No Document No History
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🏛️NO DOCUMENT NO HISTORY🏛️
जहाँ इतिहास किताबों से आगे, दस्तावेज़ों से जुड़ता है।
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Forwarded from No Document No History (श्री.रामसिंग राजपूत⛳)
No Document No History
आधुनिक_भारत_वस्तुनिष्ठ_डेमो.pdf
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तो क्या हो गया ?
Historians_Statements_PYQ_Sumit_Pandey.pdf
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Credit - प्रिय मित्र सुमित पाण्डेय जी❤️💐
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Forwarded from आदित्य राय
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Forwarded from No Document No History (श्री.रामसिंग राजपूत⛳)
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इतिहास के सभी विद्यार्थियों से निवेदन है कि इस पोस्ट को अपने मित्रों और अध्ययन समूहों में भी शेयर करें।

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💙No Document No History
✍️ Shri. Ramsing Rajput

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उपराष्ट्रपति का क्रम
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Forwarded from Gurukul History Education (History PYQs) (Narvada Dubey)
गांधी जी और सरोजिनी नायडू



गांधीजी ने उनके भाषणों से प्रभावित होकर उन्हें ‘भारत कोकिला’ की उपाधि दी थी. लेकिन वो अपने पत्रों में उन्हें कभी-कभी ‘डियर बुलबुल’,’डियर मीराबाई’ तो यहां तक कि कभी मजाक में ‘अम्माजान’ और ‘मदर’ भी लिखते थे.

हास्य और विनोद के उसी अंदाज में सरोजिनी भी उन्हें कभी ‘जुलाहा’, ‘लिटिल मैन’ तो कभी ‘मिकी माउस’ संबोधित करती हैं.तो कहीं बिल्कुल कातर और बेबस होकर ‘शांति का दूत’ पुकारते हुए उनसे अपील करती है.


BBC NEWS
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Forwarded from Gurukul History Education (History PYQs) (Narvada Dubey)
उनकी नग्नता बैज ऑफ़ ऑनर (सम्मान का तमगा) बन गई थी.





गांधी के वापस लौटने पर एक ब्रिटिश रिपोर्टर ने पूछा- 'मिस्टर गांधी, मुझे नहीं लगता कि आपने किंग से मिलने के लिए उपयुक्त कपड़े पहने थे?' गांधी ने अपनी शरारती मुस्कान के साथ जवाब दिया- 'आप मेरे कपड़ों के बारे में चिंता बिलकुल मत करें. आपके राजा ने हम दोनों के लिए पर्याप्त कपड़े पहन रखे थे.' गांधी के ये शब्द सारी दुनिया में हमेशा के लिए चर्चित हो गए.


दुनिया के मशहूर जीवनी लेखक रॉबर्ट पाएन के शब्दों में 'उनकी नग्नता बैज ऑफ़ ऑनर (सम्मान का तमगा) बन गई थी.'


BBC NEWS
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Forwarded from Vimal04
मूल ग्रंथ की संक्षिप्त व्याख्या = टीका
मूल ग्रंथ की विस्तृत व्याख्या= भाष्य
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यूपी पीजीटी मे संशोधन  आज से शुरू होगा  जिन लोगो का गलती से मिस्केट हो गया हो फार्म  भरते समय  वह अपनी त्रुटियाँ  सुधार कर ले
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Forwarded from Gurukul History Education (History PYQs) (Narvada Dubey)
गांधी-पूर्व दौर (1858-1917) के लोकप्रिय आंदोलनों की सबसे प्रमुख ऐतिहासिक सीमा (कमजोरी) क्या थी?


​(A) वे अत्यधिक सुपठित अखिल भारतीय दल थे
​(B) वे अधिकांशतः 'स्वतःस्फूर्त' थे, क्षेत्र व समय में बिखरे हुए थे और दूर के अंग्रेज शासकों के बजाय तात्कालिक स्थानीय शोषकों के विरुद्ध थे
​(C) वे केवल अहिंसा पर विश्वास करते थे
​(D) उनके किसानों का कोई समर्थन नहीं था


​उत्तर: (B)


​व्याख्या: ये आंदोलन सचेत साम्राज्यवाद-विरोधी न होकर स्थानीय साहूकार, जमींदार या आबकारी कानूनों के विरुद्ध थे और इनमें समग्र राष्ट्रीय विकल्प का अभाव था।




अवधारणात्मक question

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Universities_Filling_up_of_Assistant_Professors_Vacant_posts_G_O.pdf
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Universities_Filling-up of Assistant Professors Vacant posts_G.O. 142.

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Forwarded from Study Hamare sath
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भारत सरकार अधिनियम 1935 के अनुसार, ब्रिटिश भारत में 1936-37 की सर्दियों में प्रांतीय चुनाव हुए । मद्रास , मध्य प्रांत , बिहार , उड़ीसा , संयुक्त प्रांत , बंबई , असम , उत्तर-पश्चिम सीमांत प्रांत , बंगाल , पंजाब और सिंध - सभी ग्यारह राज्यपालीय प्रांतों में चुनाव हुए। दिल्ली , अजमेर-मेरवाड़ा , कूर्ग और बलूचिस्तान के ब्रिटिश प्रांतों और रियासतों में चुनाव नहीं हुए ।
चुनाव के अंतिम परिणाम 20 फरवरी 1937 को घोषित किए गए। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पांच प्रांतों - बंबई, मद्रास, मध्य प्रांत, संयुक्त प्रांत, उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत, बिहार और उड़ीसा - में सत्ता में आई। पंजाब, सिंध (जहां उसे बहुमत नहीं मिला), असम और बंगाल (जहां वह फिर भी सबसे बड़ी पार्टी थी) इसके अपवाद थे। अखिल भारतीय मुस्लिम लीग किसी भी प्रांत में अपने दम पर सरकार बनाने में असफल रही।

भारतीय जनता के निर्वाचित प्रतिनिधियों से परामर्श किए बिना भारत को द्वितीय विश्व युद्ध में युद्धरत देश घोषित करने के वायसराय लॉर्ड लिनलिथगो के फैसले के विरोध में अक्टूबर और नवंबर 1939 में कांग्रेस सरकारों ने इस्तीफा दे दिया।

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HP Assistant Professor 2017 में एक प्रश्न पूछा गया था कि 1946 के पंजाब असेंबली के चुनावों में अकाली दल को कितनी सीटें मिली थीं?

ऐसे प्रश्नों को देखते हुए यह संभावना बनती है कि आगामी परीक्षाओं में 1937 के संयुक्त प्रांत (वर्तमान उत्तर प्रदेश) के चुनावों से भी प्रश्न पूछे जा सकते हैं, जैसे कांग्रेस, मुस्लिम लीग या अन्य दलों को कितनी सीटें मिली थीं। इसी प्रकार 1934, 1945–1946 के केंद्रीय एवं प्रांतीय चुनावों से जुड़े आँकड़ों पर भी प्रश्न बन सकते हैं।

इसलिए इन चुनावों के प्रमुख आँकड़ों को भी अपनी तैयारी में शामिल रखिए। प्रश्न आए या न आए, लेकिन बदलते परीक्षा-पैटर्न को देखते हुए ऐसी जानकारी पर ध्यान देना उपयोगी हो सकता है।
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Forwarded from Gurukul History Education (History PYQs) (Narvada Dubey)
विंस्टन चर्चिल को गांधी-इरविन की वो मुलाक़ात बहुत नागवार गुज़री थी.




उस समय ब्रिटेन की कंज़रवेटिव पार्टी के उभरते नेता विंस्टन चर्चिल को गांधी-इरविन की वो मुलाक़ात बहुत नागवार गुज़री थी.

उन्होंने कहा था, "मिस्टर गांधी जैसे राजद्रोही, मिडिल टैंपिल वकील का अर्ध नग्न हालत में वॉयसराय के महल की सीढ़ियाँ चढ़ना और राजा के प्रतिनिधि से बराबर के स्तर पर बात करना बहुत ख़तरनाक और घृणास्पद था, ख़ासकर तब जब वो ब्रिटिश सरकार के ख़िलाफ़ असहयोग आँदोलन का नेतृत्व कर रहे थे. इस तरह का दृश्य भारत में अशांति को बढ़ा सकता है और वहाँ पर काम कर रहे श्वेत लोगों को परेशानी में डाल सकता है."



BBC NEWS
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