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जहाँ इतिहास किताबों से आगे, दस्तावेज़ों से जुड़ता है।
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कांग्रेस के सारे अधिवेशन (1885–1965)

किताबें तो बहुत है जिसमें कांग्रेस के सारे अधिवेशन बहुत अच्छे से दिए है, लेकिन एग्जाम टाइम में ऐसे लिस्ट में एक साथ अधिवेशन मिल जाए तो अच्छे से याद कर लिए जाते है और विशेषता भी समझ जाते है ।

शायद ये आपको एग्जाम में मदद करे, इस लिए इनकी फोटो शेयर कर रहे है
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कांग्रेस के पहले हिंदू अध्यक्ष ?
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महापरिनिब्बान सुत्त!
बुद्ध ने आनंद के सभी तर्कों को दरकिनार कर दिया। उन्होंने कहा कि बहुत पहले कुशीनारा एक महान नगर था, जिसका नाम कुशावती था। वह महासुदस्सन नामक राजा की राजधानी थी। इसका आकार बारह योजन पूर्व से पश्चिम में तथा सात योजन उत्तर से दक्षिण में फैला हुआ था। इसकी सड़कों पर भीड़ लगी रहती थी। चारों ओर समृद्धि फैली हुई थी। रात और दिन इस नगर में हाथी, घोड़े, रथ, नगाड़े और अन्य संगीत की ध्वनि गूंजती रहती थी। सभी लोग "खाओ, पीओ और मौज से रहो", ऐसी स्थिति में थे। कुशावती, अलकनंदा से कम नहीं था जो देवताओं का शाही नगर है। इसलिए बुद्ध के अंतिम प्राण के लिए यही जगह सबसे उपयुक्त हो सकती है।
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वैसे जितना दिल्ली को चाहिए था,

लेकिन RCB जीत गई,


बेचारी दिल्ली पर प्राचीन भारत से ही अन्याय हो रहा है...✅✌🌹✨

दिल्ली जीतती तो मजा आ जाता ✨💐
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उत्तरी कृष्ण मार्जित मृद्भाण्ड संस्कृति NBPW

ल. 600-300 सा.सं.पू. के कालखंड से भारतीय उपमहाद्वीप के इतिहास की पुनर्रचना के लिए पुरातत्त्व का महत्त्व काफी बढ़ जाता है। उत्तर भारत में उत्तरी कृष्ण मार्जित मृद्भाण्ड संस्कृति NBPW (एन.बी.पी.डब्ल्यू.) वर्चस्व स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। NBPW संस्कृति का काल 700-200-100 सा.सं.पू. के बीच का है जिसको अध्ययन की सुविधा के लिए पुनः दो सांस्कृतिक कालों में बांटा जा सकता है प्रारंभिक NBPW संस्कृति काल (700-300 सा.स.पू.) तथा उत्तर NBPW काल (300-100 सा.सं.पू.)। इस अध्याय में हम लोग विशेष रूप से प्रारंभिक NBPW काल की चर्चा करेंगे। अयोध्या से प्राप्त रेडियो कार्बन तिथिक्रम के अनुसार, NBPW संस्कृति का काल 1000 सा.सं.पू. के लगभग से ही देखा जा सकता है। NBPW सांस्कृतिक स्थलों से आहत् सिक्के सबसे मुख्य विशेषता के रूप में देखे जा सकते हैं जो भारतीय उपमहाद्वीप में मुद्रा के प्रयोग का सबसे प्रारंभिक साक्ष्य है।
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UPPSC LT Grade Hindi Pre Result.pdf
न्यूनतम दक्षता मानक अंक के अनुरूप,योग्य अभ्यर्थी ,पदों के सापेक्ष 15 गुना नहीं मिल सकें...आयोग को।
(LT ग्रेड,हिंदी / गणित विषय में)
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गांधीजी अम्बेडकर और अछूत



अम्बेडकर के अनुसार, "अछूत जाति प्रथा की ही देन है। जब तक जाति प्रथा कायम रहेगी, अछूत बने रहेंगे। जाति प्रथा को समाप्त किये बिना अछूतोद्धार असम्भव है।"



वहीं दूसरी तरफ गांधीजी का कहना था कि "वर्णाश्रम की अपनी जो भी खामियाँ हों.
इसमें कोई पाप नहीं है. लेकिन छुआछूत पाप है। छुआछूत जाति प्रथा के कारण नहीं, बल्कि उच्च और निम्न के कृत्रिम बँटवारे का प्रतिफल है।"
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