Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️ (A B)
गांधीजी ने अपनी आत्मकथा 25 नवम्बर 1925 से लिखनी शुरू की यह पुस्तक पहले पुस्तक के रूप में नहीं बल्कि गुजराती साप्ताहिक नवजीवन में साप्ताहिक धारावाहिक के रूप में प्रकाशित हुई कुल 166 किस्तें 25 nov 1925 से 3 feb 1929 तक प्रकाशित हुईं।
उन्होंने 1921 में आत्मकथा लिखने का विचार किया था लेकिन राजनीतिक व्यस्तताओं के कारण नहीं लिख सके
बाद में स्वामी आनंद तथा उनके अन्य सहयोगियों के आग्रह पर उन्होंने इसे लिखना स्वीकार किया
गांधीजी ने स्पष्ट लिखा कि उनका उद्देश्य पारंपरिक आत्मकथा लिखना नहीं बल्कि सत्य के साथ अपने प्रयोगों का वर्णन करना था
गांधी जी ने मूल पुस्तक गुजराती में लिखी थी उसका नाम–
સત્યના પ્રયોગો અથવા આત્મકથા
मुख्य अंग्रेज़ी अनुवाद महादेव देसाई ने किया
हालाँकि 1928–29 में कुछ अध्याय प्यारेलाल नय्यर ने अनुवादित किए क्योंकि उस समय महादेव देसाई अन्य कार्य में व्यस्त थे स्वयं गांधीजी ने इन अनुवादों की समीक्षा की थी।
1927 – पहला अंग्रेज़ी खंड
1929 – दूसरा अंग्रेज़ी खंड
बाद में 1940 में संशोधित संस्करण An Autobiography or The Story of My Experiments with Truth शीर्षक से प्रकाशित हुआ।
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उन्होंने 1921 में आत्मकथा लिखने का विचार किया था लेकिन राजनीतिक व्यस्तताओं के कारण नहीं लिख सके
बाद में स्वामी आनंद तथा उनके अन्य सहयोगियों के आग्रह पर उन्होंने इसे लिखना स्वीकार किया
गांधीजी ने स्पष्ट लिखा कि उनका उद्देश्य पारंपरिक आत्मकथा लिखना नहीं बल्कि सत्य के साथ अपने प्रयोगों का वर्णन करना था
गांधी जी ने मूल पुस्तक गुजराती में लिखी थी उसका नाम–
સત્યના પ્રયોગો અથવા આત્મકથા
मुख्य अंग्रेज़ी अनुवाद महादेव देसाई ने किया
हालाँकि 1928–29 में कुछ अध्याय प्यारेलाल नय्यर ने अनुवादित किए क्योंकि उस समय महादेव देसाई अन्य कार्य में व्यस्त थे स्वयं गांधीजी ने इन अनुवादों की समीक्षा की थी।
1927 – पहला अंग्रेज़ी खंड
1929 – दूसरा अंग्रेज़ी खंड
बाद में 1940 में संशोधित संस्करण An Autobiography or The Story of My Experiments with Truth शीर्षक से प्रकाशित हुआ।
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Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️ (Roshni Pareek)
अहिल्याबाई होळकर के सम्बन्ध में दो प्रकार की विचारधाराएँ रही हैं। एक में उनको देवी के अवतार की पदवी दी गई है, दूसरी में उनके अति उत्कृष्ट गुणों के साथ अन्धविश्वासों और रूढ़ियों के प्रति श्रद्धा को भी प्रकट किया है। वह अँधेरे में प्रकाश-किरण के समान थीं, जिसे अँधेरा बार-बार ग्रसने की चेष्टा करता रहा। अपने उत्कृष्ट विचारों एवं नैतिक आचरण के चलते ही समाज में उन्हें देवी का दर्जा मिला।
—आकांक्षा भटनागर🌼
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Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️ (A B)
अहिल्या बाई से जुड़ी पूरी जानकारी ऊपर दी गई है ☝️
नासिक, महाराष्ट्र में स्थित ऐतिहासिक सुंदरनारायण मंदिर का निर्माण मूल रूप से 1756 ईस्वी में पेशवाओं के सरदार गंगाधर यशवंत चंद्रचूड़ ने करवाया था।हालांकि, समय के साथ मंदिर की संरचना जीर्ण-शीर्ण हो गई थी, इसलिए इसके जीर्णोद्धार और नवीनीकरण का कार्य नासिक महानगर पालिका और महाराष्ट्र राज्य पुरातत्व विभाग द्वारा स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट और हेरिटेज कंजर्वेशन (सांस्कृतिक विरासत संरक्षण) के तहत किया गया है।
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नासिक, महाराष्ट्र में स्थित ऐतिहासिक सुंदरनारायण मंदिर का निर्माण मूल रूप से 1756 ईस्वी में पेशवाओं के सरदार गंगाधर यशवंत चंद्रचूड़ ने करवाया था।हालांकि, समय के साथ मंदिर की संरचना जीर्ण-शीर्ण हो गई थी, इसलिए इसके जीर्णोद्धार और नवीनीकरण का कार्य नासिक महानगर पालिका और महाराष्ट्र राज्य पुरातत्व विभाग द्वारा स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट और हेरिटेज कंजर्वेशन (सांस्कृतिक विरासत संरक्षण) के तहत किया गया है।
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Forwarded from History Education 🔱❤
बालशास्त्री जांभेकर (1812–1846) ✍
🔹 बॉम्बे में पत्रकारिता के माध्यम से सामाजिक सुधार के अग्रदूत
🔹 ब्राह्मणवादी वर्चस्व के विरोधी
🔹 मराठी पत्रकारिता के जनक
🔹 प्रमुख समाचार पत्र:
• दर्पण – 1832
• दिग्दर्शन – 1840
🔹 बॉम्बे नेटिव जनरल लाइब्रेरी की स्थापना की
🔹 नेटिव इम्प्रूवमेंट सोसायटी (स्वदेशी सुधार समिति) की शुरुआत की
🔹 एल्फिंस्टन कॉलेज में हिंदी के पहले प्रोफेसर नियुक्त हुए
🔹 कोलाबा वेधशाला (Observatory) के निदेशक रहे।
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🔹 बॉम्बे में पत्रकारिता के माध्यम से सामाजिक सुधार के अग्रदूत
🔹 ब्राह्मणवादी वर्चस्व के विरोधी
🔹 मराठी पत्रकारिता के जनक
🔹 प्रमुख समाचार पत्र:
• दर्पण – 1832
• दिग्दर्शन – 1840
🔹 बॉम्बे नेटिव जनरल लाइब्रेरी की स्थापना की
🔹 नेटिव इम्प्रूवमेंट सोसायटी (स्वदेशी सुधार समिति) की शुरुआत की
🔹 एल्फिंस्टन कॉलेज में हिंदी के पहले प्रोफेसर नियुक्त हुए
🔹 कोलाबा वेधशाला (Observatory) के निदेशक रहे।
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