क्या बुद्ध मूलनिवासी थे या विदेशी ?
अक्सर नव बौद्ध बोलते हैं कि राम जी और कृष्ण जी या तो काल्पनिक है या तो विदेशी है मनुवादी बाहर से आए।
तो इनके जो बुद्ध है वो कौनसे वंश के थे ?
संयुत्तनिकाय (८/७) में बुद्ध को स्पष्ट
और राम जी भी सूर्यवंशी ही थे जो मनु जी के ही वंश था।
इसी सूत्त का तुर्किस्तान में पांडुलिपि भी प्राप्त हुआ है। जिसमें लिखा है -
इसी प्रकार ८ वी शताब्दी के मैत्रेयसमितिनका के पांडुलिपि में भी बुद्ध को बोला गया -
अगर मनु, राम जी आदि सूर्यवंशी राजा इनके हिसाब से विदेशी है तो बुद्ध भी सूर्यवंशी होने से विदेशी सिद्ध हो गए।
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अक्सर नव बौद्ध बोलते हैं कि राम जी और कृष्ण जी या तो काल्पनिक है या तो विदेशी है मनुवादी बाहर से आए।
तो इनके जो बुद्ध है वो कौनसे वंश के थे ?
संयुत्तनिकाय (८/७) में बुद्ध को स्पष्ट
"आदिच्चबन्धुनं" कहा गया है जिसका अर्थ होता है सूर्यवंश में उत्पन्न बुद्ध।
और राम जी भी सूर्यवंशी ही थे जो मनु जी के ही वंश था।
इसी सूत्त का तुर्किस्तान में पांडुलिपि भी प्राप्त हुआ है। जिसमें लिखा है -
वन्दे त्वादित्य बान्धवम्
अर्थात् - सूर्यवंशी (बुद्ध) को नमन
इसी प्रकार ८ वी शताब्दी के मैत्रेयसमितिनका के पांडुलिपि में भी बुद्ध को बोला गया -
चक्रवर्षि इक्ष्वाकुय्सर्कशगौतमकोत्र
अर्थात् - चक्रवर्ती इक्ष्वाकु वंशी और गौतम गोत्र में उत्पन्न।
अगर मनु, राम जी आदि सूर्यवंशी राजा इनके हिसाब से विदेशी है तो बुद्ध भी सूर्यवंशी होने से विदेशी सिद्ध हो गए।
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महाभारत में शूद्र का भी कर्म से राजा बनने का अधिकार।
महाभारत (शांतिपर्व) में युधिष्ठिर जी प्रश्न करते हैं भीष्म जी से की -
इस पर भीष्म जी उत्तर देते हैं -
आगे भीष्म जी फिर बोलते हैं -
अर्थात् राजा केवल क्षेत्रीय ही बने ऐसा नहीं है बल्कि किसी ऐसे व्यक्ति को ही राजा बनाना चाहिए जो भले ही क्षेत्रीय कुलसे भिन्न हो पर वो रक्षा करने में समर्थ हो चाहे ब्राह्मण हो, वैश्य हो या शूद्र ही क्यों न हो।
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महाभारत (शांतिपर्व) में युधिष्ठिर जी प्रश्न करते हैं भीष्म जी से की -
मानलो कि अगर क्षेत्रीय प्रजा के रक्षा न कर पाए ऐसे स्थिति में अगर कोई व्यक्ति चाहे ब्राह्मण, वैश्य या शूद्र हो शस्त्र धारण कर प्रजा का रक्षा करें तो क्या वह राज्यशासन कर सकता है?
इस पर भीष्म जी उत्तर देते हैं -
विपत्ति काल में जो भी रक्षा करे चाहे वो शूद्र ही क्यों न हो सदा सम्मान का पात्र होता है।
ऐसे ब्राह्मण का क्या लाभ जो अनपढ़ है ऐसे राजा का क्या लाभ जो रक्षा न कर पाए दोनों ही निरर्थक है।
आगे भीष्म जी फिर बोलते हैं -
जो सदा सत्पुरुषोंकी रक्षा करे तथा दुष्टोंको दण्ड देकर दुष्कर्म करनेसे रोके, उसे ही राजा बनाना चाहिये; क्योंकि उसीके द्वारा यह सम्पूर्ण जगत् सुरक्षित होता है।
अर्थात् राजा केवल क्षेत्रीय ही बने ऐसा नहीं है बल्कि किसी ऐसे व्यक्ति को ही राजा बनाना चाहिए जो भले ही क्षेत्रीय कुलसे भिन्न हो पर वो रक्षा करने में समर्थ हो चाहे ब्राह्मण हो, वैश्य हो या शूद्र ही क्यों न हो।
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Forwarded from ࿗ HISTORY OF ARYAVART ࿗
✨वेद में सामाजिक विविधता: पिता वैद्य, पुत्र ऋषि✨
एक प्रचलित भ्रम है कि वेदों में जन्म के आधार पर जाति और कर्म निश्चित किए गए हैं। ब्राह्मण का पुत्र स्वतः ब्राह्मण होगा—ऐसी मान्यता वेदों में नहीं मिलती, बल्कि यह बाद की सामाजिक व्याख्याओं का परिणाम है।
वैदिक काल में जाति एक वंशानुगत (जन्म से तय) व्यवस्था नहीं थी। उस समय चिकित्सा जैसी “हीलिंग आर्ट्स” इतनी महत्वपूर्ण हो चुकी थीं कि परिवारों के अलग-अलग सदस्य अलग पेशे अपनाते थे। ऋग्वेद की सरल और सुंदर शैली में एक ऋषि स्वयं कहता है—
“मैं मंत्रों की रचना करता हूँ, मेरे पिता चिकित्सक हैं और मेरी माता चक्की पर अनाज पीसती हैं; हम सब अलग-अलग कार्यों में लगे हैं।
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एक प्रचलित भ्रम है कि वेदों में जन्म के आधार पर जाति और कर्म निश्चित किए गए हैं। ब्राह्मण का पुत्र स्वतः ब्राह्मण होगा—ऐसी मान्यता वेदों में नहीं मिलती, बल्कि यह बाद की सामाजिक व्याख्याओं का परिणाम है।
वैदिक काल में जाति एक वंशानुगत (जन्म से तय) व्यवस्था नहीं थी। उस समय चिकित्सा जैसी “हीलिंग आर्ट्स” इतनी महत्वपूर्ण हो चुकी थीं कि परिवारों के अलग-अलग सदस्य अलग पेशे अपनाते थे। ऋग्वेद की सरल और सुंदर शैली में एक ऋषि स्वयं कहता है—
“मैं मंत्रों की रचना करता हूँ, मेरे पिता चिकित्सक हैं और मेरी माता चक्की पर अनाज पीसती हैं; हम सब अलग-अलग कार्यों में लगे हैं।
Source- A HISTORY OF HINDU CHEMISTRY FROM THE EARLIEST TIMES TO THE MIDDLE OF THE SIXTEENTH CENTURY A.D. with SANSKRIT TEXTS, VARIANTS, TRANSLATION AND ILLUSTRATIONS BY PRAPHULLA CHANDRA RAY,
VOL. I
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गटर का ढक्कन चुरा के करते क्या होंगे यह लोग थाली बना के खाना खाते हैं क्या उसमें 🤣
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क्या अंगुत्तरनिकाय (1/279) क्या किसी प्राचीन पाठ में नहीं है?
मेरा बच्चा प्रिंस केवल sutta central देख के बोल रहा है कि की यह तो और कहीं प्राचीन ग्रंथ में नहीं मिलता😭
मेरे बेटे 5 वी शताब्दी के श्रीलंका के बौद्धाचार्य बुद्धघोष ने अंगुत्तरनिकाय पर भाष्य लिखा है उसमें यह सुत्त को उन्होंने उद्धृत कर के भाष्य किया है 😂😂 जिसमें वो उसी सुत्त को उद्धृत कर के लिखते हैं -
😂😂
इसी प्रकार मझीम निकाय पर भी श्रीलंका के बुद्धघोष ने जो टिका लिखा था उसमें भी उन्होंने
वैसे त्रिपिटक का सबसे प्राचीन लेखन ही श्रीलंका से शुरू हुआ था जहां के आचार्यों के भाष्य में ही हमे यह सब मिल जाता है 😂😂
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मेरा बच्चा प्रिंस केवल sutta central देख के बोल रहा है कि की यह तो और कहीं प्राचीन ग्रंथ में नहीं मिलता😭
मेरे बेटे 5 वी शताब्दी के श्रीलंका के बौद्धाचार्य बुद्धघोष ने अंगुत्तरनिकाय पर भाष्य लिखा है उसमें यह सुत्त को उन्होंने उद्धृत कर के भाष्य किया है 😂😂 जिसमें वो उसी सुत्त को उद्धृत कर के लिखते हैं -
स्त्रियों का बुद्ध बनना असंभव है केवल पुरुष ही बुद्ध बन सकता है
😂😂
इसी प्रकार मझीम निकाय पर भी श्रीलंका के बुद्धघोष ने जो टिका लिखा था उसमें भी उन्होंने
स्त्री का बुद्ध होना निषेध का बुद्ध वचन उद्धृत किया है 😂😂
वैसे त्रिपिटक का सबसे प्राचीन लेखन ही श्रीलंका से शुरू हुआ था जहां के आचार्यों के भाष्य में ही हमे यह सब मिल जाता है 😂😂
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कालीगोधा सुत्त निकला मिलावट😭
जब हम त्रिपिटक से यह दिखाते थे कि बेटा स्त्रियों को बुद्ध बनने का अधिकार नहीं है
तो यह भिखारी हमे कालीगोधा सुत्त दिखाता था जिसमें गोधा को संबोधी परायण कहा गया है।
लेकिन अफसोस मेरे बेटे "कालीगोधा सुत्त" सिर्फ चीनी आगम में मिल रहा है।
अब तेरे ही पोस्ट के अनुसार तेरा ही दिखाया गया सुत्त बाद का जोड़ा हुआ प्रक्षेप सिद्ध हो गया 💀💀
जब हम त्रिपिटक से यह दिखाते थे कि बेटा स्त्रियों को बुद्ध बनने का अधिकार नहीं है
तो यह भिखारी हमे कालीगोधा सुत्त दिखाता था जिसमें गोधा को संबोधी परायण कहा गया है।
लेकिन अफसोस मेरे बेटे "कालीगोधा सुत्त" सिर्फ चीनी आगम में मिल रहा है।
अब तेरे ही पोस्ट के अनुसार तेरा ही दिखाया गया सुत्त बाद का जोड़ा हुआ प्रक्षेप सिद्ध हो गया 💀💀
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पुराण प्रवचन
कालीगोधा सुत्त निकला मिलावट😭 जब हम त्रिपिटक से यह दिखाते थे कि बेटा स्त्रियों को बुद्ध बनने का अधिकार नहीं है तो यह भिखारी हमे कालीगोधा सुत्त दिखाता था जिसमें गोधा को संबोधी परायण कहा गया है। लेकिन अफसोस मेरे बेटे "कालीगोधा सुत्त" सिर्फ चीनी आगम में मिल…
मतलब जिस सुत्त से हम सिद्ध किए थे कि बुद्ध धम्म में स्त्रियों को बुद्ध बन ने का कोई अधिकार नहीं वो तो 5 वी शताब्दी के प्राचीन बुद्धघोष तक ने उद्धृत किया था।
लेकिन यह गधा जो सुत्त दिया था जिसमें स्त्री को संबोधी परायण बोला गया था वो ही बाद का जोड़ा हुआ मिलावट सिद्ध हो गया।
वो भी इसी के Sutta Central Website और इसी के स्कॉलर के पोस्ट से 😭😭
लेकिन यह गधा जो सुत्त दिया था जिसमें स्त्री को संबोधी परायण बोला गया था वो ही बाद का जोड़ा हुआ मिलावट सिद्ध हो गया।
वो भी इसी के Sutta Central Website और इसी के स्कॉलर के पोस्ट से 😭😭
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क्या कांबोज सूत्त (AN 4/80) किसी प्राचीन पाठ में नहीं मिलता।
एक मुतिया भिक्षु अपने पोस्ट में सिर्फ Sutta Central website के दम पे यह दावा कर दिया कि "कांबोज सूत्त" किसी प्राचीन पाठ में नहीं मिलता।
लेकिन श्रीलंका के ५ वी शताब्दी के प्राचीन बौद्धाचार्य बुद्धघोष ने अपने अंगुत्तरनिकाय के भाष्य "मनोरथपुराणी" में इसी "कांबोज सूत्त" पर टिका लिखा है।
जिसमें वो स्त्रियों के बुद्धि के लिए लिखते हैं -
तात्पर्य यही है कि स्त्रियां मूर्ख होती हैं उनको कोई नैतिक ज्ञान नहीं होता है।
अब बुद्धघोष तो ५ वी सदी के आचार्य थे वो भी श्रीलंका के और अगर उन्होंने अपने भाष्य में ही इस "कांबोज सूत्त" पर भाष्य लिखा है तो इससे सिद्ध होता है कि ५ वी सदी से पहले भी त्रिपिटक में यह सूत्त था।
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𝗝𝗢𝗜𝗡👉 @PuranPravachan
एक मुतिया भिक्षु अपने पोस्ट में सिर्फ Sutta Central website के दम पे यह दावा कर दिया कि "कांबोज सूत्त" किसी प्राचीन पाठ में नहीं मिलता।
लेकिन श्रीलंका के ५ वी शताब्दी के प्राचीन बौद्धाचार्य बुद्धघोष ने अपने अंगुत्तरनिकाय के भाष्य "मनोरथपुराणी" में इसी "कांबोज सूत्त" पर टिका लिखा है।
जिसमें वो स्त्रियों के बुद्धि के लिए लिखते हैं -
atthānattham na jānāti
अर्थात् - स्त्रियां अच्छा बुरा, उचित अनुचित, लाभ हानि आदि कुछ नहीं जानती हैं।
तात्पर्य यही है कि स्त्रियां मूर्ख होती हैं उनको कोई नैतिक ज्ञान नहीं होता है।
अब बुद्धघोष तो ५ वी सदी के आचार्य थे वो भी श्रीलंका के और अगर उन्होंने अपने भाष्य में ही इस "कांबोज सूत्त" पर भाष्य लिखा है तो इससे सिद्ध होता है कि ५ वी सदी से पहले भी त्रिपिटक में यह सूत्त था।
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और एक बात जो इस मुतिया ने कहा कि चीनी आगम में नहीं मिल रहा तो 1st Century BCE से पहले का नहीं होगा।
बेटा जिस 4-5th century AD के चीनी आगम और उसके अनुवाद होने शुरू हुए थे न उसी के समकालीन भाष्य तब बुद्धघोष के भी हैं जो कि 4-5th century AD के हैं।
फिर तू किस मुंह से बोल रहा कि चीनी आगम में नहीं होगा तो प्रामाणिक नहीं है क्यों कि चीनी आगम के ही समकालीन प्रमाण हमे बुद्धघोष के टिका से मिल जाता है।
जब चीनी आगम अनुवाद के ही समकालीन प्रमाण मौजूद है तो यह बात ही खत्म हो जाता है फिर 😂🤣🤣
बेटा जिस 4-5th century AD के चीनी आगम और उसके अनुवाद होने शुरू हुए थे न उसी के समकालीन भाष्य तब बुद्धघोष के भी हैं जो कि 4-5th century AD के हैं।
फिर तू किस मुंह से बोल रहा कि चीनी आगम में नहीं होगा तो प्रामाणिक नहीं है क्यों कि चीनी आगम के ही समकालीन प्रमाण हमे बुद्धघोष के टिका से मिल जाता है।
जब चीनी आगम अनुवाद के ही समकालीन प्रमाण मौजूद है तो यह बात ही खत्म हो जाता है फिर 😂🤣🤣
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पुराण प्रवचन
और एक बात जो इस मुतिया ने कहा कि चीनी आगम में नहीं मिल रहा तो 1st Century BCE से पहले का नहीं होगा। बेटा जिस 4-5th century AD के चीनी आगम और उसके अनुवाद होने शुरू हुए थे न उसी के समकालीन भाष्य तब बुद्धघोष के भी हैं जो कि 4-5th century AD के हैं। फिर तू किस…
बेटा जब बुद्धघोष भी उसी समय के है जब चीनी आगम और उसके अनुवाद आदि होना शुरू हुआ था तो इस बात का प्रमाण क्या है कि जो बुद्धघोष ने जो सूत्त को उद्धृत किया उसी चीनी आगम के अनुवाद के समकालीन वो 1 st century BCE के पहले नहीं होगी।
प्रमाण क्या है इसका?
क्यों कि उस सूत्त का प्रमाण तो उसी चीनी आगम के समकालीन भी मिल जा रहा है
Probably नहीं चलेगा बेटा प्रमाण ला 🤣🤣
प्रमाण क्या है इसका?
क्यों कि उस सूत्त का प्रमाण तो उसी चीनी आगम के समकालीन भी मिल जा रहा है
Probably नहीं चलेगा बेटा प्रमाण ला 🤣🤣
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