प्रिय झाल-मूढ़ी, तुम राष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा बन गई हो. यह वही देश है जहां अक्सर मुद्दे अपनी बारी का इंतज़ार करते-करते बूढ़े हो जाते हैं, पर तुमने तो आते ही लाइन तोड़ दी, सीधे बहस और विमर्श के केंद्र में. अचानक मिले ‘राष्ट्रीय सम्मान’ का आनंद लो पर उससे भ्रमित मत हो जाना. इस देसी भक्ति-विशेष की कृपा से ऐसी ‘अल्पकालिक चर्चाएं’ हमने पहले भी देखी हैं, जहां मुद्दे नहीं, मौके चमकते हैं; और सरोकार नहीं, साउंडबाइट्स टिकते हैं.
मनोज कुमार झा पूरा लेख: https://thewirehindi.com/326978/bengal-elections-and-the-jhal-muri-optics/
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झाल-मूढ़ी: तुम्हारा ‘ब्रांड मैनेजर’ तो था ही नहीं, इसलिए तुम्हें मौका मिलने में इतनी देर लग गई
प्रिय झाल-मूढ़ी, तुम राष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा बन गई हो. यह वही देश है जहां अक्सर मुद्दे अपनी बारी का इंतज़ार करते-करते बूढ़े हो जाते हैं, पर तुमने तो आते ही लाइन तोड़ दी, सीधे बहस और विमर्श के...
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🎯जब तक किसी बात की पूरी जानकारी ना हो
तब तक हमारा मौन रहना ही ज़्यादा बेहतर हैं।⛳️
🔥सुप्रभात 📚
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🔥सुप्रभात 📚
🔥4🥰1
🎯विश्व पुस्तक दिवस@२३अप्रैल⛳️
हम आभारी रहेंगे उन सभी पुस्तकों के,
जिनके कारण से आज हम वो बन पाए
जो शायद नहीं बन पाते अगर पुस्तकें नहीं होती!📚
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जो शायद नहीं बन पाते अगर पुस्तकें नहीं होती!📚