पुराण प्रवचन
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हमारे पुराण ही हमारे धर्म के धरोहर है इसके ज्ञान को हमारे साथ पढ़ें और फैलाएं 🙏❤️
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यह राजकुमारी टट्टी बोल रहा हमारे किसी भी धर्म ग्रंथों में "सनातन धर्म" शब्द नहीं हैं ये बस बौद्धों के ग्रंथों में आता है

लगता है इस अनपढ़ ने कभी कोई अध्ययन नहीं किया 🤣 बस भौंकना आता है इसे

सनातन धर्म शब्द तो हमारे ५ वी शताब्दी के माधव वर्मा जैसे राजा के शिलालेख तक में मिल जाता है जिसमें लिखा है -
श्रुतिस्मृती विहित सनातन धर्म कर्मनिरताय

अर्थात् - श्रुति स्मृति विहित सनातन धर्म है।

इसके अलावा हमारे ग्रंथों में -
अथर्ववेद (१०/८/२२-२३),
रामायण (४/१८/१८), महाभारत(१३/४५/२१),
रामायण (१/२५/१९), रामायण (२/१९/५२), रामायण (२/२१/४९), रामायण (२/२४/१३), रामायण (२/३०/३८), रामायण (३/४/२२)

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200 BCE के हांथीबाड़ा घोसुंडी शिलालेख और नानाघाटी शिलालेख में
वासुदेव कृष्ण (𑀯𑀸𑀲𑀼𑀤𑁂𑀯𑀸𑀪𑁆𑀬𑀁)

संकर्षण बलराम (𑀲𑀁𑀓𑀭𑁆𑀱𑀡)

नारायण (𑀦𑀸𑀭𑀸𑀬𑀡)

के नाम अभीलेख में अंकित हैं।

Source - Epigraphia Indica Vol.16
by Thomas, F.w. Page - 26

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UGC ke roolback karte karte ab hase logo ko support start oh Gaya ha jo Hinduism god ke against bole chuke ha or pher yeh same hi yt bjp ko lecture dege ki bjp left wing ko apne ander lha rhi ha
Condemnation of Violence against Hindu Processions: In April 2022, Priyanka Chaturvedi condemned violence during a Hanuman Jayanti procession in Jahangirpuri, Delhi. She described the "violent reactions to yatras" as "saddening" and questioned why processions carried out by Hindus on festivals were not allowed to happen in peace.
On Freedom of Expression: Regarding the "Kaali" poster row in 2022, she stated that "Freedom of expression cannot be reserved for Hindu Gods".
Yeh statement dhi ha Hise sherni ne dekh lo
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शांतिदेव एक बौद्ध दार्शनिक है न्याय-वैशेषिक और सांख्य की आत्मा/पुरुष के खंडन का नाकाम प्रयास किया और हम आज उसके कुतर्कों का खंडन करेंगे |

Part 1

कुतर्क: शांतिदेव के अनुसार जो अजन्मा है उसका अस्तित्व संभव नही |

खंडन: अब अगर इसकी की बुद्धि चली होती तो पता लगता की इसको अपने इस सिद्धांत को खुद जन्मा मानना होगा और अगर इसका यह सिद्धांत खुद जन्मा हो जायेगा तो जब इसका सिद्धांत का जन्म नही हुआ था तब तो आत्मा का अजन्मा होना और अस्तित्व मे होना खंडित नही हुआ और जब इसके सिद्धांत का जन्म हो गया तो आत्मा तो पहले से थी तो आत्मा की नष्ट नही होगी क्योंकि कभी जन्मी नही |

शांतिदेव जैसे बाकी बौद्ध दार्शनिक भी स्वसिद्धांत हानि के अलावा कुछ नही करते थे |

ओ३म् 🙏


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Part 2
आक्षेप: फिर आगे कहता है की अगर आत्मा को कुछ ज्ञान हुआ तो आत्मा मे परिवर्तन आ गया और आगे इसपे बकलोली करी, पर क्या सच मे ऐसा होता है? नहीं

खंडन:
मान लो एक घड़ा अनादि है तो जब उस घड़े मे पानी डालते है तो क्या घड़े का मूल स्वरूप बदल जाता है? नहीं , वह वही घड़ा रहेगा |

मान लो क्या पौधे मे फूल उगने से पौधे का मूल स्वरूप बदल जाता है? नहीं , वह वही पौधा रहेगा |

मान लो एक battery अनादि है तो क्या उस battery को chaarge करने से बैटरी का मूल स्वरूप बदल जाता है? नहीं वह वही battery रहेगी |

क्योंकि जिस कारण से घड़े को घड़ा ,जिस पौधे को पौधा और जिस battery को battery कह रहे है उसमे कोई परिवर्तन नही आया, उस ही प्रकार आत्मा/पुरुष को जिस कारण से हम आत्मा/पुरुष कह रहे है उसका कारण यह नहीं की उसको फलाने पदार्थ का ज्ञान है या फलानी चीज का ज्ञान है, आत्मा/पुरुष को उसकी चेतना , ज्ञान ग्रहण करने वाला है, इसलिए आत्मा/पुरुष अनादि है और नित्य है कभी परिवर्तित नही होता |

ओ३म् 🙏

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Part 3
आक्षेप: फिर आगे कहता है की न्याय-वैशेषिक की आत्मा चेतन नही होती है मन से संयोग के बिना 😭🤣
और जब मन और इंद्रियों का संयोग होता है तो चेतन कैसे हो जाती है? मन और इंद्रियाँ ऐसा क्या करती है आत्मा का?

खंडन: सबसे पहले तो ये एक मूर्खता है की न्याय-वैशेषिक आत्मा चेतन नही होती मन से संयोग से पहले , ऐसा न्याय और वैशेषिक दर्शन मे कहीं नही लिखा |

अब जो प्रश्न है की आत्मा का मन आदि से संयोग होने पर मन आदि ऐसा क्या करते है की आत्मा की चेतना व्यक्त हो जाती है

तो जैसा की हम प्रत्यक्ष करते हैं की जिस प्रकार सूर्य के पृथ्वी आदि ग्रहों से संयोग होने से ही उसका गुरुत्वाकर्षण व्यक्त होता है और हमे उसके द्रव्यमान(mass) का ज्ञान होता है हमे |
वैसे ही आत्मा का मन, बुद्धि अहंकार , सुक्षमेंद्रियाँ और फिर स्थूलेंद्रियां और स्थूल शरीर द्वारा संयोग होने से ही उसकी चेतना व्यक्त होती है और फिर हमे उसके चेतन होने का ज्ञान होता है |

ओ३म् 🙏


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Spitzar Manuscript में महाभारत का प्रमाण

चीन से प्राप्त Spitzar Manuscript जो लगभग 100 BCE - 100 CE प्राचीन है उसमें आया है महाभारत के कुछ पर्वों के नाम जैसे कि-
शांति पर्व और अश्वमेधिक पर्व

तथा उसके नीचे लिखा है -
यादवानाम् और कौरवानाम्

(दोनों शब्द षष्ठी विभक्ति बहुवचन में आया है)

जो भगवान् श्री कृष्ण के यादव वंश और पांडव आदि के कौरव वंश को सूचित करता है।
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दक्ष प्रजापति के नक्षत्र रूपी पुत्रियां।

मैत्रायणी संहिता (२/२/७) में एक आख्यान आता है कि -
प्रजापति ने अपने पुत्री नक्षत्रों का विवाह सोम राजा या चंद्र के साथ कर दिया लेकिन चन्द्र उनमें से केवल रोहिणी नक्षत्र को ही अधिक प्रेम करते थे इसलिए अन्य नक्षत्रों ने अपने पिता को इस दोष के विषय में कहा। प्रजापति के समझाने पर भी चन्द्रमा का व्यवहार बदला नहीं इसलिए प्रजापति ने उसको राजयक्ष्मा होने के श्राप दे दिया जिसके कारण वो क्षीण होने लगा तथा इस प्रकार चंद्रमा में चंद्र कला ह्रास और वृद्धि सृष्टि हुई।
यह आख्यान भी महाभारत (शल्यपर्व ३५) में भी मिलता है -
जहां प्रजापति यहां दक्ष प्रजापति ही है जिसके २७ पुत्रियां ही २७ नक्षत्र है और चन्द्रमा उन नक्षत्रों के अधिपति हैं।

इसी प्रकार ऐतरेय ब्राह्मण (३/३३) में भी आता है कि -
प्रजापति अपने पुत्री रोहिणी नक्षत्र पर मोहित हो गए थे इसके दंड रूप रुद्र रूपी आद्रा नक्षत्र ने उन्हें त्रिकांड वाण से मारा और उसी प्रजापति को हम आकाश में मृगशिरा नक्षत्र के नाम से जानते हैं जो प्रजापति के नक्षत्र है।

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✨कुषाण कालीन बॅक्ट्रिया में भगवान शिव (तीसरी शताब्दी ई.)✨

यह दुर्लभ कुषाणकालीन (लगभग तीसरी शताब्दी ई.) टेराकोटा पैनल भगवान शिव को दर्शाता है। इसमें देवता को त्रिशूल धारण किए, चार भुजाओं और तीन मुखों (तीसरी आँख सहित) के साथ दिखाया गया है तथा वे पशुचर्म और हल्का वस्त्र पहने हुए हैं। यह रचना भारतीय धार्मिक प्रतीकों, ईरानी द्वि-आकृतिक संरचना और यूनानी-रोमन प्राकृतिक शैली का सुंदर मिश्रण प्रस्तुत करती है। यह पैनल संभवतः किसी मंदिर या पारिवारिक तीर्थस्थल की दीवार पर स्थापित था और कुषाण साम्राज्य की बहुसांस्कृतिक कला परंपरा का उत्कृष्ट उदाहरण है।
Source- https://www.metmuseum.org/art/collection/search/327832

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प्रत्येक मनुष्य को पंच महायज्ञ अवश्य करने चाहिए...!!!
महर्षि मनु सबके है... और सबके लिए है...

जय मनुवाद 💪💪
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वैतरणी नदी एक कल्पना

इस पोस्ट के माध्यम से आपने जाना गरुड पुराण में वर्णित वैतरणी नदी केवल एक गप्प है उससे अधिक कुछ नहीं, क्योंकि आर्ष (वेदानुकूल परतः प्रमाण) ग्रंथों से यह सिद्ध होता है की कोई भी पदार्थ मरे हुए पितरों तक नहीं पहूंचता, किन्तु इन जैसे पोप जी के घर, उदर में अवश्य पहुंचता है 😂

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