Forwarded from इतिहास वाणी With अभिषेक यदुवंशी || UGC NET JRF History (🚩꧁༺अभिषेक यदुवंशी༻꧂🚩)
💐ऋग्वेद संहिता के अनुसार 💐
ऋग्वेद संहिता के दसवें मण्डल (10th) पुरुषसेक्त में पहली बार यह उल्लेख किया गया कि ब्राह्मण ,राजन्य ,वैश्य और शुद्र ये चार सामाजिक वर्ग हैं। इस सूक्त में वर्ण शब्द का कहीं प्रयोग नहीं किया गया। सामान्य तौर पर ये चार सामाजिक श्रेणियों को परिभाषित करता था। जिनकी उत्पत्ति पुरुष के एक महान यज्ञ में आहुति दिए जाने के क्रम में हुई। पुरुष का शरीर चार वर्षों में विभाजित होना, दसरे शब्दों में यह निर्दिष्ट करता है कि सैद्धांतिक दृष्टि से एक ही संपूर्णता के ये अलग-अलग अवयव थे। इस व्यवस्था में ब्राह्मण सबसे ऊपर और शुद्र सबसे नीचे अवस्थित थे। दूसरी बात यह है कि वर्षों की उत्पत्ति, धरती, आकाश, सूर्य, चन्द्रमा जैसे प्राकृतिक तत्वों के साथ हुई, वह यह सिद्ध करने का प्रयास था कि यह एक स्वाभाविक और पारलौकिक प्रक्रिया का ही एक अंग है न कि कृत्रिम। जैसा कि ब्रायन. के. स्मिथ (1994) ने बतलाया है कि वर्ण व्यवस्था केवल सामाजिक वर्गीकरण के लिए नहीं बल्कि ईश्वर अथवा प्राकृतिक संसार के विभाजन से भी जोड़ दी गयी।💐💐💐💐
Source - उपिंदर सिंह
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प्रश्न - इतिहास वर्तमान और अतीत के बीच होने वाला अंतहीन संवाद है या युक्ति किसकी हैं?
UGC NET 2016
उत्तर - ई. एच. कार
व्याख्या - एडवर्ड हैलेट कार ने अपनी पुस्तक What is History में दर्शन के विभिन्न सिद्धान्तों को प्रस्तुत किया हैं। इसी में उन्होंने माना है कि इतिहास वर्तमान और अतीत के बीच होने वाला अंतहीन संवाद हैं।[History is an endless dialogue between the present and the past.]
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💐✍️@itihasvaani200 💐
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___अभिषेकयदुवंशी ✍️
UGC NET 2016
उत्तर - ई. एच. कार
व्याख्या - एडवर्ड हैलेट कार ने अपनी पुस्तक What is History में दर्शन के विभिन्न सिद्धान्तों को प्रस्तुत किया हैं। इसी में उन्होंने माना है कि इतिहास वर्तमान और अतीत के बीच होने वाला अंतहीन संवाद हैं।[History is an endless dialogue between the present and the past.]
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