This media is not supported in your browser
VIEW IN TELEGRAM
शंकराचार्य हुए तो क्या हुआ, कानून का पालन करना ही पडेगा
- योगी आदित्यनाथ जी
●▬▬▬▬🌼🌸🌼▬▬▬▬●
𝗝𝗢𝗜𝗡👉 @PuranPravachan
- योगी आदित्यनाथ जी
●▬▬▬▬🌼🌸🌼▬▬▬▬●
𝗝𝗢𝗜𝗡👉 @PuranPravachan
🔥8❤3
सुश्रुत संहिता(सूत्रस्थान ३५/१३) में आता है कि-
अर्थात् - २५ वर्ष में पुरुष और १६ वर्ष में स्त्री सम्पूर्ण यौवन अवस्था को प्राप्त कर लेते हैं।
इसी पर आचार्य दल्हण ने भाष्य में कहा कि -
●▬▬▬▬🌼🌸🌼▬▬▬▬●
𝗝𝗢𝗜𝗡👉 @PuranPravachan
पञ्चविंशे ततो वर्षे पुमान् नारी तु षोडशे
अर्थात् - २५ वर्ष में पुरुष और १६ वर्ष में स्त्री सम्पूर्ण यौवन अवस्था को प्राप्त कर लेते हैं।
इसी पर आचार्य दल्हण ने भाष्य में कहा कि -
तत्र स्त्रीश्रोणिपुरुषोरः प्रभृतीनां यौवन एव यथोक्तप्रमाणता भवति, न त्वल्पे वयसीत्याह - पश्चविंश इत्यादि । एतेन पश्चविंशे वर्षे पुरुषं समत्वागतवीर्य जानीयात्; षोडशे तु वर्षे नारीं समत्वागतवीर्या जानीयात्अर्थात् - वहाँ (शरीर के विकास के संदर्भ में), स्त्रियों के श्रोणि (Pelvis/हिप्स) और पुरुषों के वक्ष (Chest/छाती) आदि अंगों की शास्त्रोक्त पूर्ण विकास यौवन अवस्था में ही सिद्ध होती है, बाल्यावस्था में नहीं। इसी कारण यह कहा गया है कि— २५ वर्ष की आयु में पुरुष को पूर्ण वीर्य (शक्ति और पौरुष) से युक्त समझना चाहिए, और १६ वर्ष की आयु में स्त्री को पूर्ण वीर्य (प्रजनन क्षमता और शारीरिक परिपक्वता) से युक्त समझना चाहिए।"
●▬▬▬▬🌼🌸🌼▬▬▬▬●
𝗝𝗢𝗜𝗡👉 @PuranPravachan
💯7
पुराण प्रवचन
Photo
ध्यान रहे यहां संप्राप्तवीर्य अर्थात् संपूर्ण यौवन अवस्था की बात चल रहा है।
पर्याप्त यौवन मत समझ लेना पर्याप्त यौवन पुरुष और स्त्री दोनों के लिए १६ वर्ष से लिया जा सकता है जो मध्य अवस्था के प्रथम भेद वृद्धि अवस्था है।
पर्याप्त यौवन मत समझ लेना पर्याप्त यौवन पुरुष और स्त्री दोनों के लिए १६ वर्ष से लिया जा सकता है जो मध्य अवस्था के प्रथम भेद वृद्धि अवस्था है।
वैसे स्त्री के लिए १६ वर्ष को ही संप्राप्तवीर्य कहा है।
लेकिन पुरुषों के लिए २५ वर्ष संपूर्ण यौवन है उससे कम १६ से २४ तक पर्याप्त यौवन है।
❤4
महाभारत(१३/१४१/२६-२७) में भगवान शिव जी ही बोलते हैं की-
अर्थात् - परायी स्त्रीके संसर्गसे दूर रहना, धरोहर और स्त्रीकी रक्षा करना, बिना दिये किसीकी वस्तु न लेना तथा मांस और मदिरा आदि नशीले पदार्थों को त्याग देना यही धर्मके पाँच लक्षण हैं।
●▬▬▬▬🌼🌸🌼▬▬▬▬●
𝗝𝗢𝗜𝗡👉 @PuranPravachan
परदारेष्वसंसर्गो न्यासस्त्रीपरिरक्षणम् अदत्तादानविरमो मधुमांसस्य वर्जनम्।
अर्थात् - परायी स्त्रीके संसर्गसे दूर रहना, धरोहर और स्त्रीकी रक्षा करना, बिना दिये किसीकी वस्तु न लेना तथा मांस और मदिरा आदि नशीले पदार्थों को त्याग देना यही धर्मके पाँच लक्षण हैं।
●▬▬▬▬🌼🌸🌼▬▬▬▬●
𝗝𝗢𝗜𝗡👉 @PuranPravachan
🙏13❤1🔥1
Forwarded from 🔱 पाखंड खंडन 🔱
शिवलिङ्ग पूजा क्यों ?
महाशिवरात्रि के पर्व पर आप सब भविष्य पुराण से शिवलिङ्ग पूजा के सत्य इतिहास के दर्शन कीजिये ।
सब्सक्राइब करें ⬇️
@Pakhand_khandan
महाशिवरात्रि के पर्व पर आप सब भविष्य पुराण से शिवलिङ्ग पूजा के सत्य इतिहास के दर्शन कीजिये ।
पोस्ट पसंद आए, ज्ञानवर्धक लगे तो कृपया Reaction दीजिये 🙏💐🙏
सब्सक्राइब करें ⬇️
@Pakhand_khandan
दान-पुण्य करने से शूद्र भी वेदों का अध्ययन करने के योग्य हो जाता है।
केरल में आदि शंकराचार्य द्वारा रचित विधि ग्रंथ शंकरस्मृति का यह रोचक कथन है।
Credit= जिज्ञासु
●▬▬▬▬🌼🌸🌼▬▬▬▬●
𝗝𝗢𝗜𝗡👉 @PuranPravachan
केरल में आदि शंकराचार्य द्वारा रचित विधि ग्रंथ शंकरस्मृति का यह रोचक कथन है।
Credit= जिज्ञासु
●▬▬▬▬🌼🌸🌼▬▬▬▬●
𝗝𝗢𝗜𝗡👉 @PuranPravachan
This media is not supported in your browser
VIEW IN TELEGRAM
आज लोग हिन्दू क्यों नहीं बनना चाहते इसका सबसे बड़ा कारण है आज के शंकराचार्य के अंध परंपरा जो लोगों को छुआ अछूत और घरवापसी के बाद भी उन लोगों को अपवित्र बोलने पर तुले हुए हैं।
सोचिए जिनके सर्वोच्च धर्मगुरु के ही यही मनसा है कि घरवापसी न हो तो यह लोग कितने बड़े धर्म द्रोही होंगे।
इनके कथित परंपरा कितना बड़ा हानि पहुंचा सकता है हिन्दू समाज को
●▬▬▬▬🌼🌸🌼▬▬▬▬●
𝗝𝗢𝗜𝗡👉 @PuranPravachan
सोचिए जिनके सर्वोच्च धर्मगुरु के ही यही मनसा है कि घरवापसी न हो तो यह लोग कितने बड़े धर्म द्रोही होंगे।
इनके कथित परंपरा कितना बड़ा हानि पहुंचा सकता है हिन्दू समाज को
●▬▬▬▬🌼🌸🌼▬▬▬▬●
𝗝𝗢𝗜𝗡👉 @PuranPravachan
❤9💯4🔥1