पुराण प्रवचन
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हमारे पुराण ही हमारे धर्म के धरोहर है इसके ज्ञान को हमारे साथ पढ़ें और फैलाएं 🙏❤️
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क्या अभिमन्यु पत्नी उत्तरा का बाल विवाह हुआ था।

एक गधा है जो महाभारत के स्त्रीपर्व से दिखा रहा जहां अभिमन्यु के पत्नी उत्तरा को "बाला" बोला गया है और उस आधार पर वो बालविवाह बोल रहा।

जब की विराट पर्व में अभिमन्यु और उत्तरा के विवाह का प्रकरण आया है वहां अर्जुन ही उत्तरा के आयु अवस्था के लिए बोलते हैं -
वयःस्थया तया राजन्

अर्थात् - है राजन ! आप के पुत्री उत्तरा युवावस्था में आ चुकी हैं।

और नीलकंठ टिकाकार ने भी अपने टिका में वयःस्थया का अर्थ बताते हैं कि -
वय:स्था युवती

अर्थात् - वयःस्था का अर्थ युवावस्था प्राप्त युवती ही है।

इस से सिद्ध हुआ कि देवी उत्तरा जी विवाह काल में भी वो वयःस्था अर्थात् यौवनावस्था को प्राप्त वयस्क स्त्री हो चुकी थी न कि छोटी थी।

और जो उत्तरा को बाला बोला गया वो भावात्मक रूप से ही गांधारी ने कहा था।
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अब तो ब्रह्मवैवर्त पुराण जैसे अनार्ष ग्रंथ तक में १६ वर्ष के युवती को भी बालिका बोला जा रहा है 🤣🤣

अतीव यौवनस्थां च बालां षोडशवार्षिकीम्

Source - ब्रह्मवैवर्तपुराणम्/खण्डः २ (प्रकृतिखण्डः)/अध्यायः ६१/श्लोक ९४


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क्या अभिमन्यु और उत्तरा का बाल्यविवाह हुआ था?

इसपर हमने विस्तृत पोस्ट बना दिया है।

जिसमें हमने महाभारत काल में यौवन अवस्था में ही विवाह प्रथा सिद्ध किया है।
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🔥 Big Announcement Alert! 🔥

Dosto, get ready for something powerful & inspiring! 💥

“The Youth Session” by Krutesh Patel
at Maharshi Dayananda Saraswati Akhil Bhartiya Sanskrit Samaroh 🎓✨

📍 Organised by: Saurashtra University, Rajkot
📅 Date: 13 February 2026
⏰ Time: 3 pm to 4 pm
📌 Venue: Kala Auditorium, Department of Statistics, Saurashtra University

ये कोई normal session नहीं है…
यह youth ke liye clarity, confidence aur conviction ka session hai 💯

अगर आप Sanskrit, darshan, culture aur leadership mein interest rakhte ho —
तो यह session मिस मत करना! 🚀

अपनी energy, अपने questions और अपनी curiosity लेकर आना 🔥
क्योंकि बात होगी — youth power, vedic vision aur real-world action की।

See you there!
Let’s make it impactful 💫
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महाभारत (शान्तिपर्व) में आता है -

प्रदानकाङ्क्षिणीनां च कन्यानां वयसि स्थिते
श्रुत्वा कथास्तथायुक्ताः साऽऽशा कृशतरी मया

अर्थात् - तरुण अवस्था आने पर विवाह की चर्चा सुनकर ब्याह की इच्छा रखनेवाली कन्याओं के हृदय में जो आशा होती है।

इसी तरह वनपर्व में दमयंती के विवाह काल के समय भी दमयंती को बोला गया है -
वयसि प्राप्ते

अर्थात् - युवावस्था प्राप्त होने पर।

और भीम के पुत्री दमयंती जी के भी विवाह युवावस्था में ही होने का वर्णन आया है।
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पोप जी की हुण्डी
विषय :-
क्या पोप जी को दान देने से स्वर्ग का टिकट पक्का होता है ?


नमस्ते आर्य मित्रों
इस पोस्ट के माध्यम से आपको सत्य के दर्शन होंगे, आप जानेंगे कैसे युरोप के “पोप जी” की लीला और आर्यावर्त के “पौराणिक पोप जी” की लीला में कितनी समानता है, कैसे इन दोनों ही मत वालों ने एक ही प्रकार का पाखंड रचकर जनता को ठगा, क्योंकि वे भी भली भांति जानते है मृत्यु के बाद आत्मा के साथ कुछ नहीं जाता और न ही उसके पाप क्षमा होते है, इसमें पुराणों का एक श्लोक भी है, जो कुछ इस प्रकार है ⬇️
नारद पु॰/उत्तर भाग/अ॰ २९/श्ल॰ १८

अवश्यमेव भोक्तव्यं कृतं कर्म शुभाशुभं ।
ना भुक्तं क्षीयते कर्म कल्प कोटि शतैरपि ।।

अर्थ - शुभ कर्म (पुण्य) हो या अशुभ कर्म (पाप) हो बिना उसका फल भोगे कोई भी छूट नहीं सकता अर्थात् बिना भोगे कर्म कभी नष्ट नहीं होते फिर चाहे करोड़ों जन्म ही क्यों न लेने पड़े ।
आशा है आप सब को अब समझ आ गया होगा क्यों “पोप जी” आपको शास्त्रज्ञान से वंचित रखना चाहते है

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महर्षि दयानन्द सरस्वती जी के जन्मदिन की सभी वैदिक धर्मियों को हार्दिक शुभकामनाएं 🙌

जय ऋषि दयानंद
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