Forwarded from RSS (बाबा नीम करोली || Neem Karoli Baba)
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जिस जिस समुदाय का विश्वास उठता जाएगा उसका उत्थान होता जाएगा ।
1. बंग्लादेशी मुसलमानों ने लोकतंत्र को समाप्त कर एक महीने में ही बंगलादेश हिंदू विहीन कर दिया । दुनिया और मोदी कुछ ना कर सके ।
2. नेपाली लोगों में अपनी ऊंगली लोकतंत्र के पिछवाड़े में घुसा दी एक दिन में कामरेडों की गर्दनें काट कर फेंक दी गई ।
3. पंजाब में सिखों ने लोकतंत्र के स्थान पर कानून हाथ में ले लिया और गांव के गांव हिंदू विहीन कर दिए । 35000 हिंदुओं का कत्ल करने के बाद भी आज समस्त लोकतंत्र सिखों का गुणगान कर रहा है ।
4. लद्दाख में बौद्ध लोकतंत्र पर भरोसा नहीं कर रहे ।
5. ईसाई भी लोकतंत्र पर भरोसा ना कर यूरोप में क्रुसेड के नाम पर मुसलमानों को जिंदा जला देने वाली अपनी कातिल फौज को फिर से बुला रहे हैं
केवल हिंदुओं के दिमाग में ही लोकतंत्र के नाम का सूअर का बाल फंसा हुआ है ।बाकि सब जाग चुके हैं ।
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1. बंग्लादेशी मुसलमानों ने लोकतंत्र को समाप्त कर एक महीने में ही बंगलादेश हिंदू विहीन कर दिया । दुनिया और मोदी कुछ ना कर सके ।
2. नेपाली लोगों में अपनी ऊंगली लोकतंत्र के पिछवाड़े में घुसा दी एक दिन में कामरेडों की गर्दनें काट कर फेंक दी गई ।
3. पंजाब में सिखों ने लोकतंत्र के स्थान पर कानून हाथ में ले लिया और गांव के गांव हिंदू विहीन कर दिए । 35000 हिंदुओं का कत्ल करने के बाद भी आज समस्त लोकतंत्र सिखों का गुणगान कर रहा है ।
4. लद्दाख में बौद्ध लोकतंत्र पर भरोसा नहीं कर रहे ।
5. ईसाई भी लोकतंत्र पर भरोसा ना कर यूरोप में क्रुसेड के नाम पर मुसलमानों को जिंदा जला देने वाली अपनी कातिल फौज को फिर से बुला रहे हैं
केवल हिंदुओं के दिमाग में ही लोकतंत्र के नाम का सूअर का बाल फंसा हुआ है ।बाकि सब जाग चुके हैं ।
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शारदीय नवरात्र की महानवमी नवरात्र का आखिरी दिन होता है और इस दिन मां दुर्गा के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा करते हैं.
ज्योतिषियों के अनुसार, इस दिन जो भी भक्त मां सिद्धिदात्री की पूरी श्रद्धा उपासना करता है, उसकी हर इच्छा पूरी होती है. इसलिए महानवमी का दिन मां दुर्गा की उपासना का एक अहम दिन माना जाता है. कईं लोग इस दिन भी कन्या पूजन कर शारदीय नवरात्र का पारण करते हैं...
सिद्धिदात्री चार भुजाओं वाली हैं, जिनमें एक हाथ में उन्होंने गदा और दूसरे हाथ में चक्र धारण किया हुआ है. उनके तीसरे हाथ में कमल का पुष्प और चौथे हाथ में शंख रहता है. मां सिद्धिदात्री देवी दुर्गा के समान सिंह की सवारी करती हैं. .
सिद्धगन्धर्वयक्षाघैरसुरैरमरैरपि. सेव्यमाना
सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी.
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॐ सिद्धिदात्री देव्यै नमः..
(मां सिद्धिदात्री की कथा )
पौराणिक मान्यता के अनुसार मां सिद्धिदात्री का प्राकट्य देवी-देवताओं के तेज से तब हुआ था, जब देवतागण महिषासुर के अत्याचारों से परेशान होकर भगवान शिव और भगवान विष्णु के पास पहुंचे थे. इसके बाद देवताओं के तेज से मां सिद्धिदात्री प्रकट हुईं. मान्यता यह भी है कि भगवान शिव ने मां सिद्धिदात्री की कठिन साधना करके आठ सिद्धियां प्राप्त की थीं. जिसके बाद उनका आधा शरीर देवी का हो गया था और उन्हें अर्धनारीश्वर के रूप में पूजा होतीहै�🔔🐅।। नवरात्र की नववीं शक्ति।।🐅🔔🚩🙏🙏🙏🙏
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹
🙏🕉️🔱 *माँ सिद्धिदात्री*🔱🕉️🙏
🙏 या देवी सर्वभूतेषु महागौरी रूपेण संस्थिता।🌷
🔔 नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।🙏
🙏माँ सिद्धिदात्री स्वरूप एवं पौरिणीक महात्म्य 👇‼️
🌹🌼🙏।। श्रीदुर्गादेव्यै नमो नमः ।।🙏🌼🌹
🙏 वन्दे वांछित मनोरथार्थ चन्द्रार्घकृत शेखराम्।
कमलस्थितां चतुर्भुजा सिद्धीदात्री यशस्वनीम्।।🌹
नवरात्र-पूजन के नौवें दिन माँ सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। नवमी के दिन सभी सिद्धियों की प्राप्ति होती है। सिद्धियां हासिल करने के उद्देश्य से जो साधक भगवती सिद्धिदात्री की पूजा कर रहे हैं उन्हें नवमी के दिन इनका पूजन अवश्य करना चाहिए।
सिद्धि और मोक्ष देने वाली दुर्गा को सिद्धिदात्री कहा जाता है। नवरात्र के नौवें दिन जीवन में यश बल और धन की प्राप्ति हेतु इनकी पूजा की जाती है। तथा नवरात्रों की नौ रात्रियों का समापन होता है। माँ दुर्गा की नौवीं शक्ति सिद्धिदात्री हैं, माँ दुर्गा के सभी रूपों में अंतिम रूप देवी सिद्धिदात्री का होता है।
देवी सिद्धिदात्री का रूप अत्यंत सौम्य है, देवी की चार भुजाएं हैं दायीं भुजा में माता ने चक्र और गदा धारण किया है, मां बांयी भुजा में शंख और कमल का फूल है। प्रसन्न होने पर माँ सिद्धिदात्री सम्पूर्ण जगत की रिद्धि सिद्धि अपने भक्तों को प्रदान करती हैं।
मां दुर्गा की नौवीं शक्ति का नाम सिद्धिदात्री है। वे सिद्धिदात्री, सिंह वाहिनी, चतुर्भुजा तथा प्रसन्नवदना हैं। मार्कंडेय पुराण में अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व एवं वशित्व- ये आठ सिद्धियां बतलाई गई हैं। इन सभी सिद्धियों को देने वाली सिद्धिदात्री मां हैं। मां के दिव्य स्वरूप का ध्यान हमें अज्ञान, तमस, असंतोष आदि से निकालकर स्वाध्याय, उद्यम, उत्साह, कर्त्तव्यनिष्ठा की ओर ले जाता है और नैतिक व चारित्रिक रूप से सबल बनाता है। हमारी तृष्णाओं व वासनाओं को नियंत्रित करके हमारी अंतरात्मा को दिव्य पवित्रता से परिपूर्ण करते हुए हमें स्वयं पर विजय प्राप्त करने की शक्ति देता है।
देवी पुराण के अनुसार, भगवान शिव ने इन्हीं शक्तिस्वरूपा देवी की उपासना करके सभी सिद्धियां प्राप्त की थीं, जिसके प्रभाव से शिवजी का स्वरूप *अर्द्धनारीश्वर* का हो गया था।
माँ सिद्धिदात्री का ध्यान मंत्र...‼️
वन्दे वांछित मनोरथार्थ चन्द्रार्घकृत शेखराम्।
कमलस्थितां चतुर्भुजा सिद्धीदात्री यशस्वनीम्।।
स्वर्णावर्णा निर्वाणचक्रस्थितां नवम् दुर्गा त्रिनेत्राम्।
शख, चक्र, गदा, पदम, धरां सिद्धीदात्री भजेम्।।
पटाम्बर, परिधानां मृदुहास्या नानालंकार भूषिताम्।
मंजीर, हार, केयूर, किंकिणि रत्नकुण्डल मण्डिताम्।।
प्रफुल्ल वदना पल्लवाधरां कातं कपोला पीनपयोधराम्।
कमनीयां लावण्यां श्रीणकटि निम्ननाभि नितम्बनीम्।।
माँ सिद्धिदात्री का स्तोत्र पाठ...‼️
कंचनाभा शखचक्रगदापद्मधरा मुकुटोज्वलो।
स्मेरमुखी शिवपत्नी सिद्धिदात्री नमोस्तुते।।
पटाम्बर परिधानां नानालंकारं भूषिता।
नलिस्थितां नलनार्क्षी सिद्धीदात्री नमोस्तुते।।
परमानंदमयी देवी परब्रह्म परमात्मा।
परमशक्ति, परमभक्ति, सिद्धिदात्री नमोस्तुते।।
विश्वकर्ती, विश्वभती, विश्वहर्ती, विश्वप्रीता।
विश्व वार्चिता विश्वातीता सिद्धिदात्री नमोस्तुते।।
भुक्तिमुक्तिकारिणी भक्तकष्टनिवारिणी।
भव सागर तारिणी सिद्धिदात्री नमोस्तुते।।
ज्योतिषियों के अनुसार, इस दिन जो भी भक्त मां सिद्धिदात्री की पूरी श्रद्धा उपासना करता है, उसकी हर इच्छा पूरी होती है. इसलिए महानवमी का दिन मां दुर्गा की उपासना का एक अहम दिन माना जाता है. कईं लोग इस दिन भी कन्या पूजन कर शारदीय नवरात्र का पारण करते हैं...
सिद्धिदात्री चार भुजाओं वाली हैं, जिनमें एक हाथ में उन्होंने गदा और दूसरे हाथ में चक्र धारण किया हुआ है. उनके तीसरे हाथ में कमल का पुष्प और चौथे हाथ में शंख रहता है. मां सिद्धिदात्री देवी दुर्गा के समान सिंह की सवारी करती हैं. .
सिद्धगन्धर्वयक्षाघैरसुरैरमरैरपि. सेव्यमाना
सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी.
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॐ सिद्धिदात्री देव्यै नमः..
(मां सिद्धिदात्री की कथा )
पौराणिक मान्यता के अनुसार मां सिद्धिदात्री का प्राकट्य देवी-देवताओं के तेज से तब हुआ था, जब देवतागण महिषासुर के अत्याचारों से परेशान होकर भगवान शिव और भगवान विष्णु के पास पहुंचे थे. इसके बाद देवताओं के तेज से मां सिद्धिदात्री प्रकट हुईं. मान्यता यह भी है कि भगवान शिव ने मां सिद्धिदात्री की कठिन साधना करके आठ सिद्धियां प्राप्त की थीं. जिसके बाद उनका आधा शरीर देवी का हो गया था और उन्हें अर्धनारीश्वर के रूप में पूजा होतीहै�🔔🐅।। नवरात्र की नववीं शक्ति।।🐅🔔🚩🙏🙏🙏🙏
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🙏🕉️🔱 *माँ सिद्धिदात्री*🔱🕉️🙏
🙏 या देवी सर्वभूतेषु महागौरी रूपेण संस्थिता।🌷
🔔 नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।🙏
🙏माँ सिद्धिदात्री स्वरूप एवं पौरिणीक महात्म्य 👇‼️
🌹🌼🙏।। श्रीदुर्गादेव्यै नमो नमः ।।🙏🌼🌹
🙏 वन्दे वांछित मनोरथार्थ चन्द्रार्घकृत शेखराम्।
कमलस्थितां चतुर्भुजा सिद्धीदात्री यशस्वनीम्।।🌹
नवरात्र-पूजन के नौवें दिन माँ सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। नवमी के दिन सभी सिद्धियों की प्राप्ति होती है। सिद्धियां हासिल करने के उद्देश्य से जो साधक भगवती सिद्धिदात्री की पूजा कर रहे हैं उन्हें नवमी के दिन इनका पूजन अवश्य करना चाहिए।
सिद्धि और मोक्ष देने वाली दुर्गा को सिद्धिदात्री कहा जाता है। नवरात्र के नौवें दिन जीवन में यश बल और धन की प्राप्ति हेतु इनकी पूजा की जाती है। तथा नवरात्रों की नौ रात्रियों का समापन होता है। माँ दुर्गा की नौवीं शक्ति सिद्धिदात्री हैं, माँ दुर्गा के सभी रूपों में अंतिम रूप देवी सिद्धिदात्री का होता है।
देवी सिद्धिदात्री का रूप अत्यंत सौम्य है, देवी की चार भुजाएं हैं दायीं भुजा में माता ने चक्र और गदा धारण किया है, मां बांयी भुजा में शंख और कमल का फूल है। प्रसन्न होने पर माँ सिद्धिदात्री सम्पूर्ण जगत की रिद्धि सिद्धि अपने भक्तों को प्रदान करती हैं।
मां दुर्गा की नौवीं शक्ति का नाम सिद्धिदात्री है। वे सिद्धिदात्री, सिंह वाहिनी, चतुर्भुजा तथा प्रसन्नवदना हैं। मार्कंडेय पुराण में अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व एवं वशित्व- ये आठ सिद्धियां बतलाई गई हैं। इन सभी सिद्धियों को देने वाली सिद्धिदात्री मां हैं। मां के दिव्य स्वरूप का ध्यान हमें अज्ञान, तमस, असंतोष आदि से निकालकर स्वाध्याय, उद्यम, उत्साह, कर्त्तव्यनिष्ठा की ओर ले जाता है और नैतिक व चारित्रिक रूप से सबल बनाता है। हमारी तृष्णाओं व वासनाओं को नियंत्रित करके हमारी अंतरात्मा को दिव्य पवित्रता से परिपूर्ण करते हुए हमें स्वयं पर विजय प्राप्त करने की शक्ति देता है।
देवी पुराण के अनुसार, भगवान शिव ने इन्हीं शक्तिस्वरूपा देवी की उपासना करके सभी सिद्धियां प्राप्त की थीं, जिसके प्रभाव से शिवजी का स्वरूप *अर्द्धनारीश्वर* का हो गया था।
माँ सिद्धिदात्री का ध्यान मंत्र...‼️
वन्दे वांछित मनोरथार्थ चन्द्रार्घकृत शेखराम्।
कमलस्थितां चतुर्भुजा सिद्धीदात्री यशस्वनीम्।।
स्वर्णावर्णा निर्वाणचक्रस्थितां नवम् दुर्गा त्रिनेत्राम्।
शख, चक्र, गदा, पदम, धरां सिद्धीदात्री भजेम्।।
पटाम्बर, परिधानां मृदुहास्या नानालंकार भूषिताम्।
मंजीर, हार, केयूर, किंकिणि रत्नकुण्डल मण्डिताम्।।
प्रफुल्ल वदना पल्लवाधरां कातं कपोला पीनपयोधराम्।
कमनीयां लावण्यां श्रीणकटि निम्ननाभि नितम्बनीम्।।
माँ सिद्धिदात्री का स्तोत्र पाठ...‼️
कंचनाभा शखचक्रगदापद्मधरा मुकुटोज्वलो।
स्मेरमुखी शिवपत्नी सिद्धिदात्री नमोस्तुते।।
पटाम्बर परिधानां नानालंकारं भूषिता।
नलिस्थितां नलनार्क्षी सिद्धीदात्री नमोस्तुते।।
परमानंदमयी देवी परब्रह्म परमात्मा।
परमशक्ति, परमभक्ति, सिद्धिदात्री नमोस्तुते।।
विश्वकर्ती, विश्वभती, विश्वहर्ती, विश्वप्रीता।
विश्व वार्चिता विश्वातीता सिद्धिदात्री नमोस्तुते।।
भुक्तिमुक्तिकारिणी भक्तकष्टनिवारिणी।
भव सागर तारिणी सिद्धिदात्री नमोस्तुते।।
धर्मार्थकाम प्रदायिनी महामोह विनाशिनी।
मोक्षदायिनी सिद्धीदायिनी सिद्धिदात्री नमोस्तुते।।
🌹🙏 जय मां सिद्धिदात्री।। जय मां भवानी🙏🌹
माँ सिद्धिदात्री जी की आरती...‼️
जै सिद्धि दात्री मां तूं है सिद्धि की दाता।
तूं भक्तों की रक्षक तूं दासों की माता।।
तेरा नाम लेते ही मिलती है सिद्धि।
तेरे नाम से मन की होती है शुद्धि।।
कठिन काम सिद्ध करती हो तुम।
जभी हाथ सेवक के सिर धरती हो तुम।।
तेरी पूजा में तो न कोई विधि है।
तूं जगदम्बे दाती तूं सर्व सिद्धि है।।
रविवार को तेरा सुमिरन करे जो।
तेरी मूर्ति को ही मन में धरे जो।।
तूं सब काज उसके करती हो पूरे।
कभी काम उसके रहे न अधूरे।।
तुम्हारी दया और तुम्हारी है माया।
रखे जिसके सिर पर मैया अपनी छाया।।
सर्व सिद्धि दाती वह है भाग्य शाली।
जो है तेरे दर का ही अम्बे सवाली।।
हिमाचल है पर्वत जहां वास तेरा।
महा नन्दा मंदिर में है वास तेरा।।
मुझे आसरा है तुम्हारा ही माता।
चमन है सवाली तूं जिसकी दाता।।🙏🙏
प्रार्थना...‼️
🔱 सर्व मंगल मांगल्ये , शिवे सर्वार्थ साधिके,🔱
🔱 शरण्ये त्रयम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते।🔱
🌷 या देवी सर्वभूतेषु सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।🌹🙏
🙏 बुद्धिं देहि यशो देहि कवित्वं देहि देहि मे।
मूढत्वं च हरेद्देवि त्राहि मां शरणागतम्।।🌹👏
🐅🙏 जय माँ आदिशक्ति सिद्धिदात्री 🙏🐅
मोक्षदायिनी सिद्धीदायिनी सिद्धिदात्री नमोस्तुते।।
🌹🙏 जय मां सिद्धिदात्री।। जय मां भवानी🙏🌹
माँ सिद्धिदात्री जी की आरती...‼️
जै सिद्धि दात्री मां तूं है सिद्धि की दाता।
तूं भक्तों की रक्षक तूं दासों की माता।।
तेरा नाम लेते ही मिलती है सिद्धि।
तेरे नाम से मन की होती है शुद्धि।।
कठिन काम सिद्ध करती हो तुम।
जभी हाथ सेवक के सिर धरती हो तुम।।
तेरी पूजा में तो न कोई विधि है।
तूं जगदम्बे दाती तूं सर्व सिद्धि है।।
रविवार को तेरा सुमिरन करे जो।
तेरी मूर्ति को ही मन में धरे जो।।
तूं सब काज उसके करती हो पूरे।
कभी काम उसके रहे न अधूरे।।
तुम्हारी दया और तुम्हारी है माया।
रखे जिसके सिर पर मैया अपनी छाया।।
सर्व सिद्धि दाती वह है भाग्य शाली।
जो है तेरे दर का ही अम्बे सवाली।।
हिमाचल है पर्वत जहां वास तेरा।
महा नन्दा मंदिर में है वास तेरा।।
मुझे आसरा है तुम्हारा ही माता।
चमन है सवाली तूं जिसकी दाता।।🙏🙏
प्रार्थना...‼️
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🐅🙏 जय माँ आदिशक्ति सिद्धिदात्री 🙏🐅
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*अंक ज्योतिष विशेषज्ञ*
*आपके जीवन की संख्याओं का रहस्य उजागर करें!*
- *जन्म तिथि और नाम संख्या विश्लेषण*
- *व्यक्तिगत संख्या का अर्थ और प्रभाव*
- *जीवन में सफलता और समृद्धि के तरीके*
*मिलें और जानें अपने जीवन की संख्याओं का रहस्य!*
*नाम:मीत महाकाल महादेव*
☎️7575091399
🪀94263 60094
📧Geereejaaptiaastropoint@gmail.com
*अंक ज्योतिष से अपने जीवन को बेहतर बनाएं!*
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Forwarded from कैलाश के निवासी (Meett Meett)
श्री सोमेश्वर महादेव कुबेर भंडारी करनाली धाम
प्रातः श्रृंगार दर्शन
🌓 आश्विन शुक्ल नवमी
नवरात्रि (नवमी पूजा),
🔆 बुधवार, 1 अक्टूबर 2025
जय भोलेनाथ • जय माँ दुर्गा • जय कुबेर भंडारी 🚩
#श्रीसोमेश्वरमहादेव #कुबेरभंडारीकरनाली #श्रृंगारदर्शन #नवरात्रि2025 #दुर्गापंचमी #स्कन्दमाता_पूजा #जयमहाकाल #करनालीधाम #KuberBhandari #SomeshwarMahadev #DurgaMaa #NavratriDarshan #ShivShakti #DevotionalVibes #जयमातादी
प्रातः श्रृंगार दर्शन
🌓 आश्विन शुक्ल नवमी
नवरात्रि (नवमी पूजा),
🔆 बुधवार, 1 अक्टूबर 2025
जय भोलेनाथ • जय माँ दुर्गा • जय कुबेर भंडारी 🚩
#श्रीसोमेश्वरमहादेव #कुबेरभंडारीकरनाली #श्रृंगारदर्शन #नवरात्रि2025 #दुर्गापंचमी #स्कन्दमाता_पूजा #जयमहाकाल #करनालीधाम #KuberBhandari #SomeshwarMahadev #DurgaMaa #NavratriDarshan #ShivShakti #DevotionalVibes #जयमातादी
लालकृष्ण आडवाणी जी को एक बार लद्दाख जाने का अवसर मिला था, जिस गेस्ट हाउस में वो ठहराये गये थे, उसके पीछे उन्हें किसी नदी के बहने की कल-कल ध्वनि सुनाई दी, आडवाणी जी ने पूछा कि ये कौन सी नदी है? जबाब मिला - "सिन्धु"
ये शब्द सुनते ही बिना जूता-चप्पल पहने और सुरक्षा की चिंता किये ही आडवाणी जी नंगे पांव सिन्धु की ओर दौड़ पड़े, और जाकर उसके जल को प्रणाम किया।
जानते हैं क्यों क्योंकि आडवाणी जी मूलतः जिस क्षेत्र से आते हैं, वो सिंधु नदी के नाम पर ही हैं - सिंधु देश। आडवाणी जी को सिन्धु नदी ने अपनी जननी जन्मभूमि के करीब होने की अनुभूति कराई।
ये सिंधु नदी हिंदू सभ्यता का प्राचीनतम प्रमाण है जो आज भी विद्यमान है,
– इसी के तीर पर वेदों की ऋचाओं का दर्शन ऋषियों को हुआ था।
– ऋग्वेद के कई मंत्र इस पवित्र नदी के लिए लिए समर्पित हैं।
– इस नदी का स्मरण हम प्रतिदिन हमारे स्नान मंत्र में करते हैं।
गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती ।
नर्मदे सिन्धु कावेरि जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरु ॥
– इसी के किनारे हड़प्पा और मोहनजोदड़ो जैसी प्राचीन सभ्यताएं विकसित हुईं।
– इसी के नाम पर एक सागर का नाम है, जिसे अपनी अज्ञानता में अरब सागर कह देते हैं, जबकि वह सिन्धु सागर है।
लगभग 3200 किलोमीटर तक प्रवाहमान यह नदी लगभग बारह लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को सिंचित करती है मगर दुर्भाग्य यह कि पाकिस्तान अधिकृत भारतीय कश्मीर के उनके कब्जे में जाने के बाद यह नदी भारत के केवल डेढ़ सौ किलोमीटर क्षेत्र में ही बह रही है, और इसकी अपार जीवनदायिनी जलराशि का उपयोग अब शत्रु मुल्क कर रहा है, और हमें इसके लिए कोई पीड़ा भी नहीं होती।
इसी नदी में पंजाब की पांच नदियां आकर विलीन होती हैं जो इसकी पवित्रता को बहुगुणित कर देती है।
एक बात और पाकिस्तान में प्रवाहमान यह एकमात्र नदी है जिसका नाम आज तक शत्रु बदल नहीं पाये हैं, यानि आशा की किरणें अभी धूमिल नहीं हुई है।
बिन सिन्धु, हम कैसे हिन्दू?
इसी पीड़ा को हृदय में लिए हिन्दू राजनीति के लौहपुरुष भारत रत्न माननीय श्री लालकृष्ण आडवाणी जी ने सिन्धु नदी के तट पर प्रतिवर्ष सिन्धु मेला का आयोजन आरम्भ किया था।
आज जब उन्हें देश के सर्वोच्च भारत रत्न से सम्मानित किया गया है तो पवित्र सिन्धु नदी भारत भूमि में पुनः पूर्णरूप से प्रवाहित हो, ये संकल्प भी अवश्य लेना चाहिए।
चित्र - इस चित्र में श्रद्धेय श्री लालकृष्ण आडवाणी जी पूज्य काँची कामकोटि शंकराचार्य श्री जयेन्द्र सरस्वती जी महाराज के सानिध्य में विधिपूर्वक सिन्धु नदी का अभिषेक कर रहे हैं।
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ये शब्द सुनते ही बिना जूता-चप्पल पहने और सुरक्षा की चिंता किये ही आडवाणी जी नंगे पांव सिन्धु की ओर दौड़ पड़े, और जाकर उसके जल को प्रणाम किया।
जानते हैं क्यों क्योंकि आडवाणी जी मूलतः जिस क्षेत्र से आते हैं, वो सिंधु नदी के नाम पर ही हैं - सिंधु देश। आडवाणी जी को सिन्धु नदी ने अपनी जननी जन्मभूमि के करीब होने की अनुभूति कराई।
ये सिंधु नदी हिंदू सभ्यता का प्राचीनतम प्रमाण है जो आज भी विद्यमान है,
– इसी के तीर पर वेदों की ऋचाओं का दर्शन ऋषियों को हुआ था।
– ऋग्वेद के कई मंत्र इस पवित्र नदी के लिए लिए समर्पित हैं।
– इस नदी का स्मरण हम प्रतिदिन हमारे स्नान मंत्र में करते हैं।
गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती ।
नर्मदे सिन्धु कावेरि जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरु ॥
– इसी के किनारे हड़प्पा और मोहनजोदड़ो जैसी प्राचीन सभ्यताएं विकसित हुईं।
– इसी के नाम पर एक सागर का नाम है, जिसे अपनी अज्ञानता में अरब सागर कह देते हैं, जबकि वह सिन्धु सागर है।
लगभग 3200 किलोमीटर तक प्रवाहमान यह नदी लगभग बारह लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को सिंचित करती है मगर दुर्भाग्य यह कि पाकिस्तान अधिकृत भारतीय कश्मीर के उनके कब्जे में जाने के बाद यह नदी भारत के केवल डेढ़ सौ किलोमीटर क्षेत्र में ही बह रही है, और इसकी अपार जीवनदायिनी जलराशि का उपयोग अब शत्रु मुल्क कर रहा है, और हमें इसके लिए कोई पीड़ा भी नहीं होती।
इसी नदी में पंजाब की पांच नदियां आकर विलीन होती हैं जो इसकी पवित्रता को बहुगुणित कर देती है।
एक बात और पाकिस्तान में प्रवाहमान यह एकमात्र नदी है जिसका नाम आज तक शत्रु बदल नहीं पाये हैं, यानि आशा की किरणें अभी धूमिल नहीं हुई है।
बिन सिन्धु, हम कैसे हिन्दू?
इसी पीड़ा को हृदय में लिए हिन्दू राजनीति के लौहपुरुष भारत रत्न माननीय श्री लालकृष्ण आडवाणी जी ने सिन्धु नदी के तट पर प्रतिवर्ष सिन्धु मेला का आयोजन आरम्भ किया था।
आज जब उन्हें देश के सर्वोच्च भारत रत्न से सम्मानित किया गया है तो पवित्र सिन्धु नदी भारत भूमि में पुनः पूर्णरूप से प्रवाहित हो, ये संकल्प भी अवश्य लेना चाहिए।
चित्र - इस चित्र में श्रद्धेय श्री लालकृष्ण आडवाणी जी पूज्य काँची कामकोटि शंकराचार्य श्री जयेन्द्र सरस्वती जी महाराज के सानिध्य में विधिपूर्वक सिन्धु नदी का अभिषेक कर रहे हैं।
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🕉 ।। *श्री गणेशाय नमः* ।। 🕉
*सुप्रभातम् स्नेह वंदनम्*
🌐 *आज का पंचांग* 🌐
⛳ *तिथि*……( १२ ) द्वादशी ⛳️
🙏 शनिप्रदोष 🙏
🌼 पंचक 🌼
0️⃣4️⃣-1️⃣0️⃣-2⃣0⃣2️⃣5️⃣
🔔 *वार*……..शनिवार 🔔
🦚 *नक्षत्र*…..धनिष्ठा 🦚
🪔 *योग*……..शूल 🪔
✳️*करण*…….कौलव ✳️
🌅 *सूर्योदय* :-०६ः३३ 🌅
🌌 *सूर्यास्त* :-०६ः२३ 🌌
🌓 *पक्ष*....………शुक्ल 🌓
🌝 *चन्द्र राशि*….कुम्भ 🌝
⏺️ *ऋतु*.......…..शरद ⏺️
🍀 *अयन*………दक्षिण 🍀
🪷 *मास*.……….आश्विन 🪷
🌻*कलियुगाब्द*….५१२७🌻
🌎 *विक्रम संवत्*.....२०८१ 🌎
⭐️ *शक संवत्*...... १९४७ ⭐️
🪻अभिजीत …..मध्याह्न १२ः०९ से १२ः४८ तक 🪻
🌚 राहुकाल …..प्रातः ०९ः३१ से १०ः५८ तक 🌚
💐*।। आपका दिन मंगलमय हो ।।* 💐
🙏 🌹 *जय श्री कृष्ण* 🌹🙏
🕉 ।। *श्री गणेशाय नमः* ।। 🕉
*सुप्रभातम् स्नेह वंदनम्*
🌐 *आज का पंचांग* 🌐
⛳ *तिथि*……( १२ ) द्वादशी ⛳️
🙏 शनिप्रदोष 🙏
🌼 पंचक 🌼
0️⃣4️⃣-1️⃣0️⃣-2⃣0⃣2️⃣5️⃣
🔔 *वार*……..शनिवार 🔔
🦚 *नक्षत्र*…..धनिष्ठा 🦚
🪔 *योग*……..शूल 🪔
✳️*करण*…….कौलव ✳️
🌅 *सूर्योदय* :-०६ः३३ 🌅
🌌 *सूर्यास्त* :-०६ः२३ 🌌
🌓 *पक्ष*....………शुक्ल 🌓
🌝 *चन्द्र राशि*….कुम्भ 🌝
⏺️ *ऋतु*.......…..शरद ⏺️
🍀 *अयन*………दक्षिण 🍀
🪷 *मास*.……….आश्विन 🪷
🌻*कलियुगाब्द*….५१२७🌻
🌎 *विक्रम संवत्*.....२०८१ 🌎
⭐️ *शक संवत्*...... १९४७ ⭐️
🪻अभिजीत …..मध्याह्न १२ः०९ से १२ः४८ तक 🪻
🌚 राहुकाल …..प्रातः ०९ः३१ से १०ः५८ तक 🌚
💐*।। आपका दिन मंगलमय हो ।।* 💐
🙏 🌹 *जय श्री कृष्ण* 🌹🙏
Forwarded from कैलाश के निवासी (Meett Meett)
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