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At just 23 years old, Charu Pandey from Tilda-Neora in Chhattisgarh has achieved an extraordinary feat by clearing 19 competitive examinations across multiple sectors. Her success includes prestigious exams such as SSC CGL, CHSL, MTS, GD, CPO, SBI PO, SBI Clerk, IBPS PO, IBPS Clerk, along with several railway and state-level recruitments, reflecting exceptional dedication and preparation.

Charu began her journey while still in college and balanced her studies by tutoring school students, an experience she credits for strengthening her understanding of key concepts. Her story highlights how consistency, discipline, and focused preparation can pave the way to success, inspiring countless aspirants across the country.

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शरीर का 95% भाग नहीं करता काम, C.G में किया ऐसा काम की राष्ट्रपति ने बुलाया Delhi | Manish Badbandha | The Lokras

नमस्ते दोस्तों,
आज हम आपके लिए लाए हैं छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के कुरुद निवासी प्रसिद्ध चित्रकार बसंत साहू की प्रेरणादायक कहानी, जिन्होंने शारीरिक दिव्यांगता को अपनी सफलता की राह में रुकावट नहीं बनने दिया।

95% शरीर निष्क्रिय होने के बावजूद, बसंत साहू को भारत सरकार के 'दिव्यांगजन सशक्तिकरण के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार 2025' के अंतर्गत 'सर्वश्रेष्ठ दिव्यांगजन' श्रेणी में चुना गया है। व्हीलचेयर से कैनवास तक का उनका यह सफर लाखों लोगों के लिए प्रेरणा है।

राष्ट्रपति के हाथों सम्मान:
52 वर्षीय बसंत साहू 3 दिसंबर को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त करेंगे। यह कार्यक्रम “अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस” के अवसर पर आयोजित किया जाएगा।

जीवन की कठिनाई के बीच शुरू हुई चित्रकला:
15 सितंबर 1995 को एक सड़क दुर्घटना में उनकी रीढ़ की हड्डी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई, जिससे उनका 95% शरीर निष्क्रिय हो गया। डॉक्टरों के मना करने के बावजूद, उन्होंने बिस्तर पर लेटे-लेटे ही चित्रकला की यात्रा शुरू की।

बसंत का व्हीलचेयर से कैनवास तक का सफर:
बसंत साहू व्हीलचेयर पर बैठकर चित्र बनाते हैं। वह अपने दाएं हाथ में एक पट्टा बांधकर ब्रश फंसाते हैं और इसी तकनीक से रंगों को कैनवास पर उतारते हैं। उनकी हजारों कलाकृतियां आज राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित हैं।

बसंत का जीवन प्रेरणा का प्रतीक है। उन्होंने साबित किया है कि दिव्यांगता शरीर में हो सकती है, मन में नहीं! उनकी कहानी सिर्फ एक कलाकार की नहीं, बल्कि अदम्य साहस और आत्मविश्वास की मिसाल है।

बसंत साहू जी की इस कहानी को एक Like ज़रूर करें और Comment में बताएं कि आपको इस वीडियो से क्या प्रेरणा मिली?
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नेहा पांचाल की सफलता की कहानी संघर्ष, अटूट संकल्प और एक बहन के प्यार का भावनात्मक सफर है। दिल्ली के एक सामान्य परिवार से ताल्लुक रखने वाली नेहा ने अपने भाई को विनीत को कम उम्र में ब्रेन ट्यूमर के कारण खो दिया था। भाई की आखिरी इच्छा थी कि वह अफसर बनें और यही उनका लक्ष्य बन गया। शादी, घर व बेटी की जिम्मेदारियां और लाखों के कर्ज के बीच उन्होंने किताबें उठाईं। UPSC और UPPSC की परीक्षाओं में लगातार 9 बार फेल होने के बाद भी हार मानना विकल्प नहीं था। फिर एक दिन उनका वर्षों का संघर्ष खत्म हुआ और उन्होंने UPPSC में रैंक-1 लाकर टॉप किया। आज वह डिप्टी कलेक्टर हैं।
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