#कांग्रेस_का_दलित_प्रेम
भारत को 47 साल पहले दलित PM मिल गया होता
लेकिन इंदिरा गांधी दलितों से इतना प्रेम करती थी कि
की उन्हें दलित का PM बनना कतई बर्दाश्त नहीं था
भारत में अम्बेडकर साहब के बाद दलितों के सबसे बड़े
नेता हुए बाबू जगजीवन राम जी जिनके नाम 31साल
केंद्रीय मंत्री और 50वर्ष MP बने रहने का रिकॉर्ड है
आजतक कभी टूटा न कोई अब तोड़ पाएगा ✨
1947 नेहरू सरकार में रोजगार और श्रम मंत्री
बाबू जगजीवन राम थे
भारत के संविधान सभी के सदस्यों में एक ये भी थे ✒️
संविधान सभा में उन्होंने दलितों के अधिकारों की वकालत की और निर्वाचित निकायों और सरकारी सेवाओं में जाति के आधार पर सकारात्मक कार्रवाई का तर्क दिया था ✒️
1952 नेहरू सरकार के द्वितीय कार्यकाल में
पहले रेल मंत्री फ़िर संचार मंत्री जगजीवन राम थे
1957 नेहरू सरकार के तृतीय कार्यकाल में
बाबू जगजीवन राम जी केंद्रीय रेल मंत्री थे
1960 लाल बहादुर शास्त्री जी PM थे हरित क्रांति हुई
तब कृषि मंत्री कोई और नहीं जगजीवन राम जी ही थे
साल 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध व बांग्लादेश के निर्माण के वक्त जगजीवन राम देश के रक्षा मंत्री थे।
हैवी वेट नेता कुशल प्रशासक उच्च शिक्षित होने के
साथ साथ प्राइम मिनिस्टर बनने के प्रबल दावेदार थे
लेकिन इनके सपनों को इंदिरा जी ने रौंद दिया था
वो इतने घिनौने तरीके से आप कल्पना नहीं कर सकते
पोस्ट लंबी होगी थोड़ा धैर्य से पढ़ना और शेयर करना
जब 12 जून 1975 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इंदिरा गांधी के चुनाव को अवैध घोषित कर दिया। तब भी जगजीवन राम का नाम PM पद के रूप में चर्चा में आया था। तब भी इंदिरा को उनके कुछ विश्वास पात्रों ने सलाह दी थी कि बाबू जगजीवन राम को केयर टेकर PM तो बनाया ही जा सकता है।फिर भी इंदिरा ने बाबूजी को PM बनाने का जोखिम नहीं लिया था। वो जानती थीं कि राजनीति में अस्थायी व्यवस्था जैसा कुछ नहीं होता है।
बाबू जगजीवन राम की दलित नेता की छवि और प्रशासनिक क्षमता से इंदिरा बहुत डरती थीं। इंदिरा जानती थीं कि यदि एक बार बाबूजी PM बन गए तो हटेंगे नहीं। दलितों के मसीहा को एक बार PM बनाकर कुर्सी से उतारना मुश्किल होगा। यदि ऐसा किया तो कांग्रेस से सदा के लिए दलित वोट छिटक जाएगा।
फर्जी गांधी परिवार का भौकाल वहीं खत्म हो जाता
खैर ✨
इंदिरा गांधी जी ने देश पर आपातकाल लगाकर लोकतंत्र संविधान की हत्या करते हुए तानाशाही का परिचय दिया
इनके इस रवैए से जनता में भारी आक्रोश फैल गया था
पार्टी के बाहर ही नहीं भीतर भी विरोध के स्वर निकले
सिर्फ़ स्वर ही नहीं कई नेता भी निकल गए जिनमें सबसे
बड़ा नाम था बाबू जगजीवन राम जी का
इमरजेंसी के बाद हुए चुनाव नतीजे आए तो जनता
पार्टी जीत गई। PM पद के तीन प्रबल दावेदार थे
जगजीवन राम,चौधरी चरण सिंह, मोरार जी देसाई
इसमें सबसे बड़ा गुट #भारतीय_जनसंघ का था, जिसने 93 सीटों पर जीत दर्ज की थी। जनसंघ ने कहा था कि PM पद के लिए उसकी पहली पसंद बाबू जगजीवन राम हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि वे बेहद अनुभवी हैं। उन्होंने कांग्रेस के साथ हर विभाग में काम किया है। वे सभी सहयोगियों को मना पांच साल तक सरकार चला लेंगे।
(जनसंघ ही आगे चलकर भारतीय जनता पार्टी बनी)
ये बात मोरारजी देसाई को खटकी तो उन्होंने भी जयप्रकाश नारायण के सामने PM पद का दावा ठोंक दिया। उधर दूसरे सबसे बड़े दल भारतीय लोक दल (बीएलडी) की 71 सीटें थीं, जिसमें से अधिकांश नेता चौधरी चरण सिंह की मुट्ठी में थे। यही कारण था कि चरण सिंह को लगता था कि वो PM बन जाएंगे।
जब कुर्सी के लिए झगड़ा हुआ तो सभी सहयोगी दलों के नेताओं ने जेपी से कहा कि आप जिसे चुनेंगे हम उसे नेता मान लेंगे। जगजीवन राम जी को उम्मीद थी उन्हें मौका दिया जाएगा लेकिन जेपी जी ने मोरारजी देसाई के पक्ष में विटो कर उन्हें जनता सरकार PM घोषित कर दिया।
ये खबर जब बाबू जगजीवन राम तक पहुंची तो वे अपने घर 6 कृष्ण मेनन मार्ग पर घायल शेर की तरह इधर से उधर घूम रहे थे। फर्नीचर को गुस्से से लात मार रहे थे। नौकरों पर चिल्ला रहे थे। बार-बार जोर-जोर से चिल्ला रहे थे कि ये विश्वासघात है...ये धोखा है 🔥
जनता पार्टी के कई नेता उन्हें मनाने पहुंचे। उन्होंने कहा कि जेपी ने कहलवाया है कि वे जो भी मंत्रालय चाहेंगे उन्हें दे दिया जाएगा। गुस्से से लगभग चीखते हुए जगजीवन राम ने कहा जेपी कौन होते हैं मुझे कुछ देने वाले। जेपी ने पटना से दिल्ली संदेश भेजा कि आपके सहयोग के बिना भारत निर्माण नहीं हो पाएगा।
भारत को 47 साल पहले दलित PM मिल गया होता
लेकिन इंदिरा गांधी दलितों से इतना प्रेम करती थी कि
की उन्हें दलित का PM बनना कतई बर्दाश्त नहीं था
भारत में अम्बेडकर साहब के बाद दलितों के सबसे बड़े
नेता हुए बाबू जगजीवन राम जी जिनके नाम 31साल
केंद्रीय मंत्री और 50वर्ष MP बने रहने का रिकॉर्ड है
आजतक कभी टूटा न कोई अब तोड़ पाएगा ✨
1947 नेहरू सरकार में रोजगार और श्रम मंत्री
बाबू जगजीवन राम थे
भारत के संविधान सभी के सदस्यों में एक ये भी थे ✒️
संविधान सभा में उन्होंने दलितों के अधिकारों की वकालत की और निर्वाचित निकायों और सरकारी सेवाओं में जाति के आधार पर सकारात्मक कार्रवाई का तर्क दिया था ✒️
1952 नेहरू सरकार के द्वितीय कार्यकाल में
पहले रेल मंत्री फ़िर संचार मंत्री जगजीवन राम थे
1957 नेहरू सरकार के तृतीय कार्यकाल में
बाबू जगजीवन राम जी केंद्रीय रेल मंत्री थे
1960 लाल बहादुर शास्त्री जी PM थे हरित क्रांति हुई
तब कृषि मंत्री कोई और नहीं जगजीवन राम जी ही थे
साल 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध व बांग्लादेश के निर्माण के वक्त जगजीवन राम देश के रक्षा मंत्री थे।
हैवी वेट नेता कुशल प्रशासक उच्च शिक्षित होने के
साथ साथ प्राइम मिनिस्टर बनने के प्रबल दावेदार थे
लेकिन इनके सपनों को इंदिरा जी ने रौंद दिया था
वो इतने घिनौने तरीके से आप कल्पना नहीं कर सकते
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जब 12 जून 1975 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इंदिरा गांधी के चुनाव को अवैध घोषित कर दिया। तब भी जगजीवन राम का नाम PM पद के रूप में चर्चा में आया था। तब भी इंदिरा को उनके कुछ विश्वास पात्रों ने सलाह दी थी कि बाबू जगजीवन राम को केयर टेकर PM तो बनाया ही जा सकता है।फिर भी इंदिरा ने बाबूजी को PM बनाने का जोखिम नहीं लिया था। वो जानती थीं कि राजनीति में अस्थायी व्यवस्था जैसा कुछ नहीं होता है।
बाबू जगजीवन राम की दलित नेता की छवि और प्रशासनिक क्षमता से इंदिरा बहुत डरती थीं। इंदिरा जानती थीं कि यदि एक बार बाबूजी PM बन गए तो हटेंगे नहीं। दलितों के मसीहा को एक बार PM बनाकर कुर्सी से उतारना मुश्किल होगा। यदि ऐसा किया तो कांग्रेस से सदा के लिए दलित वोट छिटक जाएगा।
फर्जी गांधी परिवार का भौकाल वहीं खत्म हो जाता
खैर ✨
इंदिरा गांधी जी ने देश पर आपातकाल लगाकर लोकतंत्र संविधान की हत्या करते हुए तानाशाही का परिचय दिया
इनके इस रवैए से जनता में भारी आक्रोश फैल गया था
पार्टी के बाहर ही नहीं भीतर भी विरोध के स्वर निकले
सिर्फ़ स्वर ही नहीं कई नेता भी निकल गए जिनमें सबसे
बड़ा नाम था बाबू जगजीवन राम जी का
इमरजेंसी के बाद हुए चुनाव नतीजे आए तो जनता
पार्टी जीत गई। PM पद के तीन प्रबल दावेदार थे
जगजीवन राम,चौधरी चरण सिंह, मोरार जी देसाई
इसमें सबसे बड़ा गुट #भारतीय_जनसंघ का था, जिसने 93 सीटों पर जीत दर्ज की थी। जनसंघ ने कहा था कि PM पद के लिए उसकी पहली पसंद बाबू जगजीवन राम हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि वे बेहद अनुभवी हैं। उन्होंने कांग्रेस के साथ हर विभाग में काम किया है। वे सभी सहयोगियों को मना पांच साल तक सरकार चला लेंगे।
(जनसंघ ही आगे चलकर भारतीय जनता पार्टी बनी)
ये बात मोरारजी देसाई को खटकी तो उन्होंने भी जयप्रकाश नारायण के सामने PM पद का दावा ठोंक दिया। उधर दूसरे सबसे बड़े दल भारतीय लोक दल (बीएलडी) की 71 सीटें थीं, जिसमें से अधिकांश नेता चौधरी चरण सिंह की मुट्ठी में थे। यही कारण था कि चरण सिंह को लगता था कि वो PM बन जाएंगे।
जब कुर्सी के लिए झगड़ा हुआ तो सभी सहयोगी दलों के नेताओं ने जेपी से कहा कि आप जिसे चुनेंगे हम उसे नेता मान लेंगे। जगजीवन राम जी को उम्मीद थी उन्हें मौका दिया जाएगा लेकिन जेपी जी ने मोरारजी देसाई के पक्ष में विटो कर उन्हें जनता सरकार PM घोषित कर दिया।
ये खबर जब बाबू जगजीवन राम तक पहुंची तो वे अपने घर 6 कृष्ण मेनन मार्ग पर घायल शेर की तरह इधर से उधर घूम रहे थे। फर्नीचर को गुस्से से लात मार रहे थे। नौकरों पर चिल्ला रहे थे। बार-बार जोर-जोर से चिल्ला रहे थे कि ये विश्वासघात है...ये धोखा है 🔥
जनता पार्टी के कई नेता उन्हें मनाने पहुंचे। उन्होंने कहा कि जेपी ने कहलवाया है कि वे जो भी मंत्रालय चाहेंगे उन्हें दे दिया जाएगा। गुस्से से लगभग चीखते हुए जगजीवन राम ने कहा जेपी कौन होते हैं मुझे कुछ देने वाले। जेपी ने पटना से दिल्ली संदेश भेजा कि आपके सहयोग के बिना भारत निर्माण नहीं हो पाएगा।
आखिरकार चार दिन की नाराजगी के बाद जगजीवन राम मान गए। इस तरह से 1977 में पहली बार PM पद उनके पास आकर चला गया। जब मोराजी देसाई सरकार नहीं चला पाए तो चरण सिंह को PM बनाया गया। इसके बाद चरण सिंह को भी भरोसा नहीं था कि वे बहुमत साबित कर पाएंगे। ऐसे में जगजीवन राम को पक्का विश्वास था कि अब उनका समय आ गया है। वे PM होंगे और आसानी से बहुमत साबित कर देंगे। कुल मिलाकर वे PM पद की कुर्सी के बेहद नजदीक थे।
लेकिन जगजीवन राम जी को एक बार फिर इंदिरा गांधी ने झटका देते हुए चौधरी जी को अपना समर्थन दे दिया
बाबु जी फ़िर से PM IN वेटिंग ही बनकर रह गए 🔥
चौधरी जी की सरकार इंदिरा जी की बैसाखी पर थी।
जब चाहती तब गिरा देती गिराया भी but उनको
अभी इंतजार था सही मौके दस्तूर का मौका मिला
नहीं बल्कि इंदिरा गांधी जी ने मौका बना लिया ✨
कैसे ये जानेंगे कांग्रेस के दलित प्रेम के
Next एपिसोड में थोड़ा विस्तार पूर्वक
इधर जगजीवन राम जी PM का सपना देख ही रहे थे
उनको नहीं पता था अब वो कभी मंत्री नहीं बन पाएंगे
PM बनने का सपना तो दूर की बात है दुर्भाग्य और
साज़िश दस्तक देने वाली थी 🔥 कैसे आगे जानेंगे
🔴
लेकिन जगजीवन राम जी को एक बार फिर इंदिरा गांधी ने झटका देते हुए चौधरी जी को अपना समर्थन दे दिया
बाबु जी फ़िर से PM IN वेटिंग ही बनकर रह गए 🔥
चौधरी जी की सरकार इंदिरा जी की बैसाखी पर थी।
जब चाहती तब गिरा देती गिराया भी but उनको
अभी इंतजार था सही मौके दस्तूर का मौका मिला
नहीं बल्कि इंदिरा गांधी जी ने मौका बना लिया ✨
कैसे ये जानेंगे कांग्रेस के दलित प्रेम के
Next एपिसोड में थोड़ा विस्तार पूर्वक
इधर जगजीवन राम जी PM का सपना देख ही रहे थे
उनको नहीं पता था अब वो कभी मंत्री नहीं बन पाएंगे
PM बनने का सपना तो दूर की बात है दुर्भाग्य और
साज़िश दस्तक देने वाली थी 🔥 कैसे आगे जानेंगे
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जब बाबा साहेब डॉ अंबेडकर ने बौद्ध धर्म अपनाया तो वे जानते थे कि एक तो आरक्षण और संविधान के अधिकार तथा संघर्ष और दूसरा सामाजिक मुक्ति इसे किस तरह से व्यवस्थित किया जाय? इसीलिए उन्होंने बौद्घ के हीनयान शाखा को अपनाया जरूर लेकिन उसे नवयान अथवा नवबौद्ध भी कहा।
नवयान एक नई विचारधारा है जो बुद्ध से जरूर जुड़ी है लेकिन कबीर के उस दोहे को चरितार्थ करते हुए कि "गुरु गोविंद दोउ खड़े, काके लागु पाय, बलिहारी गुरु आपने गोविंद दियो बताय" अर्थात हम बुद्ध को जरूर मानते हैं लेकिन यह रास्ता बाबा साहेब आपने बताया।
इसलिए नवयान में बुद्ध और बाबा साहेब साथ नजर आते हैं।
यूं तो 1950 से आरक्षण मिलना शुरू हुआ था
लेकिन सिख और बौद्ध के ऐसे कई समूह जो अपने मूल जातिगत भेदभाव से प्रताड़ित थे,उन्हें इन धर्मों में रहते हुए भी अनुसूचित जाति का दर्ज़ा हासिल हुआ।
जो संविधान संशोधन 1956 और 1990 द्वारा प्राप्त हुआ। इसमें ईसाई, मुस्लिम इत्यादि शामिल नहीं।
अब यह अलग बात है कि आज सभी धर्म और जाति के लोगों को ews आरक्षण प्राप्त है लेकिन sc, st के संवैधानिक मानक बहुत जटिल हैं।
इसीलिए हिंदू दलितों सहित सिख और बौद्ध धर्म के मूलवंश दलित/ अनुसूचित जाति के लोगों को एक श्रेणी का माना जाता है।
इसलिए सीजेआई दलित भी हैं और बुद्धिस्ट भी।
और हां! गवई जी को आरक्षण जरूर प्राप्त हैं लेकिन वह सीजेआई किसी आरक्षण की वजह से नहीं बने हैं क्योंकि न्यायपालिका में आरक्षण व्यवस्था नहीं है।
हां पूर्व के बने सभी जजों की भांति वे भी कॉलेजियम सिस्टम से ही जज बने हैं।
साभार।
🔴
नवयान एक नई विचारधारा है जो बुद्ध से जरूर जुड़ी है लेकिन कबीर के उस दोहे को चरितार्थ करते हुए कि "गुरु गोविंद दोउ खड़े, काके लागु पाय, बलिहारी गुरु आपने गोविंद दियो बताय" अर्थात हम बुद्ध को जरूर मानते हैं लेकिन यह रास्ता बाबा साहेब आपने बताया।
इसलिए नवयान में बुद्ध और बाबा साहेब साथ नजर आते हैं।
यूं तो 1950 से आरक्षण मिलना शुरू हुआ था
लेकिन सिख और बौद्ध के ऐसे कई समूह जो अपने मूल जातिगत भेदभाव से प्रताड़ित थे,उन्हें इन धर्मों में रहते हुए भी अनुसूचित जाति का दर्ज़ा हासिल हुआ।
जो संविधान संशोधन 1956 और 1990 द्वारा प्राप्त हुआ। इसमें ईसाई, मुस्लिम इत्यादि शामिल नहीं।
अब यह अलग बात है कि आज सभी धर्म और जाति के लोगों को ews आरक्षण प्राप्त है लेकिन sc, st के संवैधानिक मानक बहुत जटिल हैं।
इसीलिए हिंदू दलितों सहित सिख और बौद्ध धर्म के मूलवंश दलित/ अनुसूचित जाति के लोगों को एक श्रेणी का माना जाता है।
इसलिए सीजेआई दलित भी हैं और बुद्धिस्ट भी।
और हां! गवई जी को आरक्षण जरूर प्राप्त हैं लेकिन वह सीजेआई किसी आरक्षण की वजह से नहीं बने हैं क्योंकि न्यायपालिका में आरक्षण व्यवस्था नहीं है।
हां पूर्व के बने सभी जजों की भांति वे भी कॉलेजियम सिस्टम से ही जज बने हैं।
साभार।
🔴
Forwarded from Bajrang dal || बजरंग दल
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सीकरी माता मंदिर के आस पास में जिहादीयों द्वारा लगाई गई मूर्तियां व पूजा के समान की दुकानें को मौके पर पहुंचकर हटवाया....
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श्री कुबेरेश्वर महादेव कुबेर भंडारी करनाली
प्रातः रुद्रा अभिषेक
14 अक्टूबर, 2025 मंगलवार - कार्तिक कृष्ण पक्ष अष्टमी
Shree Kubereshwer Mahadev Kuber Bhandari Karnali
ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा।
Har har Mahadev
Jay Kuber
Kuber Bhandari Karnali
प्रातः रुद्रा अभिषेक
14 अक्टूबर, 2025 मंगलवार - कार्तिक कृष्ण पक्ष अष्टमी
Shree Kubereshwer Mahadev Kuber Bhandari Karnali
ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा।
Har har Mahadev
Jay Kuber
Kuber Bhandari Karnali
🙏2
Forwarded from कैलाश के निवासी (Meett Meett)
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देखों हिन्दुओ तुम क्या सीखा रहे हो अपनी आने वाली पीढ़ी को और ये मदरसा छाप क्या सीखा रहे हैं
*गोपाष्टमी आज*
कार्तिक मास की शुक्लपक्ष की अष्टमी तिथि के दिन गोपाष्टमी भगवान श्री कृष्ण ने गौ-चारण अर्थात गायों को चराना शुरू किया था। भगवान श्री कृष्ण ने सभी को गौसेवा का महत्व बताया। स्वयं श्री कृष्ण गायों की सेवा किया करते थे। गोपाष्टमी पर गौ-पूजन से श्री कृष्ण की कृपा के साथ धन-समृद्धि भी प्राप्त होती हैं।
गोपाष्टमी कब हैं?
================
इस वर्ष गोपाष्टमी का पर्व 30 अक्टूबर, 2025 बृहस्पतिवार के दिन मनाया जायेगा।
गोप अष्टमी की पूजा विधि
===============
गोपाष्टमी के दिन गौ-पूजा और भगवान श्री कृष्ण की पूजा की जाती हैं।
गोपाष्टमी के दिन प्रात:काल गाय एवं उसके बछड़े को नहला कर साफ-सुथरा करें। फिर उनके पैरों में घुंघरू बांधे और उन्हे आभूषण पहनाकर सजायें।
फिर गाय और बछड़े के रोली-चावल से तिलक करें। उसे वस्त्र अर्पित करने के लिये उसके सींग पर चुनरी बांधे।
गाय और बछड़े को हरा चारा, गुड़ व जलेबी आदि खिलायें।
फिर धूप-दीप से उनकी आरती उतारें।
तत्पश्चात् गौमाता के चरण छूयें।
गाय की परिक्रमा करें। फिर उसे बाहर चराने के लिये लेकर जाये।
जब संध्या के समय गायें वापस आये तब उसे साष्टांग दण्ड़वत् होकर प्रणाम करें।
गाय के चरणों की धूल से तिलक करें।
गोपाष्टमी के दिन ग्वालों का तिलक करके उन्हे दान-दक्षिणा दी जाती हैं।
गोपाष्टमी पर मंदिरों में अन्नकूट का आयोजन किया जाता हैं।
गोपाष्टमी पर भगवान श्री कृष्ण की भी पूजा-अर्चना की जाती हैं।
जिनके घरों में गाय ना हो वो गौशाला में जाकर गायों की सेवा-पूजा करें। और उनके निमित्त दान-पुण्य करें।
गौसेवा का महत्व
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हिंदु धर्म में गाय की सेवा करने का बहुत महत्व हैं। ऐसा माना जाता है कि गाय के अंदर सभी देवी-देवताओं का वास होता हैं। स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने गायों की सेवा और पूजा की थी। उन्होने सभी को गोसेवा का महत्व बताकर गौसेवा के लिये प्रेरित किया था।
गाय की सेवा करने से जातक को महान पुण्य प्राप्त होता हैं।
उसके जीवन के सभी दुख-संतापो का नाश हो जाता हैं।
शरीर निरोगी रहता हैं।
घर-परिवार में सुख-शांति का वास होता हैं।
धन-समृद्धि में वृद्धि होती हैं।
जातक को श्री कृष्ण की प्राप्त होती हैं।
मृत्यु के पश्चात सद्गति प्राप्त होती हैं।
गोपाष्टमी की कथा
===============
पौराणिक कथा के अनुसार जब भगवान श्रीकृष्ण की आयु मात्र छ: वर्ष की हुई तो उन्होने माता यशोदा से कहा, “मैया! अब मैं बड़ा हो गया हूँ। अब मैं भी गायों को चराने के लिये वन जाऊंगा।“ माता यशोदा ने नन्द बाबा को श्री कृष्ण के हठ के विषय में बताया तो वो गौ-चारण का शुभ मुहूर्त जानने के लिये ऋषि शांडिल्य के पास गयें। ऋषि शांडिल्य जब गौ-चारण का शुभ मुहूर्त निकालने लगे तो, वो बहुत आश्चर्य में पड़ गये क्योकि उस दिन के अतिरिक्त कोई अन्य शुभ मुहूर्त नही निकल रहा था। ऋषि शांडिल्य ने नंद बाबा को कहा कि आज के अतिरिक्त कोई भी अन्य शुभ मुहूर्त नही हैं। उस दिन कार्तिक मास की शुक्लपक्ष की अष्टमी तिथि थी। जिस दिन भगवान कुछ करना चाहे तो उससे शुभ मुहूर्त कोई और हो ही नही सकता।
नंद बाबा ने घर आकर माता यशोदा को सारी बात बताई। तब मैया यशोदा ने भगवान श्री कृष्ण का श्रृन्गार किया। और पूजा करा कर उन्हे गायों को चराने के लिये वन भेजा। कहते है जब मैया यशोदा ने श्रीकृष्ण से चरण पादुका पहनने के लिये कहा तो उन्होने कहा कि मेरी गायों ने चरण पादुका नही पहन रखी। अगर आप मुझे चरण पादुका पहनाना चाहती हो, तो पहले गौमाता को पहनाओं। भगवान श्री कृष्ण बिना पैरों कें कुछ पहने, नंगे पैर ही गायों को चराने वन जाया करते थे। भगवान श्री कृष्ण को गोपाल के नाम से भी पुकारा जाता हैं।
कार्तिक मास की शुक्लपक्ष की अष्टमी तिथि के दिन गोपाष्टमी भगवान श्री कृष्ण ने गौ-चारण अर्थात गायों को चराना शुरू किया था। भगवान श्री कृष्ण ने सभी को गौसेवा का महत्व बताया। स्वयं श्री कृष्ण गायों की सेवा किया करते थे। गोपाष्टमी पर गौ-पूजन से श्री कृष्ण की कृपा के साथ धन-समृद्धि भी प्राप्त होती हैं।
गोपाष्टमी कब हैं?
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इस वर्ष गोपाष्टमी का पर्व 30 अक्टूबर, 2025 बृहस्पतिवार के दिन मनाया जायेगा।
गोप अष्टमी की पूजा विधि
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गोपाष्टमी के दिन गौ-पूजा और भगवान श्री कृष्ण की पूजा की जाती हैं।
गोपाष्टमी के दिन प्रात:काल गाय एवं उसके बछड़े को नहला कर साफ-सुथरा करें। फिर उनके पैरों में घुंघरू बांधे और उन्हे आभूषण पहनाकर सजायें।
फिर गाय और बछड़े के रोली-चावल से तिलक करें। उसे वस्त्र अर्पित करने के लिये उसके सींग पर चुनरी बांधे।
गाय और बछड़े को हरा चारा, गुड़ व जलेबी आदि खिलायें।
फिर धूप-दीप से उनकी आरती उतारें।
तत्पश्चात् गौमाता के चरण छूयें।
गाय की परिक्रमा करें। फिर उसे बाहर चराने के लिये लेकर जाये।
जब संध्या के समय गायें वापस आये तब उसे साष्टांग दण्ड़वत् होकर प्रणाम करें।
गाय के चरणों की धूल से तिलक करें।
गोपाष्टमी के दिन ग्वालों का तिलक करके उन्हे दान-दक्षिणा दी जाती हैं।
गोपाष्टमी पर मंदिरों में अन्नकूट का आयोजन किया जाता हैं।
गोपाष्टमी पर भगवान श्री कृष्ण की भी पूजा-अर्चना की जाती हैं।
जिनके घरों में गाय ना हो वो गौशाला में जाकर गायों की सेवा-पूजा करें। और उनके निमित्त दान-पुण्य करें।
गौसेवा का महत्व
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हिंदु धर्म में गाय की सेवा करने का बहुत महत्व हैं। ऐसा माना जाता है कि गाय के अंदर सभी देवी-देवताओं का वास होता हैं। स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने गायों की सेवा और पूजा की थी। उन्होने सभी को गोसेवा का महत्व बताकर गौसेवा के लिये प्रेरित किया था।
गाय की सेवा करने से जातक को महान पुण्य प्राप्त होता हैं।
उसके जीवन के सभी दुख-संतापो का नाश हो जाता हैं।
शरीर निरोगी रहता हैं।
घर-परिवार में सुख-शांति का वास होता हैं।
धन-समृद्धि में वृद्धि होती हैं।
जातक को श्री कृष्ण की प्राप्त होती हैं।
मृत्यु के पश्चात सद्गति प्राप्त होती हैं।
गोपाष्टमी की कथा
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पौराणिक कथा के अनुसार जब भगवान श्रीकृष्ण की आयु मात्र छ: वर्ष की हुई तो उन्होने माता यशोदा से कहा, “मैया! अब मैं बड़ा हो गया हूँ। अब मैं भी गायों को चराने के लिये वन जाऊंगा।“ माता यशोदा ने नन्द बाबा को श्री कृष्ण के हठ के विषय में बताया तो वो गौ-चारण का शुभ मुहूर्त जानने के लिये ऋषि शांडिल्य के पास गयें। ऋषि शांडिल्य जब गौ-चारण का शुभ मुहूर्त निकालने लगे तो, वो बहुत आश्चर्य में पड़ गये क्योकि उस दिन के अतिरिक्त कोई अन्य शुभ मुहूर्त नही निकल रहा था। ऋषि शांडिल्य ने नंद बाबा को कहा कि आज के अतिरिक्त कोई भी अन्य शुभ मुहूर्त नही हैं। उस दिन कार्तिक मास की शुक्लपक्ष की अष्टमी तिथि थी। जिस दिन भगवान कुछ करना चाहे तो उससे शुभ मुहूर्त कोई और हो ही नही सकता।
नंद बाबा ने घर आकर माता यशोदा को सारी बात बताई। तब मैया यशोदा ने भगवान श्री कृष्ण का श्रृन्गार किया। और पूजा करा कर उन्हे गायों को चराने के लिये वन भेजा। कहते है जब मैया यशोदा ने श्रीकृष्ण से चरण पादुका पहनने के लिये कहा तो उन्होने कहा कि मेरी गायों ने चरण पादुका नही पहन रखी। अगर आप मुझे चरण पादुका पहनाना चाहती हो, तो पहले गौमाता को पहनाओं। भगवान श्री कृष्ण बिना पैरों कें कुछ पहने, नंगे पैर ही गायों को चराने वन जाया करते थे। भगवान श्री कृष्ण को गोपाल के नाम से भी पुकारा जाता हैं।
राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष ने लव जिहाद पर चिंता जताई तो उन्हें कोसने वालें वामपंथी ये भी पढ़ लें अभी के 10 मामलें।
आप पोस्ट को पूरा पढ़े, जागरूक हिन्दू हो तो पोस्ट को लव व लाइक करे।
वामपंथी कविता कृष्णन ने मंगलवार को राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष और महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोशियारी के बीच हुई बैठक पर अपनी नाराजगी जताई।
राष्ट्रीय महिला आयोग ने इस बैठक पर ट्वीट किया था, “हमारी अध्यक्ष रेखा शर्मा श्री भगत सिंह कोशियारी से मिली।
महाराष्ट्र के महामहिम राज्यपाल ने बैठक में महिलाओं की सुरक्षा पर बात की, इसमें विभिन्न जगहों में महिलाओं के साथ हो रही छेड़छाड़, बलात्कार सहित लव जिहाद के मामले सम्मिलित थे।”
अब इस ट्वीट में उल्लेखित किए गए ‘लव जिहाद’ शब्द से सीपीआई (एमएल) सदस्य आहत हो गईं।
उन्होंने आयोग अध्यक्ष की आलोचना करते हुए कहा कि रेखा शर्मा ने राष्ट्रीय महिला आयोग को शर्मसार किया है।
कविता कृष्णन ने पूछा कि लव जिहाद क्या है ? क्या अगर कोई मुस्लिम व्यक्ति हिंदू महिला से प्रेम करता है तो वह लव जिहाद है ? कविता ने यह भी लिखा कि रेखा शर्मा की हिम्मत कैसे है कुर्सी पर बने रहने की। कृष्णन ने दावा किया कि उन्हें एक भी ऐसे केस नहीं मिले जहाँ मुस्लिम युवकों ने हिंदू बनकर महिला के साथ रिश्ता बनाया हो और उन पर धर्मांतरण का दबाव बनाया हो।
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कविता कृष्णन ने लव जिहाद केसों पर कैसे अनभिज्ञता जताई, लव जिहाद के बढ़ते मामलों पर अनजान बनते हुए कविता कृष्णन जैसी वामपंथी महिला ने न केवल इन केसों पर अपनी अनभिज्ञता जताई बल्कि दावा किया कि उनकी रिसर्च में ऐसा कोई केस उनके सामने नहीं आया जहाँ मुस्लिम युवकों ने हिंदू महिला के साथ पहचान छिपा कर धोखा किया हो, उन्होंने अपनी बात रखते हुए रेखा शर्मा को कट्टर तक लिखा।
अब बता दें कि लव जिहाद एक ऐसी स्थिति है जहाँ मुस्लिम व्यक्ति हिंदू महिला को फँसाने के लिए उनसे झूठ बोलता है।
वह या तो अपनी पहचान छिपाकर या अपना धर्म छिपाकर गैर मुस्लिम महिला के साथ संबंध बनाता है।
कई बार लड़की को जब देर से हकीकत पता चलती है तो या तो उसे प्रताड़ित किया जाता है या फिर उसे मार दिया जाता है। कई बार महिला का जबरन धर्मांतरण करवा कर भी उसे नारकीय यातनाएँ दी जाती हैं।
यह कोई एक तकनीकी या कानूनी शब्दावली नहीं है, बल्कि इस शब्द का प्रयोग उन परिस्थितियों को देखकर किया जाता है जहाँ गैर मुस्लिम महिला पर मजहब परिवर्तन जैसे दबाव बनाए गए हों।कई बार कुछ पीड़िताएँ आप बीती सुनाते समय इस शब्द का प्रयोग नहीं करती, लेकिन उनके साथ हुए अन्याय की पूरी कहानी इस लव जिहाद शब्द को परिभाषित कर देती है।
कई महिलाएँ खुशकिस्मत होती हैं जो लव जिहाद की वीभत्सता का शिकार होने से पहले कट्टरपंथियों के चंगुल से निकल जाती हैं और दुनिया को हकीकत बताती हैं। मगर, कई दर्दनाक किस्से ऐसे भी होते हैं जिन्हें सुनाने के लिए लड़कियाँ जिंदा तक नहीं बच पाती।
आज कविता कृष्णन, जिन्हें लव जिहाद के मामले रिसर्च करने पर भी नहीं मिल रहे, उनके लिए हम कुछ केस लेकर आए हैं ताकि लव जिहाद शब्द का अर्थ उन्हें व उन जैसे लोगों को समझ आ सके।
1.वसीम अहमद ने दिनेश रावत बन दिया हिंदू लड़की को धोखा-
हाल में, मेरठ में वसीम अहमद नाम के युवक के ख़िलाफ़ एक मामला दर्ज हुआ था। लड़की ने अपनी शिकायत में कहा था कि युवक ने उसे हिंदू बन कर प्रेम के जाल में फँसाया और उसके साथ शारीरिक संबंध स्थापित किए, बाद में उसकी वीडियोज भी वायरल कर दीं। लड़की ने शिकायत में कहा था कि वसीम ने उसे अपनी पहचान दिनेश रावत के रूप में बताई थी।
लड़की के बयान में कहा गया था कि वसीम ने उसे शादी का झाँसा दिया था, मगर बाद में बताया कि उसके दो बच्चे हैं। शिकायत में पीड़िता ने ये भी कहा था कि जब उसने वसीम से इन सबके पीछे वजह पूछी तो उसने कहा, “मैंने तुम्हें धोखा दिया क्योंकि मैं तुम्हें सबक सिखाना चाहता था।”2. गोल्डी बन निजामुद्दीन ने विधवा को दिया धोखा-
➡️ अगस्त माह में 25 साल की विधवा ने निजामुद्दीन नामक शख्स के खिलाफ़ शिकायत करवाई।
➡️ इसमें उसने बताया कि निजामुद्दीन ने उससे अपना मजहब छिपाकर संबंध बनाए और उसे गर्भवती बनाया। उसने अपनी पहचान पहले गोल्डी बताई थी मगर बाद में पता चला वह मुस्लिम है।
➡️ इस हकीकत के खुलने के बाद वह उसे प्रताड़ित करने लगा। कुछ दिन बाद निजामुद्दीन और उसके घरवालों ने महिला को घर से बाहर कर दिया। हर ओर से आस खत्म होने के बाद महिला थाने पहुँची और धोखेबाजी का मुकदमा दर्ज करवाया।
3.पहचान छिपाकर खुर्शीद और अंसारी नें हिंदू बहनों को बनाया निशाना-➡️ सितंबर माह में दिल्ली के ओखला से एक लव जिहाद का केस सामने आया। खुर्शीद और अंसारी ने दो हिंदू बहनों को निशाना बनाया। जब लड़कियों को इस संबंध में मालूम चला तो उन्होंने किसी भी प्रकार के रिश्ते को रखने से मना कर दिया, तब इन युवकों ने
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वामपंथी कविता कृष्णन ने मंगलवार को राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष और महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोशियारी के बीच हुई बैठक पर अपनी नाराजगी जताई।
राष्ट्रीय महिला आयोग ने इस बैठक पर ट्वीट किया था, “हमारी अध्यक्ष रेखा शर्मा श्री भगत सिंह कोशियारी से मिली।
महाराष्ट्र के महामहिम राज्यपाल ने बैठक में महिलाओं की सुरक्षा पर बात की, इसमें विभिन्न जगहों में महिलाओं के साथ हो रही छेड़छाड़, बलात्कार सहित लव जिहाद के मामले सम्मिलित थे।”
अब इस ट्वीट में उल्लेखित किए गए ‘लव जिहाद’ शब्द से सीपीआई (एमएल) सदस्य आहत हो गईं।
उन्होंने आयोग अध्यक्ष की आलोचना करते हुए कहा कि रेखा शर्मा ने राष्ट्रीय महिला आयोग को शर्मसार किया है।
कविता कृष्णन ने पूछा कि लव जिहाद क्या है ? क्या अगर कोई मुस्लिम व्यक्ति हिंदू महिला से प्रेम करता है तो वह लव जिहाद है ? कविता ने यह भी लिखा कि रेखा शर्मा की हिम्मत कैसे है कुर्सी पर बने रहने की। कृष्णन ने दावा किया कि उन्हें एक भी ऐसे केस नहीं मिले जहाँ मुस्लिम युवकों ने हिंदू बनकर महिला के साथ रिश्ता बनाया हो और उन पर धर्मांतरण का दबाव बनाया हो।
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कविता कृष्णन ने लव जिहाद केसों पर कैसे अनभिज्ञता जताई, लव जिहाद के बढ़ते मामलों पर अनजान बनते हुए कविता कृष्णन जैसी वामपंथी महिला ने न केवल इन केसों पर अपनी अनभिज्ञता जताई बल्कि दावा किया कि उनकी रिसर्च में ऐसा कोई केस उनके सामने नहीं आया जहाँ मुस्लिम युवकों ने हिंदू महिला के साथ पहचान छिपा कर धोखा किया हो, उन्होंने अपनी बात रखते हुए रेखा शर्मा को कट्टर तक लिखा।
अब बता दें कि लव जिहाद एक ऐसी स्थिति है जहाँ मुस्लिम व्यक्ति हिंदू महिला को फँसाने के लिए उनसे झूठ बोलता है।
वह या तो अपनी पहचान छिपाकर या अपना धर्म छिपाकर गैर मुस्लिम महिला के साथ संबंध बनाता है।
कई बार लड़की को जब देर से हकीकत पता चलती है तो या तो उसे प्रताड़ित किया जाता है या फिर उसे मार दिया जाता है। कई बार महिला का जबरन धर्मांतरण करवा कर भी उसे नारकीय यातनाएँ दी जाती हैं।
यह कोई एक तकनीकी या कानूनी शब्दावली नहीं है, बल्कि इस शब्द का प्रयोग उन परिस्थितियों को देखकर किया जाता है जहाँ गैर मुस्लिम महिला पर मजहब परिवर्तन जैसे दबाव बनाए गए हों।कई बार कुछ पीड़िताएँ आप बीती सुनाते समय इस शब्द का प्रयोग नहीं करती, लेकिन उनके साथ हुए अन्याय की पूरी कहानी इस लव जिहाद शब्द को परिभाषित कर देती है।
कई महिलाएँ खुशकिस्मत होती हैं जो लव जिहाद की वीभत्सता का शिकार होने से पहले कट्टरपंथियों के चंगुल से निकल जाती हैं और दुनिया को हकीकत बताती हैं। मगर, कई दर्दनाक किस्से ऐसे भी होते हैं जिन्हें सुनाने के लिए लड़कियाँ जिंदा तक नहीं बच पाती।
आज कविता कृष्णन, जिन्हें लव जिहाद के मामले रिसर्च करने पर भी नहीं मिल रहे, उनके लिए हम कुछ केस लेकर आए हैं ताकि लव जिहाद शब्द का अर्थ उन्हें व उन जैसे लोगों को समझ आ सके।
1.वसीम अहमद ने दिनेश रावत बन दिया हिंदू लड़की को धोखा-
हाल में, मेरठ में वसीम अहमद नाम के युवक के ख़िलाफ़ एक मामला दर्ज हुआ था। लड़की ने अपनी शिकायत में कहा था कि युवक ने उसे हिंदू बन कर प्रेम के जाल में फँसाया और उसके साथ शारीरिक संबंध स्थापित किए, बाद में उसकी वीडियोज भी वायरल कर दीं। लड़की ने शिकायत में कहा था कि वसीम ने उसे अपनी पहचान दिनेश रावत के रूप में बताई थी।
लड़की के बयान में कहा गया था कि वसीम ने उसे शादी का झाँसा दिया था, मगर बाद में बताया कि उसके दो बच्चे हैं। शिकायत में पीड़िता ने ये भी कहा था कि जब उसने वसीम से इन सबके पीछे वजह पूछी तो उसने कहा, “मैंने तुम्हें धोखा दिया क्योंकि मैं तुम्हें सबक सिखाना चाहता था।”2. गोल्डी बन निजामुद्दीन ने विधवा को दिया धोखा-
➡️ अगस्त माह में 25 साल की विधवा ने निजामुद्दीन नामक शख्स के खिलाफ़ शिकायत करवाई।
➡️ इसमें उसने बताया कि निजामुद्दीन ने उससे अपना मजहब छिपाकर संबंध बनाए और उसे गर्भवती बनाया। उसने अपनी पहचान पहले गोल्डी बताई थी मगर बाद में पता चला वह मुस्लिम है।
➡️ इस हकीकत के खुलने के बाद वह उसे प्रताड़ित करने लगा। कुछ दिन बाद निजामुद्दीन और उसके घरवालों ने महिला को घर से बाहर कर दिया। हर ओर से आस खत्म होने के बाद महिला थाने पहुँची और धोखेबाजी का मुकदमा दर्ज करवाया।
3.पहचान छिपाकर खुर्शीद और अंसारी नें हिंदू बहनों को बनाया निशाना-➡️ सितंबर माह में दिल्ली के ओखला से एक लव जिहाद का केस सामने आया। खुर्शीद और अंसारी ने दो हिंदू बहनों को निशाना बनाया। जब लड़कियों को इस संबंध में मालूम चला तो उन्होंने किसी भी प्रकार के रिश्ते को रखने से मना कर दिया, तब इन युवकों ने
पार्किंग का बहाना बनाकर लड़की के परिवार पर हमला बोल दिया। इस घटना में लड़की के पिता की टाँग टूट गई थी, उनका इलाज एम्स में चला था।4.प्रिया और कशिश को मार कर शमशाद ने दफनाया उन्हीं के घर में-
➡️ मेरठ के भूड़भड़ाल से माँ बेटी की हत्या मामला भी पिछले दिनों खूब चर्चा में था। प्रिया और कशिश की हत्या करने वाला शमशाद साल 2013 में प्रिया से अमित गुर्जर बनकर मिला था।
बाद में सच्चाई खुलने पर उसने रो रोकर प्रिया को अपने साथ रखे रखा। कुछ दिन बाद पता चला कि उसकी एक बीवी भी है। विवाद बढ़ने पर शमशाद ने प्रिया और कशिश को मौत के घाट उतारकर उनके ही घर में दफना दिया । इस केस में प्रिया की सहेली चंचल की सक्रियता ने शमशाद को जेल की सलाखों के पीछे पहुँचाया था।
5.कांग्रेस नेता समीर खान पर हिंदू नाबालिग ने लगाए गंभीर आरोप-
➡️ सितंबर में एक नाबालिग लड़की सतना थाने पहुँची और उसने कांग्रेस नेता समीर खान उर्फ सिकंदर पर मामला दर्ज करवाया। लड़की ने कांग्रेस नेता समीर पर यौन शोषण का आरोप लगाया। खान के ख़िलाफ़ शिकायत में लड़की ने कहा कि उसने उसे सिकंदर बन कर मुलाकात की और बाद में उसे फार्म हाउस बुलाया। वहाँ समीर ने उसका रेप किया व उसकी आपत्तिजनक तस्वीरें खींचीं। फिर करीब 3 साल तक उसका शोषण करता रहा। आखिरकार लड़की ने तंग आकर पुलिस को इस संबंध में बताया और मामला दर्ज हुआ।
6.शौकत अली ने साहिल कुमार बन रचाई शादी, बाद में करने लगा प्रताड़ित-
➡️ शौकत अली ने भी नेहा नाम की हिंदू महिला को झूठी पहचान बताकर फँसाया और फिर उसे आर्थिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू किया।सोशल मीडिया पर वायरल अपनी वीडियो में नेहा ने कहा था कि जयपुर में काम करते हुए वह शौकत के संपर्क में आई और उसने उसे अपनी पहचान कश्मीरी हिंदू साहिल कुमार के रूप में बताई।
शादी के 6 महीने बाद शौकत अली उस पर धर्मांतरण का दबाव बनाने लगा और उसने अपने परिजनों के साथ मिलकर उसका शोषण भी किया।
7.शिबू अली बना सचिन, लड़की पर किया चाकू से हमला-
➡️ लव जिहाद के अन्य मामले में शिबू अली हिंदू महिला से सचिन कहकर मिला। इस केस में तो लड़की ने अपनी पूरी कहानी सोशल मीडिया पर सुनाई थी।
पीड़िता ने कहा था कि जब मुस्लिम युवक की सच्चाई उजागर हुई तो उसे परेशान किया जाने लगा। उससे मारपीट करके उस पर धर्मांतरण के लिए दबाव बनाया गया।
इतना ही नहीं , उसे गौमाँस खिलाने के लिए व मौलवी के साथ शारीरिक संबंध बनाने को भी कहा गया। जब महिला शिबू के चंगुल से भाग निकली तब भी शिबू ने उसका पीछा नहीं छोड़ा और अपनी नाफरमानी करता देख महिला पर चाकू से हमला किया।
8.कानपुर में पहचान छिपाकर हिंदू लड़कियों से दोस्ती करने के मामले-
➡️ यूपी के कानपुर में हिंदू नाबालिग के साथ भी लव जिहाद का मामला सामने आया। गोपाल नगर में रहने वाली पीड़ित के परिवार ने बजरंग दल के रामजी तिवारी की मदद से फतेह अली खान उर्फ आर्यन मेहरोत्रा के खिलाफ़ अपनी शिकायत करवाई। उन्होंने बताया कि कैसे कलावा पहनकर, तिलक लगाकर वह हिंदू लड़कियों को फँसाने के लिए मंदिर में जाता था।9.एक अन्य मामला कुछ दिन पहले ही कानपुर के बजरिया थाने में सामने आया था जहाँ लकी खान नाम के एक युवक ने अपना हिंदू नाम बता कर नाबालिग लड़की को अपने प्रेम जाल में फँसाया और उसकी अश्लील तस्वीरें ले कर इस्लाम धर्म कबूलने और निक़ाह करने के लिए युवती को ब्लैकमेल करने लगा।
इस केस में भी लड़की के परिजनों ने लकी खान के खिलाफ एफआईआर करवाई और बताया कि लड़की मंदिर के बाहर फूल की दुकान लगाती थी। उससे दोस्ती करने के लिए लकी खान ने अपना नाम सिर्फ लकी ही बताया। जिससे युवती को आभास नहीं हुआ कि युवक संप्रदाय विशेष से है।
10.अनवर ने अनु बन हिंदू महिला को फँसाया-
➡️ राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी पिछले महीने की 4 अगस्त को लव जिहाद का केस देखने को मिला। आउटर दिल्ली के किराड़ी इलाके में अनवर नाम के एक लड़के ने 20 साल की लड़की को अपना नाम अनु बताकर फँसाया और फिर कई महीनों तक उसके साथ बलात्कार करता रहा।
सबसे पहले उसने जब युवती के साथ गलत काम किया तब उसने उसे कोल्डड्रिंक में नशीला पदार्थ डाल कर पिलाया था। फिर उसके बेहोश होते ही उसका बलात्कार किया और पूरी घटना को शूट कर लिया। बाद में यह सिलसिला चलता रहा। एक बार उसने लड़की को विश्वास में लेने के लिए उससे मंदिर में शादी भी की। मगर कुछ समय बाद पता चला वह अनु नहीं अनवर है।वामपंथी मीडिया, और वामपंथी राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष का विरोध तो कर रहे हैं पर सच्चाई कभी छुप नहीं सकती लव जिहाद एक बड़ा षडयंत्र है उसको रोकना चाहिए।यदि हमारी इस पोस्ट से हिन्दू समाज को, हमारी सभ्यता, संस्कृति को फायदा होता है तो आप इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा लव,लाइक,शेयर करे ।
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➡️ मेरठ के भूड़भड़ाल से माँ बेटी की हत्या मामला भी पिछले दिनों खूब चर्चा में था। प्रिया और कशिश की हत्या करने वाला शमशाद साल 2013 में प्रिया से अमित गुर्जर बनकर मिला था।
बाद में सच्चाई खुलने पर उसने रो रोकर प्रिया को अपने साथ रखे रखा। कुछ दिन बाद पता चला कि उसकी एक बीवी भी है। विवाद बढ़ने पर शमशाद ने प्रिया और कशिश को मौत के घाट उतारकर उनके ही घर में दफना दिया । इस केस में प्रिया की सहेली चंचल की सक्रियता ने शमशाद को जेल की सलाखों के पीछे पहुँचाया था।
5.कांग्रेस नेता समीर खान पर हिंदू नाबालिग ने लगाए गंभीर आरोप-
➡️ सितंबर में एक नाबालिग लड़की सतना थाने पहुँची और उसने कांग्रेस नेता समीर खान उर्फ सिकंदर पर मामला दर्ज करवाया। लड़की ने कांग्रेस नेता समीर पर यौन शोषण का आरोप लगाया। खान के ख़िलाफ़ शिकायत में लड़की ने कहा कि उसने उसे सिकंदर बन कर मुलाकात की और बाद में उसे फार्म हाउस बुलाया। वहाँ समीर ने उसका रेप किया व उसकी आपत्तिजनक तस्वीरें खींचीं। फिर करीब 3 साल तक उसका शोषण करता रहा। आखिरकार लड़की ने तंग आकर पुलिस को इस संबंध में बताया और मामला दर्ज हुआ।
6.शौकत अली ने साहिल कुमार बन रचाई शादी, बाद में करने लगा प्रताड़ित-
➡️ शौकत अली ने भी नेहा नाम की हिंदू महिला को झूठी पहचान बताकर फँसाया और फिर उसे आर्थिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू किया।सोशल मीडिया पर वायरल अपनी वीडियो में नेहा ने कहा था कि जयपुर में काम करते हुए वह शौकत के संपर्क में आई और उसने उसे अपनी पहचान कश्मीरी हिंदू साहिल कुमार के रूप में बताई।
शादी के 6 महीने बाद शौकत अली उस पर धर्मांतरण का दबाव बनाने लगा और उसने अपने परिजनों के साथ मिलकर उसका शोषण भी किया।
7.शिबू अली बना सचिन, लड़की पर किया चाकू से हमला-
➡️ लव जिहाद के अन्य मामले में शिबू अली हिंदू महिला से सचिन कहकर मिला। इस केस में तो लड़की ने अपनी पूरी कहानी सोशल मीडिया पर सुनाई थी।
पीड़िता ने कहा था कि जब मुस्लिम युवक की सच्चाई उजागर हुई तो उसे परेशान किया जाने लगा। उससे मारपीट करके उस पर धर्मांतरण के लिए दबाव बनाया गया।
इतना ही नहीं , उसे गौमाँस खिलाने के लिए व मौलवी के साथ शारीरिक संबंध बनाने को भी कहा गया। जब महिला शिबू के चंगुल से भाग निकली तब भी शिबू ने उसका पीछा नहीं छोड़ा और अपनी नाफरमानी करता देख महिला पर चाकू से हमला किया।
8.कानपुर में पहचान छिपाकर हिंदू लड़कियों से दोस्ती करने के मामले-
➡️ यूपी के कानपुर में हिंदू नाबालिग के साथ भी लव जिहाद का मामला सामने आया। गोपाल नगर में रहने वाली पीड़ित के परिवार ने बजरंग दल के रामजी तिवारी की मदद से फतेह अली खान उर्फ आर्यन मेहरोत्रा के खिलाफ़ अपनी शिकायत करवाई। उन्होंने बताया कि कैसे कलावा पहनकर, तिलक लगाकर वह हिंदू लड़कियों को फँसाने के लिए मंदिर में जाता था।9.एक अन्य मामला कुछ दिन पहले ही कानपुर के बजरिया थाने में सामने आया था जहाँ लकी खान नाम के एक युवक ने अपना हिंदू नाम बता कर नाबालिग लड़की को अपने प्रेम जाल में फँसाया और उसकी अश्लील तस्वीरें ले कर इस्लाम धर्म कबूलने और निक़ाह करने के लिए युवती को ब्लैकमेल करने लगा।
इस केस में भी लड़की के परिजनों ने लकी खान के खिलाफ एफआईआर करवाई और बताया कि लड़की मंदिर के बाहर फूल की दुकान लगाती थी। उससे दोस्ती करने के लिए लकी खान ने अपना नाम सिर्फ लकी ही बताया। जिससे युवती को आभास नहीं हुआ कि युवक संप्रदाय विशेष से है।
10.अनवर ने अनु बन हिंदू महिला को फँसाया-
➡️ राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी पिछले महीने की 4 अगस्त को लव जिहाद का केस देखने को मिला। आउटर दिल्ली के किराड़ी इलाके में अनवर नाम के एक लड़के ने 20 साल की लड़की को अपना नाम अनु बताकर फँसाया और फिर कई महीनों तक उसके साथ बलात्कार करता रहा।
सबसे पहले उसने जब युवती के साथ गलत काम किया तब उसने उसे कोल्डड्रिंक में नशीला पदार्थ डाल कर पिलाया था। फिर उसके बेहोश होते ही उसका बलात्कार किया और पूरी घटना को शूट कर लिया। बाद में यह सिलसिला चलता रहा। एक बार उसने लड़की को विश्वास में लेने के लिए उससे मंदिर में शादी भी की। मगर कुछ समय बाद पता चला वह अनु नहीं अनवर है।वामपंथी मीडिया, और वामपंथी राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष का विरोध तो कर रहे हैं पर सच्चाई कभी छुप नहीं सकती लव जिहाद एक बड़ा षडयंत्र है उसको रोकना चाहिए।यदि हमारी इस पोस्ट से हिन्दू समाज को, हमारी सभ्यता, संस्कृति को फायदा होता है तो आप इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा लव,लाइक,शेयर करे ।
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🕉 ।। *श्री गणेश*ाय नमः ।। 🕉
*सुप्रभातम् स्*नेह वंदनम्
🌐 *आज का पं*चांग 🌐
⛳ *ति*थि……( १० ) दशमी ⛳️
🙏 प्रबोधिनी स्मार्त एकादशी ( बिल्वपत्र ) 🙏
🌼 भीष्म पंचक व्रतारंभ 🌼
🌺 हरियाणा - पंजाब दिवस 🌺
💐 पंचक 💐
🪻 भद्रा प्रारंभ रात्रि ०८ः२८ से 🪻
0️⃣1️⃣-1️⃣1️⃣-2⃣0⃣2️⃣5️⃣
🔔 *वा*र……..शनिवार 🔔
🦚 *नक्*षत्र…..शतभिषा 🦚
🪔 *यो*ग……..ध्रुव 🪔
✳️*करण*…….वणिज ✳️
🌅 *सूर्*योदय :-०६ः४६ 🌅
🌌 *सूर*्यास्त :-०६ः०१ 🌌
🌓 *पक*्ष....………शुक्ल 🌓
🌝 *चन्द्*र राशि….कुंभ 🌝
⏺️ *ऋत*ु.......…..हेमंत ⏺️
🍀 *अयन*………दक्षिण 🍀
🪷 *मा*स.……….कार्तिक 🪷
🌻*कलियु*गाब्द….५१२७🌻
🌎 *विक्रम *संवत्.....२०८२ 🌎
⭐️ *शक संव*त्...... १९४७ ⭐️
🪻अभिजीत …..मध्याह्न १२ः०१ से १२ः४० तक🪻
🌚 राहुकाल …..प्रातः ०९ः३७ से १०ः५४ तक 🌚
🌺🌺 कल ०२-११-२५ रविवार 🌺🌺
🙏 प्रबोधिनी भागवत एकादशी ( बिल्वपत्र ) 🙏 उपवास
💐 देवउठी एकादशी
( मोटी अगियारस ) 💐
🪻 द्वादशी क्षयतिथि 🪻
⭐️ चातुर्मास समाप्त ⭐️
🌿 तुलसी विवाहारंभ 🌿
🙏 🌹 *जय श्री* कृष्ण 🌹🙏
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💐 देवउठी एकादशी
( मोटी अगियारस ) 💐
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⭐️ चातुर्मास समाप्त ⭐️
🌿 तुलसी विवाहारंभ 🌿
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देवप्रबोधिनी एकादशी विशेष
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देवप्रबोधिनी एकादशी को देव उठनी एकादशी और देवुत्थान एकादशी के नाम से भी जाना जाता है इस वर्ष देवप्रबोधिनी एकादशी स्मार्त एवं वैष्णव दोनों ही मत के अनुयायियों के द्वारा मंगलवार 12 नवम्बर को मनाई जाएगी।
हिन्दू मान्यताओं के अनुसार इस दिन से विवाह, गृह प्रवेश तथा अन्य सभी प्रकार के मांगलिक कार्य आरंभ हो जाते हैं। माना जाता है कि भगवान श्रीविष्णु ने भाद्रपद मास की शुक्ल एकादशी को महापराक्रमी शंखासुर नामक राक्षस को लम्बे युद्ध के बाद समाप्त किया था और थकावट दूर करने के लिए क्षीरसागर में जाकर सो गए थे और चार मास पश्चात फिर जब वे उठे तो वह दिन देव उठनी एकादशी कहलाया। इस दिन भगवान श्रीविष्णु का सपत्नीक आह्वान कर विधि विधान से पूजन करना चाहिए। इस दिन उपवास करने का विशेष महत्व है और माना जाता है कि यदि इस एकादशी का व्रत कर लिया तो सभी एकादशियों के व्रत का फल मिल जाता है और व्यक्ति सुख तथा वैभव प्राप्त करता है और उसके पाप नष्ट हो जाते हैं।
पद्मपुराण के अनुसार इस दिन उपवास करने से सहस्त्र एकादशी व्रतों का फल प्राप्त होता है। जप, होम, दान सब अक्षय होता है। यह उपवास हजार अश्वमेध तथा सौ राजसूय यज्ञों का फल देनेवाला, ऐश्वर्य, सम्पत्ति, उत्तम बुद्धि, राज्य तथा सुख प्रदाता है। मेरु पर्वत के समान बड़े-बड़े पापों को नाश करनेवाला, पुत्र-पौत्र प्रदान करनेवाला है। इस दिन गुरु का पूजन करने से भगवान प्रसन्न होते हैं व भगवान विष्णु की कपूर से आरती करने पर अकाल मृत्यु नहीं होती।
देव उठनी एकादशी का महत्व
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कार्तिक शुक्ल एकादशी को देवोत्थनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन से विवाह, गृह प्रवेश तथा अन्य सभी प्रकार के मांगलिक कार्य आरंभ हो जाते हैं। एक पौराणिक कथा में उल्लेख मिलता है कि भगवान श्रीविष्णु ने भाद्रपद मास की शुक्ल एकादशी को महापराक्रमी शंखासुर नामक राक्षस को लम्बे युद्ध के बाद समाप्त किया था और थकावट दूर करने के लिए क्षीरसागर में जाकर सो गए थे और चार मास पश्चात फिर जब वे उठे तो वह दिन देवोत्थनी एकादशी कहलाया। इस दिन भगवान विष्णु का सपत्नीक आह्वान कर विधि विधान से पूजन करना चाहिए। इस दिन उपवास करने का विशेष महत्व है।
पूजा विधि
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इस दिन व्रत करने वाली महिलाएं प्रातः स्नानादि से निवृत्त होकर पूजा स्थल को साफ करें और आंगन में चौक बनाकर भगवान श्रीविष्णु के चरणों को कलात्मक रूप से अंकित करें। दिन में चूंकि धूप होती है इसलिए भगवान के चरणों को ढंक दें। रात्रि के समय घंटा और शंख बजाकर निम्न मंत्र से भगवान को जगाएँ-:
*‘उत्तिष्ठ गोविन्द त्यज निद्रां जगत्पतये।*
*त्वयि सुप्ते जगन्नाथ जगत् सुप्तं भवेदिदम्॥’*
*‘उत्थिते चेष्टते सर्वमुत्तिष्ठोत्तिष्ठ माधव।*
*गतामेघा वियच्चैव निर्मलं निर्मलादिशः॥’*
*‘शारदानि च पुष्पाणि गृहाण मम केशव।’*
*‘उत्तिष्ठ गोविन्द त्यज निद्रां जगत्पतये।*
इसके बाद भगवान को जल, दूध, पंचामृत शहद, दही, घी, शक्कर
हल्दी मिश्रित जल, तथा अष्ट गंध से स्नान कराएं इसके बाद नये वस्त्र अर्पित करें फिर पीले चंदन का तिलक लगाएँ, श्रीफल अर्पित करें, नैवेद्य के रूप में विष्णु जी को ईख, अनार, केला, सिंघाड़ा आदि अर्पित करने चाहिए। फिर कथा का श्रवण करने के बाद आरती करें और बंधु बांधवों के बीच प्रसाद वितरित करें।
प्रबोधिनी एकादशी व्रत वाले दिन ऋग्वेद, यजुर्वेद और सामवेद के विविध मंत्र भी पढ़े जाते हैं।
भगवान श्रीविष्णु को तुलसी अर्पित करें
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पुराणों में उल्लेख मिलता है कि स्वर्ग में भगवान श्रीविष्णु के साथ लक्ष्मीजी का जो महत्व है वही धरती पर तुलसी का है। इसी के चलते भगवान को जो व्यक्ति तुलसी अर्पित करता है उससे वह अति प्रसन्न होते हैं। बद्रीनाथ धाम में तो यात्रा मौसम के दौरान श्रद्धालुओं द्वारा तुलसी की करीब दस हजार मालाएं रोज चढ़ाई जाती हैं। इस दिन श्रद्धालुओं को चाहिए कि जिस गमले में तुलसी का पौधा लगा है उसे गेरु आदि से सजाकर उसके चारों ओर मंडप बनाकर उसके ऊपर सुहाग की प्रतीक चुनरी को ओढ़ा दें। इसके अलावा गमले को भी साड़ी में लपेट दें और उसका श्रृंगार करें। इसके बाद सिद्धिविनायक श्रीगणेश सहित सभी देवी−देवताओं और श्री शालिग्रामजी का विधिवत पूजन करें। एक नारियल दक्षिणा के साथ टीका के रूप में रखें और भगवान शालिग्राम की मूर्ति का सिंहासन हाथ में लेकर तुलसीजी की सात परिक्रमा कराएं। इसके बाद आरती करें।
व्रत का पारण
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एकादशी के व्रत को समाप्त करने को पारण कहते हैं। एकादशी व्रत के अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण किया जाता है। एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले करना जरूरी है लेकिन अगर द्वादशी तिथि सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो गयी हो तो एकादशी व्रत का पारण सूर्योदय के बाद ही करना चाहिए।
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देवप्रबोधिनी एकादशी को देव उठनी एकादशी और देवुत्थान एकादशी के नाम से भी जाना जाता है इस वर्ष देवप्रबोधिनी एकादशी स्मार्त एवं वैष्णव दोनों ही मत के अनुयायियों के द्वारा मंगलवार 12 नवम्बर को मनाई जाएगी।
हिन्दू मान्यताओं के अनुसार इस दिन से विवाह, गृह प्रवेश तथा अन्य सभी प्रकार के मांगलिक कार्य आरंभ हो जाते हैं। माना जाता है कि भगवान श्रीविष्णु ने भाद्रपद मास की शुक्ल एकादशी को महापराक्रमी शंखासुर नामक राक्षस को लम्बे युद्ध के बाद समाप्त किया था और थकावट दूर करने के लिए क्षीरसागर में जाकर सो गए थे और चार मास पश्चात फिर जब वे उठे तो वह दिन देव उठनी एकादशी कहलाया। इस दिन भगवान श्रीविष्णु का सपत्नीक आह्वान कर विधि विधान से पूजन करना चाहिए। इस दिन उपवास करने का विशेष महत्व है और माना जाता है कि यदि इस एकादशी का व्रत कर लिया तो सभी एकादशियों के व्रत का फल मिल जाता है और व्यक्ति सुख तथा वैभव प्राप्त करता है और उसके पाप नष्ट हो जाते हैं।
पद्मपुराण के अनुसार इस दिन उपवास करने से सहस्त्र एकादशी व्रतों का फल प्राप्त होता है। जप, होम, दान सब अक्षय होता है। यह उपवास हजार अश्वमेध तथा सौ राजसूय यज्ञों का फल देनेवाला, ऐश्वर्य, सम्पत्ति, उत्तम बुद्धि, राज्य तथा सुख प्रदाता है। मेरु पर्वत के समान बड़े-बड़े पापों को नाश करनेवाला, पुत्र-पौत्र प्रदान करनेवाला है। इस दिन गुरु का पूजन करने से भगवान प्रसन्न होते हैं व भगवान विष्णु की कपूर से आरती करने पर अकाल मृत्यु नहीं होती।
देव उठनी एकादशी का महत्व
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कार्तिक शुक्ल एकादशी को देवोत्थनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन से विवाह, गृह प्रवेश तथा अन्य सभी प्रकार के मांगलिक कार्य आरंभ हो जाते हैं। एक पौराणिक कथा में उल्लेख मिलता है कि भगवान श्रीविष्णु ने भाद्रपद मास की शुक्ल एकादशी को महापराक्रमी शंखासुर नामक राक्षस को लम्बे युद्ध के बाद समाप्त किया था और थकावट दूर करने के लिए क्षीरसागर में जाकर सो गए थे और चार मास पश्चात फिर जब वे उठे तो वह दिन देवोत्थनी एकादशी कहलाया। इस दिन भगवान विष्णु का सपत्नीक आह्वान कर विधि विधान से पूजन करना चाहिए। इस दिन उपवास करने का विशेष महत्व है।
पूजा विधि
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इस दिन व्रत करने वाली महिलाएं प्रातः स्नानादि से निवृत्त होकर पूजा स्थल को साफ करें और आंगन में चौक बनाकर भगवान श्रीविष्णु के चरणों को कलात्मक रूप से अंकित करें। दिन में चूंकि धूप होती है इसलिए भगवान के चरणों को ढंक दें। रात्रि के समय घंटा और शंख बजाकर निम्न मंत्र से भगवान को जगाएँ-:
*‘उत्तिष्ठ गोविन्द त्यज निद्रां जगत्पतये।*
*त्वयि सुप्ते जगन्नाथ जगत् सुप्तं भवेदिदम्॥’*
*‘उत्थिते चेष्टते सर्वमुत्तिष्ठोत्तिष्ठ माधव।*
*गतामेघा वियच्चैव निर्मलं निर्मलादिशः॥’*
*‘शारदानि च पुष्पाणि गृहाण मम केशव।’*
*‘उत्तिष्ठ गोविन्द त्यज निद्रां जगत्पतये।*
इसके बाद भगवान को जल, दूध, पंचामृत शहद, दही, घी, शक्कर
हल्दी मिश्रित जल, तथा अष्ट गंध से स्नान कराएं इसके बाद नये वस्त्र अर्पित करें फिर पीले चंदन का तिलक लगाएँ, श्रीफल अर्पित करें, नैवेद्य के रूप में विष्णु जी को ईख, अनार, केला, सिंघाड़ा आदि अर्पित करने चाहिए। फिर कथा का श्रवण करने के बाद आरती करें और बंधु बांधवों के बीच प्रसाद वितरित करें।
प्रबोधिनी एकादशी व्रत वाले दिन ऋग्वेद, यजुर्वेद और सामवेद के विविध मंत्र भी पढ़े जाते हैं।
भगवान श्रीविष्णु को तुलसी अर्पित करें
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पुराणों में उल्लेख मिलता है कि स्वर्ग में भगवान श्रीविष्णु के साथ लक्ष्मीजी का जो महत्व है वही धरती पर तुलसी का है। इसी के चलते भगवान को जो व्यक्ति तुलसी अर्पित करता है उससे वह अति प्रसन्न होते हैं। बद्रीनाथ धाम में तो यात्रा मौसम के दौरान श्रद्धालुओं द्वारा तुलसी की करीब दस हजार मालाएं रोज चढ़ाई जाती हैं। इस दिन श्रद्धालुओं को चाहिए कि जिस गमले में तुलसी का पौधा लगा है उसे गेरु आदि से सजाकर उसके चारों ओर मंडप बनाकर उसके ऊपर सुहाग की प्रतीक चुनरी को ओढ़ा दें। इसके अलावा गमले को भी साड़ी में लपेट दें और उसका श्रृंगार करें। इसके बाद सिद्धिविनायक श्रीगणेश सहित सभी देवी−देवताओं और श्री शालिग्रामजी का विधिवत पूजन करें। एक नारियल दक्षिणा के साथ टीका के रूप में रखें और भगवान शालिग्राम की मूर्ति का सिंहासन हाथ में लेकर तुलसीजी की सात परिक्रमा कराएं। इसके बाद आरती करें।
व्रत का पारण
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एकादशी के व्रत को समाप्त करने को पारण कहते हैं। एकादशी व्रत के अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण किया जाता है। एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले करना जरूरी है लेकिन अगर द्वादशी तिथि सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो गयी हो तो एकादशी व्रत का पारण सूर्योदय के बाद ही करना चाहिए।
एकादशी व्रत का पारण हरि वासर के दौरान भी नहीं करना चाहिए। जो श्रद्धालु व्रत कर रहे हैं उन्हें व्रत तोड़ने से पहले हरि वासर समाप्त होने की प्रतिक्षा करनी चाहिए। हरि वासर द्वादशी तिथि की पहली एक चौथाई अवधि है।
01 नवम्बर के दिन एकादशी व्रत रखने वालो के लिये पारण (व्रत तोड़ने का) समय 02 नवम्बर दिन 01:10 से 03:22 तक।
पारण तिथि के दिन हरि वासर समाप्त होने का समय दोपहर 12:55 पर।
गौण देवउत्थान एकादशी रविवार 02 नवम्बर को व्रत रखने वालो के लिये पारण (व्रत तोड़ने का) 03 नवम्बर प्रातः 06:33 से 08:45 तक रहेगा।
पारण के दिन द्वादशी सूर्योदय से पहले समाप्त हो जाएगी
एकादशी तिथि आरंभ👉 01 नवंबर
प्रातः 09 बजकर 10 मिनट से।
एकादशी तिथि समाप्त👉 02 नवंबर
प्रातः 07 बजकर 30 मिनट तक।
विशेष
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कभी-कभी यह भी देखने में आता है कि एकादशी व्रत लगातार दो दिनों के लिए हो जाता है। जब ऐसी स्थिति आये तब गृहस्थ आश्रम से जुड़े लोगों को पहले दिन एकादशी व्रत करना चाहिए। संन्यासियों, विधवाओं और मोक्ष प्राप्ति के इच्छुक श्रद्धालुओं को दूजी एकादशी के दिन व्रत करना चाहिए। इस वर्ष 01 नवम्बर के दिन ही एकादशी सभी के लिए मान्य है क्योंकि इस दिन एकादशी तिथि का मान 2 तारीख की तुलना में अधिक है तथा देव उठाने की परंपरा प्राचीन काल से ही प्रदोष काल में चलती आई है एवं यही शास्त्र सम्मत भी है।
देवउठनी एकादशी व्रत कथा
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भगवान श्रीकृष्ण की पत्नी सत्यभामा को अपने रूप पर बड़ा गर्व था। वे सोचती थीं कि रूपवती होने के कारण ही श्रीकृष्ण उनसे अधिक स्नेह रखते हैं। एक दिन जब नारदजी उधर गए तो सत्यभामा ने कहा कि आप मुझे आशीर्वाद दीजिए कि अगले जन्म में भी भगवान श्रीकृष्ण ही मुझे पति रूप में प्राप्त हों। नारदजी बोले, ‘नियम यह है कि यदि कोई व्यक्ति अपनी प्रिय वस्तु इस जन्म में दान करे तो वह उसे अगले जन्म में प्राप्त होगी। अतः तुम भी श्रीकृष्ण को दान रूप में मुझे दे दो तो वे अगले जन्मों में जरूर मिलेंगे।’ सत्यभामा ने श्रीकृष्ण को नारदजी को दान रूप में दे दिया। जब नारदजी उन्हें ले जाने लगे तो अन्य रानियों ने उन्हें रोक लिया। इस पर नारदजी बोले, ‘यदि श्रीकृष्ण के बराबर सोना व रत्न दे दो तो हम इन्हें छोड़ देंगे।’
तब तराजू के एक पलड़े में श्रीकृष्ण बैठे तथा दूसरे पलड़े में सभी रानियां अपने−अपने आभूषण चढ़ाने लगीं, पर पलड़ा टस से मस नहीं हुआ। यह देख सत्यभामा ने कहा, यदि मैंने इन्हें दान किया है तो उबार भी लूंगी। यह कह कर उन्होंने अपने सारे आभूषण चढ़ा दिए, पर पलड़ा नहीं हिला। वे बड़ी लज्जित हुईं। सारा समाचार जब रुक्मिणी जी ने सुना तो वे तुलसी पूजन करके उसकी पत्ती ले आईं। उस पत्ती को पलड़े पर रखते ही तुला का वजन बराबर हो गया। नारद तुलसी दल लेकर स्वर्ग को चले गए। रुक्मिणी श्रीकृष्ण की पटरानी थीं। तुलसी के वरदान के कारण ही वे अपनी व अन्य रानियों के सौभाग्य की रक्षा कर सकीं। तब से तुलसी को यह पूज्य पद प्राप्त हो गया कि श्रीकृष्ण उसे सदा अपने मस्तक पर धारण करते हैं। इसी कारण इस एकादशी को तुलसीजी का व्रत व पूजन किया जाता है।
श्री जगदीश्वर जी की आरती
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ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी ! जय जगदीश हरे ।
भक्त / दास जनों के संकट, क्षण में दूर करे ॥
ॐ जय जगदीश हरे...
जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का, स्वामी दुःख विनसे मन का ।
सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का ॥
ॐ जय जगदीश हरे...
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ मैं किसकी, स्वामी शरण गहूँ मैं किसकी ।
तुम / प्रभु बिन और न दूजा, आस करूँ मैं जिसकी ॥
ॐ जय जगदीश हरे...
तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी, स्वामी तुम अन्तर्यामी ।
पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी ॥
ॐ जय जगदीश हरे...
तुम करुणा के सागर, तुम पालन-कर्ता, स्वामी तुम पालन-कर्ता ।
मैं मूरख खल कामी, मैं सेवक तुम स्वामी, कृपा करो भर्ता॥
ॐ जय जगदीश हरे...
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति, स्वामी सबके प्राणपति ।
किस विधि मिलूँ दयालु / गोसाईं, तुमको मैं कुमति ॥
ॐ जय जगदीश हरे...
दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे, स्वामी तुम रक्षक मेरे ।
अपने हाथ उठाओ, अपनी शरण लगाओ, द्वार पड़ा मैं तेरे ॥
ॐ जय जगदीश हरे...
विषय-विकार मिटाओ, पाप हरो देवा, स्वमी कष्ट हरो देवा ।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, श्रद्धा-प्रेम बढ़ाओ, सन्तन की सेवा ॥
ॐ जय जगदीश हरे...
तन मन धन सब है तेरा, स्वामी सब कुछ है तेरा ।
तेरा तुझको अर्पण, क्या लागे मेरा ॥
ॐ जय जगदीश हरे...
श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे, स्वामी जो कोई नर गावे ।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे ॥
ॐ जय जगदीश हरे...
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी ! जय जगदीश हरे ।
भक्त / दास जनों के संकट, क्षण में दूर करे ॥
ॐ जय जगदीश हरे...
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01 नवम्बर के दिन एकादशी व्रत रखने वालो के लिये पारण (व्रत तोड़ने का) समय 02 नवम्बर दिन 01:10 से 03:22 तक।
पारण तिथि के दिन हरि वासर समाप्त होने का समय दोपहर 12:55 पर।
गौण देवउत्थान एकादशी रविवार 02 नवम्बर को व्रत रखने वालो के लिये पारण (व्रत तोड़ने का) 03 नवम्बर प्रातः 06:33 से 08:45 तक रहेगा।
पारण के दिन द्वादशी सूर्योदय से पहले समाप्त हो जाएगी
एकादशी तिथि आरंभ👉 01 नवंबर
प्रातः 09 बजकर 10 मिनट से।
एकादशी तिथि समाप्त👉 02 नवंबर
प्रातः 07 बजकर 30 मिनट तक।
विशेष
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कभी-कभी यह भी देखने में आता है कि एकादशी व्रत लगातार दो दिनों के लिए हो जाता है। जब ऐसी स्थिति आये तब गृहस्थ आश्रम से जुड़े लोगों को पहले दिन एकादशी व्रत करना चाहिए। संन्यासियों, विधवाओं और मोक्ष प्राप्ति के इच्छुक श्रद्धालुओं को दूजी एकादशी के दिन व्रत करना चाहिए। इस वर्ष 01 नवम्बर के दिन ही एकादशी सभी के लिए मान्य है क्योंकि इस दिन एकादशी तिथि का मान 2 तारीख की तुलना में अधिक है तथा देव उठाने की परंपरा प्राचीन काल से ही प्रदोष काल में चलती आई है एवं यही शास्त्र सम्मत भी है।
देवउठनी एकादशी व्रत कथा
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भगवान श्रीकृष्ण की पत्नी सत्यभामा को अपने रूप पर बड़ा गर्व था। वे सोचती थीं कि रूपवती होने के कारण ही श्रीकृष्ण उनसे अधिक स्नेह रखते हैं। एक दिन जब नारदजी उधर गए तो सत्यभामा ने कहा कि आप मुझे आशीर्वाद दीजिए कि अगले जन्म में भी भगवान श्रीकृष्ण ही मुझे पति रूप में प्राप्त हों। नारदजी बोले, ‘नियम यह है कि यदि कोई व्यक्ति अपनी प्रिय वस्तु इस जन्म में दान करे तो वह उसे अगले जन्म में प्राप्त होगी। अतः तुम भी श्रीकृष्ण को दान रूप में मुझे दे दो तो वे अगले जन्मों में जरूर मिलेंगे।’ सत्यभामा ने श्रीकृष्ण को नारदजी को दान रूप में दे दिया। जब नारदजी उन्हें ले जाने लगे तो अन्य रानियों ने उन्हें रोक लिया। इस पर नारदजी बोले, ‘यदि श्रीकृष्ण के बराबर सोना व रत्न दे दो तो हम इन्हें छोड़ देंगे।’
तब तराजू के एक पलड़े में श्रीकृष्ण बैठे तथा दूसरे पलड़े में सभी रानियां अपने−अपने आभूषण चढ़ाने लगीं, पर पलड़ा टस से मस नहीं हुआ। यह देख सत्यभामा ने कहा, यदि मैंने इन्हें दान किया है तो उबार भी लूंगी। यह कह कर उन्होंने अपने सारे आभूषण चढ़ा दिए, पर पलड़ा नहीं हिला। वे बड़ी लज्जित हुईं। सारा समाचार जब रुक्मिणी जी ने सुना तो वे तुलसी पूजन करके उसकी पत्ती ले आईं। उस पत्ती को पलड़े पर रखते ही तुला का वजन बराबर हो गया। नारद तुलसी दल लेकर स्वर्ग को चले गए। रुक्मिणी श्रीकृष्ण की पटरानी थीं। तुलसी के वरदान के कारण ही वे अपनी व अन्य रानियों के सौभाग्य की रक्षा कर सकीं। तब से तुलसी को यह पूज्य पद प्राप्त हो गया कि श्रीकृष्ण उसे सदा अपने मस्तक पर धारण करते हैं। इसी कारण इस एकादशी को तुलसीजी का व्रत व पूजन किया जाता है।
श्री जगदीश्वर जी की आरती
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ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी ! जय जगदीश हरे ।
भक्त / दास जनों के संकट, क्षण में दूर करे ॥
ॐ जय जगदीश हरे...
जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का, स्वामी दुःख विनसे मन का ।
सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का ॥
ॐ जय जगदीश हरे...
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ मैं किसकी, स्वामी शरण गहूँ मैं किसकी ।
तुम / प्रभु बिन और न दूजा, आस करूँ मैं जिसकी ॥
ॐ जय जगदीश हरे...
तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी, स्वामी तुम अन्तर्यामी ।
पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी ॥
ॐ जय जगदीश हरे...
तुम करुणा के सागर, तुम पालन-कर्ता, स्वामी तुम पालन-कर्ता ।
मैं मूरख खल कामी, मैं सेवक तुम स्वामी, कृपा करो भर्ता॥
ॐ जय जगदीश हरे...
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति, स्वामी सबके प्राणपति ।
किस विधि मिलूँ दयालु / गोसाईं, तुमको मैं कुमति ॥
ॐ जय जगदीश हरे...
दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे, स्वामी तुम रक्षक मेरे ।
अपने हाथ उठाओ, अपनी शरण लगाओ, द्वार पड़ा मैं तेरे ॥
ॐ जय जगदीश हरे...
विषय-विकार मिटाओ, पाप हरो देवा, स्वमी कष्ट हरो देवा ।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, श्रद्धा-प्रेम बढ़ाओ, सन्तन की सेवा ॥
ॐ जय जगदीश हरे...
तन मन धन सब है तेरा, स्वामी सब कुछ है तेरा ।
तेरा तुझको अर्पण, क्या लागे मेरा ॥
ॐ जय जगदीश हरे...
श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे, स्वामी जो कोई नर गावे ।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे ॥
ॐ जय जगदीश हरे...
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी ! जय जगदीश हरे ।
भक्त / दास जनों के संकट, क्षण में दूर करे ॥
ॐ जय जगदीश हरे...
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