद्ध मुँह पर इतना झूठ मतलब जलेबी बनाना महायान बुद्धिस्टों से सीखें जलेबी जलेबी चमत्कार की शक्ति से मांस खिलाएंगे बुद्ध
महायान के ग्रंथ में लिखा है 5 प्रकार के शुद्ध मांस खाने की आज्ञा दी है भगवान बुद्ध ने अपने चमत्कार की शक्ति से मांस प्रकट करते थे..
मतलब अद्भुत विज्ञान था मतलब इतना झूठ है महायान सम्प्रदाय में इतना झूठ ये लोग बुद्ध की छवि सुधारने के लिए मांस को बुद्ध की शक्ति से प्रकट वाला बता कर बात काट दी जाती है कि वो शुद्ध मांस है एकदम..
बकवास वाली बात है लेकिन अगर थेरवाद या अन्य बौद्ध सम्प्रदाय के लोग दावा कर दे तो रोने लगते हैं बुरी तरह और बुद्ध के आखिरी खान-पान को लेकर भी अपनी पोस्ट में सिद्ध किया है कि बुद्ध ने सूअर का दूषित मांस खाया था और इस बात को लेकर झूठे मक्कार महायान बुद्धिस्ट उनकी लूटी इज्जत छुपाते हैं.. पाली ट्रांसलेशन में जो टूल है 3-5 जगह बिल्कुल सिद्ध है..
लेकिन ये लोग मक्कार झूठे थे🤣 मतलब मांस खा सकते है लेकिन बुद्ध अपनी शक्ति से बिना हिंसा के मांस खाने को आज्ञा करते थे बुद्ध मुँह पर इतना झूठ मतलब जलेबी बनाना महायान बुद्धिस्टों से सीखें जलेबी जलेबी चमत्कार की शक्ति से मांस खिलाएंगे बुद्ध
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हा! मतलब भगवान बुद्ध दुसरो को एकदम शुद्ध ताजा मांस खिलाते थे लेकिन अंत में दूषित सुअर के मांस के कारण ईश्वर को प्राप्त हुए।😭😭😭
😁8
महायान ग्रंथों में भी मांसाहार की अनुमति! बुद्ध ने “शुद्ध मांस” खाने की आज्ञा दी थी! तीन प्रकार का शुद्ध मांस — बौद्ध ग्रंथों में स्पष्ट प्रमाण
इस अंश में तीन प्रकार के “शुद्ध मांस” की बात की गई है जिन्हें भिक्षु खा सकते थे
ऐसा मांस जिसे अपने लिए मारे जाते हुए देखा न हो मारे जाने की बात सुनी न हो और यह संदेह न हो कि वह उनके लिए ही मारा गया था
इन्हीं तीन शर्तों को “तीन प्रकार का शुद्ध मांस” कहा गया है
लेकिन मांस खाना तो महायान ग्रंथ से भी सिद्ध है कि उसकी अनुमति थी।
नोट में यह भी कहा गया है कि गृहस्थों द्वारा खरीदा गया मांस इस नियम में लागू नहीं होता क्योंकि उसकी खरीद और खपत पशु वध की आपूर्ति और मांग की प्रक्रिया से जुड़ी होती है
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इस अंश में तीन प्रकार के “शुद्ध मांस” की बात की गई है जिन्हें भिक्षु खा सकते थे
ऐसा मांस जिसे अपने लिए मारे जाते हुए देखा न हो मारे जाने की बात सुनी न हो और यह संदेह न हो कि वह उनके लिए ही मारा गया था
इन्हीं तीन शर्तों को “तीन प्रकार का शुद्ध मांस” कहा गया है
लेकिन मांस खाना तो महायान ग्रंथ से भी सिद्ध है कि उसकी अनुमति थी।
नोट में यह भी कहा गया है कि गृहस्थों द्वारा खरीदा गया मांस इस नियम में लागू नहीं होता क्योंकि उसकी खरीद और खपत पशु वध की आपूर्ति और मांग की प्रक्रिया से जुड़ी होती है
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प्राचीन बौद्ध काल के नियमों में तीन प्रकार का शुद्ध मांस तीन प्रकार का अशुद्ध मांस और दस प्रकार के अशुद्ध मांस का उल्लेख मिलता है
प्राचीन बौद्ध संघ और उसके कुछ वर्गों को मांस खाने से प्रतिबंधित नहीं किया गया था
धर्मगुप्तक के अनुसार मछली मिलने पर बुद्ध ने कहा था मछली खाने की अनुमति है और मांस मिलने पर बुद्ध ने कहा था मांस खाने की अनुमति है
बुद्ध ने तीन प्रकार के शुद्ध मांस की बात कही थी जिसमें अपने लिए पशु को मारा हुआ न देखा हो मारे जाने की बात न सुनी हो और यह न माना हो कि पशु उसके लिए मारा गया था
महासांघिक विनय में जिन मांसों से परहेज बताया गया है उनमें मनुष्य का मांस ड्रैगन का मांस हाथी का मांस घोड़े का मांस कुत्ते का मांस पक्षी का मांस गिद्ध का मांस बंदर का मांस और सिंह का मांस शामिल हैं
लेख के अनुसार महायान के विकास के साथ बोधिसत्त्व की करुणा की भावना की पृष्ठभूमि में मांस से परहेज करने वाले सूत्र धीरे धीरे विकसित हुए
महापरिनिर्वाण सूत्र में तीन प्रकार के शुद्ध मांस की व्यवस्था को क्रमशः विकसित हुई व्यवस्था बताया गया है जिसका उद्देश्य धीरे धीरे मांस का त्याग करना था
प्राचीन बौद्ध संघ और उसके कुछ वर्गों को मांस खाने से प्रतिबंधित नहीं किया गया था
धर्मगुप्तक के अनुसार मछली मिलने पर बुद्ध ने कहा था मछली खाने की अनुमति है और मांस मिलने पर बुद्ध ने कहा था मांस खाने की अनुमति है
बुद्ध ने तीन प्रकार के शुद्ध मांस की बात कही थी जिसमें अपने लिए पशु को मारा हुआ न देखा हो मारे जाने की बात न सुनी हो और यह न माना हो कि पशु उसके लिए मारा गया था
महासांघिक विनय में जिन मांसों से परहेज बताया गया है उनमें मनुष्य का मांस ड्रैगन का मांस हाथी का मांस घोड़े का मांस कुत्ते का मांस पक्षी का मांस गिद्ध का मांस बंदर का मांस और सिंह का मांस शामिल हैं
लेख के अनुसार महायान के विकास के साथ बोधिसत्त्व की करुणा की भावना की पृष्ठभूमि में मांस से परहेज करने वाले सूत्र धीरे धीरे विकसित हुए
महापरिनिर्वाण सूत्र में तीन प्रकार के शुद्ध मांस की व्यवस्था को क्रमशः विकसित हुई व्यवस्था बताया गया है जिसका उद्देश्य धीरे धीरे मांस का त्याग करना था
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अतः सिद्ध यहीं बिल्कुल पूर्ण रूप से होता है कि बुद्ध के समय मांस भक्षण बिल्कुल मौजूद था और खाते थे बुद्ध के समय और allow भी किया हुआ था लेकिन बाद में धीरे धीरे vegetarian में आ गए...
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साध्वी स्त्री का त्याग करने वाले पति दण्ड योग्य है।
नारद स्मृति के अनुसार -
इसलिए वैदिक धर्म में साध्वी स्त्रियों के साथ कभी कोई पुरुष अन्याय नहीं कर सकता।
और कोई ऐसा करता है तो उसके लिए राजा को उस पुरुष के लिए दण्ड देने का आदेश है जब तक कि वो अपने पत्नी को पुनः पत्नी मर्यादा का सम्मान न दे दे।
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नारद स्मृति के अनुसार -
अगर कोई पुरुष किसी साध्वी गुणों से सम्पन्न निर्दोष स्त्री का त्याग करे तो उस पुरुष को राजा द्वारा यथावत कठोर दण्ड देना चाहिए तथा उस पुरुष को पुनः अपने पत्नी के प्रति यथा योग्य सम्मान देने के लिए बाध्य करना चाहिए।
इसलिए वैदिक धर्म में साध्वी स्त्रियों के साथ कभी कोई पुरुष अन्याय नहीं कर सकता।
और कोई ऐसा करता है तो उसके लिए राजा को उस पुरुष के लिए दण्ड देने का आदेश है जब तक कि वो अपने पत्नी को पुनः पत्नी मर्यादा का सम्मान न दे दे।
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Forwarded from 𝗩𝗘𝗗𝗜𝗖 𝗦𝗖𝗥𝗜𝗣𝗧𝗨𝗥𝗘
जन्नत में जाने वाली युवती के गुप्तांग में चालीस लड़कों के गुप्तांगो के बराबर जोश होगा 😂 और पुरुष स्त्री से जैसा चाहेगा उसकी और आकर्षित होगा 😂
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1000 rupees per debate ke lega prince bata?? Agar by chance debate pe bulana padee??
~lxt_slayer_baby
~lxt_slayer_baby
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