Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️ (A B)
DU entrance exam question 📖✍️
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने गिरमिटिया मजदूर प्रथा के प्रश्न को विशेष रूप से 1916 के लखनऊ अधिवेशन में उठाया था। इसके अतिरिक्त, 1917 में कांग्रेस नेताओं ने इस प्रथा को समाप्त करने के लिए सरकार पर दबाव बनाया, जिसके परिणामस्वरूप ब्रिटिश सरकार ने इसी वर्ष इस व्यवस्था को समाप्त करने की घोषणा की।
1. Lucknow Session (1916)
इस अधिवेशन में महात्मा गांधी ने गिरमिटिया मजदूर प्रथा के उन्मूलन का प्रस्ताव रखा।
कांग्रेस ने एक प्रस्ताव (Resolution No. IX) पारित करके सरकार से इस अमानवीय व्यवस्था को तुरंत समाप्त करने की मांग की।
भारतीयों को अनुबंधित श्रमिक के रूप में उपनिवेशों में भेजने की प्रथा राष्ट्रीय सम्मान के विरुद्ध है और इसे तत्काल समाप्त किया जाना चाहिए।
2. 1917 में कांग्रेस का अभियान
लखनऊ अधिवेशन के बाद गांधी, Charles Freer Andrews तथा अन्य नेताओं ने इस मुद्दे पर देशव्यापी अभियान चलाया। जनता के दबाव और कांग्रेस के विरोध के कारण भारत सरकार ने मार्च 1917 में गिरमिटिया प्रथा को समाप्त करने की घोषणा की और यह व्यवस्था औपचारिक रूप से बंद कर दी गई।
https://t.me/historyfact00
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने गिरमिटिया मजदूर प्रथा के प्रश्न को विशेष रूप से 1916 के लखनऊ अधिवेशन में उठाया था। इसके अतिरिक्त, 1917 में कांग्रेस नेताओं ने इस प्रथा को समाप्त करने के लिए सरकार पर दबाव बनाया, जिसके परिणामस्वरूप ब्रिटिश सरकार ने इसी वर्ष इस व्यवस्था को समाप्त करने की घोषणा की।
1. Lucknow Session (1916)
इस अधिवेशन में महात्मा गांधी ने गिरमिटिया मजदूर प्रथा के उन्मूलन का प्रस्ताव रखा।
कांग्रेस ने एक प्रस्ताव (Resolution No. IX) पारित करके सरकार से इस अमानवीय व्यवस्था को तुरंत समाप्त करने की मांग की।
भारतीयों को अनुबंधित श्रमिक के रूप में उपनिवेशों में भेजने की प्रथा राष्ट्रीय सम्मान के विरुद्ध है और इसे तत्काल समाप्त किया जाना चाहिए।
2. 1917 में कांग्रेस का अभियान
लखनऊ अधिवेशन के बाद गांधी, Charles Freer Andrews तथा अन्य नेताओं ने इस मुद्दे पर देशव्यापी अभियान चलाया। जनता के दबाव और कांग्रेस के विरोध के कारण भारत सरकार ने मार्च 1917 में गिरमिटिया प्रथा को समाप्त करने की घोषणा की और यह व्यवस्था औपचारिक रूप से बंद कर दी गई।
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Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️ (A B)
महादेव देसाई और गांधीजी —
गांधीजी से पहली मुलाकात: नवंबर 1917, गोधरा में हुई। इसके बाद वे गांधीजी से गहराई से जुड़ गए।
वे लगभग 25 वर्षों तक गांधीजी के निजी सचिव रहे और गांधीजी के पत्र-व्यवहार, लेखन, यात्राओं तथा राजनीतिक-सामाजिक गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
गांधीजी के भाषणों, बातचीत और दिन-प्रतिदिन की घटनाओं को डायरी में दर्ज करना उनका बहुत महत्वपूर्ण कार्य था। आज गांधीजी और स्वतंत्रता आंदोलन के अनेक प्रसंगों को समझने में उनकी डायरियाँ अत्यंत उपयोगी स्रोत हैं।
वे स्वयं भी लेखक, अनुवादक और स्वतंत्रता सेनानी थे। उन्होंने गांधीजी के विचारों और लेखों को व्यापक पाठक-वर्ग तक पहुँचाने में मदद की।
भारत छोड़ो आंदोलन (1942) के दौरान गांधीजी के साथ उन्हें भी आगा ख़ान पैलेस, पुणे में नजरबंद रखा गया।
वहीं 15 अगस्त 1942 को उनका निधन हो गया।
वह अंतिम किताब जो महादेव देसाई ने पढ़ी – द आर्ट ऑफ लिविंग 📖
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गांधीजी से पहली मुलाकात: नवंबर 1917, गोधरा में हुई। इसके बाद वे गांधीजी से गहराई से जुड़ गए।
वे लगभग 25 वर्षों तक गांधीजी के निजी सचिव रहे और गांधीजी के पत्र-व्यवहार, लेखन, यात्राओं तथा राजनीतिक-सामाजिक गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
गांधीजी के भाषणों, बातचीत और दिन-प्रतिदिन की घटनाओं को डायरी में दर्ज करना उनका बहुत महत्वपूर्ण कार्य था। आज गांधीजी और स्वतंत्रता आंदोलन के अनेक प्रसंगों को समझने में उनकी डायरियाँ अत्यंत उपयोगी स्रोत हैं।
वे स्वयं भी लेखक, अनुवादक और स्वतंत्रता सेनानी थे। उन्होंने गांधीजी के विचारों और लेखों को व्यापक पाठक-वर्ग तक पहुँचाने में मदद की।
भारत छोड़ो आंदोलन (1942) के दौरान गांधीजी के साथ उन्हें भी आगा ख़ान पैलेस, पुणे में नजरबंद रखा गया।
वहीं 15 अगस्त 1942 को उनका निधन हो गया।
वह अंतिम किताब जो महादेव देसाई ने पढ़ी – द आर्ट ऑफ लिविंग 📖
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गांधी जी के अंग्रेज पुत्र 📖✍️
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राष्ट्रीय_करंट_जून_अगस्त_2026.pdf
1.4 MB
राष्ट्रीय करंट अफ़ेयर्स जून से अगस्त 2026.pdf
Forwarded from History Education 🔱❤
▪️गुप्तों के उदय के समय गणतंत्र/जनपदीय तंत्र-🔱❤️
🔹यौधेय - उत्तरी राजस्थान व दक्षिण पूर्वी पंजाब।
🔹अश्वक- उत्तर पश्चिम भारत में।
🔹त्रिगर्त -
कांगड़ा क्षेत्र।
🔸मालव - टोंक, जयपुर-अजमेर (पूर्वी राजस्थान)
🔸अर्जुनायन- जयपुर, भरतपुर, अलवर, आगरा।
🔸कुणिन्द-
सतलज व व्यास नदियों के मध्य।
🔹औदुम्बर- रावी के पश्चिम में काँगड़ा तक।
🔹शिवि- माध्यमिका-नगरी (राजस्थान)
🔹मद्रक- रावी-चिनाब के मध्य।
🔹आभीर-सिन्धु घाटी के दक्षिणी भाग व पश्चिम राजपूताना।
🔸प्रार्जुन- मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर में।
🔸सनकानीक- भिलसा के निकट-ग्वालियर क्षेत्र।
https://t.me/HistoryEducation08 ❤️
🔹यौधेय - उत्तरी राजस्थान व दक्षिण पूर्वी पंजाब।
🔹अश्वक- उत्तर पश्चिम भारत में।
🔹त्रिगर्त -
कांगड़ा क्षेत्र।
🔸मालव - टोंक, जयपुर-अजमेर (पूर्वी राजस्थान)
🔸अर्जुनायन- जयपुर, भरतपुर, अलवर, आगरा।
🔸कुणिन्द-
सतलज व व्यास नदियों के मध्य।
🔹औदुम्बर- रावी के पश्चिम में काँगड़ा तक।
🔹शिवि- माध्यमिका-नगरी (राजस्थान)
🔹मद्रक- रावी-चिनाब के मध्य।
🔹आभीर-सिन्धु घाटी के दक्षिणी भाग व पश्चिम राजपूताना।
🔸प्रार्जुन- मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर में।
🔸सनकानीक- भिलसा के निकट-ग्वालियर क्षेत्र।
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