बदलते भारत की छवी
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भारत में जो वर्तमान समय कि स्थिति प्रस्थिति हैं उसने बाहर निकलना है

काले अंग्रेजों से मातृ भूमि के मुक्त और गौ हत्या का विरोध करना है
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*🌞 🚩 । l ॐ l । 🚩 🌞*
🕉 ।। *श्री गणेशाय नमः* ।। 🕉
 *सुप्रभातम् स्नेह वंदनम्* 
🌐 *आज का पंचांग* 🌐
⛳ *तिथि*……( ०६ ) षष्ठी ⛳️
💐 श्रीगणेशोत्सव 💐
🌞 सूर्यषष्ठी 🌞
🌸 चंपाषष्ठी 🌸
💐 मंथन षष्ठी ( बंगाल ) 💐
🍀 बलराम जयंती 🍀
🌼 कार्तिक स्वामी दर्शन 🌼
🌺 मेलापाट ( कश्मीर ) 🌺
🦚 सोमनाथ व्रत ( उड़ीसा ) 🦚
2️⃣9️⃣-0️⃣8️⃣-2⃣0⃣2️⃣5️⃣
🔔 *वार*……..शुक्रवार 🔔
🦚 *नक्षत्र*…..स्वाति 🦚
🪔 *योग*…….ब्रह्मा 🪔
✳️ *करण*…..कौलव ✳️
🌅 *सूर्योदय* :-०६ः२२ 🌅
🌌 *सूर्यास्त* :-०६ः५९ 🌌
🌓 *पक्ष*....………शुक्ल 🌓
🌝 *चन्द्र राशि*…. तुला 🌝
⏺️ *ऋतु*.......…..शरद ⏺️
🍀 *अयन*………दक्षिण🍀
🪷 *मास*.……….भाद्रपद 🪷
🌻*कलियुगाब्द*….५१२५🌻
🌎 *विक्रम संवत्*.....२०८१🌎
⭐️ *शक संवत्*...... १९४७ ⭐️
🪻अभिजीत ….मध्याह्न १२:४५ से ०१ः०४ तक 🪻
🌚 राहुकाल ….प्रातः ११ः०९ से १२ः४४ तक 🌚

💐*।। आपका दिन मंगलमय हो ।।* 💐

🌺🌺 कल ३०-०८-२५ शनिवार 🌺🌺

💐 ललिता सप्तमी 💐

🙏 🌹 *जय श्री कृष्ण* 🌹🙏
प्रकटीकृतमाधवभक्तिपथं कलिपातकमोचनपुण्यकथम् ।
परिभूतनिरीश्वरवादिमतं यतिराजगुरुं प्रणमामि सदा ॥




जिन्होने कलिकाल में श्रीकृष्ण भक्ति के पथ को प्रकट किया ,जिनका चरित्र कलिकाल के दोष नष्ट कर देता है , निरिश्वरवादि मतों को परास्त करने में जो अत्यंत प्रवीण है उन आदिगुरू यतिराज रामानुज को सदा नमस्कार है।
*🌞 🚩 । l ॐ l । 🚩 🌞*
🕉 ।। *श्री गणेशाय नमः* ।। 🕉
 *सुप्रभातम् स्नेह वंदनम्* 
🌐 *आज का पंचांग* 🌐
⛳ *तिथि*……( ०८ ) अष्टमी ⛳️
💐 श्रीगणेशोत्सव 💐
🙏 दुर्गाष्टमी 🙏
🌺 राधाष्टमी 🌺
🌼 धरो आठम 🌼
🌸 दधिची जयंती 🌸
🦚 गौरी आवाहन सायं ०५ः२७ तक 🦚
🪻 महालक्ष्मी व्रतारंभ 🪻
🍁 भद्रा समाप्त प्रातः ११ः५५ 🍁
🍀 बिछुड़ा 🍀
3️⃣1️⃣-0️⃣8️⃣-2⃣0⃣2️⃣5️⃣
🔔 *वार*……..रविवार 🔔
🦚 *नक्षत्र*…..अनुराधा 🦚
🪔 *योग*…….वैधृति 🪔
✳️ *करण*….. विष्टि ✳️
🌅 *सूर्योदय* :-०६ः२२ 🌅
🌌 *सूर्यास्त* :-०६ः५७ 🌌
🌓 *पक्ष*....………शुक्ल 🌓
🌝 *चन्द्र राशि*…. वृश्चिक 🌝
⏺️ *ऋतु*.......…..शरद ⏺️
🍀 *अयन*………दक्षिण🍀
🪷 *मास*.……….भाद्रपद 🪷
🌻*कलियुगाब्द*….५१२५🌻
🌎 *विक्रम संवत्*.....२०८१🌎
⭐️ *शक संवत्*...... १९४७ ⭐️
🪻अभिजीत ….मध्याह्न १२:२३ से ०१ः०४ तक 🪻
🌚 राहुकाल …सायं ०५ः२४ से ०६ः५७ तक 🌚

💐*।। आपका दिन मंगलमय हो ।।* 💐

🌺🌺 कल ०१-०९-२५ सोमवार 🌺🌺

🙏 श्रीहरि जयंती 🙏
🌼 अदुःख नवमी 🌼

🙏 🌹 *जय श्री कृष्ण* 🌹🙏
*अंक ज्योतिष विशेषज्ञ*

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🙏1
Forwarded from Bajrang dal || बजरंग दल
ओम शांति💐🙏🏻 धन्यवाद साथियों🚩
नगर पालिका परिषद मोदीनगर के चक्कर में रहते तो सुबह तक शायद इनका शरीर भी ना मिल पाता!

एवं सूचना मिलते ही रात्रि में ही अंतिम संस्कार कराया।

👇🏻Share-Follow-Support 🤝🚩

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🙏1
*🌑खग्रास चन्द्रग्रहण- 7 सितंबर 2025 (भारत में दिखेगा, नियम पालनीय है ।)*

*💁🏻ग्रहण समय-* रात्रि 9 बजकर 57 मिनट से देर रात 1 बजकर 27 मिनट तक ।

*💁🏻सुतक प्रारम्भ-* 7 सितंबर, रविवार दोपहर 12:57 से

*💁🏻सूतक प्रारम्भ (बालक, वृद्ध, रोगी एवं गर्भवती महिलाओं के लिए) -* 7 सितम्बर शाम 5-27 से ग्रहण प्रारम्भ होने तक

*🔹ग्रहण भारत में दिखेगा इसलिये ग्रहण के नियम पालनीय आवश्यक है ।*

*📜ग्रहणकाल में क्या करें, क्या न करें ? सम्पूर्ण जानकारी👇🏼*

🔹चन्द्रग्रहण में 3 प्रहर (9 घंटे) और सूर्यग्रहण में 4 प्रहर (12 घंटे) पहले से सूतक माना जाता है । इस समय सशक्त व्यक्तियों को भोजन छोड़ देना चाहिए । इससे आयु, आरोग्य, बुद्धि की विलक्षणता बनी रहेगी । परंतु जो बालक, बूढ़े, बीमार व गर्भवती स्त्रियाँ हैं वे ग्रहण से 1.5 प्रहर (4.5 घंटे) पहले तक चुपचाप कुछ खा-पी लें तो चल सकता है । इसके बाद खाने से स्वास्थ्य की बड़ी हानि होती है । गर्भवती महिलाओं को तो ग्रहण के समय खास सावधान रहना चाहिए ।

🔹सूतक (ग्रहण-वेध) के पहले जिन पदार्थों में कुश, तिल या तुलसी-पत्ते डाल दिये जाते हैं वे सूतक व ग्रहण काल में दूषित नहीं होते । दूध या दूध से बने व्यंजनों में तिल या तुलसी न डालें । कुश आदि डला पानी सूतककाल में उपयोग में ला सकते हैं ।

*📜ग्रहणकाल में भूलकर भी न करें ?👇🏼*

🔹ग्रहण में अगर सावधानी रही तो थोड़े ही समय में बहुत पुण्यमय, सुखमय जीवन होगा । अगर असावधानी हुई तो थोड़ी ही असावधानी से बड़े दंडित हो जायेंगे, दुःखी हो जायेंगे ।

*💁🏻ग्रहणकाल में –*

(1) भोजन करनेवाला अधोगति को जाता है ।

(2) जो नींद करता है उसको रोग जरूर पकड़ेगा, उसकी रोगप्रतिकारकता का गला घुटेगा ।

(3) जो पेशाब करता है उसके घर में दरिद्रता आती है । जो शौच जाता है उसको कृमिरोग होता है तथा कीट की योनि में जाना पड़ता है ।

(4) जो संसार-व्यवहार (सम्भोग) करते हैं उनको सूअर की योनि में जाना पड़ता है ।

(5) तेल-मालिश करने या उबटन लगाने से कुष्ठरोग होने की सम्भावना बढ़ जाती है ।

(6) ठगाई करनेवाला सर्पयोनि में जाता है । चोरी करनेवाले को दरिद्रता पकड़ लेती है ।

(7) जीव-जंतु या किसी प्राणी की हत्या करनेवाले को नारकीय योनियों में जाना पड़ता है ।

(8) पत्ते, तिनके, लकड़ी, फूल आदि न तोड़ें । दंतधावन, अभी ब्रश समझ लो, न करें ।

(9) चिंता करते हैं तो बुद्धिनाश होता है ।

*📜ये करने से सँवरेगा इहलोक–परलोक 👇🏼*

(1) सूर्यग्रहण के समय रुद्राक्ष-माला धारण करने से पाप नष्ट हो जाते हैं परंतु फैक्ट्रियों में बननेवाले नकली रुद्राक्ष नहीं, असली रुद्राक्ष हों ।

(2) मंत्रदीक्षा में मिले मंत्र का ग्रहण के समय जप करने से उसकी सिद्धि हो जाती है ।

(3) *महर्षि वेदव्यासजी कहते हैं :* ‘‘चन्द्रग्रहण के समय किया हुआ जप लाख गुना और सूर्यग्रहण के समय किया हुआ जप 10 लाख गुना फलदायी होता है । यदि गंगा जल पास में हो तो चन्द्रग्रहण में एक करोड़ गुना और सूर्यग्रहण में दस करोड़ गुना फलदायी होता है ।’’

*तो स्वास्थ्य-मंत्र जप लेना, ब्रह्मचर्य का मंत्र भी सिद्ध कर लेना ।*

🔹ग्रहण के समय किया हुआ ऐसा-वैसा कोई भी गलत या पाप कर्म अनंत गुना हो जाता है और इस समय भगवद्-चिंतन, भगवद्-ध्यान, भगवद्-ज्ञान का लाभ ले तो वह व्यक्ति सहज में भगवद्-धाम, भगवद्-रस को पाता है ।

🔹ग्रहण के समय अगर भगवद्-विरह पैदा हो जाता है तो वह भगवान को पाने में बिल्कुल पक्का है, उसने भगवान को पा लिया समझ लो । ग्रहण के समय किया हुआ जप, मौन, ध्यान, प्रभु-सुमिरन अनेक गुना हो जाता है । *ग्रहण के बाद वस्त्रसहित स्नान करें ।*

*📜कल्पनातीत मेधाशक्ति बढ़ाने का प्रयोग- 👇🏼*

🔹नारद पुराण के अनुसार सूर्यग्रहण और चन्द्रग्रहण के समय उपवास करे और ब्राह्मी घृत को उँगली से स्पर्श करे एवं उसे देखते हुए *‘ॐ नमो नारायणाय ।’* मंत्र का 8000 बार (80 माला) जप करे । थोड़ा शांत बैठे । ग्रहण–समाप्ति पर स्नान के बाद घी का पान करे तो बुद्धि विलक्षण ढंग से चमकेगी, बुद्धिशक्ति बढ़ जायेगी, कल्पनातीत मेधाशक्ति, कवित्वशक्ति और वचनसिद्धि (वाक्–सिद्धि) प्राप्त हो जायेगी ।

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ग्रहण काल में ध्यान रखने योग्य बातें
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1👉 सूतक एवं ग्रहण काल में अनावश्यक खाना-पीना, मैथुन, निद्रा, नाखून काटना इत्यादि वर्जित है।

2👉 किसी से किसी भी प्रकार का झूठ, छल-कपट इत्यादि करने से बचें।

3👉 गर्भवती स्त्री को ग्रहण काल में सब्जी काटना, पापड़ सेकना इत्यादि कोई भी उत्तेजक कार्य नहीं करना चाहिए। तथा धार्मिक ग्रंथों का पाठ, श्रवण करते हुए उसमें प्रसन्नचित रहना चाहिए !

4👉 बड़े-बूढ़े, रोगी, बालक और गर्भवती स्त्रियों को यथा अनुकूल भोजन या दबाई आदि लेने में कोई दोष नहीं है।

5👉 ग्रहण सूतक आरम्भ से पूर्व दूध, जल आदि तरल द्रव्यों में कुशा तृण या तुलसी रखना श्रयेकर !

6👉 कांसे की कटोरी या थाली में घी डालकर उसमें अपना चेहरा देखने व उपरान्त उसका दान करने से ग्रह जन्य अरिष्ठों-कष्टों की शांति ।

7👉 ग्रहण काल में मंत्र जाप, महामंत्र ॐ नमः शिवाय अथवा महामृत्युंजय मंत्र जप शुभऔर अतः प्रभु चिन्तन करते रहें और प्रसन्न रहे।


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*ग्रहण का सूतक लग गया है, सभी अपना ध्यान रखें,*
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‼️ देवी दुर्गा के सोलह नाम और उनका अर्थ ‼️

देवी की पूजा सबसे पहले किसने और कहां शुरु की, फिर मनुष्यों में देवी पूजन की परम्परा कैसे शुरु हुई ? जानें, वेद में बताए गए देवी के अत्यंत मंगलकारी नाम ।

देवी दुर्गा परमात्मा श्रीकृष्ण की शक्तिरूपा हैं । वे देवताओं और मनुष्यों द्वारा स्मरण करने पर उन्हें सद्बुद्धि प्रदान करती हैं और उनके भय और दु:ख का नाश कर देती हैं । इसीलिए सबसे पहले परमात्मा श्रीकृष्ण ने सृष्टि के आदिकाल में गोलोक स्थित वृन्दावन के रासमण्डल में देवी की पूजा की थी ।

दूसरी बार भगवान विष्णु के सो जाने पर मधु और कैटभ से भय होने पर ब्रह्माजी ने उनकी पूजा की। तीसरी बार त्रिपुर दैत्य से युद्ध के समय महादेवजी ने देवी की पूजा की । चौथी बार दुर्वासा के शाप से जब देवराज इन्द्र राजलक्ष्मी से वंचित हो गए तब उन्होंने देवी की आराधना की थी । तब से मुनियों, सिद्धों, देवताओं तथा महर्षियों द्वारा संसार में सब जगह देवी की पूजा होने लगी।

वेद में वर्णित दुर्गा के कल्याणकारी 16 नाम और उनका अर्थ
वेद की कौथुमी शाखा में दुर्गा के सोलह नाम बताये गये हैं जो सबके लिए बहुत ही कल्याणकारी हैं–

दुर्गा, नारायणी, ईशाना, विष्णुमाया, शिवा, सती, नित्या, सत्या, भगवती, सर्वाणी, सर्वमंगला, अम्बिका, वैष्णवी, गौरी, पार्वती और सनातनी।

भगवान विष्णु ने इन सोलह नामों का अर्थ इस प्रकार किया है–

१. दुर्गा–दुर्ग + आ। ‘दुर्ग’ शब्द का अर्थ दैत्य, महाविघ्न, भवबंधन, कर्म, शोक, दु:ख, नरक, यमदण्ड, जन्म, भय और रोग है । ‘आ’ शब्द ‘हन्ता’ का वाचक है। अत: जो देवी इन दैत्य और महाविघ्न आदि का नाश करती हैं, उसे ‘दुर्गा’ कहा गया है।

२. नारायणी–यह दुर्गा यश, तेज, रूप और गुणों में नारायण के समान हैं तथा नारायण की ही शक्ति हैं, इसलिए ‘नारायणी’ कही गयी हैं।

३. ईशाना–ईशान + आ। ‘ईशान’ शब्द सम्पूर्ण सिद्धियों के अर्थ में प्रयोग किया जाता है और ‘आ’ शब्द दाता का वाचक है। अत: वह सम्पूर्ण सिद्धियों को देने वाली ‘ईशाना’ कही जाती हैं।

४. विष्णुमाया–सृष्टि के समय परमात्मा विष्णु ने माया की सृष्टि कर समस्त विश्व को मोहित किया । वह विष्णुशक्ति माया ही ‘विष्णुमाया’ कही गयी हैं।

५. शिवा–शिव + आ। ‘शिव’ शब्द कल्याण का और ‘आ’ शब्द प्रिय और दाता का वाचक है। अत: वह कल्याणस्वरूपा हैं, शिवप्रिया हैं और शिवदायिनी हैं; इसलिए ‘शिवा’ कही गयी हैं।

६. सती–देवी दुर्गा प्रत्येक युग में विद्यमान, पतिव्रता एवं सद्बुद्धि देने वाली हैं। इसलिए उन्हें ‘सती’ कहते हैं ।

७. नित्या–जैसे भगवान नित्य हैं, वैसे ही भगवती भी ‘नित्या’ हैं। प्रलय के समय वे अपनी माया से परमात्मा श्रीकृष्ण में विलीन हो जाती हैं । अत: वे ‘नित्या’ कहलाती हैं ।

८. सत्या–जिस प्रकार भगवान सत्य हैं, उसी तरह देवी दुर्गा सत्यस्वरूपा हैं । इसलिए ‘सत्या’ कही जाती हैं।

९. भगवती–‘भग’ शब्द ऐश्वर्य के अर्थ में प्रयोग होता है, अत: सम्पूर्ण ऐश्वर्य आदि प्रत्येक युग में जिनके अंदर विद्यमान हैं, वे देवी दुर्गा ‘भगवती’ कही गयी हैं।

१०. सर्वाणी–देवी दुर्गा संसार के समस्त प्राणियों को जन्म, मृत्यु, जरा और मोक्ष की प्राप्ति कराती हैं इसलिए ‘सर्वाणी’ कही जाती हैं।

११. सर्वमंगला–‘मंगल’ शब्द का अर्थ मोक्ष है और ‘आ’ शब्द का अर्थ है दाता। अत: जो मोक्ष प्रदान करती हैं उन्हें ‘सर्वमंगला’ कहते हैं।

१२. अम्बिका–देवी दुर्गा सबके द्वारा पूजित और वन्दित हैं तथा तीनों लोकों की माता हैं, इसलिए ‘अम्बिका’ कहलाती हैं ।

१३. वैष्णवी–देवी श्रीविष्णु की भक्ता, और उनकी शक्ति हैं । सृष्टिकाल में विष्णु के द्वारा ही उनकी सृष्टि हुई है इसलिए उन्हें ‘वैष्णवी’ कहा जाता है ।

१४. गौरी–भगवान शिव सबके गुरु हैं और देवी उनकी प्रिया हैं; इसलिए उनको ‘गौरी’ कहा गया है।

१५. पार्वती–देवी पर्वत गिरिराज हिमालय की पुत्री हैं, पर्वत पर प्रकट हुई हैं और पर्वत की अधिष्ठात्री देवी हैं इसलिए उनहें ‘पार्वती’ कहते हैं।

१६. सनातनी–‘सना’ का अर्थ है सर्वदा और ‘तनी’ का अर्थ है विद्यमान । सब जगह और सब काल में विद्यमान होने से वे देवी ‘सनातनी’ कही गयीं है।



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हर हर महादेव हर

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*🌞~ आज का हिन्दू पंचांग ~🌞*
*⛅दिनांक - 10 सितम्बर 2025*
*⛅दिन - बुधवार*
*⛅विक्रम संवत् - 2082*
*⛅अयन - दक्षिणायण*
*⛅ऋतु - शरद*
*⛅मास - आश्विन*
*⛅पक्ष - कृष्ण*
*⛅तिथि - तृतीया दोपहर 03:37 तक तत्पश्चात् चतुर्थी*
*⛅नक्षत्र - रेवती शाम 04:03 तक तत्पश्चात् अश्विनी*
*⛅योग - वृद्धि रात्रि 08:31 तक तत्पश्चात् ध्रुव*
*⛅राहुकाल - दोपहर 12:24 से दोपहर 01:57 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅सूर्योदय - 06:12*
*⛅सूर्यास्त - 06:35 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅दिशा शूल - उत्तर दिशा में*
*⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:39 से प्रातः 05:25 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅अभिजीत मुहूर्त - कोई नहीं*
*⛅निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:01 सितम्बर 11 से रात्रि 12:47 सितम्बर 11 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅️व्रत पर्व विवरण - तृतीया व चतुर्थी का श्राद्ध, विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी*
*⛅️विशेष - तृतीया को परवल खाना शत्रुओं की वृद्धि करने वाला है व चतुर्थी को मूली खाने से धन का नाश होता है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*

*🔹स्वास्थ्य का खजाना : मेथीदाना , फायदे जानकर आप हो जायेंगे हैरान...🔹*

*🔸मेथी सस्ती व सर्वत्र सुलभ होने के साथ साथ हमारे स्वास्थ्य की परम मित्र भी है । मेथीदाना तीखा, उष्ण, वात, कफनाशक, पित्तवर्द्धक, पाचकशक्ति बढाने वाला, ह्रदय के लिए हितकर व बलवर्धक है ।*

*🔸यह ज्वर, उलटी, खाँसी, अरुचि, बवासीर, कृमि व क्षयरोग को नष्ट करता है । मेथीति हिनस्ति वातकफ ज्वरान् । वायु कफ व ज्वर का नाश करने के कारण मेथिका कहते हैं ।*

*🔸मेथीदाना पुष्टिकारक, शक्ति और स्फूर्तिदायक टॉनिक है । पुराने जमाने में जब सीमेंट का आविष्कार नहीं हुआ था, तब भवन निर्माण में चूने के साथ पीसी मेथी का उपयोग किया जाता था, जिससे भवन की मजबूती बढ़ जाती थी ।*

*🔸ऐसे ही रोज सुबह शाम १ से ३ ग्राम मेथी पानी में भिगोकर, चबा के या छाया में सुखाकर, पीस के खाने से घुटने व शरीर के जोड़ों का दर्द नहीं होता, जोड़ मजबूत रहते हैं तथा जीवनभर गठिया, आमवात, लकवा, मधुमेह, रक्तचाप आदि रोगों के होने की संभावना बहुत कम हो जाती है ।*

*🔸इसके नित्य सेवन से पेट बड़ा नहीं होता, मोटापा नहीं आता । मेथीदाना दुबलापन भी दूर करता है ।*

*🔸सुबह शाम इसे पानी के साथ निगलने से कैसा भी कब्ज हो, दूर हो जाता है । यह आँतों का परिमार्जन कर पेट को निरोग बनाता है, गैस को नष्ट करता है ।*

*🔸इसकी मूंग के साथ सब्जी बनाकर भी खा सकते हैं । यह मधुमेह के रोगियों के लिए खूब लाभदायी है ।*

*🔸सावधानी : मेथीदाने का सेवन पित्तजन्य रोगों में तथा उष्ण प्रकृति वालों को नहीं करना चाहिए ।*

*🔹शुष्क आँखों (dry eye) के लिए अनुभूत प्रयोग🔹*

*🔸(२) शुद्ध शहद व गुलाबजल दिन में १-२ बार डालने से भी लाभ होता है ।*

*🔹फटी एड़ियों से पायें निजात🔹*

*🔸अधिक समय तक पैर पानी में भीगे रहना, ठीक से सफाई न होना, मिट्टी में काम करना, शरीर में कैल्शियम की कमी होना आदि कारणों से एड़ियाँ फट जाती हैं ।*

*🔸उपाय : नींबू का रस, गुलाब जल व अरंडी के तेल का मिश्रण १-१ चम्मच रोज रात को फटी हुई एड़ियों पर लगायें ।*

*🔸 १-१ चम्मच शुद्ध मोम व घी या सरसों का तेल गर्म करके रूई से १-१ बूँद फटी एड़ियों पर टपकायें, इससे सिंकाई भी हो जायेगी । थोड़ा दर्द अनुभव होगा किंतु बाद में आराम मिलेगा । यह प्रयोग रोजाना तब तक करें, जब तक एड़ियाँ पूरी तरह ठीक न हो जायें ।*
* 🌞*
🌸✨ सांदीपनि गुरुकुल स्वाध्याय केन्द्र ✨🌸

🙏 नवरात्रि के पावन अवसर पर
🔥 रुद्र चंडी महायज्ञ 🔥

📖 *चारों वेद पारायण*
📖 *दुर्गा सप्तशती पाठ*
📖 *रुद्र पाठ*

***

🎯 ब्राह्मण संख्या: 1100
💰 दक्षिणा: ₹31,000/-
🚌 आने-जाने का किराया उपलब्ध

🛑 जरूरी:
- पहचान पत्र
- फोटो
- अन्य आवश्यक दस्तावेज साथ लाएं

***

📞 अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें:
📱 8602666380 / 6260144580

✨ इस पुण्यकार्य में अवश्य भाग लें और प्रसाद व आशीर्वाद ग्रहण करें। ✨


अगर किसीको भी करवाना हैं वों संपर्क करें

गिरिजापति एस्ट्रो पोइंट
ज्योतिष आचार्या मीत महाकाल महादेव
☎️ 7575091399
Forwarded from कैलाश के निवासी (Geereejaapti asrto point महाकाल की महाकाली)