Forwarded from ࿗ HISTORY OF ARYAVART ࿗
“कुशान सम्राट विमा कडफिसेस (कनिष्क के पिता) और शिव का उपासना-परंपरा”
जब विमा कडफिसेस कुशान सम्राट बने, उस समय धार्मिक जीवन की दो प्रमुख विशेषताएँ दिखाई देती हैं।
पहली, ग्रीक धार्मिक कला के रूपों को अपनाना और कुशान देवताओं की ग्रीक प्रतीकात्मक (iconographic) व्याख्या करना—जिसमें देवताओं को ज़ीउस, नाइके और हेराक्लीज़ जैसे ग्रीक रूपों में दर्शाया गया।
दूसरी और अधिक महत्वपूर्ण विशेषता, भारतीय धर्मों की ओर झुकाव, विशेषकर शिव-पूजा। विमा कडफिसेस के शासन में शिव का पंथ और अधिक प्रमुख हुआ। उनके सिक्कों पर शिव या नंदी सहित शिव का चित्रण मिलता है, जो यह स्पष्ट करता है कि वे शिव-पूजा को विशेष महत्व देते।
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जब विमा कडफिसेस कुशान सम्राट बने, उस समय धार्मिक जीवन की दो प्रमुख विशेषताएँ दिखाई देती हैं।
पहली, ग्रीक धार्मिक कला के रूपों को अपनाना और कुशान देवताओं की ग्रीक प्रतीकात्मक (iconographic) व्याख्या करना—जिसमें देवताओं को ज़ीउस, नाइके और हेराक्लीज़ जैसे ग्रीक रूपों में दर्शाया गया।
दूसरी और अधिक महत्वपूर्ण विशेषता, भारतीय धर्मों की ओर झुकाव, विशेषकर शिव-पूजा। विमा कडफिसेस के शासन में शिव का पंथ और अधिक प्रमुख हुआ। उनके सिक्कों पर शिव या नंदी सहित शिव का चित्रण मिलता है, जो यह स्पष्ट करता है कि वे शिव-पूजा को विशेष महत्व देते।
Source- History of civilizations of Central Asia, Volume II
The development of sedentary and nomadic civilizations: 700 B.C. to A.D. 250
Editor: János Harmatta Co-editors: B. N. Puri and G. F. Etemadi
UNESCO Publishing
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❤8🔥1👏1
Forwarded from ࿗ HISTORY OF ARYAVART ࿗
"कुषाण सिक्कों पर 'महेश्वर' शब्द का वास्तविक अर्थ"
कुषाण सम्राट विम कडफिसेस के कुछ सिक्कों पर 'महेश्वर' शब्द मिलता है, जिसे सामान्यतः भगवान शिव का पर्यायवाची माना जाता है। हालाँकि, ऐतिहासिक संदर्भ में इसका अर्थ राजा के लिए 'महान ईश्वर' होना संदिग्ध लगता है। इसके पीछे भाषाई कारण यह है कि उस समय की खरोष्ठी लिपि में दीर्घ स्वरों (बड़ी मात्राओं) को अलग से नहीं दर्शाया जाता था। इसी आधार पर विद्वानों का मानना है कि इस शब्द को वास्तव में 'माहेश्वर' पढ़ा जाना चाहिए, जिसका अर्थ होता है— 'भगवान शिव का अनन्य भक्त'। यह स्पष्ट करता है कि विम ने स्वयं को ईश्वर घोषित करने के बजाय शिव के प्रति अपनी गहरी धार्मिक आस्था को व्यक्त करने के लिए इस उपाधि का उपयोग किया था।
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कुषाण सम्राट विम कडफिसेस के कुछ सिक्कों पर 'महेश्वर' शब्द मिलता है, जिसे सामान्यतः भगवान शिव का पर्यायवाची माना जाता है। हालाँकि, ऐतिहासिक संदर्भ में इसका अर्थ राजा के लिए 'महान ईश्वर' होना संदिग्ध लगता है। इसके पीछे भाषाई कारण यह है कि उस समय की खरोष्ठी लिपि में दीर्घ स्वरों (बड़ी मात्राओं) को अलग से नहीं दर्शाया जाता था। इसी आधार पर विद्वानों का मानना है कि इस शब्द को वास्तव में 'माहेश्वर' पढ़ा जाना चाहिए, जिसका अर्थ होता है— 'भगवान शिव का अनन्य भक्त'। यह स्पष्ट करता है कि विम ने स्वयं को ईश्वर घोषित करने के बजाय शिव के प्रति अपनी गहरी धार्मिक आस्था को व्यक्त करने के लिए इस उपाधि का उपयोग किया था।
Source- History of civilizations of Central Asia, Volume II The development of sedentary and nomadic civilizations: 700 B.C. to A.D. 250
Editor: János Harmatta Co-editors: B. N. Puri and G. F. Etemadi
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❤10🥰1💯1
पुराण प्रवचन
बस तथाकथित खंडन कर दे कोई sarrrr 🤣
जल्दी जल्दी अद्वैति का pdf Post कर देता हु फिर खुद को स्कैप्टिक कह कर भागना भी तो है 🤣
😁9
Forwarded from 🔱 पाखंड खंडन 🔱
🙏 नमस्ते आर्य मित्रों 🙏
पोप जी - नहीं-नहीं आपने गरुड पुराण के इस श्लोक का यहाँ गलत अर्थ किया है, आप मूर्ख आर्य समाजी कभी भी उस श्लोक का सही अर्थ नहीं समझ पाएंगे क्योंकि वास्तविक अर्थ तो वही होगा जो परंपरा प्राप्त होगा 🤬
तोप जी - तो आप ही बता दो इस श्लोक का सही अर्थ क्या होगा
पोप जी - इस श्लोक का सही और सच्चा अर्थ होगा - परम पुरुष (परमात्मा) ने तीन गुणों (सत्व, रजस, तमस) की तुलना तीन रूप (विष्णु, ब्रह्मा, रुद्र) धारण किए । विष्णु जो सृष्टि को धारण करें, ब्रह्मा जो सृष्टि को उत्पन्न करे और शिव जो सृष्टि का विनाश करे, विष्णु ही ब्रह्मा तथा रुद्र को सृष्टि उत्पत्ति एवं विनाश के लिए प्रेरित करते है । जो लोग इन तीन गुणों (सत्व, रजस, तमस) के आधार पर विष्णु, ब्रह्मा, रुद्र में भेद करते है, वह घोर अंधकार को प्राप्त करते है ।
तोप जी - वाह! फिर एक बार जनता के समक्ष आपका दोगलापन दिख गया, ये दोगलापन कहीं “परंपरा प्राप्त” तो नहीं 😂
आपने जब पहले भागवत और विष्णु पुराण के प्रमाण प्रस्तुत किए थे तब भी हमने कहा था आपके ये प्रमाण हमारे मत की सिद्धि करते है, और अब आपका गरुड पुराण का “परंपरा प्राप्त” अर्थ भी हमारे ही मत को सत्य सिद्ध कर रहा है, आशा है आपको भान होगा कि आपके ऐसा करने से आपके धंधे पर बहुत असर होगा, अब जब आपने पुराणों से ही पौराणिक मत के अनेक ईश्वरवाद का खंडन कर ही दिया है तो क्या आप उन पुराणों पर थूकेंगे?
पोप जी - भले ही हम एकेश्वरवाद मानते है लेकिन हम पुराणों पर नहीं थूकेंगे, उनपर हमारी आस्था है श्रद्धा है 🤲
पुराणों में भले ही हजार त्रुटियां हो लेकिन वो हमारे सर्वोच्च धर्मग्रंथ है, उनपर से हमारी आस्था न घटेगी न हटेगी, क्योंकि हमको नास्तिक घोषित होकर समाज से बहिष्कृत नहीं होना 😭
तोप जी - अब कुछ नहीं हो सकता, आपके शब्द हानि कर चूके, अब तो सामान्य हिन्दू समाज (जो अनेक ईश्वरवाद में आस्था रखता है) आपका बहिष्कार कर देगा, आपके पोस्टर पर जूतों की माला पहनाएगा, आपका पुतला जलाएगा, अब आपका क्या होगा पोप जी 😂
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@Pakhand_khandan
पिछले पोस्ट से आप लोगों ने पोप जी का दोगलापन देखा और तभी कुछ “कट्टर आस्थावान” पौराणिकों ने जब तोप जी के समक्ष पोप जी की हार होते देखी तब उन “कट्टर आस्थावान” पौराणिकों ने अपना आपा खो दिया और तोप जी को अपशब्द कहने लगे ऐसे अपनी गाली परंपरा का प्रदर्शन करने लगे तब पोप जी भी अपनी गाली परंपरा का अनुकरण कर डिफेंस करने लगे, लेकिन तोप जी तो ठहरे पंडा विनाशक, उनके ही तर्क व प्रमाणों से पोप जी को अपने जूतों की धूल चटा दी
पोप जी - नहीं-नहीं आपने गरुड पुराण के इस श्लोक का यहाँ गलत अर्थ किया है, आप मूर्ख आर्य समाजी कभी भी उस श्लोक का सही अर्थ नहीं समझ पाएंगे क्योंकि वास्तविक अर्थ तो वही होगा जो परंपरा प्राप्त होगा 🤬
तोप जी - तो आप ही बता दो इस श्लोक का सही अर्थ क्या होगा
पोप जी - इस श्लोक का सही और सच्चा अर्थ होगा - परम पुरुष (परमात्मा) ने तीन गुणों (सत्व, रजस, तमस) की तुलना तीन रूप (विष्णु, ब्रह्मा, रुद्र) धारण किए । विष्णु जो सृष्टि को धारण करें, ब्रह्मा जो सृष्टि को उत्पन्न करे और शिव जो सृष्टि का विनाश करे, विष्णु ही ब्रह्मा तथा रुद्र को सृष्टि उत्पत्ति एवं विनाश के लिए प्रेरित करते है । जो लोग इन तीन गुणों (सत्व, रजस, तमस) के आधार पर विष्णु, ब्रह्मा, रुद्र में भेद करते है, वह घोर अंधकार को प्राप्त करते है ।
तोप जी - वाह! फिर एक बार जनता के समक्ष आपका दोगलापन दिख गया, ये दोगलापन कहीं “परंपरा प्राप्त” तो नहीं 😂
आपने जब पहले भागवत और विष्णु पुराण के प्रमाण प्रस्तुत किए थे तब भी हमने कहा था आपके ये प्रमाण हमारे मत की सिद्धि करते है, और अब आपका गरुड पुराण का “परंपरा प्राप्त” अर्थ भी हमारे ही मत को सत्य सिद्ध कर रहा है, आशा है आपको भान होगा कि आपके ऐसा करने से आपके धंधे पर बहुत असर होगा, अब जब आपने पुराणों से ही पौराणिक मत के अनेक ईश्वरवाद का खंडन कर ही दिया है तो क्या आप उन पुराणों पर थूकेंगे?
पोप जी - भले ही हम एकेश्वरवाद मानते है लेकिन हम पुराणों पर नहीं थूकेंगे, उनपर हमारी आस्था है श्रद्धा है 🤲
पुराणों में भले ही हजार त्रुटियां हो लेकिन वो हमारे सर्वोच्च धर्मग्रंथ है, उनपर से हमारी आस्था न घटेगी न हटेगी, क्योंकि हमको नास्तिक घोषित होकर समाज से बहिष्कृत नहीं होना 😭
तोप जी - अब कुछ नहीं हो सकता, आपके शब्द हानि कर चूके, अब तो सामान्य हिन्दू समाज (जो अनेक ईश्वरवाद में आस्था रखता है) आपका बहिष्कार कर देगा, आपके पोस्टर पर जूतों की माला पहनाएगा, आपका पुतला जलाएगा, अब आपका क्या होगा पोप जी 😂
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@Pakhand_khandan
पोप -- न्याय सूत्रकार विताण्डा करने को सही मानते है जिज्ञासु केलिए इसलिए हम उसको करेंगे
Meanwhile वात्सायनमुनि --
अब सोचने वाली बात है बेचारे आदि शंकरचार्य अपने शिष्यो को तत्वज्ञान भी नहीं दे परहे है 😂 😂 उनके शिष्यो को जल्प और विताण्डा करके
पूर्वपक्ष का खंडन करना पड़ रहा है कभी कभी अद्वैतीयो पे दया आती है
Meanwhile वात्सायनमुनि --
जिनको तत्वज्ञान नहीं होता वो विताण्डा करे
अब सोचने वाली बात है बेचारे आदि शंकरचार्य अपने शिष्यो को तत्वज्ञान भी नहीं दे परहे है 😂 😂 उनके शिष्यो को जल्प और विताण्डा करके
पूर्वपक्ष का खंडन करना पड़ रहा है कभी कभी अद्वैतीयो पे दया आती है
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बौद्ध धम्म में कमाल के Medicine सर्प विष चिकित्सा के लिए 💀💀
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𝗝𝗢𝗜𝗡👉 @PuranPravachan
पहले इस्तेमाल करें फिर विश्वास करें
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𝗝𝗢𝗜𝗡👉 @PuranPravachan
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