पुराण प्रवचन
अबे गधे अगर माता का रक्षा करना पुत्र के लिए कर्तव्य होने से पुत्र स्वतंत्र नहीं हैं तो इस दृष्टांत से ही उसी महाभारत में उसी श्लोक में जहां पति के लिए पत्नी के भी रक्षा करना कर्तव्य बोला गया। इस दृष्टांत से तो पत्नी के संदर्भ में भी पति अस्वतंत्र सिद्ध…
इन चोटियों के अनुसार पुरुष का भी पति होना चाहिए 😂 अबे स्त्री का कर्तव्य पुरुष से अधिक है इसलिए उसके लिए पति आदि का वर्णन किया जिसका जितना कर्तव्य है उसकी उतनी ही परतंत्रता बताई जाएगी
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और वैसे मनुस्मृति का यह जो श्लोक है इससे तो बाल विवाह का भी खंडन हो जा रहा।
यहां बोला जा रहा कि कुमारी अवस्था अर्थात् विवाह से पहले के या बाल्यावस्था में उसके पिता उसके रक्षक होगा।
और आगे बोला गया कि कन्या जब युवती हो जाएगी उस अवस्था में पति उसके रक्षक होगा।
अब अगर बाल्यावस्था में ही विवाह हो जाता तो यहां तो यह आना चाहिए था की बाल्य ओर यौवन दोनों अवस्था में पति रक्षक होगा
लेकिन यहां सिर्फ कन्या के युवावस्था में ही पति को रक्षक माना है बाल्य अवस्था में नहीं।
यहां बोला जा रहा कि कुमारी अवस्था अर्थात् विवाह से पहले के या बाल्यावस्था में उसके पिता उसके रक्षक होगा।
और आगे बोला गया कि कन्या जब युवती हो जाएगी उस अवस्था में पति उसके रक्षक होगा।
अब अगर बाल्यावस्था में ही विवाह हो जाता तो यहां तो यह आना चाहिए था की बाल्य ओर यौवन दोनों अवस्था में पति रक्षक होगा
लेकिन यहां सिर्फ कन्या के युवावस्था में ही पति को रक्षक माना है बाल्य अवस्था में नहीं।
और सुश्रुत संहिता ( सूत्रस्थान ३५/५०) में लिखा है की १६ वर्ष से ३० वर्ष तक के आयु को यौवन अवस्था कहा जाता है।
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क्या बाला शब्द केवल बाल्य अवस्था के लिए ही प्रयोग होता है?
एक गधा महाभारत में "बाला" शब्द देख के उछल रहा कि देखो इसमें तो बाल विवाह है।
जबकी जरूरी नहीं को "बाला" शब्द का प्रयोग सिर्फ बाल अवस्था के लिए हुआ हो क्योंकि भावात्मक दृष्टि से अपने से बड़े गुरुजन भी नव युवती को बालिका या बच्ची ऐसा बोलते थे आज भी बोलते हैं।
अब जैसे रामायण में वन गमन काल में कई जगह सीता जी को "बाला" कहा गया है। तो क्या सीता जी वन गमन काल में बाल्यावस्था में थी?
जी नहीं क्यों कि उसी रामायण में सीता जी को वन गमन से पहले "तरुणी श्यामा" भी कहा गया है जिसका अर्थ होता है मध्य यौवनावस्था।
अब देखिए सीता जी को तरुणी भी बोला गया है साथ ही बाला भी बोला गया है।
जो यह सिद्ध करता है कि "बाला" शब्द का प्रयोग तो मध्य युवावस्था के स्त्री के लिए भी प्रयोग हो सकता है।
एक गधा महाभारत में "बाला" शब्द देख के उछल रहा कि देखो इसमें तो बाल विवाह है।
जबकी जरूरी नहीं को "बाला" शब्द का प्रयोग सिर्फ बाल अवस्था के लिए हुआ हो क्योंकि भावात्मक दृष्टि से अपने से बड़े गुरुजन भी नव युवती को बालिका या बच्ची ऐसा बोलते थे आज भी बोलते हैं।
अब जैसे रामायण में वन गमन काल में कई जगह सीता जी को "बाला" कहा गया है। तो क्या सीता जी वन गमन काल में बाल्यावस्था में थी?
जी नहीं क्यों कि उसी रामायण में सीता जी को वन गमन से पहले "तरुणी श्यामा" भी कहा गया है जिसका अर्थ होता है मध्य यौवनावस्था।
अब देखिए सीता जी को तरुणी भी बोला गया है साथ ही बाला भी बोला गया है।
जो यह सिद्ध करता है कि "बाला" शब्द का प्रयोग तो मध्य युवावस्था के स्त्री के लिए भी प्रयोग हो सकता है।
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क्या अभिमन्यु पत्नी उत्तरा का बाल विवाह हुआ था।
एक गधा है जो महाभारत के स्त्रीपर्व से दिखा रहा जहां अभिमन्यु के पत्नी उत्तरा को "बाला" बोला गया है और उस आधार पर वो बालविवाह बोल रहा।
जब की विराट पर्व में अभिमन्यु और उत्तरा के विवाह का प्रकरण आया है वहां अर्जुन ही उत्तरा के आयु अवस्था के लिए बोलते हैं -
अर्थात् - है राजन ! आप के पुत्री उत्तरा युवावस्था में आ चुकी हैं।
और नीलकंठ टिकाकार ने भी अपने टिका में वयःस्थया का अर्थ बताते हैं कि -
अर्थात् - वयःस्था का अर्थ युवावस्था प्राप्त युवती ही है।
इस से सिद्ध हुआ कि देवी उत्तरा जी विवाह काल में भी वो वयःस्था अर्थात् यौवनावस्था को प्राप्त वयस्क स्त्री हो चुकी थी न कि छोटी थी।
और जो उत्तरा को बाला बोला गया वो भावात्मक रूप से ही गांधारी ने कहा था।
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𝗝𝗢𝗜𝗡👉 @PuranPravachan
एक गधा है जो महाभारत के स्त्रीपर्व से दिखा रहा जहां अभिमन्यु के पत्नी उत्तरा को "बाला" बोला गया है और उस आधार पर वो बालविवाह बोल रहा।
जब की विराट पर्व में अभिमन्यु और उत्तरा के विवाह का प्रकरण आया है वहां अर्जुन ही उत्तरा के आयु अवस्था के लिए बोलते हैं -
वयःस्थया तया राजन्
अर्थात् - है राजन ! आप के पुत्री उत्तरा युवावस्था में आ चुकी हैं।
और नीलकंठ टिकाकार ने भी अपने टिका में वयःस्थया का अर्थ बताते हैं कि -
वय:स्था युवती
अर्थात् - वयःस्था का अर्थ युवावस्था प्राप्त युवती ही है।
इस से सिद्ध हुआ कि देवी उत्तरा जी विवाह काल में भी वो वयःस्था अर्थात् यौवनावस्था को प्राप्त वयस्क स्त्री हो चुकी थी न कि छोटी थी।
और जो उत्तरा को बाला बोला गया वो भावात्मक रूप से ही गांधारी ने कहा था।
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𝗝𝗢𝗜𝗡👉 @PuranPravachan
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अब तो ब्रह्मवैवर्त पुराण जैसे अनार्ष ग्रंथ तक में १६ वर्ष के युवती को भी बालिका बोला जा रहा है 🤣🤣
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अतीव यौवनस्थां च बालां षोडशवार्षिकीम्
Source - ब्रह्मवैवर्तपुराणम्/खण्डः २ (प्रकृतिखण्डः)/अध्यायः ६१/श्लोक ९४
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क्या अभिमन्यु और उत्तरा का बाल्यविवाह हुआ था?
इसपर हमने विस्तृत पोस्ट बना दिया है।
जिसमें हमने महाभारत काल में यौवन अवस्था में ही विवाह प्रथा सिद्ध किया है।
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𝗝𝗢𝗜𝗡👉 @PuranPravachan
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जिसमें हमने महाभारत काल में यौवन अवस्था में ही विवाह प्रथा सिद्ध किया है।
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Forwarded from ऋषि उवाच®️
🔥 Big Announcement Alert! 🔥
Dosto, get ready for something powerful & inspiring! 💥
“The Youth Session” by Krutesh Patel
at Maharshi Dayananda Saraswati Akhil Bhartiya Sanskrit Samaroh 🎓✨
📍 Organised by: Saurashtra University, Rajkot
📅 Date: 13 February 2026
⏰ Time: 3 pm to 4 pm
📌 Venue: Kala Auditorium, Department of Statistics, Saurashtra University
ये कोई normal session नहीं है…
यह youth ke liye clarity, confidence aur conviction ka session hai 💯
अगर आप Sanskrit, darshan, culture aur leadership mein interest rakhte ho —
तो यह session मिस मत करना! 🚀
अपनी energy, अपने questions और अपनी curiosity लेकर आना 🔥
क्योंकि बात होगी — youth power, vedic vision aur real-world action की।
See you there!
Let’s make it impactful 💫
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📅 Date: 13 February 2026
⏰ Time: 3 pm to 4 pm
📌 Venue: Kala Auditorium, Department of Statistics, Saurashtra University
ये कोई normal session नहीं है…
यह youth ke liye clarity, confidence aur conviction ka session hai 💯
अगर आप Sanskrit, darshan, culture aur leadership mein interest rakhte ho —
तो यह session मिस मत करना! 🚀
अपनी energy, अपने questions और अपनी curiosity लेकर आना 🔥
क्योंकि बात होगी — youth power, vedic vision aur real-world action की।
See you there!
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महाभारत (शान्तिपर्व) में आता है -
अर्थात् - तरुण अवस्था आने पर विवाह की चर्चा सुनकर ब्याह की इच्छा रखनेवाली कन्याओं के हृदय में जो आशा होती है।
इसी तरह वनपर्व में दमयंती के विवाह काल के समय भी दमयंती को बोला गया है -
अर्थात् - युवावस्था प्राप्त होने पर।
और भीम के पुत्री दमयंती जी के भी विवाह युवावस्था में ही होने का वर्णन आया है।
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𝗝𝗢𝗜𝗡👉 @PuranPravachan
प्रदानकाङ्क्षिणीनां च कन्यानां वयसि स्थिते
श्रुत्वा कथास्तथायुक्ताः साऽऽशा कृशतरी मया
अर्थात् - तरुण अवस्था आने पर विवाह की चर्चा सुनकर ब्याह की इच्छा रखनेवाली कन्याओं के हृदय में जो आशा होती है।
इसी तरह वनपर्व में दमयंती के विवाह काल के समय भी दमयंती को बोला गया है -
वयसि प्राप्ते
अर्थात् - युवावस्था प्राप्त होने पर।
और भीम के पुत्री दमयंती जी के भी विवाह युवावस्था में ही होने का वर्णन आया है।
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𝗝𝗢𝗜𝗡👉 @PuranPravachan
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