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लिटिल रिपब्लिक
लिटिल रिपब्लिक' (Little Republic) या "लघु गणराज्य" 19वीं सदी के ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा भारतीय गांवों को दी गई एक संज्ञा है। उनका मानना था कि भारतीय गाँव आत्मनिर्भर, स्वशासी और बाहरी दुनिया से स्वतंत्र थे, जहाँ पंचायतें या बुजुर्गों की परिषदें मिलकर शासन करती थीं। इस अवधारणा को मुख्य रूप से चार्ल्स मेटकाफ ने प्रचारित किया था।
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मेवाड़ की राजधानियों का क्रम -
🔸नागदा - बप्पा रावल
🔸आहड़-अलट
🔸चितौड़-जैत्रसिंह
🔸उदयपुर-उदय सिंह
🔸गोगुंदा-उदय सिंह
🔸कुंभलगढ़-राणा प्रताप
🔸चावंड -राणा प्रताप
🔸चितौड़गढ़- अमर सिंह
🔸उदयपुर-भीम सिंह
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भास की रचनाएं
🔸भास ने कुल 13 नाटक लिखे।🔸
1. स्वप्नवासवदत्ता
2. उरुभंग
3. प्रतिमा
4. अभिषेक
5. प्रतिज्ञायौगंधरायण
6. दरिद्र चारूदत्त
7. अविमारक
8. बाल चरित
9. पंचरात्र
10. दूतवाक्य
11. मध्यमाव्यायोग
12. दूतघटोत्कच
13. कर्णभार
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चीनी और तिब्बती लेखक
🔸 सुमाचीन --
प्रथम शताब्दी ई. पू. ,
पहला चीनी लेखक जिन्होंने भारत विषयक लिखा जो कि कभी भारत नहीं आया।
🔹 फाह्यान --
399 से 414 ई. के मध्य भारत यात्रा की।
पुस्तक : फो - क्यो - की ( बौद्ध देशों का वृत्तांत )
🔸 सुंगयूंन --
518 ई .के आसपास भारतयात्रा की।
🔹 ह्वेनसांग --
629 से 645 ई. के मध्य भारतयात्रा की।
पुस्तक : सी - यू - की ( पश्चिमी विश्व की यात्रा )
🔸 वांगशवांस --
643 से 658 ई. के मध्य तीन बार भारत यात्रा की।
पुस्तक : जिंग तियांजहगुओ जिंग जो ( मध्य भारत की यात्राओं का उल्लेख )
🔹 हुईचाओ --
727 ई. में भारतयात्रा की।
🔸 धर्मस्वामी --
यह तिब्बत के बौद्ध साधु थे।
13 शताब्दी में भारतयात्रा की।
1234 से 1236 ई. में नालन्दा विश्वविद्यालय में अध्ययन किया।
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लिटिल रिपब्लिक
लिटिल रिपब्लिक' (Little Republic) या "लघु गणराज्य" 19वीं सदी के ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा भारतीय गांवों को दी गई एक संज्ञा है। उनका मानना था कि भारतीय गाँव आत्मनिर्भर, स्वशासी और बाहरी दुनिया से स्वतंत्र थे, जहाँ पंचायतें या बुजुर्गों की परिषदें मिलकर शासन करती थीं। इस अवधारणा को मुख्य रूप से चार्ल्स मेटकाफ ने प्रचारित किया था।
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जयसिंह प्रथम (मिर्जा राजा जयसिंह)के प्रमुख अभियान...
अहमद नगर अभियान.....1623 ई.
उज़्बेक विद्रोह का दमन....1629 ई.
गोलकुंडा और बीजापुर घेरा.... 1636ई.
कंधार अभियान.......1651 ई.
मिर्ज़ा राजा जयसिंह ने 14 अप्रैल 1665 (2 माह) तक ब्रजगढ़, माँची, पुरन्दर पर घेराव के बाद शिवाजी ने संधि का प्रस्ताव भेजा था.....
11 जून 1665 को पुरंदर की संधि आखिरकार सम्पन्न होती है.....
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अहमद नगर अभियान.....1623 ई.
उज़्बेक विद्रोह का दमन....1629 ई.
गोलकुंडा और बीजापुर घेरा.... 1636ई.
कंधार अभियान.......1651 ई.
मिर्ज़ा राजा जयसिंह ने 14 अप्रैल 1665 (2 माह) तक ब्रजगढ़, माँची, पुरन्दर पर घेराव के बाद शिवाजी ने संधि का प्रस्ताव भेजा था.....
11 जून 1665 को पुरंदर की संधि आखिरकार सम्पन्न होती है.....
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जेन्टलमेन एग्रीमेन्ट'- 17 सितम्बर 1942 में हीरालाल शास्त्री
(प्रजामण्डल का अध्यक्ष) तथा मिर्जा इस्माइल (जयपुर के प्रधानमंत्री) ने मिलकर आधुनिक जयपुर का निर्माण किया।
• इस समझौते के कारण जयपुर प्रजामण्डल ने भारत छोड़ो आन्दोलन में भाग नहीं लिया।
• आजाद मोर्चा- जेन्टलमेन एग्रीमेन्ट से असन्तुष्ट कार्यकर्त्ताओं ने बाबा हरिशचन्द के नेतृत्व में आजाद मोर्चा का गठन किया तथा भारत छोड़ो आन्दोलन में भाग लिया।
• आजाद मोर्चा के अन्य सदस्य- रामकरण जोशी, दोलतमल भण्डारी तथा गुलाब चन्द कासली वाल आदि थे।
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(प्रजामण्डल का अध्यक्ष) तथा मिर्जा इस्माइल (जयपुर के प्रधानमंत्री) ने मिलकर आधुनिक जयपुर का निर्माण किया।
• इस समझौते के कारण जयपुर प्रजामण्डल ने भारत छोड़ो आन्दोलन में भाग नहीं लिया।
• आजाद मोर्चा- जेन्टलमेन एग्रीमेन्ट से असन्तुष्ट कार्यकर्त्ताओं ने बाबा हरिशचन्द के नेतृत्व में आजाद मोर्चा का गठन किया तथा भारत छोड़ो आन्दोलन में भाग लिया।
• आजाद मोर्चा के अन्य सदस्य- रामकरण जोशी, दोलतमल भण्डारी तथा गुलाब चन्द कासली वाल आदि थे।
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जेन्टलमेन एग्रीमेन्ट'- 17 सितम्बर 1942 में हीरालाल शास्त्री
(प्रजामण्डल का अध्यक्ष) तथा मिर्जा इस्माइल (जयपुर के प्रधानमंत्री) ने मिलकर आधुनिक जयपुर का निर्माण किया।
• इस समझौते के कारण जयपुर प्रजामण्डल ने भारत छोड़ो आन्दोलन में भाग नहीं लिया।
• आजाद मोर्चा- जेन्टलमेन एग्रीमेन्ट से असन्तुष्ट कार्यकर्त्ताओं ने बाबा हरिशचन्द के नेतृत्व में आजाद मोर्चा का गठन किया तथा भारत छोड़ो आन्दोलन में भाग लिया।
• आजाद मोर्चा के अन्य सदस्य- रामकरण जोशी, दोलतमल भण्डारी तथा गुलाब चन्द कासली वाल आदि थे।
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(प्रजामण्डल का अध्यक्ष) तथा मिर्जा इस्माइल (जयपुर के प्रधानमंत्री) ने मिलकर आधुनिक जयपुर का निर्माण किया।
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• आजाद मोर्चा- जेन्टलमेन एग्रीमेन्ट से असन्तुष्ट कार्यकर्त्ताओं ने बाबा हरिशचन्द के नेतृत्व में आजाद मोर्चा का गठन किया तथा भारत छोड़ो आन्दोलन में भाग लिया।
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चीनी और तिब्बती लेखक
🔸 सुमाचीन --
प्रथम शताब्दी ई. पू. ,
पहला चीनी लेखक जिन्होंने भारत विषयक लिखा जो कि कभी भारत नहीं आया।
🔹 फाह्यान --
399 से 414 ई. के मध्य भारत यात्रा की।
पुस्तक : फो - क्यो - की ( बौद्ध देशों का वृत्तांत )
🔸 सुंगयूंन --
518 ई .के आसपास भारतयात्रा की।
🔹 ह्वेनसांग --
629 से 645 ई. के मध्य भारतयात्रा की।
पुस्तक : सी - यू - की ( पश्चिमी विश्व की यात्रा )
🔸 वांगशवांस --
643 से 658 ई. के मध्य तीन बार भारत यात्रा की।
पुस्तक : जिंग तियांजहगुओ जिंग जो ( मध्य भारत की यात्राओं का उल्लेख )
🔹 हुईचाओ --
727 ई. में भारतयात्रा की।
🔸 धर्मस्वामी --
यह तिब्बत के बौद्ध साधु थे।
13 शताब्दी में भारतयात्रा की।
1234 से 1236 ई. में नालन्दा विश्वविद्यालय में अध्ययन किया।
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हर्षवर्धन से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण तथ्य
1) हर्ष के जन्म के समय उसके चक्रवर्ती सम्राट बनने की भविष्यवाणी की थी - ज्योतिषी तारक ने
2) हर्ष को उसके पिता प्रभाकर वर्धन के गंभीर रूप से बीमार होने की सूचना दी - कुरंगक
3) मालवा के शासक देवगुप्त द्वारा राज्यश्री के पति ग्रहवर्मा की हत्या तथा राज्यश्री को कन्नौज के कारागार में बंदी बनाने की सूचना राज्यवर्धन के दरबार में दी- संवादक ने
4) हर्ष को थानेश्वर की राजसभा में गौड़ नरेश शशांक द्वारा राज्यवर्धन द्वितीय की हत्या का समाचार दिया - कुन्तल ने
5) किसके आग्रह पर 606 ई.में हर्षवर्धन थानेश्वर की गद्दी पर बैठा - सेनापति सिंहनाद के
6) कामरूप के राजा भास्करवर्मा का मैत्री प्रस्ताव लेकर हर्ष के दरबार में आया - हंसबेग नामक दूत
7) हर्ष को राज्यवर्धन द्वितीय के मारे जाने की सूचना दी - भण्डि
8) हर्ष ने अपनी बहन राज्यश्री का पता लगाया - दिवाकर मित्र की सहायता से
9) किसके नेतृत्व में कन्नौज के राजनीतिज्ञों ने हर्ष को कन्नौज का राज्य भार ग्रहण करने के लिए आमंत्रित किया - बोनि (पोनि)
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राजतरंगिणी
लेखक - कल्हण
8 अध्याय , 7826 श्लोक
शाब्दिक अर्थ - राजाओं की नदी
बिरुद - भारत के प्रथम इतिहासकार
राजतरंगिणी की रचना कश्मीर के शासक जयसिंह के समय ( 1148 - 49 ई. ) में हुई।
महाभारत शैली में लिखा गया हैं।
राजतरंगिणी का विस्तार
द्वितीय राजतरंगिणी 1459 तक जौनराज
तृतीय राजतरंगिणी 1480 तक श्रीवर
चतुर्थ राजतरंगिणी 1596 तक प्रज्ञाभट्ट और सूका
राजतरंगिणी में 64 उपजातियों का उल्लेख, सतीप्रथा का उल्लेख
कश्मीर के इतिहास के क्रमशः चार वंशों -- गोनन्द, कार्कोट , उत्पल, लोहार का वर्णन।
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भास की रचनाएं
🔸भास ने कुल 13 नाटक लिखे।🔸
1. स्वप्नवासवदत्ता
2. उरुभंग
3. प्रतिमा
4. अभिषेक
5. प्रतिज्ञायौगंधरायण
6. दरिद्र चारूदत्त
7. अविमारक
8. बाल चरित
9. पंचरात्र
10. दूतवाक्य
11. मध्यमाव्यायोग
12. दूतघटोत्कच
13. कर्णभार
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मेवाड़ की राजधानियों का क्रम -
🔸नागदा - बप्पा रावल
🔸आहड़-अलट
🔸चितौड़-जैत्रसिंह
🔸उदयपुर-उदय सिंह
🔸गोगुंदा-उदय सिंह
🔸कुंभलगढ़-राणा प्रताप
🔸आवरगढ़ - महाराणा प्रताप
🔸चावंड -राणा प्रताप
🔸चितौड़गढ़- अमर सिंह
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