भारत के लिए गर्व का पल है। तमिलनाडु की वरिष्ठ IAS अधिकारी सुप्रिया साहू को संयुक्त राष्ट्र का सर्वोच्च पर्यावरण सम्मान Champions of the Earth Award दिया गया है।
उन्हें यह अवॉर्ड UNEP द्वारा नैरोबी (केन्या) में आयोजित समारोह में दिया गया। यह अवॉर्ड पर्यावरण संरक्षण और जलवायु कार्रवाई में असाधारण नेतृत्व के लिए दिया जाता है।
पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन और वन विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव के रूप में सुप्रिया साहू ने प्लास्टिक प्रदूषण, जैव विविधता संरक्षण, इकोसिस्टम रिस्टोरेशन और सस्टेनेबल कूलिंग जैसे अहम क्षेत्रों में प्रभावशाली काम किया है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन से लड़ाई सिर्फ सरकारों की नहीं, बल्कि लोगों की भागीदारी से ही एक आंदोलन बन सकती है।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने इसे राज्य के लिए गर्व का क्षण बताते हुए आर्द्रभूमि संरक्षण, मैंग्रोव विस्तार और प्लास्टिक कम करने जैसे प्रयासों को और तेज करने की बात कही। यह सम्मान भारत की वैश्विक पर्यावरण नेतृत्व में बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।
उन्हें यह अवॉर्ड UNEP द्वारा नैरोबी (केन्या) में आयोजित समारोह में दिया गया। यह अवॉर्ड पर्यावरण संरक्षण और जलवायु कार्रवाई में असाधारण नेतृत्व के लिए दिया जाता है।
पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन और वन विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव के रूप में सुप्रिया साहू ने प्लास्टिक प्रदूषण, जैव विविधता संरक्षण, इकोसिस्टम रिस्टोरेशन और सस्टेनेबल कूलिंग जैसे अहम क्षेत्रों में प्रभावशाली काम किया है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन से लड़ाई सिर्फ सरकारों की नहीं, बल्कि लोगों की भागीदारी से ही एक आंदोलन बन सकती है।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने इसे राज्य के लिए गर्व का क्षण बताते हुए आर्द्रभूमि संरक्षण, मैंग्रोव विस्तार और प्लास्टिक कम करने जैसे प्रयासों को और तेज करने की बात कही। यह सम्मान भारत की वैश्विक पर्यावरण नेतृत्व में बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।
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वाराणसी भारत का पहला शहर बन गया है जिसने हाइड्रोजन-चालित वाटर टैक्सी सेवा शुरू की है, जिसका उद्घाटन नामो घाट पर किया गया। यह सेवा गंगा में हरित जल परिवहन को बढ़ावा देती है। कोचिन शिपयार्ड में निर्मित यह नाव हाइब्रिड इलेक्ट्रिक-हाइड्रोजन इंजन पर चलती है, जिससे कोई प्रदूषण नहीं होता और यह 50 यात्रियों को ले जा सकती है। वर्तमान में यह नाव नामो घाट और रविदास घाट के बीच कई दैनिक यात्रा करती है, जिसकी किराया प्रति व्यक्ति ₹500 है। सोलर पैनल, बायो-टॉयलेट और CCTV से सुरक्षित और टिकाऊ यात्रा सुनिश्चित की गई है, और भविष्य में अन्य घाटों तक विस्तार की योजना है।