बदलते भारत की छवी
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भारत में जो वर्तमान समय कि स्थिति प्रस्थिति हैं उसने बाहर निकलना है

काले अंग्रेजों से मातृ भूमि के मुक्त और गौ हत्या का विरोध करना है
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🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞
🌤️ *दिनांक - 23 जुलाई 2025*
🌤️ *दिन - बुधवार*
🌤️ *विक्रम संवत 2082 (गुजरात-महाराष्ट्र अनुसार 2081)*
🌤️ *शक संवत -1947*
🌤️ *अयन - दक्षिणायन*
🌤️ *ऋतु - वर्षा ॠतु*
🌤️ *मास - श्रावण (गुजरात-महाराष्ट्र अनुसार आषाढ)*
🌤️ *पक्ष - कृष्ण*
🌤️ *तिथि - चतुर्दशी 24 जुलाई रात्रि 02:28 तक तत्पश्चात अमावस्या*
🌤️ *नक्षत्र - आर्द्रा शाम 05:54 तक तत्पश्चात पुनर्वसु*
🌤️ *योग - व्याघात दोपहर 12:34 तक तत्पश्चात हर्षण*
🌤️ *राहुकाल - दोपहर 12:45 से दोपहर 02:24 तक*
🌤️ *सूर्योदय - 06:10*
🌤️ *सूर्यास्त - 07:20*
👉 *दिशाशूल - उत्तर दिशा मे*
🚩 *व्रत पर्व विवरण - मासिक शिवरात्रि,चतुर्दशी- आर्द्रा नक्षत्र योग (प्रातः 04:39 से शाम 05:54 तक) (ॐकार का जप अक्षय फलदायी)*
💥 *विशेष - चतुर्दशी  अमावस्या व व्रत के दिन तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)*
💥 *चतुर्मास के दिनों में ताँबे व काँसे के पात्रों का उपयोग न करके अन्य धातुओं के पात्रों का उपयोग करना चाहिए।(स्कन्द पुराण)*
💥 *चतुर्मास में पलाश के पत्तों की पत्तल पर भोजन करना पापनाशक है।*
🌞~*वैदिक पंचांग* ~🌞
🌷 *पुष्य नक्षत्र योग* 🌷
➡ *24 जुलाई 2025 गुरुवार को शाम 04:43 से 25 जुलाई सूर्योदय तक गुरुपुष्यामृत योग है ।*
🙏🏻 *श्रद्धापूर्वक तो २७ नक्षत्र के देवता उस पर खुश होते हैं और नक्षत्रों में मुख्य है पुष्य नक्षत्र, और पुष्य नक्षत्र के स्वामी हैं देवगुरु ब्रहस्पति | पुष्य नक्षत्र समृद्धि देनेवाला है, सम्पति बढ़ानेवाला है | उस दिन ब्रहस्पति का पूजन करना चाहिये |
*ॐ ऐं क्लीं ब्रहस्पतये नम : |...... ॐ ऐं क्लीं ब्रहस्पतये नम : |*
🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞

🌷 *कैसे बदले दुर्भाग्य को सौभाग्य में* 🌷
🌳 *बरगद के पत्ते पर गुरुपुष्य या रविपुष्य योग में हल्दी से स्वस्तिक बनाकर घर में रखें |
🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞

🌷 *धन-धान्य व सुख-संम्पदा के लिए* 🌷
➡️ *24 जुलाई 2025 गुरुवार को अमावस्या है।*
🔥 *हर अमावस्या को घर में एक छोटा सा आहुति प्रयोग करें।*
🍛 *सामग्री : १. काले तिल, २. जौं, ३. चावल, ४. गाय का घी, ५. चंदन पाउडर, ६. गूगल, ७. गुड़, ८. देशी कर्पूर, गौ चंदन या कण्डा।*
🔥 *विधि: गौ चंदन या कण्डे को किसी बर्तन में डालकर हवनकुंड बना लें, फिर उपरोक्त ८ वस्तुओं के मिश्रण से तैयार सामग्री से, घर के सभी सदस्य एकत्रित होकर नीचे दिये गये देवताओं की १-१ आहुति दें।*
🔥 *आहुति मंत्र* 🔥
🌷 *१. ॐ कुल देवताभ्यो नमः*
🌷 *२. ॐ ग्राम देवताभ्यो नमः*
🌷 *३. ॐ ग्रह देवताभ्यो नमः*
🌷 *४. ॐ लक्ष्मीपति देवताभ्यो नमः*
🌷 *५. ॐ विघ्नविनाशक देवताभ्यो नमः*

🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞
🙏🏻🌷💐🌸🌼🌹🍀🌺💐🙏🏻
Forwarded from कैलाश के निवासी (Geereejaapti asrto point महाकाल की महाकाली)
ये क्रिस्टल की राखी है रक्षाबन्धन के लिए जिसे रुचि हो वो व्यक्तित्व रूप से बात कर सकते हैं
🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞
🌤️ *दिनांक - 24 जुलाई 2025*
🌤️ *दिन - गुरूवार*
🌤️ *विक्रम संवत 2082 (गुजरात-महाराष्ट्र अनुसार 2081)*
🌤️ *शक संवत -1947*
🌤️ *अयन - दक्षिणायन*
🌤️ *ऋतु - वर्षा ॠतु*
🌤️ *मास - श्रावण (गुजरात-महाराष्ट्र अनुसार आषाढ)*
🌤️ *पक्ष - कृष्ण*
🌤️ *तिथि - अमावस्या रात्रि 12:40 तक तत्पश्चात प्रतिपदा*
🌤️ *नक्षत्र - पुनर्वसु शाम 04:43 तक तत्पश्चात पुष्य*
🌤️ *योग - हर्षण सुबह 09:51 तक तत्पश्चात वज्र*
🌤️ *राहुकाल - दोपहर 02:24 से शाम 04:03 तक*
🌤️ *सूर्योदय - 06:10*
🌤️ *सूर्यास्त - 07:19*
👉 *दिशाशूल - दक्षिण दिशा मे*
🚩 *व्रत पर्व विवरण - दर्श अमावस्या,श्रावण अमावस्या,हरियाली अमावस्या,गुरुपुष्यामृत योग (शाम 04:43 से 25 जुलाई सूर्योदय तक)*
💥 *विशेष - अमावस्या व व्रत के दिन तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)*
💥 *चतुर्मास के दिनों में ताँबे व काँसे के पात्रों का उपयोग न करके अन्य धातुओं के पात्रों का उपयोग करना चाहिए।(स्कन्द पुराण)*
💥 *चतुर्मास में पलाश के पत्तों की पत्तल पर भोजन करना पापनाशक है।*
🌞~*वैदिक पंचांग* ~🌞

🌷 *नकारात्मक ऊर्जा मिटाने के लिए* 🌷
➡ *24 जुलाई 2025 गुरुवार को अमावस्या है ।*
🏡 *घर में हर अमावस अथवा हर १५ दिन में पानी में खड़ा नमक (१ लीटर पानी में ५० ग्राम खड़ा नमक) डालकर पोछा लगायें । इससे नेगेटिव एनेर्जी चली जाएगी । अथवा खड़ा नमक के स्थान पर गौझरण अर्क भी डाल सकते हैं ।*
🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞

🌷 *अमावस्या* 🌷
🙏🏻 *अमावस्या के दिन जो वृक्ष, लता आदि को काटता है अथवा उनका एक पत्ता भी तोड़ता है, उसे ब्रह्महत्या का पाप लगता है (विष्णु पुराण)*
🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞

🌷 *समृद्धि बढ़ाने के लिए* 🌷
🌙 *कर्जा हो गया है तो अमावस्या के दूसरे दिन से पूनम तक रोज रात को चन्द्रमा को अर्घ्य दे, समृद्धि बढेगी ।*
🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞

🌷 *गुरुपुष्यामृत योग* 🌷
➡️ *24 जुलाई 2025 गुरुवार को शाम 04:43 से 25 जुलाई सूर्योदय तक गुरुपुष्यामृत योग है।*
🙏🏻 *‘शिव पुराण’ में पुष्य नक्षत्र को भगवान शिव की विभूति बताया गया है | पुष्य नक्षत्र के प्रभाव से अनिष्ट-से-अनिष्टकर दोष भी समाप्त और निष्फल-से हो जाते हैं, वे हमारे लिए पुष्य नक्षत्र के पूरक बनकर अनुकूल फलदायी हो जाते हैं | ‘सर्वसिद्धिकर: पुष्य: |’ इस शास्त्रवचन के अनुसार पुष्य नक्षत्र सर्वसिद्धिकर है | पुष्य नक्षत्र में किये गए श्राद्ध से पितरों को अक्षय तृप्ति होती है तथा कर्ता को धन, पुत्रादि की प्राप्ति होती है |*
🙏🏻 *इस योग में किया गया जप, ध्यान, दान, पुण्य महाफलदायी होता है परंतु पुष्य में विवाह व उससे संबधित सभी मांगलिक कार्य वर्जित हैं | (शिव पुराण, विद्येश्वर संहिताः अध्याय 10)*
🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞
🙏🏻🌷💐🌸🌼🌹🍀🌺💐🙏🏻
Forwarded from कैलाश के निवासी (Geereejaapti asrto point महाकाल की महाकाली)
Forwarded from कैलाश के निवासी (Geereejaapti asrto point महाकाल की महाकाली)
कुंभ 👉 बहते पानी में सवा पाव चावल और 2 नारियल प्रवाहित करें। शनि मंदिर के बाहर बैठे भिखारियों को भोजन करवाएं। (राशि स्वामी शनि के अनुसार)- बरगद, पलाश, महुआ,आंवला, शमी, तगर का पौधा लगाएं।

मीन 👉 मिट्टी के पात्र में शहद भरकर मंदिर में रखकर आएं। चीटियों की बांबी में आटा रखें। (राशि स्वामी गुरु के लिये)- पीपल, नागरमोथा, पीली हल्दी, नीम, विष्णुकांता के पौधे लगाए।
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🌑 हरियाली अमावस्या विशेष उपाय (24 जुलाई 2025)

🙏 आज हरियाली अमावस्या के पावन अवसर पर कुछ विशेष उपाय करें जिससे आपके जीवन से संकट दूर हों, पितृ दोष शांति मिले और समृद्धि का द्वार खुले:

🔸 सुबह स्नान के बाद पीपल के पेड़ को जल अर्पित करें, साथ में कच्चा दूध, गुड़ और तिल मिलाकर चढ़ाएं।
🔸 पितरों के नाम से काले तिल व जल का तर्पण करें।
🔸 शिवलिंग पर बेलपत्र, कच्चा दूध और गंगाजल चढ़ाएं – विशेष रूप से श्रावण मास में ये अति पुण्यदायी है।
🔸 घर के दक्षिण दिशा में दीपक जलाएं और “ॐ पितृदेव्यै नमः” का 108 बार जप करें।
🔸 दुर्भाग्य या व्यापार में रुकावट हो तो हनुमान चालीसा और “राम रक्षा स्तोत्र” का पाठ करें
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शालिग्राम जी के रामजी की मूर्ति हे किसीको लेनी हों तो संपर्क कर सकते हैं
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🌞 *~आज का वैदिक पंचांग और 🔱 *हिन्दू पंचांग ~🌞*

🙏 *!! श्रीहरि !!* 🙏

🌤️ *दिनांक - 25 जुलाई 2025*
🌤️ *दिन - शुक्रवार*
🌤️ *विक्रम संवत 2082 (गुजरात-महाराष्ट्र अनुसार 2081)*
🌤️ *शक संवत -1947*
🌤️ *अयन - दक्षिणायन*
🌤️ *ऋतु - वर्षा ॠतु*
🌤️ *मास - श्रावण*
🌤️ *पक्ष - शुक्ल*
🌤️ *तिथि - प्रतिपदा रात्रि 11:22 तक तत्पश्चात द्वितीया*
🌤️ *नक्षत्र - पुष्य शाम 04:00 तक तत्पश्चात अश्लेशा*
🌤️ *योग - वज्र सुबह 07:28 तक तत्पश्चात सिद्धि*
🌤️ *राहुकाल - सुबह 11:06 से दोपहर 12:45 तक*
🌤️ *सूर्योदय - 06:10*
🌤️ *सूर्यास्त - 07:19*
👉 *दिशाशूल - पश्चिम दिशा मे*
🚩 *व्रत पर्व विवरण - अमावस्यांत श्रावण मास आरंभ*
💥 *विशेष - प्रतिपदा को कूष्माण्ड (कुम्हड़ा पेठा) न खाएं क्योकि यह धन का नाश करने वाला है (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)*
💥 *चतुर्मास के दिनों में ताँबे व काँसे के पात्रों का उपयोग न करके अन्य धातुओं के पात्रों का उपयोग करना चाहिए।(स्कन्द पुराण)*
💥 *चतुर्मास में पलाश के पत्तों की पत्तल पर भोजन करना पापनाशक है।*
🌞~*वैदिक पंचांग* ~🌞

🌷 *व्यतिपात योग* 🌷
➡️ *26 जुलाई 2025 शनिवार को प्रात: 05:32 से 27 अगस्त प्रात: 04:06 तक व्यतिपात योग है।*
🙏🏻 *व्यतिपात योग की ऐसी महिमा है कि उस समय जप पाठ प्राणायम, माला से जप या मानसिक जप करने से भगवान की और विशेष कर भगवान सूर्यनारायण की प्रसन्नता प्राप्त होती है जप करने वालों को, व्यतिपात योग में जो कुछ भी किया जाता है उसका १ लाख गुना फल मिलता है।*
🙏🏻 *वाराह पुराण में ये बात आती है व्यतिपात योग की।*
🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞

🌷 *श्रावण में रुद्राभिषेक करने का महत्व* 🌷
*“रुद्राभिषेकं कुर्वाणस्तत्रत्याक्षरसङ्ख्यया, प्रत्यक्षरं कोटिवर्षं रुद्रलोके महीयते।* *पञ्चामृतस्याभिषेकादमृत्वम् समश्नुते।। ”*
🙏🏻 *श्रावण में रुद्राभिषेक करने वाला मनुष्य उसके पाठ की अक्षर-संख्या से एक-एक अक्षर के लिए करोड़-करोड़ वर्षों तक रुद्रलोक में प्रतिष्ठा प्राप्त करता है। पंचामृत का अभिषेक करने से मनुष्य अमरत्व प्राप्त करता है।*
🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞

🌷 *श्रावण मास में भूमि पर शयन* 🌷
🌷 *"केवलं भूमिशायी तु कैलासे वा समाप्नुयात" - स्कन्दपुराण*
🙏🏻 *श्रावण मास में भूमि पर शयन करने से मनुष्य कैलाश में निवास प्राप्त करता है।*
🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞

🌷 *पार्थिव शिवलिंग* 🌷
🙏🏻 *जो पार्थिव शिवलिंग का निर्माण कर एकबार भी उसकी पूजा कर लेता है, वह दस हजार कल्प तक स्वर्ग में निवास करता है, शिवलिंग के अर्चन से मनुष्य को प्रजा, भूमि, विद्या, पुत्र, बान्धव, श्रेष्ठता, ज्ञान एवं मुक्ति सब कुछ प्राप्त हो जाता है | जो मनुष्य ‘शिव’ शब्द का उच्चारण कर शरीर छोड़ता है वह करोड़ों जन्मों के संचित पापों से छूटकर मुक्ति को प्राप्त हो जाता है |’*
🙏🏻 *कलियुग में पार्थिव शिवलिंग पूजा ही सर्वोपरि है ।*
*कृते रत्नमयं लिंगं त्रेतायां हेमसंभवम्*
*द्वापरे पारदं श्रेष्ठं पार्थिवं तु कलौ युगे (शिवपुराण)*
🙏🏻 *शिवपुराण के अनुसार पार्थिव शिवलिंग का पूजन सदा सम्पूर्ण मनोरथों को देनेवाला हैं तथा दुःख का तत्काल निवारण करनेवाला है |*
🌷 *पार्थिवप्रतिमापूजाविधानं ब्रूहि सत्तम ॥*
*येन पूजाविधानेन सर्वाभिष्टमवाप्यते ॥*
🙏🏻 *अग्निपुराण के अनुसार*
🌷 *त्रिसन्ध्यं योर्च्चयेल्लिङ्गं कृत्वा विल्वेन पार्थिवम् ।*
*शतैकादशिकं यावत् कुलमुद्‌धृत्य नाकभाक् ।। ३२७.१५ ।। अग्निपुराण*
🙏🏻 *जो मनुष्य प्रतिदिन तीनों समय पार्थिव लिङ्ग का निर्माण करके बिल्वपत्रों से उसका पूजन करता है, वह अपनी एक सौ ग्यारह पीढ़ियों का उद्धार करके स्वर्गलोक को प्राप्त होता है।*
🙏🏻 *स्कंदपुराण के अनुसार*
*प्रणम्य च ततो भक्त्या स्नापयेन्मूलमंत्रतः॥*
*ॐहूं विश्वमूर्तये शिवाय नम॥*
*इति द्वादशाक्षरो मूलमंत्रः॥ ४१.१०२ ॥*
🙏🏻 *"ॐ हूं विश्वमूर्तये शिवाय नमः" यह द्वादशाक्षर मूल मंत्र है। इससे शिवलिंग को स्नान कराना चाहिए।*

*🌞~ आज का हिन्दू पंचांग ~🌞*

*⛅दिनांक - 25 जुलाई  2025*

*🔹लसोड़ा ( गोंदी ) सेवन से स्वास्थ्य लाभ 🔹*

*👉 लसोड़ा को हिन्दी में गोंदी, गोंदे और निसोरा भी कहते हैं । यह मधुर, कसैला, शीतल, कृमिनाशक, विषनाशक, बालों के लिए हितकारी, अग्निवर्द्धक, वातशामक, पाचक, कफ निकालनेवाला, अतिसार व जलन दूर करनेवाला, दर्द और सब प्रकार के विष को नष्ट करनेवाला होता है ।*

*👉 इसमें प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा, फाइबर, आयरन, फॉस्फोरस व कैल्शियम मौजूद होते हैं । यह हड्डियों को मजबूत बनाता है और शरीर को कई अन्य बीमारियों से राहत देता है । कच्चे लसोड़े का साग और अचार भी बनाया जाता है ।*

*🔹लसोड़े के औषधीय उपचार 🔹*

*🔸अतिसार : लसोड़े की छाल को पानी में घिसकर पिलाने से अतिसार ठीक होता है ।*