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छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म 19 फरवरी 1630 को शिवनेरी दुर्ग में हुआ था।
🙏7❤2
बुद्ध भारत के लिए एक पनौती था कुछ कारण
1 जन्म लेते ही अपनी माँ को खा गया
2 इसके जन्म के बाद से ही भारत के पतन का युग आक्रांत का युग प्रारंभ हुआ
3 भारतीय राज वंश मे जिस जिस ने इसे अपनाया नष्ट हुआ ।
4 शुंग काल से ही बौद्ध मत भारत भूमि से गद्दारी करने के लिए कुख्यात है 😂
5 मध्यकाल मे इन्होंने मुहम्मद बिन कासिम को भारत हमला करने के लिए बुलाया और भारत बर्बाद हुआ कासिम ने इनके भी मठ ध्वस्त कर दिए
6 आज भारत मे ये समाप्त है 😂 खत्म है
1 जन्म लेते ही अपनी माँ को खा गया
2 इसके जन्म के बाद से ही भारत के पतन का युग आक्रांत का युग प्रारंभ हुआ
3 भारतीय राज वंश मे जिस जिस ने इसे अपनाया नष्ट हुआ ।
4 शुंग काल से ही बौद्ध मत भारत भूमि से गद्दारी करने के लिए कुख्यात है 😂
5 मध्यकाल मे इन्होंने मुहम्मद बिन कासिम को भारत हमला करने के लिए बुलाया और भारत बर्बाद हुआ कासिम ने इनके भी मठ ध्वस्त कर दिए
6 आज भारत मे ये समाप्त है 😂 खत्म है
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पुराण प्रवचन pinned «बुद्ध भारत के लिए एक पनौती था कुछ कारण 1 जन्म लेते ही अपनी माँ को खा गया 2 इसके जन्म के बाद से ही भारत के पतन का युग आक्रांत का युग प्रारंभ हुआ 3 भारतीय राज वंश मे जिस जिस ने इसे अपनाया नष्ट हुआ । 4 शुंग काल से ही बौद्ध मत भारत भूमि से गद्दारी करने…»
Forwarded from वेदों की ओर लौटो (भारतीय अनार्य)
सूरह 3 आयत 85 :- जो भी इस्लाम के सिवा ( किसी और धर्म ) को चाहेगा तो उसे उस से कदापि स्वीकार नही किया जाएगा और वह परलोक में क्षतिग्रस्त होगा
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सेकुलर का नशा केवल हिन्दूओ मे है... इस्लाम मे सेकुलर का कोई कॉन्सेप्ट नहीं
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सेकुलर का नशा केवल हिन्दूओ मे है... इस्लाम मे सेकुलर का कोई कॉन्सेप्ट नहीं
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शिवरात्रि के दिन एक बुद्ध को मानने वाला बौद्ध भीमटा ने जातिवादी मानसिकता के साथ एक मासूम बुजुर्ग ब्राह्मण पंडित की निर्मम हत्या किया था
पर जातिवाद पर रोने वाले दोगले अभी तक चुप है
क्या यह बुद्ध के मानने वालों द्वारा किया जाने वाला जातिवादी हिंसा नहीं है??
●▬▬▬▬🌼🌸🌼▬▬▬▬●
𝗝𝗢𝗜𝗡👉 @PuranPravachan
पर जातिवाद पर रोने वाले दोगले अभी तक चुप है
क्या यह बुद्ध के मानने वालों द्वारा किया जाने वाला जातिवादी हिंसा नहीं है??
●▬▬▬▬🌼🌸🌼▬▬▬▬●
𝗝𝗢𝗜𝗡👉 @PuranPravachan
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Forwarded from ࿗ HISTORY OF ARYAVART ࿗
🌟नालंदा की 5वीं शताब्दी की ब्रह्मा-मुद्रा🌟
यह मुहर (Sealing) 5वीं शताब्दी ईस्वी की है, जो नालंदा (बिहार) से प्राप्त हुई है। इसमें ब्राह्मी लिपि और संस्कृत भाषा का प्रयोग किया गया है। इस मुहर पर कमल आसन पर बैठे तीन सिर और दो हाथ वाले ब्रह्मा देव का चित्र है, जिनके दोनों ओर सूर्य और चंद्रमा बने हैं। ब्रह्मा के उठे हुए बाएँ हाथ में कमंडल (जलपात्र) दर्शाया गया है। इस पर दो पंक्तियों का लेख अंकित है, जिसमें ‘मल्लात जातक ग्रहारे घ’ तथा ‘श्रीमत्रै विद्यस्य’ का उल्लेख मिलता है।
@history_of_aryavart join for more
यह मुहर (Sealing) 5वीं शताब्दी ईस्वी की है, जो नालंदा (बिहार) से प्राप्त हुई है। इसमें ब्राह्मी लिपि और संस्कृत भाषा का प्रयोग किया गया है। इस मुहर पर कमल आसन पर बैठे तीन सिर और दो हाथ वाले ब्रह्मा देव का चित्र है, जिनके दोनों ओर सूर्य और चंद्रमा बने हैं। ब्रह्मा के उठे हुए बाएँ हाथ में कमंडल (जलपात्र) दर्शाया गया है। इस पर दो पंक्तियों का लेख अंकित है, जिसमें ‘मल्लात जातक ग्रहारे घ’ तथा ‘श्रीमत्रै विद्यस्य’ का उल्लेख मिलता है।
Source- Indian Journal of Archaeology, ११ Vol. 7, No 2, (2022), 1470-2385 Seals & Sealings kept at Nalanda Archaeological Museum, Nalanda District Nalanda Bihar
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❤10🥰1
Forwarded from 🔱 पाखंड खंडन 🔱
गृहस्थाश्रम का महत्व एवं श्रेष्ठता
गृहस्थ आश्रम के विषय में अधिक जानकारी पाने हेतु हमारी यह पोस्ट देखें, लिंक नीचे दिया हुआ है
👉 गृहस्थाश्रम का क्या है महत्व
👉 विवाह संस्कार का उद्देश्य और प्रकार
पोस्ट पसंद आए तो Reaction दीजिये 🙏💐🙏
सब्सक्राइब करें ⬇️
@Pakhand_khandan
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पुराण प्रवचन pinned «यः पौरुषेण क्रविषा समंक्ते यो अव्येन पशुना यातुधानः । यो अघ्न्यायाः भरति क्षीरमग्ने तेषां शीर्षाणि हरसापि वृश्च ।। सर काट दो मांस भक्षी की क्योंकि जो मांस खाता है वो राक्षस है ऋ० १०/८७/१६ 🗿 जय वेद माता 🙏 »
इसमें कौनसा दिक्कत है हम तो स्वयं मानते हैं गुण कर्म के आधार पर अगला वंश में जन्म मिल सकता है
पर बात जब मनुष्यों में वर्ण की हो तो वह वंश के आधार पर नहीं कर्म के आधार पर बदलता है।
जैसे वेद के मंत्रदृष्टा भृगु ऋषि ने कहा कि पहले सब ब्राह्मण थे और जैसे जैसे उनमें गुणों और कर्मों में भेद आता गया वो शूद्र आदि वर्ण के हो गए।
वंश तो यहां भी सब मनुष्यों का ब्राह्मण ही है पर कर्म आधार पर वर्ण बदल गया।
पर बात जब मनुष्यों में वर्ण की हो तो वह वंश के आधार पर नहीं कर्म के आधार पर बदलता है।
जैसे वेद के मंत्रदृष्टा भृगु ऋषि ने कहा कि पहले सब ब्राह्मण थे और जैसे जैसे उनमें गुणों और कर्मों में भेद आता गया वो शूद्र आदि वर्ण के हो गए।
वंश तो यहां भी सब मनुष्यों का ब्राह्मण ही है पर कर्म आधार पर वर्ण बदल गया।
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पुराण प्रवचन
इसमें कौनसा दिक्कत है हम तो स्वयं मानते हैं गुण कर्म के आधार पर अगला वंश में जन्म मिल सकता है पर बात जब मनुष्यों में वर्ण की हो तो वह वंश के आधार पर नहीं कर्म के आधार पर बदलता है। जैसे वेद के मंत्रदृष्टा भृगु ऋषि ने कहा कि पहले सब ब्राह्मण थे और जैसे जैसे…
बेटा जब तक अपने पास ऋषि भृगु के ब्रह्मास्त्र है न तब तक वर्ण व्यवस्था पर तो तू जीत ही नहीं सकता 🤣🤣
🔥5
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लेकिन बुद्ध ने तो कहा था-
भिक्षुओं किसी भी स्त्री के सामने झुक के उसको प्रणाम या सम्मान मत करो 🤔
●▬▬▬▬🌼🌸🌼▬▬▬▬●
𝗝𝗢𝗜𝗡👉 @PuranPravachan
भिक्षुओं किसी भी स्त्री के सामने झुक के उसको प्रणाम या सम्मान मत करो 🤔
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𝗝𝗢𝗜𝗡👉 @PuranPravachan
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पुराण प्रवचन
लेकिन बुद्ध ने तो कहा था- भिक्षुओं किसी भी स्त्री के सामने झुक के उसको प्रणाम या सम्मान मत करो 🤔 ●▬▬▬▬🌼🌸🌼▬▬▬▬● 𝗝𝗢𝗜𝗡👉 @PuranPravachan
वो सब तो ठीक है पर ये बुद्ध ने ब्लाउज क्यों पहना हुआ है🥲
😁8🗿1
क्या पुराकल्प से स्त्रियों का पूर्व कल्प में ही वेदाध्ययन सिद्ध होता है इस कल्प में नहीं ?
कुछ मध्यकाल के पंडे जब देखा कि हारित धर्मसूत्र से तो मुंहकाला हो रहा जिसमें स्पष्ट ब्रह्मवादिनी स्त्रियों के लिए उपनयन, वेदाध्ययन आदि संस्कार का विधान है।
इसको लीपने के लिए इन्होंने यमस्मृति में जो पुराकल्प में स्त्रियों का वेदाधिकार आया है उससे कल्पान्तर सिद्ध करने का कुचेष्टा किया।
पर आप को जान के आश्चर्य होगा आचार्य नीलकंठ जो प्राचीन टीकाकार थे उन्होंने "पुराकल्प" का अर्थ किया है-
(यहां यह शब्द सप्तमी विभक्ति एक वचन में आया है जो अधिकरण कारक में अर्थ हुआ है।)
अब पुराकल्प का अर्थ प्राचीन शास्त्र होने से यमस्मृति के उस श्लोक का अर्थ कुछ ऐसा होगा -
●▬▬▬▬🌼🌸🌼▬▬▬▬●
𝗝𝗢𝗜𝗡👉 @PuranPravachan
कुछ मध्यकाल के पंडे जब देखा कि हारित धर्मसूत्र से तो मुंहकाला हो रहा जिसमें स्पष्ट ब्रह्मवादिनी स्त्रियों के लिए उपनयन, वेदाध्ययन आदि संस्कार का विधान है।
इसको लीपने के लिए इन्होंने यमस्मृति में जो पुराकल्प में स्त्रियों का वेदाधिकार आया है उससे कल्पान्तर सिद्ध करने का कुचेष्टा किया।
पर आप को जान के आश्चर्य होगा आचार्य नीलकंठ जो प्राचीन टीकाकार थे उन्होंने "पुराकल्प" का अर्थ किया है-
"पुराकल्पे प्राचीनशास्त्रे"
अर्थात् - पुराकल्प का अर्थ प्राचीन शास्त्र में होता है न कि पूर्व कल्प में।
(यहां यह शब्द सप्तमी विभक्ति एक वचन में आया है जो अधिकरण कारक में अर्थ हुआ है।)
अब पुराकल्प का अर्थ प्राचीन शास्त्र होने से यमस्मृति के उस श्लोक का अर्थ कुछ ऐसा होगा -
प्राचीन शास्त्रों में कन्याओं का भी उपनयन संस्कार था; उन्हें वेदों की शिक्षा दी जाती थी और वे गायत्री मंत्र का उच्चारण भी करती थीं।"
●▬▬▬▬🌼🌸🌼▬▬▬▬●
𝗝𝗢𝗜𝗡👉 @PuranPravachan
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