Forwarded from 𝙃𝙄𝙎𝙏𝙊𝙍𝙔 UGC 𝙉𝙀𝙏-𝙅𝙍𝙁 𝙋𝙂𝙏 𝙏𝙂𝙏. (मालिनी)
••🎯◼️दास प्रथा से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य ◼️🎯••
🔳भारतीय दासता पर सबसे पहले गंभीर अध्ययन करने वाले विद्वान थे 👉 मान्टेस्क्यू।
🔳प्राचीन भारतीय दासता पर सर्वप्रथम मार्क्सवादी ढांचे को आरोपित करने वाले इतिहासकार थे 👉श्रीपाद अमृत डांगे (एस ए डांगे)।
🔳दास प्रथा को सर्वप्रथम एतिहासिक भौतिकवादी विकास की प्रक्रिया से जोड़कर देखने वाले विद्वान थे 👉आर.एस .शर्मा (रामशरण शर्मा)।
🔳 दास प्रथा के वैधानिक पक्ष को प्रस्तुत करने वाले विद्वान थे 👉 डेरेट।
🔳 श्रमिकों की एक कोटि के रूप में दासों का विवरण प्रस्तुत करने वाले विद्वान थे 👉पी .सी.जैन ने के.एम.सरन की तर्ज़ पर।
🔳 ब्रिटिश काल की दासता का चित्र उपस्थित करने वाले विद्वान थे 👉डी.एन.गांगुली।
🔳 पहली बार ज्योतिष ग्रंथों के आधार पर पूर्वमध्यकालीन भारतीय दासता को अपने पूर्व स्थापित प्रतिमानों के साथ जोड़कर एक ऐसा ढांचा खड़ा किया जिसमें प्रेष्य,भृतक,दास,कर्मकार,बंधकी तथा अन्य सेवि-वर्गों के बीच कोई बहुत बड़ा अंतर नहीं दिखाई पड़ता है👉बी.एन.एस.यादव।
🔳कर्नाटक की आर्थिक दशा का चित्रण करते हुए भारतीय दास प्रथा के कतिपय पक्षों पर प्रकाश डालने वाले विद्वान हैं 👉जी.एस.कुप्पुस्वामी।
🔳 तमिल देश की दासता नामक ग्रंथ लिखकर दासता के क्षेत्रीय इतिहास को उभारने का प्रयास करने वाले विद्वान थे👉 एस मनिकम।
🔳तुर्ककालीन भारत की मुस्लिम दासता का उल्लेख करने वाले विद्वान थीं 👉शीला चतुर्वेदी ने अपने ग्रंथ तुर्क कालीन भारत की मुस्लिम दासता।
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🎯भारत में वैदिक काल से ही दास प्रथा मौजूद थी।
🎯मनुस्मृति शूद्रों को दासों की कोटि में रखती है।
🎯मौर्यकालीन अर्थव्यवस्था में दासों का अधिक योगदान था।
🎯कोटिल्य के अर्थशास्त्र में दासों के लिए "आर्य " शब्द का प्रयोग किया गया है।
🎯 यूनानी यात्री प्राचीन काल में भारतीय समाज में दास प्रथा के प्रचलित नहीं होने का उल्लेख करते हैं।
🎯 त्रिपिटकों में 4 प्रकार के दासों का उल्लेख है।
🎯 मनुस्मृति में 7 प्रकार के दासों का उल्लेख है।
🎯 अर्थशास्त्र में 9 प्रकार के दासों का उल्लेख है।
🎯 नारद ने दासों के 15 प्रकार का उल्लेख किया है।
🎯 विज्ञानेश्वर ने मिताक्षरा में 15 प्रकार के दासों का उल्लेख है
https://t.me/dreamshinganiaOm
🔳भारतीय दासता पर सबसे पहले गंभीर अध्ययन करने वाले विद्वान थे 👉 मान्टेस्क्यू।
🔳प्राचीन भारतीय दासता पर सर्वप्रथम मार्क्सवादी ढांचे को आरोपित करने वाले इतिहासकार थे 👉श्रीपाद अमृत डांगे (एस ए डांगे)।
🔳दास प्रथा को सर्वप्रथम एतिहासिक भौतिकवादी विकास की प्रक्रिया से जोड़कर देखने वाले विद्वान थे 👉आर.एस .शर्मा (रामशरण शर्मा)।
🔳 दास प्रथा के वैधानिक पक्ष को प्रस्तुत करने वाले विद्वान थे 👉 डेरेट।
🔳 श्रमिकों की एक कोटि के रूप में दासों का विवरण प्रस्तुत करने वाले विद्वान थे 👉पी .सी.जैन ने के.एम.सरन की तर्ज़ पर।
🔳 ब्रिटिश काल की दासता का चित्र उपस्थित करने वाले विद्वान थे 👉डी.एन.गांगुली।
🔳 पहली बार ज्योतिष ग्रंथों के आधार पर पूर्वमध्यकालीन भारतीय दासता को अपने पूर्व स्थापित प्रतिमानों के साथ जोड़कर एक ऐसा ढांचा खड़ा किया जिसमें प्रेष्य,भृतक,दास,कर्मकार,बंधकी तथा अन्य सेवि-वर्गों के बीच कोई बहुत बड़ा अंतर नहीं दिखाई पड़ता है👉बी.एन.एस.यादव।
🔳कर्नाटक की आर्थिक दशा का चित्रण करते हुए भारतीय दास प्रथा के कतिपय पक्षों पर प्रकाश डालने वाले विद्वान हैं 👉जी.एस.कुप्पुस्वामी।
🔳 तमिल देश की दासता नामक ग्रंथ लिखकर दासता के क्षेत्रीय इतिहास को उभारने का प्रयास करने वाले विद्वान थे👉 एस मनिकम।
🔳तुर्ककालीन भारत की मुस्लिम दासता का उल्लेख करने वाले विद्वान थीं 👉शीला चतुर्वेदी ने अपने ग्रंथ तुर्क कालीन भारत की मुस्लिम दासता।
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🎯भारत में वैदिक काल से ही दास प्रथा मौजूद थी।
🎯मनुस्मृति शूद्रों को दासों की कोटि में रखती है।
🎯मौर्यकालीन अर्थव्यवस्था में दासों का अधिक योगदान था।
🎯कोटिल्य के अर्थशास्त्र में दासों के लिए "आर्य " शब्द का प्रयोग किया गया है।
🎯 यूनानी यात्री प्राचीन काल में भारतीय समाज में दास प्रथा के प्रचलित नहीं होने का उल्लेख करते हैं।
🎯 त्रिपिटकों में 4 प्रकार के दासों का उल्लेख है।
🎯 मनुस्मृति में 7 प्रकार के दासों का उल्लेख है।
🎯 अर्थशास्त्र में 9 प्रकार के दासों का उल्लेख है।
🎯 नारद ने दासों के 15 प्रकार का उल्लेख किया है।
🎯 विज्ञानेश्वर ने मिताक्षरा में 15 प्रकार के दासों का उल्लेख है
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Forwarded from Gurukul History Education (History PYQs) (N D)
3rd party se ladne ke liye sbhi trah ki ekata chahiye
कांग्रेस-लीग समझौते को सम्पन्न कराने में एनी बेसेंट एवं तिलक ने महत्त्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह किया। ध्यातव्य है कि मदन मोहन मालवीय द्वारा लखनऊ समझौते का विरोध किया गया था। इस संदर्भ में तिलक ने स्पष्ट किया था कि “जब भी आप किसी तीसरी पार्टी से लड़ रहे होते हैं तो सबसे जरूरी होता है आपसी एकता, जातीय एकता, धार्मिक एकता और विभिन्न राजनीतिक विचारधाराओं की एकता।"
Forwarded from ArchaeoHistories🌐 (Nayankumar)
ArchaeoHistories🌐
The Rosetta Stone 🪨
🔸The Rosetta Stone, which dates back to 196 BC, revolutionized the field of archaeology. Found in 1799 by French soldiers in Egypt, this granodiorite slab showcases the same decree in Ancient Greek, Demotic and Egyptian hieroglyphs. It served as the crucial tool for translating hieroglyphics, revealing centuries of ancient Egyptian language and history that had remained unknown.
🔹Currently housed in the British Museum, the Rosetta Stone exemplifies the impact of translation and illustrates how a single artifact can transform our comprehension of an entire civilization.
🔸The inscription on the Rosetta Stone contains a decree from 196 BC issued on behalf of King Ptolemy V. The text commends the pharaoh's reign, emphasizing his support for the priesthood, his efforts to maintain stability in Egypt, and his contributions to temples.
🔹Additionally, it details privileges afforded to priests, tax collection process, and the royal orders that were to be upheld across the kingdom. Written in three scripts—hieroglyphs for sacred use, Demotic for routine administrative functions, and Ancient Greek, the language of the ruling class—the decree was made accessible to various segments of Egyptian society, reflecting the cultural fusion characteristic of Ptolemaic governance.
🔹Currently housed in the British Museum, the Rosetta Stone exemplifies the impact of translation and illustrates how a single artifact can transform our comprehension of an entire civilization.
🔸The inscription on the Rosetta Stone contains a decree from 196 BC issued on behalf of King Ptolemy V. The text commends the pharaoh's reign, emphasizing his support for the priesthood, his efforts to maintain stability in Egypt, and his contributions to temples.
🔹Additionally, it details privileges afforded to priests, tax collection process, and the royal orders that were to be upheld across the kingdom. Written in three scripts—hieroglyphs for sacred use, Demotic for routine administrative functions, and Ancient Greek, the language of the ruling class—the decree was made accessible to various segments of Egyptian society, reflecting the cultural fusion characteristic of Ptolemaic governance.
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Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️ (Roshni Pareek)
तुज़ुक-ए-जहाँगीरी (फ़ारसी: Tuzk-e-Jahangiri) या जहाँगीरनामा मुगल बादशाह नूर-उद-दीन मुहम्मद जहाँगीर (1569–1627) की आत्मकथा (Memoirs) है।
• इसका मूल नाम जहाँगीरनामा भी कहा जाता है।
• यह पुस्तक फ़ारसी भाषा में लिखी गई है।
📌 पूरक लेखन:
जहाँगीर ने अपने शासन के पहले लगभग 17 वर्षों तक ही स्वयं लिखा। बाद में अस्वस्थता के कारण उन्होंने यह काम अपने विश्वस्त लेखकों मुतमद ख़ाँ (Mu‘tamad Khan) और बाद में मुहम्मद हादी (Muhammad Hadi) को सौंप दिया, जिन्होंने उसके बाद के वर्षों का लेखन पूरा किया।
📘 अंग्रेज़ी अनुवाद:
• “The Tuzuk-i-Jahangiri; or Memoirs of Jahangir” — जिसे Alexander Rogers ने फ़ारसी से अंग्रेज़ी में अनुवाद किया।
• इसे Henry Beveridge ने सम्पादित किया और Royal Asiatic Society ने 1909–1914 में प्रकाशित किया।
https://t.me/historyfact00
• इसका मूल नाम जहाँगीरनामा भी कहा जाता है।
• यह पुस्तक फ़ारसी भाषा में लिखी गई है।
📌 पूरक लेखन:
जहाँगीर ने अपने शासन के पहले लगभग 17 वर्षों तक ही स्वयं लिखा। बाद में अस्वस्थता के कारण उन्होंने यह काम अपने विश्वस्त लेखकों मुतमद ख़ाँ (Mu‘tamad Khan) और बाद में मुहम्मद हादी (Muhammad Hadi) को सौंप दिया, जिन्होंने उसके बाद के वर्षों का लेखन पूरा किया।
📘 अंग्रेज़ी अनुवाद:
• “The Tuzuk-i-Jahangiri; or Memoirs of Jahangir” — जिसे Alexander Rogers ने फ़ारसी से अंग्रेज़ी में अनुवाद किया।
• इसे Henry Beveridge ने सम्पादित किया और Royal Asiatic Society ने 1909–1914 में प्रकाशित किया।
https://t.me/historyfact00
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ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️
तुज़ुक-ए-जहाँगीरी (फ़ारसी: Tuzk-e-Jahangiri) या जहाँगीरनामा मुगल बादशाह नूर-उद-दीन मुहम्मद जहाँगीर (1569–1627) की आत्मकथा (Memoirs) है। • इसका मूल नाम जहाँगीरनामा भी कहा जाता है। • यह पुस्तक फ़ारसी भाषा में लिखी गई है। 📌 पूरक लेखन: जहाँगीर ने अपने…
बहुत-बहुत धन्यवाद देवीजीं,
इसी तरह महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते रहो,
ऐसी पोस्ट पढ़ने से हमें बहुत लाभ होता है⭐️ ⭐️ 🤩 🍎
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ऐसी पोस्ट पढ़ने से हमें बहुत लाभ होता है
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No Document No History
बहुत-बहुत धन्यवाद देवीजीं, इसी तरह महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते रहो, ऐसी पोस्ट पढ़ने से हमें बहुत लाभ होता है ⭐️ ⭐️ 🤩 🍎
सर हमारी पोस्ट पर भी ऐसे एक दो प्रेरणात्मक वाक्य बोल दिया करो।
हम लोगों ने दूसरे ग्रह से पढ़ाई थोड़ी की हैं।
हम लोगों ने दूसरे ग्रह से पढ़ाई थोड़ी की हैं।
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No Document No History
सर हमारी पोस्ट पर भी ऐसे एक दो प्रेरणात्मक वाक्य बोल दिया करो। हम लोगों ने दूसरे ग्रह से पढ़ाई थोड़ी की हैं।
आप भी ऐतिहासिक तथ्य शेयर किया करो मित्र...
वैसे आपकी एक पोस्ट पांच साल चलती है⭐️ 😁
वैसे आपकी एक पोस्ट पांच साल चलती है
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Forwarded from No Document No History (श्री.रामसिंग राजपूत ⛳)
यहाँ टेलीग्राम एडमिन के लिए कुछ प्रमुख नियमावली (Guidelines) दी गई हैं:
📌 मैसेज (Pinned Message): ग्रुप के मुख्य नियमों को हमेशा 'Pin' करके रखें ताकि नए सदस्य उन्हें पढ़ सकें।
विशेष सूचना :-⭐️ पुराने मित्र टेस्ट सीरीज का पोस्ट डाल सकते है...⭐️ चैनल मै कोई भी न्यू एडमिन टेस्ट सीरीज का प्रचार ज्यादा न करे,
टेस्ट सीरीज का मैसेज बार बार डालने से लोग चैनल से लेफ्ट हो जाते है,
बाकी ग्रुप मै आप टेस्ट सीरीज का पोस्ट शेयर कर सकते हो..⭐️
यह नियमावली सिर्फ़ No Document No History चैनल के लिए बनाई गई है...⭐️ 🤩 🍎 ⭐️ कोई भी सदस्य नाराज न होवे,⭐️ यह पोस्ट अन्य ग्रुप मै शेयर करे
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Forwarded from No Document No History (सम्राट दुर्योधन)
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