बदलते भारत की छवी
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भारत में जो वर्तमान समय कि स्थिति प्रस्थिति हैं उसने बाहर निकलना है

काले अंग्रेजों से मातृ भूमि के मुक्त और गौ हत्या का विरोध करना है
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हजारो वर्ष प्राचीन इस मंदिर को गौर से देखें । महाबलीपुरम के अज्ञात रथों में से एक रथ है यह । एक बड़े पत्थर को ही मंदिर की तरह तैयार कर दिया गया है । मात्र एक पत्थर से बनाया गया अद्भुत रथ । महाबलीपुरम में ऐसे कई मंदिर है कुछ समुद्र के नीचे, कुछ समुद्र के ऊपर.
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हर हर महादेव हर आपका दिन शुभ हो मंगलमय हो 🙏🏻 😊
।। शिवपञ्चाक्षर-नक्षत्रमाला स्तोत्रम् ।।

श्रीमदात्मने गुणैकसिन्धवे नमः शिवाय
धामलेशधूतकोकबन्धवे नमः शिवाय।
नामशेषितानमद्भावान्धवे नमः शिवाय
पामरेतरप्रधानबन्धवे नमः शिवाय।।

कालभीतविप्रबालपाल ते नमः शिवाय
शूलभिन्नदुष्टदक्षफाल ते नमः शिवाय।
मूलकारणाय कालकाल ते नमः शिवाय
पालयाधुना दयालवाल ते नमः शिवाय।।

इष्टवस्तुमुख्यदानहेतवे नमः शिवाय
दुष्टदैत्यवंशधूमकेतवे नमः शिवाय।
सृष्टिरक्षणाय धर्मसेतवे नमः शिवाय
अष्टमूर्तये वृषेन्द्रकेतवे नमः शिवाय।।

आपदद्रिभेदटङ्कहस्त ते नमः शिवाय
पापहारिदिव्यसिन्धुमस्त ते नमः शिवाय।
पापदारिणे लसन्नमस्तते नमः शिवाय
शापदोषखण्डनप्रशस्त ते नमः शिवाय।।

व्योमकेश दिव्यभव्यरूप ते नमः शिवाय
हेममेदिनीधरेन्द्रचाप ते नमः शिवाय।
नाममात्रदग्धसर्वपाप ते नमः शिवाय
कामनैकतानहृद्दुराप ते नमः शिवाय।।

ब्रह्ममस्तकावलीनिबद्ध ते नमः शिवाय
जिह्मगेन्द्रकुण्डलप्रसिद्ध ते नमः शिवाय।
ब्रह्मणे प्रणीतवेदपद्धते नमः शिवाय
जिंहकालदेहदत्तपद्धते नमः शिवाय।।

कामनाशनाय शुद्धकर्मणे नमः शिवाय
सामगानजायमानशर्मणे नमः शिवाय।
हेमकान्तिचाकचक्यवर्मणे नमः शिवाय
सामजासुराङ्गलब्धचर्मणे नमः शिवाय।।

जन्ममृत्युघोरदुःखहारिणे नमः शिवाय
चिन्मयैकरूपदेहधारिणे नमः शिवाय।
मन्मनोरथावपूर्तिकारिणे नमः शिवाय
सन्मनोगताय कामवैरिणे नमः शिवाय।।

यक्षराजबन्धवे दयालवे नमः शिवाय
दक्षपाणिशोभिकाञ्चनालवे नमः शिवाय।
पक्षिराजवाहहृच्च्हयालवे नमः शिवाय
अक्षिफाल वेदपूततालवे नमः शिवाय।।

दक्षहस्तनिष्ठजातवेदसे नमः शिवाय
अक्षरात्मने नमद्बिडौजसे नमः शिवाय।
दीक्षितप्रकाशितात्मतेजसे नमः शिवाय
उक्षराजवाह ते सतां गते नमः शिवाय।।

राजताचलेन्द्रसानुवासिने नमः शिवाय
राजमाननित्यमन्दहासिने नमः शिवाय।
राजकोरकावतंसभासिने नमः शिवाय
राजराजमित्रताप्रकाशिने नमः शिवाय।।

दीनमानवालिकामधेनवे नमः शिवाय
सूनबाणदाहकृत्कृशानवे नमः शिवाय।
स्वानुरागभक्तरत्नसानवे नमः शिवाय
दानवान्धकारचण्डभानवे नमः शिवाय।।

सर्वमङ्गलाकुचाग्रशायिने नमः शिवाय
सर्वदेवतागणातिशायिने नमः शिवाय।
पूर्वदेवनाशसंविधायिने नमः शिवाय
सर्वमन्मनोजभङ्गदायिने नमः शिवाय।।

स्तोकभक्तितो.अपि भक्तपोषिणे नमः शिवाय
माकरन्दसारवर्षिभाषिणे नमः शिवाय।
एकबिल्वदानतो.अपि तोषिणे नमः शिवाय
नैकजन्मपापजालशोषिणे नमः शिवाय।।

सर्वजीवरक्षणैकशीलिने नमः शिवाय
पार्वतीप्रियाय भक्तपालिने नमः शिवाय।
दुर्विदग्धदैत्यसैन्यदारिणे नमः शिवाय
शर्वरीशधारिणे कपालिने नमः शिवाय।।

पाहि मामुमामनोज्ञदेह ते नमः शिवाय
देहि मे वरं सिताद्रिगेह ते नमः शिवाय।
मोहितर्षिकामिनीसमूह ते नमः शिवाय
स्वेहितप्रसन्न कामदोह ते नमः शिवाय।।

मङ्गलप्रदाय गोतुरंग ते नमः शिवाय
गङ्गया तरङ्गितोत्तमाङ्ग ते नमः शिवाय।
सङ्गरप्रवृत्तवैरिभङ्ग ते नमः शिवाय
अङ्गजारये करेकुरङ्ग ते नमः शिवाय।।

ईहितक्षणप्रदानहेतवे नमः शिवाय
आहिताग्निपालकोक्षकेतवे नमः शिवाय।
देहकान्तिधूतरौप्यधातवे नमः शिवाय
गेहदुःखपुञ्जधूमकेतवे नमः शिवाय।।

त्र्यक्ष दीनसत्कृपाकटाक्ष ते नमः शिवाय
दक्षसप्ततन्तुनाशदक्ष ते नमः शिवाय।
इक्षराजभानुपावकाक्ष ते नमः शिवाय
रक्ष मां प्रपन्नमात्ररक्ष ते नमः शिवाय।।

न्यङ्कुपाणये शिवंकराय ते नमः शिवाय
संकटाब्धितीर्णकिंकराय ते नमः शिवाय।
कङ्कभीषिताभयंकराय ते नमः शिवाय
पङ्कजाननाय शंकराय ते नमः शिवाय।।

कर्मपाशनाश नीलकण्ठ ते नमः शिवाय
शर्मदाय नर्यभस्मकण्ठ ते नमः शिवाय।
निर्ममर्षिसेवितोपकण्ठ ते नमः शिवाय
कुर्महे नतीर्नमद्विकुण्ठ ते नमः शिवाय।।

विष्टपाधिपाय नम्रविष्णवे नमः शिवाय
शिष्टविप्रहृद्गुहाचरिष्णवे नमः शिवाय।
इष्टवस्तुनित्यतुष्टजिष्णवे नमः शिवाय
कष्टनाशनाय लोकजिष्णवे नमः शिवाय।।

अप्रमेयदिव्यसुप्रभाव ते नमः शिवाय
सत्प्रपन्नरक्षणस्वभाव ते नमः शिवाय।
स्वप्रकाश निस्तुलानुभाव ते नमः शिवाय
विप्रडिम्भदर्शितार्द्रभाव ते नमः शिवाय।।

सेवकाय मे मृड प्रसीद ते नमः शिवाय
भावलभ्य तावकप्रसाद ते नमः शिवाय।
पावकाक्ष देवपूज्यपाद ते नमः शिवाय
तवकाङ्घ्रिभक्तदत्तमोद ते नमः शिवाय।।

भुक्तिमुक्तिदिव्यभोगदायिने नमः शिवाय
शक्तिकल्पितप्रपञ्चभागिने नमः शिवाय।
भक्तसंकटापहारयोगिने नमः शिवाय
युक्तसन्मनःसरोजयोगिने नमः शिवाय।।

अन्तकान्तकाय पापहारिणे नमः शिवाय
शान्तमायदन्तिचर्मधारिणे नमः शिवाय।
संतताश्रितव्यथाविदारिणे नमः शिवाय
जन्तुजातनित्यसौख्यकारिणे नमः शिवाय।।

शूलिने नमो नमः कपालिने नमः शिवाय
पालिने विरिञ्चितुण्डमालिने नमः शिवाय।
लीलिने विशेषरुण्डमालिने नमः शिवाय
शीलिने नमः प्रपुण्यशालिने नमः शिवाय।।

शिवपञ्चाक्षरमुद्रां चतुष्पदोल्लासपद्यमणिघटिताम।
नक्षत्रमालिकामिह दधदुपकण्ठं नरो भवेत्सोमः।।

।। इति श्रीमत्परमहंस परिव्राजकाचार्यस्य श्रीगोविन्दभगवत्पूज्यपाद शिष्यस्य श्रीमच्छंकर भगवतः कृतौ शिवपञ्चाक्षर नक्षत्रमाला स्तोत्रं संपूर्णम् ।।

🙏🚩🙏
मणिपुर की इम्फाल घाटी में वैज्ञानिकों को एक बेहद दुर्लभ खोज मिली है—करीब 37,000 साल पुराना कांटेदार बांस का जीवाश्म. बांस आमतौर पर जल्दी सड़ जाते हैं, इसलिए उनका जीवाश्म मिलना लगभग नामुमकिन माना जाता है. लेकिन इस नम और गर्म इलाके ने इसे हजारों साल तक सुरक्षित रखा.

इस खोज से एक बड़ा रहस्य खुलता है: हिमयुग के दौरान जब दुनिया का बड़ा हिस्सा ठंड और सूखे से भर गया था, तब भी उत्तर-पूर्व भारत हरा-भरा रहा. बाकी स्थानों से बांस खत्म हो रहे थे, लेकिन मणिपुर में वे बचते रहे. यही इलाका उस समय प्राकृतिक “रिफ्यूज” यानी पनाहगाह बन गया था.

मिले हुए जीवाश्म पर पुराने कांटों के निशान आज भी साफ दिखाई देते हैं, जो बताते हैं कि पौधे तब भी खुद को जानवरों से बचाने के लिए कांटे विकसित करते थे. लैब में जांच से पता चला कि यह बांस चिमोनोबैम्बूसा समूह से जुड़ा हुआ है, जो आधुनिक कांटेदार बांसों जैसा ही है.
Forwarded from कैलाश के निवासी (Meett Meett)
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