पुराण प्रवचन
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क्या अंगुत्तरनिकाय (1/279) क्या किसी प्राचीन पाठ में नहीं है?

मेरा बच्चा प्रिंस केवल sutta central देख के बोल रहा है कि की यह तो और कहीं प्राचीन ग्रंथ में नहीं मिलता😭

मेरे बेटे 5 वी शताब्दी के श्रीलंका के बौद्धाचार्य बुद्धघोष ने अंगुत्तरनिकाय पर भाष्य लिखा है उसमें यह सुत्त को उन्होंने उद्धृत कर के भाष्य किया है 😂😂 जिसमें वो उसी सुत्त को उद्धृत कर के लिखते हैं -
स्त्रियों का बुद्ध बनना असंभव है केवल पुरुष ही बुद्ध बन सकता है

😂😂
इसी प्रकार मझीम निकाय पर भी श्रीलंका के बुद्धघोष ने जो टिका लिखा था उसमें भी उन्होंने
स्त्री का बुद्ध होना निषेध का बुद्ध वचन उद्धृत किया है 😂😂

वैसे त्रिपिटक का सबसे प्राचीन लेखन ही श्रीलंका से शुरू हुआ था जहां के आचार्यों के भाष्य में ही हमे यह सब मिल जाता है 😂😂
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कालीगोधा सुत्त निकला मिलावट😭

जब हम त्रिपिटक से यह दिखाते थे कि बेटा स्त्रियों को बुद्ध बनने का अधिकार नहीं है

तो यह भिखारी हमे कालीगोधा सुत्त दिखाता था जिसमें गोधा को संबोधी परायण कहा गया है।

लेकिन अफसोस मेरे बेटे "कालीगोधा सुत्त" सिर्फ चीनी आगम में मिल रहा है।

अब तेरे ही पोस्ट के अनुसार तेरा ही दिखाया गया सुत्त बाद का जोड़ा हुआ प्रक्षेप सिद्ध हो गया 💀💀
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पुराण प्रवचन
कालीगोधा सुत्त निकला मिलावट😭 जब हम त्रिपिटक से यह दिखाते थे कि बेटा स्त्रियों को बुद्ध बनने का अधिकार नहीं है तो यह भिखारी हमे कालीगोधा सुत्त दिखाता था जिसमें गोधा को संबोधी परायण कहा गया है। लेकिन अफसोस मेरे बेटे "कालीगोधा सुत्त" सिर्फ चीनी आगम में मिल…
मतलब जिस सुत्त से हम सिद्ध किए थे कि बुद्ध धम्म में स्त्रियों को बुद्ध बन ने का कोई अधिकार नहीं वो तो 5 वी शताब्दी के प्राचीन बुद्धघोष तक ने उद्धृत किया था।

लेकिन यह गधा जो सुत्त दिया था जिसमें स्त्री को संबोधी परायण बोला गया था वो ही बाद का जोड़ा हुआ मिलावट सिद्ध हो गया।

वो भी इसी के Sutta Central Website और इसी के स्कॉलर के पोस्ट से 😭😭
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क्या कांबोज सूत्त (AN 4/80) किसी प्राचीन पाठ में नहीं मिलता।

एक मुतिया भिक्षु अपने पोस्ट में सिर्फ Sutta Central website के दम पे यह दावा कर दिया कि "कांबोज सूत्त" किसी प्राचीन पाठ में नहीं मिलता।

लेकिन श्रीलंका के ५ वी शताब्दी के प्राचीन बौद्धाचार्य बुद्धघोष ने अपने अंगुत्तरनिकाय के भाष्य "मनोरथपुराणी" में इसी "कांबोज सूत्त" पर टिका लिखा है।

जिसमें वो स्त्रियों के बुद्धि के लिए लिखते हैं -
atthānattham na jānāti

अर्थात् - स्त्रियां अच्छा बुरा, उचित अनुचित, लाभ हानि आदि कुछ नहीं जानती हैं।

तात्पर्य यही है कि स्त्रियां मूर्ख होती हैं उनको कोई नैतिक ज्ञान नहीं होता है।

अब बुद्धघोष तो ५ वी सदी के आचार्य थे वो भी श्रीलंका के और अगर उन्होंने अपने भाष्य में ही इस "कांबोज सूत्त" पर भाष्य लिखा है तो इससे सिद्ध होता है कि ५ वी सदी से पहले भी त्रिपिटक में यह सूत्त था।
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मेरे लला यहां Probably क्यों लिखा है बे !?😂😂 तेरा scholar तो खुद confident है ही नहीं बस संभावना जता रहा है 🤣🤣

और संभावना से कुछ प्रमाणित नहीं होता ।

और बेटा Kajiyama Yuichi तो scholar है पर यह जो Hae Ju-Sunim है यह तो कोई historian भी नहीं है।

फिर किस आधार पर प्रमाण माने 😂😂
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और एक बात जो इस मुतिया ने कहा कि चीनी आगम में नहीं मिल रहा तो 1st Century BCE से पहले का नहीं होगा।

बेटा जिस 4-5th century AD के चीनी आगम और उसके अनुवाद होने शुरू हुए थे न उसी के समकालीन भाष्य तब बुद्धघोष के भी हैं जो कि 4-5th century AD के हैं।

फिर तू किस मुंह से बोल रहा कि चीनी आगम में नहीं होगा तो प्रामाणिक नहीं है क्यों कि चीनी आगम के ही समकालीन प्रमाण हमे बुद्धघोष के टिका से मिल जाता है।

जब चीनी आगम अनुवाद के ही समकालीन प्रमाण मौजूद है तो यह बात ही खत्म हो जाता है फिर 😂🤣🤣
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पुराण प्रवचन
और एक बात जो इस मुतिया ने कहा कि चीनी आगम में नहीं मिल रहा तो 1st Century BCE से पहले का नहीं होगा। बेटा जिस 4-5th century AD के चीनी आगम और उसके अनुवाद होने शुरू हुए थे न उसी के समकालीन भाष्य तब बुद्धघोष के भी हैं जो कि 4-5th century AD के हैं। फिर तू किस…
बेटा जब बुद्धघोष भी उसी समय के है जब चीनी आगम और उसके अनुवाद आदि होना शुरू हुआ था तो इस बात का प्रमाण क्या है कि जो बुद्धघोष ने जो सूत्त को उद्धृत किया उसी चीनी आगम के अनुवाद के समकालीन वो 1 st century BCE के पहले नहीं होगी।

प्रमाण क्या है इसका?

क्यों कि उस सूत्त का प्रमाण तो उसी चीनी आगम के समकालीन भी मिल जा रहा है

Probably नहीं चलेगा बेटा प्रमाण ला
🤣🤣
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अब अगर इसके स्कॉलर के बात माने की जो प्राचीन पाली पाठ और चीनी आगम अनुवाद दोनों पाठों में मौजूद होगा वो पहली बौद्ध संगति के पहले का है।

तो मैथुनधम्म का भी हमे पाली पाठ में , चीनी आगम के अनुवाद पाठ में तथा इसका तो संस्कृत में भी पाठ मिलता है। इतना ही नहीं लगभग 60 parallels in Ancient text इसका मिलता है।

बता दें मैथुनधम्म में ही बुद्ध बताता है कि -
अगर कोई भिक्षु किसी छोटी बच्ची का बलात्कार कर उसको मार दे तो वो संघ से निष्कासन के लिए कोई बड़ी अपराध नहीं है उसे बस कुछ दिन के लिए निलंबन किया जा सकता है।

तो फिर मैथुनधम्म सुत्त भी प्रामाणिक सिद्ध हुआ इसके लिए 😂😂
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    𝗝𝗢𝗜𝗡👉 @PuranPravachan
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क्या कान्हासप्प सूत्त (AN 5/229-230) का प्राचीन पाठ नहीं मिलता ?

अंगुत्तरनिकाय (५/२२९-२३०) जिसको "कान्हासप्प सूत्त" भी कहा जाता है और "प्रथम कान्हासप्प सूत्त" और "द्वितीय कान्हासप्प सूत्त" में विभक्त है।

इसका प्राचीन उल्लेख हमे 4-5 वी शताब्दी के बौद्धाचार्य बुद्धघोष के भाष्य तक में मिल जाता है जिसमें -
स्त्रियों की तुलना काला सांप के साथ बुद्ध करते हैं।

अब कुछ गधे कहेंगे कि चीनी आगम के अनुवाद में नहीं है 🤣 तो बेटा श्रीलंका के परंपरा जो भारत से ही श्रीलंका में गया वही से ही चीन में त्रिपिटक पहुंचा था इसलिए ज्यादा प्रमाणिक तो श्रीलंका के पाठ ही है।

दूसरी बात जिस 4-5 सदी ईस्वी में तेरा चीनी आगम के अनुवाद हो रहा था उसी के समकालीन तो बुद्धघोष के टिका भी है। तो समकालीन होने पर इसका कोई ठोस आधार नहीं की यह सुत्त 1st BCE के पहले नहीं था।

क्यों कि जिस समय का तेरा चीनी अनुवाद है उसी समय काल का बुद्धघोष भी है 🤣
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