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Dr. BR Ambedkar वो व्यक्तित्व हैं जिनकी राजनीतिक पार्टियों ने अपने स्वार्थ के लिए उपयोग किया है और आज भी कर रहे हैं लेकिन कोई इस बात पर बात नहीं करता कि वो व्यक्ति असल जीवन में कैसा था। कोई भी तथ्यो पर बात नहीं करता है और एक आम इंसान को भगवान बना दिया है राजनीति के गलियारो से लेकर सविंधनिक संस्था के उच्च्तम पदो तक Ambedkar को पूजा जाता है! जबकी इनकी भूमिका हर कार्य क्षेत्र में कुछ अधिक रही नहीं लेकिन एक तबके के लोगो को रुजाने के लिए आज भी ये झूठ का झुनझुना बजया जाता है! आख़िर कब तक ?
.
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ये जो फोटो आप लोग देख रहे हो, यह नैना देवी मंदिर (नैनीताल) के बिल्कुल सामने हैं...
अगर बात इसके आकार की की जाए तो यह मंदिर से लगभग तीन से चार गुना बड़ी मस्जिद है...
अब प्रश्न यह उठता है...
अभी यहां के लोगों को मुझे नहीं पता कि इस मस्जिद से दिक्कत हो रही है या नहीं हो रही है लेकिन इतना जरूर कह सकता हूं आने वाले समय में इस मस्जिद में जितने भी जि हादी यहां आकर नमाज पढ़ेंगे, हो सकता है अभी उन जि हादियों की संख्या कम हो....
इसलिए यहां के लोगों को दिक्कत ना हो रही हो..
लेकिन जैसे-जैसे इन जिहादियों की संख्या या बढ़ेगी वैसे-वैसे यहां के जो लोकल लोग है...
उनकी परेशानियां बढ़ने लगेगी...
अब आते हैं मुख्य बात पर मैंने नैना देवी मंदिर के जस्ट सामने एक रेस्टोरेंट है..
उसमें खाना खाया जिसका नाम था रॉक रेस्टोरेंट जैसे मैं उसे रेस्टोरेंट के अंदर इंटर हुआ तो वहां पर जो लोग बैठे हुए थे उनके माथे पर तिलक था..
जैसे कि मेरी आदत है की सबसे पहले मैं यह देखता हूं कुछ भी सामान खरीदने से पहले या कुछ भी खाने से पहले कि वह दुकान हिंदू की है या नहीं यहां भी वही हुआ जैसे ही मैंने उसको देखा उसके माथे पर तिलक था तो मुझे लगा शायद यह हिंदू है और हिंदू का ही रेस्टोरेंट है....
खाना खाकर जैसे ही मैं कैश काउंटर पर बिल देने के लिए गया, मैंने QR कोड स्कैन किया तो नाम आता है उस पर रियाज अहमद...
अब सोचने वाली बात यह है जहां यह लोग माइनॉरिटी में है, वहां यह लोग वहां के जो लोकल लोग हैं उनके काम धंधों पर धीरे-धीरे अपना कब्जा कर रहे हैं..
आज इन लोगों को उस मस्जिद से दिक्कत नहीं है ओर ना आज इन लोगों को इस बात से दिक्कत है कि यह लोग हिंदुओं के काम धंधों पर कब्जा कर रहे हैं.....
कल को ज़ब ये मलेछ, मंदिर में आई हुई बहन बेटियों को छेड़ेंगे... तब वहां का हिंदू सरकार को दोष देगा...
इतनी बड़ी मस्जिद बन गई वह भी वहां पर जो एक तरीके से टूरिस्ट के आकर्षण का केंद्र है यानी कि नैनी झील पर...
तब यहां की सरकार और यहां के लोकल्स कहां सो रहे थे?
मेरा कहना सिर्फ इतना है जब यह लोग इस तरीके की एक्टिविटीज करते हैं जैसे मस्जिद बनाना मजार बनाना तब हिंदू अपने आसपास हो रही इस तरीके की गतिविधियों को देखकर चुप कैसे रह रहा है....?
आने वाले समय में ऐसा ना हो यह दूसरा कश्मीर बन जाए जिस तरीके के हालात पिछले तीन दिन से मैं (नैनीताल ) उत्तराखंड में देख रहा हूं....
उत्तर प्रदेश के गढ़ गंगा के बाद से उसके बाद मुरादाबाद और फिर नैनीताल के रास्ते होते हुए कैंची धाम, अल्मोड़ा और कसार देवी मंदिर तक...
मैंने जो मुख्य रूप से चीज नोटिस की है वह यह है मुख्य मुख्य रास्तों पर यहां तक की जो नैनीताल से निकलकर अल्मोड़ा तक नेशनल हाईवे जाता है उसे पर भी काफी जगह मैंने देखा इन्होंने रोड के किनारो पर दुकान लगा रखी है और तो मस्जिद मजार बना रखी है अब यह लोगों का जो टारगेट है पूरे उत्तराखंड को अपने कब्जे में लेने का है... ऐसा मुझे लगता है....
वीडियो भी कमेंट में दूंगा देख लेना सभी....
समय है सम्हल जाओ, वरना हिंदू अपने विनाश का कारण खुद बनेंगे....
🔴
अगर बात इसके आकार की की जाए तो यह मंदिर से लगभग तीन से चार गुना बड़ी मस्जिद है...
अब प्रश्न यह उठता है...
अभी यहां के लोगों को मुझे नहीं पता कि इस मस्जिद से दिक्कत हो रही है या नहीं हो रही है लेकिन इतना जरूर कह सकता हूं आने वाले समय में इस मस्जिद में जितने भी जि हादी यहां आकर नमाज पढ़ेंगे, हो सकता है अभी उन जि हादियों की संख्या कम हो....
इसलिए यहां के लोगों को दिक्कत ना हो रही हो..
लेकिन जैसे-जैसे इन जिहादियों की संख्या या बढ़ेगी वैसे-वैसे यहां के जो लोकल लोग है...
उनकी परेशानियां बढ़ने लगेगी...
अब आते हैं मुख्य बात पर मैंने नैना देवी मंदिर के जस्ट सामने एक रेस्टोरेंट है..
उसमें खाना खाया जिसका नाम था रॉक रेस्टोरेंट जैसे मैं उसे रेस्टोरेंट के अंदर इंटर हुआ तो वहां पर जो लोग बैठे हुए थे उनके माथे पर तिलक था..
जैसे कि मेरी आदत है की सबसे पहले मैं यह देखता हूं कुछ भी सामान खरीदने से पहले या कुछ भी खाने से पहले कि वह दुकान हिंदू की है या नहीं यहां भी वही हुआ जैसे ही मैंने उसको देखा उसके माथे पर तिलक था तो मुझे लगा शायद यह हिंदू है और हिंदू का ही रेस्टोरेंट है....
खाना खाकर जैसे ही मैं कैश काउंटर पर बिल देने के लिए गया, मैंने QR कोड स्कैन किया तो नाम आता है उस पर रियाज अहमद...
अब सोचने वाली बात यह है जहां यह लोग माइनॉरिटी में है, वहां यह लोग वहां के जो लोकल लोग हैं उनके काम धंधों पर धीरे-धीरे अपना कब्जा कर रहे हैं..
आज इन लोगों को उस मस्जिद से दिक्कत नहीं है ओर ना आज इन लोगों को इस बात से दिक्कत है कि यह लोग हिंदुओं के काम धंधों पर कब्जा कर रहे हैं.....
कल को ज़ब ये मलेछ, मंदिर में आई हुई बहन बेटियों को छेड़ेंगे... तब वहां का हिंदू सरकार को दोष देगा...
इतनी बड़ी मस्जिद बन गई वह भी वहां पर जो एक तरीके से टूरिस्ट के आकर्षण का केंद्र है यानी कि नैनी झील पर...
तब यहां की सरकार और यहां के लोकल्स कहां सो रहे थे?
मेरा कहना सिर्फ इतना है जब यह लोग इस तरीके की एक्टिविटीज करते हैं जैसे मस्जिद बनाना मजार बनाना तब हिंदू अपने आसपास हो रही इस तरीके की गतिविधियों को देखकर चुप कैसे रह रहा है....?
आने वाले समय में ऐसा ना हो यह दूसरा कश्मीर बन जाए जिस तरीके के हालात पिछले तीन दिन से मैं (नैनीताल ) उत्तराखंड में देख रहा हूं....
उत्तर प्रदेश के गढ़ गंगा के बाद से उसके बाद मुरादाबाद और फिर नैनीताल के रास्ते होते हुए कैंची धाम, अल्मोड़ा और कसार देवी मंदिर तक...
मैंने जो मुख्य रूप से चीज नोटिस की है वह यह है मुख्य मुख्य रास्तों पर यहां तक की जो नैनीताल से निकलकर अल्मोड़ा तक नेशनल हाईवे जाता है उसे पर भी काफी जगह मैंने देखा इन्होंने रोड के किनारो पर दुकान लगा रखी है और तो मस्जिद मजार बना रखी है अब यह लोगों का जो टारगेट है पूरे उत्तराखंड को अपने कब्जे में लेने का है... ऐसा मुझे लगता है....
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समय है सम्हल जाओ, वरना हिंदू अपने विनाश का कारण खुद बनेंगे....
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बंगाल में गीता, रामायण, को देखो क्या किया जा रहा है😭 मैने दस ग्रुप मे भेजा और हर दिन अलग अलग ग्रुप मे भेजूंगा बोलूंगा आप मोदी योगी शाह् तक पहुंच्ये और कांग्रेसी सेवक तक भी पहुंचाए 🙏🫵🤬
आप सभी को शारदीय नवरात्र के पंचमी तिथि को माँ दुर्गा के पांचवें स्वरूप स्कंदमाता की पूजा की हार्दिक शुभकामनाएँ ||
देवताओं के सेनापति कहे जाने वाले स्कंन्द कुमार, यानि कार्तिकेय जी की माता होने के कारण ही देवी माँ को स्कंदमाता कहा जाता है। इनके विग्रह में स्कन्द जी बालरूप में माता की गोद में बैठे हैं। माता का रंग पूर्णतः सफेद है और ये कमल के पुष्प पर विराजित रहती हैं, जिसके कारण इन्हें पद्मासना भी कहा जाता है। देवी माँ की चार भुजायें हैं। ऊपर की दाहिनी भुजा में ये अपने पुत्र स्कन्द को पकड़े हुए हैं और इनके निचले दाहिने हाथ तथा एक बाएं हाथ में कमल का फूल है, जबकि माता का दूसरा बायां हाथ अभय मुद्रा में रहता है। माना जाता है कि देवी माँ अपने भक्तों पर ठीक उसी प्रकार कृपा बनाये रखती हैं, जिस प्रकार एक माँ अपने बच्चों पर बनाकर रखती हैं। देवी माँ अपने भक्तों को सुख-शांति और समृद्धि प्रदान करती हैं।
साथ ही स्कंदमाता हमें सिखाती हैं कि हमारा जीवन एक संग्राम है और हम स्वयं अपने सेनापति हैं। लिहाजा देवी माँ से हमें सैन्य संचालन की प्रेरणा भी मिलती है।
शारदीय नवरात्रि 2025 के दौरान चतुर्थी तिथि 26 सितंबर सुबह 9 बजकर 34 मिनट तक रहेगी। इसलिए इस दिन भी आप माता कुष्मांडा की पूजा कर सकते हैं।
वहीं 9 बजकर 34 मिनट के बाद पंचमी तिथि लग जाएगी और 27 सितंबर दोपहर 12 बजकर 5 मिनट तक पंचमी तिथि रहेगी।
ऐसे में स्कंदमाता की पूजा 27 सितंबर को करना ही सही माना जाएगा।
#पांचवें_दिन_पूजा_का_शुभ_मुहूर्त
नवरात्रि के पांचवें दिन 27 सितंबर को ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 53 मिनट से शुरू होकर 5 बजकर 40 मिनट तक रहेगा। वहीं प्रात: कालीन संध्या सुबह 5 बजकर 17 मिनट से 6 बजकर 28 मिनट तक रहेगी। इस दौरान पूजा करना बेहद शुभ माना जाएगा। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 5 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक पूजा करना भी शुभ माना जाएगा। संध्या कालीन पूजा आप शाम 6 बजकर 30 मिनट से 7 बजकर 42 मिनट के कर सकते हैं।
#स्कंदमाता_को_प्रसन्न_करने_के_मंत्र
ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः
सिंहासनगता नित्यं पद्माञ्चितकरद्वया। शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी।
या देवी सर्वभूतेषु मां स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
दे वाञ्छित कामार्थे चन्द्रार्धकृतशेखराम्। सिंहरूढ़ा चतुर्भुजा स्कन्दमाता यशस्विनीम्।
#स्कंद_माता_की_आरती
जय तेरी हो स्कंद माता
पांचवां नाम तुम्हारा आता
सब के मन की जानन हारी
जग जननी सब की महतारी
तेरी ज्योत जलाता रहूं मैं
हरदम तुम्हें ध्याता रहूं मैं
कई नामों से तुझे पुकारा
मुझे एक है तेरा सहारा
कहीं पहाड़ों पर है डेरा
कई शहरो मैं तेरा बसेरा
हर मंदिर में तेरे नजारे
गुण गाए तेरे भगत प्यारे
भक्ति अपनी मुझे दिला दो
शक्ति मेरी बिगड़ी बना दो
इंद्र आदि देवता मिल सारे
करे पुकार तुम्हारे द्वारे
दुष्ट दैत्य जब चढ़ कर आए
तुम ही खंडा हाथ उठाए
दास को सदा बचाने आई
'चमन' की आस पुराने आई।
#स्कंदमाता को लगाएं इन चीजों का #भोग
स्कंद माता को पीले रंग के भोज्य पदार्थों का भोग लगाया जाता है। स्कंदमाता को पीला रंग अतिप्रिय है।
नवरात्रि के पांचवें दिन स्कंदमाता को पीली मिठाई, केसर मिश्रित खीर, केला, हलवा आदि भोग के रूप में अर्पित करना चाहिए॥
देवताओं के सेनापति कहे जाने वाले स्कंन्द कुमार, यानि कार्तिकेय जी की माता होने के कारण ही देवी माँ को स्कंदमाता कहा जाता है। इनके विग्रह में स्कन्द जी बालरूप में माता की गोद में बैठे हैं। माता का रंग पूर्णतः सफेद है और ये कमल के पुष्प पर विराजित रहती हैं, जिसके कारण इन्हें पद्मासना भी कहा जाता है। देवी माँ की चार भुजायें हैं। ऊपर की दाहिनी भुजा में ये अपने पुत्र स्कन्द को पकड़े हुए हैं और इनके निचले दाहिने हाथ तथा एक बाएं हाथ में कमल का फूल है, जबकि माता का दूसरा बायां हाथ अभय मुद्रा में रहता है। माना जाता है कि देवी माँ अपने भक्तों पर ठीक उसी प्रकार कृपा बनाये रखती हैं, जिस प्रकार एक माँ अपने बच्चों पर बनाकर रखती हैं। देवी माँ अपने भक्तों को सुख-शांति और समृद्धि प्रदान करती हैं।
साथ ही स्कंदमाता हमें सिखाती हैं कि हमारा जीवन एक संग्राम है और हम स्वयं अपने सेनापति हैं। लिहाजा देवी माँ से हमें सैन्य संचालन की प्रेरणा भी मिलती है।
शारदीय नवरात्रि 2025 के दौरान चतुर्थी तिथि 26 सितंबर सुबह 9 बजकर 34 मिनट तक रहेगी। इसलिए इस दिन भी आप माता कुष्मांडा की पूजा कर सकते हैं।
वहीं 9 बजकर 34 मिनट के बाद पंचमी तिथि लग जाएगी और 27 सितंबर दोपहर 12 बजकर 5 मिनट तक पंचमी तिथि रहेगी।
ऐसे में स्कंदमाता की पूजा 27 सितंबर को करना ही सही माना जाएगा।
#पांचवें_दिन_पूजा_का_शुभ_मुहूर्त
नवरात्रि के पांचवें दिन 27 सितंबर को ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 53 मिनट से शुरू होकर 5 बजकर 40 मिनट तक रहेगा। वहीं प्रात: कालीन संध्या सुबह 5 बजकर 17 मिनट से 6 बजकर 28 मिनट तक रहेगी। इस दौरान पूजा करना बेहद शुभ माना जाएगा। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 5 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक पूजा करना भी शुभ माना जाएगा। संध्या कालीन पूजा आप शाम 6 बजकर 30 मिनट से 7 बजकर 42 मिनट के कर सकते हैं।
#स्कंदमाता_को_प्रसन्न_करने_के_मंत्र
ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः
सिंहासनगता नित्यं पद्माञ्चितकरद्वया। शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी।
या देवी सर्वभूतेषु मां स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
दे वाञ्छित कामार्थे चन्द्रार्धकृतशेखराम्। सिंहरूढ़ा चतुर्भुजा स्कन्दमाता यशस्विनीम्।
#स्कंद_माता_की_आरती
जय तेरी हो स्कंद माता
पांचवां नाम तुम्हारा आता
सब के मन की जानन हारी
जग जननी सब की महतारी
तेरी ज्योत जलाता रहूं मैं
हरदम तुम्हें ध्याता रहूं मैं
कई नामों से तुझे पुकारा
मुझे एक है तेरा सहारा
कहीं पहाड़ों पर है डेरा
कई शहरो मैं तेरा बसेरा
हर मंदिर में तेरे नजारे
गुण गाए तेरे भगत प्यारे
भक्ति अपनी मुझे दिला दो
शक्ति मेरी बिगड़ी बना दो
इंद्र आदि देवता मिल सारे
करे पुकार तुम्हारे द्वारे
दुष्ट दैत्य जब चढ़ कर आए
तुम ही खंडा हाथ उठाए
दास को सदा बचाने आई
'चमन' की आस पुराने आई।
#स्कंदमाता को लगाएं इन चीजों का #भोग
स्कंद माता को पीले रंग के भोज्य पदार्थों का भोग लगाया जाता है। स्कंदमाता को पीला रंग अतिप्रिय है।
नवरात्रि के पांचवें दिन स्कंदमाता को पीली मिठाई, केसर मिश्रित खीर, केला, हलवा आदि भोग के रूप में अर्पित करना चाहिए॥
।। शारदीय नवरात्र, पांचवां दिन- माँ स्कंदमाता ।।
नवरात्र के पांचवे दिन मां दुर्गा के पांचवे स्वरुप स्कंदमाता की पूजा अर्चना की जाती है। स्कंदमाता माता की पूजा करने से नकारात्मक शक्तियों का माश होता है। स्कंदमाता अपने भक्तों के सभी काम बना देती हैं। असंभव से असंभव कार्य उनकी पूजा से पूरे हो जाते हैं। साथ ही स्कंदमाता की पूजा अर्चना करने से व्यक्ति को संतान सुख की प्राप्ति भी होती है। साथ ही व्यक्ति को सभी दुख दर्द से छुटकारा मिलता है। अतः प्रस्तुत है स्कंदमाता की पूजा विधि, भोग, मंत्र और आरती आदि-
स्कंदमाता का स्वरुप-
भगवान शिव की अर्धांगिनी के रुप में मां ने स्वामी कार्तिकेय को जन्म दिया था। भगवान कार्तिकेय का दूसरा नाम स्कंद है इसलिए मां दुर्गा के इस रुप को स्कंदमाता कहलाया। मां स्कांदमाता की चार भुजाएं हैं। मां भगवान कार्तिकेय को अपनी गोद में लेकर शेर पर सवार रहती है। मां के दोनों हाथों में कमल है। साथ ही स्कंदमाता की पूजा में धनुष बाण अर्पित करने चाहिए।
स्कंदमाता का भोग-
स्कंदमाता को पीले रंग की वस्तुएं सबसे अधिक प्रिय है। माता को केले का भोग लगाना चाहिए। उन्हें पीले रंग के फूल और फल अर्पित करने चाहिए। स्कंदमाता को आप चाहे तो केसर की खीर का भोग लगा सकते हैं। साथ ही मां को हरी इलायची भी अर्पित करके लौंग का जोड़ा चढ़ाएं।
स्कंदमाता का प्रिय रंग-
स्कंदमाता की पूजा में पीले रंग के वस्त्र पहनने चाहिए। आप चाहे तो सुनहरे रंग के वस्त्र भी पहन सकते हैं। साथ ही स्कंदमाता को भी इसे रंग के वस्त्र अर्पित करें।
मां स्कंदमाता का ध्यान मंत्र-
सिंहासना गता नित्यं पद्माश्रि तकरद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी।।
या देवी सर्वभूतेषु मां स्कंदमाता रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
स्कंदमाता की पूजा विधि-
रोजाना की तरह सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान कर लें और पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध कर लें। इसके बाद लकड़ी की चौकी पर पीले रंग का कपड़ा बिछा लें और स्कंदमाता की मूर्ति या फिर तस्वीर को स्थापित करें। फिर स्कंदमाता को पीले फूल से श्रृंगार का सामान अर्पित करें। साथ ही पीले रंग के वस्त्र भी पहनाएं। इसके बाद स्कंदमाता का ध्यान करते हुए उनके मंत्र का १०८ बार जप करें और उन्हें पान का पत्ता, इल्याची, लौंग आदि चीजें अर्पित करें। फिर दुर्गासप्तशती का पाठ करें। इन सबसे बाद स्कंदमाता की आरती करके सभी को प्रसाद वितरीत कर दें। अंत में मां के सामने शीश झुकाकर आपकी जो भी मनोकामना हो उसे बोंलें।
मां स्कंदमाता की आरती-
जय हो स्कंद माता। पांचवा नाम तुम्हारा आता।।
सब के मन की जानन हारी। जग जननी सब की महतारी।।
जय हो स्कंद माता। पांचवा नाम तुम्हारा आता।।
तेरी ज्योत जलाता रहूं मैं। हरदम तुम्हें ध्याता रहूं मैं।।
कई नामों से तुझे पुकारा। मुझे एक है तेरा सहारा।।
जय हो स्कंद माता। पांचवा नाम तुम्हारा आता।।
कही पहाड़ो पर हैं डेरा। कई शहरों में तेरा बसेरा।।
हर मंदिर में तेरे नजारे। गुण गाये तेरे भगत प्यारे।।
भगति अपनी मुझे दिला दो। शक्ति मेरी बिगड़ी बना दो।।
इंद्र आदी देवता मिल सारे। करे पुकार तुम्हारे द्वारे।।
दुष्ट दत्य जब चढ़ कर आएं। तुम ही खंडा हाथ उठाएं।।
दासो को सदा बचाने आई। ‘चमन’ की आस पुजाने आई।।
जय हो स्कंद माता। पांचवा नाम तुम्हारा आता।।
अंत में क्षमा प्रार्थना जरूर करें-
अपराधसहस्त्राणि क्रियन्तेऽहर्निशं मया।
दासोऽयमिति मां मत्वा क्षमस्व परमेश्वरि।।
।। श्री स्कंदमातायै नमः ।।
नवरात्र के पांचवे दिन मां दुर्गा के पांचवे स्वरुप स्कंदमाता की पूजा अर्चना की जाती है। स्कंदमाता माता की पूजा करने से नकारात्मक शक्तियों का माश होता है। स्कंदमाता अपने भक्तों के सभी काम बना देती हैं। असंभव से असंभव कार्य उनकी पूजा से पूरे हो जाते हैं। साथ ही स्कंदमाता की पूजा अर्चना करने से व्यक्ति को संतान सुख की प्राप्ति भी होती है। साथ ही व्यक्ति को सभी दुख दर्द से छुटकारा मिलता है। अतः प्रस्तुत है स्कंदमाता की पूजा विधि, भोग, मंत्र और आरती आदि-
स्कंदमाता का स्वरुप-
भगवान शिव की अर्धांगिनी के रुप में मां ने स्वामी कार्तिकेय को जन्म दिया था। भगवान कार्तिकेय का दूसरा नाम स्कंद है इसलिए मां दुर्गा के इस रुप को स्कंदमाता कहलाया। मां स्कांदमाता की चार भुजाएं हैं। मां भगवान कार्तिकेय को अपनी गोद में लेकर शेर पर सवार रहती है। मां के दोनों हाथों में कमल है। साथ ही स्कंदमाता की पूजा में धनुष बाण अर्पित करने चाहिए।
स्कंदमाता का भोग-
स्कंदमाता को पीले रंग की वस्तुएं सबसे अधिक प्रिय है। माता को केले का भोग लगाना चाहिए। उन्हें पीले रंग के फूल और फल अर्पित करने चाहिए। स्कंदमाता को आप चाहे तो केसर की खीर का भोग लगा सकते हैं। साथ ही मां को हरी इलायची भी अर्पित करके लौंग का जोड़ा चढ़ाएं।
स्कंदमाता का प्रिय रंग-
स्कंदमाता की पूजा में पीले रंग के वस्त्र पहनने चाहिए। आप चाहे तो सुनहरे रंग के वस्त्र भी पहन सकते हैं। साथ ही स्कंदमाता को भी इसे रंग के वस्त्र अर्पित करें।
मां स्कंदमाता का ध्यान मंत्र-
सिंहासना गता नित्यं पद्माश्रि तकरद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी।।
या देवी सर्वभूतेषु मां स्कंदमाता रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
स्कंदमाता की पूजा विधि-
रोजाना की तरह सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान कर लें और पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध कर लें। इसके बाद लकड़ी की चौकी पर पीले रंग का कपड़ा बिछा लें और स्कंदमाता की मूर्ति या फिर तस्वीर को स्थापित करें। फिर स्कंदमाता को पीले फूल से श्रृंगार का सामान अर्पित करें। साथ ही पीले रंग के वस्त्र भी पहनाएं। इसके बाद स्कंदमाता का ध्यान करते हुए उनके मंत्र का १०८ बार जप करें और उन्हें पान का पत्ता, इल्याची, लौंग आदि चीजें अर्पित करें। फिर दुर्गासप्तशती का पाठ करें। इन सबसे बाद स्कंदमाता की आरती करके सभी को प्रसाद वितरीत कर दें। अंत में मां के सामने शीश झुकाकर आपकी जो भी मनोकामना हो उसे बोंलें।
मां स्कंदमाता की आरती-
जय हो स्कंद माता। पांचवा नाम तुम्हारा आता।।
सब के मन की जानन हारी। जग जननी सब की महतारी।।
जय हो स्कंद माता। पांचवा नाम तुम्हारा आता।।
तेरी ज्योत जलाता रहूं मैं। हरदम तुम्हें ध्याता रहूं मैं।।
कई नामों से तुझे पुकारा। मुझे एक है तेरा सहारा।।
जय हो स्कंद माता। पांचवा नाम तुम्हारा आता।।
कही पहाड़ो पर हैं डेरा। कई शहरों में तेरा बसेरा।।
हर मंदिर में तेरे नजारे। गुण गाये तेरे भगत प्यारे।।
भगति अपनी मुझे दिला दो। शक्ति मेरी बिगड़ी बना दो।।
इंद्र आदी देवता मिल सारे। करे पुकार तुम्हारे द्वारे।।
दुष्ट दत्य जब चढ़ कर आएं। तुम ही खंडा हाथ उठाएं।।
दासो को सदा बचाने आई। ‘चमन’ की आस पुजाने आई।।
जय हो स्कंद माता। पांचवा नाम तुम्हारा आता।।
अंत में क्षमा प्रार्थना जरूर करें-
अपराधसहस्त्राणि क्रियन्तेऽहर्निशं मया।
दासोऽयमिति मां मत्वा क्षमस्व परमेश्वरि।।
।। श्री स्कंदमातायै नमः ।।
Forwarded from Bajrang dal || बजरंग दल
सभी सज्जनों को सूचित किया जाता है कि आने वाले शनिवार को *श्री श्याम सिटी मोदीनगर में हनुमान चालीसा* का आयोजन किया जाएगा समय शाम 6:00 बजे , इसलिए सभी सज्जन समय से पहुंचकर हनुमान चालीसा का पाठ कर बाबा बजरंगी का आशीर्वाद ग्रहण करें..
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हमारा पतनशील समाज
वर्तमान समय में यौन विकृतियां समाज के अनुशासन पर हावी हो गई हैं
और यह नारी को देवता मानने वाले सनातन धर्मानुयाइयों में ज़्यादा हैं
मुसलमानों में , जहाँ कि स्त्री को खेती मानते हैं , या कहें कि नारी को बराबरी का दर्जा प्राप्त नहीं है , वहाँ की औरतें रील बनाने वाली महिलाओं में आनुपातिक रूप से बहुत कम हैं ।
लेकिन
रील देखने वाले पुरुषों में अधिकतर मुसलमान पुरुष ही हैं
आप किसी भी रील बनाने वाली महिलाओं की वाल पर जाइये , आपको वहाँ ज़्यादातर पुरुष मुस्लिम ही मिलेंगे ।
पर यहाँ हम हिंदू -मुसलमान से भी अलग , सारे समाज की बात करते हैं , अब जब यह कामुक नृत्य करती औरतें , मोबाईल के माध्यम से हर हाथ में पहुंच गईं हैं , तो यह और भी अधिक घातक हो गई हैं । वह जहाँ किशोरावस्था में कदम रख रहे नई उम्र के लड़के तक जा रही हैं , तो वैसे ही उम्र पार कर चुके , बीबी के साथ जवानी बिता चुके उम्रदराज व्यक्ति के पास भी ।
और माफ कीजिएगा , पराई स्त्री को मां बहन , आजकल कोई नहीं समझता । और मुस्लिम व्यवस्था में तो अपनी पराई का कोई कांसेप्ट ही नहीं है , उनके लिए तो सड़क पर घूमती , घर पर आराम करती हर औरत , खुदा की दी वह खेती है जिसे जोतना उसके लिये सवाब का काम है ।
इसलिए हम आजकल देखते हैं कि यौन अपराध
भारी संख्या में बढ़ गए हैं । जिसकी वजह है पुरुषों में बढ़ती जा रही यौन कुण्ठा , जिसके बढ़ने का मुख्य कारण समाज में बढ़ती जा रही वर्जनाहीनता है । और वर्जनाएँ टूटने का सबसे मुख्य कारण , परिवार व्यवस्था का टूटना है , और परिवार व्यवस्था के टूटने का कारण धर्म से विमुखता है ।
लोगों ने धर्म को केवल पूजा करने का तरीक़ा मान लिया है और ईश्वर को ऐसा बेवकूफ जो फूल चढ़ाने , घंटी बजाने से और प्रसाद चढ़ाने मात्र से पट जाता है । स्थिति यह है कि आजकल , स्वच्छता , पवित्रता, परिवार व बड़ों के प्रति श्रद्धा को ढकोसला मान लिया गया है , आजकल तो माएँ अपनी बेटियों को टेस्ट ड्राइव करने के लिये प्रेरित कर रही हैं , वे क्या धर्म और संस्कार का अवधान अपने बच्चों में करेंगी ।
हमारे लिये शोचनीय विषय यह है कि पहले बड़े शहरों में , एक वैश्याओं का मोहल्ला होता था , जिसके पास से गुज़रने में शरीफ लोग डरते थे कोई उस मोहल्ले के आसपास देख न ले , नहीं तो जवाब देना मुश्किल हो जाता था । अब तो घर घर वीडियो बन रहे हैं , व उन नाच गा रही औरतों का वीडियो उनके घरवाले यहाँ तक कि कभी-कभी तो उनके पति ही बना रहे हैं ।
फिर क्या शर्म और क्या संकोच
ऐसी स्थिति में हम क्या कर सकते हैं ?
मैं यह पोस्ट कुछ सक्रिय महिलाओं को ही टैग कर रहा हूँ, ताकि यह चर्चा अपने सही अंजाम तक पहुंच सके ।
वर्तमान समय में यौन विकृतियां समाज के अनुशासन पर हावी हो गई हैं
और यह नारी को देवता मानने वाले सनातन धर्मानुयाइयों में ज़्यादा हैं
मुसलमानों में , जहाँ कि स्त्री को खेती मानते हैं , या कहें कि नारी को बराबरी का दर्जा प्राप्त नहीं है , वहाँ की औरतें रील बनाने वाली महिलाओं में आनुपातिक रूप से बहुत कम हैं ।
लेकिन
रील देखने वाले पुरुषों में अधिकतर मुसलमान पुरुष ही हैं
आप किसी भी रील बनाने वाली महिलाओं की वाल पर जाइये , आपको वहाँ ज़्यादातर पुरुष मुस्लिम ही मिलेंगे ।
पर यहाँ हम हिंदू -मुसलमान से भी अलग , सारे समाज की बात करते हैं , अब जब यह कामुक नृत्य करती औरतें , मोबाईल के माध्यम से हर हाथ में पहुंच गईं हैं , तो यह और भी अधिक घातक हो गई हैं । वह जहाँ किशोरावस्था में कदम रख रहे नई उम्र के लड़के तक जा रही हैं , तो वैसे ही उम्र पार कर चुके , बीबी के साथ जवानी बिता चुके उम्रदराज व्यक्ति के पास भी ।
और माफ कीजिएगा , पराई स्त्री को मां बहन , आजकल कोई नहीं समझता । और मुस्लिम व्यवस्था में तो अपनी पराई का कोई कांसेप्ट ही नहीं है , उनके लिए तो सड़क पर घूमती , घर पर आराम करती हर औरत , खुदा की दी वह खेती है जिसे जोतना उसके लिये सवाब का काम है ।
इसलिए हम आजकल देखते हैं कि यौन अपराध
भारी संख्या में बढ़ गए हैं । जिसकी वजह है पुरुषों में बढ़ती जा रही यौन कुण्ठा , जिसके बढ़ने का मुख्य कारण समाज में बढ़ती जा रही वर्जनाहीनता है । और वर्जनाएँ टूटने का सबसे मुख्य कारण , परिवार व्यवस्था का टूटना है , और परिवार व्यवस्था के टूटने का कारण धर्म से विमुखता है ।
लोगों ने धर्म को केवल पूजा करने का तरीक़ा मान लिया है और ईश्वर को ऐसा बेवकूफ जो फूल चढ़ाने , घंटी बजाने से और प्रसाद चढ़ाने मात्र से पट जाता है । स्थिति यह है कि आजकल , स्वच्छता , पवित्रता, परिवार व बड़ों के प्रति श्रद्धा को ढकोसला मान लिया गया है , आजकल तो माएँ अपनी बेटियों को टेस्ट ड्राइव करने के लिये प्रेरित कर रही हैं , वे क्या धर्म और संस्कार का अवधान अपने बच्चों में करेंगी ।
हमारे लिये शोचनीय विषय यह है कि पहले बड़े शहरों में , एक वैश्याओं का मोहल्ला होता था , जिसके पास से गुज़रने में शरीफ लोग डरते थे कोई उस मोहल्ले के आसपास देख न ले , नहीं तो जवाब देना मुश्किल हो जाता था । अब तो घर घर वीडियो बन रहे हैं , व उन नाच गा रही औरतों का वीडियो उनके घरवाले यहाँ तक कि कभी-कभी तो उनके पति ही बना रहे हैं ।
फिर क्या शर्म और क्या संकोच
ऐसी स्थिति में हम क्या कर सकते हैं ?
मैं यह पोस्ट कुछ सक्रिय महिलाओं को ही टैग कर रहा हूँ, ताकि यह चर्चा अपने सही अंजाम तक पहुंच सके ।
‼️ करालं महाकाल कालं कृपालं ‼️
महाकाल की काल से अनन्तता का वर्णन मत्स्यपुराण में इस प्रकार हुआ है।
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चतुर्युगसहस्त्राणि दिनमेकं पितामह:।
पितामह: सहस्त्राणि विष्णोर्घटिकमुच्यते ।।
विष्णुरेकसहस्त्राणि पलमेको महेश्वर:।
☆ एक हजार चतुर्युगी का ब्रह्मा जी का एक दिन होता है तथा एक हजार ब्रह्माओं के बीतने पर विष्णु जी की एक घड़ी कही गई है । एक हजार विष्णुओं के अनन्तर महेश्वर का एक पल होता है ।
▪︎ मानवी वर्षों से सत्रह लाख अठ्ठाइस हजार वर्षों का सत्ययुग, बारह लाख छियानवें हजार वर्षों का त्रेतायुग, आठ लाख चौंसठ हजार वर्षों का द्वापर, चार लाख बत्तीस हजार वर्षों का कलियुग - इन चारों का योग ४३,२०,००० हजार वर्ष होता है । इसे एक चतुर्युगी या महायुग कहते हैं ।
▪︎ ब्रह्मा जी के दिन में एक हजार चतुर्युगी बीत जाती है, इतनी ही ब्रह्मा जी की रात्रि है । ब्रह्मा जी के दिन को सृष्टि और रात्रि को प्रलय कहते हैं । दो हजार महायुगों के ब्रह्मा के दिन-रात्रि को कल्प कहते हैं ।
▪︎ एक कल्प में मनुष्यों के आठ अरब चौंसठ करोड़ वर्ष बीत जाते हैं । इसी गणना से उसके तीस दिन का महीना, बारह महीनों का वर्ष तथा सौ वर्ष की ब्रह्मा की आयु कही है । ब्रह्मवैवर्त पुराण में उनकी आयु १०८ वर्ष की कही है ।
▪︎ ब्रह्मा जी के दिव्य १०० वर्षों में मनुष्यों के ३१ नील, २० खरब, ४० अरब वर्ष बीत जाते हैं । भगवान् विष्णु के आयु में मनुष्यों के ९३ पद्म, ३१ नील, २० खरब वर्ष बीत जाते हैं । भगवान् शिव की आयु में मनुष्यों के २२ लाख, २९ हजार , ४८८ शंख वर्ष बीत जाते हैं ।
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📒 दैवीमीमांसाभाष्य के उत्पत्तिपाद के चौथे सूत्र में भगवान् शिव की काल से अनन्तता इस प्रकार बताया गया है।
"चतुर्युगसहस्त्राणि दिनम् पैतामहं भवेत् ।
पितामह सहस्त्राणि विष्णोश्च घटिका मता ।
विष्णोर्द्वादश लक्षाणि कलार्धं रौद्रमुच्यते ।।"
एक हजार चतुर्युगी का ब्रह्मा का एक दिन होता है । हजार पितामहों की विष्णु की एक घटी होती है। बारह लाख विष्णुओं की शंकर की आधी कला कही है। यही बात 'शक्ति-रहस्य' तन्त्र में भी कही गई है।
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📒 ️ कल्याण में जो उपनिषद अंक छपा था, उसके अनुसार।
🔹️ ब्रह्मा जी की आयु :--- ३१,१०,४०,००,००,००,००० 【इकतीस नील, दस खरब, चालीस अरब】
🔹️ विष्णु की आयु :--- १८,६६,२४,००,००,००,००,००,०० 【अठारह शंख, छासठ नील, चौबीस पद्म वर्ष】
🔹️ भगवान् शंकर की आयु :---
४४,७८,९६,८०,००,०००००,००००००००००० 【चार करोड़, सैंतालीस लाख, नवासी हजार, छः सौ अस्सी शंख वर्ष।】
❗️इससे भगवान् शंकर की काल से अनन्तता सिद्ध होती है।
महाकाल की काल से अनन्तता का वर्णन मत्स्यपुराण में इस प्रकार हुआ है।
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चतुर्युगसहस्त्राणि दिनमेकं पितामह:।
पितामह: सहस्त्राणि विष्णोर्घटिकमुच्यते ।।
विष्णुरेकसहस्त्राणि पलमेको महेश्वर:।
☆ एक हजार चतुर्युगी का ब्रह्मा जी का एक दिन होता है तथा एक हजार ब्रह्माओं के बीतने पर विष्णु जी की एक घड़ी कही गई है । एक हजार विष्णुओं के अनन्तर महेश्वर का एक पल होता है ।
▪︎ मानवी वर्षों से सत्रह लाख अठ्ठाइस हजार वर्षों का सत्ययुग, बारह लाख छियानवें हजार वर्षों का त्रेतायुग, आठ लाख चौंसठ हजार वर्षों का द्वापर, चार लाख बत्तीस हजार वर्षों का कलियुग - इन चारों का योग ४३,२०,००० हजार वर्ष होता है । इसे एक चतुर्युगी या महायुग कहते हैं ।
▪︎ ब्रह्मा जी के दिन में एक हजार चतुर्युगी बीत जाती है, इतनी ही ब्रह्मा जी की रात्रि है । ब्रह्मा जी के दिन को सृष्टि और रात्रि को प्रलय कहते हैं । दो हजार महायुगों के ब्रह्मा के दिन-रात्रि को कल्प कहते हैं ।
▪︎ एक कल्प में मनुष्यों के आठ अरब चौंसठ करोड़ वर्ष बीत जाते हैं । इसी गणना से उसके तीस दिन का महीना, बारह महीनों का वर्ष तथा सौ वर्ष की ब्रह्मा की आयु कही है । ब्रह्मवैवर्त पुराण में उनकी आयु १०८ वर्ष की कही है ।
▪︎ ब्रह्मा जी के दिव्य १०० वर्षों में मनुष्यों के ३१ नील, २० खरब, ४० अरब वर्ष बीत जाते हैं । भगवान् विष्णु के आयु में मनुष्यों के ९३ पद्म, ३१ नील, २० खरब वर्ष बीत जाते हैं । भगवान् शिव की आयु में मनुष्यों के २२ लाख, २९ हजार , ४८८ शंख वर्ष बीत जाते हैं ।
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📒 दैवीमीमांसाभाष्य के उत्पत्तिपाद के चौथे सूत्र में भगवान् शिव की काल से अनन्तता इस प्रकार बताया गया है।
"चतुर्युगसहस्त्राणि दिनम् पैतामहं भवेत् ।
पितामह सहस्त्राणि विष्णोश्च घटिका मता ।
विष्णोर्द्वादश लक्षाणि कलार्धं रौद्रमुच्यते ।।"
एक हजार चतुर्युगी का ब्रह्मा का एक दिन होता है । हजार पितामहों की विष्णु की एक घटी होती है। बारह लाख विष्णुओं की शंकर की आधी कला कही है। यही बात 'शक्ति-रहस्य' तन्त्र में भी कही गई है।
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📒 ️ कल्याण में जो उपनिषद अंक छपा था, उसके अनुसार।
🔹️ ब्रह्मा जी की आयु :--- ३१,१०,४०,००,००,००,००० 【इकतीस नील, दस खरब, चालीस अरब】
🔹️ विष्णु की आयु :--- १८,६६,२४,००,००,००,००,००,०० 【अठारह शंख, छासठ नील, चौबीस पद्म वर्ष】
🔹️ भगवान् शंकर की आयु :---
४४,७८,९६,८०,००,०००००,००००००००००० 【चार करोड़, सैंतालीस लाख, नवासी हजार, छः सौ अस्सी शंख वर्ष।】
❗️इससे भगवान् शंकर की काल से अनन्तता सिद्ध होती है।
🤯 "#तमिलनाडु में विजय जोसेफ की सियासी बिसात: ग्लैमर, विदेशी फंडिंग और खतरनाक एजेंडा का गठजोड़!"
आज #भारत को जिस सबसे बड़े खतरों का सामना करना पड़ रहा है, उसमें विदेशी ताकतों की दखलअंदाजी और अंदरूनी गद्दारी सबसे ऊपर हैं। कुछ महीनों पहले तक #बाइडेन प्रशासन में अमेरिकी विदेश मंत्रालय के दक्षिण और मध्य एशियाई मामलों के सहायक राज्य सचिव डोनाल्ड लू के नेतृत्व में एक व्यापक साजिश चलाई गयी, जिसका उद्देश्य भारत की छवि को खराब करना और #द्रविड़ एजेंडे को बढ़ावा देना था।
लू का ट्रैक रिकॉर्ड चिंताजनक है। वह उन अमेरिकी #राजनयिकों में से थे जिन्होंने पाकिस्तान, बांग्लादेश और अन्य देशों में शासन परिवर्तन की गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाई। अब अमेरिकी स्टेट का निशाना भारत है, विशेषकर तमिलनाडु।
तक डोनाल्ड लू पर यह आरोप लगते रहे कि वे भारत विरोधी #पत्रकारों और यूट्यूबरों का नेटवर्क बना रहे हैं, ताकि भारत की छवि खराब की जा सके और तमिलनाडु में द्रविड़ अलगाववाद को बल मिले। लेकिन 2025 की शुरुआत में डोनाल्ड लू का कार्यकाल खत्म हो गया और वे अमेरिकी सरकार में अब किसी भी पद पर नहीं हैं।
हालांकि सवाल खत्म नहीं हुआ। डोनाल्ड लू चले गए, लेकिन उनके कार्यकाल में जो #नेटवर्क व नैरेटिव खड़ा किए गए, वे आज भी जिंदा हैं। अमेरिकी डीप स्टेट यानी अमेरिका की छुपी हुई नीति-निर्माता लॉबी और उसके सहयोगी संस्थान—फंडिंग, मीडिया ट्रैनिंग, एनजीओ आदि के माध्यम से भारत में कुछ पत्रकारों, डिजिटल इन्फ्लुएंसर्स और एक्टिविस्टों तक दखल बनाए रखते हैं।
शायद उन अंधे बहरे किन्तु जहरीले बोल वाले लकीर के फकीरों को अब समझ आये कि क्यूँ #मोदी ने पिछले के पिछले अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों में "अबकी बार ट्रम्प सरकार" का खुलेआम प्रदर्शन कर रहे थे,और इस बार तमाम राष्ट्रवादी ट्रम्प की सत्ता में वापसी की प्रार्थना!
तमिलनाडु जैसे राज्यों में यह #नैरेटिव एकदम अलग देश और पहचान बनाने पर जोर देता है। एमके स्टालिन द्वारा खुले मंच से द्रविड़ राष्ट्रवाद की बातें करना और PFI, SDPI, LTTE के नए रूप में फिर से राजनीति में आना, यही बताता है कि अलगाववादी और भारत विरोधी ताकतें यहाँ कितनी मुस्तैदी से काम कर रही हैं।
पिछले हफ्ते नये नये लॉन्च हुये #नेता विजय जोसेफ (तलपति विजय) की रैली में भगदड़ मचने से 40 लोगों की मौत हो गई—जिसमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। यह सिर्फ एक "दुर्घटना" नहीं बल्कि भारी लापरवाही और राजनीति का भयानक मेल है।
विजय जोसेफ की छवि एक मसीहा की तरह बनाई जा रही है, जो युवाओं में नया अलगाववादी जहर घोलने का प्रयास कर रहा है।
असल मुद्दा यह है कि विजय जोसेफ किसी साधारण #फिल्म स्टार की तरह राजनीति में नहीं आए हैं, बल्कि उनकी एक गहरी रणनीति है। 2009 से ही वे अपने फैन क्लब्स को "विजय मक्कल इयक्कम" के नाम से संगठित करते आए हैं। कागज़ों पर यह एक सामाजिक संस्था दिखती है, लेकिन वास्तव में यह #राजनीतिक कैडर तैयार करने का साधन रहा है। तमिलनाडु भर में फैले 85,000 फैन क्लब्स को राजनीतिक कार्यकर्ताओं की फौज में बदलने का यह दीर्घकालिक प्रोजेक्ट था।
उनकी तमिलगा वेत्री कड़गम (#TVK) पार्टी का घोषणापत्र भी चिंताजनक है। वे पेरियार के सभी विचारों को अपनाने की बात करते हैं सिवाय नास्तिकता के—यानी अलगाववाद की पूरी फिलॉसफी अपनाना चाहते हैं लेकिन अपनी #ईसाई पहचान भी बनाए रखना चाहते हैं। यह दोगलापन एक चतुर राजनीतिक चाल है जिसका मकसद द्रविड़वाद और ईसाई मिशनरी एजेंडे को मिलाकर एक शक्तिशाली गठजोड़ बनाना है।
बड़ा सवाल यह है कि विजय की राजनीति के लिए इतना पैसा कहाँ से आ रहा है। उनके चाचा "जेवियर ब्रित्तो" का XB फिल्म क्रिएटर्स कंपनी के जरिए फिल्म प्रोडक्शन से लेकर राजनीतिक फंडिंग तक का जाल बिछा हुआ है।
जेवियर अल्फांसे (विजय के दूसरे चाचा) 1925 में #फ्रांसीसी जेसुइट पादरी द्वारा स्थापित चेन्नई के प्रसिद्ध "लोयोला कॉलेज" के प्रिंसिपल थे ( 1992-95) और उन पर भ्रष्टाचार, यौन उत्पीड़न और कॉलेज के फंड को फिल्म बिजनेस में लगाने के आरोप हैं।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि विजय की पत्नी संगीता #ब्रिटेन की नागरिक हैं जो यूके में रियल एस्टेट कंपनी की बड़ी शेयरहोल्डर है, जो मनी लांड्रिंग के संदेह खड़े करता है।
विजय जोसेफ के उदय के पीछे उसी #मिशनरी समर्थित "लोयोला सिंडिकेट" का हाथ बताया जा रहा है—यह जेसुइट संस्थाओं (Society of Jesus) का नेटवर्क है जो शिक्षा के नाम पर धर्मांतरण और राजनीतिक प्रभाव का काम करता है। लोयोला कॉलेज #चेन्नई से लेकर सेंट ब्रित्तो एकेडमी तक के जरिए यह नेटवर्क करोड़ों रुपए जुटाकर अपने एजेंडे को आगे बढ़ाता है।
विजय के फिल्मों में शुरुआत में "जीसस सेव्स" जैसे मैसेज दिए जाते थे, बाद में #सेक्युलर छवि अपनाई गई—यह सब एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।
आज #भारत को जिस सबसे बड़े खतरों का सामना करना पड़ रहा है, उसमें विदेशी ताकतों की दखलअंदाजी और अंदरूनी गद्दारी सबसे ऊपर हैं। कुछ महीनों पहले तक #बाइडेन प्रशासन में अमेरिकी विदेश मंत्रालय के दक्षिण और मध्य एशियाई मामलों के सहायक राज्य सचिव डोनाल्ड लू के नेतृत्व में एक व्यापक साजिश चलाई गयी, जिसका उद्देश्य भारत की छवि को खराब करना और #द्रविड़ एजेंडे को बढ़ावा देना था।
लू का ट्रैक रिकॉर्ड चिंताजनक है। वह उन अमेरिकी #राजनयिकों में से थे जिन्होंने पाकिस्तान, बांग्लादेश और अन्य देशों में शासन परिवर्तन की गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाई। अब अमेरिकी स्टेट का निशाना भारत है, विशेषकर तमिलनाडु।
तक डोनाल्ड लू पर यह आरोप लगते रहे कि वे भारत विरोधी #पत्रकारों और यूट्यूबरों का नेटवर्क बना रहे हैं, ताकि भारत की छवि खराब की जा सके और तमिलनाडु में द्रविड़ अलगाववाद को बल मिले। लेकिन 2025 की शुरुआत में डोनाल्ड लू का कार्यकाल खत्म हो गया और वे अमेरिकी सरकार में अब किसी भी पद पर नहीं हैं।
हालांकि सवाल खत्म नहीं हुआ। डोनाल्ड लू चले गए, लेकिन उनके कार्यकाल में जो #नेटवर्क व नैरेटिव खड़ा किए गए, वे आज भी जिंदा हैं। अमेरिकी डीप स्टेट यानी अमेरिका की छुपी हुई नीति-निर्माता लॉबी और उसके सहयोगी संस्थान—फंडिंग, मीडिया ट्रैनिंग, एनजीओ आदि के माध्यम से भारत में कुछ पत्रकारों, डिजिटल इन्फ्लुएंसर्स और एक्टिविस्टों तक दखल बनाए रखते हैं।
शायद उन अंधे बहरे किन्तु जहरीले बोल वाले लकीर के फकीरों को अब समझ आये कि क्यूँ #मोदी ने पिछले के पिछले अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों में "अबकी बार ट्रम्प सरकार" का खुलेआम प्रदर्शन कर रहे थे,और इस बार तमाम राष्ट्रवादी ट्रम्प की सत्ता में वापसी की प्रार्थना!
तमिलनाडु जैसे राज्यों में यह #नैरेटिव एकदम अलग देश और पहचान बनाने पर जोर देता है। एमके स्टालिन द्वारा खुले मंच से द्रविड़ राष्ट्रवाद की बातें करना और PFI, SDPI, LTTE के नए रूप में फिर से राजनीति में आना, यही बताता है कि अलगाववादी और भारत विरोधी ताकतें यहाँ कितनी मुस्तैदी से काम कर रही हैं।
पिछले हफ्ते नये नये लॉन्च हुये #नेता विजय जोसेफ (तलपति विजय) की रैली में भगदड़ मचने से 40 लोगों की मौत हो गई—जिसमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। यह सिर्फ एक "दुर्घटना" नहीं बल्कि भारी लापरवाही और राजनीति का भयानक मेल है।
विजय जोसेफ की छवि एक मसीहा की तरह बनाई जा रही है, जो युवाओं में नया अलगाववादी जहर घोलने का प्रयास कर रहा है।
असल मुद्दा यह है कि विजय जोसेफ किसी साधारण #फिल्म स्टार की तरह राजनीति में नहीं आए हैं, बल्कि उनकी एक गहरी रणनीति है। 2009 से ही वे अपने फैन क्लब्स को "विजय मक्कल इयक्कम" के नाम से संगठित करते आए हैं। कागज़ों पर यह एक सामाजिक संस्था दिखती है, लेकिन वास्तव में यह #राजनीतिक कैडर तैयार करने का साधन रहा है। तमिलनाडु भर में फैले 85,000 फैन क्लब्स को राजनीतिक कार्यकर्ताओं की फौज में बदलने का यह दीर्घकालिक प्रोजेक्ट था।
उनकी तमिलगा वेत्री कड़गम (#TVK) पार्टी का घोषणापत्र भी चिंताजनक है। वे पेरियार के सभी विचारों को अपनाने की बात करते हैं सिवाय नास्तिकता के—यानी अलगाववाद की पूरी फिलॉसफी अपनाना चाहते हैं लेकिन अपनी #ईसाई पहचान भी बनाए रखना चाहते हैं। यह दोगलापन एक चतुर राजनीतिक चाल है जिसका मकसद द्रविड़वाद और ईसाई मिशनरी एजेंडे को मिलाकर एक शक्तिशाली गठजोड़ बनाना है।
बड़ा सवाल यह है कि विजय की राजनीति के लिए इतना पैसा कहाँ से आ रहा है। उनके चाचा "जेवियर ब्रित्तो" का XB फिल्म क्रिएटर्स कंपनी के जरिए फिल्म प्रोडक्शन से लेकर राजनीतिक फंडिंग तक का जाल बिछा हुआ है।
जेवियर अल्फांसे (विजय के दूसरे चाचा) 1925 में #फ्रांसीसी जेसुइट पादरी द्वारा स्थापित चेन्नई के प्रसिद्ध "लोयोला कॉलेज" के प्रिंसिपल थे ( 1992-95) और उन पर भ्रष्टाचार, यौन उत्पीड़न और कॉलेज के फंड को फिल्म बिजनेस में लगाने के आरोप हैं।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि विजय की पत्नी संगीता #ब्रिटेन की नागरिक हैं जो यूके में रियल एस्टेट कंपनी की बड़ी शेयरहोल्डर है, जो मनी लांड्रिंग के संदेह खड़े करता है।
विजय जोसेफ के उदय के पीछे उसी #मिशनरी समर्थित "लोयोला सिंडिकेट" का हाथ बताया जा रहा है—यह जेसुइट संस्थाओं (Society of Jesus) का नेटवर्क है जो शिक्षा के नाम पर धर्मांतरण और राजनीतिक प्रभाव का काम करता है। लोयोला कॉलेज #चेन्नई से लेकर सेंट ब्रित्तो एकेडमी तक के जरिए यह नेटवर्क करोड़ों रुपए जुटाकर अपने एजेंडे को आगे बढ़ाता है।
विजय के फिल्मों में शुरुआत में "जीसस सेव्स" जैसे मैसेज दिए जाते थे, बाद में #सेक्युलर छवि अपनाई गई—यह सब एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।
तमिलनाडु में फिल्म इंडस्ट्री और राजनीति का गहरा नाता है। MGR, जयललिता, करुणानिधि सभी इसी राह से आए थे। लेकिन विजय का मामला अलग है क्योंकि वे पहले ऐसे फिल्म स्टार हैं जिनके पास एक #अंतर्राष्ट्रीय ब्रांड वैल्यू है और साथ ही संदिग्ध विदेशी कनेक्शन भी हैं।
#डोनाल्ड लू के जाने के बाद भारत-अमेरिका संबंधों में थोड़ी मजबूती आई है क्योंकि अब पॉल कपूर जैसे अधिकारी सामने हैं, जो खुले तौर पर भारत के सहयोगी और पाकिस्तान-चीन की जिहादी नीति के खिलाफ हैं। लेकिन अमरीकी "डीप स्टेट" और कुछ पश्चिमी मीडिया का नेटवर्क अभी भी भारत को बदनाम करने और तमिलनाडु जैसे राज्यों में दिमागी जंग छेड़ने में लगा है।
विजय जोसेफ जैसे लोग इसी एजेंडे के नए चेहरे हैं—फिल्मी ग्लैमर और धार्मिक कट्टरता का घातक मिश्रण।सबसे बड़ी सीख यही है—यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति या सरकार के खिलाफ नहीं, बल्कि एक पूरी व्यवस्था के खिलाफ है।
हमें सतर्क रहना होगा, सोशल #मीडिया और पत्रकारिता में छुपे विदेश-प्रेरित नैरेटिव्स को पहचानना होगा, और ऐसे राजनेताओं, सिलेब्रिटीज,एक्टिविस्टों, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स, मीलार्डों और उन पत्रकारों के असली चेहरे को बेनकाब करना होगा जो चमक-दमक के पीछे खतरनाक एजेंडे छुपाए बैठे हैं।
अलगाववाद और भारत विरोधी योजनाओं का जवाब मुस्तैदी, सतर्कता और एकता से देना ही आज की सच्ची राष्ट्रसेवा है।
#डोनाल्ड लू के जाने के बाद भारत-अमेरिका संबंधों में थोड़ी मजबूती आई है क्योंकि अब पॉल कपूर जैसे अधिकारी सामने हैं, जो खुले तौर पर भारत के सहयोगी और पाकिस्तान-चीन की जिहादी नीति के खिलाफ हैं। लेकिन अमरीकी "डीप स्टेट" और कुछ पश्चिमी मीडिया का नेटवर्क अभी भी भारत को बदनाम करने और तमिलनाडु जैसे राज्यों में दिमागी जंग छेड़ने में लगा है।
विजय जोसेफ जैसे लोग इसी एजेंडे के नए चेहरे हैं—फिल्मी ग्लैमर और धार्मिक कट्टरता का घातक मिश्रण।सबसे बड़ी सीख यही है—यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति या सरकार के खिलाफ नहीं, बल्कि एक पूरी व्यवस्था के खिलाफ है।
हमें सतर्क रहना होगा, सोशल #मीडिया और पत्रकारिता में छुपे विदेश-प्रेरित नैरेटिव्स को पहचानना होगा, और ऐसे राजनेताओं, सिलेब्रिटीज,एक्टिविस्टों, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स, मीलार्डों और उन पत्रकारों के असली चेहरे को बेनकाब करना होगा जो चमक-दमक के पीछे खतरनाक एजेंडे छुपाए बैठे हैं।
अलगाववाद और भारत विरोधी योजनाओं का जवाब मुस्तैदी, सतर्कता और एकता से देना ही आज की सच्ची राष्ट्रसेवा है।
Forwarded from Hindustani Beast (RSS)
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🫡6✍1
क्या आपने एक चीज नोटिस की ???
यह "I 🧡 *** " वाली रैली सिर्फ बीजेपी शासित राज्य में ही निकल रही हैं...
केरल, जम्मू कश्मीर, झारखंड, पंजाब, तेलंगाना, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल सभी जगह मुस्लिम बड़ी संख्या में हैं, मगर वहां पर यह यह "I 🧡 *** " वाली रैली नहीं निकल रही...
माहौल खराब सिर्फ बीजेपी शासित राज्यों में किया जा रहा है। असल में इनकी INDI गठबंधन के बड़े-बड़े नेताओं के साथ बैठक हुई है। INDI गठबंधन के नेताओं ने ही इन्हें पूरी प्लानिंग दी है पूरा स्क्रिप्ट दिया है कि आपको भाजपा शासित राज्यों में दंगे करने हैं...
लगता है ये सब बाबा योगी से फिजियोथैरेपी कराना चाहते हैं इसलिए उन्होंने उत्तर प्रदेश को चुना। बरेली में तो कल हो भी गई है...!!!
😔😏😥🤔
यह "I 🧡 *** " वाली रैली सिर्फ बीजेपी शासित राज्य में ही निकल रही हैं...
केरल, जम्मू कश्मीर, झारखंड, पंजाब, तेलंगाना, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल सभी जगह मुस्लिम बड़ी संख्या में हैं, मगर वहां पर यह यह "I 🧡 *** " वाली रैली नहीं निकल रही...
माहौल खराब सिर्फ बीजेपी शासित राज्यों में किया जा रहा है। असल में इनकी INDI गठबंधन के बड़े-बड़े नेताओं के साथ बैठक हुई है। INDI गठबंधन के नेताओं ने ही इन्हें पूरी प्लानिंग दी है पूरा स्क्रिप्ट दिया है कि आपको भाजपा शासित राज्यों में दंगे करने हैं...
लगता है ये सब बाबा योगी से फिजियोथैरेपी कराना चाहते हैं इसलिए उन्होंने उत्तर प्रदेश को चुना। बरेली में तो कल हो भी गई है...!!!
😔😏😥🤔