Forwarded from 𝗧𝗵𝗲 𝗚𝕐𝗮𝗻𝗱𝗮𝘆𝗻𝗶 𝗩αυLƚ••°
महिलाओं की सुरक्षा से संबंधित प्रमुख अधिनियम
•दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961
•महिलाओं का अशिष्ट चित्रण (निषेध) अधिनियम, 1986
•यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2019
•मुस्लिम महिला (विवाह पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019
•कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013
•घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005
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•दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961
•महिलाओं का अशिष्ट चित्रण (निषेध) अधिनियम, 1986
•यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2019
•मुस्लिम महिला (विवाह पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019
•कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013
•घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005
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Forwarded from ArchaeoHistories🌐 (Nayankumar)
मेवाड़ की राजधानियों का क्रम -
🔸नागदा - बप्पा रावल
🔸आहड़-अलट
🔸चितौड़-जैत्रसिंह
🔸उदयपुर-उदय सिंह
🔸गोगुंदा-उदय सिंह
🔸कुंभलगढ़-राणा प्रताप
🔸आवरगढ़ - महाराणा प्रताप
🔸चावंड -राणा प्रताप
🔸चितौड़गढ़- अमर सिंह
🔸उदयपुर-भीम सिंह
#important@his_inq
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Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️ (A B)
गांधीजी द्वारा स्थापित दो महत्वपूर्ण संस्थाएँ
1️⃣ All-India Spinners’ Association (अखिल भारतीय चरखा/कताई संघ)
📅 स्थापना/प्रस्ताव: 22 सितंबर 1925
📍 पटना
✍️ प्रमुख भूमिका: महात्मा गांधी
📌 संविधान अंतिम रूप: 24 सितंबर 1925, पटना में AICC की बैठक में।
🎯 उद्देश्य:
हाथ से कताई (Hand-spinning) को बढ़ावा देना
खादी का विकास और प्रसार
चरखे को ग्रामीण रोजगार और स्वदेशी का माध्यम बनाना।
2️⃣ All-India Village Industries Association (अखिल भारतीय ग्रामोद्योग संघ—AIVIA)
📅 स्थापना: 14 दिसंबर 1934
📍 वर्धा (Wardha)
✍️ गांधीजी के मार्गदर्शन में, AICC ने J. C. Kumarappa को इसे गठित करने के लिए अधिकृत किया।
👤 पहले अध्यक्ष: श्रीकृष्णदास जाजू
👤 Organiser & Secretary: J. C. Kumarappa
🤝 जमनालाल बजाज ने वर्धा में संस्था के काम के लिए स्थान उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण सहयोग दिया।
🎯 उद्देश्य:
ग्रामीण/ग्रामोद्योगों का पुनर्जीवन
गाँवों में रोजगार बढ़ाना
स्थानीय कारीगरी और उद्योगों का विकास
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना।
https://t.me/historyfact00
1️⃣ All-India Spinners’ Association (अखिल भारतीय चरखा/कताई संघ)
📅 स्थापना/प्रस्ताव: 22 सितंबर 1925
📍 पटना
✍️ प्रमुख भूमिका: महात्मा गांधी
📌 संविधान अंतिम रूप: 24 सितंबर 1925, पटना में AICC की बैठक में।
🎯 उद्देश्य:
हाथ से कताई (Hand-spinning) को बढ़ावा देना
खादी का विकास और प्रसार
चरखे को ग्रामीण रोजगार और स्वदेशी का माध्यम बनाना।
2️⃣ All-India Village Industries Association (अखिल भारतीय ग्रामोद्योग संघ—AIVIA)
📅 स्थापना: 14 दिसंबर 1934
📍 वर्धा (Wardha)
✍️ गांधीजी के मार्गदर्शन में, AICC ने J. C. Kumarappa को इसे गठित करने के लिए अधिकृत किया।
👤 पहले अध्यक्ष: श्रीकृष्णदास जाजू
👤 Organiser & Secretary: J. C. Kumarappa
🤝 जमनालाल बजाज ने वर्धा में संस्था के काम के लिए स्थान उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण सहयोग दिया।
🎯 उद्देश्य:
ग्रामीण/ग्रामोद्योगों का पुनर्जीवन
गाँवों में रोजगार बढ़ाना
स्थानीय कारीगरी और उद्योगों का विकास
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना।
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Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️ (A B)
DU phd entrance exam question 📖 ✍️
A. पुरन्दर की संधि (Treaty of Purandar) – 1 मार्च 1776
D. कर्नल गोडार्ड के नेतृत्व वाली अंग्रेज़ी सेना का पुणे पर आक्रमण का प्रयास छोड़कर पीछे हटना – अप्रैल 1781
C. महादजी सिंधिया द्वारा आधुनिक हथियारों के उत्पादन हेतु फाउंड्री स्थापित करना – 1784–1787 के बीच, डी बोइन (Benoît de Boigne) के सैन्य सुधारों के दौरान
B. बाजीराव द्वितीय की पुणे में पेशवा के रूप में पुनः स्थापना – 13 मई 1803 (द्वितीय आंग्ल-मराठा युद्ध के दौरान अंग्रेजों द्वारा पुनर्स्थापना)
https://t.me/historyfact00
A. पुरन्दर की संधि (Treaty of Purandar) – 1 मार्च 1776
D. कर्नल गोडार्ड के नेतृत्व वाली अंग्रेज़ी सेना का पुणे पर आक्रमण का प्रयास छोड़कर पीछे हटना – अप्रैल 1781
C. महादजी सिंधिया द्वारा आधुनिक हथियारों के उत्पादन हेतु फाउंड्री स्थापित करना – 1784–1787 के बीच, डी बोइन (Benoît de Boigne) के सैन्य सुधारों के दौरान
B. बाजीराव द्वितीय की पुणे में पेशवा के रूप में पुनः स्थापना – 13 मई 1803 (द्वितीय आंग्ल-मराठा युद्ध के दौरान अंग्रेजों द्वारा पुनर्स्थापना)
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Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️ (A B)
DU entrance exam question 📖✍️
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने गिरमिटिया मजदूर प्रथा के प्रश्न को विशेष रूप से 1916 के लखनऊ अधिवेशन में उठाया था। इसके अतिरिक्त, 1917 में कांग्रेस नेताओं ने इस प्रथा को समाप्त करने के लिए सरकार पर दबाव बनाया, जिसके परिणामस्वरूप ब्रिटिश सरकार ने इसी वर्ष इस व्यवस्था को समाप्त करने की घोषणा की।
1. Lucknow Session (1916)
इस अधिवेशन में महात्मा गांधी ने गिरमिटिया मजदूर प्रथा के उन्मूलन का प्रस्ताव रखा।
कांग्रेस ने एक प्रस्ताव (Resolution No. IX) पारित करके सरकार से इस अमानवीय व्यवस्था को तुरंत समाप्त करने की मांग की।
भारतीयों को अनुबंधित श्रमिक के रूप में उपनिवेशों में भेजने की प्रथा राष्ट्रीय सम्मान के विरुद्ध है और इसे तत्काल समाप्त किया जाना चाहिए।
2. 1917 में कांग्रेस का अभियान
लखनऊ अधिवेशन के बाद गांधी, Charles Freer Andrews तथा अन्य नेताओं ने इस मुद्दे पर देशव्यापी अभियान चलाया। जनता के दबाव और कांग्रेस के विरोध के कारण भारत सरकार ने मार्च 1917 में गिरमिटिया प्रथा को समाप्त करने की घोषणा की और यह व्यवस्था औपचारिक रूप से बंद कर दी गई।
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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने गिरमिटिया मजदूर प्रथा के प्रश्न को विशेष रूप से 1916 के लखनऊ अधिवेशन में उठाया था। इसके अतिरिक्त, 1917 में कांग्रेस नेताओं ने इस प्रथा को समाप्त करने के लिए सरकार पर दबाव बनाया, जिसके परिणामस्वरूप ब्रिटिश सरकार ने इसी वर्ष इस व्यवस्था को समाप्त करने की घोषणा की।
1. Lucknow Session (1916)
इस अधिवेशन में महात्मा गांधी ने गिरमिटिया मजदूर प्रथा के उन्मूलन का प्रस्ताव रखा।
कांग्रेस ने एक प्रस्ताव (Resolution No. IX) पारित करके सरकार से इस अमानवीय व्यवस्था को तुरंत समाप्त करने की मांग की।
भारतीयों को अनुबंधित श्रमिक के रूप में उपनिवेशों में भेजने की प्रथा राष्ट्रीय सम्मान के विरुद्ध है और इसे तत्काल समाप्त किया जाना चाहिए।
2. 1917 में कांग्रेस का अभियान
लखनऊ अधिवेशन के बाद गांधी, Charles Freer Andrews तथा अन्य नेताओं ने इस मुद्दे पर देशव्यापी अभियान चलाया। जनता के दबाव और कांग्रेस के विरोध के कारण भारत सरकार ने मार्च 1917 में गिरमिटिया प्रथा को समाप्त करने की घोषणा की और यह व्यवस्था औपचारिक रूप से बंद कर दी गई।
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Forwarded from History Education 🔱❤
🔸मेवाड़ के प्रमुख शासकों का कालक्रम
बप्पा रावल (734 ई. - ?): मेवाड़ में गुहिल वंश के वास्तविक संस्थापक।
रावल जैत्रसिंह (1213-1252 ई.): मध्यकालीन मेवाड़ का स्वर्णिम काल; इल्तुतमिश को हराया।
रावल रतन सिंह (1302-1303 ई.): चित्तौड़ का पहला साका (अलाउद्दीन खिलजी के समय)।
राणा हम्मीर (1326-1364 ई.): सिसोदिया शाखा के संस्थापक, चित्तौड़ को पुनः जीता।
राणा लाखा (1382-1421 ई.): जावर में चांदी की खानें निकलीं।
राणा कुंभा (1433-1468 ई.): स्थापत्य कला के जनक (कुम्भलगढ़, विजय स्तंभ)।
महाराणा सांगा (1509-1528 ई.): खानवा का युद्ध (बाबर के विरुद्ध), मेवाड़ अपनी शक्ति के चरम पर था।
महाराणा उदय सिंह (1537-1572 ई.): उदयपुर की स्थापना (1559), अकबर के चित्तौड़ आक्रमण (1567) के समय शासक।
महाराणा प्रताप (1572-1597 ई.): हल्दीघाटी युद्ध (1576), स्वतंत्रता के लिए संघर्ष।
महाराणा अमर सिंह-I (1597-1620 ई.): मुगलों (जहांगीर) से संधि।
महाराणा राजसिंह (1652-1680 ई.): औरंगजेब के विरुद्ध, राजसमंद झील का निर्माण।
बप्पा रावल (734 ई. - ?): मेवाड़ में गुहिल वंश के वास्तविक संस्थापक।
रावल जैत्रसिंह (1213-1252 ई.): मध्यकालीन मेवाड़ का स्वर्णिम काल; इल्तुतमिश को हराया।
रावल रतन सिंह (1302-1303 ई.): चित्तौड़ का पहला साका (अलाउद्दीन खिलजी के समय)।
राणा हम्मीर (1326-1364 ई.): सिसोदिया शाखा के संस्थापक, चित्तौड़ को पुनः जीता।
राणा लाखा (1382-1421 ई.): जावर में चांदी की खानें निकलीं।
राणा कुंभा (1433-1468 ई.): स्थापत्य कला के जनक (कुम्भलगढ़, विजय स्तंभ)।
महाराणा सांगा (1509-1528 ई.): खानवा का युद्ध (बाबर के विरुद्ध), मेवाड़ अपनी शक्ति के चरम पर था।
महाराणा उदय सिंह (1537-1572 ई.): उदयपुर की स्थापना (1559), अकबर के चित्तौड़ आक्रमण (1567) के समय शासक।
महाराणा प्रताप (1572-1597 ई.): हल्दीघाटी युद्ध (1576), स्वतंत्रता के लिए संघर्ष।
महाराणा अमर सिंह-I (1597-1620 ई.): मुगलों (जहांगीर) से संधि।
महाराणा राजसिंह (1652-1680 ई.): औरंगजेब के विरुद्ध, राजसमंद झील का निर्माण।
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