🙏 दर्द और माफ़ी की कड़वी सच्चाई🙏
द्रौपदी अपने अपमान के बाद पूरी सभा को श्राप देना चाहती थीं,
लेकिन गांधारी ने उन्हें क्षमा करने के लिए समझाया।
लेकिन वर्षों बाद, जब गांधारी ने अपने पुत्रों को खोया, तो उनका दुःख क्रोध में बदल गया और उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण को ही श्राप दे दिया।
इसका तात्पर्य
यही है कि जब दर्द दूसरों को होता है, तब हम उन्हें क्षमा करने की सीख देते हैं;
लेकिन जब वही दर्द हमारे अपने जीवन में आता है, तो हमारे सारे सिद्धांत और नियम बदल जाते हैं।
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“सृष्टि” कितनी भी बदल जाये...
फिर भी हम सुखी नहीं हो सकते,
पर
“दृष्टि” ज़रा-सी बदल जाये,
तो हम सुखी हो सकते हैं!🙏 🌹
इसका भावार्थ है कि जीवन में सुख केवल परिस्थितियों के बदलने से नहीं,
बल्कि हमारे सोचने और देखने के नज़रिये में बदलाव आने से भी मिलता है।
फिर भी हम सुखी नहीं हो सकते,
पर
“दृष्टि” ज़रा-सी बदल जाये,
तो हम सुखी हो सकते हैं!
इसका भावार्थ है कि जीवन में सुख केवल परिस्थितियों के बदलने से नहीं,
बल्कि हमारे सोचने और देखने के नज़रिये में बदलाव आने से भी मिलता है।
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किसी दूसरे की बुराई करेंगे,
तो याद रखिए
कि लोग आपकी बुराई भी करेंगे।
क्योंकि दुनिया में इज़्ज़त उसी की होती है,
जो दूसरों का सम्मान करना जानता है।
अच्छाई बाँटिए; नफ़रत नहीं,
प्रेम फैलाइए।
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