Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️ (A B)
ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️
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1920 में कांग्रेस के नागपुर अधिवेशन के अध्यक्ष विजयराघवचारियार 📖✍️
1882 में विजयराघवचारियार द्वारा सलेम में वकालत शुरू करने के कुछ ही समय बाद, शहर में दंगा भड़क उठा। विजयराघवचारियार पर मस्जिद के विध्वंस का कारण बनने वाली हिंसा को भड़काने का आरोप लगाया गया और उन्हें दस साल की जेल की सजा सुनाई गई। उन्होंने अदालत में आरोपों का मुकाबला किया और अंततः अपनी निर्दोषता साबित की। इसके बाद, अपनी वकालत की कुशलता के बल पर उन्होंने लॉर्ड रिपन से दंगों के लिए सजा पाए अन्य लोगों को अंडमान सेलुलर जेल से रिहा कराने की सफलतापूर्वक पैरवी की ।
उन्होंने सलेम नगर परिषद की सदस्यता से अयोग्य घोषित किए जाने पर आपत्ति जताई, जिसके वे दंगे के दौरान सदस्य थे। उनकी अपील के परिणामस्वरूप, उन्हें न केवल नगर परिषद में बहाल किया गया, बल्कि वे भारत के राज्य सचिव से परिषद से हटाए जाने के लिए नाममात्र क्षतिपूर्ति के रूप में 100 रुपये प्राप्त करने में भी सफल रहे। उन्होंने अपने विरुद्ध झूठी गवाही देने वाले गवाहों के खिलाफ भी कार्यवाही की और उन्हें दोषी ठहराया।
1882 के सलेम दंगों ने विजयराघवचारियार को रातोंरात प्रसिद्ध कर दिया। इस दंगे के मामले को भारतीय राष्ट्रीय मीडिया में खूब प्रचारित किया गया और अखबारों ने उन्हें नागरिक स्वतंत्रता के महान रक्षक के रूप में सराहा। इस प्रकार उन्हें "दक्षिण भारत का शेर" और "सलेम का नायक" कहा जाने लगा ।
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1882 में विजयराघवचारियार द्वारा सलेम में वकालत शुरू करने के कुछ ही समय बाद, शहर में दंगा भड़क उठा। विजयराघवचारियार पर मस्जिद के विध्वंस का कारण बनने वाली हिंसा को भड़काने का आरोप लगाया गया और उन्हें दस साल की जेल की सजा सुनाई गई। उन्होंने अदालत में आरोपों का मुकाबला किया और अंततः अपनी निर्दोषता साबित की। इसके बाद, अपनी वकालत की कुशलता के बल पर उन्होंने लॉर्ड रिपन से दंगों के लिए सजा पाए अन्य लोगों को अंडमान सेलुलर जेल से रिहा कराने की सफलतापूर्वक पैरवी की ।
उन्होंने सलेम नगर परिषद की सदस्यता से अयोग्य घोषित किए जाने पर आपत्ति जताई, जिसके वे दंगे के दौरान सदस्य थे। उनकी अपील के परिणामस्वरूप, उन्हें न केवल नगर परिषद में बहाल किया गया, बल्कि वे भारत के राज्य सचिव से परिषद से हटाए जाने के लिए नाममात्र क्षतिपूर्ति के रूप में 100 रुपये प्राप्त करने में भी सफल रहे। उन्होंने अपने विरुद्ध झूठी गवाही देने वाले गवाहों के खिलाफ भी कार्यवाही की और उन्हें दोषी ठहराया।
1882 के सलेम दंगों ने विजयराघवचारियार को रातोंरात प्रसिद्ध कर दिया। इस दंगे के मामले को भारतीय राष्ट्रीय मीडिया में खूब प्रचारित किया गया और अखबारों ने उन्हें नागरिक स्वतंत्रता के महान रक्षक के रूप में सराहा। इस प्रकार उन्हें "दक्षिण भारत का शेर" और "सलेम का नायक" कहा जाने लगा ।
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Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️ (A B)
भारतीय इतिहास ( आरम्भ से आजादी तक )
भारत का इतिहास (rpsc स्कूल व्याख्याता)
– पप्पू सिंह प्रजापत
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Forwarded from Gurukul History Education (History PYQs)
1855 के संथाल विद्रोह के संदर्भ में दो अत्यंत महत्वपूर्ण गैर-सरकारी प्राथमिक ऐतिहासिक स्रोत कौन-से हैं?
(A) आनंदमठ और नील दर्पण
(B) पटना के वकील दिंबर चक्रवर्ती का वृत्तांत और 'छोटेरे दसमनजी कथा'
(C) जेम्स मिल का इतिहास और हंटर की रिपोर्ट
(D) सियार-उल-मुताखिरीन और तारीख़-ए-बंगाल
उत्तर: (B) पटना के वकील दिंबर चक्रवर्ती का वृत्तांत और 'छोटेरे दसमनजी कथा'
संथाल विद्रोह के दो सबसे प्रामाणिक स्थानीय स्रोत पटना के वकील दिगंबर चक्रवर्ती और 'छोटेरे दसमनजी कथा' (Chhotre Desmanjhi Katha) के वृत्तांत हैं।
(A) आनंदमठ और नील दर्पण
(B) पटना के वकील दिंबर चक्रवर्ती का वृत्तांत और 'छोटेरे दसमनजी कथा'
(C) जेम्स मिल का इतिहास और हंटर की रिपोर्ट
(D) सियार-उल-मुताखिरीन और तारीख़-ए-बंगाल
उत्तर: (B) पटना के वकील दिंबर चक्रवर्ती का वृत्तांत और 'छोटेरे दसमनजी कथा'
संथाल विद्रोह के दो सबसे प्रामाणिक स्थानीय स्रोत पटना के वकील दिगंबर चक्रवर्ती और 'छोटेरे दसमनजी कथा' (Chhotre Desmanjhi Katha) के वृत्तांत हैं।
Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️ (A B)
सिकंदर को सबसे पहले एक गणराज्य के प्रधान के विरोध का सामना करना पड़ा जिसे यूनानी ऐसटीज कहते है। संस्कृत में जिसका नाम हस्तिन है 📖✍️
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Forwarded from ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️ (A B)
सिकंदर ने भारत के नए जीते प्रदेशों को शासन की दृष्टि से छः भागो में विभक्त किया था, छः भागो के लिए छः क्षत्रप 📖✍️
323 ई.पू. – सिकंदर की मृत्यु (बेबीलोन)
323 ई.पू. – बेबीलोन का विभाजन
321 ई.पू. – ट्रिपाराडीसस की संधि
322–321 ई.पू. – चंद्रगुप्त मौर्य का राज्यारोहण
317–315 ई.पू. – यूनानी अधिकारियों का भारत से हटना
312 ई.पू. – सेल्युकस का बेबीलोन पर अधिकार
305–304 ई.पू. – सेल्युकस का भारत अभियान
303 ई.पू. – चंद्रगुप्त–सेल्युकस संधि
जिस प्रकार परीक्षा में कुछ भी प्रश्न बन जा रहे है अब ऐसी चीजों को भी थोड़ा ध्यान में रखे, की सिकंदर द्वारा नियुक्त छः क्षत्रप कौन थे और कहां नियुक्त हुए 📖✍️
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323 ई.पू. – सिकंदर की मृत्यु (बेबीलोन)
323 ई.पू. – बेबीलोन का विभाजन
321 ई.पू. – ट्रिपाराडीसस की संधि
322–321 ई.पू. – चंद्रगुप्त मौर्य का राज्यारोहण
317–315 ई.पू. – यूनानी अधिकारियों का भारत से हटना
312 ई.पू. – सेल्युकस का बेबीलोन पर अधिकार
305–304 ई.पू. – सेल्युकस का भारत अभियान
303 ई.पू. – चंद्रगुप्त–सेल्युकस संधि
जिस प्रकार परीक्षा में कुछ भी प्रश्न बन जा रहे है अब ऐसी चीजों को भी थोड़ा ध्यान में रखे, की सिकंदर द्वारा नियुक्त छः क्षत्रप कौन थे और कहां नियुक्त हुए 📖✍️
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