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Forwarded from Gurukul History Education (History PYQs) (Narvada Dubey)
1873-1885 के बंगाल के पवना किसान आंदोलन (Pabna Disturbances) का अध्ययन करने वाले कल्याण कुमार सेनगुप्ता के अनुसार इस आंदोलन की प्रमुख विशेषता क्या थी?
(A) यह व्यापक सशस्त्र हिंसक गुरिल्ला युद्ध था
(B) यह कानूनी स्वरूप वाला, शांतिपूर्ण व काश्तकारों के कानूनी अधिकारों की रक्षा हेतु कृषक संघ (Agrarian League) द्वारा संचालित आंदोलन था
(C) यह पूरी तरह सांप्रदायिक दंगा था
(D) इसका उद्देश्य ईस्ट इंडिया कंपनी का पुनर्गठन था
उत्तर: (B)
व्याख्या: पवना में किसानों ने लगान वृद्धि व बेदखली के विरुद्ध अदालत में मुकदमे लड़े। शंभुनाथ पाल, ईशान चंद्र राय व खोदी मुल्ला के नेतृत्व में यह विधिक प्रतिरोध था।
(A) यह व्यापक सशस्त्र हिंसक गुरिल्ला युद्ध था
(B) यह कानूनी स्वरूप वाला, शांतिपूर्ण व काश्तकारों के कानूनी अधिकारों की रक्षा हेतु कृषक संघ (Agrarian League) द्वारा संचालित आंदोलन था
(C) यह पूरी तरह सांप्रदायिक दंगा था
(D) इसका उद्देश्य ईस्ट इंडिया कंपनी का पुनर्गठन था
उत्तर: (B)
व्याख्या: पवना में किसानों ने लगान वृद्धि व बेदखली के विरुद्ध अदालत में मुकदमे लड़े। शंभुनाथ पाल, ईशान चंद्र राय व खोदी मुल्ला के नेतृत्व में यह विधिक प्रतिरोध था।
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Forwarded from Gurukul History Education (History PYQs) (Narvada Dubey)
ज्योतिबा फुले के आंदोलन की प्रमुख वैचारिक सीमा क्या थी जिसके कारण यह कालान्तर में अपने क्रांतिकारी रास्ते से भटक गया?
(A) उन्होंने वेदों को प्रमाण मान लिया
(B) वे जनता की भौतिक परिस्थितियों व संस्कृति में गहरा संबंध नहीं देख पाए और किसानों के औपवेशिक शोषण को अनदेखा कर ब्रिटिश शासन का समर्थन कर बैठे
(C) उन्होंने केवल शहरी तक काम सीमित रखा
(D) उन्होंने महिलाओं की शिक्षा का विरोध किया
उत्तर: (B)
व्याख्या: फुले ने ब्राह्मणवाद से मुक्ति हेतु ब्रिटिश शासन को न्यायप्रिय माना और यह नहीं देख पाए कि ब्रिटिश औपवेशिक नीतियाँ ही किसानों की दरिद्रता की मूल जनक थीं।
(A) उन्होंने वेदों को प्रमाण मान लिया
(B) वे जनता की भौतिक परिस्थितियों व संस्कृति में गहरा संबंध नहीं देख पाए और किसानों के औपवेशिक शोषण को अनदेखा कर ब्रिटिश शासन का समर्थन कर बैठे
(C) उन्होंने केवल शहरी तक काम सीमित रखा
(D) उन्होंने महिलाओं की शिक्षा का विरोध किया
उत्तर: (B)
व्याख्या: फुले ने ब्राह्मणवाद से मुक्ति हेतु ब्रिटिश शासन को न्यायप्रिय माना और यह नहीं देख पाए कि ब्रिटिश औपवेशिक नीतियाँ ही किसानों की दरिद्रता की मूल जनक थीं।
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Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️ (Roshni Pareek)
📌भारत शासन अधिनियम, 1935: संघीय व्यवस्था की विफलता एवं ब्रिटिश नियंत्रण की निरंतरता—
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Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️ (Roshni Pareek)
📌 Government of India Act, 1935 — प्रमुख स्रोत
इस अधिनियम के लिए मुख्यतः इन मसविदों/रिपोर्टों और चर्चाओं की सहायता ली गई—
(क) साइमन आयोग रिपोर्ट
(ख) नेहरू समिति रिपोर्ट
(ग) तीनों गोलमेज सम्मेलनों में हुए वाद-विवाद
(घ) श्वेतपत्र (White Paper), 1933
(ङ) संयुक्त प्रवर समिति रिपोर्ट (Joint Select Committee Report)
(च) लोथियन रिपोर्ट (Lothian Report) — विशेष रूप से चुनाव संबंधी प्रावधानों के लिए।
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इस अधिनियम के लिए मुख्यतः इन मसविदों/रिपोर्टों और चर्चाओं की सहायता ली गई—
(क) साइमन आयोग रिपोर्ट
(ख) नेहरू समिति रिपोर्ट
(ग) तीनों गोलमेज सम्मेलनों में हुए वाद-विवाद
(घ) श्वेतपत्र (White Paper), 1933
(ङ) संयुक्त प्रवर समिति रिपोर्ट (Joint Select Committee Report)
(च) लोथियन रिपोर्ट (Lothian Report) — विशेष रूप से चुनाव संबंधी प्रावधानों के लिए।
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Forwarded from A B
1. चार्टर एक्ट (Charter Acts) — कुल 4
चार्टर एक्ट, 1793
चार्टर एक्ट, 1813
चार्टर एक्ट, 1833
चार्टर एक्ट, 1853
2. भारतीय परिषद अधिनियम (Indian Councils Acts) — कुल 3
भारतीय परिषद अधिनियम, 1861
भारतीय परिषद अधिनियम, 1892
भारतीय परिषद अधिनियम, 1909
3. भारत शासन अधिनियम (Government of India Acts) — कुल 3
भारत शासन अधिनियम, 1858
भारत शासन अधिनियम, 1919
भारत शासन अधिनियम, 1935
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चार्टर एक्ट, 1793
चार्टर एक्ट, 1813
चार्टर एक्ट, 1833
चार्टर एक्ट, 1853
2. भारतीय परिषद अधिनियम (Indian Councils Acts) — कुल 3
भारतीय परिषद अधिनियम, 1861
भारतीय परिषद अधिनियम, 1892
भारतीय परिषद अधिनियम, 1909
3. भारत शासन अधिनियम (Government of India Acts) — कुल 3
भारत शासन अधिनियम, 1858
भारत शासन अधिनियम, 1919
भारत शासन अधिनियम, 1935
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Forwarded from A B
📚 कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स एवं बोर्ड ऑफ कंट्रोल (1773–1858)
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1. कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स (Court of Directors)
1. रेग्युलेटिंग एक्ट, 1773 • कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स के सदस्यों की संख्या 24 निर्धारित की गई। • प्रत्येक वर्ष 6 सदस्य सेवानिवृत्त होते थे। • प्रत्येक निदेशक का कार्यकाल 4 वर्ष था।
2. पिट्स इंडिया एक्ट, 1784 • कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स की सदस्य संख्या 24 ही रही। • कंपनी के व्यापारिक एवं प्रशासनिक कार्य इसके अधीन रहे, जबकि राजनीतिक मामलों पर बोर्ड ऑफ कंट्रोल का नियंत्रण स्थापित हुआ।
3. चार्टर एक्ट, 1793 • सदस्यों की संख्या 24 ही रही। • कंपनी का चार्टर अगले 20 वर्षों के लिए बढ़ाया गया।
4. चार्टर एक्ट, 1813 • सदस्यों की संख्या में परिवर्तन नहीं हुआ; 24 ही रही। • कंपनी का भारतीय व्यापार पर एकाधिकार समाप्त हुआ, लेकिन चाय एवं चीन के साथ व्यापार पर एकाधिकार बना रहा।
5. चार्टर एक्ट, 1833 • कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स की सदस्य संख्या 24 ही रही। • कंपनी के व्यापारिक कार्य समाप्त कर दिए गए तथा वह मुख्यतः प्रशासनिक संस्था बन गई।
6. चार्टर एक्ट, 1853 • सदस्यों की संख्या 24 से घटाकर 18 कर दी गई। • इनमें 12 सदस्य निर्वाचित तथा 6 सदस्य ब्रिटिश क्राउन द्वारा मनोनीत किए जाने थे। • निदेशकों का कार्यकाल 6 वर्ष निर्धारित किया गया। • प्रत्येक 2 वर्ष में एक-तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त होते थे।
7. भारत शासन अधिनियम, 1858 • कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स समाप्त कर दिया गया। • भारत का प्रशासन ब्रिटिश क्राउन के प्रत्यक्ष नियंत्रण में आ गया।
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2. बोर्ड ऑफ कंट्रोल (Board of Control)
स्थापना: पिट्स इंडिया एक्ट, 1784
1. पिट्स इंडिया एक्ट, 1784 • बोर्ड ऑफ कंट्रोल की स्थापना हुई। • इसमें अधिकतम 6 आयुक्त नियुक्त किए जा सकते थे। • कम-से-कम 3 सदस्यों की उपस्थिति में बोर्ड कार्य कर सकता था। • भारत के नागरिक, सैन्य एवं राजस्व संबंधी मामलों पर नियंत्रण स्थापित किया गया।
2. चार्टर एक्ट, 1793 • बोर्ड ऑफ कंट्रोल की व्यवस्था जारी रही। • इसके अध्यक्ष हेनरी डंडास थे। • बोर्ड के माध्यम से भारत के प्रशासन पर ब्रिटिश सरकार का नियंत्रण बना रहा।
3. चार्टर एक्ट, 1813 • बोर्ड ऑफ कंट्रोल समाप्त नहीं हुआ। • भारत के राजनीतिक एवं प्रशासनिक मामलों पर इसका नियंत्रण जारी रहा।
4. चार्टर एक्ट, 1833 • बोर्ड ऑफ कंट्रोल की व्यवस्था जारी रही। • ब्रिटिश संसद में 1852 में दिए गए विवरण के अनुसार, 1833 में इसकी संरचना में परिवर्तन किया गया था। इसमें तीन वेतनभोगी आयुक्तों एवं सचिवों की व्यवस्था के स्थान पर एक अध्यक्ष और दो सचिवों की संरचना का उल्लेख मिलता है।
5. 1841 • बोर्ड ऑफ कंट्रोल के अध्यक्षों में परिवर्तन होते रहे। • यह कहना कि 1841 में बोर्ड में केवल एक सदस्य रह गया था, प्रमाणित तथ्य नहीं है।
6. भारत शासन अधिनियम, 1858 • बोर्ड ऑफ कंट्रोल समाप्त कर दिया गया। • कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स की व्यवस्था भी समाप्त हुई। • भारत के प्रशासन के लिए ब्रिटिश सरकार में भारत सचिव (Secretary of State for India) का पद बनाया गया।
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1. कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स (Court of Directors)
1. रेग्युलेटिंग एक्ट, 1773 • कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स के सदस्यों की संख्या 24 निर्धारित की गई। • प्रत्येक वर्ष 6 सदस्य सेवानिवृत्त होते थे। • प्रत्येक निदेशक का कार्यकाल 4 वर्ष था।
2. पिट्स इंडिया एक्ट, 1784 • कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स की सदस्य संख्या 24 ही रही। • कंपनी के व्यापारिक एवं प्रशासनिक कार्य इसके अधीन रहे, जबकि राजनीतिक मामलों पर बोर्ड ऑफ कंट्रोल का नियंत्रण स्थापित हुआ।
3. चार्टर एक्ट, 1793 • सदस्यों की संख्या 24 ही रही। • कंपनी का चार्टर अगले 20 वर्षों के लिए बढ़ाया गया।
4. चार्टर एक्ट, 1813 • सदस्यों की संख्या में परिवर्तन नहीं हुआ; 24 ही रही। • कंपनी का भारतीय व्यापार पर एकाधिकार समाप्त हुआ, लेकिन चाय एवं चीन के साथ व्यापार पर एकाधिकार बना रहा।
5. चार्टर एक्ट, 1833 • कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स की सदस्य संख्या 24 ही रही। • कंपनी के व्यापारिक कार्य समाप्त कर दिए गए तथा वह मुख्यतः प्रशासनिक संस्था बन गई।
6. चार्टर एक्ट, 1853 • सदस्यों की संख्या 24 से घटाकर 18 कर दी गई। • इनमें 12 सदस्य निर्वाचित तथा 6 सदस्य ब्रिटिश क्राउन द्वारा मनोनीत किए जाने थे। • निदेशकों का कार्यकाल 6 वर्ष निर्धारित किया गया। • प्रत्येक 2 वर्ष में एक-तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त होते थे।
7. भारत शासन अधिनियम, 1858 • कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स समाप्त कर दिया गया। • भारत का प्रशासन ब्रिटिश क्राउन के प्रत्यक्ष नियंत्रण में आ गया।
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2. बोर्ड ऑफ कंट्रोल (Board of Control)
स्थापना: पिट्स इंडिया एक्ट, 1784
1. पिट्स इंडिया एक्ट, 1784 • बोर्ड ऑफ कंट्रोल की स्थापना हुई। • इसमें अधिकतम 6 आयुक्त नियुक्त किए जा सकते थे। • कम-से-कम 3 सदस्यों की उपस्थिति में बोर्ड कार्य कर सकता था। • भारत के नागरिक, सैन्य एवं राजस्व संबंधी मामलों पर नियंत्रण स्थापित किया गया।
2. चार्टर एक्ट, 1793 • बोर्ड ऑफ कंट्रोल की व्यवस्था जारी रही। • इसके अध्यक्ष हेनरी डंडास थे। • बोर्ड के माध्यम से भारत के प्रशासन पर ब्रिटिश सरकार का नियंत्रण बना रहा।
3. चार्टर एक्ट, 1813 • बोर्ड ऑफ कंट्रोल समाप्त नहीं हुआ। • भारत के राजनीतिक एवं प्रशासनिक मामलों पर इसका नियंत्रण जारी रहा।
4. चार्टर एक्ट, 1833 • बोर्ड ऑफ कंट्रोल की व्यवस्था जारी रही। • ब्रिटिश संसद में 1852 में दिए गए विवरण के अनुसार, 1833 में इसकी संरचना में परिवर्तन किया गया था। इसमें तीन वेतनभोगी आयुक्तों एवं सचिवों की व्यवस्था के स्थान पर एक अध्यक्ष और दो सचिवों की संरचना का उल्लेख मिलता है।
5. 1841 • बोर्ड ऑफ कंट्रोल के अध्यक्षों में परिवर्तन होते रहे। • यह कहना कि 1841 में बोर्ड में केवल एक सदस्य रह गया था, प्रमाणित तथ्य नहीं है।
6. भारत शासन अधिनियम, 1858 • बोर्ड ऑफ कंट्रोल समाप्त कर दिया गया। • कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स की व्यवस्था भी समाप्त हुई। • भारत के प्रशासन के लिए ब्रिटिश सरकार में भारत सचिव (Secretary of State for India) का पद बनाया गया।
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Forwarded from Gurukul History Education (History PYQs) (Narvada Dubey)
मुल्ला दाऊद द्वारा 1379-80 ई० में अवधी भाषा में रचित किस प्रसिद्ध प्रेमाख्यान काव्य में चित्रांकित महल की अटारी व रामायण/महाभारत के चित्रों का वर्णन मिलता है?
(A) पद्मावत
(B) चंदायन (लौरकाहा)
(C) मृगावती
(D) मधुमालती
उत्तर: (B) चंदायन (लौरकाहा)
व्याख्या: मुल्ला दाऊद की 'चंदायन' में कथावाचिका चंदा द्वारा विनिर्मित महल की अटारी पर सोने का वर्णन है। इसमें रामायण, महाभारत, लोक कथाओं एवं आम जीवन के चित्र पृष्ठभूमि में सुनहरे रंग के साथ अंकित बताए गए हैं
HC VARMA
(A) पद्मावत
(B) चंदायन (लौरकाहा)
(C) मृगावती
(D) मधुमालती
उत्तर: (B) चंदायन (लौरकाहा)
व्याख्या: मुल्ला दाऊद की 'चंदायन' में कथावाचिका चंदा द्वारा विनिर्मित महल की अटारी पर सोने का वर्णन है। इसमें रामायण, महाभारत, लोक कथाओं एवं आम जीवन के चित्र पृष्ठभूमि में सुनहरे रंग के साथ अंकित बताए गए हैं
HC VARMA
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Forwarded from Ravi Kulria
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