प्राचीन बौद्ध काल के नियमों में तीन प्रकार का शुद्ध मांस तीन प्रकार का अशुद्ध मांस और दस प्रकार के अशुद्ध मांस का उल्लेख मिलता है
प्राचीन बौद्ध संघ और उसके कुछ वर्गों को मांस खाने से प्रतिबंधित नहीं किया गया था
धर्मगुप्तक के अनुसार मछली मिलने पर बुद्ध ने कहा था मछली खाने की अनुमति है और मांस मिलने पर बुद्ध ने कहा था मांस खाने की अनुमति है
बुद्ध ने तीन प्रकार के शुद्ध मांस की बात कही थी जिसमें अपने लिए पशु को मारा हुआ न देखा हो मारे जाने की बात न सुनी हो और यह न माना हो कि पशु उसके लिए मारा गया था
महासांघिक विनय में जिन मांसों से परहेज बताया गया है उनमें मनुष्य का मांस ड्रैगन का मांस हाथी का मांस घोड़े का मांस कुत्ते का मांस पक्षी का मांस गिद्ध का मांस बंदर का मांस और सिंह का मांस शामिल हैं
लेख के अनुसार महायान के विकास के साथ बोधिसत्त्व की करुणा की भावना की पृष्ठभूमि में मांस से परहेज करने वाले सूत्र धीरे धीरे विकसित हुए
महापरिनिर्वाण सूत्र में तीन प्रकार के शुद्ध मांस की व्यवस्था को क्रमशः विकसित हुई व्यवस्था बताया गया है जिसका उद्देश्य धीरे धीरे मांस का त्याग करना था
प्राचीन बौद्ध संघ और उसके कुछ वर्गों को मांस खाने से प्रतिबंधित नहीं किया गया था
धर्मगुप्तक के अनुसार मछली मिलने पर बुद्ध ने कहा था मछली खाने की अनुमति है और मांस मिलने पर बुद्ध ने कहा था मांस खाने की अनुमति है
बुद्ध ने तीन प्रकार के शुद्ध मांस की बात कही थी जिसमें अपने लिए पशु को मारा हुआ न देखा हो मारे जाने की बात न सुनी हो और यह न माना हो कि पशु उसके लिए मारा गया था
महासांघिक विनय में जिन मांसों से परहेज बताया गया है उनमें मनुष्य का मांस ड्रैगन का मांस हाथी का मांस घोड़े का मांस कुत्ते का मांस पक्षी का मांस गिद्ध का मांस बंदर का मांस और सिंह का मांस शामिल हैं
लेख के अनुसार महायान के विकास के साथ बोधिसत्त्व की करुणा की भावना की पृष्ठभूमि में मांस से परहेज करने वाले सूत्र धीरे धीरे विकसित हुए
महापरिनिर्वाण सूत्र में तीन प्रकार के शुद्ध मांस की व्यवस्था को क्रमशः विकसित हुई व्यवस्था बताया गया है जिसका उद्देश्य धीरे धीरे मांस का त्याग करना था
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अतः सिद्ध यहीं बिल्कुल पूर्ण रूप से होता है कि बुद्ध के समय मांस भक्षण बिल्कुल मौजूद था और खाते थे बुद्ध के समय और allow भी किया हुआ था लेकिन बाद में धीरे धीरे vegetarian में आ गए...
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साध्वी स्त्री का त्याग करने वाले पति दण्ड योग्य है।
नारद स्मृति के अनुसार -
इसलिए वैदिक धर्म में साध्वी स्त्रियों के साथ कभी कोई पुरुष अन्याय नहीं कर सकता।
और कोई ऐसा करता है तो उसके लिए राजा को उस पुरुष के लिए दण्ड देने का आदेश है जब तक कि वो अपने पत्नी को पुनः पत्नी मर्यादा का सम्मान न दे दे।
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𝗝𝗢𝗜𝗡👉 @PuranPravachan
नारद स्मृति के अनुसार -
अगर कोई पुरुष किसी साध्वी गुणों से सम्पन्न निर्दोष स्त्री का त्याग करे तो उस पुरुष को राजा द्वारा यथावत कठोर दण्ड देना चाहिए तथा उस पुरुष को पुनः अपने पत्नी के प्रति यथा योग्य सम्मान देने के लिए बाध्य करना चाहिए।
इसलिए वैदिक धर्म में साध्वी स्त्रियों के साथ कभी कोई पुरुष अन्याय नहीं कर सकता।
और कोई ऐसा करता है तो उसके लिए राजा को उस पुरुष के लिए दण्ड देने का आदेश है जब तक कि वो अपने पत्नी को पुनः पत्नी मर्यादा का सम्मान न दे दे।
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𝗝𝗢𝗜𝗡👉 @PuranPravachan
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Forwarded from 𝗩𝗘𝗗𝗜𝗖 𝗦𝗖𝗥𝗜𝗣𝗧𝗨𝗥𝗘
जन्नत में जाने वाली युवती के गुप्तांग में चालीस लड़कों के गुप्तांगो के बराबर जोश होगा 😂 और पुरुष स्त्री से जैसा चाहेगा उसकी और आकर्षित होगा 😂
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1000 rupees per debate ke lega prince bata?? Agar by chance debate pe bulana padee??
~lxt_slayer_baby
~lxt_slayer_baby
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Forwarded from 𝗩𝗘𝗗𝗜𝗖 𝗦𝗖𝗥𝗜𝗣𝗧𝗨𝗥𝗘
आखिर ASHISH समाजी बोले तो पुराण प्रवचन चलाने वाले संचालक ने एक और को नास्तिक बना दिया 😭
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𝗩𝗘𝗗𝗜𝗖 𝗦𝗖𝗥𝗜𝗣𝗧𝗨𝗥𝗘
आखिर ASHISH समाजी बोले तो पुराण प्रवचन चलाने वाले संचालक ने एक और को नास्तिक बना दिया 😭
देखो कोई बौद्ध नास्तिक अगर नास्तिक बने फिर भी मुझे ही दोष दिया जा रहा 😭
अब कोई नास्तिक अगर नास्तिक बन जाए तो मेरा क्या दोष
अब कोई नास्तिक अगर नास्तिक बन जाए तो मेरा क्या दोष
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1800 वर्ष प्राचीन वैदिक यज्ञ और देवताओं का उल्लेख।
226AD के नान्दसा यूप अभिलेख में मिलता है-
यह यूप एक वैदिक यज्ञानुष्ठान का है जो कि है "एकषष्टिरात्र यज्ञ" इस यज्ञ के विषय में हमें समवेदीय ताण्ड्य महाब्राह्मण में उल्लेख मिलता है।
तथा इसमें "ब्रह्मा", "इन्द्र", "प्रजापति", "महर्षियों" और "विष्णु" का उल्लेख किया गया है।
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𝗝𝗢𝗜𝗡👉 @PuranPravachan
226AD के नान्दसा यूप अभिलेख में मिलता है-
**यित्वैकषष्टिरात्त्रमितिसत्त्रम परिमित ब्रह्मेंद्रप्रजापतिसहर्षीविष्णूस्थानेषु
यह यूप एक वैदिक यज्ञानुष्ठान का है जो कि है "एकषष्टिरात्र यज्ञ" इस यज्ञ के विषय में हमें समवेदीय ताण्ड्य महाब्राह्मण में उल्लेख मिलता है।
तथा इसमें "ब्रह्मा", "इन्द्र", "प्रजापति", "महर्षियों" और "विष्णु" का उल्लेख किया गया है।
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𝗝𝗢𝗜𝗡👉 @PuranPravachan
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गधा साला चू#@या ....कह रहा है कि चरम चोचन मेरा औलाद की शूद्र मूर्ख होता है और अतिशूद्र महामूर्ख होते हैं गजब टोपाबाज़ आदमी है ये ....चूतिये 2 कौड़ी के लोमड़ी...दयानन्द सरस्वती जी जन्म से वर्ण ही नहीं मानते वो गुण और कर्म स्वभाव को ही महत्व देते हैं ना कि जन्म से...ये मूर्ख गजपुत्र समझ रहा है कि जन्मजात शूद्र महामूर्ख होता है.....सीधी बात है द्विज अगर मूर्ख होगा तो..वो शूद्र है ....मूर्ख इंसान जो होता है बे अक़्ल उसको शूद्र कहते हैं जन्मजात शूद्र अगर द्विज वाले काम या होशियार है तो वो तो द्विज है लेकिन जन्मजात द्विज होकर मूर्ख है उसको शूद्र कहा गया है ......जन्म से वर्ण मानते तो....तब बात होती ना जो हाथी की नाजायज़ औलाद गजपुत्र हो क्या समझेगा चू%या.....
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