No Document No History
आज तो sir , 2 बजे रात तक वो सेशन ले रहे होंगे IIT कानपुर मे 😁😂 baki कोशिश करता हु लेकिन इतना भाव नही देंगे वो मुझे, live session (offline) मे होते है तो फुल इज़्ज़त मिलती है 😅
ओके मित्र कोई बात नहीं किसी और दिन प्रयास करना,।
जिंदगी में एक बार तो भी आचार्य प्रशांत जी को जरूर ऑनलाइन बुलाएंगे टेलीग्राम पर❤️ 🤩
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बाकी आपके प्रस्ताव को गीता community पर जरूर पोस्ट करूंगा ... sir जी
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No Document No History
बाकी आपके प्रस्ताव को गीता community पर जरूर पोस्ट करूंगा ... sir जी
बहुत-बहुत धन्यवाद प्रिय मित्र आपका,
आदरणीय आचार्य प्रशांत जी को प्रणाम बोलना💜 💗 💙 ❤️ 🤩 👏
आदरणीय आचार्य प्रशांत जी को प्रणाम बोलना
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Forwarded from ജയ് ശ്രീറാം
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बजट को आसान भाषा में समझें
#Budget2026. 😅
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No Document No History
https://youtu.be/O0jFJ-hei2k?si=GwoYzsAiwqxseNx1 ये काफी शानदार वीडियो है उनकी गांधी जी पर ..✅
ये काफी शानदार वीडियो है उनकी गांधी जी पर ..✅
इस वीडियो मे।✍✍✍
✅ गांधी जी की ऑटो बायोग्राफी और सकारात्मक पहलू
✅ गांधी जी का नॉन - कोऑपरेशन मूवमेंट
✅ गांधी जी की नकारात्मक छवि
✅ गांधी जी की छवि और उनकी पहचान
✅ गांधी जी का आर्थिक दृस्टिकोण
✅ गांधी जी का संत और नेता होना
✅ गांधी जी की शिक्षाए और उनके प्रभाव
✅ गांधी जी का अहिंसा का सिद्धांत
✅ गांधी जी का योगदान और उनकी आलोचना
✅ गांधी जी की शिक्षाओ का महत्व
इस वीडियो मे।✍✍✍
✅ गांधी जी की ऑटो बायोग्राफी और सकारात्मक पहलू
✅ गांधी जी का नॉन - कोऑपरेशन मूवमेंट
✅ गांधी जी की नकारात्मक छवि
✅ गांधी जी की छवि और उनकी पहचान
✅ गांधी जी का आर्थिक दृस्टिकोण
✅ गांधी जी का संत और नेता होना
✅ गांधी जी की शिक्षाए और उनके प्रभाव
✅ गांधी जी का अहिंसा का सिद्धांत
✅ गांधी जी का योगदान और उनकी आलोचना
✅ गांधी जी की शिक्षाओ का महत्व
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चर्चा में.... ✍
✅एप्स्टीन फ़ाइल (Epstein File) से आमतौर पर मतलब होता है:
🔴 Epstein Files क्या हैं?
यह शब्द जेफ़री एप्स्टीन (Jeffrey Epstein) से जुड़े गुप्त/सीलबंद दस्तावेज़ों के लिए इस्तेमाल होता है, जिनमें कथित तौर पर शामिल हैं:
♻️प्रभावशाली लोगों (राजनेता, अरबपति, सेलिब्रिटी) के नाम
♻️नाबालिगों के यौन शोषण से जुड़े आरोप
कोर्ट रिकॉर्ड, गवाहों के बयान
♻️उड़ान लॉग (flight logs), संपर्क सूचियाँ
ई-मेल, वित्तीय लेन-देन के दस्तावेज़
👉 ये फाइलें लंबे समय तक सीलबंद (sealed) रहीं, इसलिए इन्हें सामूहिक रूप से “Epstein Files” कहा जाने लगा।
🧠 Jeffrey Epstein कौन था? (संक्षेप में)
💢अमेरिकी अरबपति फाइनेंसर
2000 के दशक में सेक्स ट्रैफिकिंग के गंभीर आरोप
💢2019 में गिरफ्तारी
जेल में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु
📌 Epstein Files क्यों चर्चा में रहती हैं?
कहा जाता है कि इनमें दुनिया के शक्तिशाली लोगों की संलिप्तता के संकेत हैं
🚫कई नाम सार्वजनिक नहीं किए गए
इसलिए इसे राजनीति + सत्ता + अपराध से जुड़ा बड़ा मुद्दा माना जाता है । ✅
✅एप्स्टीन फ़ाइल (Epstein File) से आमतौर पर मतलब होता है:
🔴 Epstein Files क्या हैं?
यह शब्द जेफ़री एप्स्टीन (Jeffrey Epstein) से जुड़े गुप्त/सीलबंद दस्तावेज़ों के लिए इस्तेमाल होता है, जिनमें कथित तौर पर शामिल हैं:
♻️प्रभावशाली लोगों (राजनेता, अरबपति, सेलिब्रिटी) के नाम
♻️नाबालिगों के यौन शोषण से जुड़े आरोप
कोर्ट रिकॉर्ड, गवाहों के बयान
♻️उड़ान लॉग (flight logs), संपर्क सूचियाँ
ई-मेल, वित्तीय लेन-देन के दस्तावेज़
👉 ये फाइलें लंबे समय तक सीलबंद (sealed) रहीं, इसलिए इन्हें सामूहिक रूप से “Epstein Files” कहा जाने लगा।
🧠 Jeffrey Epstein कौन था? (संक्षेप में)
💢अमेरिकी अरबपति फाइनेंसर
2000 के दशक में सेक्स ट्रैफिकिंग के गंभीर आरोप
💢2019 में गिरफ्तारी
जेल में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु
📌 Epstein Files क्यों चर्चा में रहती हैं?
कहा जाता है कि इनमें दुनिया के शक्तिशाली लोगों की संलिप्तता के संकेत हैं
🚫कई नाम सार्वजनिक नहीं किए गए
इसलिए इसे राजनीति + सत्ता + अपराध से जुड़ा बड़ा मुद्दा माना जाता है । ✅
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Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️ (A B)
गांधी जी का पहला जेल अनुभव 1908 में हुआ। जेल के नियम उन्हें ब्रह्मचारी और आत्मसंयमी जीवन के अनुकूल लगे।
नियम थे—
सूर्यास्त से पहले अंतिम भोजन
चाय-कॉफी का निषेध
भोजन में केवल आवश्यकता अनुसार नमक, स्वाद के लिए नहीं
जेल से छूटने के बाद गांधी जी ने ये नियम स्वेच्छा से अपने जीवन में अपना लिए, क्योंकि आत्म-लगाया गया संयम अधिक प्रभावी होता है।
बाद में उन्होंने पूरी तरह नमक छोड़ने का प्रयोग किया और इसे कई वर्षों तक निभाया।
गांधी जी का विश्वास था कि ब्रह्मचर्य और आत्मसंयम के लिए सरल व संयमित आहार आवश्यक है।
इसी दौरान कस्तूरबा गांधी बीमार पड़ीं और उनके इलाज के प्रयास सफल नहीं हो रहे थे।
गांधी जी ने कस्तूरबा से नमक और दाल छोड़ने का आग्रह किया, पर वे सहमत नहीं हुईं।
तब गांधी जी ने किसी पर दबाव न डालते हुए स्वयं एक वर्ष तक नमक और दाल छोड़ने का व्रत लिया।
कस्तूरबा इस त्याग से भावुक हो गईं और गांधी जी के प्रेम व दृढ़ता को समझ सकीं।
गांधी जी ने इस पूरे प्रसंग को “सत्याग्रह का एक शुद्ध और घरेलू रूप” कहा।
गांधी जी ने इस घटना को अपने जीवन की सबसे मधुर स्मृतियों में से एक बताया।
https://t.me/historyfact00
नियम थे—
सूर्यास्त से पहले अंतिम भोजन
चाय-कॉफी का निषेध
भोजन में केवल आवश्यकता अनुसार नमक, स्वाद के लिए नहीं
जेल से छूटने के बाद गांधी जी ने ये नियम स्वेच्छा से अपने जीवन में अपना लिए, क्योंकि आत्म-लगाया गया संयम अधिक प्रभावी होता है।
बाद में उन्होंने पूरी तरह नमक छोड़ने का प्रयोग किया और इसे कई वर्षों तक निभाया।
गांधी जी का विश्वास था कि ब्रह्मचर्य और आत्मसंयम के लिए सरल व संयमित आहार आवश्यक है।
इसी दौरान कस्तूरबा गांधी बीमार पड़ीं और उनके इलाज के प्रयास सफल नहीं हो रहे थे।
गांधी जी ने कस्तूरबा से नमक और दाल छोड़ने का आग्रह किया, पर वे सहमत नहीं हुईं।
तब गांधी जी ने किसी पर दबाव न डालते हुए स्वयं एक वर्ष तक नमक और दाल छोड़ने का व्रत लिया।
कस्तूरबा इस त्याग से भावुक हो गईं और गांधी जी के प्रेम व दृढ़ता को समझ सकीं।
गांधी जी ने इस पूरे प्रसंग को “सत्याग्रह का एक शुद्ध और घरेलू रूप” कहा।
गांधी जी ने इस घटना को अपने जीवन की सबसे मधुर स्मृतियों में से एक बताया।
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Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️ (A B)
नाम: अजीजान बाई
स्थान: कानपुर (उत्तर प्रदेश)
समय: 1857 का विद्रोह
भूमिका: क्रांतिकारी, सैन्य सहयोगी, जासूसी व रसद व्यवस्था
अजीजान बाई मूल रूप से तवायफ (नर्तकी/गायिका) थीं, लेकिन 1857 के विद्रोह में उन्होंने अंग्रेज़ों के खिलाफ सक्रिय भूमिका निभाई।
उन्होंने नाना साहेब पेशवा का समर्थन किया और उनके आंदोलन से जुड़ी रहीं।
अजीजान बाई ने
विद्रोही सैनिकों को आर्थिक सहायता दी,हथियारों और रसद की व्यवस्था में मदद की,अंग्रेज़ों की गतिविधियों की सूचना (जासूसी) विद्रोहियों तक पहुँचाई।
कानपुर में विद्रोह के दौरान वे देशभक्ति गीतों और भाषणों के माध्यम से जनता और सैनिकों का मनोबल बढ़ाती थीं।
समाज में उपेक्षित माने जाने वाले वर्ग से होने के बावजूद उनका योगदान राष्ट्रीय आंदोलन के प्रति समर्पण का उदाहरण है।
अजीजान बाई यह दिखाती हैं कि 1857 का संग्राम केवल राजाओं-रानियों तक सीमित नहीं था, बल्कि सामान्य नागरिकों और महिलाओं ने भी उसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उनका नाम अक्सर इतिहास की मुख्यधारा में नहीं मिलता, लेकिन वे लोकप्रिय क्रांतिकारी नायिकाओं में गिनी जाती हैं।
अजीजान बाई 1857 के संग्राम में कानपुर की वह साहसी महिला थीं जिन्होंने नाना साहेब के पक्ष में रहकर धन, सूचना और जनसमर्थन से अंग्रेज़ों का विरोध किया ✍️📖
https://t.me/historyfact00
स्थान: कानपुर (उत्तर प्रदेश)
समय: 1857 का विद्रोह
भूमिका: क्रांतिकारी, सैन्य सहयोगी, जासूसी व रसद व्यवस्था
अजीजान बाई मूल रूप से तवायफ (नर्तकी/गायिका) थीं, लेकिन 1857 के विद्रोह में उन्होंने अंग्रेज़ों के खिलाफ सक्रिय भूमिका निभाई।
उन्होंने नाना साहेब पेशवा का समर्थन किया और उनके आंदोलन से जुड़ी रहीं।
अजीजान बाई ने
विद्रोही सैनिकों को आर्थिक सहायता दी,हथियारों और रसद की व्यवस्था में मदद की,अंग्रेज़ों की गतिविधियों की सूचना (जासूसी) विद्रोहियों तक पहुँचाई।
कानपुर में विद्रोह के दौरान वे देशभक्ति गीतों और भाषणों के माध्यम से जनता और सैनिकों का मनोबल बढ़ाती थीं।
समाज में उपेक्षित माने जाने वाले वर्ग से होने के बावजूद उनका योगदान राष्ट्रीय आंदोलन के प्रति समर्पण का उदाहरण है।
अजीजान बाई यह दिखाती हैं कि 1857 का संग्राम केवल राजाओं-रानियों तक सीमित नहीं था, बल्कि सामान्य नागरिकों और महिलाओं ने भी उसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उनका नाम अक्सर इतिहास की मुख्यधारा में नहीं मिलता, लेकिन वे लोकप्रिय क्रांतिकारी नायिकाओं में गिनी जाती हैं।
अजीजान बाई 1857 के संग्राम में कानपुर की वह साहसी महिला थीं जिन्होंने नाना साहेब के पक्ष में रहकर धन, सूचना और जनसमर्थन से अंग्रेज़ों का विरोध किया ✍️📖
https://t.me/historyfact00
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Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️ (A B)
प्रिंसटन, न्यू जर्सी में अल्बर्ट आइंस्टीन के साथ जवाहरलाल नेहरू 📽️
https://t.me/historyfact00
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Forwarded from हम सब इतिहास के .. (गोरखपुर विश्वविद्यालय गोरखपुर)
दक्कन का अकाल (1630–1632 ई.)
शासक: मुगल बादशाह शाहजहाँ
क्षेत्र: गुजरात, महाराष्ट्र और दक्कन का पठार
यह भारत के इतिहास का सबसे विनाशकारी अकाल माना जाता है। इस अकाल का आँखों देखा हाल बादशाह शाहजहाँ के दरबारी इतिहासकार अब्दुल हमीद लाहौरी ने अपनी पुस्तक 'पादशाहनामा' (Padshahnama) में लिखा है।
अब्दुल हमीद लाहौरी का कथन:
लाहौरी ने फारसी में जो लिखा, उसका अनुवाद इतिहास के पन्नों में दर्ज है:
शासक: मुगल बादशाह शाहजहाँ
क्षेत्र: गुजरात, महाराष्ट्र और दक्कन का पठार
यह भारत के इतिहास का सबसे विनाशकारी अकाल माना जाता है। इस अकाल का आँखों देखा हाल बादशाह शाहजहाँ के दरबारी इतिहासकार अब्दुल हमीद लाहौरी ने अपनी पुस्तक 'पादशाहनामा' (Padshahnama) में लिखा है।
अब्दुल हमीद लाहौरी का कथन:
लाहौरी ने फारसी में जो लिखा, उसका अनुवाद इतिहास के पन्नों में दर्ज है:
"लोग इतने मजबूर हो गए थे कि वे मरे हुए जानवरों का मांस खाने लगे। जब वह भी खत्म हो गया, तो आदमी, आदमी को खाने लगा। और स्थिति यहाँ तक बिगड़ गई कि बेटे का मांस उसकी मोहब्बत से ज्यादा प्यारा हो गया (The flesh of a son was preferred to his love)। पिसे हुए मरे हुए लोगों की हड्डियों को आटे में मिलाकर बेचा जाने लगा।"
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